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Jan 24, 2016

तुम और मैं और ये बेखुदी-ऐतबार १९८५

फिल्म ऐतबार से शायर हसन कमाल का लिखा हुआ एक
बढ़िया गीत आपको सुनवाया था कुछ साल पहले. आज सुनते
हैं एक और शायर फारूक कैसर का लिखा गीत. फारूक कैसर
ने बरसों पहले सन ५० के आस पास अपने लेखन की शुरुआत
की थी.

उन्होंने गीत लेखन में कई झंडे गाडे हैं. यूँ कहें उनके लिखे
कई गीत लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचे.

गीत में आप राज बब्बर को देखेंगे लीना दास के साथ. इस
फिल्म में राज बब्बर ने नकारात्मक भूमिका निभाई है. इस
गीत के बोल अलबत्ता अच्छे हैं. आशा भोंसले ने इस गाने
को गाया है. संगीत तैयार किया है बप्पी लहरी ने. बप्पी
ने एक अच्छी धुन बनाई है इस गीत के लिए. गीत हालाँकि
ज्यादा प्रचलित नहीं हुआ मगर लंबे समय तक सुनने लायक
है ये.



गीत के बोल:

तुम और मैं और ये बेखुदी
तुम और मैं और ये बेखुदी
नशीली रात है तुम्हारा साथ है
क्या बात है क्या बात है
तुम और मैं और ये बेखुदी

महकी हुई तन्हाईयां
बहकी हुई अंगडाईयाँ
महकी हुई तन्हाईयां
बहकी हुई अंगडाईयाँ
मुझे थाम लो मुझे थाम लो
मुझे थाम लो जाने जान जाने जान
तुम और मैं और ये बेखुदी

जादू भी हूँ टोना भी हूँ
चांदी भी हूँ सोना भी हूँ
जादू भी हूँ टोना भी हूँ
चांदी भी हूँ सोना भी हूँ
मुझे लूट लो मुझे लूट लो
मुझे लूट लो जाने जान जाने जान
तुम और मैं और ये बेखुदी

गोरा बदन खुशबू भरा
कहता है क्या सुन लो ज़रा
गोरा बदन खुशबू भरा
कहता है क्या सुन लो ज़रा
मुझे प्यार दो मुझे प्यार दो
मुझे प्यार दो जाने जान जाने जान
तुम और मैं और ये बेखुदी
नशीली रात है तुम्हारा साथ है
क्या बात है क्या बात है
तुम और मैं और ये बेखुदी
………………………………………………………
Tum aur main aur ye bekhudi-Aitbaar 1985

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Oct 27, 2015

बीते हुए लम्हों की कसक-निकाह १९८२

बीते हुए लम्हों की कसक-निकाह १९८२

एक कवि ने यह कहा है-बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो
होगी. उसके आगे वाली पंक्ति एकदम कंट्रास्ट है-ख्वाबों  में
ही हो चाहे मुलाकात तो होगी. कॉम्प्लेक्स किस्म के इमोशंस
के घोल में लिपटी हैं पंक्तियाँ. व्याख्या करने बैठो तो पन्ने
भर जाएँ. ऐसे ही गूढ़ अर्थ वाले गीत कभी कभी हमें सोचने
पर मजबूर कर देते हैं कि फिल्म संगीत वाकई एक बड़ा
खज़ाना है जिसमें तरह तरह के रत्न बिखरे पड़े हैं.

जीवन में बीते हुए लम्हों और दिनों की यादें जेहन में रह ही
जाती हैं. कितना भुलाने की कोशिशें की जाएँ, वे पीछा नहीं
छोड़तीं.

फिल्म निकाह अपने समय की बड़ी हिट फिल्म है. इसमें जिन
कलाकारों ने अभिनय किया-राज बब्बर, सलमा आगा, दीपक
पराशर वे अब फिल्मों में सक्रिय नहीं के बराबर हैं. राज बब्बर
का फ़िल्मी कैरियर तो लंबा चला मगर दीपक पराशर और
सलमा आगा समय के साथ नेपथ्य में चले गए. सलमा आगा
तो अभिनय के साथ साथ गायन में भी सक्रिय थीं. कुछ एक
गीत गाने के बाद उन्हें भी अवसर मिलना बंद हो गए.

