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Jun 9, 2020

बड़े भोले हो-अर्धांगिनी १९५९

सिनेमा संसार एक सिद्धांत पर चलता है-चमक दमक. इस बात के
चलते जो परदे के पीछे के सृजनकर्ता होते हैं वो सामने नहीं आ पाते
या आते भी हैं तो उन्हें वो प्रसिद्धि और सम्मान नहीं मिलता जिसके
वे अधिकारी होते हैं.

फिल्म निर्माण में असंख्य लोगों को योगदान होता है और इनमें से
निर्देशक, गीतकार और संगीतकार के अलावा गायक कलाकारों को
लोकप्रियता मिल जाती है. तकनीकि से संबद्ध लोग भी लाईमलाईट
में आ जाते हैं जैसे कैमरामैन, साउंड रिकॉर्डिंस्ट वगैरह. आज के युग
में काफी जानकारी उपलब्ध है किसी भी फिल्म निर्माण से सम्बंधित.

ये चलन कुछ सालों से ही देखने में आया है जब से इस इंटरनेट नाम
की दुनिया पे सोशल मीडिया ने अपने पैर पूरी तरह से पसारे. उसके
पहले तक काफी लोग इन सब बातों को जैसे बंदरिया मरे बच्चे को
चिपटाए रखती है, वैसे ही चिपकाये रखते थे. इनमें से कई जानकार
तो ज्ञान को अपने साथ ही ले गए. कुछ जो वानप्रस्थ तक पहुँच चुके
हैं उन्होंने किताबें छपा के इस ज्ञान को अपने अधिकार क्षेत्र में ले
लिया जिसमें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी भी शामिल है.

आज जून महीने की ९ तारीख है. आज के दिन ढेर सारे सेलिब्रिटीज़
और बॉलीवुड कलाकार पैदा हुए थे. आज के दिन पैदा होने वाले प्रसिद्ध
लोगों में पुद्दुचेरी की राज्यपाल किरण बेदी, संगीतज्ञ अनुष्का शंकर,
संगीतज्ञ देबाशीष चक्रवर्ती, टेलीविज़न एक्टर करण वाही, तमिल सिनेमा
की नायिका मोहिनी, तेलंगाना शकुंतला, निर्माता निर्देशक रजत रवैल,
संगीतकार वसंत देसाई, गायिका-नायिका बी जयश्री, सुंदरी मनप्रीत ब्रार,
और महिला क्रिकेटर नेहा शर्मा हैं.

बॉलीवुड की बात करें तो नायिकाओं में अमीषा पटेल, सोनम कपूर,
मराठी भाषी अभिनेत्री पल्लवी सुभाष शामिल हैं. फिल्मकारों की बात
करें तो डूंडी उर्फ डूंडेश्वर राव पोथिना आज ही के दिन १९३२ में पैदा
हुए थे. जीतेन्द्र की फिल्म फ़र्ज़ और मिथुन की फिल्म साहस के
सह निर्माता वही थे सुन्दरलाल नाहटा के साथ.
आज हम आपको वसन्त देसाई के संगीत निर्देशन में तैयार एक
गीत सुनवायेंगे. इस गीत को लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और
इसे गाया है लता मंगेशकर ने. वसंत देसाई शुद्धतावादी परंपरा
के संगीतकार थे जिहोने भारतीयता को बनाये रखा अपने संगीत
में.

कृष्ण कन्हाई की मनोहारी सूरत से ये गीत शुरू होता है. नायिका
कन्हाई से वार्तालाप कर रही है और अपनी व्यथा उड़ेल रही है.
बंसी होंठ से लगा के अब कान्हा बोले भी तो क्या बोलें-इस बात
का सुन्दर वर्णन है दूसरे अंतरे में.





गीत के बोल:

बड़े भोले हो ओ ओ
बड़े भोले हो हँसते हो
सुन के दुहाई कन्हाई
कन्हाई कन्हाई
बड़े भोले हो

भागे हैं जग मेरी छाया से दूर
भागे हैं जग मेरी छाया से दूर
तन मन मेरा सबकी ठोकर से चूर
फिर फिर के फिर तुमरे दर पे आई
हो ओ ओ फिर फिर के फिर तुमरे दर पे आई

बड़े भोले हो ओ ओ
बड़े भोले हो हँसते हो
सुन के दुहाई कन्हाई
कन्हाई कन्हाई
बड़े भोले हो

जलते आँसू जलते आँसू
जलते आँसू भीगे नयनों का हार
देखा तो है सब कुछ तुमने गोपाल
फिर तुमरी अखियाँ हैं क्यूँ मुस्काई
हो ओ ओ फिर तुमरी अखियाँ हैं क्यूँ मुसकाई

बड़े भोले हो ओ ओ
बड़े भोले हो

कित जाऊँ हो ओ ओ
कित जाऊँ मैं मुख तो खोलो ज़रा
चोर बन के चुप क्यूँ हो बोलो ज़रा
अच्छी ये बंसी की ओट लगाई
हो ओ ओ अच्छी ये बंसी की ओट लगाई

बड़े भोले हो ओ ओ
बड़े भोले हो हँसते हो
सुन के दुहाई कन्हाई
कन्हाई कन्हाई
बड़े भोले हो
………………………………….
Bade bhole ho-Ardhangini 1959

Artists: Meena Kumari,

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Dec 11, 2019

तार तार बज रहा-स्कूल मास्टर १९५९

सुरबहार एक वाद्य है जिसकी ध्वनि सितार से मिलती
जुलती है. आपने फिल्म के गीतों में वीणा शब्द सबसे
ज्यादा सुना होगा. उसके बाद सितार का नाम आता है.
तबला तो अक्सर हास्य गीतों में ही बजता है.

१९५९ की फिल्म स्कूल मास्टर में एक युगल गीत है
मन्ना डे और लता मंगेशकर का गाया हुआ जिसमें इस
वाद्ययंत्र का नाम आया है. कवि प्रदीप की रचना है और
वसंत देसाई का संगीत. एक अच्छा रोमांटिक गीत है ये.





