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Feb 28, 2018

याद तेरी आयेगी-एक जान हैं हम १९८३

सन १९८३ की एक फिल्म जिसे देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ
इस वजह से कि जो फिल्म देखने गए थे उसकी टिकटें बिकना
बंद हो चुकी थीं. समय का सदुपयोग करना था इसलिए दूसरे
सिनेमा हॉल में घुस गए जिसमें ये फिल्म चल रही थी.

सुनते हैं इस फिल्म से एक गीत राजीव कपूर और दिव्या राणा
पर फिल्माया गया जिसे शब्बीर कुमार ने गाया है. इसे फिल्म
का शीर्षक गीत भी कह सकते हैं हम.




गीत के बोल:

याद तेरी आयेगी मुझको बड़ा सतायेगी
याद तेरी आयेगी मुझको बड़ा सतायेगी
ज़िद ये झूठी तेरी मेरी जान ले के जाएगी
याद तेरी आयेगी मुझको बड़ा सतायेगी
ज़िद ये झूठी तेरी मेरी जान ले के जाएगी
याद तेरी आयेगी मुझको बड़ा सतायेगी

तेरा साथ छूटा टूटा दिल तो ये जाना
कितना है मुश्क़िल दिल से यार को भुलाना
दिल का हमेशा से है दुश्मन ज़माना
ग़म ये है तूने मुझे ना पहचाना
ना पहचाना

याद तेरी आयेगी मुझको बड़ा सतायेगी
ज़िद ये झूठी तेरी मेरी जान ले के जाएगी
याद तेरी आयेगी मुझको बड़ा सतायेगी

बुझ गया सूरज जले चाँद तारे
नज़रें धुंआँ हैं धुंआँ सारे नज़ारे
मुझे दिल लगाने की क्या तूने सज़ा दी
बिना सोचे समझे दिल की दुनिया जला दी
दुनिया जला दी

याद तेरी आयेगी मुझको बड़ा सतायेगी
ज़िद ये झूठी तेरी मेरी जान ले के जाएगी
याद तेरी आयेगी मुझको बड़ा सतायेगी

हँस के सहूँगा सारे दुनिया के ये ग़म
मर भी गया तो होगा प्यार नहीं कम
छीन ले तुझे जो मुझसे किसमें है ये दम
तन से जुदा हैं तो क्या एक जान हैं हम
एक जान हैं हम एक जान हैं हम

याद मेरी आयेगी तुझको बड़ा सतायेगी
ज़िद ये झूठी तेरी मेरी जान ले के जाएगी
याद मेरी आयेगी तुझको बड़ा सतायेगी
....................................................
Yaad teri aayegi(male)-Ek jaan hain ham 1983

Artists: Rajeev Kapoor, Divya Rana

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Sep 12, 2017

अजीब सानेहा-गमन १९७९

जो लीक पर चला करते हैं उन्हें धन ज्यादा मिलता है और जो
अलग हट के कुछ करने की कोशिश करते हैं उन्हें वाह वाह ही
ज्यादा मिला करती है. संगीतकार जयदेव के साथ भी ऐसा ही
कुछ था. उन्होंने कई प्रतिभाओं को मौके दिए. एक नाम उनमें
है-हरिहरन.

सुनते हैं शहरयार का लिखा एक गीत फिल्म गमन से. इसे सुन
कर आपको फिल्म हम दोनों का एक गीत याद आएगा-कभी खुद
पे कभी हालत पे रोना आया.




