आज के दिन फिल्म जगत में काफी सारे कलाकार पैदा
हुए. हीरो और हीरोईन को तो सभी याद कर लेते हैं किन्तु
गीतकार और संगीतकार को याद करने वाले कुछ लोग ही
मिलते हैं.
गोपाल सिंह नेपाली ने श्वेत श्याम युग में काफी गीत लिखे.
राष्ट्रीय धारा के जनप्रिय कवि गोपाल सिंह नेपाली बिहार के
चम्पारन जिले में जन्मे. उन्होंने बतौर पत्रकार भी काम
किया. उन्होंने सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के साथ एक मासिक
पत्रिका में भी काम किया.
आज हम आपको सुनवायेंगे फिल्म शिवभक्त से एक गीत
जिसका संगीत बिहार मूल के ही प्रसिद्ध संगीतकार चित्रगुप्त
ने तैयार किया है. इसे परदे पर पद्मिनी पर फिल्माया गया
है जिसे लता मंगेशकर ने गाया है.
गीत के बोल:
कहाँ जा के ये नैना लड़े
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Kahan ja ke ye naina lade-Shiv bhakt 1955
आज रात्रि सुनते हैं फिल्म उड़न खटोला से एक गाना
जिसमें नायिका घोडागाड़ी चला रही है. १९५५ की
फिल्म उड़न खटोला एक बड़ी म्यूजिकल हिट फिल्म थी.
गीत निम्मी पर फिल्माया गया है और इसे गाया
है लता मंगेशकर संग महिला कोरस ने. गीत लिखा है
शकील बदायूनीं ने और धुन तैयार की नौशाद ने.
गीत के बोल:
आ हा हा हा हा हा हा
आ हा हा हा हा हा मेरा सलाम ले जा
मेरा सलाम ले जा दिल का पयाम ले जा
उल्फ़त का जाम ले जा उड़न खटोले वाले राही
उड़न खटोले वाले राही
ओये मेरा सलाम ले जा दिल का पयाम ले जा
उल्फ़त का जाम ले जा उड़न खटोले वाले राही
उड़न खटोले वाले राही
ल ल ल ला ल ला ला ला हो
ल ल ल ला ल ला ला ला हो
उड़ता हवाओं में बादल के छाँव में
कौन से गाँव में जायेगा तू
हा आ आ आ आ आ आ आ आ
उड़ता हवाओं में बादल के छाँव में
कौन से गाँव में जायेगा तू
नीचे ज़मीन है, दुनिया हसीन है
दिल को यकीन है आयेगा तू
हा आ आ आ आ आ आ
नीचे ज़मीन है, दुनिया हसीन है
दिल को यकीन है आयेगा तू
होये मेरा सलाम ले जा, दिल का पयाम ले जा,
उल्फ़त का जाम ले जा उड़न खटोले वाले राही
उड़न खटोले वाले राही
ल ल ल ला ल ला ला ला हो
ल ल ल ला ल ला ला ला हो
ऊँची उड़ान है पलकों पे जान है
आगे तूफ़ान है जाने कहीं
हा आ आ आ आ आ आ आ आ
ऊँची उड़ान है पंखों पे जान है
आगे तूफ़ान है जाने कहीं
ऊँची उड़ान है पंखों पे जान है
आगे तूफ़ान है जाने कहीं
मंज़िल भी दूर है, हिम्मत भी चूर है
आना ज़रूर है आ जा यहीं
हा आ आ आ आ आ आ आ आ
मंज़िल भी दूर है, हिम्मत भी चूर है
आना ज़रूर है आ जा यहीं
होये मेरा सलाम ले जा, दिल का पयाम ले जा,
उल्फ़त का जाम ले जा उड़न खटोले वाले राही
उड़न खटोले वाले राही
उड़न खटोले वाले ओ राही आ जा
ओ राही आ जा
ओ राही आ जा
ओ राही आ जा
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Merra salaam le ja-Udna Khatola 1955
नया साल केवल रेसोल्यूशंस वाला हो ज़रूरी नहीं है. पिछले साल के खोये-पाए का हिसाब और उसपर डेफिनिटिव एक्शन का भी है. पुराना छोड़ने और नया पकड़ने का भी है.
सुनते हैं मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ गीत जिसे गीता दत्त और रफ़ी ने गाया है. इस गीत का संगीत तैयार किया है ओ पी नैयर ने.
किसी ज़माने में बंदर और बंदरिया का नाच आपने देखा होगा. मदारी नचाया करता था मजमा लगा कर. जिस किसी ने नहीं देखा है वो मीडिया के कुछ एक कार्यक्रम देख के समझ सकता है.
गीत के बोल:
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया अच्छा जी माफ़ कर दो
तेरी नज़र तो दिल में कर के तूफ़ान गई तेरी नज़र तो दिल में कर के तूफ़ान गई तेरी अदा ही ठहरी अपनी तो जान गई तेरी अदा ही ठहरी अपनी तो जान गई
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया अच्छा जी माफ़ कर दो
चोरी से आये दिल में तुमने क़सूर किया चोरी से आये दिल में तुमने क़सूर किया देखा ना भाला क्यों जी इतना ग़ुरूर किया देखा ना भाला क्यों जी इतना ग़ुरूर किया
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया अच्छा जी माफ़ कर दो
सबसे कहूँगा तूने दिल बेक़रार किया सबसे कहूँगा तूने दिल बेक़रार किया मेरा ही बन के दिलबर मुझपे ही वार किया मेरा ही बन के दिलबर मुझपे ही वार किया
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया अच्छा जी माफ़ कर दो
तूने वो चाल चल दी जिसका हिसाब नहीं तूने वो चाल चल दी जिसका हिसाब नहीं चोरी और सीनाज़ोरी तेरा जवाब नहीं चोरी और सीनाज़ोरी तेरा जवाब नहीं
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया अच्छा जी माफ़ कर दो ……………………………………………… Achchha ji maaf kar do-Musafirkhana 1955
साहिर लुधियानवी कब दिमाग पे दे दे बत्ती पता ही नहीं चलता. फिल्म मिलाप के एक गीत में पंक्ति है -ये हसीं भूल कर के देख लो. वो गीत एक क्लब सोंग है जिसमें नायिका गीता बाली डांस कर रही हैं अपने कातिलाना एक्सप्रेशंस के साथ. गीता दत्त की आवाज़ उसे और कातिलाना बना रही है. गीत आप सुन चुके है पहले.
