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Aug 30, 2018

मनभावन मनभावन लो सावन-बंधन १९४०

सावन विंटेज युग की फिल्मों के गीतों में भी आया
करता था. इस गीत को ही ले लीजिए कितना पुराना
है. २०१८ तक हिसाब लगाएं तो इसे बने ७८ साल हो
चुके हैं.

सुनते हैं लीला चिटनिस का ही गाया एक और गीत
फिल्म बंधन से जिसे कवि प्रदीप ने लिखा है और
जिसकी तर्ज़ बनाई है सरस्वती देवी ने.



गीत के बोल:

मनभावन मनभावन लो सावन आया रे
मनभावन मनभावन लो सावन आया रे
बन-बन उपवन कुंज-कुंज में गुंजन छाया रे
लो सावन आया रे मनभावन मनभावन

रिमझिम-रिमझिम गाता आया
सरगम सकल सुनाता आया
नया सन्देसा नई आस नवजीवन लाया रे
नया सन्देसा नई आस नवजीवन लाया रे
लो सावन आया रे मनभावन मनभावन

मगन हुई हंसों की टोली
दुनिया प्रेम-हिण्डोले डोली
मगन हुई हंसों की टोली
दुनिया प्रेम-हिण्डोले डोली
डाल पे बैठी बुलबुल बोली सावन आया रे
डाल पे बैठी बुलबुल बोली सावन आया रे
लो सावन आया रे
मनभावन मनभावन लो सावन आया रे
मनभावन मनभावन लो सावन आया रे
........................................................
Manbhawan manbhawan lo-Bandhan 1940

Artist: Ashok Kumar, Leela Chitnis

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Aug 19, 2018

इस दुनिया की पगडण्डी पर-आम्रपाली १९४५

सन १९४५ की फिल्म आम्रपाली से एक गीत सुनते हैं
जो अमीरबाई कर्नाटकी का गाया हुआ है. इसे लिखा
है कवि प्रदीप ने और क्रेडिट्स में मिस कमल का
नाम है. देशभक्ति वाले गीत अंग्रेजों को पसंद नहीं
आते थे अतः प्रदीप को ये काम करना पड़ा. ऐसा
मैंने कहीं पढ़ा है.



गीत के बोल:

इस दुनिया की पगडण्डी पर
तुम्हीं हो मेरे साथी
इक तुम्हीं हो मेरे साथी
मेरे धुंधले जीवन-पथ पर
तुम ओजा की बाती
इक तुम्हीं हो मेरे साथी

तुम हो मेरे दिन के सूरज
मेरी रात के चन्दा
तुम ने मुझको बाँध लिया है
डाल प्रेम का फ़न्दा
मेरे राजकुमार हँसो
मैं तुम पे बालि बालि जाती
इक तुम्हीं हो मेरे साथी

इस विशाल संसार में मैं इक अकेली
काँप रही थी मेरी जीवनवेली
लेकिन जिस दिन तुमको पाया
मैंने मन को धीर बँधाया
अपने घर को स्वर्ग समझ
मैं फूले नहीं समाती
इक तुम्हीं हो मेरे साथी
…………………………………..
Is duniya ki pagdandi par-Amrapali 1945

Artist:

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Aug 18, 2018

अपने भैया को नाच नचाऊँगी-बंधन १९४०

बरसों तक जनता ये मानती रही कि हिंदी फिल्मों की
प्रथम महिला संगीत निर्देशक सरस्वती देवी हैं. ये बात
अब पुरानी हो चुकी है और ये श्रेय किसी और के खाते
में चला गया है. ये बात अभी भी तथ्य है कि स्थापित
संगीतकारों में सरस्वती देवी ही प्रथम महिला संगीतकार
हैं.

अब तो जानकारियां पुरानी सभ्यता की चीज़ों की तरह
यहाँ वहाँ से बाहर निकल रही हैं और उस जानकारी को
बांटने के लिए जनता वैसे ही बेताब है जैसे चूहे को
चिंदी मिल जाती है तो वो सारे शहर में ढिंढोरा पीटता
फिरता है कि वो दर्जी बन गया. इस जानकारी के उबाल
और उफान में इतना समय नहीं बचा कि पानी पीने के
१०० तरीकों पर बना अनुसंधानात्मक वीडियो देख सकें.

