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Jul 14, 2020

मेरे दिल की धड़कन-अनहोनी १९५२

आज संगीतकार रोशन का जन्मदिन है. इस अवसर पर
सुनेंगे श्वेत श्याम युग से एक गीत. राज कपूर और नर्गिस
की जोड़ी वाली फिल्म अनहोनी से एक गाना शैलेन्द्र का
लिखा हुआ.

लता मंगेशकर और तलत महमूद के गीतों में माधुर्य
कोमलता के साथ मौजूद होता है. गुड़ के ढेले की जगह
गुड़ का महीन चूरा होता है. न विश्वास हो तो सुन के
देख लीजिए.

टेलीफोन का सदुपयोग/दुरूपयोग उस ज़माने में भी होता
था जैसा कि हमने इस गीत के माध्यम से समझा. एक
बात ज़रूर नहीं समझ आई कि उसके साथ का तार क्या
इतना लंबा छूटा हुआ होता था कि उसे ले के कोई भी
घर का चक्कर लगा ले यहाँ तक कि टेलीफोन एक्सचेंज
भी पहुँच जाए. नहीं? कोई समझायेगा मुझे ये क्या हो
रहा है.

जिन लोगों को आर डी बर्मन के गानों के मुखड़ों और
अंतरों के मीटर अनूठे लगते हैं वे इस गाने को ज़रूर
सुनें.




गीत के बोल:

मेरे दिल की धड़कन क्या बोले
क्या बोले
मेरे दिल की धड़कन क्या बोले
क्या बोले
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने
मेरा प्यार भरा मन क्यों डोले
क्यों डोले
मेरा प्यार भरा मन क्यों डोले
क्यों डोले
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने

चली गई रात मदभरी हवाओं के डोले पे हो के सवार
दे गयी चाँद की परी निगाहों को सपनों का पागल ख़ुमार
हमें किसने दिये ये नज़राने
कौन जाने
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने

मेरे दिल की धड़कन क्या बोले
क्या बोले
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने

महकी थी रात की रानी खिले थे गगन में चमेली के फूल
पूछा मैंने कान में तुमसे मुहब्बत है कैसी मज़ेदार भूल
मैं तुमसे लगी क्यों शरमाने
कौन जाने
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने

मेरे दिल की धड़कन क्या बोले
क्या बोले
मैं जानूँ और तू जाने
मैं जानूँ और तू जाने
……………………………………………..
Mere dil ki dhadkan kya bole-Anhonee 1952

Artists: Raj Kapoor, Nargis

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Aug 9, 2019

छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा-ममता १९६६

रोशन के जीवन की माईलस्टोन मूवी रही ममता. ये हम संगीत के
लिहाज से बात कर रहे हैं. ममता एक सफलफिल्म रही. फिल्म में
अशोक कुमार, सुचित्रा सेन और धर्मेन्द्र के अलावा लगभग सभी
अन्य कलाकारों ने अपना अच्छा योगदान दिया है इस फिल्म में. 

आज हम इस फिल्म से एक युगल गीत सुनेंगे जो कि एक बढ़िया
युगल गीत माना जाता है. ये गाना वाकई अच्छा है और मधुर है. गीत
में मंदिर शब्द के प्रयोग से ही इसे कई संगीत प्रेमी अलौकिक और
अन्य जाने क्या-क्या उपमाएं दे दिया करते हैं.

हाँ, इसकी धुन अवश्य हमें अलौकिक सा एहसास कराती हैं क्यूंकि इस
गीत में तबियत से घंटी की आवाज़ और बांसुरी के टुकड़ों का प्रयोग है.
गीत की पंक्ति को ऐसे पढ़ा जाए तो ये शायद अच्छे से समझ आ जाए-
दिये की लौ मंदिर में.

गीत मजरूह सुल्तानपुरी का है और संगीत रोशन का. इसे हेमंत कुमार
और लता मंगेशकर ने गाया है. गीत का वीडियो यूट्यूब पर उपलब्ध नहीं
है इसलिए अधिक प्रकाश डाल पाना संभव नहीं है. बस इतना बताये देते
हैं कि ये गीत पार्श्व में बजता है.




गीत के बोल:

छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा
के जैसे मंदिर में लौ दिये की

छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा
के जैसे मंदिर में लौ दिये की

तुम अपने चरणों में रख लो मुझको
तुम्हारे चरणों का फूल हूँ मैं
मैं सर झुकाये खड़ी हूँ प्रीतम
के जैसे मंदिर में लौ दिये की

छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा
के जैसे मंदिर में लौ दिये की

ये सच है जीना था पाप तुम बिन
ये पाप मैंने किया है अब तक
मगर है मन में छबि तुम्हारी
के जैसे मंदिर में लौ दिये की

फिर आग बिरहा की मत लगाना
के जल के मैं राख हो चुकी हूँ
ये राख माथे पे मैंने रख ली
के जैसे मंदिर में लौ दिये की
................................................................
Chhupa lo yun dil mein pyar mera-Mamta 1966

Artists: Ashok Kumar, Suchitra Sen

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Aug 6, 2019

चाहे तो मोरा जिया लईले-ममता १९६६

हिंदी सिनेमा ने रंग बिरंगे गीत परोसे हैं दर्शकों के लिए. इनमें
ये चुनाव कर पाना कि कौन से गीत बेहतर है कुछ असम्भव
सा टास्क मालूम पढता है. सादगी का अपना आनंद है. सफ़ेद
रंग को अक्सर सादगी के साथ जोड़ कर देखा जाता है.

