बिछुड़न और मिलन इस फिल्म की कहानी का मूल तत्व
है. ढेर सारे कलाकारों से भरी फिल्म में ढेर सारी घटनाएँ
हैं. कामरान फिल्म्स के बैनर तले इसका निर्माण हुआ और
फिल्म में कामरान स्वयं एक अहम भूमिका में हैं. फिल्म
का निर्देशन मोहम्मद हुसैन ने किया.
प्रस्तुत गीत फारूक कैसर ने लिखा है और इसका संगीत
तैयार किया है रॉबिन बैनर्जी ने. रफ़ी गायक कलाकार हैं.
गीत के बोल:
एक तरफ है माँ की छाया एक तरफ है ताज
राम लखन की जोड़ी देखो बिछड़ रही है आज
राम लखन की जोड़ी देखो बिछड़ रही है आज
राम लखन की जोड़ी देखो बिछड़ रही है आज
एक तरफ है माँ की छाया एक तरफ है ताज
राम लखन की जोड़ी देखो बिछड़ रही है आज
टूट गया है पल दो पल में सारी उमर का नाता
लुट गयी पूँजी मिट गया कोई देख रहा है दाता
देख रहा है दाता
उस आँगन को छोड़ चला क्यूँ जिसपे किया है राज़
एक तरफ है माँ की छाया एक तरफ है ताज
राम लखन की जोड़ी देखो बिछड़ रही है आज
अपने लहू से जिसको सींचा काटा उस फुलवारी को
आग लगा दो दुनिया वालों ऐसी दुनियादारी को
ऐसी दुनियादारी को
चुपके चुपके रोये माली बाग हुआ तालाब
एक तरफ है माँ की छाया एक तरफ है ताज
राम लखन की जोड़ी देखो बिछड़ रही है आज
………………………………………………….
Ek taraf hai maa ki chhaya=Aandhi aur toofan 1964
इंस्पिरेशन की कलई हिंदी सिने और संगीत जगत में थोडा
देर से खुलना शुरू हुई. ये जानकारी उस समय तक केवल
संगीत प्रेमियों को ही हुआ करती थी. कुछ पत्रकारों को भी
मालूम होता था मगर फीलगुड और अपनी सुविधा और
सहूलियत की पत्रकारिता के चलते ये सब उजागर नहीं
हो पाता था.
आज आपको सुनवाते हैं एक गीत फिल्म डिस्को डांसर से
जो ‘वीडियो किल्ड द रेडियो स्टार’ नामक गीत से प्रेरित
है. इसको देसी बनाने में काफी मेहनत की गयी है और ये
शायद अपने समय के सबसे ज्यादा बजने वाले गीतों में से
एक है.
फिल्म में आठ गाने हैं जिनमें से सात अनजान ने लिखे हैं
और जो एक गीत फारूख कैसर ने लिखा है वो आज आप
इधर सुनेंगे. गीत बप्पी लहरी और उषा उथुप ने गाया है.
गीत के शुरू में जो आवाज़ है उसका खुलासा अभी तक नहीं
हुआ है कि आवाज़ किसकी है-विजय बेनेडिक्ट की या स्वयं
बप्पी की.
गीत में आपको करण राजदान और कल्पना अय्यर नाचते
दिखाई देंगे अन्य सहायक कलाकारों के साथ.
कोई यहाँ आ हा नाचे नाचे
कोई वहाँ आ हा नाचे नाचे
सारे हंसी आ हा नाचे नाचे
सारे जवां आ हा नाचे नाचे
अउवा अउवा अउवा अउवा
कोई यहाँ आ हा नाचे नाचे
कोई वहाँ आ हा नाचे नाचे
सारे हंसी आ हा नाचे नाचे
सारे जवां आ हा नाचे नाचे
अउवा अउवा तुमसे है तुमसे प्यार
अउवा अउवा मानो ना मेरे यार
अउवा अउवा तुमसे है तुमसे प्यार
प्यारा है गाना यही गाना बजाना यही
तुर तुर तराना बैंग बैंग
माने ना माने कोई हमने तो माना यही
सुनना सुनाना बैंग बैंग
किसी का दिल आ हा नाचे नाचे
किसी की जान आ हा नाचे नाचे
सारे हंसी आ हा नाचे नाचे
सारे जवां आ हा नाचे नाचे
अउवा अउवा तुमसे है तुमसे प्यार
अउवा अउवा मानो ना मेरे यार
अउवा अउवा तुमसे है तुमसे प्यार
दिल को जलाना नहीं कुछ भी छुपाना नहीं
झूठा बहाना बैंग बैंग
इतनी खुशु है यहाँ जिसका ठिकाना नहीं
लूटो खज़ाना बैंग बैंग
कहीं शमा आ हा नाचे नाचे
कहीं धुंआ आ हा नाचे नाचे
सारे हंसी आ हा नाचे नाचे
सारे जवां आ हा नाचे नाचे
अउवा अउवा तुमसे है तुमसे प्यार
अउवा अउवा मानो ना मेरे यार
अउवा अउवा तुमसे है तुमसे प्यार
दुनिया दीवानी लगे कितनी सुहानी लगे
कर दे जवानी बैंग बैंग
गाऊँ मैं गीत कोई सबकी कहानी लगे
यादें पुरानी बैंग बैंग
सारी फिज़ा आ हा नाचे नाचे
सारा जहाँ आ हा नाचे नाचे
सारे हंसी आ हा नाचे नाचे
सारे जवां आ हा नाचे नाचे
अउवा अउवा तुमसे है तुमसे प्यार
अउवा अउवा मानो ना मेरे यार
अउवा अउवा तुमसे है तुमसे प्यार
कोई यहाँ आ हा नाचे नाचे
कोई वहाँ आ हा नाचे नाचे
सारे हंसी आ हा नाचे नाचे
सारे जवां आ हा नाचे नाचे
अउवा अउवा तुमसे है तुमसे प्यार
अउवा अउवा मानो ना मेरे यार
अउवा अउवा तुमसे है तुमसे प्यार
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Koi yahan aa ha nache nache-Disco dancer 1982
हीरो खाता पीता लागे से तो हीरोईण क्यूँ भूखी मरे ताऊ. हीरोईण
भी खाते पीते घर की होणी चाहिए से. आइये सुनें फिल्म शिकारी
का एक मधुर गीत जिसमें नायक नायिका दोनों सेहतमंद हैं.