गीत के बोल:

अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो
मैं अपने साये से
मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो
मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो
अजीब सानेहा

हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुंधला
हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुंधला
हर एक ज़ख़्म मेरे दिल का भर गया यारो
हर एक ज़ख़्म मेरे दिल का भर गया यारो
अजीब सानेहा

भटक रही थी जो
भटक रही थी जो कश्ती वो ग़क़र-ए-आब हुई
चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो
चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो
अजीब सानेहा

वो कौन था
वो कौन था वो कहाँ का था क्या हुआ था उसे
सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो
सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो

अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो
मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो
अजीब सानेहा
……………………………………………………….
Ajeeb saneha-Gaman 1979

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Sep 8, 2017

इन आँखों की मस्ती के-उमराव जान १९८१

१९८१ की सुपर हिट म्यूजिकल फिल्म उमराव जान से अगला गीत
सुनते हैं आशा भोंसले की आवाज़ में.

इसके बोल भी शहरयार के हैं और संगीत खय्याम का.




गीत के बोल:

इन आँखों की मस्ती के
इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं
मस्ताने हज़ारों हैं
इन आँखों से वाबस्ता
इन आँखों से वाबस्ता अफ़साने हज़ारों हैं
अफ़साने हज़ारों हैं
इन आँखों की मस्ती के

इक तुम ही नहीं तन्हा
इक तुम ही नहीं तन्हा उलफ़त में मेरी रुसवा
उलफ़त में मेरी रुसवा
इस शहर में तुम जैसे
इस शहर में तुम जैसे दीवाने हज़ारों हैं
दीवाने हज़ारों हैं

इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं
इन आँखों की मस्ती के

इक सिर्फ़ हम ही मय को
इक सिर्फ़ हम ही मय को आँखों से पिलाते हैं
आँखों से पिलाते हैं
कहने को तो दुनिया में
कहने को तो दुनिया में मयखाने हज़ारों हैं
मयखाने हज़ारों हैं
इन आँखों की मस्ती के

इस शम्म-ए-फ़रोज़ाँ को
इस शम्म-ए-फ़रोज़ाँ को आंधी से डराते हो
इस शम्म-ए-फ़रोज़ाँ के
इस शम्म-ए-फ़रोज़ाँ के परवाने हज़ारों हैं
परवाने हज़ारों हैं

इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं
इन आँखों की मस्ती के
 …………………………………………………………………….
In ankhon ki masti ke-Umrao Jaan 1981

Artist: Rekha

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Dec 8, 2016

सुन ले ये सारा ज़माना-फासले १९८५

फिल्म प्रेम के गीत से एक गीत और याद आ गया लगे हाथ वो
भी सुन लीजिए. तब्बू की बहन फरहा पर फिल्माया गया फिल्म
फासले का गीत. शहरयार के गीतों और शिव हरि के संगीत से
सजी फिल्म फासले के गीत चर्चित हुए थे.

फिल्म में नवागंतुक रोहन कपूर नायक हैं. फिल्म में सुनील दत्त,
रेखा, फारूख शेख जैसे कलाकार भी हैं. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर
पिट गई थी. रोहन कपूर गायक महेंद्र कपूर के सुपुत्र हैं. नायक
नायिका दोनियो की ये पदार्पण फिल्म है. गौरतलब है फरहा की
छोटी बहन ने फरहा के डेब्यू के ठीक दस साल बाद फिल्मों में
कदम रखा था फिल्म प्रेम से.





गीत के बोल:

सुन ले ये सारा ज़माना किया प्यार तो क्या शरमाना
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी नाचूंगी
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी
सुन ले ये सारा ज़माना किया प्यार तो क्या शरमाना
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी नाचूंगी
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी

फूल वफ़ा के खिल के रहें बाकी ना अरमान दिल के रहें
पास ही हम मंजिल के रहें मिलना था तुमसे मिल के रहें
दिल को है आस आयेंगे पास यादों के रास्ते
सुन शोख सदा पायल की मेरी आँख खुशी से छलकी
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी नाचूंगी
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी

चाहे ये दुनिया हमपे हँसे चाहे हमें दीवाना कहे
चाहे हमें अब मरना पड़े पूरे करें जो वादे किये
रस्म-ओ-रिवाज़ तोड़ेंगे आज जीने के वास्ते
दिन है ये मुरादों वाला जीने के इरादों वाला
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी नाचूंगी
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी

सुन ले ये सारा ज़माना किया प्यार तो क्या शरमाना
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी नाचूंगी
दिल कहता है मेरा आज मैं नाचूंगी
…………………………………………………………………..
Sun le ye sara zamana-Faasle 1985

Artists: Rekha, Farah, Rohan Kapoor

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Aug 21, 2015

जुस्तजू जिसकी थी-उमराव जान १९८१

कम विवरण वाले गानों की सीरीज़ में आपका एक बार फिर
से स्वागत है. आज सुनते हैं १९८१ की फिल्म उमराव जान
से आशा भोंसले का गाया एक मधुर गीत.

बोल शहरयार के हैं और संगीत खैय्याम का. फिल्म के गीत
और इसकी कहानी पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है इसलिए
कभी कभी लगता है इसपर चर्चा करना पुरानी लालटेनों और
हैलोजन बल्बों को लालटेन दिखाने जैसा काम होगा.

आपसे पहले ही वादा है इस गीत का विवरण कम से कम देंगे
ऐसा नहीं है कि विवरण के बदले चाट पकौड़ी बनाने का कोई
फार्मूला पेश कर दें. एक बार मैंने सोचा ज़रूर था कि किसी
पोस्ट में चुटकुले पेश किये जाएँ, मगर फेसबुक और व्हाट्स
एप वगैरह के बढते चलन से ये सब तो हमें किसी भी समय
उपलब्ध हो जाता है चाहे हम खाने की मेज़ पर बैठे हों या फिर
संडास में. 



गीत के बोल:

जुस्तजू जिसकी थी उसको तो न पाया हमने
इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने

तुझको रुसवा न किया, खुद भी पशेमाँ न हुये
इश्क़ की रस्म को इस तरह निभाया हमने
जुस्तजू जिसकी थी


कब मिली थी कहाँ बिछड़ी थी, हमें याद नहीं
ज़िंदगी तुझको तो, बस ख़्वाब में देखा हमने

जुस्तजू जिसकी थी

ऐ अदा और सुनाये भी तो क्या हाल अपना
उम्र का लम्बा सफ़र तय किया तन्हा हमने

जुस्तजू जिसकी थी उसको तो न पाया हमने
इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने
जुस्तजू जिसकी थी
.................................................................


Justju jiski thi-Umrao Jaan 1981

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Jun 29, 2015

ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में-उमराव जान १९८१

गायक तलत अज़ीज़ अगर गायकी का पेशा नहीं चुनते तो
फुल टाइम मॉडल हो सकते थे या अभिनेता बन सकते थे.
खैर, होता वही है जो नियति को मंज़ूर होता है. वे गायन के
अलावा किसी और बात के लिए नहीं जाने गए.

अच्छी सूरत और आवाज़ के मालिक तलत अज़ीज़ को फिल्म
लाइन में ज्यादा मौके नहीं मिले मगर जितने भी मिले
उनमें वे अपनी छाप अवश्य छोड़ गए. नमूने के लिए इसी
गीत को लीजिए-उमराव जान के.

तलत अज़ीज़ ऐसे समय पर गायन के क्षेत्र में उतरे जिस समय
जगजीत सिंह का नाम चारों ओर छाया हुआ था. पडोसी देश के
मेहँदी हसन और गुलाम अली की ग़ज़लें ज्यादा सुनी जाती थीं.

आइये गज़ल सुनी जाए जो शहरयार ने लिखी है और इसकी धुन
बनाने का काम खैय्याम ने किया है.  





