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Aug 3, 2017

मेरे जीवन के पथ पर छाई-अनजान १९४१

फिल्म अनजान से एक गीत सुनते हैं जिससे आज की पीढ़ी
अनजान है.

अशोक कुमार और देविका रानी पर फिल्माया गया गीत दोनों
ने स्वयं गाया है. बोल प्रदीप के हैं और संगीत पन्नालाल घोष
का.



गीत के बोल:

मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
कौन
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
अरे
मधुर मधुर मन भाई
मधुर मधुर मन भाई
ये कौन
नहीं
मधुर मधुर मन भाई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी

धीमे धीमे मेरी कुटि में
धीमे धीमे मेरी कुटि में
इठलाती हुई बलखाती हुई
इठलाती हुई बलखाती हुई

चुपचाप कहीं से आई
चुपचाप कहीं से आई
ये कौन
चुपचाप कहीं से आई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी

कौन पारी ये स्वर्ग से उतरी
कौन पारी ये स्वर्ग से उतरी
बड़ी लाज भरी मेरे आसपास
खेलन लगी रस रंग रास
खेलन लगी रस रंग रास
पल पल ले कर अंगडाई
पल पल ले कर अंगडाई
ये कौन
पल पल ले कर अंगडाई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
तुम कौन
पूनम की चांदनी
..................................................................................
Mere jeevan ke path par chhayi-Anjaan 1941

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Feb 11, 2015

बोलो सजनी बोलो-निर्मला १९३८

कुछ लोग कहते हैं पुराने गीत सुन के रोना आता
है –ये किसी भी वजह से आ सकता है. उदाहरण
के लिए प्रस्तुत गीत-इसकी ऑडियो क्वालिटी इतनी
बढ़िया है कि घिसा हुआ बोलना शायद ‘घिसा’ शब्द
का अपमान होगा. ऐसे भी कई गीत आपको यू-ट्यूब
पर मिल जायेंगे. लोड करने वाला अपने समय के
साथ साथ सुनने वाले के समय को भी चबा जाता
है. फिर भी उसको धन्यवाद  कि भले ही गीत गाने
की स्टाइल सुन के न आया हो, गाने की सरसराहट
और थरथराहट से रोना आ गया. हो सकता है ये
स्पेशल इफेक्ट वाला गीत हो, गायक गायिका तूफ़ान
में तैरते हुए गा रहे हों इसलिए आवाज़ स्पष्ट न आ
रही हो.

गीत है अशोक कुमार और देविका रानी अभिनीत
फिल्म निर्मला से. इसे गाया भी दोनों ने खुद ही है.
संगीत सरस्वती देवी का है. अशोक कुमार ने गाया
है इसलिए इसको सुन लिया. बाकी आप इस गीत
की तारीफ़ में कसीदे काढना चाहें तो आपका स्वागत
है. जी हाँ, मैं पुराने गीतों के शौकीनों से ही मुखातिब
हूँ. गीत गौड़ सारंग राग पर आधारित है और कहरवा
ताल में निबद्ध है.

गनीमत है मेरे पास इसका ऑडियो मौजूद है और
मैं उसी को सुन के इसके बोल चिपका रहा हूँ इधर
ताकि पाठकों को रोना न आये. केवल एक दो शब्दों
के बारे में मुझे संदेह है-कि क्या बोला गया है. आशा
है ६/६ कान वाले (तेज आँख के लिए तो यही इस्तेमाल
करते हैं डाक्टर लोग, तेज कान के लिए भी शायद यही
स्पेसिफिकेशन हो) मेरी मदद करेंगे शब्दों की पहचान
में. 




गीत के बोल:

बोलो सजनी बोलो
चंदा को देख क्यूँ 
कुमुद्कली नहीं फूली
अंग समाती है

बोलो सजनी बोलो

सूरज को देख क्यों
सूर्यमुखी हो मन में दुखी
किल जाती है

है क्या कारण क्या कारण

प्रीतम दर्शन
हाँ, प्रीतम दर्शन
प्रीतम दर्शन प्रीतम दर्शन

आई बहार क्यूँ बुलबुल खुश हो
मस्त तराना गाता है

मैं क्या जानूं

बुलबुल से पूछिए
बहार में क्यूँ मस्त तराना गाता है
बुलबुल गुल से मिल जाता है
बुलबुल गुल से मिल जाता है
...........................................
Bolo sajni bolo-Nirmala 1938

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Dec 16, 2010

मेरे जीवन के पथ पर छाई-अनजान १९४१

३० के दशक से लेकर आज तक बॉलीवुड में बहुत बदलाव हुए
हैं। होलिवुड कि तरह इसको पूर्ण विकसित तो नहीं मगर बेहद
विकासशील कह कर बुलाया जा सकता है। अधोसंरचना का भी
ज़बरदस्त विकास हुआ है। सन ८५ में हमें पहली ३-डी फिल्म
देखने को मिली जिसका नाम था शिवा का इन्साफ। ३-डी फिल्म
शिवा का इन्साफ में जैकी श्रोफ नायक हैं। ३-डी का अर्थ है
त्रियामी ।

दृश्य श्रव्य प्रभाव में क्या फर्क आया-जहाँ सन ३०-४० के दशक
में नायक नायिका एक ही जगह खड़े होकर थोडा बहुत हिल डुल
कर गाते थे वहीँ ८० के दशक में उन्होंने विशेष तकनीक के माध्यम
से हवा में उड़ कर भी गाना शुरू कर दिया।


आज पेश है एक पुरानी फिल्म अनजान का गीत जिसे फिल्माया
गया है अशोक कुमार और देविका रानी पर। अशोक कुमार अपने
ज़माने के एक बड़े स्टार थे। फिल्म 'किस्मत' ने उन्हें सुपर स्टार का
दर्ज़ा दिया था।

गीत एक युगल गीत है और आकर्षक धुन में बंधा हुआ है। इसके
गीतकार हैं पंडित प्रदीप । संगीत दिया है प्रसिद्ध बांसुरी वादक
पन्नालाल घोष ने। इसको गाया भी सितारों ने ही है-अशोक कुमार
और देविका रानी ने। प्रश्नोत्तर वाले गीतों में हिंदी सिनेमा इतिहास
के सबसे पहले गीतों में गिन लीजिये इसको आप।



गीत के बोल:

मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
कौन
पूनम की चांदनी

मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी

अरे
मधुर मधुर मन भाई
मधुर मधुर मन भाई
ये कौन
नहीं मधुर मधुर मन भाई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
धीमे-धीमे मेरी कुटी में
धीमे-धीमे मेरी कुटी में
इठलाती हुई बलखाती हुई
इठलाती हुई बलखाती हुई
चुपचाप कहीं से आई
चुपचाप कहीं से आई
ये कौन
चुपचाप कहीं से आई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी

कौन पारी ये स्वर्ग से उतारी
कौन पारी ये स्वर्ग से उतारी
बड़ी लाज भरी मेरे आस पास
खेलन लागी रस रंग रास
खेलन लागी रस रंग रास
पल-पल ले कर अंगडाई
पल-पल ले कर अंगडाई
ये कौन
पल-पल ले कर अंगडाई
पूनम की चांदनी
मेरे जीवन के पथ पर छाई ये कौन
पूनम की चांदनी
तुम कौन
पूनम की चांदनी
............................................
Mere jeevan ke path par chhayi-Anjaan 1941

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