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Jul 12, 2020

मैं पीतल की पायलिया भी-कसम खून की १९७७

आज हिंदी फिल्म जगत की कई हस्तियों के जन्मदिन हैं जिनमें
से प्रमुख है निर्देशक बिमल रॉय और अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित.

बिमल रॉय को तो लगभग सभी गंभीर सिने प्रेमियों ने याद किया
ही होगा आज अपने अपने तरीके से अतः हम सुलक्षणा पंडित को
याद कर लेते हैं. आज वो काफी कष्ट में हैं और ईश्वर से यही
प्रार्थना है कि उन्हें स्वस्थ और चलने फिरने लायक रखे.

७० और ८० के दशक की प्रमुख अभिनेत्रियों में से एक सुलक्षणा
का फ़िल्मी कैरियर बतौर अभिनेत्री उलझन से शुरू हुआ. १९७१ की
फिल्म दूर का रही के लिए उन्होंने एक गीत गाया था. डबिंग
आर्टिस्ट के तौर पर उन्होंने संगीतकारों के साथ काम किया प्लेबैक
में पदार्पण के पहले. सन १९६७ की फिल्म तकदीर के गाने में भी
उनकी आवाज़ है-पप्पा जल्दी आ जाना.

एकमात्र फिल्मफेयर उन्हें अभिनय के लिए बल्कि गायकी के लिए
दिया गया-१९७५ की फिल्म संकल्प के एक गाने के लिए.

आज सुनते हैं सन १९७७ की फिल्म कसम खून की से अपने समय
में खूब बजा हुआ गाना जिसे लता मंगेशकर ने गाया है. इस गीत
को लिखा है अनजान ने और इसकी धुन तैयार की है संगीतकार
जोड़ी कल्याणजी आनंदजी ने.



गीत के बोल:

मैं पीतल की पायलिया
मैं पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
सोने का भाव सोने का भाव गिर जाये
शीशे का भी नग जो चढ़ा लूँ नथनिया में
शीशे का भी नग जो चढ़ा लूँ नथनिया में
हीरे का भाव हीरे का भाव गिर जाये
पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में

मेरा सिंगार यही सूरत है मेरी
मेरा सिंगार यही सूरत है मेरी
सूरत भी क्या ख़ूबसूरत है मेरी
गहनों की मुझको ज़रूरत नहीं है
गहनों की मुझको ज़रूरत नहीं है
गहनों को शायद ज़रूरत हो मेरी
मैं अंग अपने जिसको सजा लूं
उसका नसीब खिल जाये

पीतल की पायलिया
मैं पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
सोने का भाव सोने का भाव गिर जाये
पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में

ये प्यार मेरा तूझे महँगा पड़ेगा
ये प्यार मेरा तूझे महँगा पड़ेगा
तू मोल क्या मेरे दिल का चुकाये
वो हार मेरे गले का बनेगा
वो हार मेरे गले का बनेगा
जो प्यार में जान पर खेल जाये
मेरी नज़र से गिर जाये जो दिल
शोलों में वो ही घिर जाये

पीतल की पायलिया
मैं पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
सोने का भाव सोने का भाव गिर जाये
पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
शीशे का भी नग जो चढ़ा लूँ नथनिया में
शीशे का भी नग जो चढ़ा लूँ नथनिया में
हीरे का भाव हीरे का भाव गिर जाये
पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
………………………………………………
Main peetal ki payaliya bhi-Kasam khoon ki 1977

Artists: Sulakshana Pandit, Amjad Khan

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Jul 11, 2020

अपनों में मैं बेगाना-बेगाना १९८६

बॉलीवुड में आज भी कई लोगों का जन्मदिन है. इनमें से
के हैं कुमार गौरव. कुमार गौरव ने फिल्म लव स्टोरी से
धमाकेदार एंट्री की थी बॉलीवुड में. उसके बाद कुछ और
समय तक वे अपने जलवे दिखाते रहे मगर किस्मत का
कहना कुछ और था और प्रसिद्धि और पैसा उन्हें नहीं मिला.

आज सुनते हैं सन १९८६ की फिल्म बेगाना से किशोर कुमार
का गाया एक बढ़िया गीत जिसे अनजान ने लिखा है और
धुन अन्नू मलिक ने तैयार की है. फिल्म का निर्देशन किया
है अम्बरीश संगल ने.



 
गीत के बोल:

नादाँ नासमझ पागल दीवाना
सबको अपना माना तूने
मगर ये न जाना

मतलबी हैं लोग यहाँ पर मतलबी ज़माना
सोचा साया साथ देगा निकला वो बेगाना
बेगाना बेगाना
अपनों में मैं बेगाना बेगाना

खुशियां चुरा के गुज़रे वो दिन
कांटे छुपा के बिछड़े वो दिन
आँखों से आँसू बहने लगे
बहते ये आंसू कहने लगे
ये क्या हुआ ये क्यों हुआ
कैसे हुआ मैंने न जाना

मतलबी हैं लोग यहाँ पर मतलबी ज़माना
सोचा साया साथ देगा निकला वो बेगाना
बेगाना बेगाना
अपनों में मैं बेगाना बेगाना

ज़िन्दा है लाशें मुर्दा ज़मीं है
जीने के काबिल दुनिया नहीं है
दुनिया को ठोकर क्यूं न लगा दूं
खुद अपनी हस्ती क्यूं न मिटा दूं
जी के यहाँ जी भर गया
दिल अब तो मरने का ढूंढे बहाना

मतलबी हैं लोग यहाँ पर मतलबी ज़माना
सोचा साया साथ देगा निकला वो बेगाना
बेगाना बेगाना
अपनों में मैं बेगाना
.................................................................
Apnon mein main begana-Titlesong 1986

Artist: Kumar Gaurav

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Jun 22, 2020

माशूका माशूका-आज का अर्जुन १९९०

आज ही के दिन रंगकर्मी, बॉलीवुड के मशहूर खलनायक और
चरित्र अभिनेता अमरीश पुरी का जन्म नवांशहर में हुआ था.
अमरीश पुरी ने हिंदी फिल्मों पर ऐसी गहरी छाप छोड़ी है कि
उसे फिल्म बनाने वाले और देखने वाले समान रूप से याद
रखेंगे बरसों तक.

सन १९७९ में संगीत नाटक अकादमी अवार्ड पाने वाले पुरी
फिल्मों में १९७० से आये. सन १९७५ की फिल्म निशांत में
उनके दमदार अभिनय ने जनता का ध्यान उनकी ओर खींचा.
फिल्म के साथ विजय तेंदुलकर और सत्यदेव दुबे का नाम भी
जुड़ा है. सत्यदेव दुबे के नाटकों में पुरी काम करते रहे थे.

अमरीश पुरी को हमने फिल्म गहराई से पहचाना. फिल्म हम
देखने गए थे श्रीराम लागू और अनंत नाग की वजह से. निशांत
फिल्म हमें उसी साल देखने को मिली बाद में.

चर्चा बाद में और कर लेंगे. एक गाना सुनते हैं आज का अर्जुन
फिल्म से जिसमें अमरीश पुरी की आवाज़ है. अनजान के लिखे
गीत में प्रमुख आवाजें हैं अलका याग्निक और बप्पी लहरी की.
गीत का संगीत बप्पी लहरी ने तैयार किया है.



गीत के बोल:

माशूका माशूका
इसके आगे के बोल समझ नहीं आ रहे हैं.
कल मिलते हैं.
....................................................................
Mashooka mashooka-Aaj ka Arjun 1990

Artists: Jaya Prada, Amrish Puri

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Jun 7, 2020

मोहब्बत के दुश्मन-चमेली की शादी १९८६

फिल्मों में नाटकीयता तो पाई ही जाती है मगर नौटंकी के
अंश भी पाये जाते हैं. नौटंकी आम भाषा में थियेटर को भी
बोला जाता है. गांव के साथ ये शब्द ज्यादा जुडा हुआ है.

