कैसे भीगे भीगे-अपना घर १९६०
है जिसमें साईकिल गाती है. श्रेणी बनाने वालों की साइटों
से हमने ऐसा ही समझा, क्या किया जाए. वो तो हमें
भी समझ आ रहा है गाना किसने गाया मगर जब श्रेणी
बनाने के तरीके देखते हैं तो सर चकराता है. किसी गीत
में नायक ने सीधा हाथ ऊपर उठाया उसके लिए अलग
श्रेणी, उल्टा हाथ ऊपर उठाया उसके लिए अलग श्रेणी.
नायक नायिका साइकिल पर चले जा रहे हैं. किसी ज़माने
में साईकिल भी स्टेटस सिम्बल हुआ करती थी. प्रीति सागर
के पिताजी मोती सागर को भी किसी ज़माने में अभिनय
का शौक हुआ करता था. मल्हार, मक्खीचूस, बर्मा रोड,
छोटी छोटी बातें और अपना घर उनके अभिनय वाली कुछ
उल्लेखनीय फ़िल्में हैं.
सुनते हैं सुमन कल्यानपुर और रफ़ी का गाया गीत जिसे
लिखा है प्रेम धवन ने और इसकी धुन रवि ने बनाई है.
गीत के अंतरे से आपको अनाड़ी फिल्म के गीत का
अंतरा याद आएगा-वो चाँद खिला वो तारे हँसे.
गीत के बोल:
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
तुम साथ रहो जो मेरे
मैं राहें नई बना लूं
तेरी राहों के कांटे
अपनी पलकों से उठा लूँ
तुम साथ रहो जो मेरे
मैं राहें नई बना लूं
तेरी राहों के कांटें
अपनी पलकों से उठा लूँ
तू मेरा प्यार मेरी बहार
मेरा सिंगार सजना
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
इस दुनिया की नज़रों से
ओ दूर कहीं खो जाएँ
जी भर के जहां दिल झूमे
हम गीत मिलन के गायें
इस दुनिया की नज़रों से
ओ दूर कहीं खो जाएँ
जी भर के जहां दिल झूमे
हम गीत मिलन के गायें
सारे जग को छोड़
लिया तुझ से जोड़
जीवन ये मैंने अपना
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
हम इक मंज़िल के राही
बिछड़ेंगे कभी न मिल के
दुनिया वाले क्या जानें
अरमान हमारे दिल के
हम इक मंज़िल के राही
बिछड़ेंगे कभी न मिल के
दुनिया वाले क्या जानें
अरमान हमारे दिल के
कहो दिल की बात
दिन हो या रात
रहूँ तेरे साथ सजना
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
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Kaise bheege bheege-Apna ghar 1960
Artists: Moti Sagar, Nanda

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