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Jun 16, 2016

किसे करता मूरख प्यार-अछूत कन्या १९३६

फिल्म अछूत कन्या के बन के पंछियों से आप मिल ही चुके हैं.
अब दूसरे गीत की तरफ कदम बढ़ाते हैं जो एक प्रेरणादायी गीत
है या इसे आप दर्शनवादी गीत भी कह सकते हैं. गीतकार एक बार
फिर से जे एस कश्यप हैं और संगीतकार भी वही हैं सरस्वती देवी.
इस गीत के गायक हैं अशोक कुमार.

फ्रेंज़ ऑस्टिन ने इस फिल्म का निर्देशन किया था और हम आपको
इस फिल्म की स्टारकास्ट भी बतला दें भले आप उसमें से किसी को
पहचान पायें या नहीं. अशोक कुमार, देविका रानी, मनोरमा, कामता
प्रसाद, कुसुम कुमारी, प्रमिला, अनवरी बेगम, पी एफ पीठावाला, एन
एम् जोशी, खोसला, सुनीता देवी, किशोरी लाल, इशरत, नजम नकवी

एक और बात बता देते हैं आपको पोस्ट की लम्बाई बढ़ाने के लिए
जैसा कि दूसरे ब्लोगों पर होता है-इस गीत में नायक कुछ कर रहा
है. पहली बात देखने पे ऐसा लगा जैसे झोपडी की छत की सफाई
कर रहा हो. ज़ूम करने पे पाया-अरे नहीं वो तो बल्लियों को बाँध
रहा है रस्सी की मदद से. अब वो ऐसा दर्द भरा गीत क्यूँ गा रहा
है-क्या उसे इस कार्य में सहयोग नहीं मिला या कोई दूसरी वजह
हो सकती है, जानने के लिए देखें फिल्म अछूत कन्या. गीत में एक
महिला/युवती मटकी लेकर नज़दीक से गुज़रती है. मटकी मिटटी
कि बनी प्रतीत हो रही है. आप अगर इस कलाकार को पहचान पायें
तो मुझे भी बतलायें. हाँ आप गूगल से सहयोग ले सकते हैं इस
मामले में.



गीत के बोल:

किसे करता मूरख प्यार प्यार प्यार
तेरा कौन है
किसे करता मूरख प्यार प्यार प्यार
तेरा कौन है
तेरा कौन है, तेरा कौन है रे
तेरा कौन है

किसे करता मूरख प्यार प्यार प्यार तेरा कौन है
झूठे जग के नाते रिश्ते झूठी जग की प्रीत
झूठा जग का मिलना जुलना उल्टी जग की रीत
नहीं मीत कोई नहीं यार यार यार तेरा कौन है
किसे करता मूरख प्यार प्यार प्यार तेरा कौन है

नहीं ठौर कोई न ठिकाना है
जो अपना था बेगाना है
ये जीवन है एक भार भार भार तेरा कौन है
किसे करता मूरख प्यार प्यार प्यार तेरा कौन है

तेरा कौन है तेरा कौन है रे
तेरा कौन है
किसे करता मूरख प्यार प्यार प्यार तेरा कौन है
……………………………………………………
Kise kartra moorakh pyar-Achhut Kanya 1936

Artists-Ashok Kumar, Devika Rani

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Feb 11, 2015

बोलो सजनी बोलो-निर्मला १९३८

कुछ लोग कहते हैं पुराने गीत सुन के रोना आता
है –ये किसी भी वजह से आ सकता है. उदाहरण
के लिए प्रस्तुत गीत-इसकी ऑडियो क्वालिटी इतनी
बढ़िया है कि घिसा हुआ बोलना शायद ‘घिसा’ शब्द
का अपमान होगा. ऐसे भी कई गीत आपको यू-ट्यूब
पर मिल जायेंगे. लोड करने वाला अपने समय के
साथ साथ सुनने वाले के समय को भी चबा जाता
है. फिर भी उसको धन्यवाद  कि भले ही गीत गाने
की स्टाइल सुन के न आया हो, गाने की सरसराहट
और थरथराहट से रोना आ गया. हो सकता है ये
स्पेशल इफेक्ट वाला गीत हो, गायक गायिका तूफ़ान
में तैरते हुए गा रहे हों इसलिए आवाज़ स्पष्ट न आ
रही हो.