सुना और देखा जाए एक गीत जिसमें आपको ब्यूटी इन व्हाईट
के दर्शन होंगे. हिंदी सिनेमा को सुचित्रा सेन जैसी प्रतिभाशाली
अभिनेत्री की सेवाएं कम प्राप्त हुईं. फिल्म में सुचित्रा सेन डबल
रोल में हैं. ऐसे रोल करना आसान काम नहीं है. दो कालखंडों
को परदे पर एक साथ जीना पढता है.

मजरूह सुल्तानपुरी की रचना को स्वर दिया है लता मंगेशकर
ने रोशन की धुन पर.

ज्ञानी पाठक मुझे लरकैयां शब्द का अर्थ बतलायेंगे तो कृपा
होगी. ये शब्द लोक गीतों में प्रयोग होता है.



गीत के बोल:

आ आ
हमने उनके सामने पहले तो खंजर रख दिया
हाँ फिर कलेजा रख दिया दिल रख दिया और
सर रख दिया और कहा

हो ओ ओ चाहे तो मोरा जिया लईले सांवरिया
चाहे तो मोरा जिया लईले
फेर के नैना ना जा
न जा मैं वारी रसिया
हो ओ चाहे तो मोरा जिया लईले सांवरिया
चाहे तो मोरा जिया लईले

मान भी जाओ ना छोडो लरकैयां
छोडो लरकैयां
मान भी जाओ ना छोडो लरकैयां
छोडो लरकैयां
जाने ना दूँगी
जाने ना दूँगी मैं देखो मोरे सैयां
देखो मोरे सैयां
रोक रही गोरी बैयाँ के रुक जा
ओ मन बसिया
हो ओ चाहे तो मोरा जिया लईले सांवरिया
चाहे तो मोरा जिया लईले
…………………………………………………………..
Chahe to mora jiya laile-Mamta 1966

Artist: Suchitra Sen

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Nov 26, 2018

तुमसे लगन लागी-मधु १९५९

गीतकार नक्श लायलपुरी के ऊपर काले पीले ज़माने के लोग
ज़्यादा मेहरबान नहीं रहे. रोशन के सिवा उनके गीत शायद
हि किसी और गीतकार ने कम्पोज किये हों.

खय्याम को रंगीन युग में उनकी बहुत याद आई और एक
से बढ़ कर एक गाने बने साहब ८० के दशक में.

सुनते हैं लता और रफ़ी का गाया युगल गीत मधु फिल्म से.





गीत के बोल:

तुमसे लगन लागी हाय ऐसी अगन जागी
ये दिल हुआ दीवाना नज़र झुकी-झुकी जाये
तुम जो दिल में आए आँखों में मेरी छाए
इस दिल की आरज़ू का चमन खिला-खिला जाये

जबसे नज़र मिली खोया मेरा जहाँ
तुम हो पास मेरे मैं हूँ जाने कहाँ
जबसे नज़र मिली खोया मेरा जहाँ
तुम हो पास मेरे मैं हूँ जाने कहाँ
दिल की लगन मेरे सजन झूमे तेरी क़सम
जब से देखा तुझे नाचे मेरा मन
महकी पवन झूमे होंठों को हँसी चूमे
ये दिल हुआ दीवाना नज़र झुकी-झुकी जाये

तुम जो दिल में आए आँखों में मेरी छाए
इस दिल की आरज़ू का चमन खिला-खिला जाये

तुमसे मेरी वफ़ा कहती है ये पिया
दिल से मेरे कभी तुम न होना जुदा
तुमसे मेरी वफ़ा कहती है ये पिया
दिल से मेरे कभी तुम न होना जुदा
दिल है सनम तेरे लिए तू है जान-ए-वफ़ा
दिल से प्यार तेरा होगा न जुदा
जब से तुझे पाया जीने का मज़ा आया
इस दिल की आरज़ू का चमन खिला-खिला जाये

तुमसे लगन लागी हाय ऐसी अगन जागी
ये दिल हुआ दीवाना नज़र झुकी-झुकी जाये
………………………………………..
Tumse lagan laagi-Madhu 1959

Artists:

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Oct 16, 2018

ये कैसी अदाएं-राग रंग १९५२

सन बावन की फिल्म रागरंग से अगला गाना सुनते हैं.
प्रस्तुत गीत के गीतकार कैफ इरफ़ानी हैं. गाने के शुरू
में jazz की कोई राग है और उसके बाद देसी राग.

कवियों और गीतकारों की पंक्तियाँ डिकोड करना कोई
बच्चों का खेल नहीं. अब पिछले गीत को ही लीजिए जो
कह रहा है-दिल की लगी और दिल लगाना अलग अलग
आइटम हैं जैसे आग लगी और आग लगाना दो अलग
बातें हैं.

और भी सरल शब्दों में पुंगी बजना और पुंगी बजाना
अलग अलग पहलू हैं. ये हिंदी में पढ़ने में अटपटा लग
रहा है. मानिए, कसम से, जब इसी बात को आप किसी
जगह अंग्रेजी में लीपा हुआ पायेंगे तो आपको पढ़ने में
आनंद आएगा.

