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Mar 28, 2020

ज़ुल्फ़ लहराई तो-खून का बदला खून १९७८

७० के दशक के भूले बिसरे गीतों में से एक और पेश
है. अपने ज़माने का लोकप्रिय गीत जी ना जाने कहाँ
खो गया. वाणी जयराम ने इसे गाया है और आप इस
बात का यकीन नहीं कर सकते कि वाणी जयराम से
बोले रे पपीहरा जैसे गानों के अलावा भी कुछ और
उम्मीद हम कर सकते हैं.

आपको एक भूतिया फिल्म दो गज ज़मीन के नीचे
का गाना सुनवाया था जो वाणी जयराम ने गाया है.
वो भी थोडा तेज गति वाला गीत है मगर प्रस्तुत
गीत की बात और है कुछ.

परदे पर इसे एक हेल्दी अभिनेत्री आशा सचदेव पर
फिल्माया गया है. नायक महेंद्र संधू उनकी उछल कूद
का आनंद ले रहे हैं. महेंद्र संधू को जनता प्यार से
देसी जेम्स बाँड भी बुलाती थी.





गीत के बोल:

ज़ुल्फ़ लहराई तो
ज़ुल्फ़ लहराई तो सावन का महीना आ गया
ज़ुल्फ़ लहराई तो
आसमा पर हाय
आसमा पर बादलों को पसीना आ गया हाय
ज़ुल्फ़ लहराई तो
ज़ुल्फ़ लहराई तो सावन का महीना आ गया
ज़ुल्फ़ लहराई तो


हाय रे मेरी शोख जवानी
महके जैसे रात की रानी
दिल में प्यार के सपने सजा कर
लोग मरें जब मेरी अदा पर
दिल में प्यार के सपने सजा कर
लोग मरें जब मेरी अदा पर
मुझको भी जीना आ गया

ज़ुल्फ़ लहराई तो
ज़ुल्फ़ लहराई तो सावन का महीना आ गया
ज़ुल्फ़ लहराई तो
आसमा पर हाय
आसमा पर बादलों को पसीना आ गया हाय
ज़ुल्फ़ लहराई तो
ज़ुल्फ़ लहराई तो सावन का महीना आ गया
ज़ुल्फ़ लहराई तो

मै क्या जानूं रंग बदलना
पी के बहकना झूम के चलना
यारों ने आँखों से पिलाई
बन के पवन मैं भी लहराई
यारों ने आँखों से पिलाई
बन के पवन मैं भी लहराई
मुझको भी पीना आ गया

ज़ुल्फ़ लहराई तो
ज़ुल्फ़ लहराई तो सावन का महीना आ गया
ज़ुल्फ़ लहराई तो
आसमा पर हाय
आसमा पर बादलों को पसीना आ गया हाय
ज़ुल्फ़ लहराई तो
ज़ुल्फ़ लहराई तो सावन का महीना आ गया
ज़ुल्फ़ लहराई तो
…………………………………………………..
Zulf lehrayi to-Khoon ka badla khoon 1978

Artist: Asha Sachdev, Mahendra Sandhu

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Mar 14, 2020

दिल जनाब के कदमों में-द किलर्स १९६९

दिल भी क्या चीज़ है, उसे कहीं भी किसी भी
चीज़ पर निसार कर दो. कहाँ तो हिंदी फिल्म
का नायक कहता है-अपने पांव ज़मीन पर ना
रखियेगा मैले हो जायेंगे और कहाँ दिल क़दमों
में रखने की बात.

सुनते हैं आशा भोंसले का गाया हुआ एक गीत
एस एच बिहारी का लिखा हुआ जिसकी तर्ज़
ओ पी नैयर ने बनाई है.



गीत के बोल:

बा बा बा बा बा बा बा
बा बा बा बा बा बा बा

दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
पहले तो दिलरुबा
कहियो तो ये ज़रा
आपको कितना प्यार है

हो दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
पहले तो दिलरुबा
कहिये तो ये ज़रा
आपको कितना प्यार है
हो दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे

ढूंढती हैं कब से ये मेरी निगाहें
मंज़िले वफ़ा की ज़िन्दगी की राहें
प्यार न हो तो मेरी आँखों में दिलबर
चुभता है प्यारी रातों का मंज़र
ये जीना बेकार है

हो दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
पहले तो दिलरुबा
कहिये तो ये ज़रा
आपको कितना प्यार है
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे

ताजमहल से ये ले लो तुम गवाही
प्यार ने जहाँ में की है बादशाही
आज भी उल्फ़त का है दिल ये दीवाना
फिर भी न जाने क्यों ये ज़ालिम ज़माना
क्यूँ बेजार है

दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
पहले तो दिलरुबा
कहिये तो ये ज़रा
आपको कितना प्यार है
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
दिल जनाब के कदमों में
हम निसार तो कर देंगे
…………………………………………………
Dil janaab ke kadmon mein-The Killers 1969

Artist: Sheikh Mukhtar, Ajit, Helen

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Mar 8, 2020

नज़रे मिला के आपने-द किलर्स १९६९

ओ पी नैयर यूँ ही नहीं शम्सुल हुदा बिहारी की तारीफ
किया करते थे. एस एच बिहारी की लेखनी में आपको
वो सब मिलेगा जो किसी भी दूसरे नामचीन शायर या
गीतकार के लेखन में है. सरलता एस एच बिहारी का
मजबूत पक्ष है.

सन १९६९ की फिल्म द किलर्स से अगला गीत सुनते हैं
आशा भोंसले का गाया हुआ. इसका संगीत नैयर ने तैयार
किया है. गीत का शब्द सामन ना जाने क्यूँ साबुन सुनाई
देता है. दारा सिंह के हिस्से की एक्टिंग भी हेलन ने कर
ली है इस गाने में.




गीत के बोल:

नज़रे मिला के आपने एहसान कर दिया
नज़रे मिला के आपने एहसान कर दिया
फिर से हमारे जीने का सामान कर दिया

मिल के हमें हुज़ूर से महसूस ये हुआ
मिल के हमें हुज़ूर से महसूस ये हुआ
दुनिया में और कुछ भी नहीं प्यार के सिवा
सब कुछ वफ़ा के नाम पे कुर्बान कर दिया
नज़रे मिला के आपने एहसान कर दिया

बेचैन थी हमारी नज़र आपके बगैर
बेचैन थी हमारी नज़र आपके बगैर
मुश्किल था ज़िन्दगी का सफ़र आपके बगैर
बाहों में ले के आपने आसान कर दिया
नज़रे मिला के आपने एहसान कर दिया
फिर से हमारे जीने का सामान कर दिया
……………………………………………..
Nazren mila ke aapne- The Killers 1969

Artist: Dara Singh, Helen

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Jan 1, 2020

अच्छा जी माफ़ कर दो-मुसाफ़िरखाना १९५५

इस ब्लॉग के पाठकों को नववर्ष की शुभकामनाएं.