एक ज़माना था जब हीरो मोटा हो पतला हो, हीरोईन दुबली ही दिखाई
देती मानो उसे खाना कम मिल रहा हो. फ़िल्मी हीरो की तोंद भले ही
बाहर निकल रही हो हीरोईन अकालग्रस्त इलाके में पैदा होने वाली जनता
से थोड़ी ही बेहतर नज़र आती. इस मामले में उत्तर भारतीय सिनेमा से
दक्षिण भारत का सिनेमा काफी उदार रहा.
रफ़ी और लता का गाया ये युगल गीत काफी लोकप्रिय गीत है और
इसे लिखा है फारूख कैसर ने जिसकी धुन तैयार की है जी एस कोहली
ने.
गीत के बोल:
चमन के फूल भी तुझको गुलाब कहते हैं
हमीं नहीं हैं
हमीं नहीं हैं सभी लाजवाब कहते हैं
नज़र मिला के मेरे दिल की बात पहचानो
सुना है चेहरे को
सुना है चेहरे को दिल की किताब कहते हैं
चमन के फूल भी तुझको
साज़-ए-दिल छेड़ दिया है तो ये नगमा सुन लो
बिखरी बिखरी हुई ये प्यार की किरणें चुन लो
इसी किरण को सनम आफ़ताब कहते हैं
हमीं नहीं हमीं नहीं
हमीं नहीं हैं सभी लाजवाब कहते हैं
चमन के फूल भी तुझको
आज तक देखी नहीं ऐसी दहकती आँखें
डाल दो आ के इन आँखों में छलकती आँखें
संभल के पीना इसे सब शराब कहते हैं
हमीं नहीं हमीं नहीं
हमीं नहीं हैं सभी लाजवाब कहते हैं
चमन के फूल भी तुझको गुलाब कहते हैं
हमीं नहीं हैं सभी लाजवाब कहते हैं
नज़र मिला के मेरे दिल की बात पहचानो
सुना है चेहरे को दिल की किताब कहते हैं
चमन के फूल भी तुझको
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Chaman ke phool bhi tujhko-Shikari 1963
अजी बस शुक्रिया से आपने लता का एक गीत सुना जो
ज्यादा सुनाई देता है. अब सुनते हैं दूसरा गीत जिसे लता
भक्त ज्यादा सुनते हैं.
ये भी फ़ारूक कैसर की रचना है जिसका संगीत रोशन ने
तैयार किया है.
गीत के बोल:
बेदर्दी
बेदर्दी नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
प्यार का सैंयाँ तेरे रंग चढ़ाया मैंने
लोग कहे मैं ने रोग लगाया कोई रोग लगाया
मुखड़े पे आई ज़र्दी
नज़रें मिला के कह दे
नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी
बेदर्दी क्या है तेरी मर्ज़ी
क्या है तेरी मर्ज़ी
हो नज़रें मिला के कह दे
हाँ हाँ हाँ
नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी
आ आ आ आ आ आ
खता की है गैर ने हमको सज़ा देने चले आये
कहाँ खोया है दिल तुमने कहां तुम ढूँढने ढूंढें आये
एक नज़र में तूने दिल मेरा लूटा
तूने दिल मेरा लूटा
सब्र का दामन मेरे हाथों से छूटा
मेरे हाथों से छूटा
हालत क्या तूने कर दी
नज़रें मिला के कह दे
नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
हम तो निभायेंगे प्यार का वादा तेरे प्यार का वादा
कह दे सनम तेरा क्या है इरादा तेरा क्या है इरादा
हमने तो हामी भर दी
नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी
बेदर्दी क्या है तेरी मर्ज़ी क्या है तेरी मर्ज़ी
हो ओ नज़रें मिला के कह दे
हाँ हाँ हाँ
नज़रें मिला के कह दे है क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी
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Bedardi nazren mila ke-Aji bas shukriya 1958
हिंदी फिल्म सिनेमा इतिहास में कम ही ऐसे गीत ऐसे हैं जिनमें इतने जोर से प्यार शब्द बोला गया है. वो भी एक बार नहीं कई बार. गाने वाले की पूरा दम ही निकल दिया गया है गीत में.
फारूख कैसर का गीत है और बप्पी लहरी का संगीत. गायक को आप पहचान ही जायेंगे. ना पहचान पायें तो टैग में नाम दिया हुआ है.
इस गाने के मुखड़े को प्याज बेचने के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है. सब्जी विक्रेताओं का ध्यान शायद इस ओर नहीं गया है अभी तक.
चोरी छुपे प्यार कभी होना चाहिए रुत हो जवाँ फिर तो हमें खोना चाहिए चोरी छुपे प्यार कभी होना चाहिए रुत हो जवाँ फिर तो हमें खोना चाहिए जय काली कलकत्ते वाली तेरा वचन न जाए खाली बच्चा लोग अरे बजाओ ताली चाहिए थोड़ा प्यार थोड़ा प्यार चाहिए प्यार प्यार प्यार प्यार प्यार
कोई हसीं कर न सका मेरा सामना मेरी नज़र जादू भरी दिल को थामना कोई हसीं कर न सका मेरा सामना मेरी नज़र जादू भरी दिल को थामना जय काली कलकत्ते वाली तेरा वचन न जाए खाली छोकरी लोग अरे बजाओ ताली
चाहिए थोड़ा प्यार थोड़ा प्यार चाहिए जानेमन गुलबदन मेरी बात मानिए चाहिए थोड़ा प्यार थोड़ा प्यार चाहिए प्यार प्यार प्यार प्यार प्यार ....................................................................... Chahiye thoda pyar-Lahu ke do rang 1979
७० के दशक की फिल्म है लहू के दो रंग. बप्पी लहरी का संगीत
और किशोर कुमार की आवाज़. फारूख कैसर के बोल हैं और ये
गीत किशोर के लोकप्रिय रोमांटिक गीतों में गिना जाता है.