पहले तो हवा में तारीफ करो, टायर से हवा निकलवाओ
फ़िर शिकवे-शिकायत करो. ऐसा करो ही क्यों. जब प्यार
की ओखली में सर दे ही दिया है तो मूसल से क्यूँ घबराना



गीत के बोल:

ये कैसी अदाएं हैं उनकी अदाएं
के दिल को भी तोड़ें नज़र भी न आएं
ये कैसी अदाएं हैं उनकी अदाएं
के दिल को भी तोड़ें नज़र भी न आएं
ये कैसी अदाएं

ये दिल जो लगाया बड़ी चोट खाई
ये दिल जो लगाया बड़ी चोट खाई
जफ़ा तुमने की और मुझे शर्म आई
मुझे ले न डूबे ये मेरी खतायें
ये कैसी अदाएं हैं उनकी अदाएं
के दिल को भी तोड़ें नज़र भी न आएं
ये कैसी अदाएं

वही आसमाँ है वही चाँद तारे
वही आसमाँ है वही चाँद तारे
मगर तुम नहीं वो न वादे तुम्हारे
ये किस जुर्म की मिल रही हैं सज़ायें

ये कैसी अदाएं हैं उनकी अदाएं
के दिल को भी तोड़ें नज़र भी न आएं
ये कैसी अदाएं
…………………………………………..
Ye kaisi adayen-Raag rang 1952

Artists:

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Sep 21, 2018

बेदर्दी नज़रें मिला के कह दे-अजी बस शुक्रिया १९५८

अजी बस शुक्रिया से आपने लता का एक गीत सुना जो
ज्यादा सुनाई देता है. अब सुनते हैं दूसरा गीत जिसे लता
भक्त ज्यादा सुनते हैं.

ये भी फ़ारूक कैसर की रचना है जिसका संगीत रोशन ने
तैयार किया है.



गीत के बोल:

बेदर्दी
बेदर्दी नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी

प्यार का सैंयाँ तेरे रंग चढ़ाया मैंने
लोग कहे मैं ने रोग लगाया कोई रोग लगाया
मुखड़े पे आई ज़र्दी
नज़रें मिला के कह दे
नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी
बेदर्दी क्या है तेरी मर्ज़ी
क्या है तेरी मर्ज़ी
हो नज़रें मिला के कह दे
हाँ हाँ हाँ
नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी

आ आ आ आ आ आ
खता की है गैर ने हमको सज़ा देने चले आये
कहाँ खोया है दिल तुमने कहां तुम ढूँढने ढूंढें आये
एक नज़र में तूने दिल मेरा लूटा
तूने दिल मेरा लूटा
सब्र का दामन मेरे हाथों से छूटा
मेरे हाथों से छूटा
हालत क्या तूने कर दी
नज़रें मिला के कह दे
नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी

हम तो निभायेंगे प्यार का वादा तेरे प्यार का वादा
कह दे सनम तेरा क्या है इरादा तेरा क्या है इरादा
हमने तो हामी भर दी
नज़रें मिला के कह दे क्या है तेरी मर्ज़ी

बेदर्दी
बेदर्दी क्या है तेरी मर्ज़ी क्या है तेरी मर्ज़ी
हो ओ नज़रें मिला के कह दे
हाँ हाँ हाँ
नज़रें मिला के कह दे है क्या है तेरी मर्ज़ी
बेदर्दी
……………………………………………………..
Bedardi nazren mila ke-Aji bas shukriya 1958

Artist:

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Sep 17, 2018

यही बहार है-राग रंग १९५२

सरशर सैलानी के लिखा हुआ एक गाना सुनते हैं फिल्म
राग रंग से. फिल्म की नायिका गीता बाली हैं. गीत का
वीडियो उपलब्ध नहीं है.

हर्षोल्लास वाला गीत है और फिल्म में कई रंग वाले
गाने हैं. मनियापुर के छैला नाम से भी एक गाना है.
ये मनियापुर कहाँ है कोई बतलायेगा.

फिल्म में संगीत सेवा रोशन ने प्रदान करी है.



 गीत के बोल:

ला ला ला ला ला ला ला ला
यही बहार है यही बहार है
यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की
यही घडी है जवानी के गुनगुनाने की
हाँ मुस्कुराने की

ये प्यारे प्यारे नज़ारे ये ठंडी ठंडी हवा
ये हल्का हल्का नशा
ये काली काली घटाओं की मस्त मस्त अदा
ये कोयलों की सदा
मचल के आ गई रुत मस्तियाँ लुटाने की
हाँ झूम जाने की

यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की

कली कली से ये भंवरे ने मुस्कुरा के कहा 
नज़र मिला के कहा 
नज़र से काम न निकला तो गुदगुदा के कहा 
गले लगा के कहा 
किया है प्यार तो किया है प्यार तो 
किया है प्यार तो परवाह न कर ज़माने की 
हाँ हँसी उडाने की

यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जो टूटता है रुबां
जो टूटा है रुबां उसको टूट जाने दे
मेरे शबाब को जी भर के गीत गाने दे
हाँ गीत गाने दे
मेरे शबाब को जी भर के गीत गाने दे
हाँ गीत गाने दे
तड़प उठी हुई तड़प उठी हुई
तड़प उठी हैं तमन्नायें झूम जाने की
हाँ लगी बुझाने की

यही बहार है दुनिया को भूल जाने की
खुशी मनाने की
…………………………………………………
Yahi bahar hai-Raag rang 1952

Artist: Geeta Bali

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Jul 1, 2018

धानी चुनर मोरी हाय रे-मधु १९५९

लता मंगेशकर की आवाज़ में एक कर्णप्रिय गीत सुनते
हैं फिल्म मधु से. नक्श लायलपुरी के बोल हैं और इसे
रोशन ने संगीत से संवारा है.

इस धुन को आप आगे ८० के दशक के एक गाने में पाएंगे
अगर आप ध्यान से संगीत सुनते हैं.