सुनते हैं फिल्म से एक और गीत. इसे भी गीता दत्त ने गाया है. गीत के पहले अंतरे की पंक्ति से एक गीत का मुखडा बना है जिसे आशा भोंसले ने गाया है रफ़ी के साथ.
राज खोसला की ये बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी और इसे गीत के फिल्मांकन को देख के लगता है वे कारदार की फिल्मों के गीतों के फिल्मांकन के फैन हैं.
https://www.youtube.com/watch?v=dJH_9s2gVqE
गीत के बोल:
जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ
आये हैं दूर से मिले हुजुर से हमको सज़ा ना दो जी दिल के कसूर की आये हैं दूर से मिले हुजुर से हमको सज़ा ना दो जी दिल के कसूर की आधी है रात अभी बाकी है बात अभी छोडो ना साथ अभी बाबूजी जाते हो कहाँ
जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ
दिल तुम पे वार के दुनिया को हार के बैठे हैं देर से जी रस्ते में प्यार के दिल तुम पे वार के दुनिया को हार के बैठे हैं देर से जी रस्ते में प्यार के थोड़ी सी चाह दे दो सीने में राह दे दो दिल को पनाह दे दो बाबूजी जाते हो कहाँ
जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ जाते हो तो जाओ पर जाओगे कहाँ बाबूजी तुम ऐसा दिल पाओगे कहाँ ........................................................... Jaate ho to jao par-Milap 1955
वी शांताराम के सिनेमा क्षेत्र में अमूल्य योगदान को
कभी भुलाया नहीं जा सकेगा. कुछ अलग हट के करने
के लिए अदम्य साहस और दृढ इच्छाशक्ति की ज़रूरत
होती है. अलग अलग विषयों पर कलात्मक फ़िल्में
बना पाना हमारे देश के सिनेमा के कुछ ही निर्देशकों
के बस में रहा. जा जाने वो फंड कैसे मैनेज करते थे
अपनी फिल्मों के लिए.
सुनते हैं ९५५ की फिल्म झनक झनक पायल बाजे से
एक गीत मधुर युगल लता मंगेशकर और हेमंत कुमार
का गाया हुआ. बोल हसरत जयपुरी के हैं और संगीत
वसंत देसाई का. इस युगल गीत की खास बात ये है
गाक और गायिका दोनों की आवाज़ एकदम सटीक पिच
और वोल्यूम पर है. संगीतकार की दाद देना पड़ेगी.
लता और हेमंत वाले कई गीतों में किसी एक पक्ष की
आवाज़ हावी सी लगती है वो समस्या इस गीत में नहीं है.
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गीत के बोल:
नैन सो नैन नाहीं मिलाओ
नैन सो नैन नाहीं मिलाओ
देखता सूरत आवत लाज सैयां
प्यार से प्यार आ के सजाओ
प्यार से प्यार आ के सजाओ
मधुर मिलन गावत आज गुईयां
नैन सो नैन नाहीं मिलाओ
नैन सो नैन
खींचो कमान मारो जी बाण
खींचो कमान मारो जी बाण
रुत है जवान ओ मोरे प्राण
रुक क्यूँ गये
तुमने चोरी कर ली कमान
कैसे मरूं प्रीत का बाण गुईयां
नैन सो नैन नाहीं मिलाओ
नैन सो नैन
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
रिमझिम झिम गाये झरने की धार
दिल को लुभाए कोयल पुकार
झरनों की धारों में तेरा संगीत
गाये कोयल तेरा ही गीत गुईयां
नैन सो नैन नाहीं मिलाओ
नैन सो नैन
नीले गगन पे झूलेंगे आज
बादल का प्यार देखेंगे आज
बादल नैया है बिजली पतवार
हम तुम चल दें दुनिया के पार गुईयां
नैन सो नैन नाहीं मिलाओ
देखता सूरत आवत लाज सैयां
नैन सो नैन नाहीं मिलाओ
नैन सो नैन
…………………………………………………
Nain so nain-Jhanak jhanak payal baaje 1955
आई रैन अंधेरी बालमा मन मोरा घबराए है
दूर बैठा तड़पे पंछी ये ही रटन लगाए है
आन मिलो
प्रीतम आन मिलो ...
भीगी रात में पेड़ के नीचे आँख मिचौली खेल रचाया
प्रीतम याद करो जब तुमने प्रेम भरा इक गीत सुनाया
प्रीतम आन मिलो ...
………………………………………………..
Preetam aan milo-Mr. & Mrs. 55 1955
शमशाद बेगम की क्रिस्टल क्लीयर आवाज़ में सुनते
हैं एक गाना मिस्टर एंड मिसेज़ ५५ फिल्म से.
