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Apr 17, 2020

अम्बुआ के पेड़ सुहाने-सबक १९५०

गर्मी आ रही है तो अब हर पेड़ सुहाना ही लगेगा. आम
के पेड़ इस समय ज्यादा सुहाने इसलिए लगते हैं क्यूंकि
इसमें फल लगने वाले होते हैं. कच्चे आम खाओ या पके,
चटनी बनाओ या रस बनाओ. फलों का राजा है आम.

सुनते हैं फिल्म संगीत के सुनहरे दौर से एक गाना जिसे
लिखा है दीनानाथ मधोक ने और इसकी धुन तैयार की
है ए आर क़ुरैशी ने. इसे सुरिंदर कौर, आशा भोंसले और
प्रेमलता ने गाया है. साथ में कोरस की आवाजें फ्री हैं.

इस लोड किये हुए गाने पर जो फोटू चल रहा है वो है
१९७३ फिल्म की सबक का जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा नज़र
आ रहे हैं. सन १९५० की फिल्म के हीरो करण दीवान हैं.



गीत के बोल:

अम्बुआ के पेड़ सुहाने
का कहें का कहें मोसे कौन जाने
अम्बुआ के पेड़ सुहाने
का कहें का कहें मोसे कौन जाने

अम्बुआ के पेड़ झूमें मस्त हवाओं में
अम्बुआ के पेड़ झूमें मस्त हवाओं में
तोहे पुकारे री आ जा हो आ जा
ठंडी ठंडी छाँव में
तोहे पुकारे री आ जा हो आ जा
ठंडी ठंडी छाँव में
कर ले मुहब्बत किसी बहाने
कर ले मुहब्बत किसी बहाने
का कहें का कहें मोसे कौन जाने

अम्बुआ के पेड़ सुहाने
का कहें का कहें मोसे कौन जाने

गया बचपना आई जवानी
लेकर आई सौ अरमाँ
निकल के रहेंगे सब अरमाँ
धीरज धर लो मेरी जाँ
निकल के रहेंगे सब अरमाँ
धीरज धर लो मेरी जाँ
नैना तिहारे री गोरी हो गोरी
लगे मुस्काने
नैना तिहारे री गोरी हो गोरी
लगे मुस्काने
दिल का पपीहा भी लगा गाने
दिल का पपीहा भी लगा गाने
का कहें का कहें मोसे कौन जाने

अम्बुआ के पेड़ सुहाने
का कहें का कहें मोसे कौन जाने
……………………………………………..
Ambua ke ped suhane-Sabak 1950

Artists:

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Nov 2, 2019

उड़ते हुए पंछी-संजोग १९४३

देसी फिल्मों में चार्ली चैप्लिन जैसी मूंछें रखने वाले
काफी कलाकार हमने देखे हैं अभी तक. ३० और ४०
के दशक में एक कलाकार काफी चर्चित थे अपनी
भाव भंगिमाओं की वजह से-नूर मोहम्मद चार्ली. नाम
में आगे चार्ली लगा है इससे अनुमान लगाइए कि ये
चार्ली चैप्लिन के बड़े फैन रहे होंगे. गीत देख कर भी
आपको यकीन हो जायेगा इस बात पर.

कारदार निर्देशित इस फिल्म का संगीत नौशाद ने तैयार
किया है. प्रस्तुत गीत लिखा है दीनानाथ मधोक ने और
इसे गाया है नूर मोहम्मद चार्ली संग सुरैया ने. परदे पर
चार्ली के साथ मेहताब हैं.

सन १९३२ की एक फिल्म पाक दमन रक्कासा से शुरू
हुआ उनका कैरियर १९६३ की फिल्म अकेली मत जइयो
तक चला. बीच के समय में वे विभाजन के बाद पडोसी
देश भी रह आये. अंत समय उनका अमरीका में गुज़रा.

हिंदी सिनेमा के पहले स्टार कॉमेडियन नूर मोहम्मद की
आवाज़ भी जनता को पसंद थी और वे अपनी अदाओं और
गायकी दोनों के लिए चर्चित रहे.




गीत के बोल:

उड़ते हुए पंछी
कौन इनको बताये
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
दिल उनका हुआ जाये
उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी
क्या तुझसे कहूँ हाय
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
वो हमको बड़े भाये
उड़ते हुए पंछी

मुंह की बातें सारी
झूठों के झूठे दिलासे
मुंह की बातें सारी
झूठों के झूठे दिलासे
कोई मर जाये उनकी बाला से
कोई मर जाये उनकी बाला से

उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी
कौन इनको बताये
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
हम उनको बड़े भाये
उड़ते हुए पंछी

हो ओ ओ दिल है हसरतों से भरा रे
ये न लगी जाने ज़रा रे
हूँ
दिल है हसरतों से भरा
अरे अरे हाँ
ये न लगी जाने ज़रा
दिल में आ के देख मेरे
कौन खोटा कौन खरा
दिल में आ के देख मेरे
कौन खोटा कौन खरा

उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी
क्या तुझसे कहूँ हाय
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
वो हमको बड़े भाये
उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी.
……………………………………………
Udte hue panchhi-Sanjog 1943

Artists: Noor Mohammad Charlie, Mehtab

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Aug 15, 2019

वतन की माटी हाथ में लेकर-गाँव १९४७

सन १९४७ के फिल्म है गाँव . ये वही साल है जब देश आज़ाद
हुआ था. आजादी के पूर्व कुछ सालों में और आजादी के कुछ
साल बाद तक ऐसी फ़िल्में और गीत काफी बने जो देशभक्ति के
भावों को बढ़ाने का काम करते हैं.

