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Mar 22, 2016

बना के क्यूँ बिगाड़ा रे-ज़ंजीर १९७३

एक ज़माना था हास्य कवियों और कवि सम्मेलनों का. शानदार
युग था वो. एक चार लाइनों वाले कवि हैं-सुरेन्द्र शर्मा हरियाणा
के रहने वाले. गंभीर मुद्रा बना के वे अपनी चार लाइनों से जनता
को अनादित किया करते थे. अभी एक प्राइवेट रडियो चैनल पर
उनी पंक्तियाँ सुनीं-आज करे सो काल कर, काल करे सो परसों,
इतनी जल्दी क्या है जब जीना है बरसो. आज के युग पर ये शब्द
साटीक बैठते हैं. बिना हाथ पैर हिलाए आज मनुष्य सब कुछ पा
लेना चाहता है.

आइये सुनें फिल्म जंजीर से एक गीत जो जाया भादुड़ी पर फिल्माया
गया है और इसे लता मंगेशकर ने गाया है. मधुर धुन है और ये
भगवां से शिकायत वाला गीत है. सांप सीढ़ी के खले में जब ९९ के
अंक से सीधे १० पर धडाम से गिरने वाला जो अनुभव होता है
वैसे ही कुछ भाव नायिका व्यक्त कर रही है इस गीत में.



गीत के बोल:

बना के क्यूँ बिगाड़ा रे बिगाड़ा रे नसीबा
ऊपर वाले ऊपर वाले
बना के क्यूँ बिगाड़ा रे

जो तुझको मंज़ूर नहीं था फूल खिलें इस प्यार के
फिर क्यों तूने इन आँखों को रंग दिखाए बहार के
आस बँधा के प्यार जता के बिगाड़ा रे नसीबा
ऊपर वाले ऊपर वाले

बना के क्यूँ बिगाड़ा रे

पाप करे इन्सान अगर तो वो पापी कहलाता है
तूने भी ये पाप किया फिर कैसे कहूँ तू दाता है
राह दिखा के राह पे ला के बिगाड़ा रे नसीबा
ऊपर वाले ऊपर वाले

बना के क्यूँ बिगाड़ा रे बिगाड़ा रे नसीबा
ऊपर वाले ऊपर वाले
..................................................................
Bana ke kyun bigada re-Zanjeer 1973

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Jan 28, 2016

जाने जाना जाओ कल फिर आना-समाधि १९७२

फिल्म समाधि का सर्वाधिक लोकप्रिय गीत हम सुन चुके है
-काँटा लगा. अब सुनते हैं एक और चर्चित गीत जिसका कि
इन्स्ट्रुमेन्टल वर्ज़न ज्यादा लोकप्रिय हुआ था. ये है धर्मेन्द्र
और जा भादुडी पर फिल्माया गया गीत जिसे किशोर ने
गाया है.
फिल्म में धर्मेन्द्र की दोहरी भूमिका है. यह दूसरी पीढ़ी है
जिसका फिल्म के टाइटल से कोई लेना देना नहीं है. रोमांस
हो रहा है इस गीत में. काफी रंग बिरंगा गीत है. कारें कई
तरह की हैं, नायक नायिका के ड्रेसेज़ भी रंग बिरंगे हैं. उस
समय कोस्ट्यूम डिजाइनर पर कोई ध्यान नहीं देता था. ये
तय है उस कोस्ट्यूम डिजाइनर का भविष्य उज्जवल अवश्य
हुआ होगा.

गीत मजरूह का है और संगीत आर डी बर्मन का. गीत की
सबसे उल्लेखनीय बात ये है कि इसमें धर्मेन्द्र ने डांस करने
की पुरजोर कोशिश की है.



गीत के बोल:

जाने जाना जाओ कल फिर आना
यूँ ही किसी मोड़ पे मिल जाना
जाने जाना जाओ कल फिर आना
यूँ ही किसी मोड़ पे मिल जाना

अब याद रखना राह ये दिलबर
लूटा है इस पे तुमने बहार में
कब तक यहीं पर आँख बिछाए
बैठा रहूँगा मैं इंतज़ार में
जाओ करो न बेक़ल
दिल रहा है मचल
बाक़ी बातें होंगी कल
अभी क्या कहूँ
जाने जाना जाओ कल फिर आना
यूँ ही किसी मोड़ पे मिल जाना

थोड़ी अभी तो नज़र झुकाओगी
थोड़ा अभी शरमाओगी तुम
पहला ही दिन है अपने मिलन का
दो चार दिन में खुल जाओगी तुम
इसे कहते हैं प्यार सिखाऊँगा
मैं यार हूँ तुम्हारा दावेदार
आगे क्या कहूँ

जाने जाना जाओ कल फिर आना
यूँ ही किसी मोड़ पे मिल जाना

पागल कहो तुम हँस कर मुझको
या दिल ही दिल में दीवाना समझो
पर ये तुम्हारी ऐसी अदा है
अपने किसी को बेगाना समझो
न समझ में हो कम न उमर में
हो कम अब तुमसे सनम
मैं भी क्या कहूँ

जाने जाना जाओ कल फिर आना
यूँ ही किसी मोड़ पे मिल जाना
.................................................................................
Jaana jaana jao kal fir aana-Samadhi 1972

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Jan 9, 2016

चुपके चुपके चल री पुरवैया-चुपके चुपके १९७५

सचिन देव बर्मन समय के साथ साथ भले ही वृद्ध होते चले
मगर उनका संगीत जवान ही रहा और समय के साथ साथ
चला. उन्होंने निरंतर मधुर संगीत दिया जो उनकी ऊर्जा और
कल्पनाशीलता का द्योतक है.


गीत कर्णप्रिय है और इसे लिखा है आनंद बक्षी ने जिसकी
धुन बनाई है बर्मन दादा ने. गायिका हैं लता मंगेशकर. इस
फिल्म से एक गीत ब्लॉग पर आपको पहले सुनवा चुके हैं.