गीत के बोल:

आ आ आ आ आ आ आ आ आ
तार तार बज रहा दिल के सुरबहार का
गुनगुना ले आ पिया गीत आज प्यार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ

तार तार बज रहा दिल के सुरबहार का
गुनगुना ले आ पिया गीत आज प्यार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ

आ के हाथ थाम ले मुझपे नशा छा गया
ओ जब किसी का दिल लुटे आज वो दिन आ गया
आ के हाथ थाम ले मुझपे नशा छा गया
ओ जब किसी का दिल लुटे आज वो दिन आ गया
लूट लें आ जा मजा इस बहार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ

समझ ले साजन ये जवानी का इशारा
जवानी का इशारा हो हो हा हा
ये वो उमर है जो नहीं आये दोबारा
नहीं आये दोबारा
हो ओ ओ यूँ ही गुजार जाए न ये समा ख़ुमार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ

ये रंगीला वक्त है दूर दूर क्यूँ रहें
हो दिल से मिला दिल है जब फिर जुदाई क्यूँ सहें
ये रंगीला वक्त है दूर दूर क्यूँ रहें
हो दिल से मिला दिल है जब फिर जुदाई क्यूँ सहें
आज के मौसम में क्या काम इंतज़ार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ
………………………………………………
Tara taar baj raha-School Master 1959

Artists: Kamini Kadam, BR Panthulu

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Aug 18, 2019

अपने सैयां से नैना लड़ईबे-अर्धांगिनी १९५९

वसंत देसाई एक प्रतिभाशाली संगीतकार थे. पहलवान जैसी
कद काठी वाले वसंत देसाई की धुनें बेहद कोमल होतीं. एक
मधुर गीत सुनते हैं राजकुमार और मीना कुमारी अभिनीत
फिल्मअर्धांगिनी से. फील गुड गीत है जिसके अंत में नायक
नायिका का मिलन होता है. गीत में एक बच्चा भी नायिका
के साथ नाचने की कोशिश कर रहा है. घरेलु किस्म का माहौल
है. सास के रोल में हैं दुर्गा खोटे जिनकी एक झलक गीत में
मिलती है.

गीत की टैग लाइन है- सजना के कंगना में खड़ी मुस्काई के
वाह जी वाह क्या खूब कही है. गीत मजरूह का है और इसे
गाया है लता मंगेशकर ने.




गीत के बोल:

अपने सैयां से नैना लड़ईबे हमार कोई का करिहे
अपने सैयां से नैना लड़ईबे हमार कोई का करिहे

झुमका पहनूंगी दर्पण देखूँगी
झुमका पहनूंगी दर्पण देखूँगी
बिंदिया माथे की तन तन देखूंगी
बिंदिया माथे की तन तन देखूंगी
अँखियाँ की अँखियाँ में कजरा दईबे
हमार कोई
हमार कोई का करिहे
अपने सैयां से नैना लड़ईबे हमार कोई का करिहे

नहीं रुकने की मैं दुनिया के डर से
नहीं रुकने की मैं दुनिया के डर से
कोई बोली बोले न टलूंगी डर से
कोई बोली बोले न टलूंगी डर से
सजना के कंगना में खड़ी मुस्काई के
हमार कोई हमार कोई का करिहे

अपने सैयां से नैना लड़ईबे हमार कोई का करिहे

सब मेरे उनकी ही नज़र देखेंगे
सब मेरे उनकी ही नज़र देखेंगे
मैं उधर देखूँगी वो इधर देखेंगे
मैं उधर देखूँगी वो इधर देखेंगे
कभी घूँघटा कभी अचरा सरकाई के
हमार कोई हमार कोई का करिहे

अपने सैयां से नैना लड़ईबे हमार कोई का करिहे
अपने सैयां से अपने रसिया से
अपने बलमा से नैना लड़ईबे
.............................................................................
Apne saiyan se naina-Ardhangini 1959

Artists: Meena Kumari, Durga Khote

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May 2, 2017

नाव चली-आशीर्वाद १९६८

फिल्म आशीर्वाद से एक अनूठा गीत रेलगाड़ी वाला आप
पहले सुन चुके हैं. अब सुनते हैं दूसरा गीत जिसके गायक,
गीतकार और संगीतकार वही हैं जो पिछले गीत में थे.

परदे पर इसे अशोक कुमार गा रहे हैं. मैराथॉन स्टाइल का
गीत २ मिनट में गा लिया गया है. ये है पुराने ज़माने का
रैप सोंग.



गीत के बोल:

नाव चली
नानी की नाव चली
नीना के नानी की नाव चली
लम्बे सफ़र पे

सामान घर से निकाले गये
नानी के घर से निकाले गये
इधर से उधर से निकाले गये
और नानी की नाव में डाले गये
क्या क्या डाले गये

एक छड़ी  एक घड़ी
एक झाड़ू  एक लाडू
एक सन्दुक  एक बन्दुक
एक तलवार  एक सलवार
एक घोड़े की जीन
एक ढोलक  एक बीन
एक घोड़े की नाल
एक जीवर का जाल
एक लह्सुन  एक आलू
एक तोता  एक भालू
एक डोरा  एक डोरी
एक बोरा  एक बोरी
एक डंडा  एक झंडा
एक हंडा  एक अंडा
एक केला  एक आम
एक पक्का  एक कच्चा
और
टोकरी में एक बिल्ली का बच्चा
म्याऊँ म्याऊँ म्याऊँ
फिर एक मगर ने पीछा किया
नानी की नाव का पीछा किया
नीना के नानी की नाव का पीछा किया
फिर क्या हुआ