सुनिए गाँव फिल्म से एक गीत मुकेश और गीता दत्त की आवाजों
में. संदेशात्मक गीत रचा है दीनानाथ मधोक ने और इसकी धुन
तैयार की हैं खेमचंद प्रकाश ने.





गीत के बोल:

वतन की माटी हाथ में लेकर माथे तिलक लगा लो
वतन की माटी हाथ में लेकर माथे तिलक लगा लो
जिस माटी ने जनम दिया उस माटी के गुण गा लो
जिस माटी ने जनम दिया उस माटी के गुण गा लो
वतन की माटी हाथ में लेकर माथे तिलक लगा लो

माटी हो के सोना उगले
माटी हो के सोना उगले ये सोना वो सोना है
ये सोना वो सोना है
चोर चुराए डाकू लूटे खतम कभी नहीं होना है
ऐसी प्यारी दौलत को
ऐसी प्यारी दौलत को तन मन से अपना लो
जिस माटी ने जनम दिया उस माटी के गुण गा लो
जिस माटी ने जनम दिया उस माटी के गुण गा लो

ग़ैरों ने बाहर से आ के
ग़ैरों ने बाहर से आ के
पेट भरे यहाँ अपने
पेट भरे यहाँ अपने
सुख की नींद सदा वो सोये देखे सुख के सपने
सुख की नींद सदा वो सोये देखे सुख के सपने
बन्द करो अब घर के द्वारे
बन्द करो अब घर के द्वारे घर को आज संभालो
जिस माटी ने जनम दिया उस माटी के गुण गा लो
जिस माटी ने जनम दिया उस माटी के गुण गा लो
………………………………………………………………
Watan ki maati haath mein le kar-Gaon 1947

Artists:

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Aug 28, 2018

मधुर मधुर गा रे मनवा-भक्त सूरदास १९४२

मधुरं भाषणं ये शब्द आपने ज़रूर सुने या पढ़े होंगे. मीठा
अर्थात मधुर सबको प्रिय है. अब वो स्वाद में हो या वाणी
में मधुरता से जीवन के कई कार्य बड़े आराम से निपट
जाया करते हैं.

डी एन मधोक का लिखा हुआ गीत सुनते हैं जिसका संगीत
तैयार किया है ज्ञान दत्त ने और इसे गाया है खुर्शीद ने. फिल्म
का नाम आप ऊपर पढ़ ही चुके हैं एक बार अतः दोबारा इसे
आप विवरण में और टैग में देख सकते हैं.




गीत के बोल:

मधुर मधुर गा रे मनवा
मधुर मधुर गा
मधुर मधुर गा रे मनवा
मधुर मधुर गा
नई धड़कन की
रीत मिलन की
नई धड़कन की
रीत मिलन की
सुर में मन के तार दे दे
मन का सन्देसा

मधुर मधुर गा आ आ आ
मधुर मधुर गा

मधुर मधुर गा रे मनवा
मधुर मधुर गा

सपना सुहाना मेरा
मधुर तराना तेरा
सपना सुहाना मेरा
मधुर तराना तेरा
रहूं ना होश में मन
होश से बेहोश बना
रहूं ना होश में मन
होश से बेहोश बना
ऐसा रंग जमा
ऐसा रंग जमा

मधुर मधुर गा आ आ आ
मधुर मधुर गा
मधुर मधुर गा रे मनवा
मधुर मधुर गा
मधुर मधुर गा रे मनवा
मधुर मधुर गा
………………………………………………………………
Madhur madhur gaa re manwa-Bhakt Surdas 1942

Artists:

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Aug 24, 2018

रैन गई अब हुआ सवेरा-भक्त सूरदास १९४२

के एल सहगल का गाया एक गीत सुनते हैं फिल्म
भक्त सूरदास से. हिंदी फिल्म संगीत और गैर फ़िल्मी
संगीत की चर्चा सहगल के बिना अधूरी ही रहेगी. ये
ऐसी आवाज़ है जो जड़ से जुडी आवाज़ है.

गीत दीनानाथ मधोक का है और संगीत ज्ञान दत्त का.
फिल्म भक्त सूरदास के गीत काफी लोकप्रिय गीत कहे
जाते हैं. हर नयी पीढ़ी में आपको सहगल की आवाज़
के मुरीद मिल जायेंगे.



गीत के बोल:

रैन गई अब हुआ सवेरा
रैन गई अब हुआ सवेरा
याद तेरी ने घेरा है
रैन गई अब हुआ सवेरा
याद तेरी ने घेरा है
रैन गई अब हुआ सवेरा

तुमसे नैन लगा के साजन
तुमसे नैन लगा के साजन
दुनिया से मुँह फेरा है

रैन गई अब हुआ सवेरा

तुम तो दिल की धड़कन बन के
दिल मे आ के बैठ गये
तुम तो दिल की धड़कन बन के
दिल मे आ के बैठ गये
इस घर को जो खो बैठा है
इस घर को जो खो बैठा है
उसका कौन बसेरा है

रैन गई अब हुआ सवेरा

मन के पँछी सोच समझ ले
वो जादू की नगरी है
मन के पँछी सोच समझ ले
वो जादू की नगरी है
सम्भल सम्भल कर घर आना
नज़रों ने जाल बखेरा है

रैन गई अब हुआ सवेरा
याद तेरी ने घेरा है
रैन गई अब हुआ सवेरा
…………………………………………………
Rain gayi ab hua savera-Bhakt Surdas 1942

Artist: KL Saigal

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Aug 20, 2018

झूठे हैं सब सपने सुहाने-रतन १९४४

वाह वाह करते करते हम कई बार कई चीज़ों को अनदेखा
कर देते हैं. यूँ भी होता है १० लोगों ने वाह वाह की तो
आपने भी जबरन वाह वाह कर दी. सामाजिक मजबूरी के
चलते या इस वहम से कि आपने तारीफ नहीं की तो आप
मूर्ख समझे जायेंगे. अपने आप को प्रगतिशील बतलाने के
लिया कई बार आपको कौवे के साथ कांव कांव भी करना
पड़ती है.

