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Apr 5, 2020

तू पी और जी-देस परदेस १९७८

७० के दशक से एक शराबी गीत सुनते हैं. इस बात का
क्रायटेरिया क्या है कि ये शराबी गीत ही है. तो जनाब
सयाने कहते हैं जिस गाने में शराब शब्द आ जाए वो
शराबी गीत हो जाता है. अब जो शराब-बंदी वाले गाने
हैं उनका क्या?

भांग और शराब पर तो गाने बने हैं मगर दूसरी चीज़ों
को एक नाम-चिलम में समेट दिया गया है.

सुनते हैं छोटे मुखड़े वाला ये गीत देस परदेस फिल्म से.
अमित खन्ना इसके रचनाकार हैं और राजेश रोशन ने
धुन तैयार की है. किशोर कुमार ने इसे गाया है.

शादी के मंडपों के बाहर लगने वाला वेलकम सरीखा
कुछ दारू की दुकान के उदघाटन के अवसर पर लगा
है. अतिथियों की आरती और टीका भी किया जा रहा है.
देव आनंद ने अपनी संस्कृति का काफी ख्याल रखा है
इस गीत में. अतिथि देवो भवः

गीत के शुरू और मध्य तक नायिका लदी फंदी दिखलाई
देती है और गीत के अंत में वो शराब के ड्रम में कपड़ों
की मंदी का शिकार बन जाती है. भीड़ भी छलकती हुई
शराब की बूंदें पा जाने के लिए बेसब्र हो जाती है.




गीत के बोल:

तू पी और जी
तू जी और पी

सरदी में जब पियोगे यारों
सरदी में जब पियोगे यारों गरम कोट बन जायेगा ये
आई गरमी तो मदिरा-जल ठंडक तुमको पहुँचायेगा
अरे रंग भरेगा सपनों में आँखों में जब ये बस जायेगा
मन को तेरे मीत तेरा बस यहीं कहीं पे मिल जायेगा
काहे को तू फिरे अकेला
अरे काहे को तू फिरे अकेला देख ज़रा मौजों का मेला
आ तू भी आ लहरा
अरे आओ ना अकेले कभी रहो ना अकेले कभी
अरे सभी ये ये कहे कवि
के ऊपर नीचे आगे पीछे छाई कैसी मस्ती
ज़रा पी और जी

ये गुजराती वो बंगाली
ये गुजराती वो बंगाली ये दिलवाला वो दिलवाली
मैं देसी हूँ तू परदेसी फिर भी धड़कन है एक जैसी
अरे ये मद्रासी वो पंजाबी हर ताले की है एक चाबी
प्यार के मारे सब बेचारे गोरे काले ये मतवाले
अरे वर्कर हो या मालिक मिल का
वर्कर हो या मालिक मिल का रात का प्यासा भूखा दिन का
आ तू आ ना घबरा
उधार ना चढ़ाओ कभी पैसे साथ लाओ अभी
अभी ये दुकान है खुली
के पहली पहली बिक्री मेरी बेचूँ मैं तो सस्ती
ज़रा पी और जी

घरवालों की याद सताये
घरवालों की याद सताये या आँखों में आँसू आये
हमको देखो घूँट हँसी के पी कर हम कैसे मुस्काये
हो हो हो हो हो हा हा हा हा हा
इसमें कितने राज़ छुपे हैं पूछो मेरे दिल से तुम
बैठे बैठे महफ़िल से होता है कैसे कोई गुम
अरे दुनिया सारी हिल जायेगी
दुनिया सारी हिल जायेगी फ़टी जेब भी सिल जायेगी
आ तू भी बन जा राजा
अरे लफ़ड़ा ना करो कभी झगड़ा ना करो कभी
भंगड़ा तो पाओ ज़रा जट जी
अरे बल्ले बल्ले बच के कहीं डूबे ना ये कश्ती
ज़रा पी और जी
कहता ये टोनी
हे हे कम ऑन मैडम हा हा
कम ऑन सिस्टर ये पकड़ा दो ब्रदर
ओये आनो ना सिस्टर
बोलो चीयर्स
…………………………………………………….
Too pee aur jee-Des Pardes 1978

Artists: Dev Anand, Tina Munim

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Sep 9, 2019

आज पिला दे साकी-डोली १९६९

फिल्मों के शराबी गीतों में भी अलग अलग फ्लेवर होता है.
कोई देसी ठर्रे वाली किक देता है तो कोई बीयर वाला हल्का
सुरूर. अब हर गाना तो वाईन और शेम्पेन वाला मज़ा नहीं
दे पायेगा. वैसे अधिकांश में आपको व्हिस्की या राम वाला
आनंद मिलेगा.

अब ब्रांड मत पूछने लग जाईयेगा मुझसे. और भी किस्में
पायी जाती है असव की मगर वो सब जानकारी अंग्रेजी वाले
महंगे ब्लॉग पर ढूँढें.

सुनते हैं राजेंद्र कृष्ण का लिखा गीत जिसे महेंद्र कपूर और
आशा भोंसले ने गाया है संगीतकार रवि की धुन पर.

प्रेम चोपड़ा पर फिल्माए गए कुछ रेयर गानों में से एक
है ये.




