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Jan 29, 2017

चलत मुसाफिर मोह लिया रे-तीसरी कसम १९६६

सुनते हैं फिल्म तीसरी कसम से एक लोक गीत. फिल्मों में गीत
आ जाता है तो वो फ़िल्मी लोक गीत भी कहलाया जाने लगता
है. गीत में खुशबू उसी जगह की है जिस जगह के शैलेन्द्र हैं. वो
इलाका कहलाता है भोजपुर.

फिल्म का सबसे तेज गति आला गीत भी यही है. धुन में कसावट
है, सुनते समय पता ही नहीं चलता और गीत समाप्त हो जाता है.
गीत फिल्म का नायक नहीं गा रहा है इसलिए इसे दूसरे गायक
मन्ना डे से गवाया गया है. एक वजह और भी है, गति के साथ
इसमें उतार चढ़ाव भी बहुत हैं.





गीत के बोल:

चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया

उड़ उड़ बैठी हलवईया दुकनिया
उड़ उड़ बैठी हलवईया दुकनिया
उड़ उड़ बैठी हलवईया दुकनिया आ रे
बर्फी के सब रस ले लिया रे
बर्फी के सब रस ले लिया रे
बर्फी के सब रस ले लिया रे

उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया
उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया
आ हा उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया
आ हे कपड़ा के सब रस ले लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
कपड़ा के सब रस ले लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया

जियो जियो पलकदास जियो

उड़ उड़ बैठी पनवड़िया दुकनिया
उड़ उड़ बैठी पनवड़िया दुकनिया
उड़ उड़ बैठी पनवड़िया दुकनिया
आ हे बीड़ा के सब रस ले लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
बीड़ा के सब रस ले लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
बीड़ा के सब रस ले लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया

हाँ चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
चलत मुसाफिर मोह लिया रे
पिंजरे वाली मुनिया
…………………………………………..
Chalat musafir moh liya re-Teesri kasam 1966

Artists: Raj Kapoor,

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Jan 18, 2017

सजनवा बैरी हो गए-तीसरी कसम १९६६

श्वेत श्याम युग का ये सबसे लोकप्रिय बैरी शब्द वाला गीत
है. रंगीन युग में ये श्रेय भंसाली की देवदास के बैरी पिया
को प्राप्त हैं. तीसरी कसम के गीत के पहले भी एक गीत
ने बैरी शब्द के साथ झंडे गाडे थे-सुन बैरी बालम सच
बोल रे-बावरे नैन वाला राजकुमारी दुबे का गाया हुआ. उस
गीत में गीता बाली गा रही हैं और राज कपूर सुन रहे हैं.
इस गीत में सुनने का काम नायिका कर रही है.

ये बैरी वाले गीत सुन कर बैरी रिचर्ड्स और बैरिस्टर याद
आ जाते हैं. बैरी नाम से ओबामा के जीवन पर एक फिल्म
भी बनी है २०१६ में जिसे विक्रम गाँधी ने निर्देशित किया.
इसमें ओबामा के कोलम्बिया विश्वविद्यालय में बिताए समय
के ऊपर प्रकाश डाला गया है.

गीत सुनते हैं जिसे शैलेन्द्र ने लिखा है और जिसे राज कपूर
परदे पर गा रहे हैं. करम और भाग की बात मुखड़े में ही
हो गई है.



गीत के बोल:

सजनवा बैरी हो गये हमार
सजनवा बैरी हो गये हमार
चिठिया हो तो हर कोई बांचे
चिठिया हो तो हर कोई बांचे
भाग न बांचे कोय
करमवा बैरी हो गये हमार

जाये बसे परदेस सजनवा सौतन के भरमाये
जाये बसे परदेस सजनवा सौतन के भरमाये
न संदेस न कोई खबरिया रुत आये रुत जाये
डूब गये हम बीच भंवर में
डूब गये हम बीच भंवर में कर के सोलह पार