५५५ कपड़े धुलाई की टिकिया देखो ये इस फिल्म का
नाम एक दूसरे की याद दिला दिया करते हैं.
गीत मजरूह सुल्तानपुरी का है और संगीत ओ पी नैयर
का. गीत में यमक और धमक दोनों तरह के अलंकारों
का प्रयोग है.
गीत के बोल:
अब तो जी होने लगा किसी की सूरत का सामना
गोरी-गोरी गोरियों को पड़े न कहीं रे दिल थामना
अब तो जी होने लगा किसी की सूरत का सामना
गोरी-गोरी गोरियों को पड़े न कहीं रे दिल थामना
ठण्दी-ठण्डी ठन्ड में देखो पवन चले
धीरे-धीरे-धीरे काहे मन में जले
ठण्दी-ठण्डी ठन्ड में देखो पवन चले
धीरे-धीरे-धीरे काहे मन में जले
आ जा काहे दूर जाये
देखो तेरे पास आये
गोरी तेरे साजना
अब तो जी होने लगा किसी की सूरत का सामना
गोरी-गोरी गोरियों को पड़े न कहीं रे दिल थामना
हँसी-हँसी-हँसी गोरी मन-मन में
खिला-खिला-खिला प्यार तन-मन में
हँसी-हँसी-हँसी गोरी मन-मन में
खिला-खिला-खिला प्यार तन-मन में
कारे-कारे नैन खोले
सैंयाँ जी के पास डोले
हमें बतलाये ना
अब तो जी होने लगा किसी की सूरत का सामना
गोरी-गोरी गोरियों को पड़े न कहीं रे दिल थामना
जब-जब-जब नैना पिया से मिले
धक-धक-धक मोरा जियरा हिले
जब-जब-जब नैना पिया से मिले
धक-धक-धक मोरा जियरा हिले
दुनिया ना जान जाये
कोई पहचान जाये
ऐसा करे राम ना
अब तो जी होने लगा किसी की सूरत का सामना
गोरी-गोरी गोरियों को पड़े न कहीं रे दिल थामना
………………………………….
Ab to jee hone laga-Mr. & Mrs. 55 1955
फिल्लम के नाम से ऐसा लगता है किसी मकान का नंबर हो,
होटल की किसी टेबल का नंबर हो या किसी डांस कोम्पिटीशन
के प्रतियोगियों का नंबर हो.
ऐसा कुछ नहीं है फिल्म सन १९५५ में रिलीज़ हुई थी और
जाने क्या निर्देशक को सूझी इसका नाम वर्ष के नाम पर
रख दिया गया.
गीत दत्त और रफ़ी की आवाज़ वाले इस मधुर युगल गीत की
रचन की है मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसका संगीत तैयार
किया है ओ पी नैयर ने.
गीत मास्टरपीस है क्यूंकि इसमें गीता दत्त की आवाज़ और
मधुबाला का रेयर कोम्बिएशन मौजूद है.
गीत के बोल:
उधर तुम हसीं हो इधर दिल जवाँ है
ये रंगीन रातों की एक दास्ताँ है
ये कैसा है नग़मा ये क्या दास्ताँ है
बता ए मोहब्बत मेरा दिल कहाँ है
मेरे दिल में आई हुई है बहार
क़यामत है फिर क्यूँ करूँ इन्तज़ार
मोहब्बत कुछ ऐसी सज़ा दे रही है
के खुद रात अंगड़ाई ले रही है
जिधर देखती हूँ नज़ारा जवाँ है
उधर तुम हसीं हो इधर दिल जवाँ है
ये रंगीन रातों की एक दास्ताँ है
लगती हैं तारों की परछाईयाँ
बुरी हैं मुहब्बत की तन्हाईयाँ
महकने लगा मेरी ज़ुल्फ़ों में कोई
लगीं जागने धड़कनें खोई-खोई
मेरी हर नज़र आज दिल की ज़ुबाँ है
उधर तुम हसीं हो इधर दिल जवाँ है
ये रंगीन रातों की एक दास्ताँ है
ये कैसा है नग़्मा ये क्या दास्ताँ है
बता ए मोहब्बत मेरा दिल कहाँ है
तरसता हूँ मैं ऐसे दिलदार को
जो दिल में बसा ले मेरे प्यार को
तेरे ख़्वाब हैं मेरी रातों पे छाए
मेरे दिल पे हैं तेरी पलकों के साए
के मेरे लबों पे तेरी दास्ताँ है
उधर तुम हसीं हो इधर दिल जवाँ है
ये रंगीन रातों की एक दास्ताँ है
ये कैसा है नग़्मा ये क्या दास्ताँ है
बता ए मोहब्बत मेरा दिल कहाँ है
…………………………………….
Udhar tum haseen ho-Mr & Mrs. 55
कंफ्यूज़न किधर है. दोनों तरफ झुलसी हुई मोहब्बत है. चेहरे
ज़र्द हैं और निगाहें ग़मगीन. ये किससे गिला है किसके शिकवे
हैं. खुद से है या ज़माने से. वक्त के थपेडों ने हमें कहाँ से कहाँ
पहुंचा दिया.
तुम अपने कदमों की मिटटी भी ले जाते तो अच्छा था. नदी में
कपडे धो पानी भी ले जाते तो अच्छा था. गीत में जली कटी बजी
आहिस्ता से कहना पड़ती है.
जान निसार अख्तर की रचना है और सी रामचंद्र का संगीत. गाने
वाले हैं लता और तलत.
