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Jun 26, 2015

बोले रे पपीहरा-गुड्डी १९७१

फिल्म गुड्डी में शीर्षक रोल जया भादुडी ने किया था.
हृषिकेश मुखर्जी निर्देशित इस फिल्म की काफी सराहना
हुई थी. स्कूल में पढ़ने वाली गुड्डी फिल्मों की दीवानी है.
वो फिल्मस्टार धर्मेन्द्र की दीवानी है फिल्म के कथानक
अनुसार. नायिका का नाम कुसम है लेकिन वो गुड्डी के
नाम से पहचानी जाती है.

अपने फिल्म प्रेम के चलते वो एक खयाली दुनिया में खो
जाती है और उसे फिल्म स्टार धर्मेन्द्र एक आदर्श व्यक्तित्व
प्रतीत होने लगता है. फिल्म का नायक उसके समक्ष शादी
का प्रस्ताव रखता है जिसे वो ठुकरा देती है.

उसकी मुलाकात फिल्मस्टार धर्मेन्द्र से होती है और उसे
वास्तविक जीवन और फिल्म जीवन में अंतर मालूम पढता
है तो उसकी ऑंखें खुलती हैं और अंत में वो नायक से शादी
करने के लिए तैयार हो जाती है. नायक का रोल समित भांजा
ने किया है. फिल्म की पटकथा और गीत गुलज़ार के लिखे
हुए हैं और संगीत वसंत देसाई का.

आज जो गीत हम आपको सुनवा रहे हैं वो वाणी जयराम ने
गाया है. दक्षिण भारत की फिल्मों में विभिन्न भाषाओँ में
गीत गाने वाली वाणी जयराम को हिंदी फिल्मों में ज्यादा
अवसर प्राप्त नहीं हुए. प्रस्तुत गीत उनका सबसे लोकप्रिय
हिंदी गीत है.




गीत के बोल:

बोले रे पपीहरा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
बोले रे पपीहरा

पलकों पर इक बूँद सजाए
बैठी हूँ सावन ले जाए
जाए पी के देस में बरसे
नित मन प्यासा, नित मन तरसे
बोले रे पपीहरा

सावन जो संदेसा लाए
मेरी आँख से मोती आए
जान मिले बाबुल के घर से
नित मन प्यासा, नित मन तरसे

बोले रे पपीहरा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
बोले रे पपीहरा
……………………………………………
Bole re papihara-Guddi 1971

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Jan 26, 2015

हमको मन की शक्ति देना-गुड्डी १९७१

२६ जनवरी के अवसर पर आपको देशभक्ति गीत की जगह
मन को सशक्त बनाने वाला गीत सुनवा रहे हैं. आजादी के
इतने सालों बाद भी भारतीय कहीं खो गया सा लगता है
भीड़ में. भीड़ तो बहुत है, भारतीयता कम होती जा रही है.
गीत में एक विचार जिसपर पूरा ध्यान फोकस किया गया
है वो ये है-दूसरों की जय के पहले खुद को जय करें. बात
सोलह आने सच है. एक बात इस सन्दर्भ में याद आती है
जो कसी बुज़ुर्ग ने बहुत पहले कही थी-पहले अपने प्रति
ईमानदार हो जाओ, बाद में दुनिया को इमानदारी दिखाना.
गीत गुलज़ार का लिखा हुआ है और उनके बेहतर गीतों में
से एक है. इसकी धुन वसंत देसी ने बनायीं है और गाया
है दक्षिण भारत की नामचीन गायिका-वाणी जयराम ने.



गीत के बोल:

हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें
हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें
हमको मन की शक्ति देना

भेदभाव अपने दिल से, साफ़ कर सकें
भेदभाव अपने दिल से, साफ़ कर सकें
दोस्तों से भूल हो तो, माफ़ कर सकें
दोस्तों से भूल हो तो, माफ़ कर सकें
झूठ से बचे रहें, सच का दम भरें
झूठ से बचे रहें, सच का दम भरें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें

हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें
हमको मन की शक्ति देना

मुश्किलें पड़ें तो हम पे, इतना कर्म कर
मुश्किलें पड़ें तो हम पे, इतना कर्म कर
साथ दें तो धर्म का, चलें तो धर्म पर
साथ दें तो धर्म का, चलें तो धर्म पर
खुद पे हौसला रहे, बदी से ना डरें
खुद पे हौसला रहे, बदी से ना डरें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें

हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें
हमको मन की शक्ति देना
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Hamko man ki shakti dena-Guddi 1971

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