सुनते हैं फिल्म बंधन से के गाना लीला चिटनिस और
सुरेश का गाया हुआ. इस कवि प्रदीप ने लिखा है.



गीत के बोल:

अपने भैया को नाच नचाऊँगी
नाच नचाऊँगी
अपने भैया को नाच नचाऊँगी
नाच नचाऊँगी
सारी दुनिया में धूम मचाऊँगी
नाच नचाऊँगी
अपने भैया को नाच नचाऊँगी
नाच नचाऊँगी

देखो मान जावो दीदी न छेड़ो मुझे
मैं जरूर सिंगार सजाऊँगी
नाच नचाऊँगी

तुमसे न बोलूँ
क्यूँ मेरे भैया
हरगिज़ न बोलूँ
सुनो तो भैया
नाचते थे कृष्ण कन्हैया
तुम भी नाचो
घूँघट को काढ़ मैं डिम-डिम-डिम डमरू बजाऊँगी
नाच नचाऊँगी
अपने भैया को नाच नचाऊँगी
नाच नचाऊँगी

लहंगा पहनाऊँगी चुनरी ओढाऊँगी
दीदी बुरी मेरी दीदी बुरी
झूमर पहनाऊँगी कंगन पहनाऊँगी
दीदी बुरी ये मेरी दीदी बुरी ये
रुनुन झुनुर झुनुर झाँझर पहनाऊँगी
माथे पे बिंदिया लगाऊँगी
नाच नचाऊँगी
अपने भैया को नाच नचाऊँगी
नाच नचाऊँगी

दीदी तुम शैतानी करो ना
अपनी ही मन-मानी करो ना
तुम भी आना-कानी करो ना
भैया आना-कानी
वरना कान ऊमेठूँगी मैं तेरे
वरना कान ऊमेठूँगी मैं और
हल्की सी चपत जमाऊँगी
नाच नचाऊँगी
अपने भैया को नाच नचाऊँगी
नाच नचाऊँगी
……………………………………………..
Apne bhaiya ko naach nachaoongi-Bandhan 1940

Artists: Leela Chitnis, Suresh

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Apr 5, 2018

उड़ जावूँ रे-आम्रपाली १९४५

आम्रपाली नाम से दो फ़िल्में मेरे ध्यान में हैं-एक तो सन १९४५
वाली और एक सन १९६६ वाली.

आज सुनते हैं विंटेज युग की आम्रपाली से एक गीत जिसे गाया
है अमीरबाई कर्नाटकी ने. सरस्वती देवी के संगीत में बने इस गीत
के बोल कवि प्रदीप ने लिखे हैं.





गीत के बोल:

उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे

आज जो मैं पँख कहीं पाऊँ रे
पाऊँ रे
सपनों की नगरी में मैं उड़ जावूँ रे
जावूँ रे
तारों को तोड़ लाऊँ रे
उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे

दिखते हैं देखो कितने प्यारे-प्यारे
नीलम की थाली में चम-चम सितारे
आपस में खेल रहे आँख-मिचोली
आपस में खेल रहे आँख-मिचोली
मैं मन में ललचाऊँ रे
उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे

मेरी जवानी ने खोली है पाँखें
आज मिलावूंगी
आज मिलावूंगी मैं चन्दा से आँखें
ए ए ए चन्दा से आँखें
चल मेरे मनवा आकाश की ओर
चल मेरे मनवा आकाश की ओर
मैं तुझपे वार जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
उड़ जावूँ रे
मैं तो तारों की दुनिया में उड़ जावूँ रे
.....................................................................
Ud javoon re main to-Amrapali 1945

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May 12, 2017

लगता नहीं है दिल मेरा-हबीब वाली मोहम्मद

सरस्वती देवी का संगीतबद्ध एक गैर फ़िल्मी गीत सुनते हैं आज
जो बहादुर शाह ज़फर की रचना है और इसे हबीब वाली मोहम्मद
ने गाया है.

इस रचना को बही सारे लोग गा चुके हैं, आगे हम आपको कुछ
और वर्ज़ंस भी सुनवायेंगे.



