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Mar 20, 2017

तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में-नौनिहाल १९६७

संजीव कुमार पर फिल्माया गया और रफ़ी का गाया एक बेहतरीन
रोमांटिक गीत सुनते हैं. संजीव कुमार पर फिल्माए गए अधिकाँश
गीत चाहे वो रोमांटिक हों या अन-रोमांटिक सब सोबर ही लगते हैं.
सोबर शब्द ज्यादा सुनते पढते मुझे गैरी सोबर्स याद आने लगते
हैं.

सोबर्स अपने फील्ड के आलराउंडर थे तो मदन मोहन अपने फील्ड के.
मदन मोहन ने गज़लों के अलावा दुसरे किस्म के गीत भी सुन्दर
बनाये हैं. इसका जिक्र हम काफी जगह कर चुके हैं उदाहरणों के
साथ. 

गीत में एक पहाड़ है, पहाड़ पर फूल पत्ती घास फूस लगे हैं.  पूर्णतः
रोमांटिक जगह है. फिल्मांकन किसी बढ़िया जगह हुआ है इस गीत
का. सन १९६७ तक काफी फ़िल्में रंगीन भी आ चुकी थीं. सत्तर के
दशक के बाद श्वेत श्याम नहीं के बराबर रह गया.





गीत के बोल:

तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम कर लूँगा
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम कर लूँगा
सफ़र इक उम्र का पल में तमाम कर लूँगा

नज़र मिलाई तो पूछूँगा इश्क का अंजाम
नज़र मिलाई तो पूछूँगा इश्क का अंजाम
नज़र झुकाई तो खाली सलाम कर लूँगा
नज़र झुकाई तो खाली सलाम कर लूँगा

तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम कर लूँगा

जहान-ए-दिल पे हुकूमत तुम्हे मुबारक हो
जहान-ए-दिल पे हुकूमत तुम्हे मुबारक हो
रही शिकस्त तो वो अपने नाम कर लूँगा
रही शिकस्त तो वो अपने नाम कर लूँगा

तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम कर लूँगा
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम कर लूँगा
सफ़र इक उम्र का पल में तमाम कर लूँगा
......................................................................
Tumhari zulf ke saaye mein shaam-Naunihal 1967

Artist: Sanjeev Kumar, Indrani Mukherji

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Sep 19, 2016

मेरी आवाज़ सुनो-नौनिहाल १९६७

आइये एक शानदार गीत सुनें जिसे रफ़ी ने गाया है. जवाहरलाल नेहरु
के अवसान के बाद लिखा गया ये गीत उनका सन्देश देता प्रतीत होता है
कैफी आज़मी की उत्तम रचनाओं में से एक ये गीत फिल्म नौनिहाल से
लिया गया है. संगीत तैयार किया है मदन मोहन ने. गीत के बोल थोड़े
गंभीर किस्म के हैं और धुन भी प्रभावी है जो धीरे धीरे असर करती है
और सुनने वाले को अपनी गिरफ्त में ले लेती है.



गीत के बोल:

मेरी आवाज़ सुनो, प्यार के राज़ सुनो
मैंने एक फूल जो सीने पे सजा रखा था
उसके परदे मैं तुम्हे दिल से लगा रखा था
था जुदा सबसे मेरे इश्क़ का अंदाज़ सुनो

ज़िन्दगी भर मुझे नफ़रत सी रही अश्कों से
मेरे ख्वाबों को तुम अश्कों में डुबोते क्यों हो
जो मेरी तरह जिया करते हैं कब मरते हैं
थक गया हूँ मुझे सो लेने दो रोते क्यों हो
सो के भी जागते ही रहते हैं जाँबाज़ सुनो ...

मेरी दुनिया में ना पूरब है ना पश्चिम कोई
सारे इन्सान सिमट आये खुली बाहों में
कल भटकता था मैं जिन राहों मैं तन्हा तन्हा
काफ़िले कितने मिले आज उन्हीं राहों मैं
और सब निकले मेरे हमदर्द मेरे हमराज़ सुनो

नौनिहाल आते हैं अर्थी को किनारे कर लो
मैं जहाँ था इन्हें जाना है वहाँ से आगे
आसमाँ इनका ज़मीं इनकी ज़माना इनका
हैं कई इनके जहाँ मेरे जहाँ से आगे
इन्हें कलियां ना कहो हैं ये चमनसाज़ सुनो

क्यों सँवारी है ये चन्दन की चिता मेरे लिये
मैं कोई जिस्म नहीं हूँ के जलाओगे मुझे
राख के साथ बिखर जाऊंगा मैं दुनिया में
तुम जहाँ खाओगे ठोकर वहीं पाओगे मुझे
हर कदम पर है नए मोड़ का आग़ाज़ सुनो
..........................................
Meri awaaz suno-Naunihal 1967

Artists: Balraj Sahni, Indrani Mukherji, Sanjeev Kumar,

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Feb 29, 2016

पत्थर के भगवान-नौनिहाल १९६७

आपने एक भगवान से शिकायत वाला गीत फिल्म
नास्तिक से सुना था पहले-ओ पत्थर के भगवान.
आज सुनते हैं फिल्म नौनिहाल से एक गीत जिसमें
फिर से पत्थर के भगवान का जिक्र है. जब आदमी
हताश औरनिराश हो जाता है तकलीफें सह सह के,
तब उसे लगने लगता है भगवान भी साथ नहीं दे
रहा, उस वक्त ऐसी भावनाएं मन से निकलती हैं.

भगवन से पिघलने का निवेदन किया गया है गीत में.
कभी भगवान जल्दी पिघल जाता है तो कभी काफी
रुलाने के बाद.

भगवान की मर्ज़ी से पत्ता भी नहीं हिलता तो जो सुख
दुःख सब देखने को मिलते हैं वे सब भगवन की कृपा
से ही प्राप्त होते हैं.

आइये सुनें ये गीत जिसे लिखा है कैफी आज़मी ने और
जिसकी धुन बनाई है मदन मोहन ने.



गीत के बोल:

पत्थर के भगवान आज पिघल जा आज पिघलना होगा
पत्थर के भगवान आज पिघल जा आज पिघलना होगा
मैं तो जल गयी आग में तुझको भी जलना होगा
पत्थर के भगवान
मेरा जलना कोई जलना जैसा गीला ईंधन
मेरा जलना कोई जलना जैसा गीला ईंधन
तू जल जायेगा मालिक दुनिया होगी रौशन
दिन का क्या है रात को अभी से दिन को निकलना होगा
पत्थर के भगवान आज पिघल जा आज पिघलना होगा
पत्थर के भगवान

चलते फिरते आये हजारों साये हर साया बेगाना
चलते फिरते आये हजारों साये हर साया बेगाना
मन से भी मायूस नहीं है रास्ता भी अनजाना
मैं भी अंधी तू भी अंधा साथ चलना होगा

पत्थर के भगवान आज पिघल जा आज पिघलना होगा
मैं तो जल गयी आग में तुझको भी जलना होगा
पत्थर के भगवान
………………………………………………………
Patthar ke bhagwan-Naunihal 1967

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