गीत फिल्माया गया है जया भादुडी पर. ये एक हास्य फिल्म
है जिसमें शर्मिला टैगोर ने यादगार भूमिका निभाई है. गीत में
आप अमिताभ बच्चन को भी देखेंगे. ये फिल्म का शीर्षक गीत
है.




गीत के बोल:

चुपके चुपके चल री पुरवइया
ओ चुपके चुपके चल री पुरवइया
चुपके चुपके चल री पुरवइया

बाँसुरी बजाये रे,
रास रचाए दैया रे दैया
गोपियों संग कन्हैया
चुपके चुपके चल री पुरवइया

पागल पवन से, कैसे कोई बोले
पागल पवन से, कैसे कोई बोले
गोरी के मुख से, घुँघटा ना खोले,
डोले, हौले से मन की नैया
गोपियों संग कन्हैया
चुपके चुपके चल री पुरवइया

ये क्या हुआ मुझको, क्या है ये पहेली
ये क्या हुआ मुझको, क्या है ये पहेली
ऐसे जैसे के, कोई राधा की सहेली, मैं भी
ढूंढूं कदम की छैंया
गोपियों संग कन्हैया
चुपके चुपके चल री पुरवइया

ऐसे समय पे कोई, चुप भी रहे कैसे
ऐसे समय पे कोई, चुप भी रहे कैसे
बाँध लिये रुत ने, पग मैं घुँघरू, जैसे
नाचे मन ता थैया ता थैया
गोपियों संग कन्हैया
चुपके चुपके चल री पुरवइया
.........................................................
Chupke chupke chal ri-Chupke chupke 1975

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Jun 26, 2015

बोले रे पपीहरा-गुड्डी १९७१

फिल्म गुड्डी में शीर्षक रोल जया भादुडी ने किया था.
हृषिकेश मुखर्जी निर्देशित इस फिल्म की काफी सराहना
हुई थी. स्कूल में पढ़ने वाली गुड्डी फिल्मों की दीवानी है.
वो फिल्मस्टार धर्मेन्द्र की दीवानी है फिल्म के कथानक
अनुसार. नायिका का नाम कुसम है लेकिन वो गुड्डी के
नाम से पहचानी जाती है.

अपने फिल्म प्रेम के चलते वो एक खयाली दुनिया में खो
जाती है और उसे फिल्म स्टार धर्मेन्द्र एक आदर्श व्यक्तित्व
प्रतीत होने लगता है. फिल्म का नायक उसके समक्ष शादी
का प्रस्ताव रखता है जिसे वो ठुकरा देती है.

उसकी मुलाकात फिल्मस्टार धर्मेन्द्र से होती है और उसे
वास्तविक जीवन और फिल्म जीवन में अंतर मालूम पढता
है तो उसकी ऑंखें खुलती हैं और अंत में वो नायक से शादी
करने के लिए तैयार हो जाती है. नायक का रोल समित भांजा
ने किया है. फिल्म की पटकथा और गीत गुलज़ार के लिखे
हुए हैं और संगीत वसंत देसाई का.

आज जो गीत हम आपको सुनवा रहे हैं वो वाणी जयराम ने
गाया है. दक्षिण भारत की फिल्मों में विभिन्न भाषाओँ में
गीत गाने वाली वाणी जयराम को हिंदी फिल्मों में ज्यादा
अवसर प्राप्त नहीं हुए. प्रस्तुत गीत उनका सबसे लोकप्रिय
हिंदी गीत है.




गीत के बोल:

बोले रे पपीहरा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
बोले रे पपीहरा

पलकों पर इक बूँद सजाए
बैठी हूँ सावन ले जाए
जाए पी के देस में बरसे
नित मन प्यासा, नित मन तरसे
बोले रे पपीहरा

सावन जो संदेसा लाए
मेरी आँख से मोती आए
जान मिले बाबुल के घर से
नित मन प्यासा, नित मन तरसे

बोले रे पपीहरा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
बोले रे पपीहरा
……………………………………………
Bole re papihara-Guddi 1971

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Jan 7, 2015

लूटे कोई मन का नगर-अभिमान १९७३


फ़िल्मी गीतों में डबिंग आर्टिस्ट नाम का किरदार होता है एक.
डबिंग आर्टिस्ट से पहले गाना गवा लिया जाता है और बाद में
प्रमुख गायक/गायिका की आवाज़ में वो गीत रेकोर्ड किया जाता
ये चलन पहले काफी था अब कम है. इस गीत के साथ किस्सा
यूँ है-मनहर ने इस गीत को डबिंग आर्टिस्ट के तौर पर गाया .
मुकेश ने जब इसे सुना तो निवेदन किया कि इसे फिल्म में
रहने दिया जाए. निवेदन मान लिया गया. फिल्मों के इतिहास
में कोई ऐसी फिल्म नहीं जिसमें लता-रफ़ी, लता-किशोर और
लता-मुकेश के युगल गीत एक साथ हों. अगर ऐसा होता तो
एक इतिहास बन जाता. ये उस ज़माने की फिल्म है जब "बिग"
जया और अमिताभ केवल "बी" हुआ करते थे. जया स्थापित
अभिनेत्री थीं  और अमिताभ नवागंतुक अभिनेता. गीत आकर्षक
धुन वाला है और मेरे हिसाब से इसे ज्यादा गुनगुनाया है जनता ने
बनिस्बत फिल्म के दूसरे युगल गीतों के.