इसे ऐसे समझिए, शास्त्रीय संगीत के किसी कार्यक्रम में
बैठे दर्शक एक दूसरे को देख के जबरन सर हिलाते हैं
और वाह वाह भी करते हैं. इनमें कुछ होशियार दर्शक
भी होते हैं जिन्हें जानकारी होती है शास्त्रीय संगीत की.

आज भी दूरदर्शन के चैनलों पर ढेर शास्त्रीय संगीत और
नृत्य के कार्यक्रम आते हैं, कितने लोग देखते हैं ? न्यूज़
चैनल और सास-बहू के दर्शकों के अलावा बिरले ही हैं जो
नृत्य और गायन-वादन के कार्यक्रमों में रूचि लेते हैं.

सालों से वाह वाह करने का उद्योग चला आ रहा है. ये
सभी क्षेत्रों में सक्रिय है. फिल्म लाइन में भी है और ये
कभी खत्म ना होने वाली बीमारी है. पेड समीक्षा के बारे
में हमने काफी समय पहले सुन था. पेड न्यूज़ .तो अब
आम बात हो चली है. लाइक्स खरीदे जाते हैं, वीडियोज़
के व्यूज़ खरीदे जाते हैं.

आप जो उचक-कूद के इन्स्टाग्राम नाम के ग्राम पर जो
सेलिब्रिटीज के ठुमके झुमके देखते हैं उसके लिए आपको
तो ठेंगा मिलता है उन्हें हज़ारों लाखों रूपये मिलते हैं. 

सुनते हैं रतन फिल्म से मंजू की आवाज़ में एक और गीत.
दीनानाथ मधोक लेखक हैं और नौशाद संगीतकार.



गीत के बोल:

झूठे हैं सब सपने सुहाने
झूठे सब सपने सुहाने झूठे हैं
झूठे हैं सब सपने सुहाने
झूठे सब सपने सुहाने झूठे हैं

मूरख मन कछु जाने सपने सुहाने
मूरख मन कछु जाने सपने सुहाने
झूठे हैं सब सपने सुहाने
झूठे सब सपने सुहाने झूठे हैं

जो जो सुख तक़दीर में नहीं होते
मिल जाते हैं सोते सोते
जो जो सुख तक़दीर में नहीं होते
मिल जाते हैं सोते सोते
जब जागे दिल बात बात पर ढूँढे है
रोने के बहाने
झूठे हैं
जब जागे दिल बात-बात पर ढूँढे है
रोने के बहाने
झूठे हैं सब सपने सुहाने
झूठे सब सपने सुहाने झूठे हैं

जो दिल ले कर आँख चुराते हैं
आप सपन में मिलने आते हैं
जो दिल ले कर आँख चुराते हैं
आप सपन में मिलने आते हैं
दिल चाहे लम्बा हो सपना
फिर कब मिलें पिया कौन जाने
झूठे हैं
दिल चाहे लम्बा हो सपना
फिर कब मिलें पिया कौन जाने

झूठे हैं सब सपने सुहाने
झूठे सब सपने सुहाने झूठे हैं
 मूरख मन कछु जाने सपने सुहाने
मूरख मन कछु जाने सपने सुहाने
झूठे हैं सब सपने सुहाने
झूठे सब सपने सुहाने झूठे हैं
………………………………………
Jhoothe hain sab sapne suhane-Ratan 1944

Artist:

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May 10, 2018

एक मैं हूँ एक मेरी-तराना १९५१

दीनानाथ मधोक का लिखा हुआ एक गीत सुनते हैं
फिल्म तराना से. पिछली दफे हमने आपको इसी फिल्म
से प्रेम धवन का लिखा गीत सुनवाया था.

प्रस्तुत गीत तलत महमूद ने गाया है और इस गीत
के लिए संगीत तैयार किया है अनिल बिश्वास ने. ये
गीत फिल्माया गया है  दिलीप कुमार पर.




गीत के बोल:

जली जो शाख-ए-चमन साथ बाग़बाँ भी जला
जला के मेरे नशेमन को आस्मां भी जला

एक मैं हूँ एक मेरी बेक़सी की शाम है
अब तो तुझ बिन ज़िंदगी भी मुझ पे इक इल्ज़ाम है

दिल पे क्या गुज़री तेरे जाने से कोई क्या कहे
साँस जो आती है वो भी दर्द का पैग़ाम है

आँसूओं मुझ पर हँसो मेरे मुक़द्दर पर हँसो
अब कहाँ वो ज़िंदगी जिस का मुहब्बत नाम है
....................................................................
Ek main hoon-Tarana 1951

Artist: Dilip Kumar

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Jan 7, 2018

साक़ी साक़ी-गीत १९४४

जोहरा बाई अम्बलेवाली की दमदार और बुलंद आवाज़ में एक
गीत सुनते हैं फिल्म गीत से. ये सन १९४४ की फिल्म है जिसके
गीत दीनानाथ मधोक ने लिखे हैं. नौशाद इसके संगीतकार हैं.
इसी जोड़ी की एक बेहद चर्चित फिल्म भी सन १९४४ की रिलीज़
है-रतन जिसके गाने आज भी बजते हैं.





