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Nov 19, 2019

लूटा है ज़माने ने-दोराहा १९५२

बहुत दिनों बाद कोई फरमाईश आई है अतः हम आपको
एक गीत उसी फिल्म से सुनवायेंगे जिससे कल एक सुनवाया
था.

अनिल बिश्वास को हिंदी फिल्म संगीत जगत में पितामह
का दर्ज़ा हासिल है. उन्होंने हिंदी गाने के फॉर्मेट और उसकी
जमावट पे जो काम किया उसे काफी संगीतकारों ने अपनाया
और इसका फायदा ५० के दशक में साफ़ नज़र आने लगा.

आज सुनते हैं लता मंगेशकर का गाया हुआ एक बढ़िया गीत
फिल्म दोराहा से. प्रेम धवन की रचना है. तीनों अंतरे अलग
अलग तरीके से गाये गए हैं. ये करिश्मा आपको अनिल बिश्वास
के संगीत में खूब मिलेगा.




गीत के बोल:

लूटा है ज़माने ने क़िस्मत ने मिटाया है
इक बार हँसाया था
इक बार हँसाया था सौ बार रुलाया है
लूटा है ज़माने ने क़िस्मत ने मिटाया है

दुनिया में वफ़ा कैसी उल्फ़त भी है इक धोखा
दुनिया में वफ़ा कैसी उल्फ़त भी है इक धोखा
ये दुनिया भी देखी है
ये दुनिया भी देखी है जो धोखा भी खाया है

इस ग़म के अँधेरे में अब याद नहीं ये भी
इस ग़म के अँधेरे में अब याद नहीं ये भी
कब दीप जलाया था
कब दीप जलाया था कब दीप बुझाया है

ख़ामोश हूँ इस डर से रुसवाई न हो तेरी
ख़ामोश हूँ इस डर से रुसवाई न हो तेरी
उमडे हुये अश्क़ों को
उमडे हुये अश्क़ों को पलकों में छुपाया है

लूटा है ज़माने ने क़िस्मत ने मिटाया है
…………………………………………………….
Loota hai zamane ne-Doraha 1952

Artist: Nalini Jaywant

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Nov 18, 2019

घड़ियाँ गिनी हैं मैंने तेरे इंतजार की-दोराहा १९५२

घड़ियों का ज़माना बीत चुका. मेरा आशय हाथ-घड़ियों से
है. मोबाइल ने इनकी उपियोगिता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया
है. किसी ज़माने में ये फैशन का सामान भी हुआ करती थीं.
पहनने को तो आज भी पब्लिक पहनती है मगर आबादी
का छोटा हिस्सा.

घंटे-घड़ियाल हिट्स के अंतर्गत हमने आपको अभी तक ५-६
गीत सुनवा दिए हैं. एक और सुन लेते हैं जो बेचारा सुने
जाने को बेताब है.

गीत है दोराहा फिल्म से जिसे प्रेम धवन ने लिखा है और
अनिल बिश्वास ने संगीत से संवारा. इसे लता मंगेशकर ने
गाया है



गीत के बोल:


घड़ियाँ गिनी हैं मैंने तेरे इंतजार की
क्या तुझको भी खबर है दिल-ए-बेकरार की
क्या तुझको भी खबर है दिल-ए-बेकरार की
ओ दिल-ए-बेकरार की
ओ दिल-ए-बेकरार की

वो भीगी भीगी राह
वो दिल से नज़र की बात
जादू सा कर गयी हैं निगाहें वो प्यार की
जादू सा कर गयी हैं निगाहें वो प्यार की
हो निगाहें वो प्यार की
हो निगाहें वो प्यार की

तुमसे तो हर तरफ थे गुल्चां खिले हुए
लाऊँ कहाँ से हाय वो मस्ती बहार की
लाऊँ कहाँ से हाय वो मस्ती बहार की
वो मस्ती बहार की
वो मस्ती बहार की

दुनिया की कुछ खबर है ना अपना ही होश है
दुनिया से ही तो है मेरे सब्र-ओ-करार की
दुनिया से ही तो है मेरे सब्र-ओ-करार की
मेरे सब्र-ओ-करार की
मेरे सब्र-ओ-करार की
………………………………………………….
Ghadiyan gini hain maine-Doraha 1952

Artist: Nalini Jaywant

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Oct 31, 2019

मतवाले नैनों वाले के मैं-बेक़सूर १९५०

आपको सत्तर के दशक से कुछ गीत सुनवा दिए अब
एक पचास के दशक का सुन लेते हैं. आखिर को इन
गीतों का क्या कसूर है जो हम ना सुनें.

तो इसी बात पर हो जाए फिल्म बेक़सूर से एक गीत
जो लता मंगेशकर ने गाया है. आरजू लखनवी के बोल
हैं और अनिल बिश्वास का संगीत. गीतकार ने आसान
गीत नहीं लिखा है. ये भी दिमाग पर बत्ती देने वाला
गीत है जिसके सन्दर्भ सहित भावार्थ पे जाएँ तो ३-४
पन्ने का निबंध आसानी से तैयार हो जायेगा.

गीत मधुबाला पर फिल्माया गया है. सिल्वर स्क्रीन को
सिल्वर ऐसे चेहरों की वजह से भी कहा जाता है. गीत
की शुरू की दो पंक्तियों को आपने मुकेश के गाये एक
और गीत में सुना होगा जो मजोज कुमार पर फिल्माया
गया है. उस गीत में नायक नायिका के लिए ये बात
कह रहा है.




गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
गोरे गोरे चाँद से मुख पर
काली काली आँखें हैं
देख के जिनको नींद उड़ जाये
वो मतवाली आँखें हैं

मतवाले नैनों वाले के मैं
वारी वारी जाऊं
मतवाले नैनों वाले के मैं
वारी वारी जाऊं
मतवाले नैनों वाले
मतवाले नैनों वाले के मैं
वारी वारी जाऊं
हो मैं वारी वारी जाऊं
हो मैं वारी वारी जाऊं
मतवाले नैनों वाले के मैं
वारी वारी जाऊं

इस दर्जा नाज़ उठाये के दिलबर बना दिया
तेवर को तीर नाज़ को नश्तर बना दिया
इस दर्जा नाज़ उठाये के दिलबर बना दिया
तेवर को तीर नाज़ को नश्तर बना दिया
सह सह के चोट-ए-मोम को पत्थर बना दिया
सह सह के चोट-ए-मोम को पत्थर बना दिया
सच है तुम्हें मैं ही ने सितमगर बना दिया

मतवाले नैनों वाले के मैं
वारी वारी जाऊं
मतवाले नैनों वाले के मैं
वारी वारी जाऊं
मतवाले नैनों वाले
मतवाले नैनों वाले के मैं
वारी वारी जाऊं
हो मैं वारी वारी जाऊं
हो मैं वारी वारी जाऊं
मतवाले नैनों वाले के मैं
वारी वारी जाऊं

जादू भरा वो मीठी निगाहों का प्यार है
जो तीर है तबर है छुरी है कटार है
जादू भरा वो मीठी निगाहों का प्यार है
जो तीर है तबर है छुरी है कटार है
चरकों पे चरके खाऊँ यही दिल की है खुशी
चरकों पे चरके खाऊँ यही दिल की है खुशी
मरने में जिंदगी है खिज़ां में बहार है

मतवाले नैनों वाले के मैं
वारी वारी जाऊं
मतवाले नैनों वाले के मैं
वारी वारी जाऊं
मतवाले नैनों वाले
मतवाले नैनों वाले के मैं
वारी वारी जाऊं
हो मैं वारी वारी जाऊं
हो मैं वारी वारी जाऊं
मतवाले नैनों वाले के मैं
वारी वारी जाऊं
…………………………………………………..
Matwale nainon wale ke main-Beqasoor 1950

Artists: Madhubala

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Sep 5, 2019

आँख मिलने का बहाना हो गया-लेडी डॉक्टर १९४४

हिंदी सिनेमा का डॉक्टर सन १९४१ में आया. लेडी डॉक्टर
आई सन १९४४ में. नर्स पहले आ गयी सन १९४३ में.
हॉस्पिटल भी पहले आ गया सन १९४३ में. कम्पाउन्डर
को किसी ने नहीं पूछा कब आएगा.

सुनते हैं हमीदा बानो और स्नेहल भाटकर का गाया एक
युगल गीत जिसे लिखा है वली साहब ने और इसकी धुन
तैयार की अनिल बिश्वास ने.




गीत के बोल:

आँख मिलने का बहाना हो गया
हो गया
आँख मिलने का बहाना हो गया
हो गया
दिल बेगाना था बेगाना था
बेगाना हो गया
आँख मिलने का बहाना हो गया

तीर टेढ़ा उसने फेंका था मगर
तीर टेढ़ा उसने फेंका था मगर
आगे बढ़ के दिल निशाना हो गया
हो गया
आगे बढ़ के दिल निशाना हो गया

इंतज़ारी में क़यामत आ गई
इक क़यामत उनका आना हो गया
हो गया
इक क़यामत उनका आना हो गया

जब से तुम मेरे हुए हो ए हुज़ूर
ए हुज़ूर
जब से तुम मेरे हुए हो ए हुज़ूर
ए हुज़ूर
तब से दुश्मन कुल ज़माना हो गया
हो गया
तब से दुश्मन कुल ज़माना हो गया

उनको देखा और फिर देखा 'वली'
बात इतनी थी फ़साना हो गया
हो गया
बात इतनी थी फ़साना हो गया
हो गया
आँख मिलने का बहाना हो गया
..........................................................
Aankh mmilne ka bahana-Lady doctor 1944

Artist:

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Sep 4, 2019

सुंदरी ओ सुंदरी-लाजवाब १९५०

फिल्म लाजवाब का ये लाजवाब गीत इतना लाजवाब है कि
ये भविष्य की एक फिल्म के गीत-मनचली ओ मनचली की
याद दिला देता है. है न जादू. इसमें महिला और पुरुष कोरस
की पंक्तियां ओवरलैप करती हैं जो एक तरीके का अनूठापन है.

अनिल बिश्वास, बीनापानी मुखर्जी और लता मंगेशकर संग
ढेर सारे कलाकारों द्वारा गाया गया ये गीत सोहन और रेहना
अभिनीत फिल्म से है. इस फिल्म में प्रस्तुत गीत के लेखक
प्रेम धवन ने भी काम किया है. संगीतकार हैं अनिल बिश्वास.
फिल्म के अन्य गीत नाचे रे गोरी डिंगू में संगीतकार की
आवाज़ अलग सी लगती है. लगता है ये गुण भी सी रामचंद्र
ने अपने गुरु से ही ग्रहण किया था.




