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Feb 4, 2016

प्यारी प्यारी सूरतों-दुश्मन १९३९

सहगल के गीतों के बिना हिंदी फिल्म संगीत की गाथा कुछ
अधूरी सी लगती है. अब सुनते हैं सहगल का एक गीत.

फिल्म दुश्मन(१९३९) से आप इधर दो गीत सुन चुके हैं. आज
सुनते हैं तीसरा गीत जो सहगल का गया हुआ है. बोल फिर
से एक बार आरजू लखनवी के हैं और संगीत पंकज मलिक का.
गीत ७६ साल पुराना है. गौरतलब है हिंदी फिल्मों ने बोलना
सन १९३१ में शुरु किया था.

फिल्म का निर्माण उस समय की नामचीन संस्था-न्यू थियेटर्स
ने किया था. फिल्म का निर्देशन नितिन बोस ने किया. सन १९३९
में न्यू थियेटर्स की केवल यही फिल्म रिलीज़ हुई थी. फिल्म में
पृथ्वीराज कपूर भी मौजूद हैं. फिल्म क्लासिक के दर्जे में आती है.




प्यारी-प्यारी सूरतों मोह भरी मूरतों
देश से परदेश में
तुम्हारा संदेसा आये है
तन से भी मन से भी
जैसा खींचा जाए है
मदद करो मदद करो
तुम तक आ जायेंगे

पहुंचेंगे आखिर कभी
छानेंगे एक एक गली
पहुंचेंगे आखिर कभी
छानेंगे एक एक गली
देखे वो मुखडा अभी
होगी यही बेकली

गाल हैं जिसके गुलाब
रस आँखों का शराब
गाल हैं जिसके गुलाब
रस आँखों का शराब
होश कहाँ रहेंगे फिर
खुद भी खो जायेंगे

हाँ वही गुल रस भरी जैसे बाजे बांसुरी
कानों में दे कर सन्देश
कानों में दे कर सन्देश
कानों में दे कर सन्देश
कानों में दे कर सन्देश
नींद से, नींद से चौंकाए है
देश से हम दूर हैं दूर हैं
आने से मजबूर हैं
देश से हम दूर हैं दूर हैं
आने से मजबूर हैं
मदद करो मदद बिना मदद बिना
मदद बिना कैसे पहुँच पाएंगे
मदद बिना कैसे पहुँच पाएंगे
मदद करो मदद करो मदद करो
…………………………………………………………….
Pyari pyari soorton-Dushman 1939

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Jun 10, 2009

करुँ क्या आस निरास भई-दुश्मन १९३९

सहगल के गाने का विडियो हो या न हो कोई फर्क नहीं पड़ता।
सर्वदा से संगीत प्रेमियों और रसिकों के लिए उनके गाये गीत
अनमोल खजाना हैं। इधर यू-ट्यूब एक ऑडियो क्लिप है केवल ।
ज़बरदस्त हिट गाना है ये। आज भी मानो लगता है अभी अभी
गाया गया है। ऐसे ही गाने अमर गीतों के श्रेणी में आते हैं।

आरजू लखनवी के बोलों को सुरों में पिरोया है पंकज मलिक ने .
गाना निराशा के भाव से आशा की ओर बढ़ता है जो कि गानों
में बहुत कम देखने में आया है।




गाने के बोल:

करुँ क्या आस निरास भई
करुँ क्या आस निरास भई

दिया बुझे फिर से जल जाए
रात अँधेरी जाए दिन आए

मिटती आस है जो सखियन की
समझो गई तो गई

करुँ क्या ...............

जब न किसीने राह सुझाई
दिल से एक आवाज़ ये आई

हिम्मत बाँध संभल बढ़ आगे
रोक नहीं है कोई

कहो न आस निरास भई
कहो न आस निरास भई

करना होगा खून का पानी
देना होगी हर कुर्बानी

हिम्मत है इतनी तो समझ ले
आस बनेगी नई, आस बंधेगी नई

कहो न आस निरास भई ,
कहो न आस निरास भई,

कहो न आस ...................
......................................................................
Karoon kya aas niras bhayi-Dushman 1939

Artist: KL Saigal

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