गीत के बोल:

साक़ी साक़ी
दिल बुझ ही गया है सीने में
कुछ लुत्फ़ नहीं अब जीने में
साक़ी साक़ी

साक़ी तेरे जाम वो जाम नहीं
क्या रखा है अब पीने में
साक़ी तेरे जाम वो जाम नहीं
क्या रखा है अब पीने में
साक़ी साक़ी

साक़ी पहली सी बात नहीं
पहले दिन पहली रात नहीं
जब तेरा ही वो हाथ नहीं
जब तेरा ही वो हाथ नहीं
क्या रखा है फिर सीने में
साक़ी साक़ी

अब सावन के दिन बीत गये
हम हार गये तुम जीत गये
साक़ी जब छोड़ के मीत गये
साक़ी जब छोड़ के मीत गये
कुछ लुत्फ़ नहीं फिर जीने में
साक़ी साक़ी

दिल बुझ ही गया है सीने में
कुछ लुत्फ़ नहीं अब जीने में
साक़ी साक़ी
……………………………………………….
Saaki saaki-Geeet 1944

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Nov 4, 2017

प्यार भी आता है कभी-गूँज १९५२

मेरी जानकारी में ३ फ़िल्में गूँज नाम से बन चुकी हैं अभी तक.
तीनों ही गूंजों की गूँज ज्यादा दूर तलक सुनाई नहीं दी. १९५२
वाली गूँज तो जनता शायद भुला भी चुकी होगी अभी तक.

फिल्म गूँज में सुरेश, सुरैया, सप्रू, मदन पूरी, मंजू, भगवान दादा,
रणधीर कपूर और रविकान्त जैसे कलाकार मौजूद हैं. रणधीर
कपूर कौन से हैं मालूम नहीं. फणि मजूमदार इसके निर्देशक हैं.
फणि मजूमदार सन १९४८ से १९६८ तक निर्देशन में सक्रिय रहे
और उन्होंने आकाशदीप और तूफ़ान में प्यार कहाँ जैसी फिल्मों
का निर्देशन भी किया. आकाशदीप फिल्म से जनता परिचित है
और इस फिल्म के २-३ गीत भी बेहद लोकप्रिय हैं. सबसे ज्यादा
चर्चित शायद ऊंचे लोग ही होगी जिसके गीत ज्यादा बजे थे.
आकाशदीप, ऊंचे लोग और तूफ़ान में प्यार कहाँ में चित्रगुप्त का
संगीत है. उन्होंने सरदुल क्वात्रा से शायद इसी फिल्म के लिए
सांगीतिक सेवाएं लीं
     
प्रस्तुत गीत दीनानाथ मधोक ने लिखा है जिसे आशा और रफ़ी
ने गाया है.



गीत के बोल:


प्यार भी आता है कभी गुस्सा भी आता है
प्यार भी आता है कभी गुस्सा भी आता है
तुम भी कहो कोई किसी को अजी यूँ छोड़ के जाता है
प्यार भी आता है कभी गुस्सा भी आता है
प्यार भी आता है कभी गुस्सा भी आता है
तुम भी कहो कोई किसी को अजी यूँ छोड़ के जाता है
प्यार भी आता है कभी गुस्सा भी आता है

आओ मैं आपके दिल में भर दूं अपने दिल की हाय
आओ मैं आपके दिल में भर दूं अपने दिल की हाय
फिर जा न सकोगे उस दम दर्द पराये
फिर जा ना सकोगे उस दम दर्द पराये
कैसे फिरोगे दिल ना लगे दिल घबराता है
कैसे फिरोगे दिल ना लगे दिल घबराता है
तुम भी कहो कोई किसी को अजी यूँ छोड़ के जाता है
प्यार भी आता है कभी गुस्सा भी आता है

किसे मालूम था दिल दे के सदा रोयेंगे हम भी
किसे मालूम था दिल दे के सदा रोयेंगे हम भी
औरों की तरह बेवफा हैं मेरे बलम भी
औरों की तरह बेवफा हैं मेरे बलम भी
आँख भर आती है कभी दिल भर आता है
आँख भर आती है कभी दिल भर आता है
तुम भी कहो कोई किसी को अजी यूँ छोड़ के जाता है

प्यार भी आता है कभी गुस्सा भी आता है
प्यार भी आता है कभी गुस्सा भी आता है
तुम भी कहो कोई किसी को अजी यूँ छोड़ के जाता है
प्यार भी आता है कभी गुस्सा भी आता है
..................................................................
Pyaar bhi aata hai-Goonj 1952

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Oct 19, 2017

आई दिवाली आई दिवाली-रतन १९४४

ब्लॉग के सभी पाठकों को दीपावली के शुभ अवसर पर
शुभकामनाएं.

इस अवसर पर सुनते हैं एक विंटेज दिवाली गीत. गीत
के रचयिता हैं दीनानाथ मधोक. जोहरा बाई अंबालेवाली
ने इसे नौशाद की धुन पर गाया है.