गीत के बोल: 



लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी
लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी
कौन है वो, अपनों में कभी, ऐसा कहीं होता है,
ये तो बड़ा धोखा है

लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी

यहीं पे कहीं है, मेरे मन का चोर
नज़र पड़े तो बइयाँ दूँ
यहीं पे कहीं है, मेरे मन का चोर
नज़र पड़े तो बइयाँ दूँ
जाने दो, जैसे तुम प्यारे हो,
वो भी मुझे प्यारा है, जीने का सहारा है
देखो जी तुम्हारी यही बतियाँ मुझको हैं तड़पातीं

लूटे कोई मन का नगर
लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी

रोग मेरे जी का, मेरे दिल का चैन
साँवला सा मुखड़ा, उसपे कारे नैन
ऐसे को, रोके अब कौन भला,
दिल से जो प्यारी है, सजनी हमारी है
का करूँ मैं बिन उसके रह भी नहीं पाती

लूटे कोई मन का नगर
लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी
…………………………………………..
Loote koi man ka nagar-Abhimaan 1973

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Oct 1, 2014

तेरी बिंदिया रे-अभिमान १९७३

फिल्म अभिमान नारी प्रतिभा और पुरुष प्रतिभा के बीच
अहम के टकराव की कहानी है. नारी ज्यादा प्रतिभाशाली
है. फिल्म के कथानक अनुसार नायक नायिका की मधुर
आवाज़ पर मोहित हो उसे ब्याह घर ले आता है. उसके
बाद शादी के रिसेप्शन जैसा कुछ हो रहा है फिल्म में .
इस अवसर पर गाना गाया जा रहा है. सवाल जवाब वाला
ये गीत अनूठा है और अपने समय का हिट गीत भी .
अभिमान के सारे गाने हिट श्रेणी में आते हैं. इस युगल
गीत को लता और रफ़ी ने गाया है. बोल मजरूह के
हैं जो कि उच्च कोटि के हैं और संगीत सचिन देव बर्मन
का.

अभिनेत्री का अभिनय अभिनेता से बेहतर है जो कि इस
गीत से साफ़ झलक रहा है. अभिनेत्री में चेहरे पर भाव लाने
की क्षमता अपने कैरियर के शुरूआती दिनों से ही आला दर्जे
की रही है.




गीत के बोल:

तेरी बिंदिया रे,
रे आय हाय तेरी बिंदिया रे
तेरी बिंदिया रे,
रे आय हाय तेरी बिंदिया रे

सजन बिंदिया ले लेगी
तेरी निंदिया
रे आय हाय तेरी बिंदिया रे
        
तेरे माथे लगे हैं यूँ, जैसे चंदा तारा
जिया में चमके कभी कभी तो, जैसे कोई अन्गारा
तेरे माथे लगे हैं यूँ
सजन निंदिया
सजन निंदिया ले लेगी ले लेगी ले लेगी
मेरी बिंदिया 
रे आय हाय तेरा झुमका रे
रे आय हाय तेरा झुमका रे
चैन लेने ना देगा सजन तुमका
रे आय हाय मेरा झुमका रे 
        
मेरा गहना बलम तू,
तोसे सज के डोलूं
भटकते हैं तेरे ही नैना
मैं तो कुछ न बोलूं
मेरा गहना बलम तू
तो फिर ये क्या बोले है बोले है बोले है
तेरा कंगना
रे आय हाय मेरा कंगना रे
बोले रे अब तो छूटे न तेरा अंगना रे
रे आय हाय तेरा कंगना रे
          
तू आई है सजनिया
जब से मेरी बन के
ठुमक ठुमक चले है जब तू,
मेरी नस नस खनके
तू आई है सजनिया
सजन अब तो
सजन अब तो छूटे न छूटे न छूटे न
तेरा अंगना
रे आय हाय तेरा कंगना रे
तेरा कंगना रे
सजन अब तो छूटे न तेरा अंगना
रे आय हाय तेरा अंगना रे
..................................................
Teri bindiya re-Abhimaan 1973

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Sep 1, 2014

बीती न बिताई रैना-परिचय १९७२

सन १९७२ की फिल्म परिचय से एक युगल गीत सुनते हैं आज.
भूपेंद्र और लता मंगेशकर का गाया ये गीत राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त
गीत है. ये राष्ट्रीय पुरस्कार हालाँकि केवल लता मंगेशकर को मिला.
गुलज़ार ने इस गीत में भी कुछ करिश्माई बोल फिट किये हैं-
बुझाई रैना और मनाई रैना. मुझे इस गीत को सुन कर सुरेश रैना
और मोहित रैना की याद भी आ जाती है आजकल, जबसे सुरेश
भारतीय टीम का हिस्सा बने हैं और मोहित सीरियल महादेव के .

गीत गंभीर प्रकृति का है और कर्णप्रिय भी. इसे दो संजीदा कलाकारों
पर फिल्माया गया है-संजीव कुमार और जया भादुड़ी. जया को इस
फिल्म में अपनी प्रतिभा दिखाने के पर्याप्त अवसर मिले. उन्होंने किसी
भी फ्रेम में निराश नहीं किया होगा दर्शकों को, ऐसा मेरा मानना है.
हर गीत सुरों पर ही आधारित होता है. विशेष क्रम में लगे सुरों को
हम राग पर आधारित गीत कहते हैं. इन्टरनेट पर उपलब्ध विवरणों
के अनुसार ये गीत राग खमाज और यमन का मिश्रण है.

आप कुछ भी कह लें, मगर शाश्वत सत्य यही है कि गुलज़ार के बोलों
पर बेहतर धुनें केवल राहुल देव बर्मन ने ही बनाई और बाद में शायद
थोड़ी बहुत रहमान ने. लेकिन जिस निरंतरता और अनूठेपन से पंचम
ने बनाई वो शायद रहमान के लिए भी संभव नहीं. ये अलग बात है कि
आर डी को उत्तम कोटि के गायकों की सेवाएं प्राप्त थीं, रहमान इस
निर्भरता से परे हैं. रहमान किसी भी गायक को लेकर गाना बना सकते
हैं.






