Oct 12, 2018

लुट जा लुट जा-आँखें १९६८

बेसिकली दो प्रकार की जनता होती है-लूटने वाली
और लूटने वाली. दूसरे शब्दों में शोषक और शोषित.
लूटना ज़ल्द समझ आता है मगर शोषण और दोहन
आसानी से समझ आने वाली चीज़ें नहीं हैं.

स्वेच्छा से लुट जाने को कितने लोग तैयार होते हैं?
लूटना चॉईस नहीं है मगर भोले भाले लोग नेताओं,
बाबाओं और अन्य वाचाल चालाक लोगों द्वारा लूट लिए
जाते हैं.

साहिर की रचना को स्वर दिया है आशा भोंसले,
कमाल बारोट और उषा मंगेशकर ने रवि की धुन पर.
गीत में ‘छूट जा’ को ‘छुट जा’ गाया गया है हमने
वैसे ही बोल यहाँ पर दिये हैं. आगे एक शब्द हमने
विवादास्पद होने की वजह से छोड़ दिया है.



गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
जाती रात सुहानी नहीं आने वाली
आरज़ूओं पे जवानी नहीं आने वाली
आ भी जाये तो मेरी जान लहू में तेरे
फिर ये गर्मी ये रवानी नहीं आने वाली

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
लुट जा हो लुट जा यही दिन हैं किसी पे लुटा जा
तेरे सामने हैं प्यारे कई झूमते सहारे
छुट पाये तो ग़मों से छुट जा
लुट जा लुट जा यही दिन हैं किसी पे लुटा जा
तेरे सामने हैं प्यारे कई झूमते सहारे
छुट पाये तो ग़मों से छुट जा
लुट जा लुट जा

हो  ओ ओ ओ ओ हा आ आ आ आ
हो  ओ ओ ओ ओ हा आ आ आ आ

हो आस तेरी हो प्यास तेरी भड़केगी दबाने से
हो छेड़ गेसू थाम बाजू किसी दिलकश बहाने से
हो आस तेरी हो प्यास तेरी भड़केगी दबाने से
हो छेड़ गेसू थाम बाजू किसी दिलकश बहाने से
मेरे हबीब आ जा दिल के करीब आ जा
ए खुशनसीब आ जा मत शरमा

लुट जा लुट जा यही दिन हैं किसी पे लुटा जा
तेरे सामने हैं प्यारे कई झूमते सहारे
छुट पाये तो ग़मों से छुट जा
लुट जा लुट जा

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ

हो रात बाकी और साकी बड़ी नाज़ुक हसीना हैं
ओ छोड़ तौबा ओ तोड़ तौबा आज पीना है जीना है
हो रात बाकी और साकी बड़ी नाज़ुक हसीना हैं
ओ छोड़ तौबा ओ तोड़ तौबा आज पीना है जीना है
लहरा के जाम ले ले नाम-ए-खयाम ले ले
ज़रूरत से काम ले ले मत घबरा

लुट जा हो लुट जा यही दिन हैं किसी पे लुटा जा
तेरे सामने हैं प्यारे कई झूमते सहारे
छुट पाये तो ग़मों से छुट जा
लुट जा लुट जा यही दिन हैं किसी पे लुटा जा
तेरे सामने हैं प्यारे कई झूमते सहारे
छुट पाये तो ग़मों से छुट जा
लुट जा हो लुट जा
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
लुट जा
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Lut ja lut ja-Aankhen 1968

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