गीत के बोल:

सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
हो ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ
सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
ओ सुंदरी
दो दिनों की जिंदगी में क्यूँ कमाए गीत
दो दिनों की जिंदगी में क्यूँ कमाए गीत
मारे जा मारे जा गोरी
मारे जा मारे जा गोरी  नैननवा के तीर तीर
जिया लागे ना री जिया लागे ना री
सुंदरी ओ सुंदरी हाय दो दिनों की जिंदगी
हो ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ
सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
ओ सुंदरी

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
काली काली जुल्फें तेरी गोरे गोरे गाल
ओ गोरी
गोरे गोरे गाल
ओ छोरी
गोरे गोरे गाल
ठुमक ठुमक चाले छोरी मोरनी की चाल
छोरी मोरनी की चाल होए
ठुमक ठुमक चाले छोरी मोरनी की चाल
छोरी मोरनी की चाल
होये होये होये होये होये होये होये होये

झूठे तेरे वादे जा रे झूठे तेरे गीत
जा रे झूठे तेरे गीत
हमको नहीं भाये तेरी प्रीत की ये रीत
तेरी प्रीत की ये रीत
जब तू ही मुंह फेर ले तो
हो छोरी हो गोरी
जब तू ही मुंह फेर ले तो कैसे धारूं धीर
जिया लागे ना री जिया लागे ना री

सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
हो ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ
सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
ओ सुंदरी

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
टन टना टन माडल बाजे
ढोल बाजे ढमा ढम ढोल बाजे
जिया बोले धक धक जिया बोले धक धक
हो ओ ओ ओ ओ
दो दिनों की जिंदगी में दिल लगाये कौन
हाँ दिल लगाये कौन
प्रेम की अग्नि में भला जी जलाये कौन
भला जी जलाये कौन
फिर नैन मिला के काहे डारी
हो गोरी हो छोरी
फिर नैन मिला के काहे डारी प्यार की ज़ंजीर
जिया लागे ना री जिया लागे ना री

सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
हो ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ
सुंदरी ओ सुंदरी दो दिनों की जिंदगी
सुंदरी
...........................................................
Sundari o sundari-Lajawab 1950

Artist:

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Aug 31, 2019

आँखें कह गईं दिल की बात-लाडली १९४९

काली काली आँखें क्या कह गयीं जो हीरो के लट्टू
फ्यूज हैं? सुनते हैं फिल्म लाडली से शिवदयाल बातिश
का गाया हुआ गाना जिसे लिखा है आह सीतापुरी ने
और धुन तैयार की है अनिल बिश्वास ने.

शिवदयाल बातिश स्वयं कुछ गीतों का संगीत रच
चुके हैं फिल्मों के लिए. उन्होंने दूसरे संगीतकारों के
लिए भी कुछ गीत गाये. शास्त्रीय संगीत वाले गायकों
को फिल्म क्षेत्र में अवसर कम मिलते हैं.



गीत के बोल:

आँखें कह गईं दिल की बात
आँखें कह गईं दिल की बात
दो काली मतवाली आँखें
वो काली मतवाली आँखें
जिनकी अनोखी घात
आँखें कह गईं दिल की बात
आँखें कह गईं दिल की बात

ले गये सब कुछ एक नज़र में
दे गये सब कुछ एक नज़र में
दे गये सब कुछ एक नज़र में
जिसकी तमन्ना में जीते थे
मिल गई वो सौगात
आँखें कह गईं दिल की बात
आँखें कह गईं दिल की बात

ले गए दिल और दिल की कहानी
ले गए दिल और दिल की कहानी
दे गए पीर एक पीर सुहानी
एक पीर सुहानी
ले कर दिल का चैन दे गए
बिना नींद की रात
आँखें कह गईं दिल की बात
आँखें कह गईं दिल की बात
दो काली मतवाली आँखें
वो काली मतवाली आँखें
जिनकी अनोखी घात
आँखें कह गईं दिल की बात
आँखें कह गईं दिल की बात
…………………………………………….
Aankhen keh gayin dil ki baat-Laadli 1949

Artist:

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Aug 14, 2019

मुहब्बत तर्क की मैंने-दोराहा १९५२

धीमे और सूदिंग किस्म के गीत रचने में अनिल बिश्वास और
कुछ संगीतकार जैसे-सी रामचंद्र, गुलाम मोहम्मद और कुछ
मात्रा में मदन मोहन लाजवाब रहे. इनमें एक नाम और जोड़
लेते हैं वो है सचिन देव बर्मन. फिल्म देवदास के गीत लाजवाब
हैं.

धीमी चाल वाले गीत बना के उन्हें लोकप्रिय बना पाना आसान
काम नहीं होता. गीतकार की मेहनत भी बढ़ जाती है. सुनते हैं
साहिर के बोलों और अनिल बिश्वास के संगीत वाला एक गीत
तलत महमूद की मखमली आवाज़ में.




गीत के बोल:

मोहब्बत तर्क की मैंने गरेबां सी लिया मैंने
गरेबां सी लिया मैंने
ज़माने अब तो खुश हो ज़हर ये भी पी लिया मैंने
ये भी पी लिया मैंने

अभी जिंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ये दिल में
अभी जिंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ये दिल में
के अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैंने
सहारे जी लिया मैंने
मोहब्बत तर्क की मैंने

तुझे अपना नहीं सकता मगर इतना भी क्या कम है
तुझे अपना नहीं सकता मगर इतना भी क्या कम है
के कुछ घड़ियाँ तेरे ख्वाबों में खो कर जी लिया मैंने
खो कर जी लिया मैंने
मोहब्बत तर्क की मैंने

बस अब तो मेरा दामन छोड़ दे बेकार उम्मीदों
बस अब तो मेरा दामन छोड़ दे बेकार उम्मीदों
बहुत दुःख सह लिये मैंने बहुत दिन जी लिया मैंने
बहुत दिन जी लिया मैंने
मोहब्बत तर्क की मैंने
………………………………………………………..
Mohabbat tark ki maine-Doraha 1952

Artist:

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Aug 1, 2019

कहाँ तक हम उठायें गम-आरजू १९५०

आरजुएँ और हसरतों की इंटेंसिटी बढती जाती हैं और दुःख
के भंवर के सर्कल्स बढते जाते हैं. फ़िर निकलना शुरू होती है
आह. आह कब कराह में बदल जाती है मन को मालूम नहीं
पड़ता. कराह के साथ शुरू होता है विलाप.