नया साल केवल रेसोल्यूशंस वाला हो ज़रूरी नहीं है.
पिछले साल के खोये-पाए का हिसाब और उसपर
डेफिनिटिव एक्शन का भी है. पुराना छोड़ने और
नया पकड़ने का भी है.

सुनते हैं मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ गीत
जिसे गीता दत्त और रफ़ी ने गाया है. इस गीत का
संगीत तैयार किया है ओ पी नैयर ने.

किसी ज़माने में बंदर और बंदरिया का नाच आपने
देखा होगा. मदारी नचाया करता था मजमा लगा कर.
जिस किसी ने नहीं देखा है वो मीडिया के कुछ एक
कार्यक्रम देख के समझ सकता है.



गीत के बोल:

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो

तेरी नज़र तो दिल में कर के तूफ़ान गई
तेरी नज़र तो दिल में कर के तूफ़ान गई
तेरी अदा ही ठहरी अपनी तो जान गई
तेरी अदा ही ठहरी अपनी तो जान गई

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो

चोरी से आये दिल में तुमने क़सूर किया
चोरी से आये दिल में तुमने क़सूर किया
देखा ना भाला क्यों जी इतना ग़ुरूर किया
देखा ना भाला क्यों जी इतना ग़ुरूर किया

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो

सबसे कहूँगा तूने दिल बेक़रार किया
सबसे कहूँगा तूने दिल बेक़रार किया
मेरा ही बन के दिलबर मुझपे ही वार किया
मेरा ही बन के दिलबर मुझपे ही वार किया

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो

तूने वो चाल चल दी जिसका हिसाब नहीं
तूने वो चाल चल दी जिसका हिसाब नहीं
चोरी और सीनाज़ोरी तेरा जवाब नहीं
चोरी और सीनाज़ोरी तेरा जवाब नहीं

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो
………………………………………………
Achchha ji maaf kar do-Musafirkhana 1955

Artists: Karan Deewan, Shyama

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Dec 27, 2019

आना आना अटरिया पे आना-कल्पना १९६०

फिल्म मेरा गांव मेरा देश में अटरिया के उल्लेख
वाला एक गीत है. एक और गीत उपलब्ध है अटरिया
वाला ये है श्वेत श्याम युग से.

लोक धुनों का प्रयोग फ़िल्मी गीतों में खूब हुआ है.
ये जब से फिल्म संगीत की शुरुआत हुई तभी से
हो रहा है.

आज एक गीत सुनते हैं जिसे सुन के सबसे पहले
तो शराबी के गीत-जहाँ चार यार मिल जाएँ की
याद आती है. और भी हैं अगर आप दिमाग पर
जोर डालें तो याद आते जायेंगे.

राजा मेहँदी अली खान की रचना को स्वर दिया है
आशा भोंसले ने ओ पी नैयर के संगीत निर्देशन में.




गीत के बोल:

अना आना ओ बाबू रे
आना आना हा हा
आना आना अटरिया पे आना
आना आना अटरिया पे आना
देख ले चाहे सारा ज़माना
हो आना आना अटरिया पे आना
देख ले चाहे सारा ज़माना
हो हो हो हो हो ओ ओ ओ ओ ओ

प्यार लाई मैं दिल में छुपा के
प्यार लाई मैं दिल में छुपा के
देख ले एक नजर मुस्कुरा के
हो देख ले एक नजर मुस्कुरा के
मेरी आँखों से झांके है प्यार बार बार

आना आना
आना आना अटरिया पे आना
देख ले चाहे सारा ज़माना
आना आना अटरिया पे आना
देख ले चाहे सारा ज़माना
हो हो हो हो हो ओ ओ ओ ओ ओ


मैं कहीं हूँ मेरा दिल कहीं है
मैं कहीं हूँ मेरा दिल कहीं है
मेरा दिल मेरे बस में नहीं है
ओ मेरा दिल मेरे बस में नहीं है
छीन लेता है कोई करार बार बार

आना आना
आना आना अटरिया पे आना
देख ले चाहे सारा ज़माना
आना आना अटरिया पे आना
देख ले चाहे सारा ज़माना
…………………………………………………………….
Aana aana atariya pe aana-Kalpana 1960

Artists: Padmini, Ashok Kumar

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Dec 26, 2019

जाये जहाँ मेरी नज़र-कल्पना १९६०

ये कतई ज़रूरी नहीं कि किसी फ़िल्मी एल्बम के सारे
गाने लोकप्रिय हों. हिंदी फिल्म इतिहास में सैकड़ों की
तादाद में ही ऐसे एल्बम हैं जिसके सभी गाने प्रचलित
हों और जनता द्वारा पसंद किये जाते हों.

ये अनुमान लगाना गीतकार और संगीतकार के लिए
भी कठिन काम होता है कि कौनसा गाना हिट होगा
और कौन सा नहीं.

आज सुनते हैं सन १९६० की फिल्म कल्पना से एक
लोकप्रिय गीत. कमर जलालाबादी की रचना है जिसे
स्वर दिया है आशा भोंसले ने ओ पी नैयर की धुन पर.
इसे पद्मिनी पर फिल्माया गया है. इसे श्रेणी बनाने
वाले दूरबीन सोंग पता नहीं क्यूँ कहते हैं.





गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ होय
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
फ़िर भी है दिल बेक़रार
जाये जहाँ मेरी नज़र
कलियाँ वहाँ जायें बिखर
जाये जहाँ मेरी नज़र
कलियाँ वहाँ जायें बिखर
फ़िर भी है दिल बेक़रार
फ़िर भी है दिल बेक़रार
कहीं कोई छलिया तू है हसीं
कहीं कोई रसिया माहजबीं
कोई कहे दिलरूबा
कोई रंगीला छैल-छबीला
कोई रंगीला छैल-छबीला
मुझको पुकारे पिया
फ़िर भी है दिल बेक़रार
फ़िर भी है दिल बेक़रार

जाये जहाँ मेरी नज़र
कलियाँ वहाँ जायें बिखर
फ़िर भी है दिल बेक़रार
फ़िर भी है दिल बेक़रार

कोई कहे ज़ालिम तू है परी
कोई कहे हाय तेरी जादूगरी
कोई कहे लूट लिया
कोई अलबेला साँझ की बेला
कोई अलबेला साँझ की बेला
मुझको पुकारे पिया
फ़िर भी है दिल बेक़रार
फ़िर भी है दिल बेक़रार

जाये जहाँ मेरी नज़र
कलियाँ वहाँ जायें बिखर
फ़िर भी है दिल बेक़रार

फ़िर भी है दिल बेक़रार
.................................................
Jaaye jahan meri nazar-Kalpana 1960

Artists: Padmini, Ashok Kumar

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Dec 25, 2019

ओ जी सावन में हूँ बेकरार-कल्पना १९६०

ओ जी, ऐ जी हिट्स के तहत आने वाला एक और
गीत है-फिल्म कल्पना में. एक गीत आपने १९६०
से सुना अब दूसरा सुनते हैं. इसगीत का संगीत भी
ओ पी नैयर ने दिया है.

गीत हसरत जयपुरी का लिखा हुआ है जिनके गीत
आपको ओ पी नैयर के संगीत में बेहद कम और
सबसे ज्यादा शंकर जयकिशन के संगीत में मिलेंगे.

फिल्म कल्पना में पद्मिनी और रागिनी दोनों बहनें
हैं. फिल्म में चार गीतकारों की सेवाएं ली गई हैं.




गीत के बोल:

ओ जी सावन में हूँ बेकरार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार
सजनवा से कह दीजो
मोरे घूँघट पे झांके बहार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार
सजनवा से कह दीजो
मोरे घूँघट पे झांके बहार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार

वो जो नहीं तो चमके न बिंदिया
वो जो नहीं तो चमके न बिंदिया
रहने लगी है आँखों में निंदिया
वो जो नहीं तो चमके न बिंदिया
रहने लगी है आँखों में निंदिया
वो जो नहीं तो चमके न बिंदिया
रहने लगी है आँखों में निंदिया
मोहे दम भर नहीं है करार
सजनवा से कह दीजो

ओ जी सावन में हूँ बेकरार
सजनवा से कह दीजो
मोरे घूँघट पे झांके बहार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार
सजनवा से कह दीजो
मोरे घूँघट पे झांके बहार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार

पडने लगे है बागों में झूले
पड़ने लगे है बागों में झूले
परदेसिया क्यों हमको ही भूले
पड़ने लगे है बागों में झूले
परदेसिया क्यों हमको ही भूले
पड़ने लगे है बागों में झूले
परदेसिया क्यों हमको ही भूले
पड़ने लगे है बागों में झूले
परदेसिया क्यों हमको ही भूले
मैं तो उनकी नजर का शिकार
सजनवा से कह दीजो
मोरे घूँघट पे झांके बहार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार
सजनवा से कह दीजो
मोरे घूँघट पे झांके बहार
सजनवा से कह दीजो
ओ जी सावन में हूँ बेकरार
……………………………………………
O ji sawan mein hoon beqarar-Kalpana 1960

Artist: Padmini

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आँखों से आँख मिली-मिटटी में सोना १९६०

सन १९६० की फिल्म मिटटी में सोना से एक गीत सुनते
हैं. इसे लिखा है राजा मेहँदी अली खान ने. गीतकार का
नाम मदन मोहन के संगीत वाले गीतों के लिए ज़्यादा
जाना जाता है.

फिल्म से आप आशा भोंसले का गाया हुआ लोकप्रिय गीत
सुन चुके हैं इधर. प्रस्तुत गीत गाया है रफ़ी और आशा ने.
गौरतलब है रफ़ी और आशा के युगल गीतों की संख्या
लाता और रफ़ी के गाये ड्वेटस् से ज़्यादा है लगभग ढाई
गुना.

गीत का मसला पॉपुलर वाला है-मीठी नोक झोंक. रोमांटिक
नोक-झोंक भी कहा जा सकता है इसे.




गीत के बोल:

आँखों से आँख मिली
दिल से दिल टकराने दो
ना बाबा माफ़ करो देर
हुई घर जाने दो
आँखों से आँख मिली
दिल से दिल टकराने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो

क्यूँ इतना घबराती हो
हम जैसे दीवानों से
क्यूँ इतना घबराती हो
हम जैसे दीवानों से
शमा हूँ लेकिन डरती हूँ
तुम जैसे परवानो से
शमा हूँ लेकिन डरती हूँ
तुम जैसे परवानो से
परवाने को ज़ालिम
पास तो अपने आने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो

आँखों से आँख मिली
दिल से दिल टकराने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो

क्या इस दिल की हालत है
तुझको कुछ मालूम नहीं
क्या इस दिल की हालत है
तुझको कुछ मालूम नहीं
तुझको खूब समझती हूँ
मैं इतनी मासूम नहीं
तुझको खूब समझती हूँ
मैं इतनी मासूम नहीं
शर्मीली आँखों को
दिल पर तीर चलाने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो

आँखों से आँख मिली
दिल से दिल टकराने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो

कॉलेज की हर लड़की से
ज़िक्र तुम्हारा करता हूँ
कॉलेज की हर लड़की से
ज़िक्र तुम्हारा करता हूँ
सबसे यही कहते होगे
मैडम तुमपे मरता हूँ
सबसे यही कहते होगे
मैडम तुमपे मरता हूँ
अरे उल्फत में जो कुछ हो
मेरी कसम हो जाने दो
अरे ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो
..............................................................
Aankhon se aankh mili-Mitti mein sona 1960

Artists:

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Dec 22, 2019

प्यारा प्यारा है समा-कल्पना १९६०

कजरा मोहब्बत वाला तो हमने सुना है मगर सुरमा
मोहब्बत वाला सुनने को दिल की हसरत अभी बाकी
है.

विश्वजीत पर फिल्माए गए गीत कजरा मोहब्बत वाला
से ये गीत भी याद आ जाता है. दोनों गीतों का संगीत
ओ पी नैयर की देन है मगर गीतकार अलग अलग हैं.
किस्मत फिल्म का गीत एस एच बिहारी का लिखा हुआ
है जब कि ये गीत राजा मेंहदी अली खान का.