गीत के बोल:

बीती न बिताई रैना बिरहा की जाई रैना
भीगी हुयी अंखियों ने लाख बुझाई रैना

बीती हुई बतियाँ कोई दोहराए
भूले हुए नामों से कोई तो बुलाए
चादं चाँद
हो ओ ओ ओ ओ 

हो ओ,  चाँद की बिंदी वाली, बिंदीवाली रतियां
जागी हुई अखियों में रात ना आयी रैना

बीती न बिताई रैना बिरहा की जाई रैना
बीती न बिताई रैना

युग आते है और युग जाए
छोटी छोटी यादों के पल नहीं जाए
झूठ से काली लागे लागे काली रतिया
रूठी हुई अखियों ने लाख मनाई रैना


बीती न बिताई रैना बिरहा की जाई रैना
बीती न बिताई रैना
.........................................
Beeti na bitayi raina-Parichay 1972

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May 1, 2013

नदिया किनारे-अभिमान १९७३

गीत मधुर है उसके अलावा एक वजह और भी है इसको सुनने
की. बरसों हो गए इसके बारे में पूछते पूछते ज्ञानियों से, कोई
कहे “हे राय” कोई बतलावे “हे राई” कोई कहे “हेर आई”
“हे जीरा” सुनने को मेरे कान तरस गए इसके बाद तो.
राई का मतबल तो सीधा जो मैंने समझा वो है-मसाले में प्रयुक्त
होने वाला गोल काले रंग का दाना जो छौक लगाने या अचार
बनाने में प्रयोग होता है.

अब राई तो कंगना में आने से रही. नायिका पानी भरने गयी
नदी तट पर. एक बार तो वो ‘हे राय’ कहते हुए घड़े को माथे
से लगाती है, मानो कोई राय साहब का भजन गा रही हो.

हेर के ढेर सारे अर्थ हैं-आसुरी माया, किरीट, खोज तलाश, ढूँढना,
आखेट और हल्दी. इधर गीतकार का अभिप्राय किस अर्थ से है
समझें थोडा. लता मंगेशकर उसको “हेर आये” जैसा गा रही हैं.
एक दो बार “हे राये” सुनाई देता है. हो सकता है “हेर आये”
सही शब्द हों. ये हेर वही शब्द है जो हेर-फेर में प्रयुक्त होता
है. राई का एक अर्थ राजसी बताया गया है.

पाठकों से विनती है इस मामले में मेरी मदद करें. विशेषकर
मजरूह साहब के भक्तों से उम्मीद है मदद की. मुझ अज्ञानी
को एनलाईटन करें.




गीत के बोल:

हे, नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
ऐसे उलझ गए, अनाड़ी सजना
ऐसे उलझ गए, अनाड़ी सजना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना

काहे पनघट ऊपर, गई थी चल के अकेली
मारे हँस हँस ताना, सारी सखियाँ सहेली
गोरी और जाओ न मानो कहना
गोरी और जाओ न मानो कहना

नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना

अब खड़ी खड़ी सोचूँ
खड़ी खड़ी सोचूँ 
देखी है सास ननदिया
सब का करी हो बहाना
अब तो सूनी कलाई
लई के चोरी चोरी जाना
भारी पड़ा रे पिया से मिलना
भारी पड़ा रे पिया से मिलना

नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
ऐसे उलझ गए, अनाड़ी सजना
ऐसे उलझ गए, अनाड़ी सजना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
नदिया किनारे हेर आई, आई कंगना
…………………………………………
Nadiya Kinare-Abhimaan 1973

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Aug 3, 2011

चंपा चमेली-गाय और गोरी १९७३

फिल्म गाय और गोरी से एक गीत और सुनवाते हैं आपको। ये फिल्माया
गया है जया भादुड़ी और साथी कलाकारों पर। गीत लता मंगेशकर की
आवाज़ में है और ऊंचे सुर से शुरू होता है। नटखटिया अंदाज़ वाला ये
गीत एक बैलगाडी में बैठ के गाया जा रहा है ।

गीत में रामू और श्यामू नामक दो बैल भी अभिनय कर रहे हैं। गीत
के रचयिता हैं आनंद बक्षी और धुन तैयार की लक्ष्मी प्यारे ने ।




गीत के बोल:

चंपा चमेली काहे सहेली
हम निकली अकेली
रुत ऐसी जैसे कोई पहेली
पांव में पायल होंठों पे राग
भाग भाग भाग
भाग भाग भाग भाग
भाग मेरे रामू
जाग मेरे श्यामू
भाग मेरे रामू जाग मेरे श्यामू
चल जल्दी से चल
लंबी डगर छोटी उमर
अनमोल हर एक पल
चल चल चल चल
भाग मेरे रामू जाग मेरे श्यामू
चल जल्दी से चल
लंबी डगर छोटी उमर
अनमोल हर एक पल
चल चल चल चल
भाग मेरे रामू जाग मेरे श्यामू

ऐसे न चल हौले हौले
लंबा सफर गिन डोले , डोले
ऐसे न चल हौले हौले
लंबा सफर गिन डोले
घूंघट न खोले गोरी शर्माए हाय
रस्ते में किसी से नज़र न लड़ जाए
हो अम्बर पे बादल धरती पे आग
भाग भाग भाग भाग
भाग मेरे रामू
जाग मेरे श्यामू
चल जल्दी से चल
लंबी डगर छोटी उमर
अनमोल हर एक पल
चल चल चल
भाग मेरे रामू जाग मेरे श्यामू

पीछे शहर गांव आगे
दैया री दैया डर लागे, लागे
पीछे शहर गांव आगे
दैया री दैया डर लागे
रूप के चोरों की है ये नगरिया
मेले से मैं लायी मलमल की चुनरिया
हो, मुखड़े पे झूमे जुल्फों के नाग
भाग भाग भाग भाग
भाग मेरे रामू
जाग मेरे श्यामू
चल जल्दी से चल
लंबी डगर छोटी उमर
अनमोल हर एक पल
चल चल चल
भाग मेरे रामू जाग मेरे श्यामू
.............................
Champa chameli-Gaai aur gori 1973

Artist: Jaya Bhaduri

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गोरी ओ गोरी प्रेम कर ले-गाय और गोरी १९७३

आइये एक गीत सुनें फिल्म गाय और गोरी से। गीत किशोर कुमार की
आवाज़ में है, गीत आनंद बक्षी का है और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
का। शत्रुघ्न सिन्हा और 'पता नहीं कौन कौन' पर गीत फिल्माया गया है।