गीत के बोल:
तुम अपनी याद भी दिल से भुला जाते तो अच्छा था
ये दो आँसू लगी दिल की बुझा जाते तो अच्छा था
मेरे अरमाँ भी ले जाते मेरी हसरत भी ले जाते
मेरे अरमाँ भी ले जाते मेरी हसरत भी ले जाते
नज़र से छीन कर अपनी हसीं सूरत भी ले जाते
अंधेरे और इन आँखों में छा जाते तो अच्छा था
तुम अपनी याद भी दिल से भुला जाते तो अच्छा था
मेरे दिल की मुहब्बत का यक़ीं कब तुम को आया था
मेरे दिल की मुहब्बत का यक़ीं कब तुम को आया था
जहाँ सौ ज़ुल्म ढाये थे जहाँ दिल को मिटाया था
मुझे भी अपने हाथों से मिटा जाते तो अच्छा था
ये दो आँसू लगी दिल की बुझा जाते तो अच्छा था
मेरा दिल फेर दे मेरी निशानी फेरने वाले
मेरा दिल फेर दे मेरी निशानी फेरने वाले
जो मुमकिन हो तो लौटा दो मेरी आहें मेरे नाले
जो मुमकिन हो तो लौटा दो मेरी आहें मेरे नाले
हम अपने दिल का खोया चैन पा जाते तो अच्छा था
ये दो आँसू लगी दिल की बुझा जाते तो अच्छा था
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Tum apni yaad bhi dil se bhula-Yasmin 1955
उड़न खटोला अर्थात विमान. ये शायद सन १९५५ तक भी अजूबा
होता था आम जनता के लिए. आज तो आम आबादी की पहुँच में
है विमान में सफर करना. निर्देशक ने बाद में हेलिकॉप्टर नाम की
फिल्म नहीं बनाई. हवाई जहाज को कुछ लोग आज भी उड़न चील
नाम से बुलाते हैं.
सुनते हैं फिल्म से लता मंगेशकर का गाया गीत. शकील बदायूनीं
की रचना है और नौशाद का संगीत.
गीत के बोल:
हाल-ए-दिल मैं क्या कहूँ
मुश्किल है मेरे सामने
हाल-ए-दिल मैं क्या कहूँ
हाल-ए-दिल मैं क्या कहूँ
मुश्किल है मेरे सामने
मुश्किल है मेरे सामने
भोले भाले रूप में
भोले भाले रूप में
क़ातिल है मेरे सामने
क़ातिल है मेरे सामने
हाल-ए-दिल मैं क्या कहूँ
मेरी उम्मीदों की कश्ती
पार हो जाने भी दे
पार हो जाने भी दे
मेरी उम्मीदों की कश्ती
पार हो जाने भी दे
पार हो जाने भी दे
रुक जा ऐ तूफ़ान तू
रुक जा ऐ तूफ़ान तू
साहिल है मेरे सामने
साहिल है मेरे सामने
हाल-ए-दिल मैं क्या कहूँ
जोश कहता है के चल
और होश कहता है संभल
जोश कहता है के चल
और होश कहता है संभल
होश कहता है संभल
किसका कहना मान लूँ
किसका कहना मान लूँ
मंज़िल है मेरे सामने
मंज़िल है मेरे सामने
हाल-ए-दिल मैं क्या कहूँ
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Haal-e-dil main kya kahoon-Udan Khatola 1955
सन १९५५ में कई म्यूजिकल हिट फ़िल्में आयीं उनमें
से एक है मुनीमजी. इस फिल्म के अधिकाँश गाने जो
है वो लोकप्रिय हैं. एस डी बर्मन भक्तों के अनुसार इसके
सभी गीत लोकप्रिय एवं हिट हैं.
सुनते हैं फिल्म से लता मंगेशकर का गाया हुआ एक
गीत जिसे लिखा है साहिर लुधियानवी ने.
गीत के बोल:
एक नज़र बस एक नज़र
जान-ए-तमन्ना देख इधर
एक नज़र एक नज़र
जान-ए-तमन्ना देख इधर
एक नज़र बस एक नज़र
कुछ तो बता ऐ जान-ए-वफ़ा
तेरी अदा शरमाती है क्यों
कुछ तो बता ऐ जान-ए-वफ़ा
कुछ तो बता ऐ जान-ए-वफ़ा
तेरी अदा शरमाती है क्यों
हँस के लिपटती थी जो गले से
अब वो नज़र कतराती है क्यों
पहले लगाना हा आ आ
पहले लगाना फिर तरसाना
ठीक नहीं मेरे दिल्बर
एक नज़र बस एक नज़र
जान-ए-तमन्ना देख इधर
एक नज़र एक नज़र
हम भी हैं तेरे दीवाने
दिल भी है तेरा दीवाना
हम भी हैं तेरे दीवाने
हम भी हैं तेरे दीवाने
दिल भी है तेरा दीवाना
रूह के सोये तार जगा के
छेड़ दे ऐसा अफ़साना
दोनों जहाँ से आ आ आ
दोनों जहाँ से हम खो जाएं
कुछ भी रहे ना अपनी खबर
एक नज़र बस एक नज़र
जान-ए-तमन्न देख इधर
एक नज़र एक नज़र
एक नज़र बस एक नज़र
जान-ए-तमन्न देख इधर
एक नज़र एक नज़र
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Ek nazar bas ek nazar-Munimji 1955
सन १९५५ की क्लासिक फिल्म देवदास से एक गीत सुनते हैं.
सरोद और तबले के टुकड़ों से सजा ये गीत लता मंगेशकर ने
गाया है.
साहिर लुधियानवी के बोल हैं और सचिन देव बर्मन का संगीत.