इस गीत में कहीं-ले के पहला पहला प्यार भी छुपा हुआ
है. हाँ, वही सी आई डी फिल्म का गीत जो देव आनंद
पर फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

प्यारा प्यारा है समा
सैयां जाते हो कहाँ
प्यारा प्यारा है समा
सैयां जाते हो कहाँ
लिपट गई तेरी बांकी नजरिया
मै तेरे कुर्बान
प्यारा प्यारा है समा
सैयां जाते हो कहाँ

मुखड़े पे हलकी हलकी
लाली गुलाब की
अँखिओं से झांकती है
मस्ती शराब की
मुखड़े पे हलकी हलकी
लाली गुलाब की
अँखिओं से झांकती है
मस्ती शराब की
हो ओ ओ ओ झूमती बहारें लाई
हस्ती शबाब की
कहिये जी कहिये क्या है
मर्ज़ी जनाब की
झूमती बहारें लाई
हस्ती शबाब की
कहिये जी कहिये क्या है
मर्ज़ी जनाब की
आँख शराबी गाल गुलाबी
होठों पर मुस्कान

प्यारा प्यारा है समा
सैयां जाते हो कहाँ
लिपट गई तेरी बांकी नजरिया
मै तेरे कुर्बान
प्यारा प्यारा है समा
ओ सैयां जाते हो कहाँ

कजरा मोहब्बत वाला
अंखियों में डाल के
आई हो कहाँ से ले के
नखरे कमाल के
कजरा मोहब्बत वाला
अंखियों में दाल के

आयी हो कहा से लेके
नखरे कमल के

हो ओ ओ ओ प्यार का खज़ाना हूँ मैं
रखना संभल के
चोर कोई ले न जाये
धोखे में डाल के
प्यार का खज़ाना हूँ मैं
रखना संभल के
चोर कोई ले न जाये
धोखे में डाल के
मुझको लगा ले प्यार के ताले
नन्ही सी हूँ जान

प्यारा प्यारा है समा
सैयां जाते हो कहाँ
लिपट गई तेरी बांकी नजरिया
मै तेरे कुर्बान
प्यारा प्यारा है समा
ओ सैयां जाते हो कहाँ
…………………………………………..
Pyara pyara hai sama-Kalpana 1960

Artists:

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Dec 7, 2019

अरे तौबा ये तेरी अदा-ट्वेल्व ओ क्लॉक १९५८

१९५८ की फिल्म ट्वेल्व ओ क्लॉक से अगला गीत पेश है
जिसके मुखड़े में हँसती बिजली और गाता शोला का जिक्र
है. सटीक बात है. हेलन के नृत्य और गीता दत्त की आवाज़
का कोई जोड़ हमें नहीं मिला आज तक.

मजरूह सुल्तानपुरी की रचना है जिसे ओ पी नैयर ने संगीत
से संवारा है. इस गीत में आपको मेरा नाम चिन चिन चू
की परछाई मिल जायेगी. दोनों फ़िल्में १९५८ की हैं. दोनों
गीतों की गायिका गीता दत्त हैं. संगीतकार भी वही हैं बस
गीतकार बदल गए हैं.






गीत के बोल:

अरे तौबा अरे तौबा ये तेरी अदा
हँसती बिजली गाता शोला ये किसने देखा
अरे तौबा अरे तौबा ये तेरी अदा
हँसती बिजली गाता शोला ये किसने देखा
अरे तौबा

मिलती झुकती सी आँखें रुकता चलता सा जादू
जिसके पहलू में दिल हो पाए वो कैसे काबू
उफ़ ये निगाहें लहराती बाहें उफ़ ये निगाहें लहराती बाहें
कहता है दिल आज के कुछ ऐसा वैसा होगा

अरे तौबा अरे तौबा ये तेरी अदा
हँसती बिजली गाता शोला ये किसने देखा
अरे तौबा

थोडा सा आँखें डाले थोडा सा मुखडा खोले
ऐसी अदाओं पे तो दिल मेर यूँ यूँ डोले
तड़पे है घायल महफ़िल की महफ़िल
तड़पे है घायल महफ़िल की महफ़िल
कहता है दिल आज के कुछ ऐसा वैसा होगा

अरे तौबा अरे तौबा ये तेरी अदा
हँसती बिजली गाता शोला ये किसने देखा
अरे तौबा

सॉरी सॉरी महफ़िल से नज़रें उल्फा ना देखो
आधी आधी रातों को जुल्फें बिखरा ना देखो
छाई सियाही आई तबाही छाई सियाही आई तबाही
कहता है दिल आज के कुछ ऐसा वैसा होगा

अरे तौबा अरे तौबा ये तेरी अदा
हँसती बिजली गाता शोला ये किसने देखा
अरे तौबा
………………………………………………….
Are tauba-12 O clock 1958

Artists: Helen, Rehman

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Dec 5, 2019

देख इधर ए हसीना-ट्वेल्व ओ क्लॉक १९५८

जुल्फें ना हुई गोया कोई पेड़ की शाखें या झाडी हो
गई जो छाया भी देती हैं. जुल्फों की छांव पर हमारे
कवियों और गीतकारों के काफी तारीफ और उल्लेख
भरी कवितायेँ और गीत रच दिये.

नायक ने टोपी पहन राखी है फिर भी उसे गर्मी लग
रही है और वो जुल्फों के साये की डिमांड कर रह है.
ऐसे में तो उसे पुदीने वाला जलजीरा पीना चाहिए.
हाफ कट जुल्फों से भला कितनी छांव हो सकेगी?

हास्य गीत में हास्य के अलावा और क्या छुपा हो
सकता है ये समझना पड़ता है. कभी कभी ये व्यंग्य
हो सकता है तो कभी सहज बुद्धूपना. निपट मूर्खता
शब्द मेरे दिमाग में आये थे क्यूंकि कई गीतों में
बेतुकी सी सिचुएशंस होती हैं जिन्हें इनसे बढ़िया
शब्दों से नहीं बखाना जा सकता है. गीतकार एक
सेंसिटिव पर्सन होता है अतः आप सटीक टिप्पणी
तभी कर सकते हैं जब आपके पास भी वैसा ही
फर्टाइल दिमाग हो सोचने वाला.

रफ़ी और गीता दत्ता का गाया गीत सुनते हैं जिसे
लिखा है साहिर लुधियानवी ने और धुन बनाने वाले
संगीतकार का नाम है ओ पी नैयर. शफ़ा शब्द का
मतलब है दवाई.