चुपके से  पीछे से
ऊपर से  नीचे से
एक एक सामान खींच लिया
एक बिल्ली का बच्चा
एक केला  एक आम
एक पक्का  एक कच्चा
एक अंडा  एक हंडा
एक झंडा  एक डंडा
एक बोरी  एक बोरा
एक डोरी एक डोरा
एक तोता  एक भालू
एक लह्सुन  एक आलू
एक जीवर का जाल
एक घोड़े की नाल
एक ढोलक  एक बीन
एक घोड़े की जीन
एक तलवार  एक सलवार
एक बन्दूक एक संदूक
एक लाडू  एक साडू
एक छड़ी  एक घड़ी
मगर नानी क्या कर रही थी

नानी थी बिचारी बुड्ढी बहरी
नीना की नानी बुड्ढी बहरी
नानी की नींद थी इतनी गहरी
इतनी गहरी
कित्ती गहरी
नदिया से गहरी  दिन दोपहरी
रात की रानी  ठंडा पानी
गरम मसाला  पेट में ताला
साड़े सोला  पंद्रह एका पंद्रह
दूना तीस  तीया पैंतालिस
चौके साठ  पौना पच्चत्तर
छक्के नब्बे  साती पिचलन
आठी बीसन  नबर पचीसा
गले में रस्सा
हा हा हा
……………………………………
Naav chali-Aashirwad 1968

Artist: Ahok Kumar, Baby Sarika

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Sep 9, 2016

ओ दिलदार बोलो एक बार-स्कूल मास्टर १९५९

एक वही, हमारे पुराने मित्र जो इस गीत के बोल-उलझे उलझे
को ulze ulze गाते हैं याद आ गए आज. ये गीत सुनते सुनते
याद आये और ऐसे आये कि इस गीत को ३-४ बार सुन लिया.
zee चाहता है २ बार और सुन लूं.

गोरी ‘सुकुमार’ को’ सरकार’ भी बना दिया गया है गीत में. ये
कवि लोग ना जाने क्या क्या लिख कर बेचारे अनपढ़ प्रेमियों
की कठिन परीक्षा ले लेते हैं. उस पर से गीत का फिल्मांकन
करने वाले और कन्फ्यूज कर देते हैं. समझ नहीं आता कि गीत
गाने के लिए तांगे, मोटर कार और रेलगाड़ी में बैठना ज़रूरी है?

प्यूरिटन लोगों में से एक वसंत देसाई ने एक मस्त कर देने
वाली धुन बनाई है कवि प्रदीप के लिखे गीत के लिए. ये इतना
झकास है कि आप इस पर आसानी से ट्विस्ट नृत्य कर सकते
हैं. तेज गति वाला मस्ती भरा गीत है ये फिल्म स्कूल मास्टर
से. करण दीवान और बी सरोजा देवी पर ये गीत फिल्माया गया
है. घोडा है तांगा है इसलिए इस गीत में घोड़े की टाप वाला
संगीत है. हीरो के नाम का मैंने तुक्का लगाया है हो सकता है
कोई और हो.



गीत के बोल:

ओ दिलदार बोलो एक बार
क्या मेरा प्यार पसन्द है तुम्हें
ओ गोरी सुकुमार हमारी सरकार
बड़ा तेरा प्यार पसन्द है हमें
ओ हो हो ओ दिलदार बोलो एक बार
क्या मेरा प्यार पसन्द है तुम्हें
ओ गोरी सुकुमार हमारी सरकार
बड़ा तेरा प्यार पसन्द है हमें

ये उलझे उलझे बाल
ये मस्ती भरी चाल
हो हो हो ओ ओ
ये उलझे उलझे बाल
ये मस्ती भरी चाल
क्या ख़याल है क्या ख़याल है
तेरी हर चाल ढाल गोरी जादू रही डाल
हो कमाल है, हो कमाल है
पिया देख लो
पिया देख लो जवानी का सुहाना इक़रार

ओ दिलदार बोलो एक बार
क्या मेरा प्यार पसन्द है तुम्हें
ओ गोरी सुकुमार हमारी सरकार
बड़ा तेरा प्यार पसन्द है हमें

करोगे जी कब मेरे दिल में घर
बोलो जादुगर
हम तो कभी के हुए तेरे दिलबर
अब काहे की फ़िकर
हो करोगे जी कब मेरे दिल में घर
बोलो जादुगर
हम तो कभी के हुए तेरे दिलबर
अब काहे की फ़िकर
तो फिर आओ जी
तो फिर आओ जी मेरा दिल बड़ा है बेक़रार

ओ दिलदार बोलो एक बार
क्या मेरा प्यार पसन्द है तुम्हें
ओ गोरी सुकुमार हमारी सरकार
बड़ा तेरा प्यार पसन्द है हमें
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
…………………………………………………….
O dildaar bolo ek baar-School Master 1959

Artists: Karan Deewan, B Saroja Devi

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Jun 29, 2016

सावन के झूले पड़े-प्यार की प्यास १९६१

एक गैर फिल्मी गीत सावन का आपको सुनवाया था कल.
फिल्मों में सावन के ऊपर बहुत से गीत हैं जिन्हें हमने
अभी चुनना शुरू ही किया है. शुरु करते हैं ये सिलसिला
सावन के झूलों से. पहला उल्लेखनीय झूला है फिल्म
प्यार की प्यास से जो सन १९६१ की फिल्म है.

लता मंगेशकर और तलत महमूद का गाया ये गीत काफी
मशहूर हुआ था अपने ज़माने में. भरत व्यास(गीतकार) की
नज़र से देखा जाए सावन के झूले को. गीत में देहाती बोल
की खुशबू है जो इसे मोहक बनाती है. अक्सर आपने गीतों
में गोरी शब्द के आगे संबोधन “ओ” ही सुना होगा. इस गीत
में सम्मान दिया गया है “ओ गोरी जी” के माध्यम से.