गीत के बोल:

धानी चुनर मोरी हाय रे
धानी चुनर मोरी हाय रे
जाने कहाँ उड़ी जाये रे
धानी चुनर मोरी हाय रे

आज मेरे आँचल से क्यों लिपटती जाये
जीवन की बगिया में ये किसने फूल खिलाये
नस नस में डोल के घूँघट पट खोल के
आज खुशी लहराये रे

धानी चुनर मोरी हाय रे
धानी चुनर मोरी हाय रे
जाने कहाँ उड़ी जाये रे
धानी चुनर मोरी हाय रे

झूम रहे हैं सपने दो आँखों में लहराके
मन ही मन मुस्काऊँ मैं नई डगर पिया के
पग पग अनजान है नज़र हैरान है
बात मगर मन भाये रे

धानी चुनर मोरी हाय रे
धानी चुनर मोरी हाय रे
जाने कहाँ उड़ी जाये रे
धानी चुनर मोरी हाय रे

चंचल मन ये चाहे मैं उड़ती उड़ती जाऊँ
हो ओ ओ नीलगगन पर जा के चंदा को गले लगाऊँ
सुध-बुध बिसरा गये ये दिन कैसे आ गये
कोई मुझे समझाये रे

धानी चुनर मोरी हाय रे
धानी चुनर मोरी हाय रे
जाने कहाँ उड़ी जाये रे
धानी चुनर मोरी हाय रे
………………………………………….
Dhani chunar mori haye re-Madhu 1959

Artist:

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Jun 26, 2018

तेरे प्यार को इस तरह-मैंने जीना सीख लिया १९५९

हिंदी फिल्म संगीत के महासागर में डुबकियां लगाते जाओ,
लगाते जाओ पर इसकी थाह नहीं मिल पाती. इतनी गहरायी
और विविधता है कि आप अचंभित ही महसूस करेंगे अपने
आप को. इसमें खटिया पटिया, चोली, जोबन सब है और
सौंदर्य रस से भरपूर सारा सामान मौजूद है

हम प्रस्तावना तो दर्द भरे गीत के लिए लिख रहे थे मगर
कबख्त चोली पोली बीच मं क्यूँ आ जाती है समझ नहीं
पाते.

राहिल गोरखपुरी की रचना सुनिए रोशन के संगीत में बंधी
जिसे मुकेश ने गाया है.





गीत के बोल:

तेरे प्यार को इस तरह से भुलाना
न दिल चाहता है न हम चाहते हैं
जो सच था उसे इक फ़साना बनाना
न दिल चाहता है न हम चाहते हैं

वो मासूम सूरत भोली निगाहें
रहेंगी सदा दिल में आबाद होकर
न पूरी हुई जो उसी आरज़ू में
मिलेगा हमें चैन बरबाद हो कर
कि उजड़ी हुई ज़िन्दगी को बसाना
न दिल चाहता है न हम चाहते हैं

समझ में न आया कि हर इक ख़ुशी से
ये दिल आज बेज़ार क्यों हो गया है
तेरे ग़म में बहते हुए आँसुओं से
न जाने हमें प्यार क्यों हो गया है
कि भूले से भी अब कभी मुस्कराना
न दिल चाहता है न हम चाहते हैं
…………………………………..
Tere pyar ko is tarah se-Maine jeena seekh liya 1959

Artists:

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Apr 10, 2018

तुम एक बार मोहब्बत का इम्तिहान तो लो-बाबर १९६०

एक गीत सुनते हैं बाबर फिल्म से रफ़ी का गाया हुआ. इसे
लिखा है साहिर लुधियानवी ने और इसकी धुन तैयार की है
रोशन ने.

ऐतिहासिक फ़िल्मी कथाओं में बाबर, हुमायूँ और अकबर पर
फ़िल्में बन चुकी हैं. औरंगजेब नाम से भी एक फिल्म आई
मगर उसका कथानक अलग है.

गीत अज़रा और सोहन कपिला पर फिल्माया गया है. नायक
सोहन कपिला ८० के दशक में फिल्मों में दिखने वाली नायिका
पद्मिनी कपिला के पिता हैं.





गीत के बोल:


तुम एक बार मोहब्बत का इम्तिहान तो लो
मेरे जूनून मेरी वहशत का इम्तिहान तो लो
तुम एक बार मोहब्बत का इम्तिहान तो लो

सलाम-ए-शौक पर रंजिश बहरा पयाम ना दो
सलाम-ए-शौक पर रंजिश बहरा पयाम ना दो
मेरे ख़ुलूस को हिरास-ओ—हवास का नाम ना दो
मेरी वफ़ा की हकीकत का इम्तिहान तो लो
तुम एक बार मोहब्बत का इम्तिहान तो लो

ना तख़्त-ओ-ताज ना लाल-ओ-गुहर की हसरत है
ना तख़्त-ओ-ताज ना लाल-ओ-गुहर की हसरत है
तुम्हारे प्यार तुम्हारी नज़र की हसरत है
तुम अपने हुस्न की अजमत का इम्तिहान तो लो
तुम एक बार मोहब्बत का इम्तिहान तो लो

मैं अपनी जान भी दे दूं तो ऐतबार नहीं
मैं अपनी जान भी दे दूं तो ऐतबार नहीं
के तुमसे बढ़ के मुझे जिंदगी से प्यार नहीं
यूँ ही सही मेरी चाहत का इम्तिहान तो लो
तुम एक बार मोहब्बत का इम्तिहान तो लो
......................................................................
Tum ek baar mohabbat ka-Babar 1960

Artists: Azra, Sohan Kapila

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Apr 5, 2018

उनके बुलावे पे डोले मेरा दिल-नौबहार १९५२

डोले हिंडोले हिट्स के अंतर्गत आज सुनते हैं सन १९५२ की
फिल्म नौबहार से एक गीत लता मंगेशकर का गाया हुआ.
अशोक कुमार और नलिनी जयवंत अभिनीत इस फिल्म में
कुछ मधुर गीत हैं. प्रस्तुत गीत भी अपने ज़माने का चर्चित
गीत है.