गीत के बोल:

देख इधर ए हसीना जून का है महीना
डाल जुल्फों का साया आ रहा है पसीना
देख इधर ए हसीना जून का है महीना
डाल जुल्फों का साया आ रहा है पसीना
देख इधर ए हसीना

सुन ले कभी दिल की सदा
ओ नाजनीन जी न जला
सुन ले कभी दिल की सदा
ओ नाजनीन जी न जला
बीमार-ए-गम हूँ शफ़ा मुझको दे
दामन से अपने हवा मुझको दे
बीमार-ए-गम हूँ शफ़ा मुझको दे
दामन से अपने हवा मुझको दे

हॉय मैं हूँ मैडम मरीना ओ रे फटफट पसीना
दूर से बात करना पास आना कभी ना
मैं हूँ मैडम मरीना

लाखों ही जब आहें भरें
तुम ही कहो हम क्या करें
लाखों ही जब आहें भरें
तुम ही कहो हम क्या करें
किस किस के दिल की खबर कोई ले
किस किस के गम का असर कोई ले
किस किस के दिल की खबर कोई ले
किस किस के गम का असर कोई ले

हाय  देख इधर ए हसीना जून का है महीना
डाल जुल्फों का साया आ रहा है पसीना
देख इधर ए हसीना

मुद्दत से हूँ बर्बाद मैं
शीरी है तू फ़रहाद मैं
मुद्दत से हूँ बर्बाद मैं
शीरी है तू फ़रहाद मैं
ये न समझना के घर जाऊँगा
मैं तेरी चौखट पे मर जाऊँगा
हो ये न समझना के घर जाऊँगा
मैं तेरी चौखट पे मर जाऊँगा

हाय मैं हूँ मैडम मरीना ओ रे फटफट पसीना
दूर से बात करना पास आना कभी ना
हाय देख इधर ए हसीना जून का है महीना
डाल जुल्फों का साया आ रहा है पसीना
ओ देख इधर ए हसीना
……………………………………………………………..
Dekh idhar ae haseena-12 O clock 1958

Artists: Johny Walker, Ashita Majumdar

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Dec 4, 2019

अजी ओ सुनो तो- ट्वेल्व ओ क्लॉक १९५८

हिंदी सिनेमा में सस्पेंस वाली फिल्मों को बनाना और
ऐसे बनाना कि वो सिनेमा हॉल में चल पायें आसान
काम नहीं है. बिना गानों के तो केवल डॉक्यूमेंट्री ही
बना करती है. भूत वाली पिक्चरों में भी ठुमके चाहिए
पब्लिक को. अब समोसे के साथ चटनी की आदत
लगाई है तो वो तो धीरे धीरे ही जायेगी. जैसे मौसंबी
के जूस के साथ गुल्लू-कोज़ होना ज़रूरी है वैसे ही
फिल्मों में गाने ज़रूरी हैं.

सुनते हैं फिल्म से अगला गीत गीता दत्त की आवाज़
में. बोल एक बार फिर से मजरूह सुल्तानपुरी के हैं
और संगीत ओ पी नैयर का.





गीत के बोल:

अजी ओ सुनो तो नहीं तुमने हमें पहचाना
दिया था तुम्हें दिल यही दिन थे यही था ज़माना
अजी ओ सुनो तो नहीं तुमने हमें पहचाना

अच्छी नहीं ये दिल्लगी खामोश क्यूँ बैठे हो जी
अच्छी नहीं ये दिल्लगी खामोश क्यूँ बैठे हो जी
दिल से मेरे क्यूँ दूर हो यूँ दूर हो कुछ तो कहो

अजी ओ सुनो तो नहीं तुमने हमें पहचाना
दिया था तुम्हें दिल यही दिन थे यही था ज़माना

सोचो ज़रा याद आयेगी जादू भरी वो चांदनी
सोचो ज़रा याद आयेगी जादू भरी वो चांदनी
चन्दा पे वो वो सोई सोई घटा खोई हवा

अजी ओ सुनो तो नहीं तुमने हमें पहचाना
दिया था तुम्हें दिल यही दिन थे यही था ज़माना

जब से लगी तेरी नज़र ज़ख़्मी पड़े हैं दिल जिगर
जब से लगी तेरी नज़र ज़ख़्मी पड़े हैं दिल जिगर
बैठे हो तुम सब जान के सब जान के पहचान के

अजी ओ सुनो तो नहीं तुमने हमें पहचाना
दिया था तुम्हें दिल यही दिन थे यही था ज़माना
अजी ओ सुनो तो नहीं तुमने हमें पहचाना
अजी ओ सुनो तो नहीं तुमने हमें पहचाना
....................................................................
Aji o suno to-12 O clock 1958

Artists: Shashikala, Guru Dutt, Rehman

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Dec 3, 2019

सैयां तेरी अंखियो में दिल-ट्वेल्व ओ क्लॉक १९५८

गुरु दत्त और वहीदा रहमान की प्रमुख भूमिकाओं वाली
फिल्म ट्वेल्व ओ क्लॉक से अगला गीत पेश है. इसे
शमशाद बेगम ने गाया है.

फिल्म में इसे नायक के साइड किक और एक सहायक
अभिनेत्री पर इसे फिल्माया गया है. जॉनी वॉकर को तो
मैं पहचान गया हूँ, नायिका को आप पहचानें. कभी तो
कंट्रोल सी और कंट्रोल एस के अलावा के काम भी कर
लेने चाहिए, नहीं ?

गीत साहिर लुधियानवी का है और संगीत ओ पी नैयर का.




गीत के बोल:

सैयां तेरी अंखियों में दिल खो गया
सैयां तेरी अंखियों में दिल खो गया
दिल खो गया जी मेरा दिल खो गया
सैयां तेरी अंखियों में दिल खो गया
सैयां तेरी अंखियों में दिल खो गया

हाय रे मैं काहे तुझे तक के हंसी
तक के हंसी तो तेरे जाल में फँसी
नज़रें चुराना मुश्किल हो गया
नज़रें चुराना मुश्किल हो गया
दिल खो गया जी मेरा दिल खो गया

सैयां तेरी अंखियों में दिल खो गया
सैयां तेरी अंखियों में दिल खो गया

तीर तूने फेंका ऐसा चलते हुए
रह गई मैं तो हाथ मलते हुए
तीर तूने फेंका ऐसा चलते हुए
रह गई मैं तो हाथ मलते हुए
खुद को बचाना मुश्किल हो गया
खुद को बचाना मुश्किल हो गया
दिल खो गया जी मेरा दिल खो गया

सैयां तेरी अंखियों में दिल खो गया
सैयां तेरी अंखियों में दिल खो गया

निंदिया ना आये मोहे कल ना पड़े
जब से ये नैना तेरे नैनों से लड़े
निंदिया ना आये मोहे कल ना पड़े
जब से ये नैना तेरे नैनों से लड़े
रतियाँ बिताना मुश्किल हो गया
रतियाँ बिताना मुश्किल हो गया
दिल खो गया जी मेरा दिल खो गया

सैयां तेरी अंखियों में दिल खो गया
सैयां तेरी अंखियों में दिल खो गया
…………………………………………….
Saiyan teri ankhiyon mein-12 O’ clock 1958

Artists: Johny Walker, ?????