नज़्म के बोल:

लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में
आगे के बोल वही हैं जो बाकी के वर्ज़ंस में हैं.
..........................................................................
Lagta nahin hai dil mera-Non film song

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Jul 30, 2016

झुकी आई रे बदरिया-भाभी १९३८

सावन शुरू होते ही हमने आपको एक सावन गीत सुनाया
था. समय हो गया उस बात को. अब के सावन का महीना
आधा बीत गया है और हमने आपको अभी तक कोई और
सावन गीत नहीं सुनाया.

आपको आज एक डिवाईन सावन गीत सुनवाते हैं. मीरा बाई
रचित इस गीत को फिल्म भाभी के लिए सरस्वती देवी ने
संगीतबद्ध किया है जिसे रेणुका देवी गा रही हैं. परदे पर
कलाकार भी वही हैं. साथ में गुज़रे ज़माने के एक नामचीन
कलाकार भी हैं-जयराज.



गीत के बोल:

झुकी आई रे बदरिया सावन की
झुकी आई रे बदरिया सावन की
सावन की
सावन की मनभावन की
सावन की मनभावन की
झुकी आई रे बदरिया सावन की
झुकी आई रे बदरिया

नन्ही नन्ही बुंदियाँ मेहरा बरसे
पी पी पपीहा राज करे
आली जाए कहो पिया आवन की
झुकी आई रे बंदरिया सावन की
झुकी आई रे बदरिया

सुन रे हठी पपीहा पापी
पी को नाम न ले
सुन पावे कोई बिरहा की मारी
पी कारन कीजे
ये दोउ नैना कहो ना माने
नदिया बहे जैसे सावन की,
कोई जाए कहो पिया आवन की
झुकी आई रे बदरिया सावन की
झुकी आई रे बंदरिया
सावन की मनभावन की
सावन की मनभावन की
झुकी आई रे बदरिया सावन की
झुकी आई रे बदरिया
.....................................................................
Jhuki aayi re badariya-Bhabhi 1938

Artists: Renuka Devi, Jairaj

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Jun 16, 2016

किसे करता मूरख प्यार-अछूत कन्या १९३६

फिल्म अछूत कन्या के बन के पंछियों से आप मिल ही चुके हैं.
अब दूसरे गीत की तरफ कदम बढ़ाते हैं जो एक प्रेरणादायी गीत
है या इसे आप दर्शनवादी गीत भी कह सकते हैं. गीतकार एक बार
फिर से जे एस कश्यप हैं और संगीतकार भी वही हैं सरस्वती देवी.
इस गीत के गायक हैं अशोक कुमार.

फ्रेंज़ ऑस्टिन ने इस फिल्म का निर्देशन किया था और हम आपको
इस फिल्म की स्टारकास्ट भी बतला दें भले आप उसमें से किसी को
पहचान पायें या नहीं. अशोक कुमार, देविका रानी, मनोरमा, कामता
प्रसाद, कुसुम कुमारी, प्रमिला, अनवरी बेगम, पी एफ पीठावाला, एन
एम् जोशी, खोसला, सुनीता देवी, किशोरी लाल, इशरत, नजम नकवी

एक और बात बता देते हैं आपको पोस्ट की लम्बाई बढ़ाने के लिए
जैसा कि दूसरे ब्लोगों पर होता है-इस गीत में नायक कुछ कर रहा
है. पहली बात देखने पे ऐसा लगा जैसे झोपडी की छत की सफाई
कर रहा हो. ज़ूम करने पे पाया-अरे नहीं वो तो बल्लियों को बाँध
रहा है रस्सी की मदद से. अब वो ऐसा दर्द भरा गीत क्यूँ गा रहा
है-क्या उसे इस कार्य में सहयोग नहीं मिला या कोई दूसरी वजह
हो सकती है, जानने के लिए देखें फिल्म अछूत कन्या. गीत में एक
महिला/युवती मटकी लेकर नज़दीक से गुज़रती है. मटकी मिटटी
कि बनी प्रतीत हो रही है. आप अगर इस कलाकार को पहचान पायें
तो मुझे भी बतलायें. हाँ आप गूगल से सहयोग ले सकते हैं इस
मामले में.



