तू मिले दिल खिले २-क्रिमिनल १९९५
आपको फीमेल वर्ज़न भी सुनवा देते हैं, आखिर को अधूरे आनंद
से वंचित क्यूँ रहा जाए.
इसे अलका याग्निक से गवाया गया है. गीत इन्दीवर का है और
इसका क्रीमी संगीत तैयार किया है एम एम् क्रीम ने. सन १९९५
में पैदा हुआ ये गीत आज भी सुहाना लगता है. ९५ को गुज़रे भी
जनाब २१ साल बीत गए हैं. ९ साल बाद इसे क्लासिक कहा जाने
लगेगा. सन १९९५ के सारे गीत श्रवणीय हों ऐसा नहीं है. कुछ ही
स्पेशल हैं. इन गीतों की रिपीट वैल्यू ठीक ठाक है.
ऐसा लगता है गीत की ‘आ हा’ की ध्वनियाँ किसी और गायिका की
आवाज़ में है.
गीत के बोल:
तू मिले दिल खिले और जीने को क्या चाहिए
ना हो तू उदास तेरे पास पास मैं रहूँगी ज़िन्दगी भर
सारे संसार का प्यार मैंने तुझी में पाया
तू मिले दिल खिले और जीने को क्या चाहिए
गम है किसे हो सारा जहाँ चाहे दुश्मन हो
क्या चाहिए हाथों में जो तेरा दामन हो
तू है जहाँ मंजिल वहाँ तू है जहाँ मंजिल वहाँ
धडकनों की तरह अपने दिल में मुझको छुपा लो
तू मिले दिल खिले और जीने को क्या चाहिए
प्यार कभी हो मरता नहीं हम तुम मरते हैं
होते हैं वो हो लोग अमर प्यार जो करते हैं
जितनी अदा उतनी वफ़ा जितनी अदा उतनी वफ़ा
इक नज़र प्यार से देख लो फिर से ज़िंदा कर दो
तू मिले दिल खिले और जीने को क्या चाहिए
ना हो तू उदास तेरे पास पास मैं रहूँगी ज़िन्दगी भर
सारे संसार का प्यार मैंने तुझी में पाया
तू मिले दिल खिले और जीने को क्या चाहिए
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Too mile(female)-Criminal 1995
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