गीत के बोल:

आई दिवाली  आई दिवाली
आई दिवाली  आई दिवाली
दीपक संग नाचे पतंगा
मैं किसके संग नाचूं बता जा
दीपक संग नाचे पतंगा
मैं किसके संग नाचूं बता जा
आई दिवाली  आई दिवाली

बचपन जवानी संग नाच के चला गया
बचपन जवानी संग नाच के चला गया
अब नाचे जवानी बुढापे संग वो दिन आ गया
अब नाचे जवानी बुढापे संग वो दिन आ गया
बिछड़े हुए साथी ज़रा आ
मैं किसके संग नाचूं बता जा
आई दिवाली  आई दिवाली

किसको गुमान था वो दिन यूँ गुज़र जाएँगे
किसको गुमान था वो दिन यूँ गुज़र जाएँगे
और एक बार जा के वो फिर लौट के ना आएँगे
और एक बार जा के वो फिर लौट के ना आएँगे
बिछड़े हुए साथी ज़रा आ
मैं किसके संग नाचूं बता जा
आई दिवाली  आई दिवाली
दीपक संग नाचे पतंगा
मैं किसके संग नाचूं बता जा
आई दिवाली  आई दिवाली
................................................................
Aayi diwali aayi diwali-Ratan 1944

Artist: Swarnlata

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Sep 9, 2017

काली काली रात रे-सैयां १९५१

संगीतकार सज्जाद के संगीत निर्देशन वाला और लता मंगेशकर
का गाया एक उल्लेखनीय गीत सुनते हैं सन १९५१ की फिल्म
सैयां से. अजीत और मधुबाला इस फिल्म के प्रमुख कलाकार
हैं.

गीत दीना नाथ मधोक का है और इसे परदे पर मधुबाला गा
रही हैं. काफी काली रात है, वीडियो की स्क्रीन भी काली है.
वीडियो दुर्लभ है देखने को मिला रहा है यही बहुत है. इसे
लोड करने वाले को कोटिशः धन्यवाद.



गीत के बोल:

काली काली रात रे
काली काली रात रे दिल बड़ा सताये
काली काली रात रे दिल बड़ा सताये
तेरी याद आये
तेरी याद आये
काली काली रात रे दिल बड़ा सताये
काली काली रात रे दिल बड़ा सताये
तेरी याद आये
तेरी याद आये

झूठों से प्यार किया हाय क्या किया
सारे जहाँ का दुःख ले लिया
झूठों से प्यार किया हाय क्या किया
सारे जहाँ का दुःख ले लिया
अब रो रो सावन जाये
काली काली रात रे दिल बड़ा सताये
काली काली रात रे दिल बड़ा सताये
तेरी याद आये
तेरी याद आये

भीगी भीगी पलकों की लाज तेरे हाथ है
तू तो गया है तेरी याद मेरे साथ है
भीगी भीगी पलकों की लाज तेरे हाथ है
तू तो गया है तेरी याद मेरे साथ है
जो दिल को धीर बंधाये
काली काली रात रे दिल बड़ा सताये
काली काली रात रे दिल बड़ा सताये
तेरी याद आये
तेरी याद आये
……………………………………………….
Kali kali raat re-Saiyan 1951

Artist:Madhubala

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Aug 19, 2017

मधुकर श्याम हमारे चोर-भक्त सूरदास १९४२

फिल्म भक्त सूरदास से एक गीत सुनते हैं सहगल की आवाज़ में.
दीना नाथ मधोक गीतकार हैं और धुन बनाई है ज्ञान दत्त ने.

इस जगत का सबसे बड़ा चोर और सबसे बड़ा रसिया जिसे कहते
हैं और जिसे माखनचोर, नंदकिशोर इत्यादि कई नामों से पुकारा
जाता है, कृष्ण के फ़िल्मी भजन सबसे ज्यादा मिलेंगे आपको.




गीत के बोल:

मधुकर श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
मन हर लीनो माधुरी मूरत
मन हर लीनो माधुरी मूरत
निरख नैन की कोर
श्याम हमारे चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर

सिर पे जाके मुकट सुहाये
सिर पे जाके मुकट सुहाये
माथे तिलक नैन कजरारे
माथे तिलक नैन कजरारे
मुख सुंदर ज्यूँ भोर
श्याम हमारे चोर
चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर

सूरदास के चोर कन्हैया
मनमोहन मुरली के बजैया
सूरदास के चोर कन्हैया
मनमोहन मुरली के बजैया
मनमोहन मुरली के बजैया
नटखट नन्दकिशोर
चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
श्याम हमारे चोर
श्याम हमारे चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
........................................................................
Madhukar Shyam hamare-Bhakt Surdas 1942

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Jun 24, 2017

रूखी सूखी मैं खा लूंगी-इन्साफ १९४६

नायिका द्वारा रूखी सूखी खाने का कंसेप्ट पुराना है.
अक्सर हम हिंदी फिल्मों में अमीर नायिकाओं को
संवाद के ज़रिये ये कहते सुनते हैं. ये बात इस पुराने
गाने में भी है जो सन १९४६ की फिल्म इन्साफ में
मौजूद है.

दीनानाथ मधोक के लिखे इस गीत की धुन बनाई है
हरि प्रसन्न दस ने.  हमीदा बानो और रफ़ी संग
कोरस ने इसे गाया है.