मिनिमलिस्टिक ओर्केस्ट्रेशन वाली मेलोडी पर तैरता ये गीत
सुनिए फिल्म आरजू से लता मंगेशकर की आवाज़ में. इसे
लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसकी तर्ज़ बनाई है
अनिल बिश्वास ने.




गीत के बोल:

कहाँ तक हम उठायें गम जियें अब या के मर जायें
कहाँ तक हम उठायें गम जियें अब या के मर जायें
अरे ज़ालिम मुकद्दर ये बता दे हम किधर जायें
अरे ज़ालिम मुकद्दर ये बता दे हम किधर जायें

हम उनका नाम ले कर काट देंगे जिंदगी अपनी
हम उनका नाम ले कर काट देंगे जिंदगी अपनी
न वो आयें मगर मिलने का फ़िर वादा तो कर जायें
न वो आये मगर मिलने का फ़िर वादा तो कर जायें

पपीहे से कहा गाये ना वो नगमे बहारों के
पपीहे से कहा गाये ना वो नगमे बहारों के
कहो गुलशन उजड जाए कहो कलियाँ बिखर जायें
कहो गुलशन उजड जाए कहो कलियाँ बिखर जायें
अरे ज़ालिम मुकद्दर ये बता दे हम किधर जायें
कहाँ तक हम उठायें गम जियें अब या के मर जायें
…………………………………………………………….
Kahan tak ham uthayen gham-Arzoo 1950

Artist: Kamini Kaushal

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Sep 1, 2018

सुन रे सजन....नरम करेजवा-आरजू १९५०

गीत याद आने की कुछ अजीब वजहें भी होती हैं.
किसी गीत में नरम शब्द होता है तो अमोल पालेकर
की फिल्म नरम गरम याद आ जाती है और याद
आती है नरम भिन्डी.

गीत में नरम करेजवा की बात हो रही है. वो डोलता
भी है. कमजोर है, नाजुक है तो हिलेगा डुलेगा तो सही.
डोलना शब्द एक नियमित लय में कोई चीज़ हिलती
है उसके लिए प्रयुक्त होता है. जैसे पेंडुलम डोलता है.
थाली में बैंगन लुडकता है. नरम करेजवा क्या यहाँ
तो पूरा शरीर डोल रहा है और नायिका के गायकी से
आन्दोलित नायक की बांसुरी भी लय में आ गयी. बस
ढोलकिये के झाडी में से प्रकट होने का इंतज़ार है.

प्रेम धवन की लिखी रचना सुनते हैं लता मंगेशकर की
मधुर आवाज़ में जिसे संगीतबद्ध किया है अनिल बिश्वास
ने.



गीत के बोल:

सुन रे सजन सुन सुन मन की बतिया रे
नैनों को भाय गयली तोरी सुरतिया
आ आ आ आ आ आ आ आ

मेरा नरम करेजवा डोल गया
कोई प्यार की बोली बोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया

छुप छुप के कोई आता है
और प्रेम की बंसी बजाता है
और प्रेम की बंसी बजाता है
 नस नस में अमृत घोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया
नस नस में अमृत घोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया

तन मन की सुध बुध खो बैठी
मैं आज किसी की हो बैठी
मैं आज किसी की हो बैठी
कोई नैनन से दिल तोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया
कोई नैनन से दिल तोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया

मोहे अँखियों ने बदनाम किया
मोहे अँखियों ने बदनाम किया
मेरी प्रीत का चर्चा आम किया
मेरी प्रीत का चर्चा आम किया
कोई लाज का घूँघट खोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया
कोई लाज का घूँघट खोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया

कोई प्यार की बोली बोल गया
मेरा नरम करेजवा डोल गया
…………………………………………………
Sun re sajan..naram karejwa-Arzoo 1950

Artist: Kamini Kaushal

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Jul 25, 2018

उन्हें खो कर...वो और भी-आरज़ू १९५०

फिल्म का नाम अगर कद्दू-लौकी हो तो शीर्षक गीत
में ये नाम ज़रूर मिलेंगे. सन १९५० की फिल्म आरज़ू
के शीर्षक गीत हम आज आपको सुनवा रहे हैं. शुरू की
दो पंक्तियों में फिल्म का नाम आया है. उसके बाद इसे
आप ढूंढते रह जायेंगे.

गीत मजरूह का है और संगीत अनिल बिश्वास का. इस
फिल्म में लता के ढेर सारे गाने हैं. कभी कभी ऐसा
लगता है मानो संगीतकार को यकीन नहीं के गायक
गानों के लिए बाद में स्टूडियो आने वाला हो, जितने गाने
गवाना है इकट्ठे गवा लो.