सजनवा बैरी हो गये हमार

सूनी सेज गोद मोरी सूनी मरम ना जाने कोय
सूनी सेज गोद मोरी सूनी मरम ना जाने कोय
छटपट तड़पे प्रीत बिचारी ममता आँसू रोये
ना कोई इस पार हमारा
ना कोई इस पार हमारा ना कोई उस पार

सजनवा बैरी हो गये हमार
चिठिया हो तो हर कोई बांचे
भाग न बांचे कोय
करमवा बैरी हो गये हमार
सजनवा बैरी हो गये हमार
..................................................................
Sajanwa bairi ho gaye hamaar-Teesri kasam 1966

Artist: Raj Kapoor, Waheeda Rehman

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Jul 27, 2016

आ आ भी जा-तीसरी कसम १९६६

इस गीत के शुरुआती बोल शैलेन्द्र ने फिल्म मधुमती
के एक गीत में भी डाले थे-मुबारक बेगम के गाये गीत
में.

रहेगा इश्क तेरा ख़ाक में मिला के मुझे
हुए हैं इब्तदा में रंज इन्तेहा के मुझे

क्या मालूम था ये फिल्म शैलेन्द्र के जीवन का सबसे बड़ा
दुःख बन जायेगी. जैसे बोल हैं इस गीत के उससे ऐसा
मालूम पढता है कि नियति अपना संकेत दे रही थी समय
से पहले. इस गीत का ही एक अन्तरा है.

सितारों ने मुंह फेर कर
कहा अलविदा हमसफ़र
चला कारवां अब चला

कहते हैं बहाने बनते हैं किसी घटना के घटित होने के समय.
अंतर केवल बहानों के प्रकार पर पढ़ जाता है. शैलेन्द्र को ना
तो दोस्ती रास आई ना ही रिश्तेदारी. इस फिल्म के निर्माण
के समय हुए अनुभवों ने उन्हें इस नश्वर संसार में दिलचस्पी
लगभग खत्म कर दी. हिंदी फिल्म सिने़मा इतिहास ऐसी कई
दुखद और क्रूर कहानियों को समेटे हुए है जिनको देख/पढ़
और समझ कर आत्मा काँप उठती है.

गीत वहीदा रहमान पर फिल्माया गया है जिसे लता मंगेशकर
ने गाया शंकर जयकिशन के संगीत निर्देशन में.




गीत के बोल:

आ आ भी जा
रात ढलने लगी चाँद छुपने चल
आ आ भी जा
रात ढलने लगी हो ओ ओ ओ
चाँद छुपने चल 
हो ओ ओ आ आ भी जा

तेरी याद में बेखबर
शमा की तरह रात भर
तेरी याद में बेखबर
शमा की तरह रात भर
जली आरज़ू दिल जला
आ आ भी जा
रात ढलने लगी चाँद छुपने चला
आ आ भी जा
रात ढलने लगी चाँद छुपने चला
हो ओ ओ आ आ भी जा

सितारों ने मुंह फेर कर
कहा अलविदा हमसफ़र
चला कारवां अब चला
आ आ भी जा
रात ढलने लगी हो ओ ओ ओ
चाँद छुपने चला
आ आ भी जा
रात ढलने लगी चाँद छुपने चला
हो ओ ओ आ आ भी जा

उफक पर खड़ी है सहर
अँधेरा है दिल में इधर
उफक पर खड़ी है सहर
हो अँधेरा है दिल में इधर
वही रोज का सिलसिला
आ आ भी जा
रात ढलने लगी चाँद छुपने चला
आ आ भी जा
रात ढलने लगी हो ओ ओ ओ
चाँद छुपने चला
हो ओ ओ आ आ भी जा
..........................................................
Aa aa aa bhi ja-Teesri Kasam 1966

