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Dec 8, 2016

सुन ले ये सारा ज़माना-फासले १९८५

फिल्म प्रेम के गीत से एक गीत और याद आ गया लगे हाथ वो
भी सुन लीजिए. तब्बू की बहन फरहा पर फिल्माया गया फिल्म
फासले का गीत. शहरयार के गीतों और शिव हरि के संगीत से
सजी फिल्म फासले के गीत चर्चित हुए थे.

फिल्म में नवागंतुक रोहन कपूर नायक हैं. फिल्म में सुनील दत्त,
रेखा, फारूख शेख जैसे कलाकार भी हैं. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर
पिट गई थी. रोहन कपूर गायक महेंद्र कपूर के सुपुत्र हैं. नायक
नायिका दोनियो की ये पदार्पण फिल्म है. गौरतलब है फरहा की
छोटी बहन ने फरहा के डेब्यू के ठीक दस साल बाद फिल्मों में
कदम रखा था फिल्म प्रेम से.





गीत के बोल:

सुन ले ये सारा ज़माना किया प्यार तो क्या शरमाना
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी नाचूंगी
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी
सुन ले ये सारा ज़माना किया प्यार तो क्या शरमाना
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी नाचूंगी
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी

फूल वफ़ा के खिल के रहें बाकी ना अरमान दिल के रहें
पास ही हम मंजिल के रहें मिलना था तुमसे मिल के रहें
दिल को है आस आयेंगे पास यादों के रास्ते
सुन शोख सदा पायल की मेरी आँख खुशी से छलकी
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी नाचूंगी
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी

चाहे ये दुनिया हमपे हँसे चाहे हमें दीवाना कहे
चाहे हमें अब मरना पड़े पूरे करें जो वादे किये
रस्म-ओ-रिवाज़ तोड़ेंगे आज जीने के वास्ते
दिन है ये मुरादों वाला जीने के इरादों वाला
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी नाचूंगी
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी

सुन ले ये सारा ज़माना किया प्यार तो क्या शरमाना
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी नाचूंगी
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी
…………………………………………………………………..
Sun le ye sara zamana-Faasle 1985

Artists: Rekha, Farah, Rohan Kapoor

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Jun 11, 2011

हम चुप हैं -फासले १९८५

बरसों से हम सुनते आये-कुछ मीठा हो जाये। एक विज्ञापन
ने इसको अपने तरीके से सुनाया। गीत और विज्ञापन से आदमी
के फंडे ज़ल्दी क्लीयर होते हैं। अब हम अपने अंदाज़ में कहते
हैं-कुछ हरा भरा हो जाये। गीत में हरियाली भरपूर है और हम
इसे पर्यावरण प्रेमी गीतों की कतार में लगा सकते हैं। हर आदमी
का अपना नजरिया होता है गीत को देखने का। अब भैंस और
बकरी चराने वाला ढूंढेगा कि ऐसी जगह कहाँ है जहाँ गद्देदार
घास हो जिसे जानवर जी भर के चर सकें और चराने वाला उसपर
लोट भी लगा सके। । जंगल पर ज्यादती कर के चूल्हा जलाने वाला
अपने हिसाब से देखेगा गीत को, कहाँ ऐसे पेड़ मिलेंगे जिससे हमेशा
का मुफ्त ईंधन मिलता रहे। अगर फिल्म यश चोपड़ा द्वारा निर्मित/
निर्देशित है तो फिर आपको प्लेन का टिकट लेकर बाहर के देश में
ही ढूंढना पड़ेगा ऐसे स्थानों को।


आपको आज एक युगल गीत सुनवाते हैं सन १९८५ से। शिव हरी
नाम की ख्यातनाम संगीतकार जोड़ी ने इस गीत की धुन बनाई है।
हरी प्रसाद चौरसिया और शिव कुमार शर्मा शास्त्रीय संगीत की बहुत
बड़ी हस्तियाँ हैं। फिल्म सिलसिला से शुरू हुआ उनका फ़िल्मी सफ़र
थोड़े समय ही चला और शायद बोलीवुड की तिकड़मबाजियों और पेंचों
से पाला पढने के बाद उन्होंने फैसला किया होगा कि शास्त्रीय संगीत
पर ध्यान देना ही बेहतर है। वैसे भी फिल्मों में उलझने से उनका
शास्त्रीय संगीत के सफ़र में रुकावटें ज़रूर आई होंगी कुछ समय के
लिए ही सही। ये अटकल और अनुमान मात्र है, हो सकता है वजह
कुछ और हो।

गीत लिखा है शहरयार ने जिन्होंने उमराव जान जैसी फिल्म के गीत
भी लिखे हैं। गीत गाया है किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने।




geet ke bol:

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं
धड़कनों को आहटों को
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं
धड़कनों को आहटों को
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं

देखो अब दुनिया को गौर से
पहले से नई पहले से हसीं
हम तुमको मिलना था मिल गए
क्या ये आसमाँ कौन ये ज़मीं
हम जो देखें तुमको देखें
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं
धड़कनों को आहटों को
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं


लफ़्ज़ों में जिनको ना कह सके
आँखों से कहें होंठों से सुनें
ख़ुशबू के साए में बैठ के
फूल हम चुनें ख़्वाब हम बुनें
इसके आगे कुछ ना सोचें
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं
धड़कनों को आहटों को
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं

.....................................
Hum chup hain-Faasle 1985

Artists: Rohan Kapoor, Farha

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