बोले रे पपीहरा-गुड्डी १९७१
हृषिकेश मुखर्जी निर्देशित इस फिल्म की काफी सराहना
हुई थी. स्कूल में पढ़ने वाली गुड्डी फिल्मों की दीवानी है.
वो फिल्मस्टार धर्मेन्द्र की दीवानी है फिल्म के कथानक
अनुसार. नायिका का नाम कुसम है लेकिन वो गुड्डी के
नाम से पहचानी जाती है.
अपने फिल्म प्रेम के चलते वो एक खयाली दुनिया में खो
जाती है और उसे फिल्म स्टार धर्मेन्द्र एक आदर्श व्यक्तित्व
प्रतीत होने लगता है. फिल्म का नायक उसके समक्ष शादी
का प्रस्ताव रखता है जिसे वो ठुकरा देती है.
उसकी मुलाकात फिल्मस्टार धर्मेन्द्र से होती है और उसे
वास्तविक जीवन और फिल्म जीवन में अंतर मालूम पढता
है तो उसकी ऑंखें खुलती हैं और अंत में वो नायक से शादी
करने के लिए तैयार हो जाती है. नायक का रोल समित भांजा
ने किया है. फिल्म की पटकथा और गीत गुलज़ार के लिखे
हुए हैं और संगीत वसंत देसाई का.
आज जो गीत हम आपको सुनवा रहे हैं वो वाणी जयराम ने
गाया है. दक्षिण भारत की फिल्मों में विभिन्न भाषाओँ में
गीत गाने वाली वाणी जयराम को हिंदी फिल्मों में ज्यादा
अवसर प्राप्त नहीं हुए. प्रस्तुत गीत उनका सबसे लोकप्रिय
हिंदी गीत है.
गीत के बोल:
बोले रे पपीहरा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
बोले रे पपीहरा
पलकों पर इक बूँद सजाए
बैठी हूँ सावन ले जाए
जाए पी के देस में बरसे
नित मन प्यासा, नित मन तरसे
बोले रे पपीहरा
सावन जो संदेसा लाए
मेरी आँख से मोती आए
जान मिले बाबुल के घर से
नित मन प्यासा, नित मन तरसे
बोले रे पपीहरा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
नित मन तरसे, नित मन प्यासा
बोले रे पपीहरा
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Bole re papihara-Guddi 1971
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