शैलेन्द्र के बोल हैं और रौशन का संगीत. गीत में आप पांच
कलाकारों को देख पाएंगे जिनमें से दो के नाम नाम आपको
बतलाये देते हैं-अशोक कुमार और नलिनी जयवंत.




गीत के बोल:

उनके बुलावे पे डोले मेरा दिल
जाऊं तो मुश्किल न जाउं तो मुशकिल
जाऊं तो मुश्किल न जाउं तो मुशकिल
उनके बुलावे पे डोले मेरा दिल

बचपन जवानी जो मिलने लगे हैं
बचपन जवानी जो मिलने लगे हैं
मौसम बिना फूल खिलने लगे
फूल खिलने लगे हैं
छेड़ी किसी ने मेरे मन की बीना
छेड़ी किसी ने मेरे मन की बीना
गाऊं तो मुशकिल न गाऊं तो मुशकिल
जाऊं तो मुश्किल न जाउं तो मुशकिल
उनके बुलावे पे डोले मेरा दिल

जब से वो नैनों में आये
मेरे सपने नये रंग लाये
नये रंग लाये
जब से वो नैनों में आये
मेरे सपने नये रंग लाये
नये रंग लाये
नाज़ों के पाले है मेरे सपने
नाज़ों के पाले है मेरे सपने
देखूं तो मुशकिल दिखाऊं तो मुशकिल
जाऊं तो मुश्किल न जाउं तो मुशकिल
उनके बुलावे पे डोले मेरा दिल

उलझी है काँटों में हाय चुनरिया
उलझी है हाय राम मेरी चुनरिया
छोड़ूं तो मुशकिल छुड़ाऊं तो मुशकिल
जाऊं तो मुश्किल न जाउं तो मुशकिल
उनके बुलावे पे डोले मेरा दिल
............................................................................
Unke bulawe pe dole mera dil-Naubahar 1952

Artists: Ashok Kumar, Nalini Jaywant

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Feb 25, 2018

मासूम दिल की हाँ पे-माशूका १९५३

रोशन के संगीत की फुल वैराइटी मालूम करना हो तो आपको
उनकी पुरानी फिल्मों के गीत भी अवश्य सुनना चाहिए. पिछले
पोस्ट में जगजीत सिंह के गीत के साथ ही ये गीत भी याद
आ गया मुकेश का जो फिल्म माशूका के लिए उन्होंने गाया
था. फिल्म माशूका के साउंड-ट्रेक में विभिन्न प्रकार के गीत
मौजूद हैं. 
   
शैलेन्द्र की रचना है अर्थात इस गीत को शैलेन्द्र ने लिखा है.
मुखड़े के पहले दो पंक्तियाँ हैं जो शायद उस समय का ट्रेंड था.
आपको उस समय के बहुतेरे गीतों में ऐसा मिलेगा.





गीत के बोल:

ज़मीं भी चुप है आसमाँ भी चुप है
किसी की दुनिया उजड़ रही है
बता ऐ मालिक ये कैसी क़िस्मत
जो बनते बनते बिगड़ रही है

मासूम दिल की हाँ पे ना कह दिया किसी ने
और बस इसी बहाने ग़म दे दिया किसी ने

बाद-ए-सबा जो आई और फूल मुस्कुराये
फूल मुस्कुराये
बाद-ए-सबा जो आई और फूल मुस्कुराये
फूल मुस्कुराये
सहला के ज़ख़्म मेरे बहला दिया किसी ने
और बस इसी बहाने ग़म दे दिया किसी ने

मालूम क्या था हमको है रंज-ओ-ग़म की दुनिया
रंज-ओ-ग़म की दुनिया
मालूम क्या था हमको है रंज-ओ-ग़म की दुनिया
रंज-ओ-ग़म की दुनिया
सौ सौ सितम उठाये दो दिन की ज़िन्दगी में
और बस इसी बहाने ग़म दे दिया किसी ने

मासूम दिल की हाँ पे ना कह दिया किसी ने
…………………………………………………
Masoom dil ki haan pe-Mashooqa 1953

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Feb 20, 2018

इचक बीचक चुर्र-बावरे नैन १९५०

केदार शर्मा रचित एक गीत सुनते हैं बावरे नैन फिल्म से जिसे
शमशाद बेगम ने गाया है. रौशन ने गीत की धुन बनाई है.

हल्का फुल्का गीत है ये. हास्य भी एक विधा है मगर इसका
प्रयोग संवादों में ज्यादा होता है और गीतों में कम. हास्य रस
वाले गीत को रसदार बनाना आसान नहीं है. किसी रोमांटिक
गीत को फिल्माना ज्यादा आसान है. कैसे भी आड़े टेढ़े पड़
जाओ प्यार मोहब्बत में सब जायज़ है.
   