फिल्म जगत में कुछ इस तरह के कलाकार होते हैं-एक फिल्म
की चमक वाले, ४-५ फिल्मों तक चलने वाले, शुरूआत से ही न
चलने वाले, ४-५ साल तक दिखने वाले, एक दशक तक चलने
वाले, अपनी पूरी उम्र तक सक्रिय रहने वाले. इनमें से कुछ ही
कलाकार ऐसे हैं जो अपनी पूरी जिंदगी भर सक्रिय रहे या हैं.
महानायक अमिताभ बच्चन उन सौभाग्यशालियों में से हैं. उन्हीं
के पदचिन्हों पर शाहरुख भी जाते दिखाई दे रहे हैं. ये तो समय
ही बतलायेगा कि किंग खान ६० की उम्र तक सक्रिय रहते हैं या
नहीं.

सदाबहार कलाकार वे होते हैं जो समय समय पर अपनी उपस्थिति
दर्ज करते आपको मिल जायेंगे. उनकी सेहत पर बाकी के माहौल
का असर नहीं दिखलाई देता है. अभिनेता संजीव कुमार सदाबाहर
कलाकार थे. स्मिता पाटिल एक और सदाबहार अदाकारा थीं. ये
वे कलाकार हैं जिनकी फिल्मों का जनता बेसब्री से इंतज़ार किया
करती थी.

आज आपको निकाह से यही गीत सुनवा रहे हैं जिसे गाया है एक
सदाबाहर गायक ने-महेंद्र कपूर. इसे लिखा है हसन कमाल ने और
इसकी धुन बनाई है संगीतकार रवि ने जिन्हें बहुत ही कम लोग
रविशंकर शर्मा के नाम से जानते हैं.



गीत के बोल:

अभी अलविदा मत कहो दोस्तों
न जाने फिर कहाँ मुलाक़ात हो
क्यों कि

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी
ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी

ये प्यार ये डूबी हुई रँगीन फ़िज़ाएं
ये चहरे ये नज़ारे ये जवाँ रुत ये हवाएं
हम जाएं कहीं इनकी महक साथ तो होगी

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी
ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी

फूलों की तरह दिल में बसाए हुए रखना
यादों के चिराग़ों को जलाए हुए रखना
लम्बा है सफ़र इस में कहीं रात तो होगी

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी
ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी

ये साथ गुज़ारे हुए लम्हात की दौलत
जज़्बात की दौलत ये ख़यालात की दौलत
कुछ पास न हो पास ये सौगात तो होगी

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी
ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी
......................................................................
Beete hue lamhon ki kasak-Nikaah 1982

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Jul 3, 2015

आ ज़रा मेरे हमनशीं-पूनम १९८१

अन्नू मलिक ने अपने समकालीनों की तुलना में ज्यादा
संघर्ष किया और उन्हें छोटी का संगीतकार बनने में कुछ
ज्यादा समय लगा. ८० के दशक में एक फिल्म आई थी-
पूनम जिसमें पूनम ढिल्लों मुख्य भूमिका में हैं. उनके
नायक हैं राज बब्बर. फिल्म एक रोमांटिक फिल्म है और
इसके कुछ गीत चर्चित हुए. रफ़ी के गाये तीन गीत हैं फिल्म
में जिसमें से ज्यादा चर्चित हुआ और बजा गीत है-लागी लग
जाए लोगों-जो पुराने कलाकार सुधीर पर फिल्माया गया है.
इसके अलावा युगल गीत जो सबसे ज्यादा बजा है उसे आपको
बाद में सुनवायेंगे.

फ़िल्म का रफ़ी का गाया दूसरा गीत आपको पहले सुनवा रहे
हैं जिसे अन्नू ने तबियत से बनाया मगर ये उतनी प्रसिद्धि
नहीं पा सका. इसकी धुन सुन के आपको फिल्म करीब का
गाना याद आने लगें तो चकित मत होइएगा. 

