Jan 30, 2017

खिलते हैं गुल यहाँ (लता)-शर्मीली १९७१

किशोर वाला तर्जुमा खुशनुमा था. लता वाला वर्ज़न दो रंग
साथ में लिए है जिसमें दुःख की लकीर थोड़ी बड़ी है.

फिल्म के कथानक में नायिका कहीं गायब हो जाती है.
नायक उसकी तलाश में है. एक दिन वो यकायक कहीं
से गीत गाती प्रकट होती है. नायक जो घायल है वो
लकड़ी के सहारे चलता हुआ आवाज़ को फोलो करता
हुआ जंगल में पहुँचता है और नायिका से उसका सामना
होता है. नायिका दार्शनिक अंदाज़ में उसे जवाब देते
हुआ अपना गाना जारी रखती है. बाकी का हाल जानने
के लिए फिल्म देखें.




खिलते हैं गुल यहाँ खिल के बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ मिल के बिछड़ने को
खिलते हैं गुल यहाँ खिल के बिखरने को
खिलते हैं गुल यहाँ

कल रहे ना रहे  मौसम ये प्यार का
कल रुके न रुके  डोला बहार का
कल रहे ना रहे  मौसम ये प्यार का
कल रुके न रुके  डोला बहार का
चार पल मिले जो आज  प्यार में गुज़ार दे

खिलते हैं गुल यहाँ खिल के बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ मिल के बिछड़ने को
खिलते हैं

हो झीलों के होंठों पर 
झीलों के होंठों पर  मेघों का राग है
फूलों के सीने में  ठंडी-ठंडी आग है
दिल के आइने में तू  ये समां उतार ले

खिलते हैं गुल यहाँ खिल के बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ मिल के बिछड़ने को
खिलते हैं गुल यहाँ

प्यासा है दिल सनम  प्यासी ये रात है
होंठों मे दबी-दबी  कोई मीठी बात है
इन लम्हों पे आज तू  हर खुशी निसार दे

खिलते हैं गुल यहाँ खिल के बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ मिल के बिछड़ने को
खिलते हैं गुल यहाँ
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Khilte hain gul yahan-Sharmili 1971

Artists: Rakhi, Shahsi Kapoor

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