लपक झपक तू आ रे-बूट पॉलिश १९५४
नहीं है. मन्ना डे ने गायन किसी नदी के पानी की धारा
माफिक आसान बना रखा है मानो बच्चों का खेल हो. गीत
अपने आप में अनूठा है, बीच में ये किसी कीर्तन वाली चाल
भी पकड़ता है थोड़ी देर को. हास्य तत्व को भुला दें अगर तो
ये फिल्म का सर्वश्रेष्ठ गीत है.
कहते हैं चमत्कार ज़मीन पर ही होते हैं. आसमान तो खुद एक
चमत्कार है उसे चमत्कार की क्या ज़रूरत. गीत के अंत में
गरज गरज कर बरसात होने लगती है. इन्टरनेट पर जगह
जगह इस गीत पर दावे हैं-कोई कहे अडाना, कोई कहे मेघ
मल्हार, कोई कहे मियां की मल्हार. गीत किस राग पर
पर आधारित है ये जानने के लिए यहाँ पहुंचिए: लपक-झपक.
गंजों की महफ़िल जमी है जेल में. सबके नायक हैं डेविड जो
गीत गा रहे हैं. शैलेन्द्र के लिखे गीत की तर्ज़ शंकर जयकिशन
ने बनाई है. डेविड के साथ भूडो आडवाणी को भी गीत में आप
सक्रिय देख सकते हैं.
गीत के बोल:
लपक झपक लपक झपक
लपक झपक लपक झपक
लपक झपक लपक झपक
लपक झपक तू आ रे बदरवा
लपक झपक तू आ रे बदरवा
सर की खेती सूख रही है
सर की खेती सूख रही है
बरस बरस तू आ रे बदरवा
लपक झपक तू आ रे बदरवा
झगड़-झगड़ कर पानी ला तू
अकड़-अकड़ बिजली चमका तू
झगड़-झगड़ कर पानी ला तू
पानी ला तू पानी ला तू
झगड़-झगड़ कर पानी ला तू
अकड़-अकड़ बिजली चमका तू
तेरे घड़े में पानी नहीं हो
तेरे घड़े में पानी नहीं हो
पनघट से भर ला रे सखी री
पनघट से भर ला
पनघट से भर ला हाँ
लपक झपक तू आ रे बदरवा
लपक झपक तू आ रे बदरवा
लपक झपक तू आ रे बदरवा
बन में कोयल कूक उठी है
सब के मन में हूक उठी है
बन में कोयल कूक कूक कूक
बन में कोयल कूक उठी है
सब के मन में हूक उठी है
भूदल से तू बाल उगा दे
झटपट तू बरसा दे बदरवा
झटपट तू बरसा बदरवा
झटपट तू बरसा
झटपट तू बरसा
लपक झपक तू आ रे बदरवा
लपक झपक तू आ रे बदरवा
बरसो बरसो
गरज गरज का बरसो
अकड अकड कर बरसो
गरज गरज का बरसो
बरसो बरसो
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Lapak jhapak too aa re badarwa-Boot polish 1954
Artists: David, Bhudo Adwani