राज बब्बर खुशकिस्मत हैं उनको रफ़ी का गाना परदे पर गाने
के लिए मिला. गीत हालांकि दर्द भरा है मगर आप इसे एक
बार सुन लेंगे तो इसे बाद में ज़रूर सुनना चाहेंगे. गीत फिल्माया
गया है कल्पना अय्यर और राज बब्बर पर. गीत में आपको
गुज़रे ज़माने के कलाकार जीवन भी दिखाई देंगे.



गीत के बोल:

आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले
आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले
जिंदगी से भाग कर आया हूँ मैं मुझे थाम ले

आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले
आ ज़रा

अपनी हस्ती से खुद मैं परेशां हूँ
जिसकी मंजिल नहीं ऐसा इंसान हूँ
अपनी हस्ती से खुद मैं परेशां हूँ
जिसकी मंजिल नहीं ऐसा इंसान
मैं कहाँ था कहाँ से कहाँ आ गया
क्या से क्या हो गया मैं भी हैरान हूँ

आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले
आ ज़रा

बुझ गया भी तो क्या अपने दिल का दिया
अब न रोयेंगे हम रौशनी के लिए
बुझ गया भी तो क्या अपने दिल का दिया
अब न रोयेंगे हम रौशनी के लिए
दिल का शीशा जो टूटा तो गम क्यूँ करें
दर्द काफी है बस जिंदगी के लिए

आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले
आ ज़रा

रात आती रही रात जाती रही
मेरे गम का न लेकिन सवेरा हुआ
रात आती रही रात जाती रही
मेरे गम का न लेकिन सवेरा हुआ
अपने अपने नसीबों की बातें हैं ये
जो मिला उसका हमको बहुत शुक्रिया

आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले
जिंदगी से भाग कर आया हूँ मैं मुझे थाम ले
आ ज़रा
...........................................................................
Aa zara mere hamnasheen-Poonam 1981

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Aug 2, 2011

यार की गली दिन बहार का हाय-उल्टा सीधा १९८१

राजेश रोशन के संगीत निर्देशन में सुनिए एक गीत फिल्म उल्टा सीधा
से। इस युगल गीत को गाया है किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने।
गीत मजरूह का लिखा हुआ है। उन बिरले गीतों में से एक है जिनमें
राज बब्बर को किशोर कुमार की आवाज़ पर होंठ हिलाने का मौका मिला
है। रति अग्निहोत्री को कई गीत मिले हैं लता मंगेशकर की आवाज़ वाले।
फिल्म दुनिया की गिनती की लंबी अभिनेत्रियों में से एक रति हमेशा अपने
नायकों से ज्यादा लंबी सी दिखाई देती रहीं।

राजश्री वालों को इस दुर्लभ विडियो को लोड करने के लिए सहृदय धन्यवाद।




गीत के बोल:

हो, हो
आ आ आ आ आ आ हो हो
यार की गली दिन बहार का हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
यार की गली दिन बहार का हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो

यार की गली दिन बहार का हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो

एक तेरी नज़र है एक मेरी नज़र है
एक तेरी नज़र है एक मेरी नज़र है
बीच में अब नहीं यार कोई
पर्दा है न दीवार कोई
बस इसी का तो इंतज़ार था हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो

बात छुप छुप के मेरी जान कर नहीं
राज़ अपना है किसी का डर नहीं
बात छुप छुप के मेरी जान कर नहीं
राज़ अपना है किसी का डर नहीं
प्यार कर ले आज तो दिल खोल के आ
रोज दिलबर मिलेगा कहाँ ऐसा हसीं मौका आ
हाथ से मिला हाथ यार का हाये
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो

ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला

दिल तेरा भी प्यासा दिल मेरा भी प्यासा
दिल तेरा भी प्यासा, प्यासा
दिल मेरा भी प्यासा ,प्यासा
यूँ डूबे मोहब्बत में जानी
के सर से गुजार जाए पानी
इस कदर दिल बेकरार था हाय
आ गया मज़ा आज प्यार का हाय


यार की गली दिन बहार का हाय
अरे, आ गया मज़ा आज प्यार का हाय
हो हो, हो हो, हो हो हो हो हो
...............................
Yaar ki gali-Ulta Seedha 1981

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Jul 10, 2011

झूमता गाता सावन आया -जज़्बात १९८०

बारिश के मौसम में फिर एक गीत और याद आ गया. सन १९८० की
फ़िल्म जज़्बात से अगला गीत पेश है. एक अनजान सी फ़िल्म है
जिसके गीत पर ज़रीना वहाब होंठ हिला रही हैं. महेंद्र देहलवी के बोलों
को संगीत में ढाला है राजकमल ने और आवाज़ है सुलक्षणा पंडित की .