फिल्म चमेली की शादी की कहानी चुस्त है और उसमें सीन
बदलने की रफ़्तार औसत से बेहतर है जो दर्शकों को बांधे
रखने की बड़ी वजह है. हमें सिनेमा की जितनी समझ है
उस अनुसार हम बतला देते हैं. क्रिटिकल ऐक्लैम, रिक्लेम
हमारी समझ में नहीं आता.

फिल्म में बादशाही सल्तनत को याद करते हुए ये गाना
फिल्माया गया है. शायद ये सलीम अनारकली के प्रेम के
प्रतीक के सबसे नज़दीक है, मेरे ख्याल से. ये एक खयाली
विचार जैसा है और जिसमें नायक के साथी दरबारियों में
तब्दील हो जाते हैं. गीत शुरू होते ही जिस मकान में वे
घुसते हैं उसके सामने की दीवार पे भगंदर का इलाज जैसा
कुछ लिखा होता है. ऐसे प्रतीक बारीकी से सिनेमा देखने
वाले ही देख और समझ पाते है.

गीत अनजान रचित है जिसे अनवर ने गाया है. इसकी धुन
तैयार की है कल्याणजी आनंदजी ने.

गीत अनिल कपूर, पंकज कपूर और अमृता सिंह पर फिल्माया
गया है.




गीत के बोल:

फिर कोई बना मुग़ले आज़म
फिर कैद हुई अनारकली
पर आज सलीम झुकेगा नहीं
देखेगी तमाशा सारी गली

मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
बुझाये बुझे ना मोहब्बत के शोले
बुझाये बुझे ना मोहब्बत के शोले
ऐ जालिम अगर तू समुन्दर भी ले आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ

मोहब्बत को कोई तिज़ारत समझ के
या पत्थर की कोई ईमारत समझ के
ये ना सोच
ये ना सोच बाजार में बेच देगा
ये सौदा बहुत तुझको महँगा पड़ेगा
जो बिक जाये वो होश-ए-मोहब्बत नहीं हैं
मोहब्बत नहीं हैं मोहब्बत नहीं हैं
जो बिक जाये वो होश-ए-मोहब्बत नहीं हैं
मोहब्बत है इबादत मोहब्बत है पूजा

मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ

सितम ऐसे पहले भी तो हो चुके हैं
दीवाने मगर किसके आगे झुके हैं
दिलों पे न तेरी हुकूमत चलेगी
मोहब्बत ये ज़ंजीरो में न बँधेगी
फतह कर सके जो मोहब्बत की दुनिया
मोहब्बत की दुनिया मोहब्बत की दुनिया
फतह कर सके जो मोहब्बत की दुनिया
अगर कहीं हो वो सिकंदर भी ले ए

मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ

ये जोश-ए-जूनून जब बग़ावत पे आये
कटे तो कटे सर झुके न झुकाये
सितमगर है आया बुरा वक्त तेरा
दीवाना उलट देगा ये तख़्त तेरा
जो सर काट दे दिल के जोश-ए-जूनून का
दिल के जोश-ए-जूनून का दिल के जोश-ए-जूनून का
जो सर काट दे दिल के जोश-ए-जूनून का
जोश-ए-जूनून का जोश-ए-जूनून का
जो सर काट दे दिल के जोश-ए-जूनून का
अगर मिल सके तो वो खंजर भी ले आ

मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
बुझाये बुझे न मोहब्बत के शोले
ऐ जालिम अगर तू समुन्दर भी ले आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
ज़रा होश में आ
मोहब्बत के दुश्मन ज़रा होश में आ
ज़रा होश में आ
………………………………………..
Mohabbat ke dushman-Chameli ki shadi 1986

Artists: Pankaj Kapoor, Anil Kapoor, Amrita Singh

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Jun 6, 2020

उत्तर आई अखाड़े में-चमेली की शादी १९८६

इंसान को दो हाथ इसलिए दिये गए हैं कि वो उन्हें चला कर,
मेहनत कर के अपना पेट पाल सके. चलाना कैसे है उसके लिए
दिमाग दिया हुआ है. कभी कभी हाथ अपनी रक्षा और कुछ
विशेष हासिल करने के लिए भी चलाने पड़ते हैं.

फिल्म चमेली की शादी में नायक को नायिका आसानी से नहीं
मिलती. तरह तरह के दांव पेच, कुश्ती, ढिशुम ढिशुम, गायन,
नृत्य इत्यादि के बाद उसे मन का मीत प्राप्त होता है. अखाड़े
में नायिका जैसे दृश्य हमने डब्लू डब्लू एफ के महिला संस्करण
में ही देखे और वो भी ९० के बाद, जहाँ तक मेरा अनुमान ठीक
है. पुरुष प्रधान फ़िल्मी कथानकों में ऐसा देखने को मिला नहीं.

बहुत से लोगों का ऐसा मानना है कि वे मनुष्य योनि में पैदा
हो गये तो दो वक्त की रोटी और अन्य सुविधाओं पर उनका
जन्मसिद्ध अधिकार हो गया. वे हाथ पैर मारें या ना मारें उन्हें
भोजन मिलना चाहिए.

आसानी से मिलने वाली चीज़ों में प्रकृति द्वारा प्रदान वस्तुएं
जैसे पेड़ से स्वतः गिरे बेर, पक्षियों के खाए बेर ही मिला करते
हैं. इनमें आपके पास चॉईस नहीं होती. ताजा कोई चीज़ खानी
है तो पेड़ पर चढ़िये या तोड़ने का कोई जुगाड कीजिये तभी
प्राप्त होगा.

सहज कॉमेडी की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए निर्देशक ने इसमें
अपनी पिछली फिल्मों की तुलना में कुछ अनूठे प्रयोग किये हैं.
अनूठा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि ऐसे कुछ प्रयोग श्वेत श्याम
युग की कुछ फिल्मों में भी हैं मगर समय की धूल भरी आंधी
में कई चीज़ें दब चुकी हैं बॉलीवुड की. कोशिश जारी है उन पर
से धूल हटाने की मगर पिछले दशकों में इतना कुछ सामने आ
चुका है कि ये प्रयत्न अपर्याप्त या यूँ कहें ऊँट के मुंह में जीरे
के समान लगता है. उसके अलावा स्वयं बॉलीवुड पुराने माल
को सहजने के प्रति गंभीर नहीं है.

सुनते हैं ये गीत मेल-फीमेल कुश्ती वाला जो अनजान का लिखा
हुआ है. कल्याणजी आनंदजी के संगीत निर्देशन में इसे गाया है
आशा भोंसले ने.



गीत के बोल:

अरे आ आ
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी
अरे दम है तो
अरे दम है तो आ कर ले
प्यार में पहलवानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी

हो पंजा लड़ा की ना मारूं रे तुझको
नैना मिला के मैं मारूं
रसिया रे नैना मिला के मैं मारूं
प्यार का ऐसा दांव लगाऊँ
दंगल का भूत उतारूं
सर से दंगल का भूत उतारूं
मिल जायेगी
ओ मिल जाएगी मिटटी में
यहाँ तेरी जवानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी

हो पी के यहाँ भांग आ संग मेरे
तूफां में तू भी उतर जा
रसिया रे तूफां में तू भी उतर जा

ये इश्क शोलों का दरिया है तो क्या
आ डूब के पार कर जा
प्यारे आ डूब के पार कर जा
पार तुझको
ऐ पार तुझको लगा देगी
तेरी प्रेम दीवानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी

हो सजना ओ सजना
मैंने यहाँ सेज फूलों की सजना
तेरे लिए हैं सजाई
हो ओ ओ सारे ज़माने को ठोकर लगा के
तुझसे लगन है लगाई
मैंने तुझसे लगन है लगाई
आ भी जा
अरे आ भी जा बाहों में
छोड़ दे आनाकानी
उतर आई अखाड़े में
तेरे सपनों की रानी
अरे दम हैं तो आ
कर ले प्यार में पहलवानी
……………………………………..
Utar aayi akhade mein-Chameli ki shadi 1986

Artists: Anil Kapoor, Amrita Singh

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Jun 5, 2020

तू जहाँ भी चलेगा-चमेली की शादी १९८६

क्या करें प्यार में तोतापरी आम भी अल्फांसो नज़र आता है.
अब इसका कोई हल नहीं है. ये तो फ्रीक्वेंसी मिलान की बात
है. मिले ससुर मेरा तुम्हारा. मेड फॉर ईच अदर.

