न तो दिन ही दिन वो रहे मेरे-दर्द-ए-दिल-१९५३
संगीत निर्देशन वाला एक गीत सुनते हैं सन १९५३ की फिल्म
दर्द-ए-दिल से. इसे गाया है लता मंगेशकर ने. गीत लिखा है
दीनानाथ मधोक ने.
५० के दशक में आर सी बोराल के संगीत वाली कम फ़िल्में
आयीं. १९५५ की स्वामी विवेकानंद उनके संगीत वाली आखिरी
फिल्म थी.
प्रेमनाथ और निम्मी अभिनीत फिल्म दर्द-ए-दिल का निर्माण
और निर्देशन नितिन बोस ने किया था.
गीत के बोल:
न तो दिन ही दिन वो रहे मेरे
न वो रात रात मेरी रही
किसे शौक़ ज़िंदगी का है अब
मेरी साज़ बेसुर ही सही
न तो दिन ही दिन वो रहे मेरे
न तो चाँद पे वो निखार है
न वो चाँदनी में बहार है
न तो चाँद पे वो निखार है
न वो चाँदनी में बहार है
न वो जोश बासी-ए-इश्क़ में
न वो हुस्न ही में वो तड़प रही
न तो दिन ही दिन वो रहे मेरे
ना है इंतज़ार मुझे कोई
झूठे ज़िंदगी के फ़रेब से
न किसी की याद से वास्ता
न किसी की दिल में है कल रही
किसे शौक़ ज़िंदगी का है अब
यूँ ही काट दे तू रही सही
न तो दिन ही दिन वो रहे मेरे
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Na to din rahe-Dard-e-dil 1953
Artist: Nimmi