गीत के बोल:

उन्हें खो कर उन्हीं की आरज़ू है किसलिये दिल को
है कौन ऐसा जो अब आसान कर दे मेरी मुश्किल को

उन्हें हम जो दिल से भुलाने लगे
उन्हें हम जो दिल से भुलाने लगे
वो कुछ और भी याद आने लगे
वो कुछ और भी याद

न पूछो न पूछो हमें क्या हुआ
न पूछो न पूछो हमें क्या हुआ
लगी ठेस आँसू बहाने लगे
लगी ठेस आँसू बहाने लगे
वो कुछ और भी याद

जिये हाय मर मर के हम इस तरह
जिये हाय मर मर के हम इस तरह
चले ना और डगमगाने लगे
चले ना और डगमगाने लगे
वो कुछ और भी याद

ज़माना हुआ जिनको बीते वो दिन
ज़माना हुआ जिनको बीते वो दिन
घटा बन के आँखों में छाने लगे
घटा बन के आँखों में छाने लगे
वो कुछ और भी याद आने लगे
वो कुछ और भी याद
……………………………………………..
Wo kuchh aur yaad-Arzoo 1950

Artist: Kamini Kaushal

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Jul 13, 2018

हमें मार चला ये ख़्याल ये गम-आरजू १९५०

एक कहावत है-न घर के न घाट के. घाट का अर्थ
घर से बाहर की दुनिया से है. घाट का अर्थ पनघट
हात और नैन मटक्का से तो कतई नहीं है. हिंदी
फिल्मों के कंटेक्स्ट में घाट और पनघट का मतलब
कोई गोरी मटकी भर के पानी लाती है. गोरी ही
लाती है काली नहीं. युवा ही लाती है, प्रौढ़ नहीं.
एक शब्द के अनेक अर्थ होते हैं. अपनी सुविधा का
अर्थ समझने की स्वतंत्रता सबको है जब तक कवि
सन्दर्भ सहित भावार्थ ना समझाए.

सुनते हैं अनिल बिश्वास का गाया हुआ आरज़ू का
ये चर्चित गीत. इसे हास्य अभिनेता गोप परदे पर
गा रहे हैं. गोप के अभिनय के पहलू हमें १९५६ की
फिल्म चोरी चोरी में दिखाई दिए. वे एक संजीदा
कलाकार थे.

मजरूह सुल्तानपुरी के बोल हैं और अनिल बिश्वास
का संगीत. गीत में हास्य का पुट है मगर ये बहुत
उम्दा संगीत का टुकड़ा है.


गीत के बोल:

हमें मार चला ये ख़्याल ये गम
न इधर के रहे न उधर के रहे
किसी और का हो गया कोई तो हम
न इधर के रहे न उधर के रहे

हम ज़हर तो खा लेते उन बिन
ख़ंजर भी चला लेते लेकिन
न हो उनको ख़बर तो हाय सितम
न इधर के रहे न उधर के रहे
न इधर के रहे न उधर के रहे
न हो उनको ख़बर तो हाय सितम
न इधर के रहे न उधर के रहे

है ये प्यार का फंदा गर्दन में
जीते न बने मरते न बने
हाँ जीते न बने मरते न बने
यूँ ही बीच गले में अटका है दम
न इधर के रहे न उधर के रहे
न इधर के रहे न उधर के रहे
यूँ ही बीच गले में अटका है दम
न इधर के रहे न उधर के रहे

हमें मार चला ये ख़्याल ये गम
न इधर के रहे न उधर के रहे
हमें मार चला ये ख़्याल ये गम
……………………………………….
Hamen maar chala ye khyal ye gham-Arzoo 1950

Artist: Gope

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Jul 8, 2018

आई बहार आई-आरजू १९५०

कामिनी कौशल अपने ज़माने के प्रमुख अभिनेत्रियों में
शामिल थीं. श्वेत श्याम युग की कुछ अभिनेत्रियां ऐसी
हैं जिन्हें हमने लंबे समय तक रुपहले परदे पर देखा.
चरित्र भूमिकाओं के ज़रिये उन्होंने अपनी उपस्थिति
को लंबे समय तक कायम रखा.

उम्र के साथ शरीर साथ देना छोड़ देता है. ऐसे में अपना
एनर्जी लेवल बनाया रखना बेहद मुश्किल काम होता है.
आज के समय में महानायक का एनर्जी लेवल अपने से
कम उम्र के अभिनेताओं से बेहतर नज़र आता है. कहीं
ना कहीं आत्मबल और मन की शक्ति वो जुटा ही लेती
है जिसकी व्यक्ति को चाह होती है.

प्रेम धवन जिनके नाम में ही प्रेम है उन्होंने कई सफल
रोमांटिक और खुशनुमा गीतों की रचना की है. इनकी भी
पारी लंबी चली है हिंदी फिल्म जगत में. प्रस्तुत गीत को
गाया है लता मंगेशकर और कोरस ने अनिल बिश्वास की
धुन पर.