फिल्म चमेली की शादी की कहानी फ़िल्मी नाटकीयता से भरी
होने के बावजूद इर्द गिर्द की कहानी जैसी ही लगती है. आप
इसके कथानक में जैसे ही खोने लगते हैं, कोई गीत झटका मार
की आपकी तंद्रा भंग कर देता है और आप समझ जाते हैं कि
ये फिल्म ही है जो आप देख रहे हैं.

चमेली के गुणगान वाला एक और गीत है इस फिल्म में जिसे
परदे पर स्वयं चमेली गा रही है और आशा भोंसले परदे के पीछे.
गीत अनजान रचित है और संगीतकार वही हैं जो पिछले गीत
के लिए थे.

ये आम गीतों की तरह नहीं है. फ़िल्मी बरसात में रोमांस के
साथ ढिशुम ढिशुम भी है और नायक नायिका दोनों इसमें अपने
अपने तरीके से गुंडों से निपट रहे हैं. प्यार में वो तासीर है के
अकड़े जोड़ भी खुल जाते हैं. गीत के अंत में नायक यकायक
ज़ोरों से नाचना शुरू कर देता है और नायिका आश्चर्यचकित हो
जाती है ये अच्च्म्भा देख कर.



गीत के बोल:

तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
हो तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी
ओ जी सकेगी न तुझ बिन अकेली
जी सकेगी न तुझ बिन अकेली
मेरे सजना ये तेरी चमेली चमेली
तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी

सजना सजना सजना
जिधर देखती हूँ उधर तू ही तू है
हर एक शय में आता नज़र तू ही तू है
जिधर देखती हूँ उधर तू ही तू है
हर एक शय में आता नज़र तू ही तू है
दिल की आहों में तू दिल ही राहों में तू
मेरी बाहों में तू है निगाहों में तू
मेरी रातों में नींदो में ख्वाबों में तू
जी सकेगी ना
जी सकेगी ना तुझ बिन अकेली
मेरे सजना ये तेरी चमेली चमेली

तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी

सजना सजना सजना
ये माना ज़माना बड़ा बेरहम है
तुझे मुझसे छीने यहाँ किसमें दम है
ये माना ज़माना बड़ा बेरहम है
तुझे मुझसे छीने यहाँ किसमें दम है
हो करम या सितम हंस के झेलेंगे हम
प्यार होगा न कम टूटेगी न कसम
हर जनम में तू ही होगा मेरा सनम
जी सकेगी ना
जी सकेगी ना तुझ बिन अकेली
मेरे सजना ये तेरी चमेली चमेली

तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी
जी सकेगी न तुझ बिन अकेली
मेरे सजना ये तेरी चमेली चमेली
तू जहाँ भी चलेगा चलूँगी
तेरा दुःख दर्द मैं बाँट लूंगी
…………………………………………….
Too jahan bhi chalega chaloongi-Chameli ki shadi 1986

Artists: Anil Kapoor, Amrita Singh

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Jun 4, 2020

चमेली की शादी-शीर्षक गीत १९८६

आने जाने के सिलसिले में बॉलीवुड को एक और आघात
लगा बासु चटर्जी के अवसान से. दर्शकों के चहेते निर्देशक
बासु चटर्जी हालंकि काफी समय से फिल्म निर्देशन और
निर्माण से दूर रहे मगर उनकी उपस्थिति से शायद फिल्म
उद्योग के कल्पनाशील कलाकारों को बल ज़रूर मिलता था.

उनके योगदान को फ़िल्मी टेक्स्ट बुक के एक चैप्टर जैसा
समझा जा सकता था. अपने समकालीनों से वे कुछ मायनों
में अलग थे और वो है दर्शकों से जुड़ाव. उनकी फिल्मों से
दर्शक कब बंध जाता है उसे मालूम ही नहीं पड़ता है.

फिल्मों की सार्थकता एक गंभीर विषय है और उस पर
गंभीरता से कार्य करने वाले कुशल चितेरे बिरले ही हुए हैं
हम देश के सम्पूर्ण सिनेमा कि बात कर रहे हैं यहाँ पर.
सिनेमा केवल बॉलीवुड का नाम नहीं है उससे परे भी एक
दुनिया है जिसमें टी वी भी आता है. धारावाहिक एक और
माध्यम है अभिव्यक्ति का जो आज के समय में जनता से
ज्यादा जुडा है.

कुछ पोस्ट पहले ही हमने उन्हें याद किया था जब फिल्म
उस पार के गाने का जिक्त किया था. साहित्य से वे जुड़े
रहे और उनकी अधिकाँश फिल्मों के कथानक के मूल में
अच्छा साहित्य है. उन्होंने लेखक राजेंद्र यादव के उपन्यास
प्रेत बोलते हैं पर फिल्म बनाई-सारा आकाश जिसके संवाद
कमलेश्वर ने लिखे थे तो मन्नू भंडारी की कहानी यही सच है
पर रजनीगंधा फिल्म बनाई. ये संयोग हो सकता है कि
साहित्यकार पति-पत्नी दोनों की रचनाओं पर उन्होंने काम
किया.

अंग्रेजों के ज़माने से सरकारी दफ्तरों से आबाद, मध्यम वर्ग
और नौकरीपेशा लोगों के शहर अजमेर में जन्मे बासु चटर्जी
ने मध्यम वर्ग और उनकी जीवनचर्या पर काफ़ी फ़िल्में बनाईं.

दूरदर्शन के ज़माने में रजनी और ब्योमकेश बक्षी धारावाहिकों
ने काफ़ी प्रशंसा प्रसिद्धि अर्जित की. ये इस बात का प्रतीक है
कि शिद्दत से और समर्पण से किया गया कार्य किसी भी जगह
और माध्यम पर अपना रंग ज़रूर दिखाता है. सरलता भी ज़रूरी
है. दांत मांजने के लिए आपको जिमनास्टिक्स दिखलाने की
आवश्यकता नहीं है. सर्कस करने से दांत ज्यादा साफ होते हैं
ऐसा किसी वैज्ञानिक या डॉक्टर ने अभी तक कहीं नहीं लिखा.

बासु चटर्जी की फ़िल्में रजनीगन्धा और चितचोर की तो सभी बातें
किया करते हैं अतः हम उन फिल्मों के विवरण यहाँ रिपीट नहीं
करना चाहेंगे सिवाय इस बात के कि चितचोर का रीमेक जैसा
राजश्री ने मैं प्रेम की दीवानी हूँ में बनाया मगर वो समय की
कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया.

९० के दशक में उनकी एक फिल्म आई थी गुदगुदी जिसका
कथानक तो अच्छा था मगर उसके प्रभावशाली से नायक की
लुल्ल्पन वाली कॉमेडी ने फिल्म का प्रभाव कम कर दिया. इस
रोल में शायद फारूक शेख जैसा कलाकार ज्यादा उपयुक्त होता.
ढंग की कॉमेडी शायद अभी तक पब्लिक के समझ आई नहीं.
इन सब नामचीनों से तो राजपाल यादव बेहतर कर लेता है.
निर्देशक कभी कभी अपने आप को कितना असहाय मह्सूस
करता होगा जब उसे अपने मन माफिक काम या कलाकार ना
मिले.