गीत के बोल:

आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से
आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से

आज है रात मुरादों की कुछ रंगीन इरादों की
कर भी दे तस्वीर मुकम्मिल चंद अधूरे वादों की
आज है रात मुरादों की कुछ रंगीन इरादों की
कर भी दे तस्वीर मुकम्मिल चंद अधूरे वादों की

आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से
आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से

सर्द है मौसम जोश में आ लहरा कर आगोश में आ
छेड़ के नगमा बेशोशी का ये मत कहना होश में आ
सर्द है मौसम जोश में आ लहरा कर आगोश में आ
छेड़ के नगमा बेशोशी का ये मत कहना होश में आ

आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से
आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से

गेसू खुले खुले से हैं मगर रंगत उड़ी उड़ी सी है
ए मेरी हमराज़ बता ये शोख शरारत किसकी है
गेसू खुले खुले से हैं मगर रंगत उड़ी उड़ी सी है
ए मेरी हमराज़ बता ये शोख शरारत किसकी है
टकराई है आँखें तेरी रात किसी बेगाने से
या अपने परवाने से
टकराई है आँखें तेरी रात किसी बेगाने से
या अपने परवाने से
……………………………………………
Aaj pila de saaki-Doli 1969

Artists: Prem Chopda, Nazima, Babita

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May 21, 2018

कसम है तुझे…पीने से पिलाने से-दीदार १९७०

तरह तरह की कसमें. किसी के नाम की कसम, किसी के जाम
की कसम. इधर तो मैखाने की कसम दिलाई जा रही है. फिल्म
का नाम है दीदार जो सन १९७० की एक फिल्म है. वर्मा मलिक
ने इसे लिखा था और उषा खन्ना ने धुन बनाई. गायक कलाकार
हैं किशोर कुमार और उषा खन्ना.

आपको पिछले साल दीदार से किशोर कुमार का गाया एक रूमानी
गीत सुनवाया था. ऐसा लगता है गीत किसी श्वेत श्याम युग की
फिल्म के लिया तैयार किया गया था जिसे सन १९७० की फिल्म
के लिए इस्तेमाल कर लिया गया. किशोर का एकल गीत ज़रूर
नयी रिकॉर्डिंग है मगर प्रस्तुत गीत १९६५ या ६६ के आसपास की
इजाद सुनाई देती है.



गीत के बोल:


क़सम है तुझे महफ़िल की
मैं नाचूँ तू पी मैं नाचूँ तू हिक
बिलि बिलि वप्पा व वप्पा
बिलि बिलि वप्पा व वप्पा
बिलि बिलि वप्पा व वप्पा
बिलि बिलि वप्पा व वप्पा

पीने से पिलाने से पैमाने से मयख़ाने से
बेगाने से ज़माने से तू बच बचा तू बच बचा
पीने से पिलाने से पैमाने से मयख़ाने से
बेगाने से ज़माने से तू बच बचा तू बच बचा

हे जवानी में कभी किस कभी किस
हे हे हो हो हे हे
जवानी में कभी किसी से आँख न लड़ा
आँख लड़ जाए तो भी दिल ना मिला, हे
दिल मिल जाए भी तो शोर न मचा
मीठे-मीठे वादों पे तू सबको नचा
क्यूँ ?
क्यूँ क्या
यहाँ दिल भी बुरा है दिलदार भी बुरा
इकरार भी बुरा है इनकार भी बुरा
इनकार भी बुरा
पीने से
पिलाने से
पैमाने से
मयख़ाने से
बेगाने से ज़माने से तू बच बचा
तू बच बचा
बिलि बिलि बप्पा ब बप्पा
बिलि बिलि बप्पा ब बप्पा
बिलि बिलि बप्पा ब बप्पा

अरे दिल दे कोई तो कोई तो कोई तो
हे हे हो हो हे
अरे दिल दे कोई तो दिल तोड़ दो बेशक़
आँख जो मिलाये आँखें फोड़ दो बेशक़ हू हू
फूल ना खिले तो टहनी मोड़ दो बेशक़
बुरी दुनिया है इसे छोड़ दो बेशक़
किसलिए ?
किसलिए क्या
नेक नाम भी बुरा बदनाम भी बुरा
आग़ाज़ भी बुरा है अंजाम भी बुरा
अंजाम भी बुरा

पीने से पिलाने से पैमाने से मयख़ाने से
बेगाने से ज़माने से तू बच बचा
तू बच बचा
.........................................................................
Peene se pilane se-Deedar 1970

Artists:

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Feb 6, 2018

चिंगारी कोई भड़के-अमर प्रेम १९७१

फिल्म अमर प्रेम संगीतकार आर डी बर्मन के कैरियर की एक बड़ी
माईलस्टोन फिल्म है. इसके सभी गीतश्रवणीय हैं और अधिकाँश
लोकप्रिय भी.

सन १९७० में फिल्म कटी पतंग और द ट्रेन के गीतोंसे तहलका मचा
चुके आर डी बर्मन की सन १९७१ में फ़िल्में जो आयीं वो हैं-अधिकार,
अमर प्रेम, बुड्ढा मिल गया, कारवां, हरे रामा हरे कृष्ण, हंगामा, मेला,
लाखों में एक, पराया धन और प्यार की कहानी.

फिल्म हंगामा को छोड़ दें तो सभी फिल्मों में से कमसे कम एक ऐसा
गीत ज़रूर है जो बेहद लोकप्रिय हुआ. अधिकार का-रेखा ओ रेखा,
कोई माने या न माने, फिल्म अमर प्रेम के अधिकांश गीत, कारवां के
अधिकांश गीत, लाखों में एक का-चंदा ओ चंदा, जोगी ओ जोगी, मेला
का-रुत है मिलन की, पराया धन का-तू प्यार तू प्रीत, प्यार की कहानी
का -एक खबर आई सुनो एक खबर आई.

फिल्म हरे रामा हरे कृष्ण के इस गीत ने तो सफलता के कई कीर्तिमान
ध्वस्त किये-दम मारो दम. इन सब के अलावा हरे रामा हरे कृष्ण का
-कांची रे कांची रे औरफूलों का तारों का काफी लोकप्रिय हैं.

कटी पतंग में साथ काम कर चुके आनंद बक्षी औरपंचम अमर प्रेम के
लिए एक बार फिर जुड़े अमर प्रेम के लिए. इसकी वजह फिल्म के
निर्माता और निर्देशक शक्ति सामंत रहे. दोनों ही फिल्मों के नायक
राजेश खन्ना हैं बस नायिकाएं अलग हैं. दोनों फिल्मों के ज़्यादातर
गीत किशोर के गाये हुए हैं. लता की आवाज़ में जो एकल गीत हैं इन
फिल्मों के वे भी बेहद लोकप्रिय हैं.

