बेदर्दी नज़रें मिला के कह दे-अजी बस शुक्रिया १९५८
ज्यादा सुनाई देता है. अब सुनते हैं दूसरा गीत जिसे लता
भक्त ज्यादा सुनते हैं.
ये भी फ़ारूक कैसर की रचना है जिसका संगीत रोशन ने
तैयार किया है.
गीत के बोल:
बेदर्दी
बेदर्दी नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
प्यार का सैंयाँ तेरे रंग चढ़ाया मैंने
लोग कहे मैं ने रोग लगाया कोई रोग लगाया
मुखड़े पे आई ज़र्दी
नज़रें मिला के कह दे
नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी
बेदर्दी क्या है तेरी मर्ज़ी
क्या है तेरी मर्ज़ी
हो नज़रें मिला के कह दे
हाँ हाँ हाँ
नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी
आ आ आ आ आ आ
खता की है गैर ने हमको सज़ा देने चले आये
कहाँ खोया है दिल तुमने कहां तुम ढूँढने ढूंढें आये
एक नज़र में तूने दिल मेरा लूटा
तूने दिल मेरा लूटा
सब्र का दामन मेरे हाथों से छूटा
मेरे हाथों से छूटा
हालत क्या तूने कर दी
नज़रें मिला के कह दे
नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
हम तो निभायेंगे प्यार का वादा तेरे प्यार का वादा
कह दे सनम तेरा क्या है इरादा तेरा क्या है इरादा
हमने तो हामी भर दी
नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी
बेदर्दी क्या है तेरी मर्ज़ी क्या है तेरी मर्ज़ी
हो ओ नज़रें मिला के कह दे
हाँ हाँ हाँ
नज़रें मिला के कह दे है क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी
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Bedardi nazren mila ke-Aji bas shukriya 1958
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