भाई बत्तूर-पड़ोसन १९६८
हैं. ऐसे गीतों को मस्ती भरा गीत कहा जाता है. खुशनुमा और
जिसमें ज्यादा किसी से लेना देना ना हो, ऐसे गीत आसानी
से गुनगुनाये जा सकते हैं.
राजेंद्र कृष्ण के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है आर डी बर्मन ने.
लता मंगेशकर ने इस गीत को गाया है. इसमें प्रयुक्त वाद्य यंत्रों
की बदौलत ये ज्यादा मधुर बन गया है.
गीत फिल्माया गया है सायरा बानो पर और ये बत्तूर भाई कौन
हैं मुझे नहीं मालूम.
गीत के बोल:
भाई बत्तूर भाई बत्तूर अब जायेंगे कितनी दूर
भाई बत्तूर भाई बत्तूर अब जायेंगे कितनी दूर
नाजुक नाजुक मेरी जवानी चलने से मजबूर
ओ हो हो हो
भाई बत्तूर भाई बत्तूर अब जायेंगे कितनी दूर
नाजुक नाजुक मेरी जवानी चलने से मजबूर
डर लागे क्या होगा पीछे कोई चोर लगा होगा
अरे हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हा हा हा हा हा हा हो हो हो
डर लागे क्या होगा पीछे कोई चोर लगा होगा
हाँ छोटी उमरिया सफ़र बड़ा मैं थक कर हो गई चूर
हो भाई बत्तूर भाई बत्तूर अब जायेंगे कितनी दूर
नाजुक नाजुक मेरी जवानी चलने से मजबूर
ला ला ला ला आ आ आ
अंगड़ाई जब आये हुस्न मेरा क्यों इतराए
आं आं आं आं आं आं आं आं ओ ओ ओ ओ ओ ओ
अंगड़ाई जब आये हुस्न मेरा क्यों इतराए
हो आईना देखूं और सोचूं क्या हो गयी मैं मगरूर
भाई बत्तूर भाई बत्तूर अब जायेंगे कितनी दूर
नाजुक नाजुक मेरी जवानी चलने से मजबूर
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
चाल चालूँ इठला के बिन सोचे बल खा के
चाल चालूँ इठला के बिन सोचे बल खा के
हाँ छाई जवानी ऐसे जैसे नदिया हो भरपूर
हो भाई बत्तूर भाई बत्तूर अब जायेंगे कितनी दूर
नाजुक नाजुक मेरी जवानी चलने से मजबूर
हो हो हो हो हो
भाई बत्तूर भाई बत्तूर अब जायेंगे कितनी दूर
नाजुक नाजुक मेरी जवानी चलने से मजबूर
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Bhai battur-Padosan 1968
Artist: Saira Bano

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