चिंगारी कोई भडके गीत किशोर कुमार, आनंद बक्षीऔर आर डी बर्मन
तीनों के कैरियर का माईलस्टोन गीत है. मदिरा प्रेमियों को तो ये विशेष
रूप से भाता है. मदिरा प्रेमियों का ध्यान हमारे निर्माता निर्देशकों ने
खूब रखा है. गीत एक फिलोसोफिकल गीत है जिसमेंजीवन में लगने
वाले झटकों के बारे में चर्चा है तोमदिरा पीने का सॉलिड बहाना भी है.



गीत के बोल:

चिंगारी कोई भड़के
चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाये
सावन जो अगन लगाये उसे कौन बुझाये
हो उसे कौन बुझाये

पतझड़ जो बाग उजाड़े वो बाग बहार खिलाये
जो बाग बहार में उजड़े उसे कौन खिलाये
हो उसे कौन खिलाये

हमसे मत पूछो कैसे मंदिर टूटा सपनों का
हमसे मत पूछो कैसे मंदिर टूटा सपनों का
लोगों की बात नहीं है ये किस्सा है अपनों का
कोई दुश्मन ठेस लगाये तो मीत जिया बहलाये
मनमीत जो घाव लगाये उसे कौन मिटाये

न जाने क्या हो जाता जाने हम क्या कर जाते
न जाने क्या हो जाता जाने हम क्या कर जाते
पीते हैं तो ज़िन्दा हैं न पीते तो मर जाते
दुनिया जो प्यासा रखे तो मदिरा प्यास बुझाये
मदिरा जो प्यास लगाये उसे कौन बुझाये
हो उसे कौन बुझाये

माना तूफ़ाँ के आगे नहीं चलता ज़ोर किसी का
माना तूफ़ाँ के आगे नहीं चलता ज़ोर किसी का
मौजों का दोष नहीं है ये दोष है और किसी का
मजधार में नैया डोले तो मांझी पार लगाये
मांझी जो नाव डुबोये उसे कौन बचाये
हो उसे कौन बचाये

चिंगारी
...................................................................
Chingari koi bhadke-Amar Prem 1971

Artists: Rajesh Khanna, Sharmila Tagore

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Aug 13, 2017

दारू की बोतल में-मजबूर १९७४

मजबूरी इंसान से क्या क्या करवा देती है यही इस फिल्म
का सार है. फिल्म अपने ज़माने की एक चर्चित फिल्म है
और इसके गीत भी काफी बजे थे किसी ज़माने में. प्रस्तुत
गीत काफी लोकप्रिय हुआ था. इसमें दारू का जिक्र जो है.

इसके रचनाकार हैं आनंद बक्षी. किशोर के गाये इस गीत की
धुन लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने बनाई है. गीत फिल्माया गया है
प्राण और जयश्री तलपडे उर्फ जयश्री टी पर.



गीत के बोल:

हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
दारू की बोतल में काहे पानी भरता है
फिर ना कहना माइकल दारू पी के दंगा करता है
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला

शी शी शी चीं ए कैसा करता ऐसा काहे को होता
शी शी शी चीं ए कैसा करता ऐसा काहे को होता
देख ले जिस दिन माइकल को रात को सेठ नहीं सोता
ख़ुद चोरी करता है लेकिन चोर से डरता है
फिर ना कहना माइकल दारू पी के दंगा करता है
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला

जंगल में हैं मोर बड़े शहर में हैं चोर बड़े
जंगल में हैं मोर बड़े शहर में हैं चोर बड़े
अपने भी उस्ताद यहाँ पड़े हुए और बड़े
माइकल तो बस लोगों की बस ख़ाली जेब कतरता है
फिर ना कहना माइकल दारू पी के दंगा करता है
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला

साल महीने के लिए खाने-पीने के लिए
अरे साल महीने के लिए खाने-पीने के लिए
कितना पैसा चाहिए आख़िर जीने के लिए
लोग दीवाना हैं जो इस पैसे पे मरता है
फिर ना कहना माइकल दारू पी के दंगा करता है
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला

दारू की बोतल में काहे पानी भरता है
फिर ना कहना माइकल दारू पी के दंगा करता है
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
............................................................................
Daroo ki botal mein-Majboor 1974

Artists: Pran, Jayshri T

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Aug 12, 2017

कभी न कभी कहीं न कहीं-शराबी १९६४

देव आनंद अभिनीत शराबी से एक गीत सुनते हैं जो लोकप्रिय है.
रफ़ी का गाया गीत राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ है और इसकी
तर्ज़ बनाई है मदन मोहन ने.



गीत के बोल:

कभी न कभी कहीं न कहीं कोई न कोई तो आयेगा
अपना मुझे बनायेगा दिल में मुझे बसायेगा

कब से तन्हा ढूँढ राहा हूँ दुनिया के वीराने में
खाली जाम लिये बैठा हूँ कब से इस मयखाने में
कोई तो होगा मेरा साक़ी कोई तो प्यास बुझायेगा
कभी न कभी कहीं न कहीं कोई न कोई तो आयेगा

किसी ने मेरा दिल न देखा न दिल का पैग़ाम सुना
मुझको बस आवारा समझा जिसने मेरा नाम सुना
अब तक तो सबने ठुकराया कोई तो पास बिठायेगा
कभी न कभी कहीं न कहीं कोई न कोई तो आयेगा

कभी तो देगा सन्नाटे में प्यार भरी आवाज़ कोई
कौन ये जाने कब मिल जाये रस्ते में हमराज कोई
मेरे दिल का दर्द समझ कर दो आँसू तो बहायेगा
कभी न कभी कहीं न कहीं कोई न कोई तो आयेगा
अपना मुझे बनायेगा दिल में मुझे बसायेगा
कभी न कभी कहीं न कहीं कोई न कोई तो आयेगा
………………………………………..
Kabhi na kabhi kahin na kahin-Sharabi 1964

Artist: Dev Anand

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Aug 6, 2017

साग़र नहीं है तो क्या है-नाटक १९७५

संगीत सागर में कई अनमोल मोती छुपे हुए हैं वैसे ही जैसे घरों में
मोती छुपे होते हैं और आप दरवाज़े की तरफ बढ़ें तो ही पता चल
पाता है मोती की क्वालिटी और साईज़ क्या है. घर वाले मोती कुछ
खुले होते हैं और कुछ चेन से बंधे हुए.