Artist: Waheeda Rehman

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Nov 8, 2010

हाय गज़ब कहीं तारा टूटा-तीसरी कसम १९६६

फिल्म तीसरी कसम की गिनती सर्वकालिक श्रेष्ठ हिंदी फिल्मों
में होती है। इस फिल्म के गीत संगीत रसिकों के लिए अनमोल खज़ाना
है विशेषकर मुकेश और लता के गाये गीत। इस फिल्म में आशा भोंसले के
गाये तीन गीत हैं। केवल एक गीत लोकप्रिय है और बाकी २ अनसुने से हैं।
उन अनसुने गीतों को भी सुन लिया जाए। शैलेन्द्र के बोल हैं और संगीत
शंकर जयकिशन का। गाँव की नौटंकी का माहौल है और उसमे नायिका
वहीदा रहमान नाच रही हैं। दर्शक दीर्घा में नायक राज कपूर बैठे हैं।
इफ़्तेख़ार नाम के कलाकार को भी पहचानिए। ये वही इफ़्तेख़ार
हैं जो अमिताभ वाली डॉन में पुलिस इंस्पेक्टर बने थे।

कहते हैं टूटते तारे को देख के जो माँगा जाए मिल जाता है। इस गीत
में कुछ और ही किस्सा बयां हो रहा है। हर कोई चाहता है एक मुट्ठी
आसमान ..............



गीत के बोल:

हाय गज़ब कहीं तारा टूटा
हाय गज़ब कहीं तारा टूटा
लूटा रे लूटा मेरे सैयां ने लूटा
हाय गज़ब कहीं तारा टूटा
लूटा रे लूटा मेरे सैयां ने लूटा

हाय गज़ब कहीं तारा टूटा

पहला तारा अटरिया पे टूटा
दाँतों तले मैं ने दाबा अंगूठा
दाँतों तले मैं ने दाबा अंगूठा
लूटा रे लूटा सांवरिया ने लूटा

हाय गज़ब कहीं तारा टूटा
लूटा रे लूटा मेरे सैयां ने लूटा
हाय गज़ब कहीं तारा टूटा

दूसरा तारा बज़रिया में टूटा
दूसरा तारा बज़रिया में टूटा
देखा है सबने कि मेला सा छूटा
देखा है सबने कि मेला सा छूटा
लूटा रे लूटा सिपहिया ने लूटा

हाय गज़ब कहीं तारा टूटा
लूटा रे लूटा मेरे सैयां ने लूटा
हाय गज़ब कहीं तारा टूटा

तीसरा तारा फूल बगिया में टूटा
तीसरा तारा फूल बगिया में टूटा

फूलों से पूछे कोई है कौन झूठा
फूलों से पूछे कोई है कौन झूठा
लूटा रे लूटा दरोगा ने लूटा

हाय गज़ब कहीं तारा टूटा
लूटा रे लूटा मेरे सैयां ने लूटा
हाय गज़ब कहीं तारा टूटा

हाय गज़ब कहीं तारा टूटा
लूटा रे लूटा मेरे सैयां ने लूटा
हाय गज़ब कहीं तारा टूटा
........................................................
Haye ghazab kahin tara toota-Teesri kasam 1966

Aerist: Waheeda Rehman

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Nov 14, 2009

सजन रे झूठ मत बोलो -तीसरी कसम १९६६

जादू वो जो सर चढ़ कर बोले। ये गीत अलौकिक गीतों में से एक है।
शैलेन्द्र ने सरल सुलभ भाषा में ज़िन्दगी का फलसफा कह डाला है।
इसकी धुन इससे बढ़िया शायद नहीं बनाई जा सकती थी। गति,
गायकी, संगीत  सब नियंत्रित है। इस गीत को आप तीसरी कसम का
सर्वश्रेष्ठ गीत कह सकते हैं। जरूरी नहीं की दुखद गीत ही सबसे बढ़िया
गीत हो किसी कथानक में। ऐसे गीतों के लिए किसी नामचीन कलाकार
की जरूरत नहीं है परदे पर। किसी पर भी फिल्माया गया हो, ऐसे गीत
अमर हो जाते हैं। मुकेश की आवाज़ में दर्द का स्थायी भाव था इसलिए
उनके गाये हुए रोमांटिक गीतों के अलावा सभी गीतों में आपको गंभीरता
का एहसास होता है।