गीत के बोल:

किसे करता मूरख प्यार प्यार प्यार
तेरा कौन है
किसे करता मूरख प्यार प्यार प्यार
तेरा कौन है
तेरा कौन है, तेरा कौन है रे
तेरा कौन है

किसे करता मूरख प्यार प्यार प्यार तेरा कौन है
झूठे जग के नाते रिश्ते झूठी जग की प्रीत
झूठा जग का मिलना जुलना उल्टी जग की रीत
नहीं मीत कोई नहीं यार यार यार तेरा कौन है
किसे करता मूरख प्यार प्यार प्यार तेरा कौन है

नहीं ठौर कोई न ठिकाना है
जो अपना था बेगाना है
ये जीवन है एक भार भार भार तेरा कौन है
किसे करता मूरख प्यार प्यार प्यार तेरा कौन है

तेरा कौन है तेरा कौन है रे
तेरा कौन है
किसे करता मूरख प्यार प्यार प्यार तेरा कौन है
……………………………………………………
Kise kartra moorakh pyar-Achhut Kanya 1936

Artists-Ashok Kumar, Devika Rani

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Feb 11, 2015

बोलो सजनी बोलो-निर्मला १९३८

कुछ लोग कहते हैं पुराने गीत सुन के रोना आता
है –ये किसी भी वजह से आ सकता है. उदाहरण
के लिए प्रस्तुत गीत-इसकी ऑडियो क्वालिटी इतनी
बढ़िया है कि घिसा हुआ बोलना शायद ‘घिसा’ शब्द
का अपमान होगा. ऐसे भी कई गीत आपको यू-ट्यूब
पर मिल जायेंगे. लोड करने वाला अपने समय के
साथ साथ सुनने वाले के समय को भी चबा जाता
है. फिर भी उसको धन्यवाद  कि भले ही गीत गाने
की स्टाइल सुन के न आया हो, गाने की सरसराहट
और थरथराहट से रोना आ गया. हो सकता है ये
स्पेशल इफेक्ट वाला गीत हो, गायक गायिका तूफ़ान
में तैरते हुए गा रहे हों इसलिए आवाज़ स्पष्ट न आ
रही हो.

गीत है अशोक कुमार और देविका रानी अभिनीत
फिल्म निर्मला से. इसे गाया भी दोनों ने खुद ही है.
संगीत सरस्वती देवी का है. अशोक कुमार ने गाया
है इसलिए इसको सुन लिया. बाकी आप इस गीत
की तारीफ़ में कसीदे काढना चाहें तो आपका स्वागत
है. जी हाँ, मैं पुराने गीतों के शौकीनों से ही मुखातिब
हूँ. गीत गौड़ सारंग राग पर आधारित है और कहरवा
ताल में निबद्ध है.

गनीमत है मेरे पास इसका ऑडियो मौजूद है और
मैं उसी को सुन के इसके बोल चिपका रहा हूँ इधर
ताकि पाठकों को रोना न आये. केवल एक दो शब्दों
के बारे में मुझे संदेह है-कि क्या बोला गया है. आशा
है ६/६ कान वाले (तेज आँख के लिए तो यही इस्तेमाल
करते हैं डाक्टर लोग, तेज कान के लिए भी शायद यही
स्पेसिफिकेशन हो) मेरी मदद करेंगे शब्दों की पहचान
में. 




गीत के बोल:

बोलो सजनी बोलो
चंदा को देख क्यूँ 
कुमुद्कली नहीं फूली
अंग समाती है

बोलो सजनी बोलो

सूरज को देख क्यों
सूर्यमुखी हो मन में दुखी
किल जाती है

है क्या कारण क्या कारण

प्रीतम दर्शन
हाँ, प्रीतम दर्शन
प्रीतम दर्शन प्रीतम दर्शन

आई बहार क्यूँ बुलबुल खुश हो
मस्त तराना गाता है

मैं क्या जानूं

बुलबुल से पूछिए
बहार में क्यूँ मस्त तराना गाता है
बुलबुल गुल से मिल जाता है
बुलबुल गुल से मिल जाता है
...........................................
Bolo sajni bolo-Nirmala 1938