गीत के बोल:

कहाँ छुपे हो मन के मितवा
नैना भए उदासे
छलक रहा है सुख का सागर
हम प्यासे के प्यासे

सावन के झूले पड़े
सावन के झूले पड़े
सैंया जी हमें तुम कहाँ भूले पड़े

ये नैना जो तुमसे लड़े गोरी जी
तोरी पलकन के नीचे खड़े
सावन के झूले पड़े

तुम नहीं आए हमको भूले
हमरे अँगना फुलवा न फूले
हमको अकेली देख सहेली
कहती है क्यूँ ना खिलती चमेली
बेलरिया ना मंडवे चढ़े तो
बेलरिया ना मंडवे चढ़े तो
सैंया जी हमें तुम कहाँ भूले पड़े
ये नैना जो तुमसे लड़े गोरी जी
तोरी पलकन के नीचे खड़े
सावन के झूले पड़े

तोरे दिल में हमरा दिल है
जैसे तोरे नैन में तिल है
हमरे मिलन बिन ये मनभावन
सावन भी तो क्या है सावन
पीपल के पतवे झड़े
पीपल के पतवे झड़े

ये तोरे मोरे जब तक न नैना लड़े

सावन के झूले पड़े
सैंया जी हमें तुम कहाँ भूले पड़े
……………………………………………………………..
Sawan ke jhoole pade-Pyar ki pyaas 1961

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May 30, 2016

तेरी शहनाई बोले–गूँज उठी शहनाई १९५९

ऐसे गीत जिनमें किसी वाद्य यन्त्र का नाम आता हो उनमें से एक
है आज का गीत. इसमें शहनाई नामक साज़ का जिक्र हो रहा है.
फिल्म के कहानी ही शहनाई के इर्द गिर्द घूमती है.

अमिता और राजेंद्र कुमार इसे परदे पर गा रहे हैं. पार्श्वगायन है
लता मंगेशकर और मोहम्मद रफ़ी का. गीत है भारत व्यास का,
संगीत वसंत देसाई का.





गीत के बोल:

तेरी शहनाई बोले
सुन के दिल मेरा डोले
जुल्मी काहे को सुनाए ऐसी तान रे
बादल घिर-घिर आए
पापी पपीहरा गाए
कैसे बस में रहे मेरी जान रे

बैरी बन के ये दुनिया खड़ी है
मेरे पाँवों में बेड़ी पड़ी है
किन घड़ियों में अँखियाँ लड़ी हैं
बारों महीने सावन की झड़ी है
इक पल मुखड़ा दिखा जा
दिल का दुखड़ा मिटा जा
तुझ बिन सूना-सूना, मेरा है जहान रे

तेरी शहनाई बोले
सुन के दिल मेरा डोले
जुल्मी काहे को सुनाए ऐसी तान रे

आजा कब से मैं तुझको बुलाऊँ
तेरे प्यार के सपने सजाऊँ
जिया चाहे के उड़ के मैं आऊँ
पिया पंख कहाँ से मैं लाऊँ
मैं यहाँ, तू वहाँ
बीच में है जहां
कैसे पूरे हो अब अरमान रे

बादल घिर-घिर आए
पापी पपीहरा गाए
कैसे बस में रहे मेरी जान रे
तेरी शहनाई बोले
सुन के दिल मेरा डोले
जुल्मी काहे को सुनाए ऐसी तान रे
………………………………………………………….
Teri shehnai bole-Goonj uthi shehnai 1959

Artists-Rajendra Kumar, Amita

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Apr 22, 2016

कह दो कोई ना करे यहाँ प्यार-गूँज उठी शहनाई १९५९

विजय भट्ट निर्देशित फिल्म गूँज उठी शहनाई एक एक एक
गीत नायब हीरा है संगीत के खजाने का. आज सुनते हैं रफ़ी
की आवाज़ में टॉप क्लास दर्द भरा गीत. विजय भट्ट ने इससे
पहले एक पीरियड फिल्म पटरानी(५६) का निर्माण किया था जो
ज्यादा चली नहीं. फिल्म अलबत्ता अच्छे गीतों से भरी पड़ी है.
सन १९५२ की बैजू बावरा तो शायद उनके निर्देशन कैरियर
की सबसे बड़ी हिट फिल्म रही.

गूँज उठी शहनाई उल्लेखनीय होने की वजह है एक-उस समय
न तो राजेंद्र कुमार कोई बड़े सितारे थे ना ही फिल्म की नायिका
अमीता. राजेंद्र कुमार के कैरियर को तो पंख लग गए फिल्म के
बाद, अमीता को कुछ खास फायदा न हुआ.

गीत है भरत व्यास का और इसकी धुन बनाई है वसंत देसाई
ने.



गीत के बोल:

बिखर गए बचपन के सपने
अरमानों की शाम ढले
कहीं सजे बारात किसी की
कहीं किसी का प्यार जले

कह दो कोई न करे यहाँ प्यार
इसमें ख़ुशियाँ हैं कम, बेशुमार हैं ग़म
इक हँसी और आँसू हज़ार
कह दो कोई न करे यहाँ प्यार

प्रीत पतंगा दिये से करे
उसकी ही लौ में वो जल-जल मरे
मुश्किल राहें यहाँ, अश्क और आहें यहाँ
इसमें चैन नहीं, ना करार
कह दो कोई न करे यहाँ प्यार

हमने तो समझा था फूल खिले
चुन-चुन के देखा तो काँटे मिले
ये अनोखा जहां, हरदम धोखा यहाँ
इस वीराने में कैसी बहार

कह दो कोई न करे यहाँ प्यार
इसमें ख़ुशियाँ हैं कम, बेशुमार हैं ग़म
इक हँसी और आँसू हज़ार
कह दो कोई न करे यहाँ प्यार
.................................................................................
Keh do koi na kare yahan pyar-Goonj uthi shehnai 1959

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Feb 28, 2016

दिल का खिलौना हाय टूट गया गूँज उठी शहनाई १९५९

एक उच्च कोटि का दर्द भरा गीत जो किसी भी प्रकार के
विवरण और सन्दर्भों का मोहताज़ नहीं है. फिल्म है १९५९
की गूँज उठी शहनाई. अमिता इसे परदे पर गा रही हैं .