यूँ कहिये अगर इस गीत को किसी शास्त्रीय संगीत के जानकर गायक
द्वारा गवाया जाता तो वो इसमे छैना मुरकी तो डाल देता मगर इसकी
आत्मा का कचूमर निकाल देता । भले ही राज कपूर के बहाने ये गीत
मुकेश से गवा लिया गया हो मगर कल्पना कीजिये इस गीत को किसी
और आवाज़ में, संभव नहीं है ।


गाने के बोल:

सजन रे झूठ मत बोलो
खुदा के पास जाना है
न हाथी है न घोड़ा है
वहां पैदल ही जाना है

सजन रे झूठ मत बोलो
खुदा के पास जाना है
न हाथी है न घोड़ा है
वहां पैदल ही जाना है

सजन रे झूठ मत बोलो

तुम्हारे महल चौबारे
यहीं रह जायेंगे सारे

तुम्हारे महल चौबारे
यहीं रह जायेंगे सारे

अकड़ किस बात की प्यारे
अकड़ किस बात की प्यारे
ये सर फिर भी झुकाना है


सजन रे झूठ मत बोलो
खुदा के पास जाना है

भला कीजे भला होगा
बुरा कीजे बुरा होगा

भला कीजे भला होगा
बुरा कीजे बुरा होगा

वही लिख लिख के क्या होगा
वही लिख लिख के क्या होगा

यहीं सब कुछ चुकाना है

सजन रे झूठ मत बोलो
खुदा के पास जाना है

लड़कपन खेल में खोया
जवानी नींद भर सोया

लड़कपन खेल में खोया
जवानी नींद भर सोया

बुढापा देख कर रोया
बुढापा देख कर रोया

वही किस्सा पुराना है

सजन रे झूठ मत बोलो
खुदा के पास जाना है
न हाथी है न घोड़ा है
वहां पैदल ही जाना है

सजन रे झूठ मत बोलो
खुदा के पास जाना है
...........................................................................
Sajan re jhooth mat bolo-Teesri kasam 1966

Artists-Raj Kapoor, Waheeda Rehman

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Nov 11, 2009

मारे गए गुलफ़ाम- तीसरी कसम १९६६

कुछ शब्द और नाम ऐसे होते हैं जो किसी ख़ास गाने या वाकये
से जुड़े होते हैं। गुलफ़ाम शब्द सबसे पहले सुना-"गुलफ़ाम को
मिल गई सब्ज़ परी" गाने से । उसके बाद एक गुलफ़ाम नाम का
शख्स भी मिला । हम सोचते थे इन्ही गुलफ़ाम साहब ने फ़िल्म
तीसरी कसम में काम किया है। इस गीत में वहीदा रहमान के
साथ जो किरदार स्टेज पर खड़े हैं उनका हिलना देख के ऐसा लगता
है जैसे किसी खिलौने की घड़ी के कल पुर्जे हों। इस गीत को शैलेन्द्र
ने लिखा है और धुन है शंकर जयकिशन की। गाँव-देहात की नौटंकी
वाला प्रभाव इस गाने में पैदा किया गया है ।




गाने के बोल:

मारे गए गुलफ़ाम
अजी हाँ,मारे गए गुलफ़ाम
मारे गए गुलफ़ाम
अजी हाँ,मारे गए गुलफ़ाम

उल्फत भी रास न आई
अजी हाँ,मारे गए गुलफ़ाम

एक सब्ज़ परी देखी और दिल को गँवा बैठे
मस्ताना निगाहों पर फ़िर होश लुटा बैठे
मस्ताना निगाहों पर फ़िर होश लुटा बैठे
फ़िर होश लुटा बैठे