गीत के बोल:

ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें
ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें

सुर्ख फूलों से महक उठती हैं दिल की राहें
दिन ढले यूँ तेरी आवाज़ बुलाती है हमें

ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें

याद तेरी कभी दस्तक, कभी सरगोशी से
रात के पिछले पहर रोज़ जगाती है हमें

ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें

हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यूँ है
अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें

ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें
ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें
..................................................................
Zindagi jab bhi teri bazm mein-Umrao Jaan 1981

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Feb 28, 2015

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान-गमन १९८०

सार्थक सिनेमा जिसे कहते हैं उसमें से एक फिल्म-गमन. हालाँकि
फिल्म समस्या पूर्ती का कोई दावा नहीं करती मगर महानगरों की
कशमकश भरी, दो वक्त की रोटी की ज़द्दोज़हद वाली जिंदगी को बेपर्दा
ज़रूर करती है. गांव से शहर आये युवकों का क्या हाल होता है इसके
इर्द गिर्द कथानक घूमता है फिल्म का. गीत है सीने में जलन, आँखों
में तूफ़ान सा क्यूँ है. आज के समय में इसे प्रदूषण के हिसाब से सोचें
तो-आँखों में जलन सीने में तूफ़ान सा क्यूँ है-बेवजह की भाग दौड
सड़कों पे अनगिनत गाड़ियों की और उनसे उठने वाला धुआं, उडती
हुई धूल, ये सब शरीर पर अत्याचार करते हैं.

शहरयार का लिखा गीत जिससंगीत से संवारा है जयदेव ने, फिल्माया
गया है फारूक शेख पर और इसे गाया है सुरेश वाडकर ने. फिल्म में
इसे बैकग्राउंड स्कोर की तरह इस्तेमाल किया गया है. सुरेश वाडकर को
कुछ ऐसे ही गीतों ने पहचान दिलाई थी उस वक्त.



गीत के बोल:

सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान सा क्यों है
इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है

दिल हैं तो धड़कने का बहाना कोई ढूंढें
पत्थर की तरह बेहिस-ओ-बेजान सा क्यों है

तनहाई की ये कौन सी, मंज़िल है रफीकों
ता-हद-ए-नजर एक बयाबान सा क्यों है

क्या कोई नयी बात नजर आती है हम में
आईना हमे देख के हैरान सा क्यों है

सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान सा क्यों है
इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है
..............................................................................
Seene mein jalan aankhon mein toofan-Gaman 1980

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Jun 11, 2011

हम चुप हैं -फासले १९८५

बरसों से हम सुनते आये-कुछ मीठा हो जाये। एक विज्ञापन
ने इसको अपने तरीके से सुनाया। गीत और विज्ञापन से आदमी
के फंडे ज़ल्दी क्लीयर होते हैं। अब हम अपने अंदाज़ में कहते
हैं-कुछ हरा भरा हो जाये। गीत में हरियाली भरपूर है और हम
इसे पर्यावरण प्रेमी गीतों की कतार में लगा सकते हैं। हर आदमी
का अपना नजरिया होता है गीत को देखने का। अब भैंस और
बकरी चराने वाला ढूंढेगा कि ऐसी जगह कहाँ है जहाँ गद्देदार
घास हो जिसे जानवर जी भर के चर सकें और चराने वाला उसपर
लोट भी लगा सके। । जंगल पर ज्यादती कर के चूल्हा जलाने वाला
अपने हिसाब से देखेगा गीत को, कहाँ ऐसे पेड़ मिलेंगे जिससे हमेशा
का मुफ्त ईंधन मिलता रहे। अगर फिल्म यश चोपड़ा द्वारा निर्मित/
निर्देशित है तो फिर आपको प्लेन का टिकट लेकर बाहर के देश में
ही ढूंढना पड़ेगा ऐसे स्थानों को।