गीत में क्या हो रहा है, क्यूँ हो रहा है देख के पता लगाइए।




गीत के बोल:


गोरी ओ गोरी प्रेम कर ले
ऐसा प्रेमी फिर ना मिलेगा
गोरी ओ गोरी प्रेम कर ले
ऐसा प्रेमी फिर ना मिलेगा
आ तेरे बालों में ये फूल लगा दूँ
के ऐसा फूल फिर ना खिलेगा

गोरी ओ गोरी

जब तेरे दिल से, हाँ
जब तेरे दिल से, हो
जब तेरे दिल से मेरा दिल टकराएगा
जब तेरे दिल से मेरा दिल टकराएगा
तेरी क़सम बस मज़ा आ जाएगा
डोलेगी धरती
डोलेगी धरती और अम्बर हिलेगा


गोरी ओ गोरी
फिर न कहना आवाज़ न दी
प्रेम कर ले
ऐसा प्रेमी फिर ना मिलेगा
गोरी ओ गोरी

बातें करेंगे मुलाक़ाते करेंगे हाँ
बातें करेंगे हाँ
बातें करेंगे हम चुपके-चुपके
बातें करेंगे हम चुपके-चुपके
चोरी-चोरी मिलेंगे दुनिया से छुप के
किसी को भी
किसी को भी कुछ पता ना चलेगा
ऐसा प्रेमी फिर ना मिलेगा

गोरी ओ गोरी
फिर न कहना आवाज़ न दी
प्रेम कर ले
ऐसा प्रेमी फिर ना मिलेगा
आ तेरे बालों में ये फूल लगा दूँ
के ऐसा फूल फिर ना खिलेगा
गोरी ओ गोरी प्रेम कर ले
ऐसा प्रेमी फिर ना मिलेगा
गोरी ओ गोरी
................................
Gori o gori-Gaai aur gori 1973

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Jan 22, 2011

अब तो है तुमसे हर ख़ुशी-अभिमान १९७३

फिल्म अभिमान के पिछले गीत में हमने पुरुष स्वाभिमान को
लगने वाली ठेस का जिक्र किया था। किस प्रकार नारी के अधिक
प्रतिभावान होने को पुरुष हजम नहीं कर पाता है। इस गीत में आप
पाएंगे की नायिका एक के बाद एक बुलंदी की सीढ़ियों को चढ़ती जा
रही है और नायक इन सब के बीच कहीं आपने आप को खोने लगा
है। कुंठित कलाकार का चरित्र अभिनय अमिताभ ने बढ़िया निभाया
है।

एक बात फिर भी तय है कि फिल्म में जया ने अमिताभ से ज्यादा
अच्छा अभिनय किया है।



गीत के बोल:


अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
तुम पे मरना है, ज़िन्दगी अपनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी

जब हो गया तुम पे, ये दिल दीवाना
जब हो गया तुम से, ये दिल दीवाना
फिर चाहे जो भी कहे, हमको ज़माना
कोई बनाये बातें, चाहे अब जितनी, हो हो


अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी

तेरे प्यार में बदनाम दूर दूर हो गए
तेरे प्यार में बदनाम दूर दूर हो गए
तेरे साथ हम भी सनम मशहूर हो गए
देखो कहाँ ले जाये, बेखुदी अपनी, हो हो

अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी
तुम पे मरना है, ज़िन्दगी अपनी, हो हो
अब तो है तुम से, हर ख़ुशी अपनी

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Dec 6, 2010

नीला आसमान सो गया-सिलसिला १९८१

सिलसिला एक प्रेम त्रिकोण पर आधारित कहानी है।
इसमें अमिताभ बच्चन, जाया भादुड़ी और रेखा
ने अभिनय किया है। यश चोपड़ा जो कि त्रिकोण
से खासा लगाव रखते हैं उन्होंने ये एक विश्वसनीय
सी फिल्म बनाई, मगर समय से थोडा आगे होने
की वजह से फिल्म ने अच्छा व्यवसाय नहीं किया।

फिल्म की विशेषता नए रंग रूप में निखरी रेखा
के कोस्तुमे थे। रेखा सन १९८० के बाद जबसे उन्होंने
योग करना शुरू किया एक नई तरोताज़ा काया के
साथ नज़र आयीं। इस फिल्म में लभगग उन्होंने ४००
के करीब परिधान पहने हैं। ये तथ्य एक रेखा के
फैन ने मुझे बताया। मुझ में इतना ध्यान लगा
के कपडे गिनने का धैर्य नहीं है।

जावेद अख्तर ने अपनी प्रतिभा के साथ न्याय करते
हुए कुछ अच्छे गीत लिखे हैं फिल्म के लिए और
संगीतकार शिव हरि का तो कहना ही क्या जिन्होंने
एक से बढ़ कर एक धुनें तैयार की फिल्म के लिए ।
फिल्म का संगीत खासा लोकप्रिय है और इसके गीत
आज भी सुने जाते हैं। सिलसिला फिल्म से ये गीत
मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। ये लता मंगेशकर वाला
संस्करण है। इसी गीत को अमिताभ ने भी गाया है।



गीत के बोल:

नीला आसमान सो गया
नीला आसमान सो गया हो
नीला आसमान सो गया

आंसुओं में चाँद डूबा रात मुरझाई
ज़िन्दगी में दूर तक फैली है तन्हाई
जो गुज़रे हम पे वो कम है
तुम्हारे गम का मौसम है
नीला आसमान सो गया
नीला आसमान सो गया

हो, याद की वादी में गूंजे बीते अफ़साने
याद की वादी में गूंजे बीते अफ़साने
हमसफ़र जो कल थे अब ठहरे वो बेगाने
मोहब्बत आज प्यासी है
बड़ी गहरी उदासी है
नीला आसमान सो गया हो
नीला आसमान सो गया