विनोद खन्ना और शबाना अजमी पर फिल्माया गया ये गीत आपने
पहले ना देखा हो तो आज देख लें. गीत देख के आपको कई और
भी गीत याद आ जायेंगे. विनोद खन्ना का एक अंदाज़ देख के
आपको कुछ विज्ञापन भी याद आ सकते हैं ९० के दशक के.
गीत के बोल:
मुस्कुराता हुआ गुल खिलाता हुआ मेरा यार
मेरा यार मेरा यार मेरा यार
आँखें मलता हुआ तन चुराता हुआ मेरा यार
मेरा यार मेरा यार मेरा यार
गोरे गोरे मुख को चूमें हीरे मोती
ऐसी शरारत हम से भी होती
गोरे गोरे मुख को चूमें हीरे मोती
ऐसी शरारत हम से भी होती
धीरे से चू लूँ मैं गालों को
चूमूं मैं भीगे से बालों को
बोलो न
न न न न न
न न करता हुआ जग से डरता हुआ मेरा यार
न न करता हुआ जग से डरता हुआ मेरा यार
मेरा यार मेरा यार मेरा यार
मेरा यार मेरा यार मेरा यार
प्यारी प्यारी छबि है अदा भोली भाली
अब न लगाना होंठों पे लाली
प्यारी प्यारी छबि है अदा भोली भाली
अब न लगाना होंठों पे लाली
दिल पे क्या बीते है जानो न
इतना सा कहना है मानो न मानो न
हाँ बाबा
हाँ हाँ करता हुआ पर सँवरता हुआ मेरा यार
हाँ हाँ करता हुआ पर सँवरता हुआ मेरा यार
मेरा यार मेरा यार मेरा यार
मेरा यार मेरा यार मेरा यार
खोये खोये नैना देखें मेरा सपना
प्यार मुबारक मिला कोई अपना
खोये खोये नैना देखें मेरा सपना
प्यार मुबारक मिला कोई अपना
चुपके से बाहों में आ जाना
मेरी जाँ अब तो ना शरमाना शरमाओ ना
जा जा
जा जा करता हुआ दर्द सहता हुआ मेरा यार
जा जा करता हुआ दर्द सहता हुआ मेरा यार
मेरा यार मेरा यार मेरा यार
मेरा यार मेरा यार मेरा यार
मुस्कुराता हुआ गुल खिलाता हुआ मेरा यार
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Muskurata hua gul khilata hua-Lahu ke do rang 1979
पारसमणि फिल्म से जो बिगुल लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने बजाया उसकी गूँज पूरे तीन दशक तक सुनाई देती रही. १९६३ से १९९८ तक उनकी उपस्थिति हिंदी फिल्म सिनेमा जगत में मजबूती से दर्ज रही. ये एक ऐसी जोड़ी है जो कायम रही और समर्पण की इससे अच्छी मिसाल शायद ही देखने को मिले. अहम का टकराव जो दूसरी जोड़ियों में देखने को मिला ओ इन्हें छू भी नहीं सका. जोड़ी टूटी भी तो एक साथ के बिछड़ने की वजह से.
आज एक गीत सुनते हैं पारसमणि फिल्म से मुकेश और लता का गाया हुआ. फारूक कैसर के लिखे इस युगल गीत को आप आज भी कभी कभार सुन सकते हैं जब रेडियो जोकर मेहरबान हो जाते हैं. मुखड़े में चोरी-चोरी शब्द आते हैं अतः इस गीत को हम चोरी चोरी हिट्स कहेंगे.
गीत के बोल:
चोरी चोरी जो तुमसे मिली तो लोग क्या कहेंगे चोरी चोरी जो तुमसे मिली तो लोग क्या कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे गली गली ये बात चली तो लोग क्या कहेंगे गली गली ये बात चली तो लोग क्या कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे
तेरा ख्याल मेरे दिल में जब से आया है क़दम सम्भलते नहीं और नशा सा छाया है क़रार खो के ही दिल ने क़रार पाया है हाँ क़रार खो के ही दिल ने क़रार पाया है धीरे धीरे ये बात बढ़ी तो लोग क्या कहेंगे धीरे धीरे ये बात बढ़ी तो लोग क्या कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे
कितनी ज़ालिम ये मुलाक़ात हुई जिससे डरते थे वही बात हुई बढ़ गई प्यास तमन्नाओं की इस तरह प्यार की बरसात हुई क़सम तुम्हारी मेरे दिल की बात कह डाली हो क़सम तुम्हारी मेरे दिल की बात कह डाली छोड़ो छोड़ो ये दिल्लगी के लोग क्या कहेंगे छोड़ो छोड़ो ये दिल्लगी के लोग क्या कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे
तुम्हारे मिलने की दिल से दुआएं मांगी हैं खताएं हमसे हुई हैं सजाएं मांगी हैं वफाएं की हैं सनम और वफाएं मांगी हैं हाँ वफाएं की हैं सनम और वफाएं मांगी हैं सोचेंगे हम ना ये कभी के लोग क्या कहेंगे सोचेंगे हम ना ये कभी के लोग क्या कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे अजी इसे प्यार कहेंगे .......................................................................... Chori chori jo tumse mili-Parasmani 1963
आपको अनजान फिल्मों से कम सुने गए गीत सुनवाया करते हैं
बीच बीच में. आज एक और प्रस्तुत है फिल्म देखा जायेगा से.
