Feb 6, 2018

चिंगारी कोई भड़के-अमर प्रेम १९७१

फिल्म अमर प्रेम संगीतकार आर डी बर्मन के कैरियर की एक बड़ी
माईलस्टोन फिल्म है. इसके सभी गीतश्रवणीय हैं और अधिकाँश
लोकप्रिय भी.

सन १९७० में फिल्म कटी पतंग और द ट्रेन के गीतोंसे तहलका मचा
चुके आर डी बर्मन की सन १९७१ में फ़िल्में जो आयीं वो हैं-अधिकार,
अमर प्रेम, बुड्ढा मिल गया, कारवां, हरे रामा हरे कृष्ण, हंगामा, मेला,
लाखों में एक, पराया धन और प्यार की कहानी.

फिल्म हंगामा को छोड़ दें तो सभी फिल्मों में से कमसे कम एक ऐसा
गीत ज़रूर है जो बेहद लोकप्रिय हुआ. अधिकार का-रेखा ओ रेखा,
कोई माने या न माने, फिल्म अमर प्रेम के अधिकांश गीत, कारवां के
अधिकांश गीत, लाखों में एक का-चंदा ओ चंदा, जोगी ओ जोगी, मेला
का-रुत है मिलन की, पराया धन का-तू प्यार तू प्रीत, प्यार की कहानी
का -एक खबर आई सुनो एक खबर आई.

फिल्म हरे रामा हरे कृष्ण के इस गीत ने तो सफलता के कई कीर्तिमान
ध्वस्त किये-दम मारो दम. इन सब के अलावा हरे रामा हरे कृष्ण का
-कांची रे कांची रे औरफूलों का तारों का काफी लोकप्रिय हैं.

कटी पतंग में साथ काम कर चुके आनंद बक्षी औरपंचम अमर प्रेम के
लिए एक बार फिर जुड़े अमर प्रेम के लिए. इसकी वजह फिल्म के
निर्माता और निर्देशक शक्ति सामंत रहे. दोनों ही फिल्मों के नायक
राजेश खन्ना हैं बस नायिकाएं अलग हैं. दोनों फिल्मों के ज़्यादातर
गीत किशोर के गाये हुए हैं. लता की आवाज़ में जो एकल गीत हैं इन
फिल्मों के वे भी बेहद लोकप्रिय हैं.

चिंगारी कोई भडके गीत किशोर कुमार, आनंद बक्षीऔर आर डी बर्मन
तीनों के कैरियर का माईलस्टोन गीत है. मदिरा प्रेमियों को तो ये विशेष
रूप से भाता है. मदिरा प्रेमियों का ध्यान हमारे निर्माता निर्देशकों ने
खूब रखा है. गीत एक फिलोसोफिकल गीत है जिसमेंजीवन में लगने
वाले झटकों के बारे में चर्चा है तोमदिरा पीने का सॉलिड बहाना भी है.



गीत के बोल:

चिंगारी कोई भड़के
चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाये
सावन जो अगन लगाये उसे कौन बुझाये
हो उसे कौन बुझाये

पतझड़ जो बाग उजाड़े वो बाग बहार खिलाये
जो बाग बहार में उजड़े उसे कौन खिलाये
हो उसे कौन खिलाये

हमसे मत पूछो कैसे मंदिर टूटा सपनों का
हमसे मत पूछो कैसे मंदिर टूटा सपनों का
लोगों की बात नहीं है ये किस्सा है अपनों का
कोई दुश्मन ठेस लगाये तो मीत जिया बहलाये
मनमीत जो घाव लगाये उसे कौन मिटाये

न जाने क्या हो जाता जाने हम क्या कर जाते
न जाने क्या हो जाता जाने हम क्या कर जाते
पीते हैं तो ज़िन्दा हैं न पीते तो मर जाते
दुनिया जो प्यासा रखे तो मदिरा प्यास बुझाये
मदिरा जो प्यास लगाये उसे कौन बुझाये
हो उसे कौन बुझाये

माना तूफ़ाँ के आगे नहीं चलता ज़ोर किसी का
माना तूफ़ाँ के आगे नहीं चलता ज़ोर किसी का
मौजों का दोष नहीं है ये दोष है और किसी का
मजधार में नैया डोले तो मांझी पार लगाये
मांझी जो नाव डुबोये उसे कौन बचाये
हो उसे कौन बचाये

चिंगारी
...................................................................
Chingari koi bhadke-Amar Prem 1971

Artists: Rajesh Khanna, Sharmila Tagore

2 comments:

चांदनी सूरी,  February 7, 2018 at 6:21 PM  

बड़े दिनों के बाद लंबी पोस्ट !!

Geetsangeet February 8, 2018 at 9:11 PM  

लिखने को तो बहुत कुछ है मगर.........
आपको मालूम है वजह.

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