ज़रीना वहाब ने इस गीत पर काफी मेहनत की होगी. फिल्म गर ज्यादा
न चले तो सब बेकार हो जाता है. महेंद्र देहलवी साहब ने सावन को आग
लगा दी है इस गीत में. फ़िल्मी गीत में कभी सावन आग लगाता है तो
कभी सावन को आग लगा दी जाती है.



गीत के बोल:

हो हो हो हो हो हो
हो हो हो हो हो हो
हो ओ ओ हो
हो ओ ओ ओ

झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को

झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को

झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ

रिमझिम रिमझिम बरखा बरसे
ऐसे में प्रियतम ये मनवा
तेरे मिलन को तरसे
सखियाँ झूलें, हाय प्यार के झूले
उसको झूला कौन झुलाये
जिसको साजन भूले
ओ आ जा पिया ओ आ जा रे
झुलना झुला जा रे
ओ आ जा पिया
ओ ओ, झुलना झुला जा रे
तकते हैं नैन तेरी राह दिनन
तू अब तो दरस दिखा जा रे

तेरे नाम की
तेरे नाम की रट लागी है
मन तड़पे तेरे दर्शन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को

झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ
....................................
Jhoomta gaata sawan aaya-Jazbaat 1980

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Jan 20, 2011

छल्ला-लौंग दा लश्कारा १९८६

गुरदास मान(ਗੁਰਦਾਸ ਮਾਨ) पंजाबी संगीत में नामी हस्ती हैं। उनके साथ
परदे पर आपको हिंदी सिनेमा की एक बड़ी हस्ती भी दिखेगी-राज बब्बर।
आज सुनिए युगों पुराना पंजाबी लोक गीत-छल्ला। इसको समय समय
पर कई कलाकाओं ने अपने अंदाज़ में गाया है। फिल्म में संगीत
जगजीत सिंह का है,जी हाँ वही-प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक।



गीत के बोल:

हो जावो नी कोई मोर लियावो,
नी मेरे नाल गया आज्ज लड़ के,
ओह अल्लाह करे जे आ जावे सोहना,
देवां जान कदमा विच धर के

हो छल्ला बेरी ओये बूर ऐ, वे वतन माहि दा
दूर ऐ, वे जाना पहले
पूर ऐ, वे गल सुन छल्लेया
छोरा, वे काहदा ला अई झोरा

ओ छल्ला खूह ते धरिये, छल्ला खूह ते धरिये
छल्ला खूह ते धरिये, वे गल्लां मूह ते करिए,
वे सच्चे रब तों डरिये, वे गल सुन छल्लेया
ढोला, वे रब्ब तों साद अई ओहला.

ओ छल्ला कालियां मर्चां होए ,
ओ छल्ला कालियां मर्चां
छल्ला कालियां मर्चां
छल्ला कालियां मर्चां, वे मोहरा पी के
मर्सां, वे सिरे तेरे चढ्सन,
वे गल सुन छल्लेया ,
ढोल वे साद के कीट अई कोला

हो छल्ला नौ नौ खेवे,
हो छल्ला नौ नौ खेवे
छल्ला नौ नौ खेवे
छल्ला नौ नौ खेवे वे पुत्तर मिठड़े मेवे,
वे अल्लाह सभ नु देवे,
वे गल सुन छल्लेया
कांवां , वे मांवां ठंडियाँ छांवां

हो छल्ला कण दियां डंडियाँ होए,
हो छल्ला कण दियां डंडियाँ
छल्ला कण दियां डंडियाँ
छल्ला कण दियां डंडियाँ
छल्ला कण दियां डंडियाँ , वे सारे पिंड विच भंडियाँ,
वे गल्लां छज्ज पा छंदियाँ,
वे गल सुन छल्लेया
ढोल, वे साड के कीत अई कोला.