हम याद करेंगे चमेली की शादी फिल्म को जिसे सभी वर्ग के
दर्शकों की सराहना मिली थी और सिनेमा हॉल का दृश्य भी उस
फिल्म के समय काफ़ी रोचक हो जाया करता था. पहलवानी और
ब्रह्मचारी चरणदास उर्फ अनिल कपूर, चरणदास के गुरु पहलवानी
के उस्ताद ओम प्रकाश, कल्लूमल कोयले वाला, उसकी बेटी चमेली,
कल्लूमल की बीबी के रोल में भारती अचरेकर, वकील के रोल में
अमजद खान, चरणदास के भाई के रोल में सत्येन कप्पू, भूतनी के
संवाद बोलने वाले अन्नू कपूर और राम सेठी जो अमिताभ की
फिल्मों के आवश्यक हिस्सा होते थे किसी समय प्यारेलाल के रूप
में, इन सभी के अभिनय ने इस फिल्म को यादगार बना दिया.
इस फिल्म के गीत खूब चले और बजे. 

फिल्म से सुनते हैं शीर्षक गीत जिसे अनिल कपूर और कोरस ने
गाया है. अनजान की रचना है और कल्याणजी आनंदजी का संगीत.



गीत के बोल:

सब्र का फल मीठा होता है
बाद में पढ़ लेना
.
.
.
.
........................................................
Chameli ki shadi-Titlesong

Artists: Anil Kapoor

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Apr 8, 2020

ओ रेखा तुम्हें देखा जबसे-नया बकरा १९७९

कुछ गाने दिमाग में अमिट सी छाप छोड़ जाते हैं.
एक गाना है फिल्म नया बकरा से. इसमें मुखड़े की
पंक्ति के साथ कुछ अनूठी आवाजें हैं.

किसी ज़माने में हमारे मोहल्ले में भी रेखा नाम की
लड़की हुआ करती थी. उस देख कर एक मजनू इस
गाने को मय संगीत के गाया करता.  वो ट्यूं ट्यूं की
आवाजें आज भी दिमाग में वैसी ही फिट हैं.

सुनाते हैं आपको वो गीत जो कव्वाली की शक्ल में है.
इसे रफ़ी और आशा ने गाया है. अनजान के बोल और
के बाबूजी का संगीत है.

प्रस्तुत गाना रेखा और जीतेंद्र पर फिल्माया गया है.
गीत के बोल कुछ कुच्छ विनोद मेहरा और रेखा के
निजी जीवन में आई उथल पुथल की और इशारा
करते हैं. इस गाने में जीतेंद्र और रेखा बतौर मेहमान
कलाकार दिखाई दिये हैं.

हम अपने आलेखों में गॉसिप कंटेंट को कम रखते है
उसकी वजह फोकस संगीत पर रहे तो ज्यादा बेहतरहै.
ऊपर के विषय से सम्बंधित दो लिंक हम आपको देते हैं.
एक में चप्पल का जिक्र है और एक में सैंडल का. कल
को कोई जूते-डंडे का जिक्र भी करेगा.

अज्ञात और ज्ञात में से क्या प्रस्तुत किया जाये ये एक
विचारणीय विषय है मगर लोकप्रियता बढ़ाने के लिए
मसाला ज़रूरी है और व्यूज़ और लाइक्स से काफ़ी बढती
है. दूसरा पहलू एक ये भी है इन सब से सितारे चर्चा में
बने रहते हैं चाहे वजह जो भी हो. बदनाम होंगे तो क्या
नाम ना होगा?

ये हैं लिंक:

चप्पल लिंक

सैंडल लिंक

रेखा का राज़-तबस्सुम

तबस्सुम वाले वीडियोज को हम थोडा औथेन्टिक मानते
हैं क्यूंकि वे फिल्म उद्योग से जुडी रहीं और उनके वीडियो
में अतिरेक नहीं देखा हमने किसी भी विषय पर. वे
दूरदर्शन से जुडी रहीं इस वजह से उन्हें विषय को सार
गर्भित और व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने की आदत
है.




गीत के बोल:

ओ रेखा तुझे देखा जबसे देखा जबसे
दिल तेरे नशे में चूर हुआ हाँ चूर हुआ
ओ देख तूने दिल जीत लिया जीत लिया
दिल जीत के फ़िर क्यूँ दूर हुआ क्यूँ दूर हुआ
दिल तेरे नशे में चूर हुआ
दिल जीत के फ़िर क्यूँ दूर हुआ
क्यूँ तेरे नशे में चूर हुआ
क्यूँ दिल से मेरे तू दूर हुआ

बाकी के बोलों के लिए इंतज़ार करें.
…………………………………………….
O Rekha tujhe dekha jabse-Naya Bakra 1979

Artists: Jeetendra, Rekha

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Feb 13, 2020

ये फासले ये दूरियां-ज़मीन आसमान १९८४

कुछ चीज़ें जीवन में नहीं मिला करतीं जैसे कि
ज़मीन और आसमान. रेल की पटरियां भी साथ
साथ निश्चित दूरी पर रहती हैं मगर उनका मेल
नहीं होता. तेल और पानी का संगम नहीं होता
मगर इमल्शन बन जाता है जो मलहम की शक्ल
ले लेता है. हो सकता है ज़मीन आसमान भी गर
मिलते तो मरहम का काम करते.

अंधे के हाथ बटेर लगना या किसी फटीचर को
अमीर बाप की लौंडिया मिल जाए तो उसे किस्मत
का चमत्कार या करिश्मा कह लेते हैं. अपवाद
कुछ हो सकते हैं मगर सामान्यतः असम्भव सी
लगने वाली चीज़ें उपलब्ध नहीं होती. फिल्मों में
सब कुछ उल्टा पुल्टा हो जाता है मगर आम
आदमी के जीवन में न्यूटन का सेब उसके बुझे
अरमानों की तरह ज़मीन पर ही गिरता है.

सुनते हैं अनजान की एक रचना लता मंगेशकर
की सुरीली आवाज़ में जिसकी धुन तैयार की है
राहुल देव बर्मन ने. वीडियो गीत में सिर्फ एक
अन्तर है और वो काफी है आपको अभिनेत्री रेखा
के अभिनय कौशल से परिचित करने के लिए.



गीत के बोल:

ये फासले ये दूरियां कैसी हैं ये मजबूरियां
मिल के भी क्यूँ आखिर यहाँ
ज़मीन आसमान नहीं मिलते
ये फासले ये दूरियां कैसी हैं ये मजबूरियां
मिल के भी क्यूँ आखिर यहाँ
ज़मीन आसमान नहीं मिलते

जाने क्या है ये बेबसी
बस ना किसी का चले
हो ओ ओ सदियों से बदले नहीं
कुदरत के फैसले
क्यूँ है जुदा दोनों जहाँ
मिल के भी क्यूँ आखिर यहाँ
ज़मीन आसमान नहीं मिलते

ये फासले ये दूरियां कैसी हैं ये मजबूरियां
मिल के भी क्यूँ आखिर यहाँ
ज़मीन आसमान नहीं मिलते

आँचल में फूल क्या खिले
होंठों की हंसी छीन ले
हो ओ ओ कैसे हो के लौटे जुदा
शमा ये जलती रहे
तनहा नहीं क्यूँ ये जिस्म जान
मिल के भी क्यूँ आखिर यहाँ
ज़मीन आसमान नहीं मिलते

ये फासले ये दूरियां कैसी हैं ये मजबूरियां
मिल के भी क्यूँ आखिर यहाँ
ज़मीन आसमान नहीं मिलते

आहों में अगर हो असर
मुमकिन है फिर क्या नहीं
हो ओ ओ चूमे ज़मीन के कदम
ये आसमान भी कहीं
एक दिन मिले दोनों जहाँ
कैसे कहे कोई यहाँ
ज़मीन आसमान नहीं मिलते

ये फासले ये दूरियां कैसी हैं ये मजबूरियां
मिल के भी क्यूँ आखिर यहाँ
ज़मीन आसमान नहीं मिलते
……………………………………………..
Ye faasle ye dooriyan-Zameen Aasman 1984

Artists: Rekha

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Feb 12, 2020

मैं दीवाना दिल दीवाना-ज़मीन आसमान १९८४

हम गाने क्यूँ देखते हैं और सुनते हैं उसकी मुख्य
वजह मनोरंजन है. कभी कभी गानों से ज्ञानार्जन
भी हो जाता है. दुःख भंजन भी हो जाता है. कितने
काम के हैं ये गाने.