गीत के बोल:

ऐ ईचक बीचक चुर्र
ऐ ईचक बीचक चुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र फुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र
ऐ ईचक बीचक
ऐ ईचक बीचक चुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र फुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र

शुरू शुरू में प्यार कहेगा तू दिलवर मैं जानी
धीरे धीरे
धीरे धीरे रोग बढ़ा तब याद आयेगी नानी
नज़र का तीर सीने में लगा गया दिल चीर
गया दिल चीर
मन उलझा उलझी दो अखियाँ हाय
मन उलझा उलझी दो अखियाँ अब क्या हो तस्वीर

ऐ ईचक बीचक
ऐ ईचक बीचक चुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र फुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र

अभी से एक के दो दो तुमको देने लगे दिखाई
सचमुच दोनो
सचमुच दोनो एक बने तो फिर क्या होगा भाई
बाँवरे नैन नैन न इनको नींद न इनको चैन
देखत हैं अब बाट किसी की होय
देखत हैं अब बाट किसी की ये पगले दिन रैन

ऐ ईचक बीचक
ऐ ईचक बीचक घुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र फुर्र
दिल उड़ गया बाबू फुर्र
………………………………………………………..
Ichak beechak churr-Bawre nain 1950

Artists: Cuckoo, Geeta bali, Raj Kapoor

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Feb 11, 2018

यूँ ही दिल ने चाहा था-दिल ही तो है १९६३

दिल अगर रोना चाहे तो उस बात का जिक्र इतने सुन्दर
अंदाज़ में भी किया जा सकता है. शब्दों को एक सुन्दर
धुन भी प्रदान करी गई है. गीत है सुमन कल्याणपुर का
गाया फिल्म दिल ही तो है से.

फिल्म के सभी गीत श्रवणीय हैं चाहे वो लता का गाया हो,
मुकेश का गाया हो या मन्ना डे का गाया हुआ. सभी गीत
साहिर ने लिखे हैं और संगीत है रोशन का. परदे पर इसे
नूतन गा रही हैं.





गीत के बोल:

यूँ ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना
यूँ ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना

हमें भी नहीं इल्म हम जिस पे रोये
वो बीती रुतें हैं के आता ज़माना
वो बीती रुतें हैं के आता ज़माना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना

ग़म-ए-दिल है और ग़म-ए-ज़िंदगी भी
न इसका ठिकाना न उसका ठिकाना
ग़म-ए-दिल है और ग़म-ए-ज़िंदगी भी
न इसका ठिकाना न उसका ठिकाना
न इसका ठिकाना न उसका ठिकाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना

कोई किसपे तड़पे कोई किसपे रोये
इधर दिल जला है उधर आशियाना
इधर दिल जला है उधर आशियाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना

यूँ ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना
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Yunhi dil ne chaha tha-Dil hi to hai 1963

Artist: Nutan

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Feb 4, 2018

एक बार अगर तू कह दे-मल्हार १९५१

एक घोड़ा गाडी हिट सुनते हैं फिल्म मल्हार से. किसी
रोशन प्रेमी ने मुझे इस गीत को तांगा/घोड़ा गाडी हिट
कहते सुना था तब से मैं भी इसे ऐसे ही पहचानता हूँ.

गीत की विशेषता ये है कि इसमें घोड़े की टाप वाला
संगीत पूरे समय सुनाई देता है. नायक नायिका तांगे
से उतर जाते हैं उसके बाद भी ये सुनाई देता है वो
इसलिए कि कंटिन्यूटी बनी रहे और इस बात का प्रमाण
भी हो गया कि नायक नायिका तफ़री करने के बाद
तांगे से ही वापस जाने वाले हैं. क्यूँ है ना सही अनुमान
दोस्तों.

गीत मधुर है जिसे इन्दीवर ने लिखा है और मुकेश संग
लता मंगेशकर ने इसे गाया है और रोशन संगीतकार हैं.




गीत के बोल:

एक बार अगर तू कह दे
एक बार अगर तू कह दे
तू है मेरी के मैं हूँ तेरा
हम दो अलबेले पंछी
हम दो अलबेले पंछी
हम दोनों का एक बसेरा

दो दिल धड़के हैं चौंक उठी हैं जवानियाँ
कुछ कहा है निगाहों ने छेड़ के प्यार की कहानियाँ
कुछ कहा है निगाहों ने छेड़ के प्यार की कहानियाँ
मेरा मन ही नहीं है मेरे बस में
मेरा मन ही नहीं है मेरे बस में
ये किसने जादू फेरा
कहो जी ये किसने जादू फेरा
हम दोनों का एक बसेरा

आ जायें न कहीं हम तुम किसी की निगाहों में
संग संग ही चलेंगे हम ज़िंदगी की राहों में
संग संग ही चलेंगे हम ज़िंदगी की राहों में
तुझे छीन न ले कोई मुझसे
ये जग है बड़ा लुटेरा
सुनो जी ये जग है बड़ा लुटेरा
हम दोनों का एक बसेरा

देखो आई हैं सितारों की टिमटिमाती ये टोलियाँ
चलो इनकी छाँव में हम खेलें आँखमिचोलियाँ
चलो इनकी छाँव में हम खेलें आँखमिचोलियाँ
टूटे न कभी जीवन भर
ये बन्धन तेरा मेरा
ओ हो जी ये बन्धन तेरा मेरा
हम दोनों का एक बसेरा

एक बार अगर तू कह दे
एक बार अगर तू कह दे
तू है मेरी के मैं हूँ तेरा
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Ek baar agar too keh de-Malhar 1951

Artists: Arjun, Shammi

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Jan 29, 2018

और है दिल की लगी-राग रंग १९५२

जिंदगी क्या है रागा सागा और धागा का संगम. ये सागा शब्द
सुन कर मुझे सरसों दा सागा याद आ जाता है, सर्दी का मौसम
जो है. राग शब्द को विलायती अंदाज़ में रागा बोला जाता है.
धागा तो शुद्ध देसी शब्द है जो जीवन की कड़ियों को पिरो के
रखने का और नाड़े को पजामे और पेटीकोट में टिकाये रखने का
काम करता है. रिश्तों की डोर में भी तो धागा ही है. पतंग की
डोर हो या जीवन की डोर ये सभी को बाँध के रखता है. कलाई
में बाँधो, बाजू में बाँधो या गले में ये रक्षा कवच का काम करता
है.