आपको आज एक युगल गीत सुनवाते हैं सन १९८५ से। शिव हरी
नाम की ख्यातनाम संगीतकार जोड़ी ने इस गीत की धुन बनाई है।
हरी प्रसाद चौरसिया और शिव कुमार शर्मा शास्त्रीय संगीत की बहुत
बड़ी हस्तियाँ हैं। फिल्म सिलसिला से शुरू हुआ उनका फ़िल्मी सफ़र
थोड़े समय ही चला और शायद बोलीवुड की तिकड़मबाजियों और पेंचों
से पाला पढने के बाद उन्होंने फैसला किया होगा कि शास्त्रीय संगीत
पर ध्यान देना ही बेहतर है। वैसे भी फिल्मों में उलझने से उनका
शास्त्रीय संगीत के सफ़र में रुकावटें ज़रूर आई होंगी कुछ समय के
लिए ही सही। ये अटकल और अनुमान मात्र है, हो सकता है वजह
कुछ और हो।

गीत लिखा है शहरयार ने जिन्होंने उमराव जान जैसी फिल्म के गीत
भी लिखे हैं। गीत गाया है किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने।




geet ke bol:

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं
धड़कनों को आहटों को
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं
धड़कनों को आहटों को
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं

देखो अब दुनिया को गौर से
पहले से नई पहले से हसीं
हम तुमको मिलना था मिल गए
क्या ये आसमाँ कौन ये ज़मीं
हम जो देखें तुमको देखें
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं
धड़कनों को आहटों को
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं


लफ़्ज़ों में जिनको ना कह सके
आँखों से कहें होंठों से सुनें
ख़ुशबू के साए में बैठ के
फूल हम चुनें ख़्वाब हम बुनें
इसके आगे कुछ ना सोचें
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं
धड़कनों को आहटों को
साँसें रुक सी गई हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं

.....................................
Hum chup hain-Faasle 1985

Artists: Rohan Kapoor, Farha

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Jan 20, 2010

ये क्या जगह है दोस्तों-उमराव जान १९८१

मुज़फ्फर अली निर्देशित फिल्म उमराव जान भी एक मील का पत्थर
कही जा सकती है हिंदी सिनेमा इतिहास में। इस फिल्म में कई कर्णप्रिय
गीत हैं। पूरे अल्बम पर आशा भोंसले लिखा हुआ है। कई साल के बाद
आशा भोंसले का ऐसा एल्बम आया जिसमे वे प्रमुख गायिका हैं। खय्याम
ने उनको विविधता भरे गीत दिए गाने को। अभिनेत्री रेखा ने इस फिल्म
में अविस्मरनीय भूमिका निभाई। एक गीत सुनिए, फिल्म पर बाकी चर्चा
बाद में .....


गीत के बोल:

ये क्या जगह है दोस्तों
ये क्या जगह है दोस्तों, ये कौन सा दयार है
ये कौन सा दयार है
हद-ए-निगाह तक जहां
हद-ए-निगाह तक जहां, गुबार ही गुबार है
गुबार ही गुबार है

ये क्या जगह है दोस्तों

ये किस मुकाम पर हयात
ये किस मुकाम पर हयात, मुझको ले के आ गई
मुझको ले के आ गई
न बस खुशी पे है जहाँ
न बस खुशी पे है जहाँ, न ग़म पे इख्तियार है
न ग़म पे इख्तियार है

ये क्या जगह है दोस्तों
ये कौन सा दयार है
ये कौन सा दयार है

तमाम उम्र का हिसाब
तमाम उम्र का हिसाब, मांगती है ज़िन्दगी
मांगती है ज़िन्दगी
ये मेरा दिल कहे तो क्या
ये मेरा दिल कहे तो क्या, के खुद से शर्मसार है
के खुद से शर्मसार है

ये क्या जगह है दोस्तों
ये कौन सा दयार है
ये कौन सा दयार है

बुला रहा है कौन
बुला रहा है कौन मुझको चिलमनों के उस तरफ़
मेरे लिये भी क्या कोई
मेरे लिये भी क्या कोई उदास बेक़रार है
उदास बेक़रार है

ये क्या जगह है दोस्तों
ये कौन सा दयार है
ये कौन सा दयार है
हद-ए-निगाह तक जहां, गुबार ही गुबार है
गुबार ही गुबार है

ये क्या जगह है दोस्तों

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