आपने विंटेज कार या तांगा नहीं देखा है तो इस गाने
को एक बार देख लें. नायक नायिका तरह तरह की
सवारी का लुत्फ़ लेते हुए चौपाटी पर पहुँच जाते हैं.

अनजान का गीत है, आर डी बर्मन का संगीत और
इसे किशोर कुमार ने गाया है.



गीत के बोल:

मैं दीवाना दिल दीवाना तू दीवानी या या
मानो मानो या ना मानो मेरी जान
मेरे जैसा दिल जवान होगा कोई ना यहाँ
मानो मानो या ना मानो मेरी जान
मेरे जैसा दिल जवान होगा कोई ना यहाँ

हर मोड पे दिल से दिल कैसे टकरा गया
समझो तो किस्मत का आखिर इशारा है क्या
हर मोड पे दिल से दिल कैसे टकरा गया
समझो तो किस्मत का आखिर इशारा है क्या
दो दिलों की दोस्ती ये
दो दिलों की दोस्ती ये है पुरानी या या
मानो मानो या ना मानो मेरी जान
मेरे जैसा दिल जवान होगा कोई ना यहाँ
मानो मानो या ना मानो मेरी जान
मेरे जैसा दिल जवान होगा कोई ना यहाँ

सूरत ये आँखों से दिल में उतरती गई
बातों ही बातों में ये बात बढती गई
अजी सूरत ये आँखों से दिल में उतरती गई
बातों ही बातों में ये बात बढती गई
बेइरादा बन गई है
बेइरादा बन गई है क्या कहानी या या
मानो मानो या ना मानो मेरी जान
मेरे जैसा दिल जवान होगा कोई ना यहाँ
मानो मानो या ना मानो मेरी जान
मेरे जैसा दिल जवान होगा कोई ना यहाँ

जाने तमन्ना मेरे दिल को पहचान लो
बेंतर यही है के साथी मुझे मान लो
जाने तमन्ना मेरे दिल को पहचान लो
बेंतर यही है के साथी मुझे मान लो
दिल मिलें तो झूम जाये
दिल मिलें तो झूम जाये जिंदगानी या या
हे मानो मानो या ना मानो मेरी जान
मेरे जैसा दिल जवान होगा कोई ना यहाँ
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
………………………………………………………
Main deewana dil deewana-Zameen aasman 1984

Artists: Sanjay Dutt, Anita Raj

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Feb 9, 2020

प्यार नगमा है-ज़मीन आसमान १९८४

प्यार क्या है-ऐसे बोल वाले या जिन गीतों के
मुखड़े में ऐसे शब्द आते हैं हमने आपने खूब सुने
हैं. प्यार की परिभाषा के निर्धारण में ऐसे जुमले
बड़े काम आते हैं.

प्यार एक बुखार है तो कभी ये आम का अचार है.
किसी ने कहा-ये खट्टा-मीठा भी होता है. प्यार न
हुआ पकी हुई केरी या इमली हो गई.

सुनते हैं अनजान का लिखा हुआ गीत सन १९८४ की
फिल्म ज़मीन आसमान से. इसे आशा भोंसले और
स्वयं संगीतकार ने गाया है.

ये है तमाचा सोंग. गीत के अंत में नायक के गालों
पर छपाई हो जाती है. 



गीत के बोल:

हो प्यार नगमा है प्यार सरगम है
प्यार नगमा है प्यार सरगम है
ये तराना सदियों पुराना फिर भी लगे नया
हो प्यार नगमा है प्यार सरगम है
ये तराना सदियों पुराना फिर भी लगे नया
प्यार नगमा है प्यार सरगम है
हो ओ ओ ओ प्यार नगमा है प्यार सरगम है

जब दिल हुए जवां आँखें मिली जहां
आँखों ही आँखों में छलका कोई नशा
हो ओ ओ ओ जब दिल हुए जवां आँखें मिली जहां
आँखों ही आँखों में छलका कोई नशा
प्यार सकी है प्यार पागल है
जिसने है पिया उसको है पता इसमें नशा है क्या
हो ओ ओ ओ प्यार नगमा है प्यार सरगम है

दुनिया लगे हंसी प्यारा लगे समा
बाहों में झूमे जो साथी कोई यहाँ
हो दुनिया लगे हंसी प्यारा लगे समा
बाहों में झूमे जो साथी कोई यहाँ
प्यार जन्नत है प्यार राहत है
जिसको है मिला उसको है पता इसमें मज़ा है क्या
हो प्यार नगमा है प्यार सरगम है

प्यार अच्छा है प्यार प्यारा है
अरे प्यार अच्छा है हाँ हाँ ना प्यार प्यारा है
जिसने ना किया उसको क्या पता होता है प्यार क्या
अरे प्यार अच्छा है अरे प्यार प्यारा है

आहें कोई भरे अरे कोई जिए मरे
लोगों पे होता है इसका असर कहाँ
अरे कब तक उठायें गम क्या क्या सहें सितम
दीवाने दिल की कोई कीमत नहीं यहाँ
अरे प्यार अच्छा है प्यार प्यारा है
हाँ हाँ ना प्यार अच्छा है अरे प्यार प्यारा है
जिसने ना किया उसको क्या पता होता है प्यार क्या
हे हे हे हे प्यार अच्छा है अरे प्यार प्यारा है
प्यार अच्छा है
…………………………………………………………
Pyar nagma hai-Zameen Aasman 1984

Artists: Kalpana Iyer, Sanjay Dutt

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Jan 24, 2020

मैंने दिल दिया दिल दिया-ज़मीन आसमान १९८४

सन १९८४ की फिल्म ज़मीन आसमान से एक युगल
गीत सुनते हैं जिसे संजय दत्त और अनिता राज पर
फिल्माया गया है. हीरो बुलेट पर सवार है और हीरोईन
फिएट कार में. कार के शीशे के आर पार से चुम्बन
के साथ ही गीत शुरू हो जाता है. ये सोबर वाला
ज़माना था चुम्बन का और शायद सीरियल किसर
उस ज़माने में स्कूल में पढ़ा करते होंगे.

अनजान की रचना है और आर डी बर्मन का संगीत.
इसे लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने गाया है.
फिल्म का सबसे आकर्षक गीत और धुन यही है.




गीत के बोल:

हो मैंने दिल दिया दिल दिया दिल दिया
घबरा के ओ साथिया
हो तूने दिल लिया दिल लिया दिल लिया
तड़पा के ओ साथिया
हो मैंने दिल दिया दिल दिया दिल दिया
घबरा के ओ साथिया
हो तूने दिल लिया दिल लिया दिल लिया
तड़पा के ओ साथिया
हो मैंने दिल दिया दिल दिया दिल दिया
घबरा के ओ साथिया

ला ला ला ला ला ला
हर पल मेरे दिल में है तू अब मैं कहीं भी रहूँ
कहना तो ये मैं चाहूँ मगर तुझसे ये कैसे कहूँ
हर पल मेरे दिल में है तू अब मैं कहीं भी रहूँ
कहना तो ये मैं चाहूँ मगर तुझसे ये कैसे कहूँ
क्या मिल गया मिल गया हिल गया
तुझे पा के ओ साथिया
हो तूने दिल लिया दिल लिया दिल लिया
तड़पा के ओ साथिया

जो भी हुआ अच्छा हुआ ये राज़-ए-दिल खुल गया
दिल की नई राहों में ये क्या हमसफ़र मिल गया
जो भी हुआ अच्छा हुआ ये राज़-ए-दिल खुल गया
दिल की नई राहों में ये क्या हमसफ़र मिल गया
गया दिल गया खिल गया मिली गया
टकरा के ओ साथिया
हो मैंने दिल दिया दिल दिया दिल दिया
घबरा के ओ साथिया
हो तूने दिल लिया दिल लिया दिल लिया
तड़पा के ओ साथिया
हो ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
………………………………………..
Ho maine dil diya-Zameen Aasman 1984

Artists: Sanjay Dutt, Anita Raj

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Nov 6, 2019

वादा है क्या-टैक्सी चोर १९८०

इस फिल्म के आने से पहले हमें केवल टैक्स चोर
शब्द ही मालूम था जो अक्सर अखबार मेंन छपा
करता था. हमने सोचा ये टैक्स की फीमेल होगी.
फिल्म हम देखें उसके पहले ये सिनेमा हाल से ऐसी
भागी जैसे उसे मालूम हो गया हो हम इसे देखने
आने वाले हैं.