गीत के बोल

टूट गया
टूट गया टूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया, हाय
दिल का खिलौना हाय टूट गया

हुआ क्या क़ुसूर ऐसा सैंयाँ हमारा
जाते हुये जो तूने हमें ना पुकारा
उल्फ़त का तार तोड़ा
हमें मझधार छोड़ा
हम तो चले थे ले के तेरा ही सहारा
साथी हमारा हमसे छूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया

दिल का खिलौना हाय टूट गया

कैसी परदेसी तूने प्रीत लगाई
चैन भी खोया हमने, नींद गँवाई
तेरा ऐतबार कर के
हाय इंतज़ार कर के
ख़ुशियों के बदले ग़म की दुनिया बसाई
ज़ालिम ज़माना हमसे रूठ गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया

दिल का दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया
............................................................................
Dil ka khilona haye too gaya-Goonj uthi shehnai 1959

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Feb 23, 2016

आँख मिलते ही मोहब्बत हो गई-आँख की शर्म १९४३

सन १९४३ का गीत है,फिल्म का नाम आँख की शर्म
है. गायिका का नाम है मीनाक्षी. गीत लिखा है पंडित
इन्द्र ने, और साहब क्या लिखा है, एक बार आप इसे
सुन लें तो इसके मुरीद बन जायेंगे. हाँ, वो धैर्य और
हौसला ज़रूरी है ४० के दशक के गीत सुनने के लिए.
ये स्विच ओवर हर किसी के बस की बात नहीं कि
“कमबख्त इश्क” सुनते सुनते वो “ऐ कातिब-ए-तकदीर “
सुन कर वाह वाह करने लग जाए.

पंडित इन्द्र एक व्यस्त गीतकार होते थे उस ज़माने में.
उनके गीत काफी आला दर्जे के हैं. ये पुराने संगीत प्रेमी
बखूबी जानते हैं. वो समय था जब साहित्य क्षेत्र की
हस्तियाँ फ़िल्मी गीत लेखन को दोयम दर्जे का माना
करती थीं(आज भी करती हैं, वो तो) उसके अलावा दोनों
क्षेत्रों के बीच काफी दूरी हुआ करती थी. बावजूद इसके
अच्छे साहित्यिक सोच और समझ वाले व्यक्ति फिल्म
उद्योग से जुड़े रहे और ये इसी का परिणाम है कि अच्छी
चीज़ें भी फिल्मों में मिल जाया करती हैं. 

गीत का संगीत तैयार किया है वसंत देसाई ने.



गीत के बोल:

आँख मिलते ही मोहब्बत हो गई
हाँ, आँख मिलते ही मोहब्बत हो गयी
प्यार करने की तबियत हो गयी
प्यार करने की तबियत हो गयी


किसलिए तिरछी नज़र ने

बाकी के बोल पब्लिक डिमांड पर.
........................................................
Aankh milte hi mohabbat-Aankh ki sharm 1943

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Nov 2, 2015

हौले-हौले घूँघट पट खोले-गूँज उठी शहनाई १९५९

लौट के बुद्धू घर को आये. ये कहावत सोच समझ कर
बनायीं गयी है. ये क्या सभी कहावतें सोच समझ कर
बनायीं गयी हैं और ऐसी बनाई गयी हैं कि हर युग में
सटीक बैठती हैं. कहावतें समय के बंधनों से मुक्त हैं.

आइये सुनते हैं पुरानी सुपर डुपर हिट गूँज उठी शहनाई
से एक सुमधुर युगल गीत. आज के सारे गीत फेल हैं
ऐसे गीतों के आगे. भरत व्यास के बोल है और संगीत
है वसंत देसाई का.

घरेलू लड़की सी दिखने आली अभिनेत्री अमिता ने ज्यादा
हिंदी फ़िल्में नहीं कीं मगर जितनी भी की हैं उनमें उन्होंने
अपनी उपस्थिति अवश्य दर्ज कराई है. उन्हें मुख्य नायिका
की भूमिकाएं मिलना बंद हो गयीं बाद में जो समझ के
बाहर है. बॉलीवुड की कई बातें समझ में नहीं आती हैं.



गीत के बोल:

हौले-हौले घूँघट पट खोले
बलमवा बेदर्दी
हौले-हौले
ए माने ना  माने ना ज़ुल्मीं सैंयाँ
पकड़े बैंयाँ  हाय दैया
जिया मोरा डोले
हौले-हौले

भोले-भोले, हाय भोले-भोले
ज़हर काहे घोले नयनवा बेदर्दी
भोले-भोले
अरे देखो जी देखो जी दिल की चोरी
कर के गोरी, ये छोरी
मीठी-मीठी बोलें
भोले-भोले

बेदर्दी  बेदर्दी बेदर्दी
रूप कैसा दिया है तुझे राम ने
चाँद शरमाये गोरी तेरे सामने
किया हमको बदनाम तेरे नाम ने
मेरा दामन क्यों आये अब थामने
डालो ना, डालो ना
जादू का डोरा छलिया छोरा
मन मोरा खाये हिचकोले
हौले-हौले
भोले-भोले ज़हर काहे घोले नयनवा बेदर्दी
भोले-भोले

साजनिया, साजनिया, साजनिया
देखो आँखें मिलाओ देखभाल के
ज़रा समझो इशारे मेरी चाल के
लचकाओ कमर ये सम्भाल के
रख दोगी कलेजा निकाल के
झनन, झनन झाँझर झमके, बिजली चमके,
थम-थम के  भड़के दिल में शोले
भोले-भोले
हौले-हौले घूँघट पट खोले
बलमवा बेदर्दी
हौले-हौले
................................................................................
Haule hjaule ghoonghat pat khole-Goonj uthi shehnai 1959

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Jun 26, 2015

बोले रे पपीहरा-गुड्डी १९७१

फिल्म गुड्डी में शीर्षक रोल जया भादुडी ने किया था.
हृषिकेश मुखर्जी निर्देशित इस फिल्म की काफी सराहना
हुई थी. स्कूल में पढ़ने वाली गुड्डी फिल्मों की दीवानी है.
वो फिल्मस्टार धर्मेन्द्र की दीवानी है फिल्म के कथानक
अनुसार. नायिका का नाम कुसम है लेकिन वो गुड्डी के
नाम से पहचानी जाती है.