नीला आसमान सो गया
नीला आसमान सो गया
नीला आसमान सो गया

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Nov 23, 2010

पत्ता पत्ता बूटा बूटा-एक नज़र १९७२

ये है एक लता और रफ़ी का गाया युगल गीत -पत्ता पत्ता बूटा बूटा।
कभी कभी कुछ शब्द विशेष लोकप्रिय हो जाते हैं फ़िल्मी गीतों द्वारा।
अमूमन कविताओं में उपयोग होने वाले कुछ ख़ास शब्द फ़िल्मी गीतों
से नदारद रहते हैं। मीर तकी मीर की ग़ज़ल "पत्ता पत्ता बूटा बूटा" से
इसकी शुरूआती पंक्तियाँ ली गई हैं। गीत मजरूह का लिखा हुआ है ।
इस गीत के साथ मेहँदी हसन की गाई मीर की ग़ज़ल भी सुनिए, आनंद
दुगना हो जायेगा। गीत की पंक्तियों पर गौर फरमाएं-जाने ना जाने गुल ही
ना जाने बाग़ तो सारा जाने है। गली, शहर, दुनिया को मालूम है मेरा
हाल ..........

फिल्म इक ऑफ-बीत फिल्म कहलाती है और इसका निर्देशन
बी आर इशारा साहब ने किया है जिन्होंने काफी तादाद में
लीक से हट कर फ़िल्में बनायीं। जैसा कि हश्र उनकी फिल्मों का
अक्सर हुआ करता, ये फिल्म भी बॉक्स ऑफिस से रूठ गई।



१) एक नज़र का गीत



२) मेहँदी हसन की गाई ग़ज़ल-पत्ता पत्ता बूटा बूटा -



गीत के बोल:

पत्ता पत्ता बूटा बूटा
हाल हमारा जाने हैं

पत्ता पत्ता बूटा बूटा
हाल हमारा जाने हैं
पत्ता पत्ता
जाने ना जाने गुल ही ना जाने
बाग़ तो सारा जाने है

पत्ता पत्ता बूटा बूटा
हाल हमारा जाने हैं
पत्ता पत्ता

कोई किसी को चाहे
तो क्यूँ गुनाह समझते हैं लोग
कोई किसी की खातिर
तडपे अगर तो हँसते हैं लोग

बेगाना आलम है सारा
यहाँ तो कोई हमारा
दर्द नहीं पहचाने है

पत्ता पत्ता बूटा बूटा
हाल हमारा जाने हैं
पत्ता पत्ता

चाहत के गुल खिलेंगे
चलती रहे हज़ार आँधियाँ
हम तो किसी चमन में
बाँधेंगे प्यार का आशियाँ

ये दुनिया बिजली गिराए
ये दुनिया काँटे बिछाए
इश्क़ मगर कब माने है

पत्ता पत्ता बूटा बूटा
हाल हमारा जाने हैं
पत्ता पत्ता

दिखलाएंगे जहाँ को
कुछ दिन जो ज़िन्दगानी है और
कैसे न हम मिलेंगे
हमने भी दिल में ठानी है और

अभी मतवाले दिलों की
मुहब्बत वाले दिलों की
बात कोई क्या जाने है

पत्ता पत्ता बूटा बूटा
हाल हमारा जाने हैं
पत्ता पत्ता

जाने ना जाने गुल ही ना जाने
बाग़ तो सारा जाने है

पत्ता पत्ता बूटा बूटा
हाल हमारा जाने हैं
पत्ता पत्ता

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Jun 16, 2010

मेरा पढने में नहीं लागे दिल-कोरा कागज़ १९७४

बात सन १९७४ की हो या सन २०१० की, गाना आज भी प्रासंगिक
है। यूँ कहिये आज ज्यादा प्रासंगिक है। आश्चर्य है की इसका 'मसाला '
'दुशाला, 'ऊट पटांगो छींको खांसो' मिक्स अभी तक क्यूँ नहीं बना।

फिल्म कोरा कागज़ के लिए संगीतकार कल्याणजी भाई और आनंदजी भाई
को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ था। गाना फिल्माया गया है जया भादुड़ी पर और
साथ में नाजनीन नाम की नायिका दिखलाई दे रही हैं। नाजनीन गाना शुरू
करती है और नायिका बाद में साथ देने लगती है। विजय आनंद अर्थात मास्टरजी
की शकल दिखाई देने के बाद सिट्टी पिट्टी गुम जैसे भाव के साथ गाना रुकता है
और क्षणिक अन्तराल के बाद फिर चल पढता है।

गीत अपने ज़माने का ज़बरदस्त हिट गीत है और इसे गाया है लता ने । इसको
हम नटखट गीतों की श्रेणी में गिन सकते हैं।



गीत के बोल:


मेरा पढने में नहीं लागे दिल क्यूँ
मेरा पढने में नहीं लागे दिल
दिल पे क्या पड़ गई मुश्किल, उम्म्ह
अरे रात भी सूनी सूनी लागे
और दिन भी सूना सूना लागे
कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल, हो

हो ओ ओ ओ, बैठे बैठे मन मुस्काए
बैठे बैठे मन मुस्काए
मैं ना जानूं वो क्यूँ याद आये
मैं ना जानूं वो क्यूँ याद आये
किस्से बातें करती हूँ मैं
अरे किस्से बातें करती हूँ
चुपके चुपके हंसती हूँ
कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल, हो

हो, दिल में क्या है लिख नहीं पाऊँ
दिल में क्या है लिख नहीं पाऊँ
ख़त लिखूं तो उसे कैसे पहुँचाऊँ
ख़त लिखूं तो उसे कैसे पहुँचाऊँ
पास भी उसके जा ना सकूं मैं
अरे, पास भी उसके जा ना सकूं मैं
दूर भी उसके रह ना सकूं मैं

कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल, क्यूँ
दिल पे क्या पड़ गई मुश्किल
अरे रात भी सूनी सूनी लागे
और दिन भी सूना सूना लागे
कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल क्यूँ

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Apr 29, 2010

किसी से दोस्ती कर लो-दिल दीवाना १९७४

नरेन्द्र बेदी ने सन १९७२ में एक फिल्म बनाई जिसकी कहानी कोलेज के
इर्द गिर्द घूमती है जिसमे रणधीर कपूर और जया भादुड़ी की प्रमुख भूमिकाएं
हैं। फिल्म अपने संगीत और कथानक की वजह से सराही गयी ।