फिल्म का एक गीत लोकप्रिय हुआ था जो हम आज
आपको सुनवा रहे हैं. अनजान का लिखा गीत है
जिसका संगीत बप्पी लहरी ने तैयार किया है. गीत
मिथुन पर फिल्माया गया है जो इसे एक स्टेज 
कार्यक्रम में गा रहे हैं. इसके गायक हैं किशोर कुमार.
स्टेज प्रोग्राम के बैनर पर लिखा है-सिंगर रीतेश
फ्रॉम रोड तो स्टेज.



गीत के बोल:

व्हू व्हू व्हू व्हू
आ हा हा हा
व्हू हू हू हू
ओ हो हो हो
हू हू हू हू हू हू
हे
वादा है क्या क्या है कसम
क्या है कसम जाने ना हम
वादा है क्या क्या है कसम
क्या है कसम जाने ना हम
हम तो सनम जानें ये बात
जीना हमें है तेरे साथ

व्हू हू हू हू हू हू हू
व्हू हू हू हू हू


ये प्यार तो है बेजुबान
क्या चाहे दिल ओ जाने जान
जाने ये जहां कैसे दिल की बात
वादा है क्या क्या है कसम
क्या है कसम जाने ना हम

ये क्या अगन दिल में जगी
दे दी तुझे क्यों ज़िदगी
पागल मन की प्यास जाने प्यासी रात
वादा है क्या क्या है कसम
क्या है कसम जाने ना हम

वादा तो है धोखा यहाँ
टूटे कसम जाने कहाँ
छूटे न कभी थामें हम जो हाथ
वादा है क्या क्या है कसम
क्या है कसम जाने ना हम
हम तो सनम जाने ये बात
जीना हमें है तेरे साथ
वादा है क्या क्या है कसम
क्या है कसम जाने ना हम
……………………………………………………….
Wada hai kya-Taxi chor 1980

Artists: Mithun Chakravorty, Zarina Wahab

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Oct 31, 2019

यार मेरा पैसे का दीवाना-आखिरी डाकू १९७८

मर्फी के नियम के अनुसार जिस चीज़ की सबसे ज्यादा
ज़रूरत आपको होती है वही उस समय नहीं होती. वही
चीज़ आपको अनुपलब्धता के चलते सबसे ज्यादा दुखी
करती है.

किसी ने कहा है-पैसा ही सब कुछ नहीं है मगर किसी
और प्रेक्टिकल किस्म के सयाने ने कहा है-पैसा सब कुछ
नहीं मगर ज़रूरतों को पूरी करने के लिए ज़रूरी है. रोड
पर चलते हुए सुबकने से बेहतर है मर्सीडीज़ में बैठ के
सुबकना. चीजों की टाइमिंग और प्लेसमेंट कितना मायने
रखता है. एक सड़ा हुआ पिज्ज़ा मूंगफली के ठेले पर
शायद ना बिके मगर वो किसी आलीशान रेस्तरां में बड़े
आराम से बिना अमूल माचो के बिक जायेगा. उस पर
परोसने वाले को टिप भी मिलेगी.

गीत की बात करते हैं. इसमें मसला गंभीर है मगर इस
गीत में नायिका इस बात को थोडा सहज भी बनाती है
आगे के अंतरे में. रेखा ही रेखा छाई हुई हैं पूरे गीत में.
दो चोटी वाली रेखा क्यूट और अडोरेबल दिखलाई दे रही
हैं. रणधीर कपूर फिल्म के एक्स्ट्रा कलाकार से दिखलाई
दे रहे हैं.





गीत के बोल:

बुरा अगर न माने तो सच बात कह दूं
बड़े लोग वो हैं जो दिल के बड़े हैं
ये सोना ये चांदी है भगवान जिनका
ज़माने में ऐसे तो लाखों पड़े हैं

यार मेरा पैसे का दीवाना
यार मेरा पैसे का दीवाना
और मैं दीवानी प्यार की प्यार की
पैसे को जिसने सब कुछ माना
वो जाने कदर ना यार की यार की
यार मेरा पैसे का दीवाना

जुल्मी को मिल क्या गए चार पैसे
देखो बदलने लगा वो रंग कैसे
जुल्मी को मिल क्या गए चार पैसे
देखो बदलने लगा वो रंग कैसे
दौलत का मुझपे वो यूँ रौब डाले
जाने कोई लाटसाहब हो जैसे
वो सोने और चांदी की शमा का परवाना
मैं पागल दिलदार के
यार मेरा पैसे का दीवाना
यार मेरा पैसे का दीवाना

ये दो दिन में तू क्या से क्या हो गया रे
भला आदमी था बुरा हो गया रे
ये दो दिन में तू क्या से क्या हो गया रे
भला आदमी था बुरा हो गया रे
ये बरसात दौलत की बरसी कहाँ से
कोई काम खोटा तो तूने किया रे
तू कागज़ के फूलों का सौदाई क्या जाने
रूत रंगीन बहार की

यार मेरा पैसे का दीवाना
और मैं दीवानी प्यार की प्यार की
पैसे को जिसने सब कुछ माना
वो जाने कदर ना यार की यार की
यार मेरा पैसे का दीवाना
………………………………………………….
Yaar mera paise ka deewana-Akhiri Daku 1978

Artists: Rekha, Randhir Kapoor

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Oct 30, 2019

कभी ना जिया लागे तो-आखिरी डाकू १९७८

आखिरी शब्द से मतलब ये कतई नहीं है कि प्रस्तुत
वस्तु या पहलू आखिरी ही हो. ये तो मन को बहलाने
वाली बात है. सही है ना गुप्त, सुप्त और लुप्त से मित्रों.
इतिहास गवाह है सबसे बढ़िया और आखिरी शब्दों को
समय ने धता बताई है.

सुनते हैं आखिरी डाकू से एक गीत हेलन पर फिल्माया
गया. आशा भोंसले गायिका हैं. अनजान का लिखा गीत
है और कल्याणजी आनंदजी का संगीत. गीत उम्दा है
मगर जब फ़िल्मी भैंस पानी में सरक जाती है तो गीत
संगीत क्या कर लेंगे. फिर एक और बात है-पञ्च वाली.
हाँ वही घूंसे वाला पञ्च. पूरे एल्बम में दम होगा तो
वो हिट ज़रूर होगा. कल्याणजी आनंदजी को फ़ोकट की
वाह वाह करने वाले फिल्म और संगीत समीक्षक नहीं
मिले.

गीत में आपको विनोद खन्ना और रणजीत भी नज़र
आयेंगे. इसे मुजरा गीत के नाम से पहचाना जाता है.
पुराने ज़माने के हीरो पी. जयराज पुलिस इन्स्पेक्टर के
रूप में नज़र आयेंगे जिन्होंने भेस बदल रखा है. उनके
साथ उनका साइड किक भी है जिसका नाम मुहे याद
नहीं आ रहा है अभी.