गीत फारूक कैसर का लिखा हुआ है और संगीत है सरदूल क्वात्रा
का. सरदूल क्वात्रा के संगीत निर्देशन वाला एक गीत आपको पहले
सुनवाया था फिल्म गूँज(१९५२) से.
कामरान, लिलियन, अमरनाथ और नसरीन जैसे कलाकारों से सजी
इस फिल्म का निर्देशन ओ पी खन्ना ने किया था. मार्वल प्रोडक्शन
का एक मार्वल तो सन १९५० में आया था मगर ओ पी खन्ना के
निर्देशन वाली दूसरी फिल्म मुझे सूची में नहीं मिली.
नैयर के संगीत का स्वाद आपको आ सकता है इस गीत में संगीत
संयोजन की वजह से, मगर फर्क है, ताल वाद्य सरदूल क्वात्रा के अपने
अंदाज़ वाले हैं.
गीत के बोल:
झूमे आसमान झूमे ज़मीन
ले चल तू ए दिल मुझको कहीं
झूमे आसमान झूमे ज़मीन
ले चल तू ए दिल मुझको कहीं
हो ओ ओ झूमे आसमान
गोरा बदन जब पानी में चमके
मौजों का दिल भी रह रह के धडके
जलने लगे ना आग कहीं
ले चल तू ए दिल मुझको कहीं
हो ओ ओ झूमे आसमान
दिल की तमन्ना जग के नज़ारे
पास भी तू है तो लगते हैं प्यारे
तेरे बिना ये कुछ भी नहीं
ले चल तू ए दिल मुझको कहीं
हो ओ ओ झूमे आसमान
प्यार की नरेन् मुझपे ना डालो
हो आज तो अपने दिल को संभालो
जाग उठे ना दर्द कहीं
ले चल तू ए दिल मुझको कहीं
हो ओ ओ झूमे आसमान झूमे ज़मीन
ले चल तू ए दिल मुझको कहीं
हो ओ ओ झूमे आसमान
...................................................................
Jhoome aasman-Dekha jayega 1960
अनजान फिल्मों और गुमनाम फिल्मों से मधुर गीतों की
श्रृंखला में अगला गीत पेश है फिल्म आंधी और तूफान से
ये सन १९६४ की फिल्म है.
दारा सिंह की पहलवानी फिल्मों में से एक है ये और इसमें
दारा सिंह के साथ मुमताज़ हैं. भगवान, जीवन और कामरान
बाकी के प्रमुख कलाकार हैं. कामरान फिल्म्स के लिए इसका
निर्देशन मोहम्मद हुसैन ने किया.
गीतों के वीडियो उपलब्ध नहीं है यू-ट्यूब पर अलबत्ता पूरी फिल्म देखने के लिए ज़रूर मिल जायेगी.
गीत फारूक कैसर का लिखा हुआ है जिसकी तर्ज़ बनाई है
रोबिन बैनर्जी ने. इसे रफ़ी और सुमन कल्याणपुर ने गाया
है.
गीत के बोल:
इरादा न था आपसे प्यार का
मगर हो गया दिल ये सरकार का
मगर हो गया दिल ये सरकार का
हमेशा रहे लब पे इनकार ही
मज़ा जब ही आता है इकरार का
मज़ा जब ही आता है इकरार का
इरादा न था आपसे प्यार का
मगर हो गया दिल ये सरकार का
मगर हो गया दिल ये सरकार का
हमेशा रहे लब पे इनकार ही
मज़ा जब ही आता है इकरार का
मज़ा जब ही आता है इकरार का
इरादा न था
ये महफ़िल नई और ये जलवे तेरे
रहूँ होश में ये खुदा ना करे
दुआ कर रही हूँ यही हर घडी
ये नज़रों की बिजली भी मुझ पर गिरे
मुझ पर गिरे
निगाहों में था बेनजारा नहीं
मगर दिल में है अरमान है दीदार का
मगर दिल में है अरमान है दीदार का
इरादा न था
तुझे क्या बताऊँ मैं ए नाजनीन
हजारों में लाखों में तू है हसीं
ये जाम-ए-नज़र की कसम है मुझे
मैं पीता हूँ लेकिन शराबी नहीं
शराबी नहीं
घटायें ना बहला सकेंगी मुझे
मैं दीवाना हूँ जुल्फ-ए-दिलदार का
मैं दीवाना हूँ जुल्फ-ए-दिलदार का
इरादा न था
................................................
Irada na tha-Aandhi aur toofan 1964
जी एस कोहली भी एक ऐसे संगीतकार हैं जिनकी चर्चा कम होती
है. इनकी फिल्म शिकारी का संगीत काफी लोकप्रिय हुआ. उसके
अलावा भी इन्होने कई फिल्मों में संगीत दिया. कोहली ने मुख्यतः
ओ पी नैयर के सहायक के रूप में काम किया.
गौरतलब है लता ने ओ पी नैयर के लिए एक भी गीत नहीं गाया
या यूं कहें नैयर ने नहीं गवाया. जनता कल्पना ही करती रही
अगर नैयर ने लता के लिए गीत बनाये होते तो कैसे सुनाई देते?
इसका जवाब है जी एस कोहली का संगीत सुन लीजिए, काफी कुछ
अंदाजा आपको हो जायेगा. कोहली का म्युज़िक अरेंजमेंट बहुत
कुछ ओ पी नैयर के अरेंजमेंट से मिलता जुलता है.
आज सुनते हैं फिल्म शिकारी से रफ़ी और लता का गाया हुआ एक
लोकप्रिय रोमांटिक गीत जिसे अजीत और रागिनी पर फिल्माया
गया है. केसर मिले बोल लिखे हैं फारूक कैसर ने.