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Nov 24, 2019

तुम जो हुए मेरे हमसफ़र-ट्वेल्व ओ क्लॉक १९५८

एक मधुर युगल गीत पेश है सन १९५८ की फिल्म
ट्वेल्व ओ क्लॉक से. फिल्म के साथ जी पी सिप्पी
और प्रमोद चक्रवर्ती जैसे नाम जुड़े हैं. सिप्पी ने इस
फिल्म का निर्माण किया है.

फिल्म की कथा का ताना बाना एक मर्डर मिस्ट्री और
उसकी गुत्थी सुलझाने के इर्द गिर्द बुना गया है. इस
फिल्म में नायिका पर आरोप लगता है और नायक
उसे बचने कि जद्दोजहद करता है. इसमें वो कितना
सफल होता है जानने के लिए देखें इस फिल्म को.
फिल्म में जॉनी वॉकर ने नायक के सहायक का रोल
किया है. सहायक अभिनेता जिसे अंग्रेजी वेबसाइटों
पर आपने साइड-किक पढ़ा होगा, वही.

गीत लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसकी तर्ज़
तैयार कि है ओ पी नैयर ने. गीता दत्त संग रफ़ी ने
इसे गाया है.



गीत के बोल:

तुम जो हुए मेरे हमसफ़र रस्ते बदल गये
लाखों दिये मेरे प्यार की राहों मे जल गये
तुम जो हुए मेरे हमसफ़र रस्ते बदल गये
लाखों दिये मेरे प्यार की राहों मे जल गये

आया मज़ा लाया नशा
तेरे लबों की बहारों का रंग
मौसम जवाँ साथी हसीं
उस पे नज़र के इशारों का रंग
जितने भी रंग थे सब तेरी आँखों में ढल गये
लाखों दिये मेरे प्यार की राहों मे जल गये

क्या मंज़िलें क्या कारवाँ
बाहों में तेरी है सारा जहाँ
आ जाने जाँ चल दे वहाँ
मिल रहा जहाँ पे ज़मीं आसमाँ
मंज़िल से भी कहीं दूर हम आगे निकल गये
लाखों दिये मेरे प्यार की राहों मे जल गये

तुम जो हुए मेरे हमसफ़र रस्ते बदल गये
लाखों दिये मेरे प्यार की राहों मे जल गये
………………………………………………..
Tum jo hue mere hamsafar-12 O clock 1958

Artists: Guru Dutt, Waheeda Rehman

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Nov 23, 2019

मैं खो गया यहीं कहीं-ट्वेल्व ओ क्लॉक १९५८

समय कैसे तेजी से गुज़रता है इसका आभास भी नहीं
होता और कभी तो कुछ पल भी महीनों जैसे लंबे लगने
लगते हैं.

सन १९५८ की फिल्म ट्वेल्व ओ क्लॉक से हमने आपको
एक गाना सन २००९ में सुनवाया था. आज दूसरे का नंबर
लगा रहे हैं, वो भी इसलिए कि इस गाने को आज ही सुना
है.

शब्द कभी बूढ़े नहीं होते तो सदाबाहर आवाज़ भी कभी बूढी
नहीं होती. रफ़ी की आवाज़ भी ऐसी आवाजों में से एक है,
सदा जवान, सदाबहार.

सुनते है मजरूह का लिखा गीत जिसकी धुन रिदम किंग
ओ पी नैयर ने बनाई है. गुरु दत्त पर फिल्माया गया ये
गीत हल्का फुल्का है और इसमें आप गुरु दत्त को दाढ़ी
बनाते हुए भी देख सकते हैं. वहीदा रहमान की मोहक
मुस्कान और अंगडाई साथ में फ्री है. आगे का हाल गीत
में देख लें तो बेहतर है.




गीत के बोल:

मैं खो गया यहीं कहीं
जवाँ है रुत समाँ हसीं
कहाँ है दिल किसे पता
कहाँ हूँ मैं ख़बर नहीं
मैं खो गया यहीं कहीं
जवाँ है रुत समाँ हसीं
कहाँ है दिल किसे पता
कहाँ हूँ मैं ख़बर नहीं
मैं खो गया मैं खो गया मैं खो गया

यूँ किसी से हुआ सामना
दिल ने आवाज़ दी थामना
यूँ किसी से हुआ सामना
दिल ने आवाज़ दी थामना
जाने क्या कह गई वो निगाह-ए-नाज़नीं
जाने क्या कह गई वो निगाह-ए-नाज़नीं

मैं खो गया यहीं कहीं
जवाँ है रुत समाँ हसीं
कहाँ है दिल किसे पता
कहाँ हूँ मैं ख़बर नहीं
मैं खो गया मैं खो गया

हाल-ए-दिल कह तो दूँ झूम के
प्यार से ज़ुल्फ़ को चूम के
हाल-ए-दिल कह तो दूँ झूम के
प्यार से ज़ुल्फ़ को चूम के
सोचता हूँ मगर वो ख़फ़ा न हो कहीं
सोचता हूँ मगर वो ख़फ़ा न हो कहीं

मैं खो गया यहीं कहीं
जवाँ है रुत समाँ हसीं
कहाँ है दिल किसे पता
कहाँ हूँ मैं ख़बर नहीं
मैं खो गया मैं खो गया

धुन यही जो रही प्यार की
हो रहेगी मेरी वो कभी
धुन यही जो रही प्यार की
हो रहेगी मेरी वो कभी
मेरे दिल मेरे दिल ठहर जा मचल नहीं
मेरे दिल मेरे दिल ठहर जा मचल नहीं

मैं खो गया यहीं कहीं
जवाँ है रुत समाँ हसीं
कहाँ है दिल किसे पता
कहाँ हूँ मैं ख़बर नहीं
मैं खो गया यहीं कहीं
जवाँ है रुत समाँ हसीं
कहाँ है दिल किसे पता
कहाँ हूँ मैं ख़बर नहीं
मैं खो गया मैं खो गया
मैं खो गया मैं खो गया
....................................................................
Main kho gaya-12 O clock 1958

Artists: Guru Dutt, Waheeda Rehman

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Sep 20, 2019

ओ कन्हैया ओ कन्हैया-हमसाया १९६८

सुनते हैं बांके बिहारी को याद करता गीत एस एच बिहारी
का लिखा हुआ. गीत आशा भोंसले ने गाया है जिसे कम्पोज़
किया है ओ पी नैयर ने.