क्लासिक फिल्मों और उनके गीतों को किसी विवरण की ज़रूरत
नहीं होती. इन्हें तो हर संगीत रसिक को सुन कर अपना विवरण
लिख लेना चाहिए.
गीत के बोल:
ओ आने वाले रुक जा कोई दम
रस्ता घेरे है बाहर लाखों ग़म
ओ आने वाले रुक जा कोई दम
रस्ता घेरे है बाहर लाखों ग़म
ओ आने वाले आने वाले
आ मैं तुझे आँखों मे बसा लूँ
रंग भरे आँचल मे छुपा लूँ
आ मैं तुझे आँखों मे बसा लूँ
रंग भरे आँचल मे छुपा लूँ
तुझ पे लुटा दूं
तुझ पे लुटा दूं दिल-ओ-जान ओ नादान
ओ शरमाने वाले
शरमाने वाले रुक जा कोई धम
रस्ता घेरे है बाहर लाखों ग़म
ओ आने वाले आने वाले
निखरा हुआ हैं रात का जादू
बिखरी हुई है ज़ुल्फ़ों की ख़ुशबू
निखरा हुआ हैं रात का जादू
बिखरी हुई है ज़ुल्फ़ों की ख़ुशबू
दिल का इशारा
दिल का इशारा पहचान मैं क़ुरबान
ओ तड़पाने वाले
तड़पाने वाले रुक जा कोई दम
रस्ता घेरे है बाहर लाखों ग़म
ओ आने वाले आने वाले
पायल की झंकार मे खो जा
सपनों के संसार मे खो जा
पायल की झंकार मे खो जा
सपनों के संसार मे खो जा
रह जा यहीं पे
रह जा यहीं पे मेंहमान कहा मान
ओ तरसाने वाले
तरसाने वाले रुक जा कोई दम
रस्ता घेरे है बाहर लाखों ग़म
ओ आने वाले आने वाले
आने वाले आने वाले आने वाले
आने वाले
..................................................................
O aane waale ruk jaa koi dam-Devdas 1955
फिल्म श्री ४२० से पहेलियों वाला एक गीत सुनते हैं. फिल्म के नाम
में एक बात है जिस पर केवल ज्ञानी लोग ही गौर किया करते हैं.
४२० शब्द का अर्थ हम सब जानते हैं-फ्रॉड. उसके आगे श्री लगाने का
मतलब उसे आदर देने वाली बात है. सीधा मतलब है फिल्म का प्रमुख
किरदार कहानी मुताबिक़ गोलमाल करने वाला है मगर आदर करने के
लायक है. फिल्म की कहानी भी कुछ ऐसा ही बतलाती है. कहानी का
लुब्बे लुबाब दर्शक को भी पात्र से सहानुभूति और प्रेम करने पर मजबूर
कर देता है.
असल जीवन में कई चोर हैं जो छुपे रहते हैं. एक बार उजागर हो जाने
के बाद उन्हें चोरों की बिरादरी में भले ही आदर मिलता रहे पूर्व की तरह
मगर समाज में उनके सम्मान में गिरावट ज़रूर आती है. अतिशयोक्ति
और एक्सेप्शंस असल जीवन में दुर्लभ हैं मगर फिल्मों में इनकी भरमार
होती है. इसलिए फिल्मों को सपनों की दुनिया कहा जाता है.
गीत सुनते हैं जो हसरत जयपुरी का लिखा हुआ है. गीत के प्रमुख गायक
हैं मुकेश और लता मंगेशकर.
गीत के बोल:
ईचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना ईचक दाना
ईचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना ईचक दाना
छत के ऊपर लड़की नाचे लड़का है दीवाना ईचक दाना
छत के ऊपर लड़की नाचे लड़का है दीवाना ईचक दाना
छोटी सी छोकरी लालबाई नाम है
छोटी सी छोकरी लालबाई नाम है
पहने वो घाघरा एक पैसा दाम है
पहने वो घाघरा एक पैसा दाम है
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मुँह में सबके आग लगाये आता है रुलाना ईचक दाना
मुँह में सबके आग लगाये आता है रुलाना ईचक दाना
बोलो क्या
मिर्ची
हरी थी मन भरी थी लाख मोती जड़ी थी
हरी थी मन भरी थी लाख मोती जड़ी थी
राजा जी के बाग़ में दुशाला ओढ़े खड़ी थी
राजा जी के बाग़ में दुशाला ओढ़े खड़ी थी
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
कच्चे पक्के बाल हैं उसके मुखड़ा है सुहाना ईचक दाना
कच्चे पक्के बाल हैं उसके मुखड़ा है सुहाना ईचक दाना
बोलो क्या बोलो बोलो
बुड्ढी
भुट्टा
एक जानवर ऐसा जिसके दुम पर पैसा
सर पे भी ताज है बादशाह के जैसा
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
बादल देखे छम-छम नाचे अलबेला मस्ताना ईचक दाना
बादल देखे छम-छम नाचे अलबेला मस्ताना ईचक दाना
बोलो क्या बोलो ना
मोर
ईचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना ईचक दाना
छत के ऊपर लड़की नाचे लड़का है दीवाना ईचक दाना
छत के ऊपर लड़की नाचे लड़का है दीवाना ईचक दाना
ईचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना ईचक दाना
ईचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना ईचक दाना
चालें वो चल कर दिल में समाया
खा पी गया वो किया है सफ़ाया
तुम भी देखो बचकर रहना चक्कर में न आना ईचक दाना
तुम भी देखो बचकर रहना चक्कर में न आना ईचक दाना
ग़म
हम
हा हा हा
......................................................................