गीत के बोल:

रूखी सूखी मैं खा लूंगी
रूखी सूखी मैं खा लूंगी
पास बुला लो मोरे राजा
हो ओ ओ ओ ओ सावन में गरवा लगा लूंगी
हो ओ ओ ओ ओ सावन में गरवा लगा लूंगी
पास बुला लो मोरे राजा

छुट्टी न देवे दरोगा मिज़ाजी
छुट्टी न देवे दरोगा मिज़ाजी
तोहे बुलाने पे होवे न राजी
तोहे बुलाने पे होवे न राजी
आ जा उसे मैं समझा लूंगी
हो ओ ओ ओ आ जा उसे मैं समझा लूंगी
हाँ हाँ हाँ हाँ सावन में गरवा लगा लूंगी
पास बुला लो मोरे राजा

गुस्से का हिटलर है ये राम जाने
गुस्से का हिटलर है ये राम जाने
तेरी तो क्या बाप की भी ना माने
तेरी तो क्या बाप की भी ना माने
यूँ तो मैं उसको मना लूंगी
हो ओ ओ ओ यूँ तो मैं उसको मना लूंगी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ सावन में गरवा लगा लूंगी
पास बुला लो मोरे राजा

रूखी सूखी मैं खा लूंगी
रूखी सूखी मैं खा लूंगी
पास बुला लो मोरे राजा
हो ओ ओ ओ सावन में गरवा लगा लूंगी
हो ओ ओ ओ सावन में गरवा लगा लूंगी
पास बुला लो मोरे राजा

सावन में गरवा लगा लूंगी
हो ओ ओ ओ सावन में गरवा लगा लूंगी
पास बुला लो मोरे राजा
………………………………………………
Rookhi sookhi main kha loongi-Insaaf 1946

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May 14, 2017

इश्क का दर्द सुहाना-इशारा १९४३

फिल्म:इशारा
वर्ष:१९४३
गीतकार:दीनाहाथ मधोक
गायक:वसंत कुमठेकर
संगीतकार:खुर्शीद अनवर



गीत के बोल:

इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना

इश्क़ पहलू में दिया दिल तो दिया क्या तूने
इश्क़ पहलू में दिया दिल तो दिया क्या तूने
इस तरह दर्द को खाली है किया क्या तूने
इस तरह दर्द को खाली है किया क्या तूने
कभी दिल से जिगर में आना हो
दिल से जिगर में आना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना

क्यूँ तड़पता है ज़रा
क्यूँ तड़पता है ज़रा
उनके चल अब कानों से
क्यूँ नहीं मानता हाय
क्यूँ नहीं मानता हाय मेरे समझाने से
मेरे दिल को तुम्हीं समझाना हो
मेरे दिल को तुम्हीं समझाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना
………………………………………………
Ishq ka dard suhana-Ishara 1943

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Mar 4, 2017

न तो दिन ही दिन वो रहे मेरे-दर्द-ए-दिल-१९५३

संगीत जगत के पितामह कहे जाने वाले आर सी बोराल के
संगीत निर्देशन वाला एक गीत सुनते हैं सन १९५३ की फिल्म
दर्द-ए-दिल से. इसे गाया है लता मंगेशकर ने. गीत  लिखा है
दीनानाथ मधोक ने.

५० के दशक में आर सी बोराल के संगीत वाली कम फ़िल्में
आयीं. १९५५ की स्वामी विवेकानंद उनके संगीत वाली आखिरी
फिल्म थी.

प्रेमनाथ और निम्मी अभिनीत फिल्म दर्द-ए-दिल का निर्माण
और निर्देशन नितिन बोस ने किया था.



गीत के बोल:

न तो दिन ही दिन वो रहे मेरे
न वो रात रात मेरी रही
किसे शौक़ ज़िंदगी का है अब
मेरी साज़ बेसुर ही सही
न तो दिन ही दिन वो रहे मेरे

न तो चाँद पे वो निखार है
न वो चाँदनी में बहार है
न तो चाँद पे वो निखार है
न वो चाँदनी में बहार है
न वो जोश बासी-ए-इश्क़ में
न वो हुस्न ही में वो तड़प रही

न तो दिन ही दिन वो रहे मेरे

ना है इंतज़ार मुझे कोई
झूठे ज़िंदगी के फ़रेब से
न किसी की याद से वास्ता
न किसी की दिल में है कल रही
किसे शौक़ ज़िंदगी का है अब
यूँ ही काट दे तू रही सही
न तो दिन ही दिन वो रहे मेरे
..................................................................
Na to din rahe-Dard-e-dil 1953

Artist: Nimmi

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Feb 23, 2017

पापी पपीहा रे-परवाना १९४७

आज सुनते हैं ‘नन्ही सी जान’ सीरीज़ से अगला गीत. इसे
आप पपीहा हिट भी कह सकते हैं. गीत फिल्माया गया है
सुरैया ने जिन्होंने इसे परदे पर और परदे के पीछे दोनों ही
जगह गया है. इसे आप कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना हिट
भी कह सकते हैं. नायिका भेड़ों की तरफ देखते देखते पपीहा
शब्द बोल रही है. नायिका के अत्यधिक मुस्कुराने की वजह
हो सकती है ये. हो सकता है पपीहा बड़े परदे पर साफ़ दिखाई
देता हो और हमें ना दिखाई दे रहा हो.

पपीहा सिम्बलिक भी हो सकता है. एक जनाब बांसुरी बजा
रहे हैं गीत में, हो सकता है उनके लिए ये शब्द इस्तेमाल
किया गया हो. ‘बैरी हिट’ मैंने इसलिए नहीं कहा क्यूंकि मुझे
साउथ अफ्रीका के मशहूर क्रिकेटर बैरी रिचर्ड्स याद आ जाते
हैं जब भी ये शब्द सुनता हूँ.