ओ पी नैयर को भक्ति गीत कम्पोज करने के मौके कम मिले
क्यूंकि उन्हें फ़िल्मी कथानक वैसे नहीं मिले जिनमें भजनों की
आवश्यकता ज्यादा हो. इसके अलावा उनके उल्लेखनीय भक्ति
गीतों में नया दौर का गीत है.

ऐसे कथानक सबसे ज्यादा एस एन त्रिपाठी, अविनाश व्यास
और चित्रगुप्त, को मिले. यूँ भी कह सकते हैं प्रमुख संगीतकारों
ने धार्मिक कथानकों में अपना योगदान देने में ना के बराबर
रूचि दिखलाई. इसे भगवान से डर का नाम कह लें या फिल्म
और फिल्म के संगीत फ्लॉप होने का डर.




गीत के बोल:

ओ कन्हैया ओ कन्हैया
ओ कन्हैया कन्हैया कन्हैया कन्हैया
ओ कन्हैया कन्हैया कन्हैया

आज पनघट पे है तेरी राधा अकेली खड़ी
तेरी राधा अकेली खड़ी
ओ कन्हैया

मन ये कहता है अब न पुकारूं तुझे
प्यार कहता है कैसे बिसारुं तुझे
प्रीत की रीत कैसे बदल दूँ भला
नैन कहते हैं हरदम निहारुं तुझे
आ भी जा साँवरे
आ भी जा साँवरे फिर छेड़ दे
फिर छेड़ दे रे वहीं बाँसुरी

ओ कन्हैया
ओ कन्हैया कन्हैया कन्हैया
आज पनघट पे है
तेरी राधा अकेली खड़ी
तेरी राधा अकेली खड़ी
ओ कन्हैया

मन के मंदिर में मैंने बिठाया तुझे
अपना सब कुछ ही मैंने बनाया तुझे
तेरी पूजा में मैं तो रही रे मगन
और भगवान बनना न आया तुझे
आ भी जा सांवरे
आ भी जा सांवरे फिर छेड़ दे
फिर छेड़ दे रे वहीं बाँसुरी

ओ कन्हैया
ओ कन्हैया कन्हैया कन्हैया
आज पनघट पे है
तेरी राधा अकेली खड़ी
तेरी राधा अकेली खड़ी
ओ कन्हैया
…………………………………
O Kanhaiya o Kanhaiya-Humsaya 1968

Artists: Sharmila Tagore, Joy Mukherji

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Sep 13, 2019

कमर पतली नज़र बिजली-कहीं दिन कहीं रात १९६८

जब हमने ब्लॉग लिखना शुरू किया था तब ऐसे ब्लॉग नेट
पर २-३ ही थे. धीरे धीरे संख्या बढ़ी और रंग बिरंगी साइटें
उगना शुरू हुयीं और उन लिरिक्स की अंग्रेजी वाली साइटों
की चकाचौंध में हमारा ब्लॉग कहीं दब सा गया.

सारी मक्खियाँ एक ही जगह जा के चिपकें तो आश्चर्य होता
है. जब इन्डियन क्रिकेट टीम में २-३ विकेट जल्दी जल्दी
गिर जायें तो बाकियों को भी दस्तें लग जाती हैं तब उतना
अचरज नहीं होता.

सुनते हैं फिल्म कहीं दिन कही रात से एक गीत महेंद्र कपूर
की आवाज़ में. एस एच बिहारी के बोल हैं और ओ पी नैयर
का संगीत.



गीत के बोल:

कमर पतली नज़र बिजली
सुराहीदार गर्दन
क़यामत से में जन कम नहीं हो
कमर पतली नज़र बिजली
सुराहीदार गर्दन
……………………………………………..
Kamar patli-Kahin din kahin raat 1968

Artist:

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Sep 12, 2019

तुम्हारा चाहने वाला-कहीं दिन कहीं रात १९६८

फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत है इसलिए हमने कभी क्वश्चन
नहीं किया कि कौन सी दुनिया की बात कर रहे हों. ज़मीन
वाली या आसमान वाली.

एस एच बिहारी की रचना है और ओ पी नैयर का संगीत.
गायक कलाकार हैं महेंद्र कपूर. नैयर के संगीत में सन १९६५
और उसके बाद महेंद्र कपूर के गीत काफी हैं.



गीत के बोल:

तुम्हारा चाहने वाला खुदा की दुनिया में
मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा न करे
तुम्हारा चाहने वाला खुदा की दुनिया में
मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा न कर
तुम्हारा चाहने वल

ये बात कैसे गवारा करेगा दिल मेरा
तुम्हारा ज़िक्र किसी और की ज़ुबान पे हो
तुम्हारे हुस्न की तारीफ आइना भी करे
तो मैं तुम्हारी क़सम है के तोड़ दूँ उसको
तुम्हारे प्यार तुम्हारी अदा का दीवाना
मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा न करे
तुम्हारा चाहने वाला

वो दिन नआये के मुझसे कभी जुदा हो कर
किसी का प्यार दोबारा कहीं तलाश करो
झुका के सर को किसी अजनबी के शानो पर
तुम अपने गम का सहारा कहीं तलाश करो
करीब दिल के तुम्हारे किसी भी हालत में
मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा न करे
तुम्हारा चाहने वाला

तुम्हारे दिल को कहीं मुझसे कभी ठेस लगे
मुझे यकीं है ऐसा कभी नहीं होगा
मुझे वफाओ पे अपनी बड़ा भरोसा है
तुम्हारा प्यार ही दे जाये ना कहीं धोखा
दुआ ये है के तुम्हारा खुदा की दुनिया में
मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा न करे
तुम्हारा चाहने वाला
………………………………………..
Tumhara chahne wala-Kahin din kahin raat 1968

Artist: Biswajeet

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Jul 27, 2019

रोका कई बार मैंने-मेरे सनम १९६५

किसी किसी गीत में ऐसा लगता है मानो दो हीरोईन गीत
गा रही हों एक मर्दाना आवाज़ में और एक जनाना आवाज़
में. ऐसे गीत ज्यादा तो नहीं मगर कुछ एक हैं.

सुनते हैं फिल्म मेरे सनम से एक युगल गीत रफ़ी और आशा
का गाया हुआ. मजरूह के बोल हैं और नैयर का संगीत.
अपने समय का एक चर्चित गीत है ये. हरी भरी वादियों
में फिल्माए गए इस गीत को हम पर्यावरण प्रेमी गीत कह
सकते हैं. उस पर फुंदे वाली टोपियां वाह वाह जी.