आज सुनते हैं फिल्म नाटक से एक उम्दा गीत आनंद बक्षी का लिखा
हुआ. इसकी तर्ज़ बनाई है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने. विजय अरोड़ा और
मौसमी चटर्जी पर इसे फिल्माया गया है.




गीत के बोल:

साग़र नहीं है तो क्या है
साग़र नहीं है तो क्या है तेरी आँख का नशा तो है
बादल नहीं है तो क्या है
बादल नहीं है तो क्या है तेरी ज़ुल्फ़ की घटा तो है
साग़र नहीं है तो क्या है

मेरी तमन्ना की महफ़िल से तुम ये उठ के जाने लगे हो
ऐसी भी क्या बेरुख़ी रूठ कर हमसे आँखें चुराने लगे हो
चुराने लगे हो
मौसम नहीं है तो क्या है मौक़ा ये प्यार का तो है
साग़र नहीं है तो क्या है

तेरी घनी ज़ुल्फ़ के साये में चार पल साथ तेरे जियेंगे
साग़र से रोज़ पीते हैं आज तेरी नज़र से पियेंगे
नज़र से पियेंगे
साक़ी नहीं है तो क्या है इक शोख़ दिलरुबा तो है
साग़र नहीं है तो क्या है

शायद यही है क़यामत की रात मान लेने को जी चाहता है
तेरी क़सम आज दिल ही नहीं जान देने को जी चाहता है
जी चाहता है
क़ातिल नहीं है तो क्या है क़ाफ़िर तेरी अदा तो है
साग़र नहीं है तो क्या है हाय
साग़र नहीं है तो क्या है
...........................................................................
Sagar nahin hai to kya hai-Natak 1975

Artists: Vijay Arora, Moushumi Chatterji

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May 18, 2017

मैं नशे में हूँ –दो गुंडे १९५९

सन १९५९ की फिल्मों में दो ऐसे गीत हैं जिनके बोलों में
‘मैं नशे में हूँ’ शब्द आते हैं. एक तो फिल्म का नाम ही
इन शब्दों से बना है और उसका शीर्षक गीत है जिसमें
ये शब्द आते हैं.

आज आपको १९५९ की फिल्म दो गुंडे से रफ़ी का गाया
गीत सुनवायेंगे. मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा गीत है और
इसमें थोडा हास्य का पुट भी है. इस गीत की धुन बनाई
है गुलाम मोहम्मद ने.



गीत के बोल:

मैं नशे में हूँ  मैं नशे में हूँ
दोस्तों ने जबसे छोड़ा  मैं मज़े में हूँ
मैं नशे में हूँ  मैं नशे में हूँ
दोस्तों ने जबसे छोड़ा  मैं मज़े में हूँ
मैं नशे में हूँ 

पी के आँसू हँस रहा हूँ  क्या करूँ मजबूर हूँ
पी के आँसू हँस रहा हूँ  क्या करूँ मजबूर हूँ
कैसा दुश्मन  दोस्तों की ठोकरों से चूर हूँ
फिर भी ज़िंदा क्या कहूँ किस सिलसिले में हूँ
मैं नशे में हूँ

मैं हूँ मुफ़लिस  मैं लफ़ंगा  पूछते हो नाम क्या
मैं हूँ मुफ़लिस  मैं लफ़ंगा  पूछते हो नाम क्या
ज़ात कैसी  कैसा घर दर  मुझको इनसे काम क्या
रास्ते में आँख खोली  रास्ते में हूँ
मैं नशे में हूँ

हर बुराई कर के फिर भी मुझसे रहना दूर दूर
हर बुराई कर के फिर भी मुझसे रहना दूर दूर
ऐ शरीफ़ो मैं मिलूँ तो मुझसे कहना दूर दूर
जानवर हूँ  आदमी तो देखने में हूँ
मैं नशे में हूँ मैं नशे में हूँ
दोस्तों ने जबसे छोड़ा  मैं मज़े में हूँ
मैं नशे में हूँ 
..................................................................
Main nashe mein hoon-Do gunde 1959

Artist: Ajit

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Dec 22, 2016

शराब चीज़ ही ऐसी है-पंकज उधास गज़ल

ये बात किशोर कुमार के एक गीत में है इसलिए अब हमारे लिए
ऑफिशियल है-पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए. पीने वालों
को सर्दी, गर्मी हो या बरसात कोई न कोई वजह चाहिए पीने के
लिए. किसी किसी दिन तो वजह नहीं मिलती इसलिए पीना पढ़ती
है.

आज सुनते हैं मयखाना किंग पंकज उधास की एक गज़ल. पीने
वाले के अंदर से निकली आवाज़ की तरह है ये. न छोड़ी जाए...
शराब की तुलना यार से कर दी गई है-ना छोड़ा/छोड़ी जाए. बोल
लिखे हैं सरदार अंजुम ने और मेरे ख्याल से इसकी धुन स्वयं
पंकज उधास ने बनाई है.