अपने फिल्म प्रेम के चलते वो एक खयाली दुनिया में खो
जाती है और उसे फिल्म स्टार धर्मेन्द्र एक आदर्श व्यक्तित्व
प्रतीत होने लगता है. फिल्म का नायक उसके समक्ष शादी
का प्रस्ताव रखता है जिसे वो ठुकरा देती है.

उसकी मुलाकात फिल्मस्टार धर्मेन्द्र से होती है और उसे
वास्तविक जीवन और फिल्म जीवन में अंतर मालूम पढता
है तो उसकी ऑंखें खुलती हैं और अंत में वो नायक से शादी
करने के लिए तैयार हो जाती है. नायक का रोल समित भांजा
ने किया है. फिल्म की पटकथा और गीत गुलज़ार के लिखे
हुए हैं और संगीत वसंत देसाई का.

आज जो गीत हम आपको सुनवा रहे हैं वो वाणी जयराम ने
गाया है. दक्षिण भारत की फिल्मों में विभिन्न भाषाओँ में
गीत गाने वाली वाणी जयराम को हिंदी फिल्मों में ज्यादा
अवसर प्राप्त नहीं हुए. प्रस्तुत गीत उनका सबसे लोकप्रिय
हिंदी गीत है.




गीत के बोल:

बोले रे पपीहरा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
बोले रे पपीहरा

पलकों पर इक बूँद सजाए
बैठी हूँ सावन ले जाए
जाए पी के देस में बरसे
नित मन प्यासा, नित मन तरसे
बोले रे पपीहरा

सावन जो संदेसा लाए
मेरी आँख से मोती आए
जान मिले बाबुल के घर से
नित मन प्यासा, नित मन तरसे

बोले रे पपीहरा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
बोले रे पपीहरा
……………………………………………
Bole re papihara-Guddi 1971

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May 21, 2015

चित डोले नित डोले-डॉक्टर कोटनिस की अमर कहानी १९४६

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भारतीयों में से एक थे
डॉक्टर द्वारकानाथ कोटनिस जिन्हें द्वितीय विश्व
युद्ध के समय चीन भेजा गया था जब चीन पर
जापान ने आक्रमण किया था.

ख्वाजा अहमद अब्बास की लिखी कहानी पर
वी शांताराम ने फिल्म बनायीं और इसमें उन्होंने
डॉक्टर कोटनिस का किरदार निभाया. चीनी नर्स
का रोल जयश्री ने किया था फिल्म में. इस फिल्म
से जयश्री का गाया गीत सुनते हैं आज. ये सन
१९४६ की फिल्म है और इस गीत को लिखा है
दीवान शरर ने. फिल्म में संगीत दिया है गुणी
संगीतकार वसंत देसाई ने.




गीत के बोल:


चित डोले नित डोले
सुबह-ओ-शाम प्रभुजी
सुबह शाम हो शाम सवेरा
मन प्रीतम का हो डेरा
इस डेरे कर भी ले
विसराम प्रभुजी

नीले पर्बत खेत सुनहरे
नीली नदिया गहरी गहरी
चंदा तारे लिखें सारे
तेरा नाम प्रभुजी

प्यारे नज़ारे हैं
प्यारे प्यारे
आँखों ही आँखों में
करते इशारे
नैन तेरे नैन मेरे
दिन रैन प्रभुजी
..................................................................
Chit dole nit dole-D. Kotnis ki amar kahani 1946

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Jan 26, 2015

हमको मन की शक्ति देना-गुड्डी १९७१

२६ जनवरी के अवसर पर आपको देशभक्ति गीत की जगह
मन को सशक्त बनाने वाला गीत सुनवा रहे हैं. आजादी के
इतने सालों बाद भी भारतीय कहीं खो गया सा लगता है
भीड़ में. भीड़ तो बहुत है, भारतीयता कम होती जा रही है.
गीत में एक विचार जिसपर पूरा ध्यान फोकस किया गया
है वो ये है-दूसरों की जय के पहले खुद को जय करें. बात
सोलह आने सच है. एक बात इस सन्दर्भ में याद आती है
जो कसी बुज़ुर्ग ने बहुत पहले कही थी-पहले अपने प्रति
ईमानदार हो जाओ, बाद में दुनिया को इमानदारी दिखाना.
गीत गुलज़ार का लिखा हुआ है और उनके बेहतर गीतों में
से एक है. इसकी धुन वसंत देसी ने बनायीं है और गाया
है दक्षिण भारत की नामचीन गायिका-वाणी जयराम ने.



गीत के बोल:

हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें
हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें
हमको मन की शक्ति देना

भेदभाव अपने दिल से, साफ़ कर सकें
भेदभाव अपने दिल से, साफ़ कर सकें
दोस्तों से भूल हो तो, माफ़ कर सकें
दोस्तों से भूल हो तो, माफ़ कर सकें
झूठ से बचे रहें, सच का दम भरें
झूठ से बचे रहें, सच का दम भरें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें

हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें
हमको मन की शक्ति देना

मुश्किलें पड़ें तो हम पे, इतना कर्म कर
मुश्किलें पड़ें तो हम पे, इतना कर्म कर
साथ दें तो धर्म का, चलें तो धर्म पर
साथ दें तो धर्म का, चलें तो धर्म पर
खुद पे हौसला रहे, बदी से ना डरें
खुद पे हौसला रहे, बदी से ना डरें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें

हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें
हमको मन की शक्ति देना
................................................................
Hamko man ki shakti dena-Guddi 1971

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Aug 6, 2011

बादलों बरसो नयन की कोर से-सम्पूर्ण रामायण १९६१

फिल्म सम्पूर्ण रामायण से एक गीत सुनिए लाता मंगेशकर की आवाज़ में.
गीत भरत व्यास का है और संगीत वसंत देसाई का. अनीता गुहा नाम की
अभिनेत्री पर इसे फिल्माया गया है. भरत व्यास के गीत में आप फ़िल्मी
गैर फ़िल्मी दोनों प्रकार की कविता का आनंद ले सकते हैं. फ़िल्मी कविता
में कभी कभार छेड़-छाड़ हो जाती है धुन बनाते वक्त.

