Mar 3, 2017

कहीं न कहीं दिल लगाना पड़ेगा-कश्मीर की कली १९६४

पड़ेगा-इस शब्द में अनिवार्यता वाले भाव होते हैं. आवारा
घूमता हुआ दिल भी किसी मुकाम के इंतज़ार में रहता है.
ये दिल जो आवारा वगैरह होता है ये हमने नए गानों से
सीखा है इसलिए शब्दावली थोडी समय के साथ बदल गई
है.

दिल नहीं हुआ गोया कि किसी गाडी का पुर्जा हो गया उसे
लगाना ही पड़ेगा. शरीर में दिल ब्लड सप्लाई के लिए होता
है और ये उसका मुख्य काम है. अब इसे चाहे जैसे इस्तेमाल
करें आप. किसी सयाने ने ९० के दशक में कहा भी तो है
दिल है के मानता नहीं. कभी बी पी बढ़ा लेता है तो कभी
अटैक करवा देता है.

आज एक डाक-साब की शक्ल देख ली थी सुबह तबसे मेडिकल
वाले ही ख्याल आ रहे हैं दिमाग में और ऊपर से नैयर साहब
के कम्पोज किये १०-१२ गीत सुन लिए तो ज़बरदस्त कनेक्शन
बनता जा रहा है. में केना तो कुछ और चा रिया था के कुछ
और रिया हूँ. तगाफुल में तस्सवुर कभी कभी फुल स्पीड में
आ जाते हैं.

गीत सुनते हैं मोहम्मद रफ़ी का गाया, शम्मी कपूर पर फिल्माया
गया, शम्सुल हुदा बिहारी का लिखा हुआ और ओमकार प्रसाद
नैयर का संगीतबद्ध फिल्म कश्मीर की कली से.



गीत के बोल:

किसी न किसी से  कभी न कभी
कहीं न कहीं दिल लगाना पड़ेगा
किसी न किसी से  कभी न कभी
कहीं न कहीं दिल लगाना पड़ेगा


एक से एक हसीं चेहरे हैं
किस किस को मैं देखूँ
किस को इनमें अपना समझूँ
संग मैं अपने ले लूँ
कोई रंगीली छैल-छबीली
कोई रंगीली रसीली  छैल-छबीली
आज मेरी ज़िन्दगी में आ के रहेगी

किसी न किसी से  कभी न कभी
कहीं न कहीं दिल लगाना पड़ेगा
हो किसी न किसी से  कभी न कभी
कहीं न कहीं दिल लगाना पड़ेगा

ढूँढ रहा हूँ मैं वो दुनिया
प्यार जिसे कहते हैं
ढूँढ रहा हूँ मैं वो दुनिया
प्यार जिसे कहते हैं
कौन वो क़िस्मत वाले हैं
जो लोग वहाँ रहते हैं
मुझको मेरे दिल ले के वहीं चल
मुझको मेरे दिल मेरे दिल ले के वहीं चल
आए जहाँ हाथ कोई रेशमी आँचल

किसी न किसी से  कभी न कभी
कहीं न कहीं दिल लगाना पड़ेगा
किसी न किसी से  कभी न कभी
कहीं न कहीं दिल लगाना पड़ेगा

ऐसी नाज़ुक हो वो जिसका
शबनम मुँह धोती हो
चाँद भी सदके होता हो
जब रात को वो सोती हो
आँख शराबी  गाल गुलाबी
आँख शराबी  शराबी गाल गुलाबी
प्यार से सँवार दे जो ज़िन्दगी मेरी

किसी न किसी से  कभी न कभी
कहीं न कहीं दिल लगाना पड़ेगा
किसी न किसी से  कभी न कभी
कहीं न कहीं दिल लगाना पड़ेगा
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Kisi na kisi se kabhi na kabhi-Kashmir ki kali 1964

Artist: Shammi Kapoor

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