Ichak dana beechak dana-Shri 420 1955
कई शब्द दो तरीके से लिखे जाते रहे हैं और आगे भी लिखे
जाते रहेंगे. आम आमदी को इस बाबत कोई जानकारी नहीं
होती ऐसा क्यूँ होता है.
ये मोहब्बत है या मुहब्बत इस भाषाई मुरब्बे की चाशनी ने
हमें तरह तरह के स्वाद चखाये हैं. कैसे भी लिखो मतलब तो
एक ही है.
एक धीमी गति का युगल गीत सुनते हैं रफ़ी और लता का
गाया हुआ जिसके बोल इन्दीवर ने लिखे और संगीत तैयार
किया रोशन ने.
गीत के बोल:
फ़लक़ मिलेगा तुझे क्या हमें मिटाने से
ये मुहब्बत ना मिटेगी कभी ज़माने से
फ़लक़ मिलेगा तुझे क्या हमें मिटाने से
ये मुहब्बत ना मिटेगी कभी ज़माने से
उठा के रंज ये दिल चूर हो गया इतना
उठा के रंज ये दिल चूर हो गया इतना
के ठेस लगती है हाय
के ठेस लगती है कलियों के मुस्कुराने से
ये मुहब्बत ना मिटेगी कभी ज़माने से
जियें तो किसके लिये तुम ही जब नहीं अपने
तुम ही जब नहीं अपने
जियें तो किसके लिये तुम ही जब नहीं अपने
तुम ही जब नहीं अपने
के जी रहे थे हाय
के जी रहे थे अभी तक इसी बहाने से
ये मुहब्बत ना मिटेगी कभी ज़माने से
जहाँ ने कह दिया बादल हैं आसमानों के
जहाँ ने कह दिया बादल हैं आसमानों के
धुआँ उठा है ये हाय
धुआँ उठा है ये मेरे ही आशियाने से
ये मुहब्बत ना मिटेगी कभी ज़माने से
कई बार सारे अवयव अच्छे होने के बावजूद खाना जनता
को पसंद नहीं आता. ऐसा ही कुछ यास्मीन फिल्म के
साथ भी है जो सन १९५५ की एक बॉक्स ऑफिस पर
फ्लॉप हुई फिल्म है. फिल्म में एक से बढ़ कर एक गीत
हैं जिन पर गीतकार और संगीतकार दोनों ने काफी मेहनत
की.
फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं सुरेश और वैजयंतीमाला. शायद
कारदार ने जो फ़िल्में निर्देशित की हैं उनमें से ये एक बड़ा
अपवाद रही. इसी साल कारदार की एक हास्य फिल्म भी
रिलीज़ हुई थी-बाप रे बाप जिसके नायक किशोर कुमार थे.
इस फिल्म का संगीत ज़ोरदार हिट रहा. इस फिल्म को आज
भी बड़े चाव के साथ देखा जाता है.
जो मेरा अनुमान है वो ये कि फिल्म के नायक सुरेश का
जादू समय के साथ फीका पढ़ने लगा था. फिल्मिस्तान की
फिल्म नागिन जो साल भर पहले ही रिलीज़ हुई थी उसकी
नायिका भी वैजयंतीमाला थीं. नागिन फिल्म तो इतिहास
की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल है. नागिन फिल्म के
संगीत ने भी एक इतिहास रचा है.
सुनते हैं यास्मीन से लता मंगेशकर का गाया एक मधुर गीत.
जां निसार अख्तर का गीत है और सी रामचंद्र की तर्ज़.
गीत के बोल:
आ जा आ जा आ जा मेरे साक़ी हसरत है दिल में बाक़ी उल्फ़त का जाम पिला जा जीने का ढंग बता जा आ जा आ जा आ जा आ जा आ जा आ जा आ जा
ये किस ने पुकारा है मुझे किस ने पुकारा है कौन तलबगार मेरा कौन है प्यारा
साकी मैं इधर हूँ, मैं इधर हूँ मैं इधर हूँ मैं पास में बैठा हूँ और मैं क़दमों में पड़ा हूँ
भर भर के जाम पिला दे भर भर के जाम पिला दे साक़ी बना दे मतवाला तू ला ला ला बस बना दे मतवाला तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
शराब-ए-हुस्न नज़र से पिलाने आई हूँ मैं एक एक को बेखुद बनाने आई हूँ शराब-ए-हुस्न नज़र से पिलाने आई हूँ मैं एक एक को बेखुद बनाने आई हूँ अदा से नाज़ से अब्रों के इक इशारे से अदा से नाज़ से अब्रों के इक इशारे से दिलों में इश्क़ का जादू जगाने आई हूँ
भर भर के जाम पिला दे भर भर के जाम पिला दे साक़ी बना दे मतवाला तू ला ला ला बस बना दे मतवाला तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
नज़र मिलाओ तो दिल को क़रार आ जाये हर एक अदा पे तुम को प्यार आ जाये उठाओ जाम के जन्नत से कम नहीं दुनिया उठाओ जाम के जन्नत से कम नहीं दुनिया पियो पियो के तुम्हें ऐतबार आ जाये पियो पियो के तुम्हें ऐतबार आ जाये
भर भर के जाम पिला दे भर भर के जाम पिला दे साक़ी बना दे मतवाला तू ला ला ला बस बना दे मतवाला तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
वो मुस्कुरा के निगाहें मिलाये जाते हैं वो मुस्कुरा के निगाहें मिलाये जाते हैं सुरूर बन के मेरे दिल पे छाये जाते हैं सुरूर बन के मेरे दिल पे छाये जाते हैं मिली है आज जो उनकी नज़र से मेरी नज़र मिली है आज जो उनकी नज़र से मेरी नज़र तो हाय मेरे कदम डगमगाये जाते हैं
भर भर के जाम पिला दे भर भर के जाम पिला दे साक़ी बना दे मतवाला तू ला ला ला बस बना दे मतवाला तू ला ला ला बस बना दे मतवाला भर भर के जाम पिला दे भर भर के जाम पिला दे साक़ी बना दे मतवाला तू ला ला ला बस बना दे मतवाला तू ला ला ला बस बना दे मतवाला तू ला ला ला बस बना दे मतवाला तू ला ला ला बस बना दे मतवाला तू ला ला ला बस बना दे मतवाला
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Bhar bhar ke jam pila de-Yasmin 1955
सरस्वती कुमार दीपक का लिखा एक गीत सुनते हैं
सन १९५५ की फिल्म भागवत महिमा से. इसे गाया
है हेमंत कुमार ने और संगीतकार भी हेमंत कुमार ही
हैं.
