Jan 27, 2017

होठों में ऐसी बात-ज्वेल थीफ १९६७

हो शालू- इस गीत के की वर्ड्स हैं. बाकी के कोड वर्ड्स हैं
जो इस गाने में क्या चल रहा है उसे बतलाते हैं. फ़िल्मी थ्योरी
अनुसार दर्शक समझ जाता है बस फिल्म के खलनायक और
अन्य कलाकार नहीं समझ पाते हैं. बस इसी एक पहलू में
फ़िल्मी निर्देशक दर्शक को हाई आई क्यू वाला समझता है
अन्यथा वो उसे निहायत बेवकूफ और मंद बुद्धि प्राणी समझता
है. ये एक तरीका है गुब्बारे में हवा भर के उसे उड़ाने का.
ज़रूरत खत्म होने के बाद गुब्बारे में पिन चुभा दी जाती है.
गुब्बारा लहराता हुआ कहाँ जा के गिरता है वो किसी को नहीं
मालूम.

यह गीत अपने ध्वनि प्रयोगों के लिए मशहूर है. यहाँ प्रयोग से
तात्पर्य एक्सपेरिमेंट से नहीं वरन उपयोग से है. क्रिएटिविटी और
प्रयोग तो दादा बर्मन ने सफलतापूर्वक खूब किये और उनके पुत्र
ने भी उस परिपाटी को आगे बढ़ाया. ये तो एक फ़िल्मी गीत के
फोर्मेट और उसके औसत समय से अनूठा खिलवाड़ है. गीत में
तबला तरंग का सुन्दर प्रयोग है उसके अलावा अन्य ताल वाद्य
भी हैं इसकी सुंदरता बढ़ाने को. गीत पूर्ण मनोरंजन वाला गीत है
इसमें मोहक नृत्य भी है और उसे पूरा समय दिया गया है. गीत
और नृत्य का अनोखा संगम. फ़िल्मी नृत्यों चाहे वो मेले वाले हों,
स्टेज कार्यक्रम वाले हों, शास्त्रीय नृत्य हों, क्लब सोंग वाले हों या
सस्पेंस फिल्म का बेकग्राउंड संगीत हो सबका निचोड़ है इसके
आखिरी २-३ मिनट में. अप्रत्याशित और आगे आने वाली अनहोनी
की आशंका के भाव नायिका के चेहरे पर तो हैं ही.

फिल्म के निर्देशक को किसी लंबे गीत के लिए मना पाना आसान
काम नहीं होता था एक समय. ये तभी संभव होता जब खुद निर्देशक
लंबे गीत रखवाना चाहता हो या उसके लिए तैयार हो. औसतन आधा
घंटा गीतों के लिए रख दिया जाता था. ये समय २० मिनट का
था जो बढते बढते आधा घंटा हो चला समय के साथ. क्रिएटिविटी
के साथ कुछ कंसट्रेन्ट्स भी होते थे जिसके बारे में हमें सबसे
कम मालूम होता है.

बहरहाल नवकेतन एक ऐसी संस्था थी जिसे एस डी बर्मन पर पूरा
विश्वास था. आनंद बंधु दादा की प्रतिभा के कायल थे और उनके
निर्णय पर फिल्म के संगीत के अधिकाँश पहलू छोड़ा करते थे.



गीत के बोल:

होठों में ऐसी बात
होठों में ऐसी बात मैं दबा के चली आई
खुल जाये वही बात तो दुहाई है दुहाई
होठों में ऐसी बात मैं दबा के चली आई
खुल जाये वही बात तो दुहाई है दुहाई
हाँ रे हाँ 
बात जिसमें  प्यार तो है  ज़हर भी है  हाय
होठों में ऐसी बात मैं दबा के चली आई
खुल जाये वही बात तो दुहाई है दुहाई

हो शालू
रात काली नागन सी हुई है जवां
रात काली नागन सी हुई है जवां
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हाय दैया किसको डसेगा ये समां
हाँ हाय दैया किसको डसेगा ये समां
जो देखूँ पीछे मुड़ के होए
तो पग में पायल तड़पे होए
आगे चलूँ तो धड़कती है सारी अंगनाई

होंठों में हाय.
होठों में ऐसी बात मैं दबा के चली आई
खुल जाये वही बात तो दुहाई है दुहाई
हाँ रे हाँ 
बात जिसमें  प्यार तो है  ज़हर भी है  हाय
होठों में ऐसी बात मैं दबा के चली आई
खुल जाये वही बात तो दुहाई है दुहाई

हो शालू
ऐसे मेरा ज्वाला सा तन लहराये
ऐसे मेरा ज्वाला सा तन लहराये
अरे हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
लट कहीं जाए घूँघट कहीं जाये
हाँ लट कहीं जाए घूँघट कहीं जाये
अरे अब झुमका टूटे
के मेरी बिंदिया छूटे
अब तो बन के क़यामत लेती हूँ अंगड़ाई

होंठों में हाय.
होठों में ऐसी बात मैं दबा के चली आई
खुल जाये वही बात तो दुहाई है दुहाई
हाँ रे हाँ 
बात जिसमें  प्यार तो है  ज़हर भी है  हाय
होठों में ऐसी बात मैं दबा के चली आई
खुल जाये वही बात तो दुहाई है दुहाई
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Honthon mein aisi baat-Jeel thief 1967

Artists: Dev Anand, Vaijayantimala

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