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Nov 1, 2019

कतरा कतरा मिलती है-इजाज़त १९८७

मानवीय संबंधों और उनके अनछुए पहलुओं पर काफ़ी
फ़िल्में बनी हैं बॉलीवुड में. कुछ फ़िल्में ऐसी हैं जो दिल
और दिमाग पर असर कर जाती हैं. ऐसी ही एक फिल्म
है इजाज़त. १९८७ के हिसाब से लीक से हट कर विषय
को हौले हौले और आहिस्ते से डील किया है गुलज़ार ने.
ये हम मौसम फिल्म में भी देख चुके हैं. थोडा रिफाइनमेंट
अवश्य है इतने सालों के सफर में मगर गुलज़ार को जो
गति पसंद है अपनी फिल्मों के इसमें भी लगभग वही है.

संगीतकार की ट्यूनिंग इतनी बढ़िया रही गीतकार के साथ
कि हमें उम्दा गीत सुनने को मिल रहे हैं आज तक. इस
मामले में गीतकार का निर्देशक होना भी शायद एक बड़ा
कारण है. फिल्म किनारा के गीत भी कहानी का अटूट
हिस्सा से प्रतीत होते हैं. गीतकार शायद यहाँ अंदर की
आवाज़ की प्रतिध्वनि चाहता था गीत में जो उसे मिल गयी.
संगीतकार ने ट्रेक ओवरलैप और मिक्सिंग के ज़रिये इसे
सुगम बना दिया.




गीत के बोल:

कतरा कतरा मिलती है
कतरा कतरा जीने दो
ज़िंदगी है ज़िंदगी है
बहने दो बहने दो
प्यासी हूँ मैं प्यासी रहने दो
रहने दो ना
कतरा कतरा जीने दो
ज़िंदगी है ज़िंदगी है
बहने दो बहने दो
प्यासी हूँ मैं प्यासी रहने दो
रहने दो ना

कल भी तो कुछ ऐसा ही हुआ था
नींद में थी तुमने जब छुआ था
गिरते गिरते बाहों में बची मैं
हो सपने पे पाँव पड़ गया था
सपनों में बहने दो
प्यासी हूँ मैं प्यासी रहने दो
रहने दो

कतरा कतरा जीने दो
ज़िंदगी है ज़िंदगी है
बहने दो बहने दो
प्यासी हूँ मैं प्यासी रहने दो
रहने दो ना

तुमने तो आकाश बिछाया
मेरे नंगे पैरों में ज़मीन है
कैसी भी तुम्हारी जो आरज़ू हो
हो शायद ऐसे ज़िन्दगी हसीन है
आरज़ू में बहने दो
प्यासी हूँ मैं प्यासी रहने दो
रहने दो ना

कतरा कतरा जीने दो
ज़िंदगी है ज़िंदगी है
बहने दो बहने दो
प्यासी हूँ मैं प्यासी रहने दो
रहने दो

हलके हलके कोहरे के धुंए में
शायद आसमान तक आ गयी हूँ
तेरी दो निगाहों के सहारे
हो देखो तो कहाँ तक आ गयी हूँ
कोहरे में बहने दो
प्यासी हूँ मैं प्यासी रहने दो
रहने दो

कतरा कुतरा जीने दो
ज़िंदगी है ज़िंदगी है
बहने दो बहने दो
प्यासी हूँ मैं प्यासी रहने दो
रहने दो रहने दो
रहने दो रहने दो
रहने दो
……………………………………………..
Katra katra milti hai-Ijazat 1987

Artists: Rekha, Naseerudiin Shah

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Jun 26, 2017

खाली हाथ शाम आई है-इजाज़त १९८७

सन १९८७ की फिल्म इज़ाज़त अलग हट के बनी फिल्म है.
फिल्म का कथानक भी अलग हट के है. इसके गीत भी थोडा
अलग हट के हैं. इसके दर्शक भी अलग हट के ही हैं.

फिल्म से एक गीत सुनते हैं आशा भोंसले का गाया हुआ. इसे
गुलज़ार ने लिखा है और आर डी बर्मन ने संगीत से संवारा.





गीत के बोल:

खाली हाथ शाम आई है
खाली हाथ जायेगी
आज भी न आया कोई
खाली लौट जायेगी
खाली हाथ शाम आई है

आज भी न आये आँसू
आज भी न भीगे नैना
आज भी ये कोरी रैना
कोरी लौट जायेगी
खाली हाथ शाम आई है

रात की सियाही कोई
आए तो मिटाये ना
आज न मिटाई तो ये
कल भी लौट आयेगी
खाली हाथ शाम आई है
…………………………………………………….
Khali hath shaam aayi hai-Ijazat 1987

Artist: Rekha

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Dec 9, 2014

छोटी सी कहानी से -इज़ाज़त १९८७

इज़ाज़त फिल्म के गीतों  पर लंबे लंबे लेख लिखे जा चुके हैं मसलन
गुलज़ार साहब एक दिन लेख नुमा गीत लेकर आर डी बर्मन के घर
पहुंचे और किस तरह आर डी ने ये कह कर कि-कल को तुम टाइम्स ऑफ
इंडिया की हेडलाइन  लाकर आओगे और बोलोगे इसे कोम्पोज़ करो गीत
की धुन बनाने से मन किया. मगर पुनर्विचार कर इस पर काम शुरू हुआ
और जो हुआ वो सब जानते हैं इतिहास बन गया. गीत के लिए आशा भोंसले
को को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ. गुलज़ार और राहुल देव बर्मन दोनों ही
अलग हट के/लीक से हट कर काम करने के लिए जाने जायेंगे आनेवाले
लंबे समय तक.