खुशनुमा गीत है और सेहतमंद नायक नायिका. नायक कम हिल-डुल
रहा है इसलिए उसके हिस्से का हिलने डुलने का काम नायिका किये
दे रही है.
गीत के बोल:
अगर मैं पूछूँ जवाब दोगे
दिल क्यों मेरा तड़प रहा है
तेरे ही दिल में है प्यार कुछ कुछ
मेरे भी दिल में ज़रा ज़रा है
बुरा न मानो तो अपने हाथों
ये बिखरी ज़ुल्फ़ें सँवार दूं मैं
हसीन पलकों की छाँव में अब
ये सारा जीवन गुज़ार दूँ मैं
ये दिल की बातें कोई न सुन ले
सनम ज़माना बड़ा बुरा है
अगर मैं पूछूँ जवाब दोगे
नज़र बचा के अगर मैं जाऊं
तो मेरा दामन ना थाम लेना
कोई जो पूछे ये क्या हवा है
कभी भी मेरा ना नाम लेना
लगा के दिल से रखेंगे हम तो
ये दर्द तेरा दिया हुआ है
अगर मैं पूछूँ जवाब दोगे
ये ठंडी ठंडी मचलती लहरें
हमारे दिल को जला न जाएं
उठी है तूफ़ाँ दिल-ओ-नज़र में
किसे बचाएं किसे संभालें
न चैन तुमको ना होश हमको
ये क्या हुआ है ये क्या हुआ है
अगर मैं पूछूँ जवाब दोगे
दिल क्यों मेरा तड़प रहा है
तेरे ही दिल में है प्यार कुछ कुछ
मेरे भी दिल में ज़रा ज़रा है
............................................................
Agar main poochhoon jawab doge-Shikari 1963
फिल्म ऐतबार से शायर हसन कमाल का लिखा हुआ एक
बढ़िया गीत आपको सुनवाया था कुछ साल पहले. आज सुनते
हैं एक और शायर फारूक कैसर का लिखा गीत. फारूक कैसर
ने बरसों पहले सन ५० के आस पास अपने लेखन की शुरुआत
की थी.
उन्होंने गीत लेखन में कई झंडे गाडे हैं. यूँ कहें उनके लिखे
कई गीत लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचे.
गीत में आप राज बब्बर को देखेंगे लीना दास के साथ. इस
फिल्म में राज बब्बर ने नकारात्मक भूमिका निभाई है. इस
गीत के बोल अलबत्ता अच्छे हैं. आशा भोंसले ने इस गाने
को गाया है. संगीत तैयार किया है बप्पी लहरी ने. बप्पी
ने एक अच्छी धुन बनाई है इस गीत के लिए. गीत हालाँकि
ज्यादा प्रचलित नहीं हुआ मगर लंबे समय तक सुनने लायक
है ये.
गीत के बोल:
तुम और मैं और ये बेखुदी
तुम और मैं और ये बेखुदी
नशीली रात है तुम्हारा साथ है
क्या बात है क्या बात है
तुम और मैं और ये बेखुदी
महकी हुई तन्हाईयां
बहकी हुई अंगडाईयाँ
महकी हुई तन्हाईयां
बहकी हुई अंगडाईयाँ
मुझे थाम लो मुझे थाम लो
मुझे थाम लो जाने जान जाने जान
तुम और मैं और ये बेखुदी
जादू भी हूँ टोना भी हूँ
चांदी भी हूँ सोना भी हूँ
जादू भी हूँ टोना भी हूँ
चांदी भी हूँ सोना भी हूँ
मुझे लूट लो मुझे लूट लो
मुझे लूट लो जाने जान जाने जान
तुम और मैं और ये बेखुदी
गोरा बदन खुशबू भरा
कहता है क्या सुन लो ज़रा
गोरा बदन खुशबू भरा
कहता है क्या सुन लो ज़रा
मुझे प्यार दो मुझे प्यार दो
मुझे प्यार दो जाने जान जाने जान
तुम और मैं और ये बेखुदी
नशीली रात है तुम्हारा साथ है
क्या बात है क्या बात है
तुम और मैं और ये बेखुदी
………………………………………………………
Tum aur main aur ye bekhudi-Aitbaar 1985
किशोर कुमार के अंतिम गीतों में से एक है ये फिल्म काश का गीत. इसे फिल्माया गया है जैकी श्रोफ और एक बच्चे पर. बच्चे के लिए स्वर दिया है अनुपमा देशपांडे ने. फिल्म के गीत फारूक कैसर के हैं और संगीत राजेश रोशन का.
फिल्म में जैकी के साथ डिम्पल है नायिका के तौर पर. फिल्म में नायिका का किरदार मजबूत है. एक फिल्म स्टार सफलता का स्वाद चखने के बाद नाकामयाबी के दौर से गुज़रता है और धीरे धीरे दारुडिया हो जाता है, बाद में और भी पेचीदगियां बढती हैं और नायिका के सामने विकल्प रखा जाता है-नौकरी या पति , वो समय की मांग के हिसाब से पहला विकल्प चुनती है जिसके कारण विवाह सम्बन्ध खतम हो जाता है. फिल्म के अंत में हालांकि दोनों फिर से मिल जाते हैं, वजह जाने के लिए पढते रहिये .........