काहे को मैं मुस्कुरायी
अजी हाँ,मारे गए गुलफ़ाम

मारे गए गुलफ़ाम
अजी हाँ,मारे गए गुलफ़ाम

अब रूह की कटारी से नैनों की दुधारी से
वो हो के रहे ज़ख्मी एक बाद-ऐ-बाहरी से
वो हो के रहे ज़ख्मी एक बाद-ऐ-बाहरी से
एक बाद-ऐ-बाहरी से

ये जुल्फ क्यूँ लहरे
अजी हाँ,मारे गए गुलफ़ाम

मारे गए गुलफ़ाम
अजी हाँ,मारे गए गुलफ़ाम

इस प्यार की महफिल में वो आए मुकाबिल में
वो तीर चले दिल पर, हलचल सी हुई दिल में
वो तीर चले दिल पर, हलचल सी हुई दिल में
हलचल सी हुई दिल में

चाहत की सज़ा पाई
अजी हाँ,मारे गए गुलफ़ाम

मारे गए गुलफ़ाम
अजी हाँ,मारे गए गुलफ़ाम

उल्फत भी रास न आई
अजी हाँ,मारे गए गुलफ़ाम
........................................................
Maare gaye gulfaam-Teesri kasam 1966

Artist: Waheeda Rehman

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Nov 1, 2009

लाली लाली डोलिया में -तीसरी कसम 1966

तीसरी कसम का ये गीत भारतीय संस्कृति का एक शुद्ध हिस्सा है।
नई पीढी को दिखने के लिए कुछ प्रतिनिधि गीतों की तरह। हमारे देश में
विभिन्न अवसरों पर गाये जाने वाले गीतों की जानकारी समय के साथ
गुल होती जा रही है। इधर कहानी ऐसी है कि एक नाचनेवाली को हीरामन
अपनी बैलगाडी में बिठा के ले जा रहा है। पीछे पीछे गाँव के बच्चे गाते हुए
दुल्हनिया की तारीफ़ में गाते जा रहे हैं। इस गीत में दुल्हन को दुआएं भी दी
जा रही हैं। आशा भोंसले और बच्चों का गाया ये गीत अनूठा और कर्णप्रिय
है । इस गीत में आपको शायद बुन्देलखंडी और भोजपुरी दोनों खुशबू आए।

ये गीत सेंट्रल रेलवे के दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर पढने वाले एक स्टेशन
-बीना के आसपास फिल्माया गया था। तीसरी कसम बनाते बनाते गीतकार
शैलेन्द्र को काफ़ी कड़वे अनुभव हुए। उनका जिक्र किसी और गीत की चर्चा
के समय।



गाने के बोल:

लाली लाली डोलिया में लाली रे दुल्हनिया
पिया की प्यारी भोली भाली रे दुल्हनिया
लाली लाली डोलिया में लाली रे दुल्हनिया
मीठे बैन, तीखे नैनों वाली रे दुल्हनिया

लाली लाली डोलिया में लाली रे दुल्हनिया
पिया की प्यारी भोली भाली रे दुल्हनिया

लौटेगी जो गोदी भर हमें न भुलाना
लड्डू पढे लाना अपने हाथों से खिलाना
लौटेगी जो गोदी भर हमें न भुलाना
लड्डू पढे लाना अपने हाथों से खिलाना
तेरी सब रातें हों दिवाली

लाली लाली डोलिया में लाली रे दुल्हनिया
पिया की प्यारी भोली भाली रे दुल्हनिया

दुल्हे राजा रखना जतन से दुल्हन को
कभी न दुखाना तू गोरिया के मॅन को
दुल्हे राजा रखना जतन से दुल्हन को
कभी न दुखाना तू गोरिया के मॅन को
नाज़ुक है, नाजों कि है पाली रे दुल्हनिया

लाली लाली डोलिया में लाली रे दुल्हनिया
पिया की प्यारी भोली भाली रे दुल्हनिया
.........................................................................
Laali laali doliya mein-Teesri kasam 1966

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