गनीमत है गीत में नायिका ने पपीता नहीं खाया वरना इसे
जनता पपीता हिट कह डालती. क्या करें भाई, हमें श्रेणी बनाने
वालों ने मजबूर कर दिया है और गूगल भाई साहब भी कुछ
इनोवेटिव मसलों पर जल्दी गौर फ़रमाया करते हैं. सर्च पर
से एक दिन हमारा ब्लॉग हिमालय की छोटी चढ जाता है तो
दूसरे ही दिन ऐसे उतरता है जैसे कोई आर्ट फिल्म फटीचर
सिनेमा हॉल से २-३ दिन में गुम हो के लावारिस हो जाती है.

गीत सुनते हैं जिसे दीनानाथ मधोक ने लिखा है और इसकी
धुन बनाई है खुर्शीद अनवर ने.




गीत के बोल:

पापी पपीहा रे पी पी न बोल
बैरी पी पी न बोल
नन्ही सी जान मेरी सुन के न जाये डोल
पी पी न बोल बैरी पी पी न बोल
पापी पपीहा रे पी पी न बोल
बैरी पी पी न बोल

उन को ये घमण्ड है
मैं दो नैना मारी रे
मोहे मान इस बात पर के
मैं साजन की प्यारी रे
भेद हमारे जी के पिया पास नही खोल
पी पी न बोल बैरी पी पी न बोल
पापी पपीहा रे पी पी न बोल
बैरी पी पी न बोल
………………………………………………………..
Papi papeeha re-Parwana 1947

Artists: Suraiya

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Jan 7, 2017

कागज़ की मेरी नाव-दो दिल १९४७

पानी केरा बुलबुला अस मानुस की जात. गूढ़ अर्थ वाले शब्द
हैं. कुछ गीत हमें इसका आभास करवाते हैं. आज सुनते हैं
फिल्म दो दिल से एक और गीत मुकेश और सुरैया का गाया
हुआ.

पंडित गोविन्दराम के संगीत निर्देशन में ये गीत बना था जिसे
दीनानाथ मधोक ने लिखा है. रेयर कोम्बिनेशन है मुकेश और
सुरैया का. हम लोग कुछ खास गायकों के युगल गीत सुनने के
आदि हो चुके हैं और अमर ध्यान दुसरे गायकों वाले युगल
गीतों की तरफ नहीं जा पाता है. मुकेश ने उस समय की काफी
सारी गायकों के साथ युगल गीत गाये हैं जिनमें शमशाद और
गीत दत्त प्रमुख हैं. लाता के साथ गाये युगल गीत तो खैर
बहुत से हैं मुकेश के.




गीत के बोल:

कागज़ की मेरी नाव
कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
इस डोलती नैया का
इस डोलती नैया का अब कौन सहारा है
कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
कागज़ की मेरी नाव

आँसू भी छलकते हैं और ग़म की घटायें हैं
आँसू भी छलकते हैं और ग़म की घटायें हैं
आवो मेरी आँखों में
आवो मेरी आँखों में सावन का नज़ारा है
इस डोलती नैया का
इस डोलती नैया का अब कौन सहारा है

कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
कागज़ की मेरी नाव

हमने तेरी आँखों में एक दुनिया बसाई थी
हमने तेरी आँखों में एक दुनिया बसाई थी
जब तुम ही फिरे हमसे फिर कौन हमारा है
इस डोलती नैया का अब कौन सहारा है

कागज़ की मेरी नाव और दूर किनारा है
कागज़ की मेरी नाव
…………………………………………………
Kagaz ki meri naav-Do dil 1947

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Sep 25, 2016

फिर नैन बाँवरे भर भर आये-दो दिल १९४७

गायिका सुरैया का पूरा नाम है सुरैया जमाल शेख. सन १९२९ में
गुजरावालां में जन्मी सुरैया का गायन कैरियर सन १९४२ से शुरू
हुआ जब उन्होंने महताब नामक एक्ट्रेस के लिए पार्श्व गायन किया.
बाल कलाकार के रूप में काम करते हुए उन्होंने अपने गाने भी गाये.
संगीत की शिक्षा उन्हें बाल्य काल में ही मिलना शुरू हो गयी थी.
डांस उन्होंने सीखा मुमताज़ अली से जो मशहूर कॉमेडियन महमूद
के पिता हैं.

सन १९३७ की फिल्म उसने क्या सोचा से बतौर बाल कलाकार उनके
एक्टिंग कैरियर का आगाज़ हुआ. अपने समय की सबसे मशहूर
गायिका-नायिका के बारे में चर्चा करेंगे आगे, फिलहाल एक गीत सुनें
फिल्म दो दिल से दीनानाथ मधोक का लिखा हुआ जिसे गोविन्दराम
ने संगीत से संवारा.

गीत में दो शब्द हैं-सोना, रूपा. इन शब्दों वाला एक गीत है देव आनंद
की एक फिल्म जोशीला में आशा भोंसले का गाया हुआ. गीत इन्हीं शब्दों
से शुरू होता है.