भागवत महिमा के बारे में सभी जानते हैं. कुछ वर्षों
से भागवात कथा के काफी भव्य आयोजन होने लगे
हैं. पौष के माह में ये आयोजन सबसे ज्यादा होते हैं.
गीत के बोल:
भागवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती
भागवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती
ये अमर ग्रन्थ ये मुख्य पन्थ
ये पंचम वेद निराला
नव ज्योति जगानेवाला
ये अमर ग्रन्थ ये मुख्य पन्थ
ये पंचम वेद निराला
नव ज्योति जगानेवाला
हरिगान यही वरदान यही
जग के मंगल की आरती
पापियों को पाप से है तारती
भागवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती
ये शान्ति गीत पावन पुनीत सा
कोप मिटाने वाला
हरि दरश दिखानेवाला
ये शान्ति गीत पावन पुनीत सा
कोप मिटाने वाला
हरि दरश दिखानेवाला
है सुख करनी है दुःख हरनी
मधुसूदन की आरती
पापियों को पाप से है तारती
भागवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती
ये मधुर बोल जगफन्द खोल
सन्मार्ग दिखाने वाला
बिगड़ी को बनाने वाला
ये मधुर बोल जगफन्द खोल
सन्मार्ग दिखाने वाला
बिगड़ी को बनाने वाला
श्री राम यही घनश्याम यही
प्रभु की महिमा की आरती
पापियों को पाप से है तारती
भागवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती
भागवत भगवान की है आरती
पापियों को पाप से है तारती
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Bhagwat Bhagwan ki hai aarti-Bhagwat mahima 1955
सन ५५ की फिल्म फरार-देव आनंद इन गोवा से एक गीत आपने उसना थे कुछ दिन प[एहले. दूसरा सुनिए गीत दत्त का गाया हुआ.
इसे प्रेम धवन ने लिखा है और संगीतकार वही हैं-अनिल बिश्वास.
गीत के बोल:
एक रात की ये प्रीत एक रात का है गीत कहीं तोड़ के ये सपने ये रात न जाए बीत
ऐ चाँद न जाना सो ऐ तारो न जाना खो जो भी हो सो हो जग में एक भोर कभी न हो
ये ऊँचा आसमाँ इक बार जो कह दे हो तो ये रात माँग लूँ दे के दोनों जहाँ .......................................................... Ek raat ki ye preet-Faraar 1955
मीना कुमारी पर फिल्माया गया और लता मंगेशकर
का गाया एक लोकप्रिय गीत सुनते हैं फिल्म आज़ाद
से. ये सन १९५५ की फिल्म है जिसमें दिलीप कुमार
और मीना कुमारी प्रमुख कलाकार हैं.
राजेंद्र कृष्ण के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है संगीतकार
सी रामचंद्र ने.
गीत के बोल:
ना बोले ना बोले ना बोले रे
ना बोले ना बोले ना बोले रे
घूँघट के पट ना खोले रे
राधा ना बोले ना बोले ना बोले रे
घूँघट के पट ना खोले रे
राधा ना बोले ना बोले ना बोले रे
राधा की लाज भरी अँखियों के डोरे
राधा की लाज भरी अँखियों के डोरे
देखोगे कैसे अब गोकुल के छोरे
देखोगे कैसे अब गोकुल के छोरे
देखो मोहन का मनवा डोले रे
राधा ना बोले ना बोले ना बोले रे
ना बोले ना बोले ना बोले रे
घूँघट के पट ना खोले रे
राधा ना बोले ना बोले ना बोले रे
याद करो जमुना किनारे साँवरिया
याद करो जमुना किनारे साँवरिया
याद करो जमुना किनारे साँवरिया
फोड़ी थी राधा की काहे गगरिया
फोड़ी थी राधा की काहे गगरिया
इस कारन ना तुम संग बोले रे
राधा ना बोले ना बोले ना बोले रे
ना बोले ना बोले ना बोले रे
घूँघट के पट ना खोले रे
राधा ना बोले ना बोले ना बोले रे
रूठी हुई यूँ ना मानेगी छलिया
रूठी हुई यूँ ना मानेगी छलिया
चरणों में राधा के रख दो मुरलिया
चरणों में राधा के रख दो मुरलिया
बात बन जायेगी हौले हौले रे
राधा ना बोले ना बोले ना बोले रे
ना बोले ना बोले ना बोले रे
घूँघट के पट ना खोले रे
राधा ना बोले ना बोले ना बोले रे
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Na bole na bole-Azaad 1955
गोवा की संस्कृति और संगीत की झलकें हमने कुछ हिंदी
फिल्मों में देखी हैं. आज सुनते हैं एक ऐसा ही गीत मगर
श्वेत श्याम युग से. ले दे के फिर वहीँ आ पहुंचे-प्यार, बुखार
और आम का अचार. हिंदी फिल्मों के ९५ फ़ीसदी गीत प्यार
इश्क और मुहब्बत को समर्पित हैं. बाकी के ५ फ़ीसदी जो
हैं वो जीवन दर्शन, कॉमेडी और हैप्पी बर्थडे टू सुनीता, टीना,
मीना इत्यादि हैं. इनमें हमने भेलपुरी मिक्स, कांक्रीट मिक्स,
छप्पर-फाड मिक्स इत्यादि नहीं शामिल किये है.
