एक रात की ये प्रीत-फरार १९५५
आपने उसना थे कुछ दिन प[एहले. दूसरा सुनिए गीत दत्त
का गाया हुआ.
इसे प्रेम धवन ने लिखा है और संगीतकार वही हैं-अनिल बिश्वास.
गीत के बोल:
एक रात की ये प्रीत एक रात का है गीत
कहीं तोड़ के ये सपने ये रात न जाए बीत
ऐ चाँद न जाना सो ऐ तारो न जाना खो
जो भी हो सो हो जग में एक भोर कभी न हो
ये ऊँचा आसमाँ इक बार जो कह दे हो
तो ये रात माँग लूँ दे के दोनों जहाँ
..........................................................
Ek raat ki ye preet-Faraar 1955

0 comments:
Post a Comment