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Apr 2, 2010

चली रे चली रे-झूला १९४१

ये गीत है १९४१ की फिल्म झूला से। नायक अशोक कुमार हैं जो स्वयं
गीत गा रहे हैं। उस समय में प्लेबैक अर्थात पार्श्व गायन हिंदी फिल्मों
में चालू नहीं हुआ था और फिल्मों में कलाकार खुद ही गीत गाया करते थे
या यूँ कहिये उनसे गीत गवाए जाते थे। अशोक कुमार के साथ जो नायिका
हैं उनका नाम लीला चिटनिस है। गीत में बांसुरी बजने वाले शक्स का नाम
मुमताज़ अली है जो हास्य अली महमूद के पिता हैं। कवि प्रदीप के बोलों
को सुर में बांधा है सरस्वती देवी ने जो हिंदी सिनेमा संगीत क्षेत्र में पहली
महिला संगीत निर्देशक थीं जैसा कि उपलब्ध जानकारी से मालूम पड़ता है
मगर वे तीसरी महिला संगीत निर्देशक थीं। १९३४ में आई हिंदी फिल्म
अद्ल-ए-जहाँगीर में बिब्बो नाम कि शख्सियत ने संगीत दिया था अतः
वे ही ज्ञात प्रथम महिला संगीत निर्देशक कही जा सकती हैं। ये बात और है कि
जो प्रसिद्धि सरस्वती देवी को प्राप्त हुई वो उस समय की बाकी महिला संगीत
निर्देशकों को नहीं मिल सकी।



गीत के बोल:

ना जाने किधर आज मेरी नाव चली रे
चली रे चली रे मेरी नाव चली रे

ना जाने किधर आज मेरी नाव चली रे
चली रे चली रे मेरी नाव चली रे
कोई कहे यहाँ चली कोई कहे वहां चली
कोई कहे यहाँ चली कोई कहे वहां चली
मन ने कहा पिया के गाँव चली रे
पिया के गाँव चली रे
चली रे चली रे मेरी नाव चली रे

मन के मीत मेरे मिल जा जल्दी
दुनिया के सागर में नाव मेरी चाल दी
मन के मीत मेरे मिल जा जल्दी
दुनिया के सागर में नाव मेरी चाल दी
बिलकुल अकेली, अकेली अकेली चली रे
चली रे चली रे मेरी नाव चली रे

ना जाने किधर आज मेरी नाव चली रे
चली रे चली रे मेरी नाव चली रे

ऊंची नीची लहरों पे नाव मेरी डोले
मन में प्रीत मेरी पियू पियू बोले
ऊंची नीची लहरों पे नाव मेरी डोले
मन में प्रीत मेरी पियू पियू बोले
मेरे मन मुझ को बता, मेरी मंजिल का पता
मेरे मन मुझ को बता, मेरी मंजिल का पता
बोल मेरे साजन की कौन गली रे
बोल मेरे साजन की कौन गली रे

ना जाने किधर
ना जाने किधर आज मेरी नाव चली रे
चली रे चली रे मेरी नाव चली रे
कोई कहे यहाँ चली कोई कहे वहां चली
मन ने कहा पिया के गाँव चली रे
पिया के गाँव चली रे
चली रे चली रे मेरी नाव चली रे

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Mar 28, 2010

चने जोर गरम-बंधन १९४०

चना जोर गरम को प्रसिद्धि दिलाई फिल्म क्रांति के गीत ने। ऐसा है ?
इससे पहले भी चना जोर गरम का जिक्र हिंदी फिल्म संगीत में हुआ है।
पहले पहल १९४० कि फिल्म बंधन में एक गीत बना इस पर। गीत
लिखा है कवि प्रदीप ने और इसकी धुन बनाई है सरस्वती देवी ने।
फिल्म बंधन का एक दूसरा गीत ज्यादा प्रसिद्ध हुआ-चल चल रे नौजवान।
फिल्म बंधन के प्रमुख कलाकार हैं-अशोक कुमार और लीला चिटनिस।