सुगठित भारी काया और गोल भरे चेहरे वाली अभिनेत्री अनीता गुहा धार्मिक
फिल्मों में काफी दिखाई दीं. गौरतलब है उन्होंने किशोर कुमार के साथ फिल्म
चाचा जिंदाबाद में काम किया है.







बादलों
बादलों बरसो नयन की कोर से
बिजलियों कड़को ह्रदय की ओर से
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
बादलों बरसो नयन की कोर से

ऐ घटाओं गर्जना को थाम लो
ऐ घटाओं गर्जना को थाम लो
आज मेरे करुण स्वर से काम लो
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आज मेरे,
आज मेरे करुण स्वर से काम लो
बंध गया सावन नयन की डोर से

बादलों
बादलों बरसो नयन की कोर से

ज़हर को अमृत समझ कर पी रही
ज़हर को अमृत समझ कर पी रही
मीन जल बिन दीन हो कर जी रही
प्राण तड़पे भाग्य के झकझोर से

बादलों
बादलों बरसो नयन की कोर से
बिजलियों कड़को ह्रदय की ओर से
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
बादलों बरसो नयन की कोर से
....................................
Badlon barso nayan ki kor se-Sampoorna Ramayana 1961

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Jul 24, 2011

मेरी आन भगवान-तूफ़ान और दिया १९५६

फिल्म तूफान और दिया से अगला गीत पेश है गीता दत्त की आवाज़ में
इसके बोल लिखे हैं भरत व्यास ने और धुन बनाई है वसंत देसाई ने.
एक बच्चा परदे पर दिखाई दे रहा है उसका नाम मुझे मालूम नहीं है.
बच्चे के साथ में हैं अभिनेत्री नंदा.

भगवान से प्रार्थना कर के कुछ माँगा जा रहा है, क्या माँगा जा रहा है
गीत सुन के जानिये. फिल्मों में प्रार्थना वाले गीत बहुतेरे हैं और इनमें
से अधिकांश गीतकार शैलेन्द्र, कविवर प्रदीप या पंडित भरत व्यास रचित हैं.




गीत के बोल:

मेरी आन भगवान
मेरी आन भगवान कण कण से लड़ी है जो
तुझसे भी आज लड़ेगी
मेरी बात तुम्हें रखनी पड़ेगी
मेरी आन भगवान

देख अपनों का दुख जो छिपाओगे मुख
इससे आपस की रार बढ़ेगी
मेरी बात तुम्हें रखनी पड़ेगी

मेरी आन भगवान

हमने तो सुना है बड़ों के मुख से
अपने बालकों से तुमको भी प्यार है
फिर क्यों भूलते हो सबके पिता
कुछ हमारा भी तुमपे अधिकार है
लड़खड़ाते हैं पाँव और देख रहे तुम
क्या ये नय्या भंवर में अड़ेगी
मेरी बात तुम्हें रखनी पड़ेगी

मेरी आन भगवान

मेरी पलकों का तोड़ किनारा
लगी बहने आँसुओं की धारा
तेरी धरती बहेगी तेरा अम्बर बहेगा
बह जाएगा आसन तुम्हारा
मेरी सुन के भगवान जो दिया नहीं ध्यान
तो जबान मेरी ज़िद पे चढ़ेगी
मेरी बात तुम्हें रखनी पड़ेगी

मेरी आन भगवान
...................................
Meri aan bhagwan-Toofan aur diya 1956

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May 20, 2011

मुरलिया बाजे री जमुना के तीर-तूफ़ान और दिया १९५६

आइये एक बार फिर से हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर
की तरफ चलें। इस बार आपको सन ५६ की एक फिल्म
तूफ़ान और दिया से एक मधुर भजननुमा गीत सुनवाते हैं।
भक्त मीरा बाई की रचना है यह और इसका संगीत तैयार किया है
वसंत देसाई ने। इस रचना को समय समय पर कई कलाकारों
ने अपनी आवाज़ और अपने अंदाज़ में गाया है जिनमें से
एक जगजीत सिंह की पत्नी चित्रा सिंह भी हैं।


गीत परदे पर गा रही हैं अभिनेत्री नंदा। वसंत देसाई का संगीत
है फिल्म में और इस ब्लॉग पर यह फिल्म का तीसरा गीत है।
गीत सीधा और सरल सा है और इसे आसानी से गुनगुनाया जा
सकता है। गायिका हैं लता मंगेशकर।



गीत के बोल:

मुरलिया बाजे री जमुना के तीर
मुरलिया बाजे री जमुना के तीर

मुरली सुनत मेरो मन हर लीनो
मुरली सुनत मेरो मन हर लीनो
चीत धरत नहीं धीर
चीत धरत नहीं धीर

कारो कन्हैया कारी कमरिया
कारो कन्हैया कारी कमरिया
कारो जमुना को नीर
कारो जमुना को नीर

मुरलिया बाजे री जमुना के तीर
मुरलिया बाजे री जमुना के तीर

मीरा के प्रभु गिरधर नागर
मीरा के प्रभु गिरधर नागर
चरण कमल पे सीर
चरण कमल पे सीर

कारो कन्हैया कारी कमरिया
कारो कन्हैया कारी कमरिया
कारो जमुना को नीर
कारो जमुना को नीर