गीत के बोल:

रोका कई बार मैंने दिल की उमंग को
क्या करूं मैं अपनी निगाहों की पसंद को
ओ जाने-जान तू ही मेरे प्यार का जहां है
हो ओ ओ ओ ओ आ हा हा
रोका कई बार मैंने दिल की उमंग को
क्या करूं मैं अपनी निगाहों की पसंद को
ओ जाने-जान तू ही मेरे प्यार का जहां है
हो ओ ओ ओ ओ आ हा हा

देखो मेरी आँखें तुम्हारा ही खुमार है
होंठों की ये लाली सनम तेरा प्यार है
देखो मेरी आँखें तुम्हारा ही खुमार है
होंठों की ये लाली सनम तेरा प्यार है
दिल को लगाया मुझे तो इकरार है

रोका कई बार मैंने दिल की उमंग को
क्या करूं मैं अपनी निगाहों की पसंद को
ओ जाने-जान तू ही मेरे प्यार का जहां है
हो ओ ओ ओ ओ आ हा हा

माना तेरा आँचल हाथों से अभी दूर है
बाहों में उठा लूं ये अरमान ज़रूर है
माना तेरा आँचल हाथों से अभी दूर है
बाहों में उठा लूं ये अरमान ज़रूर है
मानो ना मानो दीवाना बेक़सूर है

रोका कई बार मैंने दिल की उमंग को
क्या करूं मैं अपनी निगाहों की पसंद को
ओ जाने-जान तू ही मेरे प्यार का जहां है
हो ओ ओ ओ ओ आ हा हा

देखें तेरी सूरत जो इतने करीब से
घिर गई मैं तो ख्यालों में अजीब से
देखें तेरी सूरत जो इतने करीब से
घिर गई मैं तो ख्यालों में अजीब से
दिल पे क्या बीती ना पूछो ये गरीब से

रोका कई बार मैंने दिल की उमंग को
क्या करूं मैं अपनी निगाहों की पसंद को
ओ जाने-जान तू ही मेरे प्यार का जहां है
हो ओ ओ ओ ओ आ हा हा
रोका कई बार मैंने दिल की उमंग को
क्या करूं मैं अपनी निगाहों की पसंद को
ओ जाने-जान तू ही मेरे प्यार का जहां है
हो ओ ओ ओ ओ आ हा हा
.................................................................................
Roka kai baar-Mere sanam 1965

Artists: Bishwajeet, Asha Parekh

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Jun 16, 2019

कितने अटल थे तेरे इरादे १-एक बार मुस्कुरा दो १९७२

गानों में शब्दों के भाव और धुन के बीच सामंजस्य हमेशा हो ये
ज़रूरी नहीं है. हम अक्सर ऐसे गाने गुनगुनाते हैं जिनका अर्थ
अगर हम ध्यान से समझें तो शायद उन्हें गुनगुनाने में झिझक
सी महसूस हो. हिंदी सिनेमा के गीतों में फ्यूज़न और कंफ्यूज़न
के बीच सैंकडों प्रयोग हो चुके हैं और तकरीबन अधिकांश को
जनता स्वीकार कर चुकी है. संगीतमय आम के अचार बनाने की
विधि हो तो जनता उसे भी स्वीकार कर लेगी.

संगीतकार ओ पी नैयर ने अपने कैरियर में सबसे ज्यादा सेवाएं लीं
इन गीतकारों से – एस एच बिहारी और कमर जलालाबादी.. इनके
अलावा कभी कभार ही दूसरे गीतकारों का नाम नैयर के साथ जुड़ा.
शुरूआती दौर में साहिर और मजरूह ने भी उनके साथ काफी काम
किया.

एक गाना सुनवाते हैं आपको जो शत प्रतिशत फिल्म की सिचुएशन
के हिसाब से ही बनाया गया था मगर इसकी धुन आकर्षक है
इसलिए ये अपने ज़माने में खूब सुना गया और गुनगुनाया गया. आज
भी इसे हम कभी कभार सुन पाते हैं रेडियो पर.

कुक्कू, हेलन की परंपरा में आगे की पीढ़ी में एक नाम है फरयाल.
इस गीत में आप फरयाल को नाचते हुए देख सकते हैं अभिनेता
देव मुखर्जी के साथ. गीत में एक बात बड़ी अच्छी है-साधन यानि
कि फर्नीचर, सामान इत्यादि से सुख नहीं मिलता ये तो मन का एक
ऐसा पड़ाव है जिस पर पहुँच पाना और टिक पाना हर एक के लिए
संभव नहीं. पालतू कुत्ता साधनों में नहीं आता. वो एक जीव है और
मनुष्य से ज्यादा प्रिडिक्टेबल जीव. जब दो टांग वाला कुत्ता चार टांग
वाले को सहलाता है तो उसे शांति और सुख अवश्य ही प्राप्त होता है.



गीत के बोल:

कितने अटल थे तेरे इरादे याद तो कर तू वफ़ा के वादे
तूने कहा था खा कर कसमें सदा निभाएंगे प्यार की रस्में
तू औरों की क्यूँ हो गई तू हमारी थी जान से प्यारी थी
तेरे लिए मैंने दुनिया संवारी थी
तू औरों की क्यूँ हो गई

क्या ये तेरे सुख के साधन मेरी याद को भुला सकेंगे
मेरी याद जब नींद उड़ा देगी क्या ये तुझको सुला सकेंगे
हो क्या ये तुझको सुला सकेंगे
साधन में सुख होता नहीं है सुख जीवन की एक कला है
मुझसे ही छल किया ना तूने अपने को तूने आप छला है
तू औरों की क्यूँ हो गई तू हमारी थी जान से प्यारी थी
तेरे लिए मैंने दुनिया संवारी थी
तू औरों की क्यूँ हो गई

तेरे लिए मैं लाया बहारें तेरे लिए मैं जान पे खेला
तो दिल तूने राह न देखी छोड़ के चल दी मुझे अकेला
हो छोड़ के चल दी मुझे अकेला
तेरी जुदाई मेरी चिता है गम की चिता में मैं जल रहा हूँ
मन मेरा दहके मरघट जैसा अंगारों पे मैं चल रहा हूँ
तू औरों की क्यूँ हो गई
.................................................................................
Kitne atal the tere iraade-Ek baar muskura do 1972

Artists: Dev Mukherji, Faryal, Tanuja

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