जीवन में संगीत अर्थात रागा ना हो तो व्यक्ति अ-भागा सा
लगता है. लेडी गा-गा भाग्यवान हैं उनके नाम में ही गा और
गा लगा हुआ है. वे एक ख्यात गायिका हैं.

सुनते हैं सन १९५२ की फिल्म राग रंग से जिंदगी को परिलक्षित
करता एक गीत तलत महमूद की आवाज़ में. इस गीत को लिखा
है कैफ इरफानी ने और संगीतकार हैं रोशन.





गीत के बोल:

और है दिल की लगी और दिल का लगाना और है
ये कहानी और है और वो फ़साना और है
और है दिल की लगी

रूठ के जो चल दिया
रूठ के जो चल दिया क्या खबर उसको भला
क्या खबर उसको भला
याद रखना और है और भूल जाना और है

और है दिल की लगी

जो तराना लब पे आया
जो तराना लब पे आया वो तो सब ने सुन लिया
वो तो सब ने सुन लिया
रह गया जो दिल ही दिल में वो तराना और है

और है दिल की लगी

हाय किस खूबी से लूटा
हाय किस खूबी से लूटा बेवफ़ा तक़दीर ने
बेवफ़ा तक़दीर ने
तेरी बरबदी का ऐ दिल हर फ़साना और है

और है दिल की लगी और दिल का लगाना और है
ये कहानी और है और वो फ़साना और है
और है दिल की लगी
.....................................................................
Kahin dil lagane ka samaan-Raagrang 1952

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Jan 27, 2018

आ जा सनम देर न लगा-माशूका १९५३

आ जा-इन शब्दों से शुरू होने वाला एक और गीत सुनते हैं. ये है
फिल्म माशूका से. सुरैया की आवाज़ और रोशन का संगीत. है ना
अनूठा कोम्बिनेशन. कमर जलालाबादी के बोल हैं और ये भी एक
रेयर सा फेनोमेना है. कमर जलालाबादी ने रोशन के लिए कम ही
गीत लिखे हैं.

आ जा सनम शब्दों से फिल्म चोरी चोरी का एक लोकप्रिय गीत भी
है मगर वो एक युगल गीत है. आ जा सनम नाम से एक फिल्म भी
बनी है जिसमें फिरोज खान हीरो हैं.



गीत के बोल:

आ जा सनम आ जा सनम देर ना लगा
सपनों की पालकी में धीरे धीरे आ
आ आ आ आ धीरे
आ जा सनम आ जा सनम देर ना लगा
सपनों की पालकी में धीरे धीरे आ

दुनिया बुलाये तुझे कभी नहीं जाना जी
कभी नहीं जाना जी
मैं जो बुलाऊँ तुझे हँसते हुये आना जी
हँसते हुये आना जी
हो न जाना
हो न जाना हो न जाना कभी बेवफ़ा

सपनों की पालकी में धीरे-धीरे आ
आ आ आ आ धीरे
आ जा सनम आ जा सनम देर ना लगा
सपनों की पालकी में धीरे धीरे आ

नैनों के द्वार खोले खड़ी है जवानी रे
प्रीत है कुँवारी मेरी रतियाँ सुहाही रे
रतियाँ सुहानी रे
आने वाले आना हो तो चाँद बन के आ
सपनों की पालकी में धीरे धीरे आ
आ आ आ आ धीरे

आ जा सनम आ जा सनम देर ना लगा
सपनों की पालकी में धीरे धीरे आ

ठण्दी ठण्दी चाँदनी में तुझको रुलाऊँगी
तुझको सुलाऊँगी
गोरी गोरी बाँहों का झूला झुलाऊँगी
झूला झुलाऊँगी
दामन से
दामन से अपने चलाऊँगी हवा
सपनों की पालकी में धीरे धीरे आ
आ आ आ आ धीरे

आ जा सनम आ जा सनम देर ना लगा
सपनों की पालकी में धीरे धीरे आ
……………………………………………..
Aa ja sanam der na laga-Mashooka 1953

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Dec 27, 2017

मारा गया ब्रह्मचारी-चित्रलेखा १९६४

मन्ना डे के हास्य गीत बहुतेरे हैं. इनमें से कई गीत महमूद पर
फिल्माए गए हैं. विचित्र भाव भंगिमाओं वाले ऐसे गीतों का निर्माण
अब शायद संभव नहीं होगा. कुछ भाव भंगिमाएं महमूद की पेटेंट
सरीखी थीं. उनकी नक़ल कभी दिखलाई नहीं दी और ना ही आगे
देगी.

फिल्म चित्रलेखा से एक गीत सुनते हैं जिसे साहिर लुधियानवी ने
लिखा है और इसका संगीत तैयार किया है रोशन ने. इस यू ट्यूब
वाले वीडियो में तीन अंतरे हैं. बाकी के दो ऑडियो गीत में उपलब्ध
हैं.