इसी जोड़ी को लेकर उन्होंने सन १९७४ में फिल्म बनाई जिसका नाम है
दिल दीवाना । इस फिल्म में रणधीर कपूर ने इक दिलफ़ेंक आशिक की भूमिका
निभाई है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पिट गयी । कुछ कर्णप्रिय गीत होने
के बावजूद इसके गीत ज्यादा सुनाई नहीं दिए। जवानी दीवानी में राहुल देव
बर्मन का संगीत था और इस फिल्म में भी उन्होंने ही संगीत दिया । फिल्म की
असफलता से उन्हें भी नुक्सान हुआ और अच्छा संगीत आम जनता से दूर रहा।
अलबत्ता, इस फिल्म का एक गीत ज़रूर कभी कभार सुनने को मिला जिसके लिए
दूरदर्शन के कार्क्रम चित्रहार को धन्यवाद् देना उचित होगा। वो गीत है -
'खान चाचा खान चाचा '




गीत के बोल:

हे हे, हूँ हूँ
हे हे, हे हे
किसी से दोस्ती कर लो
करोगे प्यार तुम हमसे
किसी से दिल्लगी कर लो
करोगे प्यार तुम हमसे

हो, कौन महफ़िल में आवारा आ गया
अरे दोस्तों में दुश्मन हमारा आ गया
अब क्या करें हम अपनी तारीफ़
य्होड़े से बदमाश हैं हम थोड़े शरीफ
इसलिए, किसलिए
इसलिए, किसलिए
खफा खफा क्यूँ लगते हो सरकार तुम हमसे
हाँ, ना हमसे दुश्मनी कर लो
बचो सरकार तुम हमसे

किसी से दोस्ती कर लो
करोगे प्यार तुम हमसे

हो, आपका ही क्या दीवाना नाम है
अरे मुझको नहीं पसंद ये पुराना नाम है
भाई नाम ना देखो तुम देखो काम को
फुरसत हो तो कल अकेले मिलना शाम को
अरे क्या कहा, क्या हुआ
क्या कहा, क्या हुआ
उलझ गए हो क्यूँ आकर बेकार तुम हमसे

हूँ, किसी से दोस्ती कर लो
करोगे प्यार तुम हमसे

हाँ, ना हमसे दुश्मनी कर लो
बचो सरकार तुम हमसे

करोगे प्यार तुम हमसे
बचो सरकार तुम हमसे
करोगे प्यार तुम हमसे
बचो सरकार तुम हमसे
करोगे प्यार तुम हमसे

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Jan 13, 2010

पिया बिना, पिया बिना-अभिमान १९७३

एस डी बर्मन द्वारा रचित सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में आप इसको गिन
सकते हैं। गीत गाया है लता मंगेशकर ने जिसे जया भादुड़ी पर
फिल्माया गया है। अभिमान फिल्म का सबसे ज्यादा बजने वाला
गीत भी यही है। वैसे इस फिल्म का संगीत बहुत लोकप्रिय हुआ था
और सभी गीत चर्चित हुए । नारी के आगे निकल जाने पर पुरुष का
अहम् किस प्रकार चोट खाता है इसका बखूबी चित्रण किया गया है
फिल्म में। बाकी चर्चा इस फिल्म के दूसरे गीतों को पेश करते वक़्त ।

............



गाने के बोल:

पिया बिना
पिया बिना पिया बिना, बासिया
बाजे ना, बाजे ना बाजे ना,
पिया बिना
पिया बिना पिया बिना, बासिया

पिया ऐसे रूठे, के होंठों से मेरे, संगीत रूठा
पिया ऐसे रूठे, के होंठों से मेरे, संगीत रूठा
कभी जब मैं गाऊँ, लगे मेरे मन का, हर गीत झूठा
ऐसे बिछड़े, हो, ओ ओ
ऐसे बिछड़े मोसे रसिया
पिया बिना
पिया बिना पिया बिना, बासिया
बाजे ना बाजे ना बाजे ना,
पिया बिना
पिया बिना पिया बिना, बासिया

तुम्हारी सदा बिन, नहीं एक सूनी, मोरी नगरिया
तुम्हारी सदा बिन, नहीं एक सूनी, मोरी नगरिया
के चुप है पपीहा, मयूर बोल भूले, बन में साँवरिया
दिन है सूना, आ आ आ आ
दिन है सूना, सूनी रतिया
पिया बिना
पिया बिना पिया बिना, बासिया
बाजे ना बाजे ना बाजे ना,
पिया बिना
पिया बिना पिया बिना, बासिया

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Jan 4, 2010

लोगों न मारो इसे-अनामिका १९७२

जाया भादुड़ी और संजीव कुमार पर फिल्माया गया और आशा भोंसले
द्वारा गाया गया एक नटखट गीत। फिल्म अनामिका के लिए इस गीत की
रचना की थी मजरूह सुल्तानपुरी ने और धुन बनायीं राहुल देव बर्मन ने।
फिल्म के दूसरे दो गीत बहुत बजे थे। इस गीत से परिचय उन्ही लोगों का
हुआ जिन्होंने फिल्म देखी है। बर्फ के गोले बना के फेंकने का सुख आपको
तभी मिल सकता है जब आप बर्फीली पहाड़ियों पर घूमने जाएँ। पिटाई
करवाने के बाद हमदर्दी दिखाती नायिका, ऐसे वाकये हिंदी फिल्मों में कई
मिलेंगे आपको, पढ़ते रहिये ये ब्लॉग। सीधी साधी कहानी में मनोरंजक
पेंच और घुमाव ऐसे ही दिए जाते हैं और बन जाती है स्क्रिप्ट। गीत का
मुखड़ा किधर और अंतरा किधर, ढूंढते रहिये .......