ओ छल्ला गल दी वे गानी,
छल्ला गल दी गानी
छल्ला गल दी गानी
छल्ला गल दी गानी वे तुर गए दिलं दे जानी
वे मेरी दुखन दी कहानी, वे आ के सुन जा
ढोल वे तेत्तों साद अई ओला

ओ छल्ला पाया आई गहणे होए,
ओ छल्ला पाया आई गहणे
छल्ला पाया आई गहणे
छल्ला पाया आई गहणे
छल्ला पाया आई गहणे, वे सजन वेली ना रहणे
वे दुःख ते जिंदड़ी दे सहने, वे गल सुन छल्या
ढोल वे कहदा पाणा अई रौला

इसके बोल में सुधार करने में मेरी मदद करें।
...........................................
Chhalla(Gurdaas Maan)-Laung da lishkara 1986

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Nov 24, 2010

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे-आपस की बात १९८१

अनजान की बात छिड़ी है तो उनका लिखा हुआ एक और गीत
सुनें जो कर्णप्रिय है और ८० के दशक से है। ये राज बब्बर पर
फिल्माया गया है। राज बब्बर उन दिनों नवागंतुकों की कतार
में शामिल थे। बाद में उन्होंने अपना अलग मुकाम बना लिया।

फ़िल्में इतनी बन चुकी हैं की किस किस का नाम और विवरण
याद रखा जाए। ये समस्या लगभग सभी संगीत प्रेमियों को आती
है। मैं तो ये भी भूल चुका था कि इस फिल्म में राज बब्बर के साथ
पूनम ढिल्लों हैं। फिल्म का नाम है आपस की बात। इसमें संगीत
अन्नू मलिक का है, चौंक गए ना। जी हाँ अन्नू मलिक स्वयं अपने
संगीत पर नज़र डालते होंगे तो चौंक जाते होंगे। उन्होंने हमेशा
समय समय पर श्रोताओं को चकित किया है। उसकी एक वजह
साफ़ है-जड़ें मजबूत हैं। सरदार मलिक पुत्र होने का कुछ तो फ़ायदा
होना चाहिए ना। ये बात और है कि उन्होंने कई ऐसी ऊंची मंजिलें तय
कर ली है आज, जिसके बारे में उनके पिता शायद सपने ही देखा करते
होंगे। अन्नू मालिक ने अपनी गायक बनने की हसरत भी पूरी
कर ली।

गीत किशोर कुमार का गाया हुआ है और राज बब्बर को किशोर कुमार
के १-२ गीत ही मिले होंगे परदे पर होंठ हिलाने के लिए। ये निस्संदेह
अन्नू मलिक की एक बेहतर रचना है।




गीत के बोल:

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे,
दोनों आलम में लाजवाब लगे
दिन को देखूं तो आफताब लगे,
शब् को देखूं तो माहताब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

रोज मिलते हो पर नहीं मिलते,
ऐसा मिलना भी मुझको ख्वाब लगे
पढ़ता रहता हु तेरी सूरत को,
तेरी सूरत मुझे किताब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

तेरी आँखों की मस्तियाँ तौबा,
मुझको छलकी हुयी शराब लगे
जब भी चमके घटा में बिजली,
मुझको तेरा ही वो शबाब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

तुझको देखूं तो किस तरह देखूं,
रुख पे किरणों के सौ नकाब लगे
प्यार शायद इसी को कहते हैं,
एक मुझसे ही क्यों हिजाब लगे