गीत है अशोक कुमार और देविका रानी अभिनीत
फिल्म निर्मला से. इसे गाया भी दोनों ने खुद ही है.
संगीत सरस्वती देवी का है. अशोक कुमार ने गाया
है इसलिए इसको सुन लिया. बाकी आप इस गीत
की तारीफ़ में कसीदे काढना चाहें तो आपका स्वागत
है. जी हाँ, मैं पुराने गीतों के शौकीनों से ही मुखातिब
हूँ. गीत गौड़ सारंग राग पर आधारित है और कहरवा
ताल में निबद्ध है.

गनीमत है मेरे पास इसका ऑडियो मौजूद है और
मैं उसी को सुन के इसके बोल चिपका रहा हूँ इधर
ताकि पाठकों को रोना न आये. केवल एक दो शब्दों
के बारे में मुझे संदेह है-कि क्या बोला गया है. आशा
है ६/६ कान वाले (तेज आँख के लिए तो यही इस्तेमाल
करते हैं डाक्टर लोग, तेज कान के लिए भी शायद यही
स्पेसिफिकेशन हो) मेरी मदद करेंगे शब्दों की पहचान
में. 




गीत के बोल:

बोलो सजनी बोलो
चंदा को देख क्यूँ 
कुमुद्कली नहीं फूली
अंग समाती है

बोलो सजनी बोलो

सूरज को देख क्यों
सूर्यमुखी हो मन में दुखी
किल जाती है

है क्या कारण क्या कारण

प्रीतम दर्शन
हाँ, प्रीतम दर्शन
प्रीतम दर्शन प्रीतम दर्शन

आई बहार क्यूँ बुलबुल खुश हो
मस्त तराना गाता है

मैं क्या जानूं

बुलबुल से पूछिए
बहार में क्यूँ मस्त तराना गाता है
बुलबुल गुल से मिल जाता है
बुलबुल गुल से मिल जाता है
...........................................
Bolo sajni bolo-Nirmala 1938

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Mar 12, 2009

मैं बन का पंछी-अछूत कन्या १९३६

सन १९३६ में आई थी फ़िल्म-अछूत कन्या । अशोक कुमार और
देविका रानी की मुख्या भूमिकाओं वाली इस फ़िल्म में एक बहुत
लोकप्रिय गीत है-मैं बन का पंछी । इस गीत को स्वयं देविका रानी
और अशोक कुमार ने गाया है। संगीत है सरस्वती देवी का और
इसके बोल जे एस कश्यप के लिखे हुए हैं। पुराने गीतों के प्रेमियों ने
ये ज़रूर सुना होगा।

इसको ज्यादा प्रसिद्धि दूरदर्शन के कार्यक्रमों ने दिलाई जिसमे इस गाने
के अंश समय समय पर दिखाए जाते रहे। एक बार ये फ़िल्म दूरदर्शन
द्वारा दिखाई भी गई और बस वही एक मौका था जब मैंने भी इस फ़िल्म
को देखा।

सरस्वती देवी उर्फ़ "खुर्शीद मंचेर्षर मिनोचर होमजी " की ये बतौर संगीत
निर्देशक दूसरी फ़िल्म थी। उनकी पहली फ़िल्म थी-"जवानी की हवा" जो
सन १९३५ में आई थी। इस गीत का एक रिकॉर्ड ज़ारी हुआ जिसमे कोई
गीत नहीं था, केवल फ़िल्म का संगीत था। इस फ़िल्म में भी देविका रानी
नायिका की भूमिका में थीं। अतः, अछूत कन्या के गीतों के माध्यम से ही
उनको प्रसिद्धि मिली




गाने के बोल:

मैं बन की चिड़िया बन के बन बन बोलूं रे
मैं बन का पन्छी बन के संग संग डोलूं रे
मैं बन की चिड़िया बन के बन बन बोलूं रे
मैं बन का पन्छी बन के संग संग डोलूं रे

मैं डाल डाल उड़ जाऊँ
नहीं पकड़ाई मैं आऊँ
मैं डाल डाल उड़ जाऊँ
नहीं पकड़ाई मैं आऊँ
तुम डाल डाल मैं पात पात
बिन पकड़े कभी न छोड़ूँ
संग संग डोलूं रे
तुम डाल डाल मैं पात पात
बिन पकड़े कभी न छोड़ूँ
संग संग डोलूं रे
बन बन बोलूं रे

मैं बन की चिड़िया बन के बन बन बोलूं रे
मैं बन का पन्छी बन के संग संग डोलूं रे
मैं बन की चिड़िया बन के बन बन बोलूं रे
संग संग डोलूं रे
.......................................................................
Main ban ka panchhi-Acchut Kanya 1936

Artists: Ashok Kumar, Devika Rani

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