बोल:

शराब चीज़ ही ऐसी है न छोड़ी जाये
ये मेरे यार के जैसी है न छोड़ी जाये
शराब चीज़ ही ऐसी है न छोड़ी जाये
ये मेरे यार के जैसी है न छोड़ी जाये
शराब चीज़ ही ऐसी है

हर एक शय को जहां में बदलते देखा है
हर एक शय को जहां में बदलते देखा है
हर एक शय को जहां में बदलते देखा है
मगर ये वैसे की वैसी है न छोड़ी जाये
ये मेरे यार के जैसी है न छोड़ी जाये
शराब चीज़ ही ऐसी है

किसी के दम से पिघलती है ये बोझल रातें
किसी के दम से पिघलती है ये बोझल रातें
किसी के दम से पिघलती है ये बोझल रातें
मगर ये पानी के जैसी है न छोड़ी जाये
ये मेरे यार के जैसी है न छोड़ी जाये
शराब चीज़ ही ऐसी है

यही तो टूटे दिलों का इलाज़ है अंजुम
यही तो टूटे दिलों का इलाज़ है अंजुम
यही तो टूटे दिलों का इलाज़ है अंजुम
मैं क्या कहूँ तुझे कैसी है ना छोड़ी जाये
ये मेरे यार के जैसी है न छोड़ी जाये

शराब चीज़ ही ऐसी है न छोड़ी जाये
ये मेरे यार के जैसी है न छोड़ी जाये
शराब चीज़ ही ऐसी है
..........................................................
Sharab cheez hi aisi hai Pankaj Udhas Ghazal

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Dec 15, 2016

पी ले पी ले ओ मोरे राजा-तिरंगा १९९३

गीतकार संतोष आनंद ने देशभक्ति वाली थीम की फिल्मों के लिए
कई गीत लिखे हैं. आज आपको सुनवाते हैं चर्चित फिल्म तिरंगा
से एक गीत. फिल्म में राजकुमार और नाना पाटेकर प्रमुख कलाकार
हैं. चर्चा की एक वजह इसकी स्टारकास्ट में है.

फिल्म के निर्देशक और निर्माता मेहुल कुमार हैं. खूब जमेगा रंग
जब बैठेंगे हम दो और...यहाँ तो ४०-५० हैं. पार्टी चल रही है और
इसमें दारू अपने पूरे शबाब पर है.

गीत गाया है सुदेश भोंसले और मोहम्मद अज़ीज़ ने. संगीतकार को
आप पहचान ही गए होंगे, नहीं? ये हैं लक्ष्मीकांत प्यारेलाल.




गीत के बोल:

तुम तुम हो हम हम हैं,
ना तुम कम हो ना हम कम हैं
जानी
यार की है यारी निभानी
पी ले पी ले ओ मोरे राजा पी ले पी ले ओ मोरे जानी
पी ले पी ले ओ मोरे राजा पी ले पी ले ओ मोरे जानी
यार की है यारी निभानी
पी ले पी ले ओ मोरे राजा पी ले पी ले ओ मोरे जानी
पी ले पी ले ओ मोरे राजा पी ले पी ले ओ मोरे जानी

मेरे होंठों पे पैमाना पैमाना पैमाना
मेरे सजदे में मयखाना मयखाना मयखाना
मेरे होंठों पे पैमाना मेरे सजदे में मयखाना
ज़माना आज देखेगा
ज़माना आज देखेगा क्या होता है दीवाना
ओ दीवाना ओ दीवाना
ये रईसी है खानदानी ये रईसी है खानदानी
पी ले पी ले ओ मोरे जानी
पी ले पी ले ओ मोरे राजा पी ले पी ले ओ मोरे जानी

ओ मोहब्बत ही इबादत है हाँ इबादत ही मोहब्बत है
ओ मोहब्बत ही इबादत है हाँ इबादत ही मोहब्बत है
तुझे मेरी ज़रूरत है मुझे तेरी ज़रूरत है
बाकी दुनिया है बेमानी बाकी दुनिया है बेमानी
पी ले पी ले ओ मोरे जानी
पी ले पी ले ओ मोरे राजा पी ले पी ले ओ मोरे जानी

पानी में मिले तो लगे पानी जैसी
जिस्म में मिले तो लगे जवानी जैसी
पानी में मिले तो लगे पानी जैसी
जिस्म में मिले तो लगे जवानी जैसी
जवानी जैसी जवानी जैसी
पानी में मिले तो लगे पानी जैसी
जिस्म में मिले तो लगे जवानी जैसी
जवानी जैसी जवानी जैसी
चाल तेरी है क्या मस्तानी चाल तेरी है क्या मस्तानी
पी ले पी ले ओ मोरे जानी
पी ले पी ले ओ मोरे राजा पी ले पी ले ओ मोरे जानी
पी ले पी ले ओ मोरे राजा पी ले पी ले ओ मोरे जानी
पी ले पी ले ओ मोरे राजा पी ले पी ले ओ मोरे जानी
…………………………………………………….
Pee le pee le o more raja-Tiranga 1993

Artists:Raaj Kumar, Nana Patekar

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Aug 28, 2016

बेखुदी का बड़ा सहारा है-एक ही भूल १९८१

अब सुना जाए बेखुदी शब्द से शुरू होने वाला एक और लोकप्रिय गीत.
जीतेंद्र के लिए अमूमन संगीतकारों ने रफ़ी या किशोर की आवाज़ ली
गानों में, मगर यहाँ प्रयोग के तौर पर एस पी बालू की आवाज़ ली
गयी और ये गीत हिट साबित हुआ.

फिल्म एक ही भूल सन १९८१ की एक सफल फिल्म है जिसमें जीतेंद्र,
रेखा के अलावा शबाना आज़मी भी प्रमुख भूमिका में हैं. फिल्म के गीत
आनंद बक्षी ने लिखे और संगीत है लक्ष्मी-प्यारे का.