गीत के बोल:
ओ यारा तू प्यारों से है प्यारा ओ यारा तू प्यारों से है प्यारा मेरा है मेरा ही रहेगा दिलदार मैं तो ये ही कहूँगा पाया जग सारा ओ यारा तू प्यारों से है प्यारा ओ यारा तू प्यारों से है प्यारा ये क्या किया मचले जिया
लब पे हंसी है दिल में खुशी है फिर भी कमी है थोड़ी सी दिल की लगी है वैसे बुझी सी फिर भी बची है थोड़ी सी लब पे हंसी है दिल में खुशी है फिर भी कमी है थोड़ी सी दिल की लगी है वैसे बुझी सी फिर भी बची है थोड़ी सी मेरा है मेरा ही रहेगा दिलदार मैं तो ये ही कहूँगा पाया जग सारा
ओ यारा तू प्यारों से है प्यारा ओ यारा तू प्यारों से है प्यारा
तू है जहाँ दिल है वहाँ अपनी वफाएं कितनी जताएं कितनी छुपाएँ कह देना अपनी कहानी कितनी छुपाएँ कितनी सुनाएँ कह देना अपनी वफाएं कितनी जताएं कितनी छुपाएँ कह देना अपनी कहानी कितनी छुपाएँ कितनी सुनाएँ कह देना मेरा है मेरा ही रहेगा दिलदार मैं तो ये ही कहूँगा पाया जग सारा
ओ यारा तू प्यारों से है प्यारा ओ यारा तू प्यारों से है प्यारा …………………………………………………. O yaara too pyaron se hai pyara-Kaash 1987
सुन्दर , खूबसूरत और ब्यूटिफुल इन तीन शब्दों में इस
गीत को बयां किया जा सकता है। वजह-साफ़ है, धुन
बढ़िया है, बोल बढ़िया है और नायिका भी बढ़िया है, नायक
भी स्मार्ट है। और क्या चाहिए विडियो गीत में हमको।
कल्याणजी आनंदजी की सबसे पहली कुछ फिल्मों में
से एक है-पासपोर्ट। यूँ कहें तो कल्याणजी आनंदजी की जोड़ी
बनने के बाद लता और रफ़ी का गाया दूसरा युगल गीत।
इसके पहले वे कल्याणजी वीर जी शाह के संगीत निर्देशन
में ६ युगल गीत गा चुके थे। गीत लिखा है फारूख कैसर ने
और इसे फिल्माया गया है मधुबाला और प्रदीप कुमार पर।
मुखड़े को थोडा अलग तरीके से गवाया गया है। हर पंक्ति
दो दो बार गाई जा रही है फिर भी अटपटी नहीं लगती।
गीत के बोल:
साज-ए-दिल छेड़ दे
साज-ए-दिल छेड़ दे
क्या हसीं रात है
क्या हसीं रात है
कुछ नहीं चाहिए
कुछ नहीं चाहिए
तू अगर साथ है
तू अगर साथ है
साज-ए-दिल छेड़ दे
मुझे चाँद क्यूँ ताकता है
मुझे चाँद क्यूँ ताकता है
मेरा कौन ये लगता है
मुझे शक यही होता है
मुझे शक यही होता है
मेरे चाँद से ये जलता है
हमें इसकी क्या परवाह है
हमें इसकी क्या परवाह है
साज-ए-दिल छेड़ दे
तेरे दर पे सर झुक जाए
तेरे दर पे सर झुक जाए
यही ज़िन्दगी रुक जाए
कली दिल की ये खिल जाए
कली दिल की ये खिल जाए
ख़ुशी प्यार की मिल जाए
कभी फिर गमी ना आये
कभी फिर गमी ना आये
साज-ए-दिल छेड़ दे
...................................
Saaz-e-dil chhed de-Passport 1961
गोविंदा और नीलम पर फिल्माया गया एक थोडा कर्णप्रिय युगल गीत।
इसमें तरह तरह की ध्वनियों का प्रयोग किया गया है। एक जगह पर
बेचारा तबला आपको डिस्को-तबला सुनाई देगा। वैसे तबले के साथ
अन्य ताल वाद्यों का प्रयोग करने वाले राजेश रोशन पहले संगीतकार नहीं
हैं। राहुल देव बर्मन ने ताल वाद्यों के ऊपर शायद सबसे ज्यादा अनुसन्धान
किया था जहाँ तक हिंदी फिल्म संगीत का सवाल है। नीलम जैसा की उनकी
कई फिल्मों में नज़र आता है, किसी केश तेल का विज्ञापन करती सी नज़र
आती हैं। उनकी केश राशि वाकई तारीफ़-ए-काबिल है। गीत एक बेहद सफल
फिल्म "खुदगर्ज़ से लिया गया है। ये "क्यूंकि मैं राकेश रोशन हूँ" की पहली सुपर
हिट फिल्म थी बतौर डायरेक्टर । ये फिल्म के कुछ उन हलके फुल्के दृश्यों में से
है जिसमे डिस्को-खिसको डांस लिया जा रहा है। ऐसे मौके दर्शकों को एक
विश्राम लेने में सहायक होते हैं और कई दर्शक गीत शुरू होते ही सिनेमा
हाल से बाहर निकल कर धूम्रपान या जुगाली करने लगते हैं, पोपकोर्न खरीद
खरीद लाते लाते हैं या शंका निवृत्ति के लिए निकल जाते हैं।
गीत के बोल:
मय से मीना से ना साकी से
मय से मीना से ना साकी से
ना पैमाने से
दिल बहलता है मेरा
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
गुल से गुंचों से ना बुलबुल के
गुनगुनाने से
दिल बहलता है मेरा
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
ख्वाब में जन्नत का नक्शा
आ गया जब सामने
रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु
रु रु रु रु रु रु रु रु
ख्वाब में जन्नत का नक्शा
आ गया जब सामने
फूलों से भी दिल ना बहला
हम लगे तुझे ढूँढने
जन्नत की बहारों से ना परियों के
जन्नत की बहारों से ना परियों के
