आँखों से आँख मिली-मिटटी में सोना १९६०
हैं. इसे लिखा है राजा मेहँदी अली खान ने. गीतकार का
नाम मदन मोहन के संगीत वाले गीतों के लिए ज़्यादा
जाना जाता है.
फिल्म से आप आशा भोंसले का गाया हुआ लोकप्रिय गीत
सुन चुके हैं इधर. प्रस्तुत गीत गाया है रफ़ी और आशा ने.
गौरतलब है रफ़ी और आशा के युगल गीतों की संख्या
लाता और रफ़ी के गाये ड्वेटस् से ज़्यादा है लगभग ढाई
गुना.
गीत का मसला पॉपुलर वाला है-मीठी नोक झोंक. रोमांटिक
नोक-झोंक भी कहा जा सकता है इसे.
गीत के बोल:
आँखों से आँख मिली
दिल से दिल टकराने दो
ना बाबा माफ़ करो देर
हुई घर जाने दो
आँखों से आँख मिली
दिल से दिल टकराने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो
क्यूँ इतना घबराती हो
हम जैसे दीवानों से
क्यूँ इतना घबराती हो
हम जैसे दीवानों से
शमा हूँ लेकिन डरती हूँ
तुम जैसे परवानो से
शमा हूँ लेकिन डरती हूँ
तुम जैसे परवानो से
परवाने को ज़ालिम
पास तो अपने आने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो
आँखों से आँख मिली
दिल से दिल टकराने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो
क्या इस दिल की हालत है
तुझको कुछ मालूम नहीं
क्या इस दिल की हालत है
तुझको कुछ मालूम नहीं
तुझको खूब समझती हूँ
मैं इतनी मासूम नहीं
तुझको खूब समझती हूँ
मैं इतनी मासूम नहीं
शर्मीली आँखों को
दिल पर तीर चलाने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो
आँखों से आँख मिली
दिल से दिल टकराने दो
ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो
कॉलेज की हर लड़की से
ज़िक्र तुम्हारा करता हूँ
कॉलेज की हर लड़की से
ज़िक्र तुम्हारा करता हूँ
सबसे यही कहते होगे
मैडम तुमपे मरता हूँ
सबसे यही कहते होगे
मैडम तुमपे मरता हूँ
अरे उल्फत में जो कुछ हो
मेरी कसम हो जाने दो
अरे ना बाबा माफ़ करो
देर हुई घर जाने दो
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Aankhon se aankh mili-Mitti mein sona 1960
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