गीत के बोल:

आ आ आ आ आ आ आ हाय
घड़ियाँ गिन गिन दिन बीते
और तारे गिन गिन रैन
एक उमरिया वो आये
जब कहीं ना आये चैन हाय

कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
जो मांगे मिले ना हाँ मांगे मिले न
जो मांगे मिले न वो बिन मांगे पईयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो

आ आ आ आ आ आ आ
है नदिया में पानी हाँ सागर में पानी
है नदिया में पानी हाँ सागर में पानी
पानी बिना फिर भी प्यासी जवानी
जब दिल जलाये उमरिया दीवानी
जब दिल जलाये उमरिया दीवानी
तो नदिया किनारे ना जइयो ना जइयो
मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो

आ आ आ आ आ आ आ
ये अंगूरी रस में तो नकली नशा है
ये अंगूरी रस में तो नकली नशा है
असली नशा तो राजा दिल में बसा है
दिल पूछे पीने में कैसा मज़ा है
दिल पूछे पीने में कैसा मज़ा है
तो बोतल में डूब जइयो ना जइयो
मेरी गली अइयो

कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
जो मांगे मिले ना हाँ मांगे मिले न
जो मांगे मिले न वो बिन मांगे पईयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
कहीं ना जिया लागे तो मेरी गली अइयो
………………………………………………
Kahin na jiya lage-Akhiri Daku 1978

Artists: Helen, Vinod Khanna, Ranjeet, Jairaj

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Oct 28, 2019

हवा ये प्रभाती-शुभकामना १९८३

ये गनीमत है प्रेम प्यार की धींगा-मुश्ती के अलावा भी
फिल्मों के गीत हैं सुनने को. ऐसे तठस्त और प्रकृति
से जुड़े गीत कानों और दिमाग दोनों के लिए सुखदायी
होते हैं. ऐसे गीतों को नायक-नायिका के लिपस्टिकमय
चेहरों और कोल्ड क्रीम युक्त शरीरों की ज़रूरत नहीं होती.
इन्हें कुलांचे मारते हुए हिरण पर भी फिल्माया जा सकता
है.

सनते हैं फिल्म शुभकामना से अनजान का लिखा गीत
जिसे लता मंगेशकर ने आर डी बर्मन की धुन पर गाया
है. प्रभाती प्रभात के समय गाया जाने वाला गीत कहा
जाता है. वो भक्ति गीत या भजन भी हो सकता है.

https://www.youtube.com/watch?v=R30i6hRgiPM   


गीत के बोल:

हो ओ आ आ आ आ आ आ आ आ
हवा ये प्रभाती सुनाये जगाये
जग सारा धीरे धीरे जागे रे
हवा ये प्रभाती सुनाये जगाये
जग सारा धीरे धीरे जागे रे
हवा ये प्रभाती हवा ये प्रभाती

जाने कहाँ से चल के उजाले
जागें गुलाबी सवेरे
छुप के कोई नीले गगन से
धरती पे सोना बिखेरे
हो ओ ओ ओ ओ ओ
छुपे कहाँ जा के घनेरे अँधेरे
जग सारा नया नया लागे रे
हवा ये प्रभाती सुनाये जगाये
जग सारा धीरे धीरे जागे रे
हवा ये प्रभाती हवा ये प्रभाती

दिन यूँ ही आये यूँ ही चला जाए
मन पे जो छाये अँधेरे
जाने कब वो सूरज आये
मन में जो किरणें बिखेरे
हो ओ ओ
स्वर्ग धरा पे उतारे सँवारे
सोये सोये मन को जगा के रे
हवा ये प्रभाती सुनाये जगाये
जग सारा धीरे धीरे जागे रे
हवा ये प्रभाती हवा ये प्रभाती
…………………………………………..
Hawa ye prabhati-Shubhkamna 1983

Artists: None

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Oct 17, 2019

इस दिल ने सोचा है जो-शुभकामना १९८३

कुछ गीत ऐसे होते हैं जिनको सुन कर नींद आ जाती
है. ऐसे गीत बहुत सहायक होते हैं अनिद्रा के रोगियों के
लिए. एक ऐसा गीत है जब नींद खजूर पर अटक जाती
है तब इसे सुन कर मदद ले लिए करता हूँ. अलसाई
गायकी का शानदार नमूना है ये. एस पी बालू के कई
गीत हैं जिन्हें सुन कर आप झपकी ले सकते हैं.

सुनते हैं अनजान का लिखा हुआ और आर डी बर्मन का
संगीतबद्ध गीत जिसे आशा भोंसले ने भी गाया है.



गीत के बोल:

इस दिल ने सोचा है जो
सच वो ही हो जाए तो
हो ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला आ ऊं ए ओ
इस दिल ने सोचा है जो
हो सच वो ही हो जाए तो
हो ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला आ ऊं ए ओ
इस दिल ने सोचा है जो
हो ओ ओ ओ ओ
सच वो ही हो जाए तो

उड़ते उड़ते प्यार के पंछी मिल के कहीं खो जाएँ
हो ला ला ला ला ला ला आ आ आ आ आ
पतझड़ में भी महके बहारें दिल के तराने जहाँ गायें
हो ला ला ला ला ला ला आ आ आ आ आ

इस दिल ने सोचा है जो
हो ओ ओ ओ ओ
सच वो ही हो जाए तो
हो ला ला ला ला ला ला आ आ आ आ आ
सच वो ही हो जाए तो

कहाँ बसे चंदा कहाँ कमलनी चाहूँ के ये दूरी मैं मिटाऊं
ला ला ला ला ला ला आ आ आ
दोनों के मन जो प्यार से बांधे मैं वो किरण बन जाऊं
हो ला ला ला ला ला ला आ आ आ आ आ
सच वो ही हो जाए तो हो ओ ओ
सच वो ही हो जाए तो
ला ला ला ला ला ला हाँ आ हाँ आ हाँ
इस दिल ने सोचा है जो

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मन मंदिर में दीप जलाये पूजा के फूल चढ़ाये
हो ओ ओ आ आ आ आ आ आ आ
शाम सिन्दूरी सपनों से उसकी मांग कुंवारी भर जाए
हो ला ला ला ला ला ला आ आ आ आ आ

इस दिल ने सोचा है जो
हो ओ ओ ओ ओ
सच वो ही हो जाए तो
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हाँ आ हाँ आ हाँ
इस दिल ने सोचा है जो
सच वो ही हो जाए तो
इस दिल ने सोचा है जो
सच वो ही हो जाए तो
इस दिल ने सोचा है जो
………………………………………………….
Is dil ne socha hai jo-Shubhkamna 1983

Artists: Rati Agnihotri, Rakesh Roshan

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Sep 11, 2019

ये दिन तो आता है-महान १९८३

फिल्म का नाम महान है इसमें महानायक तीन किरदारों में
हैं. हर किरदार के हिस्से में एक ना एक गीत अवश्य आया
है. फिल्म बैराग जिसमें दिलीप कुमार के तीन किरदार थे
उसमें भी हर किरदार ने एक ना एक गाना अवश्य गाया
है.

महान फिल्म के गानों में भीड़ भी महान होना आवश्यक है.
फिल्म के दो युगल गीतों में असंख्य सहायक कलाकारों का
जमावड़ा है.

गीत में साउंड इफेक्ट्स अपने चरम पर हैं. ये उस ज़माने का
गीत है जब आर डी बर्मन का म्यूज़िक काफी फरटाईल हुआ
करता था.

अनजान का गीत है जिसे आशा भोंसले और स्वयं संगीतकार
पंचम ने गाया है. साथ में कोरस है.