सुनते हैं एक प्यार की नसीहत वाला गीत फिल्म फरार से.
प्रेम धवन के लिखे गीत को गीता दत्त ने गाया है और इसका
संगीत अनिल बिश्वास द्वारा तैयार किया गया है. फरार फिल्म
का एक अंग्रेजी नाम भी है-देव आनंद इन गोवा. इस नाम से
अभिनेता देव आनंद या फिल्म बनाने वालों को क्या फायदा
हुआ इसकी जानकारी नहीं है मुझे.
गीत के बोल:
जी भर के प्यार कर लो अँखियाँ दो चार कर लो
जी भर के प्यार कर लो अँखियाँ दो चार कर लो
सुनो ये रात नहीं है एक तीन चार की
सुनो ये रात है बस दो दिलों के प्यार की
जी भर के प्यार कर लो अँखियाँ दो चार कर लो
जी भर के प्यार कर लो अँखियाँ दो चार कर लो
सुनो ये रात नहीं है एक तीन चार की
सुनो ये रात है बस दो दिलों के प्यार की
दिल है दीवाना समा सुहाना
दिल है दीवाना समा सुहाना
उफ़ ये जवानी उफ़ ये ज़माना
उफ़ ये जवानी उफ़ ये ज़माना
जब तक हैं झूम सको झूमते जाना
हाय रे झूमते जाना
जी भर के प्यार कर लो अँखियाँ दो चार कर लो
जी भर के प्यार कर लो अँखियाँ दो चार कर लो
सुनो ये रात नहीं है एक तीन चार की
सुनो ये रात है बस दो दिलों के प्यार की
रंगीं फ़िज़ायें मस्त हवायें
रंगीं फ़िज़ायें मस्त हवायें
कल कौन जाने आये न आये
कल कौन जाने आये न आये
जी भर के प्यार कर लो अँखियाँ दो चार कर लो
जी भर के प्यार कर लो अँखियाँ दो चार कर लो
सुनो ये रात नहीं है एक तीन चार की
सुनो ये रात है बस दो दिलों के प्यार की
उल्फ़त के प्याले पी ले पिला ले
उल्फ़त के प्याले पी ले पिला ले
कर दे ये दुनिया दिल के हवाले
कर दे ये दुनिया दिल के हवाले
जी भर के प्यार कर लो अँखियाँ दो चार कर लो
जी भर के प्यार कर लो अँखियाँ दो चार कर लो
सुनो ये रात नहीं है एक तीन चार की
सुनो ये रात है बस दो दिलों के प्यार की
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Jee bhar ke pyar kar lo-Faraar 1955
ज़रा सी बात हिट्स के अंतर्गत अगला गीत पेश है जो
फिल्म मुसाफिरखाना से लिया गया है. पिछला गीत आपने
सुना था फिल्म सलाम मेमसाब से.
मुसाफिरखाना १९५९ की फिल्म है जिसमें श्यामा नायिका हैं.
गीत आपको सी आई डी के गीत ले के पहला पहला प्यार
का कज़िन सा सुनाई देगा. इस गीत को मजरूह ने लिखा
है और इसे आशा भोंसले ने गाया है.
गीत के बोल:
ज़रा सी बात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
ज़रा सी बात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
ऐसे रूठे हो जी सैयां के दीवाना कर दिया
ज़रा सी बात का हुज़ूर ने
मुख से न बोली मैं तो यूँ ही ज़रा बन के
इतनी सी बात पे जी चल दिये तन के
मुख से न बोली मैं तो यूँ ही ज़रा बन के
इतनी सी बात पे जी चल दिये तन के
बस इतनी बात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
बस इतनी बात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
ऐसे रूठे हो जी
हो ऐसे रूठे हो जी सैयां के दीवाना कर दिया
ज़रा सी बात का हुज़ूर ने
प्यार में तेरे ऐसा जिया मोरा धड़के
कहनी पड़ी है दिल की बात नज़र से
प्यार में तेरे ऐसा जिया मोरा धड़के
कहनी पड़ी है दिल की बात नज़र से
नज़र की बात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
नज़र की बात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
ऐसे रूठे हो जी
हो ऐसे रूठे हो जी सैयां के दीवाना कर दिया
ज़रा सी बात का हुज़ूर ने
जब से लगाई तोरे प्यार की बिंदिया
चैन दिनों का खोया रातों की निंदिया
जब से लगाई तोरे प्यार की बिंदिया
चैन दिनों का खोया रातों की निंदिया
मेरे दिन रात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
मेरे दिन रात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
ऐसे रूठे हो जी
हो ऐसे रूठे हो जी सैयां के दीवाना कर दिया
ज़रा सी बात का हुज़ूर ने
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Zara si baat ka huzur ne-Musafirkhana 1955