चलत मुसाफिर मोह लिया रे-तीसरी कसम १९६६
आ जाता है तो वो फ़िल्मी लोक गीत भी कहलाया जाने लगता
है. गीत में खुशबू उसी जगह की है जिस जगह के शैलेन्द्र हैं. वो
इलाका कहलाता है भोजपुर.
फिल्म का सबसे तेज गति आला गीत भी यही है. धुन में कसावट
है, सुनते समय पता ही नहीं चलता और गीत समाप्त हो जाता है.
गीत फिल्म का नायक नहीं गा रहा है इसलिए इसे दूसरे गायक
मन्ना डे से गवाया गया है. एक वजह और भी है, गति के साथ
इसमें उतार चढ़ाव भी बहुत हैं.
गीत के बोल:
चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
उड़ उड़ बैठी हलवईया दुकनिया
उड़ उड़ बैठी हलवईया दुकनिया
उड़ उड़ बैठी हलवईया दुकनिया आ रे
बर्फी के सब रस ले लिया रे
बर्फी के सब रस ले लिया रे
बर्फी के सब रस ले लिया रे
उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया
उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया
आ हा उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया
आ हे कपड़ा के सब रस ले लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
कपड़ा के सब रस ले लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
जियो जियो पलकदास जियो
उड़ उड़ बैठी पनवड़िया दुकनिया
उड़ उड़ बैठी पनवड़िया दुकनिया
उड़ उड़ बैठी पनवड़िया दुकनिया
आ हे बीड़ा के सब रस ले लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
बीड़ा के सब रस ले लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
बीड़ा के सब रस ले लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
हाँ चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
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Chalat musafir moh liya re-Teesri kasam 1966
Artists: Raj Kapoor,