गीत के बोल:

चप चप चप चप चप ता रा रा रा रा
चप चप चप चप चप ता रा रा रा रा
ता रा रा रा रा ता रा रा रा रा
हा आ हा आ हा आ हा आ हा आ

ये दिन तो आता है एक दिन जवानी में
आँखे मिले तो लगे आग पानी में
दिल को तो खोना है खोना है खो जाये
आगे जो होना है होना है हो जाये
चप चप चप चप चप चप चप चप चप चप
अरे ये दिन तो आता है एक दिन जवानी में
आँखे मिले तो लगे आग पानी में
दिल को तो खोना है खोना है खो जाये
आगे जो होना है होना है हो जाये
चप चप चप चप चप चप चप चप चप चप
ये ये दिन तो आता है एक दिन जवानी में


हो जब कोई दिल में समाता है यैय्यया
क्या आग दिल में लगाता है यैय्यया
सोई मोहब्बत जगाता है यैय्यया
रातों की नींदें उड़ाता है रू रू रू
यादों में ख्वाबो में चोरी से आ जाये
आये तो प्यासा दिल दीवाना हो जाये
चप चप चप चप चप चप चप चप चप चप

अरे ये दिन तो आता है एक दिन जवानी में
आँखे मिले तो लगे आग पानी में

हम हो के दीवाने आये हैं आये हैं
दिल की ये सौगात लाये हैं लाये हैं
साँसों पे तेरे ही साये हैं साये हैं
सपने तेरे दिल पे छाये हैं.
हो ओ ओ कोई भी जाने ना कैसे दिल आ जाये
आ जाये दिल में जो दिल से वो न जाये
चप चप चप चप चप चप चप चप चप चप

अरे ये दिन तो आता है एक दिन जवानी में
आँखे मिले तो लगे आग पानी में
दिल को तो खोना ही खोना है खो जाये
आगे जो होना है होना है हो जाये
चप चप चप चप चप चप चप चप चप चप
हा आ हा आ
हू हू हू हू आ आ
ये दिन तो आता है
…………………………………………….
Ye din to aata hai ek din jawani mein-Mahaan 1983

Artists: Amitabh Bachchan, Parveen Babi

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Aug 16, 2019

ई है बम्बई नगरिया-डॉन १९७८

आपको उई उई वाले गीत काफी सुनवा चुके हैं इस जगह. आज
सुनिए ई ई वाला एक गीत. फेमस सोंग है अपने टाइम का.

ई है फिल्म डॉनवा का एक ठो गीत जिस गाये रहे किशोर कुमार
वही खंडवा वाले. गाने के बैकग्राउंड में सेंटॉर लोगो वाली एयर इंडिया
बिल्डिंग के दर्शन हो जायेंगे. उसके अलावा चौपाटी की भी मुफ्त
सैर भी कीजिये प्रस्तुत गीत के द्वारा.

बम्बई को धाम का कोई ऑफिशियल दर्ज़ा तो नहीं मिला मगर
ये कोई धाम से कम नहीं है. यहाँ घाम(गर्मी) से लेकर धमाधम
तक सब मौजूद है. बस दाम चुकाने के लिए माल होना चाहिए.
इस मायानगरी की माया पब्लिक अपना पूर्ण जीवन व्यतीत करने
के बाद भी नहीं समझ पाई.





गीत के बोल:

जय हो राधेश्याम की जय हो सियाराम की
और जय हो बम्बई धाम की

ई हे ई है
ई है बम्बई नगरिया तू देख बबुआ
ई है बम्बई नगरिया तू देख बबुआ
सोने-चाँदी की डगरिया तू देख बबुआ
जादू टोने की बजरिया में
जादू टोने की बजरिया में माया की नगरिया में
बदले झटपट बदले मुक़द्दर का लेख बबुआ
ई है बम्बई नगरिया तू देख बबुआ
ई है बम्बई नगरिया तू देख बबुआ

ओ देखो दूर-दूर से
ओ देखो दूर-दूर से लोग दूर-दूर से
इहाँ आते हैं दाँव लगाने
इहाँ आते हैं दाँव लगाने
देस-गाँव छोड़ के प्रीत प्यार तोड़ के सोया सोया नसीबा जगाने
सोया सोया नसीबा जगाने
अरे अपना क्या होगा
अरे अपना क्या होगा होगा सो होगा
पासा हमने दिया है फेंक बबुआ
ई है बम्बई नगरिया तू देख बबुआ
ई है ई है
ई है बम्बई नगरिया तू देख बबुआ

ओ कोई मालामाल है
ओ कोई मालामाल है कोई तंगहाल है
ज़िन्दगी है इहाँ की निराली
ज़िन्दगी है इहाँ की निराली
माल कितना भरा फिर भी देखो ज़रा
इहाँ हर आदमी है सवाली
इहाँ हर आदमी है सवाली
बिगड़ी बना ले अरे बिगड़ी बना ले
तू कैश करवा ले अपने मुकद्दर का चैक बबुआ
ई है बम्बई नगरिया तू देख बबुआ
ई है ई है
ई है बम्बई नगरिया तू देख बबुआ

ये शहरों में शहर है शहर बम्बईवा अरे वाह वाह बम्बईवा
ये बात सभी उल्टी फिर भी वाह रे बम्बईवा
ये बात सभी उल्टी फिर भी वाह रे बम्बईवा
बिन पानी का धोबी तालाब देखो देखो
इहाँ रेती पे पानी का भाव देखो देखो
घोड़ों पे करोड़ों का दाँव देखो
हसीनों से सभी का लगाव देखो
कोई बंदर नहीं है फिर भी नाम बान्द्रा
चर्च का गेट है चर्च है लापता
चर्च है लापता चर्च है लापता

अजब है ये रंग अनोखा है ढंग नई है तरंग नई है उमंग
कोई कंजूस है कोई है मलंग
मची है यहाँ देखो आपस में जंग आहा आपस में जंग
आहा आपस में जंग
दे घुमा के
अरे समुन्दर में जैसे है घुल गई भंग
ये रंग देख के मैं हो गया दंग
तो क्या समझे
ई है बम्बई नगरिया तू देख बबुआ
ई है बम्बई नगरिया तू देख बबुआ
……………………………………………………………
Ee hai bambai nagariya too dekh babua-Don 1978

Artist: Amitabh Bachchan

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Jul 22, 2019

छू कर मेरे मन को-याराना १९८१

आपको फिल्म बेगुनाह से मुकेश का गाया गीत सुनवाया
उसी बीच फिल्म याराना का गीत-सारा ज़माना याद आ
गया. वजह क्या है आप दोनों गीतों को सुनें तो समझ
आ जायेगी.

अब आप सारा ज़माना गीत सुन चुके हैं अतः फिल्म से
एक दूसरा उम्दा गीत सुनते हैं-जिसके बोल लाजवाब हैं.
बोल अनजान के हैं और संगीत राजेश रोशन का. गीत
परदे पर अमिताभ बच्चन और नीतू सिंह पर फिल्माया
गया है. फिल्म का सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला
गीत भी यही है. क्यूँ ना हो दिल को छू जाता है.



गीत के बोल:

छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा
छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा
बदला ये मौसम लगे प्यारा जाग सारा
छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा
बदला ये मौसम लगे प्यारा जाग सारा
छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा

तू जो कहे जीवन भर तेरे लिए मै गाऊँ
तेरे लिए मैं गाऊँ
गीत तेरे बोलो पे लिखता चला जाऊं
लिखता चला जाऊं
मेरे गीतों मे तुझे ढूँढे जाग सारा
छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा
बदला ये मौसम लगे प्यारा जाग सारा
छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा


आ जा तेरा आँचल ये प्यार से मै भर दूं
प्यार से मै भर दूं
खुशियाँ जहाँ भर की तुझको नज़र कर दूं
तुझको नज़र कर दूं
तू ही मेरा जीवन तू ही जीने का सहारा

छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा
बदला ये मौसम लगे प्यारा जाग सारा
छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा
...............................................................................
Chhoo kar mere man ko-Yaarana 1981

Artists: Amitabh Bachchan, Neetu Singh

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