फिल्म में नाजनीन की संक्षिप्त भूमिका है और वो फिल्म की भूल के
बाद गायब हो जाती हैं. मज़हर खान भी एक छोटे रोल में मौजूद हैं.





गीत के बोल:

बेखुदी का बड़ा सहारा है
बेखुदी का बड़ा सहारा है
वरना दुनिया में क्या हमारा है
लोग मरते हैं मौत आने से
लोग मरते हैं मौत आने से
हमको इस ज़िंदगी ने मारा है
बेखुदी का बड़ा सहारा है

आदमी कुछ भी कर नहीं सकता
आदमी कुछ भी कर नहीं सकता
वक्त ऐसा गुज़र नहीं सकता
वक्त ऐसा मगर गुज़ारा है

बेखुदी का बड़ा सहारा है
वरना दुनिया में क्या हमारा है
बेखुदी का बड़ा सहारा है

कितनी हल्की है कितनी बोझिल है
कितनी हल्की है कितनी बोझिल है
कोई औरत नहीं ये बोतल है
बंद इसमें जहान सारा है

बेखुदी का बड़ा सहारा है
वरना दुनिया में क्या हमारा है
बेखुदी का बड़ा सहारा है

इस मुक़द्दर का ये सितम देखो
इस मुक़द्दर का ये सितम देखो
डूबते जा रहे हैं हम देखो
और वो सामने किनारा है
बेखुदी का बड़ा सहारा है

बेखुदी का बड़ा सहारा है
वरना दुनिया में क्या हमारा है
लोग मरते हैं मौत आने से
हमको इस ज़िंदगी ने मारा है
बेखुदी का बड़ा सहारा है
.................................................................
Bekhudi ka bada sahara hai-Ek hi bhool 1981

Artists: Jeetendra, Master Ravi

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Jul 13, 2016

हम हैं नशे में-सेहरा १९६३

काफी दिनों से उत्तम गुणवत्ता वाला शराबी गीत नहीं सुनाया
इधर. एक बार का प्रसंग है चर्चा हुई थी इसी बात पर-ये
उत्तम गुणवत्ता क्या होती है, शराब शराब है. हाँ, एक जवाब
आया. जैसे देसी ठर्रे और विलायती ठर्रे में कोई फर्क नहीं
वैसे ही सब चीजें बराबर है.

विलायती पीने वाले ब्लेंड का महत्त्व जानते हैं. कहा जाता है
शराब जितनी पुरानी होती जाती है उतनी असरदार होती जाती
है. ब्लेंडिंग मतलब स्वादिष्ट मिलावट. दो किस्म की शराबों को
मिला कर स्वाद बढाया जाता है. 

गीत सुनते हैं फिल्म सेहरा से जिसे आशा भोंसले से गवाया
है संगीतकार ने. गीत के बोल लिखे हैं हसरत जयपुरी ने.

आशा भोंसले की गायकी और संध्या के नृत्य की कोई होड
नहीं है, इस गीत को देखने के बाद आप दांतों तले ऊँगली
दबा लेंगे.




गीत के बोल:


आ आ आ आ आ आ हा
आ आ आ आ आ आ हा
हम हैं नशे में तुम हो नशे में
तुम हो नशे में
आँखें मिलीं हैं उसी का नशा है
आँखें मिलीं हैं उसी का नशा है
हम हैं नशे में तुम हो नशे में
ओ हो हो हो
आँखें मिलीं हैं उसी का नशा है
हम हैं नशे में

हो कल रात देखा था अलबेला सपना
कल रात देखा था अलबेला सपना
मन चाहे बालम को पाया था अपना
फिर मैं न सोयी, फिर
फिर मैं न सोयी सपनों में खोयी
सपनों में खोयी
आहें भरीं हैं उसी का नशा है
आहें भरीं हैं उसी का नशा है
हम हैं नशे में
हो हो हो हो
हम हैं नशे में

हाय नशा प्यार का है उमर भर रहेगा
नशा प्यार का है उमर भर रहेगा
उल्फ़त के मौजों में ये दिल बहेगा
मैं बन के नदिया
मैं बन के नदिया लहरा रही हूँ
लहरा रही हूँ
लहरें उठीं हैं उसी का नशा है
लहरें उठीं हैं उसी का नशा है

हम हैं नशे में
हो हो हो हो
हम हैं नशे में तुम हो नशे में
तुम हो नशे में
आँखें मिलीं हैं उसी का नशा है
हम हैं नशे में
...................................................................
Ham hain nashe mein-Sehra 1963

Artist: Sandhya

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Jun 17, 2016

मुझे पीना है- उपासना १९७१

उपासना फिल्म के एक गीत पर चर्चा के दौरान हमने आपको
बतलाया था कि प्रेरणा कहीं से भी और कैसे भी ली जा सकती
है. कैसे एक अंग्रेजी धुन में हिंदी गाने की धुन का प्रयोग हुआ.

सन १९७१ की फिल्म उपासना में गीत है-मुझको तो पीनी है
जिसे आशा भोंसले ने गाया है. कम सुना गया गीत है और इसे
आप चाहें तो gem, जैम अचार मुरब्बा वगैरह कह सकते हैं.

गीत इन्दीवर ने लिखा है और संगीत कल्याणजी आनंदजी की
जोड़ी का है. फिल्म का मुकेश का गाया -दर्पण को देखा बेहद
लोकप्रिय गीत है, आपकी जानकारी के लिए.

श्रेणी बनाने वालों के लिए ये एक शराबी गीत है. आनंद लीजिए.