ये हल्का फुल्का गीत फिल्माया गया है एक इमारत के सामने जिस पर
मिडिल स्कूल का बोर्ड लगा है। वैसे भी इस प्रकार कि वस्तुएं स्कूल के
बाहर ही ज्यादा बेचीं जाती थीं। हमारी नई पीढ़ी को शायद ही इसकी
जानकारी हो, क्यूंकि आजकल चना जोर गरम 'माल' या 'सुपर बाज़ार' के
बाहर बिकता देखा जाता है।




गीत के बोल:

चने जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार
चने जोर गरम
चने जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार
चने जोर गरम

मेरे चने हैं चटपट भैया और बड़े लासानी
और कैसे चाव से खाते देखो राम और रमजानी
और चुन्नू मुन्नू की जबान भी हो गई पानी पानी
और कहें कबीर सुनो भाई साधो सुनो गुरु की बानी

चने जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार
चने जोर गरम
चने जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार
चने जोर गरम

अरे मदरसे का जीवन तो चाँद दिनों का ठाठ
और पढ़ लिख कर सब चल दोगे अपनी अपनी बाट
फिर कोई तुममे होगा अफसर कोई गवर्नर लाट
तब मैं आऊंगा दफ्तर तुमरे लिए चने की चाट

चने जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार
चने जोर गरम
चने जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार
चने जोर गरम
................................................................
Chane zoe garam-Bandhan 1940

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Mar 12, 2009

मैं बन का पंछी-अछूत कन्या १९३६

सन १९३६ में आई थी फ़िल्म-अछूत कन्या । अशोक कुमार और
देविका रानी की मुख्या भूमिकाओं वाली इस फ़िल्म में एक बहुत
लोकप्रिय गीत है-मैं बन का पंछी । इस गीत को स्वयं देविका रानी
और अशोक कुमार ने गाया है। संगीत है सरस्वती देवी का और
इसके बोल जे एस कश्यप के लिखे हुए हैं। पुराने गीतों के प्रेमियों ने
ये ज़रूर सुना होगा।

इसको ज्यादा प्रसिद्धि दूरदर्शन के कार्यक्रमों ने दिलाई जिसमे इस गाने
के अंश समय समय पर दिखाए जाते रहे। एक बार ये फ़िल्म दूरदर्शन
द्वारा दिखाई भी गई और बस वही एक मौका था जब मैंने भी इस फ़िल्म
को देखा।

सरस्वती देवी उर्फ़ "खुर्शीद मंचेर्षर मिनोचर होमजी " की ये बतौर संगीत
निर्देशक दूसरी फ़िल्म थी। उनकी पहली फ़िल्म थी-"जवानी की हवा" जो
सन १९३५ में आई थी। इस गीत का एक रिकॉर्ड ज़ारी हुआ जिसमे कोई
गीत नहीं था, केवल फ़िल्म का संगीत था। इस फ़िल्म में भी देविका रानी
नायिका की भूमिका में थीं। अतः, अछूत कन्या के गीतों के माध्यम से ही
उनको प्रसिद्धि मिली




गाने के बोल:

मैं बन की चिड़िया बन के बन बन बोलूं रे
मैं बन का पन्छी बन के संग संग डोलूं रे
मैं बन की चिड़िया बन के बन बन बोलूं रे
मैं बन का पन्छी बन के संग संग डोलूं रे

मैं डाल डाल उड़ जाऊँ
नहीं पकड़ाई मैं आऊँ
मैं डाल डाल उड़ जाऊँ
नहीं पकड़ाई मैं आऊँ
तुम डाल डाल मैं पात पात
बिन पकड़े कभी न छोड़ूँ
संग संग डोलूं रे
तुम डाल डाल मैं पात पात
बिन पकड़े कभी न छोड़ूँ
संग संग डोलूं रे
बन बन बोलूं रे

मैं बन की चिड़िया बन के बन बन बोलूं रे
मैं बन का पन्छी बन के संग संग डोलूं रे
मैं बन की चिड़िया बन के बन बन बोलूं रे
संग संग डोलूं रे
.......................................................................
Main ban ka panchhi-Acchut Kanya 1936

Artists: Ashok Kumar, Devika Rani

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