सयाने कहते हैं कि राहुल देव बर्मन के बाद अगर कोई धमाका
हुआ हिंदी फिल्म संगीत के क्षेत्र में तो वो हैं ए. आर. रहमान.
अपनी अलग सी आवाजों के लिए ए आर रहमान जाने जाते
हैं. शुरू शुरू में वे पूरे दक्षिण भारतीय से सुनाई देते थे मगर
सुभाष घी की फिल्म ताल के बाद वे उत्तर भारतीय संगीत की
शैली के साथ मित्रता कर बैठे और उनकी कई धुनें आप चकित
रह जायेंगे सुन के और अंदाजा लगाना कठिन होगा कि ये सब
दक्षिण मूल के संगीतकार की देन हैं.
आज आपको फिल्म “दिल से” से शीर्षक गीत सुनवा रहे हैं जिसमें
उत्तर भारतीय मसाला कम है और ये रहमान की ट्रेडमार्क धुनों
में से एक है. उनकी विशिष्ट गायकी जनता पहचान जाती है. ये
सिलसिला “वंदे मातरम” के गायन के बाद शुरू हुआ जिसके बाद
जनता रहमान के गायन की मुरीद बन गयी.
फिल्म “दिल से” में जो संगीत ए आर रहमान ने दिया है
उसमें दक्षिण भारतीय शैली की खुशबू काफ़ी अंदर तक घुसी
हुई है. बावजूद इसके फिल्म के गीत कर्णप्रिय हैं. आपको इस
फिल्म से पहले छैयां छैयां नहीं करवाई थी. आज सुनते हैं इस
फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत जो सुखविंदर, सपना अवस्थी
और साथियों ने गाया है.
फिल्म दिल से की कहानी काश्मीर की पृष्ठभूमि में घूमती है.
फिल्म में मनीषा कोइराला ने बढ़िया अभिनय किया है. इस
गीत में हालांकि मलाईका अरोरा ने अभिनय किया है. वे इस
गीत में ही नज़र आती हैं. लिरिल गर्ल प्रिटी की शायद ये
पहली फिल्म थी. रेल के ऊपर फिल्माया गीत हिंदी फिल्म में
काफ़ी दिन बाद देखने को मिला है.
गीत के बोल:
जिनके सर हो इश्क की छाँव
पाँव के नीचे जन्नत होगी
जिनके सर हो इश्क की छाँव
वो यार है जो खुशबू की तरह
है जिसकी जुबान उर्दू की तरह
मेरी शाम रात मेरी कायनात
वो यार मेरा सैयां सैयां
चल छैयां छैयां छैयां छैयां
गुलपोश कभी इतराए कहीं
महके तो नज़र आ जाए कहीं
तावीज़ बना के पहनूं उसे
आयत की तरह मिल जाए कहीं
वो यार है जो ईमान की तरह
मेरा नगमा वही मेरा कलमा वही
मेरा नगमा नगमा मेरा कलमा कलमा
यार मिसाल-ए-ओस चले
पाँव के तले फिरदौस चले
कभी डाल-डाल कभी पात-पात
मैं हवा पे ढूंढूं उसके निशाँ
उदित नारायण सहज और सरल गायक हैं। उनसे एक कठिन गाना गवाया है अ आर रहमान ने फ़िल्म "दिल से" में । बोल लिखे हैं गुलज़ार ने। फ़िल्म का सबसे कर्णप्रिय गीत कह सकते हैं आप इसको। वैसे, फ़िल्म का दूसरा गीत "छैयां छैयां" ज्यादा लोकप्रिय हुआ है। इस ब्लॉग का मकसद है आपको वो गाने बतलाना जो मधुर हैं और कम सुने गए हैं। इस प्रयास में कुछ लोकप्रिय गीत भी इसमे शामिल किए जाते हैं ताकि इसकी टी आर पी बनी रहे। (आजकल टी आर पी का ज़माना है जबसे सास-बहू सीरियल आए हैं और सब जगह छाये हुए हैं)। जो नगाडे रहमान ने इस्तेमाल किए हैं इस गाने में वो उत्तर भारतीय से प्रतीत होते हैं। इस गाने में पाखी पाखी करने वाली आवाज़ महालक्ष्मी अय्यर की है।
ऐ अजनबी तू भी कभी आवाज़ दे कहीं से मैं यहाँ टुकड़ों में जी रहा हूँ तू कहीं टुकड़ों में जी रही है
ऐ अजनबी तू भी कभी आवाज़ दे कहीं से ऐ अजनबी तू भी कभी आवाज़ दे कहीं से
रोज़ रोज़ रेशम सी हवा, आते जाते कहती है बता रेशम सी हवा कहती है बता वो जो दूध धुली, मासूम कली वो है कहाँ कहाँ है वो रोशनी, कहाँ है वो जान सी कहाँ है मैं अधूरा, तू अधूरी, जी रही है
ऐ अजनबी तू भी कभी आवाज़ दे कहीं से मैं यहाँ टुकड़ों में जी रहा हूँ तू कहीं टुकड़ों में जी रही है
तू तो नहीं है लेकिन, तेरी मुस्कुराहट है चेहरा कहीं नहीं है पर, तेरी आहट है तू है कहाँ कहाँ है, तेरा निशाँ कहाँ है मेरा जहाँ कहाँ है मैं अधूरा, तू अधूरी जी रही है
ऐ अजनबी तू भी कभी आवाज़ दे कहीं से मैं यहाँ टुकड़ों में जी रहा हूँ तू कहीं टुकड़ों में जी रही है