यार मेरा पैसे का दीवाना-आखिरी डाकू १९७८
ज़रूरत आपको होती है वही उस समय नहीं होती. वही
चीज़ आपको अनुपलब्धता के चलते सबसे ज्यादा दुखी
करती है.
किसी ने कहा है-पैसा ही सब कुछ नहीं है मगर किसी
और प्रेक्टिकल किस्म के सयाने ने कहा है-पैसा सब कुछ
नहीं मगर ज़रूरतों को पूरी करने के लिए ज़रूरी है. रोड
पर चलते हुए सुबकने से बेहतर है मर्सीडीज़ में बैठ के
सुबकना. चीजों की टाइमिंग और प्लेसमेंट कितना मायने
रखता है. एक सड़ा हुआ पिज्ज़ा मूंगफली के ठेले पर
शायद ना बिके मगर वो किसी आलीशान रेस्तरां में बड़े
आराम से बिना अमूल माचो के बिक जायेगा. उस पर
परोसने वाले को टिप भी मिलेगी.
गीत की बात करते हैं. इसमें मसला गंभीर है मगर इस
गीत में नायिका इस बात को थोडा सहज भी बनाती है
आगे के अंतरे में. रेखा ही रेखा छाई हुई हैं पूरे गीत में.
दो चोटी वाली रेखा क्यूट और अडोरेबल दिखलाई दे रही
हैं. रणधीर कपूर फिल्म के एक्स्ट्रा कलाकार से दिखलाई
दे रहे हैं.
गीत के बोल:
बुरा अगर न माने तो सच बात कह दूं
बड़े लोग वो हैं जो दिल के बड़े हैं
ये सोना ये चांदी है भगवान जिनका
ज़माने में ऐसे तो लाखों पड़े हैं
यार मेरा पैसे का दीवाना
यार मेरा पैसे का दीवाना
और मैं दीवानी प्यार की प्यार की
पैसे को जिसने सब कुछ माना
वो जाने कदर ना यार की यार की
यार मेरा पैसे का दीवाना
जुल्मी को मिल क्या गए चार पैसे
देखो बदलने लगा वो रंग कैसे
जुल्मी को मिल क्या गए चार पैसे
देखो बदलने लगा वो रंग कैसे
दौलत का मुझपे वो यूँ रौब डाले
जाने कोई लाटसाहब हो जैसे
वो सोने और चांदी की शमा का परवाना
मैं पागल दिलदार के
यार मेरा पैसे का दीवाना
यार मेरा पैसे का दीवाना
ये दो दिन में तू क्या से क्या हो गया रे
भला आदमी था बुरा हो गया रे
ये दो दिन में तू क्या से क्या हो गया रे
भला आदमी था बुरा हो गया रे
ये बरसात दौलत की बरसी कहाँ से
कोई काम खोटा तो तूने किया रे
तू कागज़ के फूलों का सौदाई क्या जाने
रूत रंगीन बहार की
यार मेरा पैसे का दीवाना
और मैं दीवानी प्यार की प्यार की
पैसे को जिसने सब कुछ माना
वो जाने कदर ना यार की यार की
यार मेरा पैसे का दीवाना
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Yaar mera paise ka deewana-Akhiri Daku 1978
Artists: Rekha, Randhir Kapoor
