जाने क्यूँ लोग मोहब्बत-महबूब की मेहँदी १९७१
गीत फिल्म के टाइटल्स के तुरंत बाद आता है. बेबी डॉल
सरीखी दिखने वाली लीना चंदावरकर का मासूम सा चेहरा
दर्शकों को बेहद पसंद आया.
गीत में एक वैलिड क्वेश्चन किया गया है और उसके साथ
बतलाया गया है कि कैसी कैसी विकत स्थितियों में भी
जनता प्रेम करना नहीं छोडती. आनंद बक्षी ने एक उम्दा
गीत लिखा है और इसकी उतनी ही आकर्षक धुन बनाई है
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने.
गीत के बोल:
इस ज़माने में इस मोहब्बत ने
कितने दिल तोड़े कितने घर फूँके
जाने क्यूँ लोग मोहब्बत किया करते है
जाने क्यूँ लोग मोहब्बत किया करते है
दिल के बदले दर्द-ए-दिल लिया करते है
जाने क्यूँ लोग मोहब्बत किया करते है
तन्हाई मिलती है महफ़िल नहीं मिलती
राह-ए-मोहब्बत में कभी मंज़िल नही मिलती
दिल टूट जाता है नाकाम होता है
उल्फ़त में लोगों का यही अंजाम होता है
कोई क्या जाने क्यों ये परवाने
यूं मचलते है ग़म में जलते है
आहें भर-भर के दीवाने जिया करते हैं
आहें भर-भर के दीवाने जिया करते हैं
जाने क्यूँ लोग मोहब्बत किया करते है
सावन मे आँखो को कितना रूलाती है
फुरकत में जब दिल को किसी की याद आती है
ये ज़िन्दगी यूं ही बरबाद होती है
हर वक़्त होठों पे कोई फ़रियाद होती है
ना दवाओं का नाम चलता है
ना दुआओं से काम चलता है
ज़हर ये फिर भी सभी क्यों पिया करते हैं
ज़हर ये फिर भी सभी क्यों पिया करते हैं
जाने क्यूँ लोग मोहब्बत किया करते है
महबूब से हर ग़म मंसूब होता है
दिन रात उल्फ़त में तमाशा खूब होता है
रातों से भी लंबे ये प्यार के किस्से
आशिक़ सुनाते हैं जफ़ा-ए-यार के किस्से
बेमुरव्वत है बेवफा है वो
उस सितमगर का अपने दिलबर का
नाम ले ले के दुहाई दिया करते हैं
नाम ले ले के दुहाई दिया करते हैं
जाने क्यूँ लोग मोहब्बत किया करते है
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Jaane kyun log mohabbat-Mehboob ki mehndi 1971
Artist: Leena Chandavarkar