गाने के बोल:

लोगों न मारो इसे
यही तो मेरा दिलदार है

लोगों न मारो इसे
यही तो मेरा दिलदार है
दिल से जो दिल टकराये
नहीं दुशमनी ये प्यार है
हम ज़रा जो उलझ गये
क्यूँ लडाई समझ गये?
प्यारी प्यारी ये थी हमारी
मोहब्बत की दिल्लगी ज़रा

काहे को रूठा दीवाना मेरा
तू ही तो सपना सुहाना मेरा
ये लो सैयां मैं ही हारी
उलटा पड़ा निशाना मेरा

काहे को रूठा दीवाना मेरा
तू ही तो सपना सुहाना मेरा
ये लो सैयां, मैं ही हारी
उलटा पड़ा निशाना मेरा

काहे को रूठा दिवाना मेरा

यूँ तो शुरू से हूँ मैं
तुम ही पर ये दिल हारे हुए
लेकिन ख़फ़ा होके तुम
तो आज और भी प्यारे हुए
प्यार था तो सताया तुम्हें
रंग अदा का दिखाया तुम्हें
कैसा नादान भोला भाला
अभी तक है मस्ताना मेरा
काहे को रूठा दिवाना मेरा

तेरे मिलन से यूँ ही
महकता रहे मेरा जहाँ
सदा लगी रहूँ गले
कभी न ढले अब ये समा
तेरी चाहत जवानी मेरी
तेरा ग़म ज़िंदगानी मेरी
तुझ को चाहूँ तुझी को पूजूँ
यही बस हो अफ़साना मेरा

काहे को रूठा दीवाना मेरा
तू ही तो सपना सुहाना मेरा
ये लो सैयां मैं ही हारी
उलटा पड़ा निशाना मेरा

काहे को रूठा दीवाना मेरा, आ
तू ही तो सपना सुहाना मेरा, आ
ये लो सैयां मैं ही हारी
उलटा पड़ा निशाना मेरा

काहे को रूठा दीवाना मेरा
तू ही तो सपना सुहाना मेरा

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Dec 26, 2009

रातों के साए-अन्नदाता १९७१

पेचीदा और जटिल धुनें बनाने के लिए विख्यात सलिल चौधरी ने
लता मंगेशकर के लिए विशेष संगीत तैयार किया जिसके फलस्वरूप
हमें कुछ अतिरिक्त मधुरता वाले गीत सुनने को मिले। टाइपरायटर
की खट खट और सिलाई मशीन की खटर-पटर के संगीत से शुरू होकर
लता की सन्नाटे को चीरती हुई आवाज़ तक पहुँचने का सफ़र बहुत सहज
तरीके से फिल्माया गया है। सोता हुआ बूढा आदमी उठ बैठता है ये देखने
को -रात में कोई तो है जिसकी आँखों में नींद नहीं है और जो सुरमई दर्द
हवा में उड़ेल रहा है। गरीब के घर में आशा की किरण भले ही पतली हो
मगर गहरी हुआ करती है। ओमप्रकाश एक बेहद संवेदनशील और
प्रतिभाशाली कलाकार थे और वे एक छोटे से दृश्य में भी अपनी छाप छोड़
दिया करते थे।



गीत के बोल:

रातों के साए घने जब बोझ दिल पर बने
ना तो जले बाती ना हो कोई साथी
ना तो जले बाती ना हो कोई साथी
फिर भी ना डर अगर बुझें दिए
सहर तो है तेरे लिए

रातों के साए घने जब बोझ दिल पर बने
ना तो जले बाती ना हो कोई साथी
ना तो जले बाती ना हो कोई साथी
फिर भी ना डर अगर बुझें दिए
सहर तो है तेरे लिए


जब भी मुझे कभी कोई जो गम घेरे
लगता है होंगे नहीं सपने ये पूरे मेरे
जब भी मुझे कभी कोई जो गम घेरे
लगता है होंगे नहीं सपने यह पूरे मेरे
कहता है दिल मुझको माना हैं गम तुझको
फिर भी ना डर अगर बुझें दिए
सहर तो है तेरे लिए

जब ना चमन खिले मेरा बहारों में
जब डूबने मैं लगूं रातों की मजधारों में
जब ना चमन खिले मेरा बहारों में
जब डूबने मैं लगूं रातों की मझधारों में
मायूस मन डोले पर ये गगन बोले
फिर भी ना डर अगर बुझें दिए
सहर तो है तेरे लिए

जब ज़िन्दगी किसी तरह बहलती नहीं
खामोशियों से भरी जब रात ढलती नहीं
जब ज़िन्दगी किसी तरह बहलती नहीं
खामोशियों से भरी जब रात ढलती नहीं
तब मुस्कुराऊँ मैं ये गीत गाऊँ मैं
फिर भी ना डर अगर बुझें दिए
सहर तो है तेरे लिए

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Oct 4, 2009

नैन हमारे -अन्न दाता १९७१

फ़िल्म अन्न दाता का ये गीत मुझे बहुत पसंद है। बोल से ज्यादा
धुन के लिए। मुकेश का गाया ये गीत अनिल ध्वाना पर फिल्माया
गया है। मुकेश की दर्द भरी आवाज़ के साथ जो साजों की अठखेलियाँ
हैं इस गीत में वो लाजवाब हैं। इसके संगीतकार हैं-सलिल चौधरी।



गाने के बोल:

नैन हमारे साँझ सकारे देखे लाखों सपने
सच यह कहीं होंगे या नहीं
कोई जाने ना, कोई जाने ना, यहाँ

चलते रहे डगर पे ग़म की जिनके वास्ते
चलते रहे दिलो को अजनबी से रास्ते
सदियों से छाये, यह जो सपनो के साये

सच यह कहीं होंगे या नहीं
कोई जाने ना, कोई जाने ना, यहाँ

मनन ये कहे दुखी ना हो दुखों से हर के
लिखते रहे जो आंसुओं से गीत प्यार के
गीत वोह चाहे, रोये कोई, हंस के गाये

सच यह कहीं होंगे या नहीं
कोई जाने ना, कोई जाने ना, यहाँ

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