सूरज ज़रा आ पास आ-उजाला १९५९
पर्याप्त ज़मीन मिलती है. फ़िल्मी कविता अर्थात गीत में
कभी वो अपने मन की बात कह पाता है तो कभी नहीं.
फिल्म उजाला का ये गीत है तो विशुद्ध फ़िल्मी गीत पर
ना जाने क्यूँ ऐसा लगता है इसमें गीतकार ने अपने ही
अंदाज़ में सब कहा है बिना किसी सिचुएशन की मांग
के आग्रह के. सोचने पर मजबूर करता है ये गीत. भूख
सबसे पहली समस्या है किसी जीव की. उस पर कवि
मन क्या कहता है उसे समझिए. इसमें विसंगतियों पर
व्यंग्य भी है.
फिल्म सूरज के नाम से मुझे ये गीत भी याद आ गया.
शैलेन्द्र का लिखा और मन्ना डे का गाया ये लावाजवाब
गीत है फिल्म उजाला से. शंकर जयकिशन ने इसका
संगीत तैयार किया है.
गीत के बोल:
सूरज ज़रा आ पास आ
आज सपनों की रोटी पकायेंगे हम
ऐ आसमां तू बड़ा मेहरबां
आज तुझको भी दावत खिलायेंगे हम
सूरज ज़रा आ पास आ
आज सपनों की रोटी पकायेंगे हम
ऐ आसमां तू बड़ा मेहरबां
आज तुझको भी दावत खिलायेंगे हम
सूरज ज़रा आ पास आ
चूल्हा है ठंडा बड़ा और पेट में आग है
गरमा-गरम रोटियां कितना हसीं ख्वाब है
चूल्हा है ठंडा बड़ा और पेट में आग है
गरमा-गरम रोटियां कितना हसीं ख्वाब है
सूरज ज़रा आ पास आ
आज सपनों की रोटी पकायेंगे हम
ऐ आसमां तू बड़ा मेहरबां
आज तुझको भी दावत खिलायेंगे हम
सूरज ज़रा आ पास आ
आलू टमाटर का साग इमली की चटनी बने
रोटी करारी सिके घी उसपे असली लगे
आलू टमाटर का साग इमली की चटनी बने
रोटी करारी सिके घी उसपे असली लगे
सूरज ज़रा आ पास आ
आज सपनों की रोटी पकायेंगे हम
ऐ आसमां तू बड़ा मेहरबां
आज तुझको भी दावत खिलायेंगे हम
सूरज ज़रा आ पास आ
बैठें कहीं छाँव में आ आज पिकनिक सही
ऐसी ही दिन की सदा हमको तमन्ना रही
बैठें कहीं छाँव में आ आज पिकनिक सही
ऐसी ही दिन की सदा हमको तमन्ना रही
सूरज ज़रा आ पास आ
आज सपनों की रोटी पकायेंगे हम
ऐ आसमां तू बड़ा मेहरबां
आज तुझको भी दावत खिलायेंगे हम
सूरज ज़रा आ पास आ
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Suraj zara paas aa-Ujala 1959
Artists: Shammi Kapoor, Kids