मुस्कुराने से
दिल बहलता है मेरा
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
एक दिन मैं भी गई थी
जौहरी बाज़ार में
रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु रु
रु रु रु रु रु रु रु रु
एक दिन मैं भी गई थी
जौहरी बाज़ार में
तेरी आँखें याद आयीं
हीरो के भी हार में
मोती से ना हेरों से ना जेवर से
मोती से ना हेरों से ना जेवर से
ना किसी खजाने से
दिल बहलता है मेरा
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
मय से मीना से ना साकी से
मय से मीना से ना साकी से
ना पैमाने से
दिल बहलता है मेरा
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
आपके आ जाने से
बाबू भाई मिस्त्री हिंदी सिने-जगत के एक स्तम्भ कहे जाते हैं।
सूरत, गुजरात में जन्मे मिस्त्री ने कई पौराणिक एवम ऐतिहासिक
फिल्मों का निर्देशन किया है। उन्होंने कल्याण जी वीर जी शाह को
सर्वप्रथम फिल्म सम्राट चन्द्रगुप्त(१९५८) में अवसर दिया जिसका एक
गीत बहुत लोकप्रिय रहा-"चाहे पास हो चाहे दूर हो" । ये एक युगल गीत
था लता और रफ़ी की आवाज़ में। उन्होंने दूसरे संगीतकारों की सेवाएँ
भी समय समय पर लीं। १९६३ में उनकी तीन फिल्मों में अलग अलग
संगीतकार थे-पारसमणि (लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल ), सुनहरी नागिन
(कल्याणजी आनंदजी ) , कण कण में भगवन (पंडित शिवराम ) ।
दर्शक और श्रोता कल्याणजी भाई की प्रतिभा से फिल्म सम्राट चन्द्रगुप्त
से ही परिचित हो गए थे। फिल्म मदारी के अलावा जो फिल्म कल्याणजी
आनंदजी के संगीत से सजी १९५९ में आई, वो थी-बेदर्द ज़माना क्या जाने।
इसके एक गीत "क़ैद में है बुलबुल" ने तहलका मचा दिया।
फिल्म मदारी का ये गीत अपनी बीन की आवाज़ के लिए ज्यादा सुना जाता
है जो इसका आकर्षण भी है। ऑडियो गीत में से एक अंतरा गायब है ।
गाने के बोल:
दिल लूटने वाले जादूगर
अब मैंने तुझे पहचाना है
नज़रें तो उठा के देख ज़रा
तेरे सामने ये दीवाना है
दिल लूटने वाले जादूगर
अब मैंने तुझे पहचाना है
नज़रें तो उठा के देख ज़रा
तेरे सामने ये दीवाना है
ये चाँद सितारे देख न लें
मेरे प्यार के नाज़ुक बंधन को
ये चाँद सितारे देख न लें
मेरे प्यार के नाज़ुक बंधन को
आँखों में छुपाकर रख लूँगा
इस फूल से कोमल तन मन को
धीरे से,
धीरे से कहो ये बात पिया
जग अपना नहीं बेगाना है
नज़रें तो उठा के देख ज़रा
तेरे सामने ये दीवाना है
अरमान था तुझको देखूं मैं
सावन की नशीली रातों में
अरमान था तुझको देखूं मैं
सावन की नशीली रातों में
खो जाएँ पिया हम तुम दोनों
इन प्यार की मीठी बातों में
तू सामने,
तू सामने है तो सब कुछ है
वरना ये चमन वीराना है
दिल लूटने वाले जादूगर
अब मैंने तुझे पहचाना है
मैं प्यार की माला गून्थुंगी
आशाओं की कलियाँ चुन चुन के
मैं प्यार की माला गून्थुंगी
आशाओं की कलियाँ चुन चुन के
रूठे न कहीं मुझसे दुनिया
ये बात तुम्हारी सुन सुन के
अरमान भरे,
अरमान भरे दिलवालों का
दुनिया ने कहा कब माना है
नज़रें तो उठा के देख ज़रा
तेरे सामने ये दीवाना है
दिल लूटने वाले जादूगर
अब मैंने तुझे पहचाना है
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Dil lootne waale jadugar-Madari 1959
नियमित रूप से सुने जाने वाले गीतों की हम बात करते रहे हैं। ऐसा ही एक गीत है फिल्म 'अजी बस शुक्रिया' से। हम भी इसे बजने वाले स्टेशन को बस शुक्रिया कह दिया करते हैं बिना इसकी फिल्म के बारे में जान कर। सुरेश और गीता बाली इस फिल्म में प्रमुख कलाकार हैं। गीत फारूख कैसर का लिखा हुआ है जो ये बतलाता है कि वे काफी लम्बे समय से बॉलीवुड में सक्रिय रहे हैं। रोशन ने इसकी धुन बनाई है। गीत फिल्माया गया है गीता बाली पर और ये एक बेहद लोकप्रिय गीत है जिसे अधिकांश संगीतप्रेमी पहचानते हैं। गीत में याद जलाती है और चाँद आग लगा रहा है। फ़िल्मी चाँद तरह तरह के कारनामे करता है। गीत में अभिनेत्री ये गीत स्टूडियो में रिकॉर्ड करवा रही है। गाते गाते वो यादों में खो जाती है।
गीत के बोल:
सारी सारी रात तेरी याद सताए सारी सारी रात तेरी याद सताए प्रीत जगाये हमें नींद ना आये रे नींद ना आये सारी सारी रात तेरी याद सताए
इक तो बालम तेरी याद जलाये दूजे चन्दा आग लगाये इक तो बालम तेरी याद जलाये दूजे चन्दा आग लगाये आग लगाये तेरी प्रीत जगाये रे नींद ना आये