 गीत के बोल:

बहुत देर की आने में
हाय रे क्या पाया तडपाने में
पियो पिलाओ जी भर के

आये हो जब मयखाने में
पियो ना, थोड़ी सी

प्यास मेरी बुझा ना पायेगा एक पैमाना
प्यास मेरी बुझा ना पायेगा एक पैमाना
मुझको तो पीना है मयखाने का मयखाना
प्यास मेरी बुझा ना पायेगा एक पैमाना

मेरे लिए मेरा जीवन एक सपना है
सपने में तू क्या ओ, हर कोई अपना है
यही है जीवन तू जी ले
यही है जीवन तू जी ले
पल पल का तू रस पी ले जी ले, पी ले जी ले
दिल को ना रहने दे वीराने का वीराना
मुझको तो पीना है मयखाने का मयखाना
प्यास मेरी बुझा ना पायेगा एक पैमाना

और भी हैं मेरे रूप कई ऐसे
एक ही रात में तू देखेगा सब कैसे
कल भी तूने न पहचाना
कल भी तूने न पहचाना
आज भी तूने कब जाना, जाना जाना
समझेगा तू कैसे दीवाने का दीवाना
मुझको तो पीना है मयखाने का मयखाना
प्यास मेरी बुझा ना पायेगा एक पैमाना
मुझको तो पीना है मयखाना का मयखाना
मयखाने का मयखाना
................................................................
Mujhko to peena hai-Upasana 1971

Artists:Helen

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Nov 17, 2015

मुहब्बत में ऐसे क़दम–अनारकली १९५३

हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास की सबसे बड़ी हिट फिल्मों
में से एक है अनारकली. सी रामचंद्र के संगीत ने तहलका
सा मचा दिया था. इस फिल्म के बाद सी रामचंद्र शायद
वैसा करिश्मा रिपीट नहीं कर पाए और उनका कैरियर भी
ढलान की ओर अग्रसर हो गया. वैसे बात की जाए तो सन
१९५९ की फिल्म नवरंग के गीत भी सुपरहिट गीत रहे किन्तु
अनारकली के गाने तो लाजवाब हैं.

गौरतलब है इस फिल्म के लिए पहले संगीतकार बसंत प्रकाश
को अनुबंधित किया गया था और उन्होंने गीता दत्त की आवाज़
में एक गाना रिकॉर्ड भी किया जो फिल्म के एल्बम पर मौजूद
है.

सी रामचंद्र के लिए ४ गीतकारों ने गीत लिखे. आज सुनिए एक
राजेंद्र कृष्ण का लिखा गीत. एक समय मदिरा प्रेमियों को ये गीत
बेहद पसंद हुआ करता था, आज का पता नहीं. 



गीत के बोल:

मेरी तकदीर मुझे आज कहाँ लायी हैं
शीशा शीशा जहाँ मेरा ही तमाशाई हैं

मुझे इल्ज़ाम न देना मेरी बेहोशी का
मेरी मजबूर मुहब्बत की ये रुसवाई है
मुहब्बत में ऐसे क़दम डगमगाये
ज़माना ये समझा के हम पी के आये

जिसे काम हो रात दिन आँसूओं से
उसे हुक़्म ये है हंसे और हंसाये
ज़माना ये समझा के हम पी के आये

किसी की मुहब्बत में मजबूर होकर
हम उन तक तो पहुँचे, वो हम तक न आये
ज़माना ये समझा के हम पी के आये

वो जिनके लिये ज़िंदगानी लुटा दी
ये बैठे हुए हैं मेरा दिल चुराये
ज़माना ये समझा के हम पी के आये

छुपोगे कहाँ तक नज़र तो मिलाओ
तुम्हारी बला से मेरी जान जाये
ज़माना ये समझा के हम पी के आये
...................................................................
Mohabbat mein aise kadam-Anarkali 1953

Artists:  Beena Rai,

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Dec 31, 2014

हुई महंगी बहुत ही शराब-पंकज उधास

आज आपको मयखाना किंग पंकज उधास की एक गज़ल सुनवाते हैं.
ठण्ड में गज़क खाते खाते गज़ल सहसा याद आ जाती है. अजीब इत्तेफाक
है. जिन गज़लों ने उधास को मयखाना किंग बनाया उनमें से एक है
प्रस्तुत गज़ल. बरसों तक मेरे मन में ये प्रश्न रहा कि ये लिखी किसने
है. ढूंढते ढूंढते उस शख्सियत के बारे में पता चला. ये हैं चंडीगढ़ के
एस. राकेश जो स्वयं भी  एक संगीतकार हैं.गज़ल की पञ्च लाइन है
थोड़ी थोड़ी पिया करो

इस गज़ल का आविष्कार मानो तब हुआ जब दारु के भाव बढ़ गए थे.
गज़ल  में एक पंक्ति है-पियो लेकिन रखो हिसाब . अब दारु पीने वाले
शायद ही हिसाब लगाते होंगे कि उन्होंने कितनी पी और कितनी उनको
पीना चाहिए. एक बात तय है कि आम जनता केवल शराब शब्द सुनकर
ही आनंद ले लिया करती थी इस गज़ल का.

आइये आनंद उठायें इस गज़ल का.



बोल:

ये इंतज़ार गलत है के शाम हो जाए
जो हो सके तो अभी दौर-ए-जाम हो जाए
मुझ जैसे रिंद को भी तूने, हश्र में, या रब
बुला लिया है तो कुछ इंतजाम हो जाए

हुई महंगी बहुत ही शराब के थोड़ी थोड़ी पिया करो
पियो लेकिन रखो हिसाब के थोड़ी थोड़ी पिया करो
के थोड़ी थोड़ी पिया करो, के थोड़ी थोड़ी पिया करो
हुई महंगी बहुत ही शराब के थोड़ी थोड़ी पिया करो

गम का दौर हो या खुशी, समां बांधती है शराब
गम का दौर हो या खुशी, समां बांधती है शराब
गम का दौर हो या खुशी, समां बांधती है शराब
एक मशवरा है जनाब के थोड़ी थोड़ी पिया करो
के थोड़ी थोड़ी पिया करो, के थोड़ी थोड़ी पिया करो
हुई महंगी बहुत ही शराब के थोड़ी थोड़ी पिया करो