तेरा चेहरा मुझे गुलाब लगे
दोनों आलम में लाजवाब लगे

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Oct 23, 2010

तुम साथ हो-शीशे का घर १९८४

बप्पी लहरी ने अच्छा और कम अच्छा दोनों क़िस्म का संगीत दिया
है ऐसा कुछ पुराने गीतों के प्रेमी मानते हैं और नहीं भी मानते हैं। ये
गीत उनके मधुर गीतों की गिनती में आता है। फुल बंगाली ख़ुशबू
वाला ये गीत गाया भी है एक बंगाली कलाकार ने। गायक का नाम है
अनूप घोषाल जिन्होंने उँगलियों पर गिनने लायक ही गीत गाये हैं हिंदी
फिल्मों में। उनकी आवाज़ की विशेषता है हलकी सी खनक। कुछ भी
हो अधिकतर बंगाली गायक या तो हेमंत कुमार की याद दिलाते हैं या
फिर किशोर कुमार की। इस समानता वाले विषय पर पी. एच. डी. की
जा सकती है। फिल्म का नाम शीशे का घर है और ये शायद ही आपने
देखी हो। गीत अलबत्ता मधुर है और इसके लिए बप्पी लहरी को दिल
से धन्यवाद्। गीत फिल्माया गया है राज बब्बर और पद्मिनी कोल्हापुरे
पर। मूच्छी वाले राज बब्बर को आपने कितनी फिल्मों में देखा है ??

गीत में बस एक ही बात खाताक्ति है वो है ज़िन्दगी शब्द का ज्यादा
इस्तेमाल। बप्पी लहरी ने शायद ही कभी भी गीतकार की तुकबंदी या
कलाकारी में दखल दिया हो। पुराने संगीतकार कभी कभार फेरबदल
करवा लिया करते थे। श: श: श: फिल्म का नाम शीशे का घर है ,
जिनके घर शीशे के होते हैं वो दूसरों के घर पे पत्थर नहीं फेंका करते ..
जिनके ब्लॉग अंग्रेजी के हों और हिंदी फिल्म पर आधारित हों वो
हिंदी के ब्लॉग से आइडिया कोपी नहीं किया करते, सही कहा न !




गीत के बोल:

तुम साथ हो
ज़िन्दगी भर के लिए

तुम साथ हो
ज़िन्दगी भर के लिए

तुम साथ रहना
ज़िन्दगी ज़िन्दगी भर

तुम साथ हो
ज़िन्दगी भर के लिए

तुम साथ रहना
ज़िन्दगी ज़िन्दगी भर

तुम साथ हो
ज़िन्दगी भर के लिए

कुछ मेरे रंग हों कुछ तेरी सरगम
फिर क्या ख़ुशी क्या गम

सबसे अलग है सबसे जुदा
तेरा मेरा संगम

हो, कुछ मेरे रंग हों कुछ तेरी सरगम
फिर क्या ख़ुशी क्या गम

सबसे अलग है सबसे जुदा
तेरा मेरा संगम

तुम साथ हो
ज़िन्दगी भर के लिए

तुम साथ रहना
ज़िन्दगी ज़िन्दगी भर

तुम साथ हो
ज़िन्दगी भर के लिए

तुम हो सुबह मैं पहली किरण
मन से बंधा है मन
दूर भी हो तो
दूर नहीं हैं
इतने पास हैं हम

हो,
तुम हो सुबह मैं पहली किरण
मन से बंधा है मन
दूर भी हो तो
दूर नहीं हैं
इतने पास हैं हम

तुम साथ हो
ज़िन्दगी भर के लिए

तुम साथ रहना
ज़िन्दगी ज़िन्दगी भर
.........................................................................
Tum saath ho-Sheeshe ka ghar 1984

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Apr 30, 2010

आओ मिल जाएँ हम -प्रेम गीत १९८१

मधुर संगीत किसी की बपौती नहीं है। वो कहीं से भी
प्रकट हो सकता है। बानगी देखिये फिल्म प्रेम गीत का
गीत-आओ मिल जाएँ हम सुगंध और सुमन की तरह।
प्रेम गीत के गीतों के बहुत से दीवाने मैंने देखे हैं। इस गीत
का मैं भी पुराना मुरीद हूँ। अनुराधा पौडवाल और सुरेश वाडकर
की आवाज़ में ये गीत फिल्माया गया है राज बब्बर और
अनीता राज पर। संगीत है जगजीत सिंह का जो प्रसिद्ध
ग़ज़ल गायक हैं। सितार और बांसुरी के टुकड़ों से सजा गीत
आपको किसी प्रमुख या नामचीन गायक की कमी कहीं से
महसूस नहीं होने देगा। मैंने कई ऐसे संगीत प्रेमी देखे हैं
इस नेट की दुनिया पर जो अनुराधा पौडवाल के नाम से चिढ
जाते हैं। ये कहना इसलिए ज़रूरी था क्यूंकि उन संगीतप्रेमियों
की लिस्ट में नामचीन गायकों के अलावा कोई और नहीं मिलेगा
आपको । अब आप ही बताइए की बढ़िया गीत और बढ़िया गायक
दो अलग अलग श्रेणियां हुईं ना। अब वे राग तो अच्छे संगीत का
अलापते हैं और खुद ही विरोधाभासी बयान दिया करते हैं। बढ़िया
अच्छा, औसत और बुरा -ये चार श्रेणियों के गायक आपको मिलेंगे
संगीत के क्षत्र में। एक अच्छा गायक एक औसत गीत गा सकता है
और एक औसत गायक को बढ़िया गीत गाने को मिल सकता है। इस
फलसफे पर गौर कीजिये जरा।