गीत के बोल:

फिर नैन बाँवरे भर भर आये
हाय भर भर आये
फिर नैन बाँवरे भर भर आये
आहों की ओट में निकले
मेरे दिल से हाय हाय
आहों की ओट में निकले
मेरे दिल से हाय हाय
फिर नैन बाँवरे भर भर आये
हाय भर भर आये
फिर नैन बाँवरे भर भर आये

एक तो सूनी सेज हमारी दूजे रैन अँधेरी
रैन अँधेरी
एक तो सूनी सेज हमारी दूजे रैन अँधेरी
रैन अँधेरी
तीजे पहरे पे दुनिया है पेच  न जाये मेरी
तीजे पहरे पे दुनिया है पेच  न जाये मेरी
जब याद तुम्हारी आये
जब याद तुम्हारी आये
मेरा नन्हा सा जियरा धड़क जाये

फिर नैन बाँवरे भर भर आये
हाय भर भर आये
फिर नैन बाँवरे भर भर आये

रूपा न माँगू सोना न माँगू
रूपा न माँगू सोना न माँगू
माँगूँ तोसे ये दाम हो
माँगूँ तोसे ये दाम
हाड़ मास का पिंजरा जाये
साँस आये न आये
मेरे लब पे रहे पिया का नाम
वो प्यार करे हम दोनों
वो प्यार करे हम दोनों
जिस प्यार के किस्से जग गाये

फिर नैन बाँवरे भर भर आये
हाय भर भर आये
फिर नैन बाँवरे भर भर आये
………………………………………………………………………
Phir nain bawre bhar bhar-Do dil 1947

Artist: Suraiya

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Sep 21, 2016

चले जा रहे हो जो नज़रें चुराये-गूँज १९५२

गूँज नाम से ३ फ़िल्में तो मुझे याद हैं. हाँ, गूगल की मदद ले
कर मैं भी कुछ दावे कर सकता हूँ अपने ज्ञान के, मगर नहीं.
आपको इस फिल्म का लहराने और बल खाने वाला गीत सुनवाया
था पहले.

दूसरा गीत सुनते हैं इस फिल्म से जो सुरैया का गाया हुआ है.
इसके बोल भी डी एन मधोक साहब ने लिखे हैं और संगीत फिर
से एक बार सर्दूल क्वात्रा का ही है.



गीत के बोल:

चले जा रहे हो जो नज़रें चुराये
चले जा रहे हो जो नज़रें चुराये
हमें कुछ न कहना जो हम याद आयें
चले जा रहे हो जो नज़रें चुराये
हमें कुछ न कहना जो हम याद आयें
चले जा रहे हो

न दिन कट सकेंगे न गुजरेंगी रातें
न दिन कट सकेंगे न गुजरेंगी रातें
वहां किससे होंगीं मोहब्बत की बातें
वहां किससे होंगीं मोहब्बत की बातें
मोहब्बत का मारा अगर दिल सताये
मोहब्बत का मारा अगर दिल सताये
हमें कुछ न कहना जो हम याद आयें
चले जा रहे हो

खड़े हो के खिडकी में रातें बिताना
खड़े हो के खिडकी में रातें बिताना
गगन के सितारों से जान-ओ-दिल लगाना
गगन के सितारों से जान-ओ-दिल लगाना
सुबह का सितारा अगर टिमटिमाये
सुबह का सितारा अगर टिमटिमाये
हमें कुछ न कहना जो हम याद आयें
हमें कुछ न कहना जो हम याद आयें
चले जा रहे हो जो नज़रें चुराये
हमें कुछ न कहना जो हम याद आयें
.......................................................................
Chale ja rahe ho-Goonj 1952

Artist: Suraiya

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Jul 29, 2016

जब तुम ही नहीं अपने-परवाना १९४७

सुरैया का गाया हुआ एक मधुर गीत सुनते हैं फिल्म परवाना से.
ये सन १९४७ की फिल्म है जिस साल हमारे देश को आजादी
मिली थी.

खुर्शीद अनवर आजादी के बाद पाकिस्तान चले गए और वहाँ
की फिल्मों में संगीत देने लगे. विभाजन के पूर्व वे बॉलीवुड
की फिल्मों में संगीत दिया करते थे, तब फिल्म उद्योग भी एक
ही था. वे काफी प्रतिभाशाली संगीतकार थे. उन्होंने भी सभी
गायकों के लिए उल्लेखनीय धुनें बनायीं.

प्रस्तुत गीत डी एन मधोक ने लिखा था. फिल्म परवाना का
निर्देशन जे के नंदा ने किया था. जीत प्रोडक्शंस नाम संस्था ने
इसका निर्माण किया. इस फिल्म में सहगल और सुरैया प्रमुख
कलाकार हैं.





गीत के बोल:

जब तुम ही नहीं अपने
दुनिया ही बेगानी है
जब तुम ही नहीं अपने
दुनिया ही बेगानी है
उल्फ़त जिसे कहते हैं
इक झूठी कहानी है
उल्फ़त जिसे कहते हैं
इक झूठी कहानी है

जाते हुए क्यों तुमको
इस दिल का खयाल आता
जाते हुए क्यों तुमको
इस दिल का खयाल आता
तड़पा के चले जाना
इक रीत पुरानी है
तड़पा के चले जाना
इक रीत पुरानी है

जब तुम ही नहीं अपने
दुनिया ही बेगानी है

परवाने के जलने पे
हँसना न तमाशाई
परवाने के जलने पे
हँसना न तमाशाई
हँसती हुई शमा भी
इक रात की रानी है
हँसती हुई शमा भी
इक रात की रानी है

जब तुम ही नहीं अपने
दुनिया ही बेगानी है
.................................................................
Jab tumhin nahin apne-Parwana 1947


Artist: Suraiya

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