सारी सारी रात तेरी याद सताए
तेरी लगन बनी रोग सांवरिया कैसे बीते बाली उमरिया बाली उम्र मोरी बड़ा तड़पाये रे बाली उम्र मोरी बड़ा तड़पाये रे नींद ना आये
सारी सारी रात तेरी याद सताए
प्रीत लगा के हुए तुम तो पराये प्यास जिया की कौन बुझाये प्रीत लगा के हुए तुम तो पराये प्यास जिया की कौन बुझाए कौन बुझाए कोई ये समझाए रे नींद ना आये
सारी सारी रात तेरी याद सताए ............................... Saari saari raat teri yaad sataye-Aji bas shukriya 1958
ब्लॉग पर अभी तो ओ पी नय्यर के बारे में ही चर्चा शुरू हुई है।
एक गीत याद आ गया जो उनके एक सहायक ने बतौर
स्वतंत्र संगीत निर्देशक तैयार किया है। इनका नाम है
जी एस कोहली । इन्होने कई फिल्मों में संगीत दिया है
मगर इनको प्रसिद्धि ज्यादा नहीं मिली। ये गीत तो जरूर
आपने एक-आध बार सुना होगा। इसको लिखा है फारूक कैसर ने
और इसको फिल्माया गया है सुप्रसिद्ध नृत्यांगना हेलन पर।
आशा भोंसले द्वारा गाये बढ़िया गीतों में में से एक। इस फ़िल्म के
हीरो हैं अजीत और खलनायक की भूमिका में हैं मदन पुरी। अगर आप
हिन्दी फिल्मों के शौकीन हैं तो माजरा भांप जायेंगे कि गाने में क्या
चल रहा है।
गाने के बोल:
ये रंगीन महफिल , गुलाबी गुलाबी
मेरे दिल का आलम, शराबी शराबी
ये रंगीन महफिल , गुलाबी गुलाबी
मेरे दिल का आलम, शराबी शराबी
नज़र से नज़र की मुलाक़ात देखी
अदाओं के तीरों की बरसात देखी
हो, बहुत देखे हमने, दिल देने वाले
मगर तुझमे जालिम, नई बात देखी
देख कर, उम्र भर की खुशी, मिल गई है
ये रंगीन महफिल , गुलाबी गुलाबी
मेरे दिल का आलम, शराबी शराबी
ये रंगीन महफिल
किसी से कभी प्यार करके तो देखो
किसी हुस्नवाले पर मर के तो देखो
हो, तूफ़ान के दामन में लाखों किनारे
ये शोलों का दरिया उतर के तो देखो
ये रंगीन महफिल , गुलाबी गुलाबी
मेरे दिल का आलम, शराबी शराबी
ये रंगीन महफिल
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Ye rangeen mehfil-Shikari 1963
अज़ीज़ नाजा का नाम संगीत प्रेमियों के लिए जाना पहचाना
नाम है। उन्होंने हिन्दी फिल्मों में भी अपना योगदान दिया है।
एक फ़िल्म आई थी जिसका नाम है खुश नसीब। ये सन १९८२
में रिलीज़ हुई थी। इस गीत को मैंने कई जगह बजते सुना मगर
फ़िल्म का नाम मुझे बाद में मालूम पड़ा। इतना जरूर मालूम था
कि इसका संगीत कल्याणजी आनंदजी द्वारा तैयार किया गया है।
प्रस्तुत गीत फारूक कैसर ने लिखा है और इसे गुलज़ार नाज़ा ने
गाया है ।
गाने के बोल:
या बाबा मखदूम
या बाबा मखदूम
गली गली में ,चर्चे तेरे
गली गली में ,चर्चे तेरे
नागर नागर में धूम
बाबा, नागर नागर में धूम
कसम खुदा की दिल कहता है
कसम खुदा की दिल कहता है
लगाके नारा झूम
या बाबा मखदूम
या बाबा मखदूम
या बाबा मखदूम
बाबा, या बाबा मखदूम
या बाबा मखदूम
बाबा, या बाबा मखदूम
आ, भटक रहे हैं दे दे सहारा
बना दे बिगड़ी तू ही खुदारा
तू ही खुदारा , तू ही खुदारा
कोई नहीं है जहाँ में अपना
इसलिए है तुझको पुकारा
तुझको पुकारा, तुझको पुकारा
कदम कदम पे क्या होना है,
कदम कदम पे क्या होना है
तुझे तो है मालूम
या बाबा मखदूम
या बाबा मखदूम
या बाबा मखदूम
बाबा, या बाबा मखदूम
या बाबा मखदूम
बाबा, या बाबा मखदूम
आ, ऐसा परदा नज़र पे छाया
जिगर का टुकडा लगे पराया
लगे पराया, लगे पराया
पड़ी है मुश्किल करम तू कर दे
सदा तू ऐसे में काम आया
तू काम आया, तू काम आया
काम तेरा है बिगड़ी बनाना
फ़र्ज़ तुझको पड़ेगा निभाना
जान दे दूँगा चौखट पे तेरी
मेरा ईमान तू न आज़माना
मांगता हूँ समंदर से कतरा
अपनी दरियादिली तू दिखाना
अपनी दरियादिली तू दिखाना
शान तेरी बयां क्या करुँ मैं
शान तेरी बयां क्या करुँ मैं
जानता है ये सारा ज़माना
जानता है ये सारा ज़माना
जाको राखे साइयां , मार सके न कोय
बाल बांका न कर सके जो जग बैरी होए
बाबा जिसका रखवाला हो उसपे चले न वार
उसपे चले न वार, बाबा उसपे चले न वार
तेरे दो दो हाथ हैं मूरख, उसके हाथ हज़ार
उसके हाथ हज़ार, हाँ हाँ , उसके हाथ हज़ार
सदा रहे ये सर पे साया,
सर पे साया
सदा रहे ये सर पे साया
दुआ करें मजलूम
या बाबा मखदूम
या बाबा मखदूम
या बाबा मखदूम
बाबा, या बाबा मखदूम
या बाबा मखदूम
बाबा, या बाबा मखदूम
.............................................................
Ya baba makhdoom-Khush naseeb 1982