दिल के ज़ख्म को सीना क्या, पीने के लिए जीना क्या
दिल के ज़ख्म को सीना क्या, पीने के लिए जीना क्या
दिल के ज़ख्म को सीना क्या, पीने के लिए जीना क्या
फूँक डाले जिगर को शराब के थोड़ी थोड़ी पिया करो
के थोड़ी थोड़ी पिया करो, के थोड़ी थोड़ी पिया करो
हुई महंगी बहुत ही शराब के थोड़ी थोड़ी पिया करो

दिलबर की बातों में नशा, जुल्फों में नशा, आँखों में नशा
दिलबर की बातों में नशा, जुल्फों में नशा, आँखों में नशा
दिलबर की बातों में नशा, जुल्फों में नशा, आँखों में नशा
मय से बढ़ के उसका शबाब के थोड़ी थोड़ी पिया करो
के थोड़ी थोड़ी पिया करो, के थोड़ी थोड़ी पिया करो
हुई महंगी बहुत ही शराब के थोड़ी थोड़ी पिया करो
पियो लेकिन रखो हिसाब के थोड़ी थोड़ी पिया करो
के थोड़ी थोड़ी पिया करो, के थोड़ी थोड़ी पिया करो
के थोड़ी थोड़ी पिया करो, के थोड़ी थोड़ी पिया करो
के थोड़ी थोड़ी पिया करो
....................................................................
Hui mehngi bahut hi sharab-Pankaj Udhas Ghazal.

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Jul 2, 2011

दो घूँट मुझे भी पिला दे-झील के उस पार १९७३

कहते हैं जो दिखता है वो बिकता है। दुकानदारी में ये
सिद्धांत बहुत काम का है। ब्लॉग जगत में भी यही बात
लागू होती है। मेरे ब्लॉग पर भी लागू होती है। मुझे अभी
तक विलायती या अप्रवासी हिंदी प्रेमी भारतीयों में से केवल
२-३ बंधु ही ऐसे मिले जो ब्लॉग पर नियमित रूप से नज़र
डाला करते हैं। इस ब्लॉग को बेहतर बनाने के सुझाव और
टिप्पणियों की ज़रुरत महसूस होती है कभी कभी। स्वतः
प्रेरणा से एक सीमा तक ही कुछ किया जा सकता है।

आइये आपको आज एक फरमाइशी गीत सुनवाते हैं। ये गीत है
फिल्म झील के उस पार से। गीत फिल्माया गया है मुमताज़ पर।
मुमताज़ के साथ जो कलाकार हैं परदे पर, उनका नाम अनवर
हुसैन है जो अभिनेत्री नर्गिस के भाई हैं।

इस गीत को आप शराबी गीतों की श्रेणी में रख लीजिये।




गीत के बोल:

दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

हो, दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या
बालमा रे, ज़ालिमा,
अरे अरे अरे अरे,
आग पानी मैं लगा दे ज़रा सी,
देख फिर होता है क्या

हो, दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या


गाऊंगी रे, नाचूंगी रे
तेरे लिए आज से मैं
आये शरम, लेकिन बलम ,
मर जाऊंगी लाज से मैं
गाऊंगी रे, नाचूंगी रे
तेरे लिए आज से मैं
आये शरम, लेकिन बलम,
मर जाऊंगी लाज से मैं
बालमा रे, ज़ालिमा,
अरे अरे अरे अरे,
लाज का ये घूंघट उठा दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

हो, दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

किस काम का ये जाम है
इसमें मज़ा वोह नहीं है
भर के भी यह ख़ाली सा है
इसमें नशा वो नहीं है
किस काम का ये जाम है
इसमें मज़ा वो नहीं है
भर के भी यह ख़ाली सा है
इसमें नशा वो नहीं है
साक़िया रे, साक़िया,
अरे अरे अरे अरे,
प्यार थोड़ा इस में मिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

हो, दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

इस पे लिखा, इस में लिखा
आये मज़ा आज ऐसे,
तडपे जिया ऐसे मेरा
बुलबुल कोई कैद जैसे
इस पे लिखा, इस में लिखा
आये मज़ा आज ऐसे,
तड़पे जिया ऐसे मेरा
बुलबुल कोई कैद जैसे
थोड़ी या पे रंज़िया,
अरे अरे अरे अरे, एक बार,
एक बार, पहरा हटा दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या
............................................................
Do ghoot mujhe bhi pila de-Jheel ke us paar 1973

Artists: Mumtaz, Anwar Husaain

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Nov 3, 2009

पिये जा और पिये जा-पुजारिन १९३६

किसी ने मुझे टोका कि ब्लॉग पर सन १९३६ का कोई गाना नहीं है।
मैंने कहा-अभी लो जी। एक गीत है जो मुझे ध्यान आता है वो है
सहगल साहब का गाया फ़िल्म पुजारिन के गीत। मद्रिरा प्रेमियों को
समर्पित ये गीत शायद बहुत ही कम सुना गया होगा अभी तक।
इस गीत के संगीतकार हैं तिमिर बरन ।



गाने के बोल:

पिये जा और पिये जा
ज़िन्दगी का गम खाए, तेरी बला ....

पिये जा और पिये जा
बोतल उठा काग उड़ा
अरे, ज़िन्दगी का यही है मुद्दा

पिये जा और पिये जा
जितनी पी सकता है पी ले
अरे दो दिन और भी जग में जी ले

सोचता है क्या
और पिये जा

आंख बची बातें जाने कोई क्या
सोचता है क्या
और पिये जा

आंख बची बातें जाने कोई क्या
खैर जो होगा, देखा जाएगा
खैर जो होगा, देखा जाएगा

अरे अब तो पिये जा
........................................................
Piye ja aur piye ja-Pujarin 1938

Artist: KL Saigal

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