दिल तो है दीवाना ना-मंजिल १९६०
है तो सन १९७९ की फिल्म मंजिल आर डी बर्मन के संगीत
से सजी फिल्म है. १९६० वाली फिल्म में देव आनंद और
नूतन की जोड़ी है और सन १९७९ वाली फिल्म में है
अमिताभ बच्चन संग मौसमी चटर्जी. मेरे ख्याल से दोनों
ही फिल्मों का संगीत अच्छी गुणवत्ता वाला है मगर अलग
अलग पीढ़ी के संगीत प्रेमी इसे अपने हिसाब से सुना करते
हैं. दोनों ही पीढ़ियों में से कुछ बिरले संगीत प्रेमी हैं जो पंचम
और दादा बर्मन दोनों का संगीत चाव से सुना करते हैं.
आज सुनते हैं रफ़ी और आशा भोंसले का गाया हुआ युगल
गीत जिसे मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा है.
गीत के बोल:
दिल तो है दीवाना ना
मानेगा बहाना ना रुक जाना
दिल की बातों में न आना
दीवाना तो दीवाना
दिल तो है दीवाना ना
मानेगा बहाना ना रुक जाना
दिल की बातों में न आना
दीवाना तो दीवाना
रुकती है कहाँ दिल की अँगडाईयाँ
झूम जा मिल के गले
ज़रा धीरे सुनो मन की शहनाईयाँ
पगले कोई सुन न ले
रुकती है कहाँ दिल की अँगडाईयाँ
पगले कोई सुन न ले
करेगा कोई क्या
मेरी जाँ कहो हाँ
चुप
क्यों चुप
दिल तो है दीवाना ना
मानेगा बहाना ना रुक जाना
ओए दिल की बातों में न आना
दीवाना तो दीवाना
डरती हूँ कोई तूफ़ाँ न उठे कहीं
शोर करूं या चुप रहूँ
हम तो ठहरे नादाँ तुम तो नहीं
खुद समझ लो क्या कहूँ
डरती हूँ कोई तूफ़ाँ न उठे कहीं
खुद समझ लो क्या कहूँ
तुम हो बड़े वो
मेरी जाँ कहो हाँ
चुप
तो चुप
दिल तो है दीवाना ना
मानेगा बहाना ना रुक जाना
ओए दिल की बातों में न आना
दीवाना तो दीवाना
ओ दिल तो है दीवाना ना
मानेगा बहाना ना रुक जाना
दिल की बातों में न आना
दीवाना तो दीवाना
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Dil to hai deewana na-Manzil 1960
Artists:Dev Anand, Nutan