गीत के बोल:

आई बहार आई  आई बहार
आई बहार आई  आई बहार
आई बहार जिया डोले मोरा
जिया डोले मोरा जिया डोले रे
जिया डोले रे
आई बहार जिया डोले मोरा
जिया डोले मोरा जिया डोले रे
जिया डोले रे
जगा है प्यार मन बोले मोरा
मन बोले मोरा मन बोले रे
मन बोले रे
आई बहार जिया डोले मोरा
जिया डोले मोरा जिया डोले रे
जिया डोले रे
आई बहार जिया डोले मोरा
जिया डोले मोरा जिया डोले रे
जिया डोले रे

कैसे कहूँ री हाय मन की बतियाँ
धड़के जिया मोरा फड़के अखियाँ
धड़के जिया मोरा फड़के अखियाँ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ
कोई नैनन को भाया मोरी डोल गयी काया
कोई नैनन को भाया मोरी डोल गयी काया
डोल गई डोल गई डोल गई रे
डोल गई डोल गई फैल गई रे
कोई मन में समाया हौले हौले रे
कोई मन में समाया हौले हौले रे
हौले हौले रे

आई बहार जिया डोले मोरा
जिया डोले मोरा जिया डोले रे
जिया डोले रे
आई बहार जिया डोले मोरा
जिया डोले मोरा जिया डोले रे
जिया डोले रे

सावन आया री सखी धूम मचाता
सखी धूम मचाता
सावन आया री सखी धूम मचाता
सखी धूम मचाता
रिमझिम रिमझिम रिमझिम गाता
रिमझिम रिमझिम रिमझिम गाता
रिमझिम झिम रे रिमझिम झिम रे
रिमझिम झिम रे रिमझिम झिम रे
करो सोलह सिंगार चलो साजन के द्वार
करो सोलह सिंगार चलो साजन के द्वार
धीरे धीरे धीरे धीरे घूँघट पट खोले रे
धीरे घूँघट पट खोले रे
धीरे घूँघट पट खोले रे

जागा है प्यार मन बोले मोरा आ आ आ
…………………………………………………
Aayi nahar aai-Arzoo 1950

Artists: Kamini Kaushal

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May 10, 2018

एक मैं हूँ एक मेरी-तराना १९५१

दीनानाथ मधोक का लिखा हुआ एक गीत सुनते हैं
फिल्म तराना से. पिछली दफे हमने आपको इसी फिल्म
से प्रेम धवन का लिखा गीत सुनवाया था.

प्रस्तुत गीत तलत महमूद ने गाया है और इस गीत
के लिए संगीत तैयार किया है अनिल बिश्वास ने. ये
गीत फिल्माया गया है  दिलीप कुमार पर.




गीत के बोल:

जली जो शाख-ए-चमन साथ बाग़बाँ भी जला
जला के मेरे नशेमन को आस्मां भी जला

एक मैं हूँ एक मेरी बेक़सी की शाम है
अब तो तुझ बिन ज़िंदगी भी मुझ पे इक इल्ज़ाम है

दिल पे क्या गुज़री तेरे जाने से कोई क्या कहे
साँस जो आती है वो भी दर्द का पैग़ाम है

आँसूओं मुझ पर हँसो मेरे मुक़द्दर पर हँसो
अब कहाँ वो ज़िंदगी जिस का मुहब्बत नाम है
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Ek main hoon-Tarana 1951

Artist: Dilip Kumar

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May 7, 2018

एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे-ग्रामोफोन सिंगर १९३८

पुराने समय में लंबी लंबी लाइनों वाले गीत कम हुआ करते थे.
गीतों में एजेंडे भी कम होते थे मसलन इसी गीत को ले लीजिए
इसमें छोटा सा मंदिर बनाने की बात है और उसके बाद यूँ ही
जिंदगी बिताने की बात है. ज्यादा हीले-हवाले नहीं हैं और एक
सिंपल सा गीत सामने है.

जिया सरहदी ने इसे लिखा है, सुरेन्द्र ने गाया है और इस गीत
की धुन अनिल बिश्वास ने तैयार की है.




गीत के बोल:

एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
अपनी देवी को उसमें बिठायेंगे
अपनी देवी को उसमें बिठायेंगे
एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे

रोज़ फूलों से उसको सजायेंगे
रोज़ फूलों से उसको सजायेंगे
यूँ ही अपनी उमरिया बितायेंगे
यूँ ही अपनी उमरिया बितायेंगे

एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
अपनी देवी को उसमें बिठायेंगे
अपनी देवी को उसमें बिठायेंगे
एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
एक छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
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Ek chhota sa mandir banayenge-Gramphone singer 1938

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Apr 14, 2018

चार दिनों की चाँदनी है-गर्ल्स स्कूल १९४९

४० के दशक से एक गीत सुनते हैं अनिल बिश्वास के संगीत
निर्देशन वाला. कवी प्रदीप इसके रचयिता हैं और इसे गाया
है शंकर दासगुप्ता और लता मंगेशकर ने.

फिल्म के गीतों में दर्शनवाद बोलती फिल्मों के आगमन के
समय से ही रहा है. सन्देश देने के लिए गीत एक अच्छा
माध्यम होते थे. आज तो साधन बहुत से हैं मगर उस समय
अखबार और रेडियो प्रमुख साधन हुआ करते थे.