इन सब लेखों में जिस बात का जिक्र कम होता है वो है अनुराधा पटेल की
अदाएगी का. नसीर के बराबर नहीं मगर कम से कम इस गीत में तो वे
कहीं से भी उन्नीस नहीं हैं. अनुराधा पटेल का नाम भले ही उम्दा अदाकाराओं में
शुमार न होता हो, इस गीत में उन्होंने वो जादुई अहसास जगाया है कि दर्शक
बंधा रह जाता है गीत से. इस गीत का पूर्ण आनंद इसका विडीयो देख कर ही
प्राप्त होता है. माया नाम का किरदार वाकई मायावी सा है.

गीत की एक और विशेषता है इसमें उल्हास बापट द्वारा संतूर बजाय जाना.

आज आपको दूसरा गाना सुनवाया जा रहा है इस फिल्म का जिसमें महानायिका
रेखा हैं. इनकी अदाकारी पर कुछ कहना दिए  को टोर्च की रौशनी दिखाना है. इस
गीत में मनमोहक बांसुरी है, किसने बजायी है पता चलते ही आपको सूचित
करूँगा. एक जानकारी आपके लिए और-ये रिलीज़ हुई फिल्मों में रेखा की
६९ वीं फिल्म थी.



गीत के बोल:

छोटी सी कहानी से
बारिशों के पानी से
सारी वादी भर गयी
ना जाने क्यों, दिल भर गया
ना जाने क्यों, आँख भर गयी

शाखों पे पत्ते थे, पत्तों पे बूंदे थी
बूंदो में पानी था, पानी में आंसू थे

दिल में गिले भी थे, पहले मिले भी थे
मिल के पराये थे, दो हमसाये थे

रुकती है थमती है कभी बरसती है
बादल पे पाँव रख के बारिश मचलती है
.........................................................................
Chhoti si kahan se-Izazat 1987

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Apr 12, 2009

मेरा कुछ सामान-इजाज़त १९८७

संगीतकार राहुल देव बर्मन ने कुछ असंभव से लगने वाले
गाने के मीटर बनाये उसमे थोड़ा सरल गीत था किनारा का
"एक ही ख्वाब" । गुलज़ार ने उनको एक और दिमागी कसरत
का सामान मुहैया कराया फ़िल्म इज़ाज़त के लिए।

इसको देख के सबसे पहली प्रतिक्रिया बर्मन की थी-कल को
तुम टाईम्स ऑफ़ इंडिया अखबार ला के उसकी हेडलाइन को
गाने की शकल में ढालने की बात करोगे। एक सौ सोलह चाँद
की रातें...... और तुम्हारे काँधे का तिल .... ।

अनुराधा पटेल एक प्रतिभाशाली और संवेदनशील अभिनेत्री हैं
जो कुछ फिल्मों के बाद फ़िल्म जगत से गायब हो गयीं। मेरी
मित्र मण्डली में कोई भी ऐसा नहीं जिसको ये फ़िल्म न पसंद
आई हो। कुछ मित्र ऐसे हैं जिन्होंने ये फिल्म देखी ही नहीं।



गाने के बोल:

मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है
मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है
ओ ओ ओ ! सावन के कुछ भीगे भीगे दिन रखे हैं
और मेरे एक खत में लिपटी रात पड़ी है
वो रात भुला दो, मेरा वो सामान लौटा दो
वो रात भुला दो, मेरा वो सामान लौटा दो

मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है
मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है
पतझड़ है कुछ ... है ना ?
ओ ! पतझड़ में कुछ पत्तों के गिरने की आहट
कानों में एक बार पहन के लौट आई थी
पतझड़ की वो शाख अभी तक कांप रही है
वो शाख गिरा दो, मेरा वो सामान लौटा दो
वो शाख गिरा दो, मेरा वो सामान लौटा दो

एक अकेली छतरी में जब आधे आधे भीग रहे थे
एक अकेली छतरी में जब आधे आधे भीग रहे थे
आधे सूखे आधे गीले, सूखा तो मैं ले आयी थी
गीला मन शायद बिस्तर के पास पड़ा हो !
वो भिजवा दो, मेरा वो सामान लौटा दो
एक सौ सोलह चांद कि रातें एक तुम्हारे कांधे का तिल
एक सौ सोलह चांद कि रातें एक तुम्हारे कांधे का तिल
गीली मेंहदी की खुशबू, झूठ-मूठ के शिकवे कुछ
झूठ-मूठ के वादे सब याद करा दूँ
सब भिजवा दो, मेरा वो सामान लौटा दो
सब भिजवा दो, मेरा वो सामान लौटा दो
एक इजाज़त दे दो बस, जब इसको दफ़नाऊँगी
मैं भी वहीं सो जाऊंगी
मैं भी वहीं सो जाऊंगी
........................................................................
Mera kuchh samaan-Ijazat 1987

Artist: Anuradha Patel

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