ये गीत इन्दीवर ने लिखा है और उनका कवि ह्रदय क्या क्या करिश्मे
करता था इसका एक शानदार नमूना है ये गीत।



गीत के बोल:

आओ मिल जाएँ हम सुगंध और सुमन की तरह
आओ मिल जाएँ हम सुगंध और सुमन की तरह
एक हो जाएँ, आ आ आ आ, आ आ आ आ
एक हो जाएँ चलो जान और बदन की तरह
आओ मिल जाएँ हम सुगंध और सुमन की तरह
आओ मिल जाएँ हम सुगंध और सुमन की तरह
एक हो जाएँ चलो जान और बदन की तरह
आओ मिल जाएँ हम सुगंध और सुमन की तरह

दिल के मंदिर में सजा रखी है मूरत तेरी
मेरे जीने की तो सूरत है ये सूरत तेरी
दिल के मंदिर में सजा रखी है मूरत तेरी
मेरे जीने की तो सूरत है ये सूरत तेरी

रात दिन साथ रहो
रात दिन साथ रहो सीने में धड़कन की तरह

आओ मिल जाएँ हम सुगंध और सुमन की तरह
आओ मिल जाएँ हम सुगंध और सुमन की तरह
एक हो जाएँ चलो जान और बदन की तरह
आओ मिल जाएँ हम सुगंध और सुमन की तरह

एक जीवन की ख़ुशी तुमने दी इक इक पल में
भर दिया सारे जग का प्यार मेरे आँचल में
एक जीवन की ख़ुशी तुमने दी इक इक पल में
भर दिया सारे जग का प्यार मेरे आँचल में

प्यार का एक भी पल
प्यार का एक भी पल प्यारा है जीवन की तरह

आओ मिल जाएँ हम सुगंध और सुमन की तरह
आओ मिल जाएँ हम सुगंध और सुमन की तरह
एक हो जाएँ चलो जान और बदन की तरह
आओ मिल जाएँ हम सुगंध और सुमन की तरह

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Jan 13, 2010

गम छुपाते रहो-नजराना प्यार का १९८०

एक प्रेरणादायक गीत १९८० की फिल्म नजराना प्यार से।
रफ़ी और आशा की आवाजों वाले इस गीत की धुन बनायीं
है हेमंत भोंसले ने। गीत परदे पर राज बब्बर गा रहे हैं।
अरुणा ईरानी नाम की नायिका परदे पर उनके साथ नज़र
आ रही हैं। श्रोताओं में आपको विजयेन्द्र घाटगे और देवेन
वर्मा नज़र आयेंगे। गीत निदा फ़ाज़ली ने लिखा है। हेमंत भोंसले
आशा भोंसले के सुपुत्र हैं और ८० के दशक में सक्रिय रहे।



गीत के बोल:

गम छुपाते रहो, गम छुपाते रहो
गम छुपाते रहो
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो
ज़िन्दगी गीत है, ज़िन्दगी गीत है
इसको गाते रहो, इसको गाते रहो

गम छुपाते रहो, मुस्कुराते रहो

गम से ख़ाली ज़माने में कोई नहीं
वो हसीं कौन सी है जो रोई नहीं
गम से खाली ज़माने में कोई नहीं
वो हसीं कौन सी है जो रोई नहीं
यूँ जियो दूसरों को हंसाते रहो

मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

ज़िन्दगी गीत है, ज़िन्दगी गीत है
इसको गाते रहो, इसको गाते रहो

गम छुपाते रहो, मुस्कुराते रहो

हर जगह वक़्त की अपनी रफ़्तार है
ये कभी गैर है ये कभी यार है
हर जगह वक़्त की अपनी रफ़्तार है
ये कभी गैर है ये कभी यार है
गैर से यार बनके निभाते रहो
गम छुपाते रहो, मुस्कुराते रहो

ज़िन्दगी गीत है, ज़िन्दगी गीत है
इसको गाते रहो, इसको गाते रहो

गम छुपाते रहो, मुस्कुराते रहो

कौनसी आंख है जिसमे सपना नहीं
सब हैं अपने मगर कोई अपना नहीं
कौनसी आंख है जिसमे सपना नहीं
सब हैं अपने मगर कोई अपना नहीं
आंसुओं को तबस्सुम बनाते रहो
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो
गम छुपाते रहो, गम छुपाते रहो
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो
ज़िन्दगी गीत है, ज़िन्दगी गीत है
इसको गाते रहो, इसको गाते रहो
गम छुपाते रहो

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Dec 20, 2009

खाली पीली प्यार से मेरा- एतबार १९८५

गीत शुरू होता है "खाली पीली" शब्दों से। ये गीत एक चाय समोसे
कि होटल वाला खूब बजाया करता। ये उन दिनों कि बात है जब यह
फिल्म नयी नयी सिनेमा हाल में लगी थी। खाली(रोटी) ,पीली(लस्सी)
हमारा वर्जन होता। बाकी के बोलों पर गौर नहीं किया था जब तक
फिल्म नहीं देखी।

हृष्ट पुष्ट अभिनेत्रियों का जिक्र पहले भी हो चुका है। इस गीत में
आपको हुमा खान नामक अभिनेत्री परदे पर गीत के साथ नाचती
दिखाई देंगी। गायिका हैं इला अरुण जिन्होंने इस द्विअर्थी से सुनाई
पड़ने वाले गीत को बहुत तबियत से गाया है। हालीवुड और बॉलीवुड
के कथानक में ऐसे मसालों का ही फर्क है।



गीत के बोल:

खाली पीली प्यार से मेरा होगा नहीं भला
हे थानेदार चद्दर नयी बिछा
रे थानेदार चद्दर नयी बिछा
रे मैं भी सोऊँगी, ओ हो
रे मैं भी सोऊँगी तू भी सोयेगा
पंखा झलेगी तेरी माँ
ओ थानेदार चद्दर नयी बिछा
रे थानेदार चद्दर नयी बिछा

रे थानेदार घर में कुआँ खुदा
रे थानेदार घर में कुआँ खुदा
अरे मैं भी नहाऊँगी, ओ होए ओये
रे मैं भी नहाऊँगी, तू भी नहायेगा
पानी भरेगी तेरी माँ

रे थानेदार घर में कुआँ खुदा
रे थानेदार घर में कुआँ खुदा

खाली पीली प्यार से मेरा होगा नहीं भला
रे थानेदार घर में कुआँ खुदा

रे थानेदार ढोलक मुझे दिला
रे थानेदार ढोलक मुझे दिला
रे मैं भी बजूंगी, धरर धूम, धरर धूम
रे मैं भी बजूंगी, तू भी बजाएगा
हल्ला सुनेगी तेरी माँ
ओ थानेदार ढोलक मुझे दिला
रे थानेदार ढोलक मुझे दिला

खाली पीली प्यार से मेरा होगा नहीं भला
रे थानेदार ढोलक मुझे दिला

रे थानेदार ला दे मैनू घोडा
रे थानेदार ला दे मैनू घोडा
रे भी चदंगी, ओ हो, हम्म हम्म
रे भी चढ़ांगी , तू भी चढ़ेगा
पैदल चलेगी तेरी माँ
ओ थानेदार ला दे मैनू घोडा
रे थानेदार ला दे मैनू घोडा

रे थानेदार ला दे मुझे गन्ना
ओ थानेदार ला दे मुझे गन्ना
मैं भी चूसूंगी , आह ओह ऊंह आह
मैं भी चूसूंगी, तू भी चूसेगा
छिलके चुनेगी तेरी ...
माँ

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