गीत के बोल:

लागी मनवा के बीच कटारी
के मारा गया
के मारा गया ब्रह्मचारी हाय
कैसी ज़ुल्मी
कैसी ज़ुल्मी बनाई तैने नारी
के मारा गया ब्रह्मचारी

ऐसा घुँघरू पायलिया का छनका
हाय रे छनका
मोरी माला में अटक गया मनका
हाय रे मनका
मैं तो भूल प्रभु
मैं तो भूल प्रभु सुध बुध सारी
के मारा गया
के मारा गया भम्मचारी

कैसी ज़ुल्मी बनाई तैने नारी
के मारा गया ब्रह्मचारी

कोई चंचल कोई मतवाली है
मतवाली है
कोई नटखट कोई भोली भाली है
भोली भाली है
कभी देखी न थी हाय
कभी देखी न थी ऐसी फुलवारी
के मारा गया
के मारा गया ब्रह्मचारी

बडे जतनों साथ बनाई थी
बनाई थी
मोरी बरसों की पुण्य कमाई थी
कमाई थी
तैने पल में हाय
तैने पल में भसम कर डारी
के मारा गया ब्रह्मचारी

मोहे बावला बना गई वा की बतियाँ
वा की बतियाँ
अब कटती नहीं हैं मोसे रतियाँ
मोसे रतियाँ
पड़ी सर पे हाय
पड़ी सर पे बिपत अति भारी
के मारा गया
के मारा गया ब्रह्मचारी

कैसी ज़ुल्मी बनाई तैने नारी
के मारा गया ब्रह्मचारी

मोहे उन बिन कछु न सुहाये रे
न सुहाये रे
मोरे अखियों के आगे लहराये रे
लहराये रे
गोरे मुखड़े पे हाय
गोरे मुखड़े पे लट कारी कारी
के मारा गया
के मारा गया ब्रह्मचारी

कैसी ज़ुल्मी बनाई तैने नारी
के मारा गया
के मारा गया ब्रह्मचारी
…………………………………………………………
Mara gaya brahmachari-Chitralekha 1964

Artist: Mehmood

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Dec 25, 2017

फ़लक़ मिलेगा तुझे क्या-घर घर में दीवाली १९५५

कई शब्द दो तरीके से लिखे जाते रहे हैं और आगे भी लिखे
जाते रहेंगे. आम आमदी को इस बाबत कोई जानकारी नहीं
होती ऐसा क्यूँ होता है.

ये मोहब्बत है या मुहब्बत इस भाषाई मुरब्बे की चाशनी ने
हमें तरह तरह के स्वाद चखाये हैं. कैसे भी लिखो मतलब तो
एक ही है.

एक धीमी गति का युगल गीत सुनते हैं रफ़ी और लता का
गाया हुआ जिसके बोल इन्दीवर ने लिखे और संगीत तैयार
किया रोशन ने.




गीत के बोल:

फ़लक़ मिलेगा तुझे क्या हमें मिटाने से
ये मुहब्बत ना मिटेगी कभी ज़माने से
फ़लक़ मिलेगा तुझे क्या हमें मिटाने से
ये मुहब्बत ना मिटेगी कभी ज़माने से

उठा के रंज ये दिल चूर हो गया इतना
उठा के रंज ये दिल चूर हो गया इतना
के ठेस लगती है हाय
के ठेस लगती है कलियों के मुस्कुराने से
ये मुहब्बत ना मिटेगी कभी ज़माने से

जियें तो किसके लिये तुम ही जब नहीं अपने
तुम ही जब नहीं अपने
जियें तो किसके लिये तुम ही जब नहीं अपने
तुम ही जब नहीं अपने
के जी रहे थे हाय
के जी रहे थे अभी तक इसी बहाने से
ये मुहब्बत ना मिटेगी कभी ज़माने से

जहाँ ने कह दिया बादल हैं आसमानों के
जहाँ ने कह दिया बादल हैं आसमानों के
धुआँ उठा है ये हाय
धुआँ उठा है ये मेरे ही आशियाने से
ये मुहब्बत ना मिटेगी कभी ज़माने से

फ़लक़ मिलेगा तुझे क्या
…………………………………………………………..
Falak milega tujhe kya-Ghar ghar mein diwali 1955

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Dec 24, 2017

वो तीर दिल पे चला-आरती १९६२

लोकप्रिय फिल्मों में लोकप्रिय गीतों के अलावा कुछ अलोकप्रिय
मतबल कम लोकप्रिय गीत भी हुआ करते हैं. ऐसा ही एक गीत
है फिल्म आरती में जो रफ़ी और आशा का गाया एक युगल
गीत है.

गीत में हास्य का हल्का सा पुट है और ये महमूद पर फिल्माया
गया है. नायिका को आप पहचानिये.




गीत के बोल:

वो तीर दिल पे चला जो तेरी कमान में है
वो तीर दिल पे चला जो तेरी कमान में है
हाय किसी की आँख में जादू तेरी ज़ुबान में है
हाय किसी की आँख में जादू तेरी ज़ुबान में है

नज़र में आते ही तुम तो जिगर में आये सनम
जिगर में आये तो दिल की तरफ़ बढ़ाए क़दम
कहीं ठहरती नहीं जो उसी अदा की कसम
कहीं ठहरती नहीं जो उसी अदा की खसम
उसी अदा की क़सम
ज़मीं पे है वही बिजली जो आसमान में है
हाय किसी की आँख में जादू तेरी ज़ुबान में है

ये माना रंग मोहब्बत के हो चले गहरे
मगर लबों पे हैं ताले दिलों पे हैं पहरे
जो बेक़रार हो दिल से कहीं वो क्या ठहरे
जो बेक़रार हो दिल से कहीं वो क्या ठहरे
कहीं वो क्या ठहरे
अभी तो हुस्न मोहब्बत के इम्तहान में है
आ हा वो टीर दिल पे चला जो तेरी कमान में है


तुम्हारी आँखों के आगे ये दिन ये रात कहाँ
गुलों की शाख कहाँ इक सनम का हाथ कहाँ
हसीन देखे हज़ारों मगर ये बात कहाँ
हसीन देखे हज़ारों मगर ये वात कहाँ
मगर ये बात कहाँ
ये बात और है जो तेरी आन-बान में है   

किसी की आँख में जादू तेरी ज़ुबान में है
.....................................................................
Wo teer dil pe chala-Aarti 1962

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