गीत के बोल:

बार बार तुम सोच रही हो मन में कौन सी बात
मन में कौन सी बात
बार बार तुम सोच रही हो मन में कौन सी बात
मन में कौन सी बात
चार दिनों की चाँदनी है
चार दिनों की चाँदनी है फिर अँधियारी रात
फिर अँधियारी रात
चार दिनों की चाँदनी है

आज तुम्हारे चेहरे की रंगत बोलो क्यों बदली है
मुझे भी ख़ुद मालूम नहीं के मेरी कश्ती किधर चली है
मुझे भी ख़ुद मालूम नहीं के मेरी कश्ती किधर चली है
दूर वो देखो झिलमिल झिलमिल चमक रही है अपनी मंज़िल
उस मंज़िल की ओर सजनिया चलो चलें एक साथ

चार दिनों की चाँदनी है फिर अँधियारी रात
फिर अँधियारी रात
चार दिनों की चाँदनी है

कितना है आसान जगत में मन के महल बनाना
पर कितना मुश्क़िल है अपने हाथ से उन्हें गिराना
कितना है आसान जगत में मन के महल बनाना
पहले एक धुँधली सी आशा फिर मजबूरी और निराशा
प्रेम के पथ पर हर प्रेमी को मिली यही सौग़ात
प्रेम के पथ पर हर प्रेमी को मिली यही सौग़ात

चार दिनों की चाँदनी है फिर अँधियारी रात
फिर अँधियारी रात
चार दिनों की चाँदनी है
.............................................................................
Chaar dinon ki chandni hai-Girls School 1949

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Apr 7, 2018

इक दिल का लगाना बाक़ी(लता)-अनोखा प्यार १९४८

सन १९४८ की फिल्म अनोखा प्यार से एक उम्दा गीत और
सुनते हैं. गायिका लता मंगेशकर की आवाज़ वाले इस गीत
का मीना कपूर वाला तर्जुमा आप पहले सुन चुके हैं.

जिया सरहदी ने गीत लिखा है और अनिल बिश्वास का संगीत
है. ये एल पी वर्ज़न है जिसे यू ट्यूब पर कद्रदान द्वारा अपलोड
किया गया है.

जैसा कि आप जानते हैं फिल्म अनोखा प्यार दिलीप कुमार,
नलिनी जयवंत और नर्गिस अभिनीत एक फिल्म है जिसका 
निर्देशन एम् आई धरमसे ने किया. फिल्म की कहानी एक
प्रेम त्रिकोण पर आधारित है.




गीत के बोल:

इक दिल का लगाना बाक़ी था
सो दिल भी लगा के देख लिया
तक़दीर का रोना कम न हुआ
आँसू भी बहा के देख लिया
इक दिल का लगाना

इक बार भुलाना चाहा था
सौ बार वो हमको याद आया
इक बार भुलाना चाहा था
सौ बार वो हमको याद आया
इक भूलने वाले को हमने
सौ बार भुला के देख लिया
इक भूलने वाले को हमने
सौ बार भुला के देख लिया

इक दिल का लगाना

अब तक तो समझ में आ न सका
इस दिल की तमन्नाएं क्या हैं
अब तक तो समझ में आ न सका
इस दिल की तमन्नाएं क्या हैं
सौ बार
सौ बार हँसा के देख लिया
सौ बार रुला के देख लिया
सौ बार हँसा के देख लिया
सौ बार रुला के देख लिया

इक दिल का लगाना बाक़ी था
सो दिल भी लगा के देख लिया
इक दिल का लगाना
....................................................................
Ek dil ka lagana(Lata)-Anokha Pyar 1948

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Mar 29, 2018

काहे करता देर बाराती-औरत १९४०

हिंदी सिनेमा के प्राचीन युग की तरफ एक बार फिर से रुख
किया जाए. इस बार सुनते हैं एक ऐसा गीत जिसे संगीतकार
ने खुद गाया है.

सन १९४० की फिल्म औरत के लिए इसे अनिल बिश्वास ने
गाया है. गीत के बोल सफ़दर आह सीतापुरी के हैं.




गीत के बोल:

काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर
जाना है तोहे पी की नगरिया
जाना है
जाना है तोहे पी की नगरिया
कठिन बड़ी है डगरिया
हो जाये न अबेर ज़रा सी
हो जाये न अबेर ज़रा सी
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर

कैसा रिश्ता कैसा नाता
कैसा नाता
काहे मन को फँसाता
कैसा रिश्ता कैसा नाता
कैसा रिश्ता
कैसा नाता
कैसा नाता
काहे मन को फँसाता
सब है भरम का फेर बाराती
सब है भरम का फेर
भरम का फेर
सब है भरम का फेर बाराती
सब है भरम का फेर
भरम का फेर
सब है भरम का फेर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे करता देर

काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर

जाना है तोहे पी की नगरिया
जाना है
जाना है तोहे पी की नगरिया
कठिन बड़ी है डगरिया
हो जाये न अबेर ज़रा सी
हो जाये न अबेर ज़रा सी
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे
काहे करता देर बाराती
देर बाराती
काहे करता देर
काहे करता देर
काहे
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Kaahe karta der barati-Aurat 1940

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Mar 24, 2018

आ सपने तुझे बुलाएँ-हमदर्द १९५३

किसी गाने की कभी कभी यूँ तारीफ करने का मन करता है-
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह

एक कवि समेलन में मंच पर बैठे कवि ने किसी दूसरे कवि की
रचना की तारीफ में ९६ बार वाह वाह की लगातार जैसे सुई अटक
गयी हो. हमने सोचा जब कोई अति गदगद हो जाता है तब ऐसे
ही वाह वाह कर उठता है. हमने दो बार ज्यादा कर दी इधर.

सुनते हैं गीता दत्त का गाया फिल्म हमदर्द का गीत जिसे लिखा है
प्रेम धवन ने और जिसकी धुन तैयार की है अनिल बिश्वास ने.
गीत में संगीत ज्यादा है और बोल कम.




