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Jul 3, 2015

आ ज़रा मेरे हमनशीं-पूनम १९८१

अन्नू मलिक ने अपने समकालीनों की तुलना में ज्यादा
संघर्ष किया और उन्हें छोटी का संगीतकार बनने में कुछ
ज्यादा समय लगा. ८० के दशक में एक फिल्म आई थी-
पूनम जिसमें पूनम ढिल्लों मुख्य भूमिका में हैं. उनके
नायक हैं राज बब्बर. फिल्म एक रोमांटिक फिल्म है और
इसके कुछ गीत चर्चित हुए. रफ़ी के गाये तीन गीत हैं फिल्म
में जिसमें से ज्यादा चर्चित हुआ और बजा गीत है-लागी लग
जाए लोगों-जो पुराने कलाकार सुधीर पर फिल्माया गया है.
इसके अलावा युगल गीत जो सबसे ज्यादा बजा है उसे आपको
बाद में सुनवायेंगे.

फ़िल्म का रफ़ी का गाया दूसरा गीत आपको पहले सुनवा रहे
हैं जिसे अन्नू ने तबियत से बनाया मगर ये उतनी प्रसिद्धि
नहीं पा सका. इसकी धुन सुन के आपको फिल्म करीब का
गाना याद आने लगें तो चकित मत होइएगा. 

राज बब्बर खुशकिस्मत हैं उनको रफ़ी का गाना परदे पर गाने
के लिए मिला. गीत हालांकि दर्द भरा है मगर आप इसे एक
बार सुन लेंगे तो इसे बाद में ज़रूर सुनना चाहेंगे. गीत फिल्माया
गया है कल्पना अय्यर और राज बब्बर पर. गीत में आपको
गुज़रे ज़माने के कलाकार जीवन भी दिखाई देंगे.



गीत के बोल:

आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले
आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले
जिंदगी से भाग कर आया हूँ मैं मुझे थाम ले

आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले
आ ज़रा

अपनी हस्ती से खुद मैं परेशां हूँ
जिसकी मंजिल नहीं ऐसा इंसान हूँ
अपनी हस्ती से खुद मैं परेशां हूँ
जिसकी मंजिल नहीं ऐसा इंसान
मैं कहाँ था कहाँ से कहाँ आ गया
क्या से क्या हो गया मैं भी हैरान हूँ

आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले
आ ज़रा

बुझ गया भी तो क्या अपने दिल का दिया
अब न रोयेंगे हम रौशनी के लिए
बुझ गया भी तो क्या अपने दिल का दिया
अब न रोयेंगे हम रौशनी के लिए
दिल का शीशा जो टूटा तो गम क्यूँ करें
दर्द काफी है बस जिंदगी के लिए

आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले
आ ज़रा

रात आती रही रात जाती रही
मेरे गम का न लेकिन सवेरा हुआ
रात आती रही रात जाती रही
मेरे गम का न लेकिन सवेरा हुआ
अपने अपने नसीबों की बातें हैं ये
जो मिला उसका हमको बहुत शुक्रिया

आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले
जिंदगी से भाग कर आया हूँ मैं मुझे थाम ले
आ ज़रा
...........................................................................
Aa zara mere hamnasheen-Poonam 1981

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Dec 4, 2010

तुम्हारा प्यार चाहिए-मनोकामना १९७९

राज किरण के नाम से एक गीत याद आ गया।
मधुर गीत है ये और इसे गाया है स्वयं संगीत
निर्देशक ने।

कम बजट वाली फिल्मों में से एक मनोकामना
सन १९७९ की फिल्म है। कल्पना अय्यर से मुखातिब
राज किरण समुद्र किनारे खड़े हुए ये गीत गा रहे हैं।
इस गीत को संगीत प्रेमी अच्छे रोमांटिक गीतों
में गिन लेते हैं। मैंने अच्छे(तथाकथित) संगीत प्रेमी
शब्द प्रयोग नहीं किया है ! कल्पना आयर को आपने
खलनायिका या डांसर की भूमिका में ही देखा होगा।
इसमें उन्हें नायिका की भूमिका में देख के आश्चर्य
तो नहीं हो रहा आपको ? छरहरी काया और तीखे
नाक नक्श वाली कल्पना की बतौर नायिका पारी लम्बी
नहीं खिंची। इन्दीवर के लिखे गीत को स्वरबद्ध किया
और गाया है बप्पी लहरी ने ।



गीत के बोल:

प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
मुझको हर घडी दीदार चाहिए

तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए

रूप रंग पर सदियों से मरता आया
सदियों से ये ज़माना
मैं मन की सुन्दरता देखूं
प्यार का मैं दीवाना

तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
तूफ़ान में बाँहों की पतवार चाहिए
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए

मेरे सिवा तुम और किसी को
दिल में ना आने दोगी
फूलों की तो बात ही क्या है
काँटों के साथ चलोगी

तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए
दिन रात वफ़ा का इकरार चाहिए
तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए

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