मुरलिया बाजे री जमुना के तीर
मुरलिया बाजे री जमुना के तीर

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Dec 12, 2010

सावन के झूले पड़े-प्यार की प्यास १९६१

मधुर गीतों की श्रृंखला में अगला गीत प्रस्तुत है फिल्म
प्यार की प्यास से। ये सन १९६१ की फिल्म है। गीत के
बोल लिखे हैं पंडित भारत व्यास ने और धुन बनाई है
वसंत देसाई ने। तलत महमूद और लता इस गीत के
गायक गायिका हैं। लता और तलत की आवाज़ में युगल
गीत ऐसे सुनाई पढ़ते हैं मानो रेशम की कोमलता और
शहद की मधुरता का मेल हो।



गीत के बोल:



हो, हो, हो
कहाँ छुपे हो मन के मितवा
नैना भये उदासे
छलक रहा है दुःख का सागर
हम प्यासे के प्यासे

हो, हो, हो, हो
सावन के झूले पड़े
सावन के झूले पड़े
सैयां जी हमें तुम कहाँ भूले पड़े
ओ, ओ, ओ

ये नैना जो तुम से लड़े
गोरी जी तोरी पलकन के नीचे खड़े

सावन के झूले पड़े

तुम नहीं आये हमको भूले
हमरे अंगना फुलवा ना फूले
हमको अकेली देख सहेली
कहती है क्यूँ ना खिलती चमेली
बेलरिया ना मंडवे चढ़े
सैयां जी हमें तुम कहाँ भूले पड़े

ओ, ओ, ओ

ये नैना जो तुम से लड़े
गोरी जी तोरी पलकन के नीचे खड़े

सावन के झूले पड़े
हो, ओ ओ ओ

तोरे दिल में हमरा दिल है
जैसे तोरे नैन में तिल है
हमरे मिलन बिन ये मनभावन
सावन भी तो क्या है सावन
पीपल के पतवे झडे
तोरे मोरे जब तक ना नैना लड़े

सावन के झूले पड़े
हो, ओ ओ ओ
......................................
Sawan ke jhoole pade-Pyar ki pyaas 1961

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Nov 9, 2010

झिर झिर बरसे सावनी अँखियाँ -आशीर्वाद १९६८

इस गीत के बोलों से ऐसा लगेगा कि ये दर्द भरा गीत है मगर
इसकी धुन खुशनुमा सी है। फिल्म आशीर्वाद में इसे परदे
पर गा रही हैं सुमिता सान्याल नाम की अभिनेत्री जिन्होंने इस
फिल्म में जोगी ठाकुर(अशोक कुमार) की बिट्टो की भूमिका
निभाई है । अपने फ़िल्मी सांवरिया(संजीव कुमार) की प्रतीक्षा
में वे ये गीत गा रही हैं। रिकॉर्ड पर गीत बज रहा है उसके साथ
वे गाना शुरू कर देती हैं।

गीत  गुलज़ार का है और संगीत वसंत देसाई का। गायिका हैं
लता मंगेशकर।



गीत के बोल:

झिर झिर बरसे सावनी अँखियाँ
संवरिया घर आ
संवरिया घर आ

तेरे संग सब रंग बसंती
तुझ बिन सब सूखा
संवरिया घर आ

रेशमी बुंदियाँ तन पे मारे
रेशमी बुंदियाँ तन पे मारे
छेड़ करे भीगी बौछारें
छेड़ करे भीगी बौछारें
मानत ना,
मानत ना जियरा

संवरिया घर आ
संवरिया घर आ

झिर झिर बरसे सावनी अँखियाँ
संवरिया घर आ
संवरिया घर आ

बावरी बिरहन
बावरी बिरहन कल ना पाए
बावरी बिरहन कल ना पाए
पल बीते जैसे जुग जाए
पल बीते जैसे जुग जाए
कैसे कटे बिरहा
कैसे कटे बिरहा

संवरिया घर आ
संवरिया घर आ

झिर झिर बरसे सावनी अँखियाँ
संवरिया घर आ
संवरिया घर आ
. .............................................................
Rimjhim barse sawani ankhiyan-Aashirwad 1968

Artists-Sumita Sanyal, Sanjeev Kumar

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Nov 8, 2010

जीवन से लम्बे हैं बंधु-आशीर्वाद १९६८

जीवन क्षणभंगुर है। सुख-दुःख की अनूभूति नज़रिए पर ज्यादा
निर्भर है। अतः एक एक क्षण को ईश्वरीय प्रसाद समझ कर व्यतीत
किया जाए तो जीवन सार्थक है। सम-दृष्टि भाव जीवन संतुलन
में अहम् भूमिका निभाता है। सयाने कहते है सुख, दुःख हर क्षण का
आनंद लो निर्लिप्त भाव से, आनंद लो मगर उससे जोड़ जुड़ाव मत पालो।
खुशियाँ ऊर्जा देती है मानव को तो दुःख उसके जीवट और इच्छाशक्ति
की परीक्षा लेते प्रतीत होते हैं।

आइये जीवन दर्शन से जुड़ा एक गीत सुनें जो गुलज़ार ने लिखा है और
जिसकी धुन बनाई है वसंत देसाई ने। गायक कलाकार हैं मन्ना डे और
आशीर्वाद फिल्म में इसे फिल्माया गया है अशोक कुमार पर।



गीत के बोल:

जीवन से लम्बे हैं बंधु
जीवन से लम्बे हैं बंधु
ये जीवन के रस्ते
ये जीवन के रस्ते
इक पल थम के रोना होगा
इक पल चलना हँस के
ये जीवन के रस्ते
ये जीवन के रस्ते

जीवन से लम्बे हैं बंधु

राहों से राही का रिश्ता
कितने जनम पुराना
एक को चलते जाना आगे
एक को पीछे आना
मोड़ पे मत रुक जाना
बंधु, दोराहों में फँस के
ये जीवन के रस्ते
ये जीवन के रस्ते

जीवन से लम्बे हैं बंधु

दिन और रात के हाथों नापी
नापी एक उमरिया
साँस की डोरी छोटी पड़ गई
लम्बी आस डगरिया
भोर के मन्ज़िल वाले
उठ कर, भोर से पहले चलते
ये जीवन के रस्ते
ये जीवन के रस्ते

जीवन से लम्बे हैं बंधु

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