गीत के बोल:

आ सपने तुझे बुलाएँ आ जा आ आ जा
आ सपने तुझे बुलाएँ आ जा आ आ जा

गोरी गोरी गरम गरम बाहों में
काली काली जुल्फों की घटाओं में
मुस्कुराती गुनगुनाती प्यार की फिजाओं में

आ सपने तुझे बुलाएँ आ जा आ आ जा


हुस्न की जहाँ हैं मेहरबानियाँ
इश्क कहता है जहाँ कहानियां
खेलती जवानियों से है जहाँ जवानियाँ

आ सपने तुझे बुलाएँ आ जा आ आ जा


गैर की निगाहों से बचा लूंगी आ
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Aa sapne tujhe bulayen-Hamdard 1953

Artist: Smriti Biswas

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Jan 30, 2018

चाहे कितनी कठिन डगर हो-जीत १९४९

कथनी और करनी में अंतर खत्म होने पर ही आदमी महात्मा
कहलाता है. सुनने में आसान लगता है मगर कंटकाकीर्ण मार्ग
से ताउम्र निकलना पडता है और सभी बाधओं को स्वीकारते
हुए उनसे पार भी पाना पडता है.

गांधी जी ने असम्भव सी लगने वाली इस देश की आजादी की
राह आसान बनाने में अपना बड़ा योगदान दिया. आज के दिन
एक प्रेरणादायी गीत सुनते हैं सन १९४९ की फिल्म जीत से.

इसे लिखा है प्रेम धवन ने और इसका संगीत तैयार किया है
अनिल बिश्वास ने. शंकर दासगुप्ता और सुरैया ने इसे गाया है.



गीत के बोल:

चाहे कितनी कठिन डगर हो
हम क़दम बढ़ाते जायेंगे
क़दम बढ़ाते हँसते गाते
धूम मचाते जायेंगे
चाहे कितनी कठिन डगर हो
हम क़दम बढ़ाते जायेंगे
क़दम बढ़ाते हँसते गाते
धूम मचाते जायेंगे
चाहे कितनी कठिन डगर हो

जिस पथ पर तुम चरण धरोगे
जिस पथ पर तुम चरण धरोगे
अपने नैन बिछाऊँगी
तुमरे पथ के काँटों को
पलकों से उठाती जाऊँगी
तुमरे पथ के काँटों को
पलकों से उठाती जाऊँगी
जब लग प्रान रहेंगे
जब लग प्रान रहेंगे
एक दूजे का साथ निभायेंगे

क़दम बढ़ाते जायेंगे
क़दम बढ़ाते हँसते गाते
धूम मचाते जायेंगे
चाहे कितनी कठिन डगर हो

इस दुखियारे जग में तुम ही
नैनन का उजियारा हो
सूने लम्बे जीवन-पथ का
तुम ही एक सहारा हो
सूने लम्बे जीवन-पथ का
तुम ही एक सहारा हो
तुम संग हो तो पाँव मेरे
कभी न ठोकर खायेंगे

क़दम बढ़ाते जायेंगे
क़दम बढ़ाते हँसते गाते
धूम मचाते जायेंगे
चाहे कितनी कठिन डगर हो

हमको मिल कर इस दुखियारे
जग को स्वर्ग बनाना है
हमको मिल कर इस दुखियारे
जग को स्वर्ग बनाना है
 सब अपने हैं सबको
मानवता का प्यार सिखाना है
सब अपने हैं सबको
मानवता का प्यार सिखाना है
जो सबको उजियारा दे
जो सबको उजियारा दे
एक ऐसी ज्योत जलायेंगे

क़दम बढ़ाते जायेंगे
क़दम बढ़ाते हँसते गाते
धूम मचाते जायेंगे
चाहे कितनी कठिन डगर हो
…………………………………………………………
Chahe kitni kathin dagar ho-Jeet 1949

Artists: Dev Anand, Suraiya

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Jan 17, 2018

राही मतवाले-वारिस १९५४

तलत महमूद और सुरैया का गाया एक युगल गीत सुनते हैं
फिल्म वारिस से. कमर जलालाबादी की रचना है और इस गीत
की धुन तैयार की है अनिल बिश्वास ने.

ट्रेन के सफर में नायक गीत गा रहा है जिसे नायिका भी गाने
लगती है और गीत के अंत में दोनों साथ गाते हैं. ऐसा ट्रेन का
सफर किस्मत वालों को नसीब होता है.



राही मतवाले
तू छेड़ इक बार मन का सितार
जाने कब चोरी चोरी आई है बहार
छेड़ मन का सितार
राही मतवाले

देख देख चकोरी का मन हुआ चंचल
चंदा के मुखड़े पे बदली का अंचल
देख देख चकोरी का मन हुआ चंचल
चंदा के मुखड़े पे बदली का अंचल
कभी छुपे कभी खिले रूप का निखार
खिले रूप का निखार
राही मतवाले

कली कली चूम के पवन कहे खिल जा
कली कली चूम के
खिली कली भँवरे से कहे आ के मिल जा
आ पिया मिल जा
कली-कली चूम के
दिल ने सुनी कहीं दिल की पुकार
दिल ने सुनी कहीं दिल की पुकार
कहीं दिल की पुकार
 राही मतवाले

रात बनी दुल्हन भीगी हुई पलकें
भीनी भीनी ख़ुशबू से सागर छलके
रात बनी दुल्हन भीगी हुई पलकें
भीनी भीनी ख़ुशबू से सागऔर छलके
ऐसे में नैना से नैना हों चार
ज़रा नैना हो चार

राही मतवाले
तू छेड़ इक बार मन का सितार
जाने कब चोरी चोरी आई है बहार
छेड़ मन का सितार
राही मतवाले
...................................................................................
Rahi matwale-Waris 1954

Artists: Talat Mehmood, Suraiya

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