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Jan 21, 2017

तुम मुझे यूँ भुला (लता)-पगला कहीं का १९६९

कहले हैं पागल ईश्वर के सबसे करीब होता है. ये बात
मैंने कई लोगों से सुनी और उस पर उनकी व्याख्या भी
सुनी. जो दुनिया के प्रपंच से बेखबर हो उसे जनता वैसे
भी पागल करार देती है.

दो फ़िल्में इस थीम पर मैंने देखी पगला कहीं का और
कोहरा. कोहरा फिल्म का अंत दुखी करने वाला था.
वैसे तो कोई वजह नहीं होती किसी कहानी पर आप
दुःख व्यक्त करें मगर चलचित्र में ये सब इतना सजीव
होता है कि दर्शक का उस कथानक से जुड़ाव अपने आप
हो चलता है. अगर ये नहीं होता तो सिनेमा के परदे
पर गुब्बारे जैसे बड़े बड़े आंसू देख के जनता बाल्टियाँ
नहीं भरती अपने आंसुओं से.

गीत सुनते हैं जिसमें डॉक्टर बनी आशा पारेख मरीज
बने शम्मी कपूर को दिलासा दे रही हैं. हसरत जयपुरी
का लिखा गीत है जिसे लता ने गाया है. इस गीत का
दूसरा वर्ज़न आप सुन चुके हैं पहले जो रफ़ी ने गाया
है.



गीत के बोल:

जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे
संग संग तुम भी गुनगुनाओगे
तुम मुझे यूँ

तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे
संग संग तुम भी गुनगुनाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हाँ तुम मुझे

बीती बातों का कुछ ख्याल करो
कुछ तो बोलो कुछ हमसे बात करो
बीती बातों का कुछ ख्याल करो
कुछ तो बोलो कुछ हमसे बात करो
राज़-ए-दिल मैं तुम्हें बता दूंगी
मैं तुम्हारी हूँ मान जाओगे

हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हाँ तुम मुझे

मेरी खामोशियों को समझो तुम
ज़िन्दगी याद में गुज़ारी है
मेरी खामोशियों को समझो तुम
ज़िन्दगी याद में गुज़ारी है
मैं मिटी हूँ तुम्हारी चाहत में
और कितना मुझे मिटाओगे

हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हाँ तुम मुझे

दिल ही दिल में तुम्हीं से प्यार किया
अपने जीवन को भी निसार किया
दिल ही दिल में तुम्हीं से प्यार किया
अपने जीवन को भी निसार किया
कौन तड़पा तुम्हारी राहों में
जब ये सोचोगे जान जाओगे

हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे
संग संग तुम भी गुनगुनाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हाँ तुम मुझे
.................................................................
Tum mujhe yun bhula(Lata)-Pagla kahin ka 1969

Artists: Asha Parekh, Shammi Kapoor

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Jul 31, 2015

तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे-पगला कहीं १९७०

इस गीत में सब कुछ है जो आप एक रफ़ी के गीत में सुनना
चाहेंगे. ये एक संयोग ही है कि रफ़ी के गाये गीत शम्मी के
ऊपर खूब फ़बे. जनता जो अमूमन इस जोड़ी के गीत सुनना
पसंद करती है वे हैं-रोमांटिक गीत. तीसरा नाम भी याद दिला
देते हैं वो है हसरत जयपुरी. अब तीसरा नाम आ गया है तो
एक ही नाम बाकी बचता है वो है शंकर जयकिशन की जोड़ी
का. 

रफ़ी को आज गुज़रे पूरे ३५ साल हो गए हैं. संगीत रसिकों को
लेकिन वे हमेशा याद रहे और रहेंगे. कितने ही गायक रफ़ी के
बाद आये और सुने गए मगर वो बात किसी और क्लोन की
आवाज़ में नहीं मिली. चाहे सुर कितना ही पक्का कर लिया हो
क्लोन ने वो टोनल क्वालिटी कहाँ से लाता? किसी भी क्लोन
का मैं यहाँ नाम नहीं लेना चाहूँगा. वे सब अपनी जगह गायक
हैं और अपनी प्रतिभा और क्षमता के अनुसार अपने अपने मुकाम
को हासिल कर चुके हैं.

आज के गीत की विशेषता ये है कि ये हसरत जयपुरी की कलम
से निकला एक दुःख भरा गीत है. हसरत जयपुरी ने सभी प्रकार
के गीत लिखे. लेकिन उनकी पहचान एक खास तरह के गीतों
से ज्यादा होती है. गीत आपको ऐसा लगेगा गुनगुनाने में आसान
है. ये गीत गुनगुनाने के हिसाब से भी कठिन है. इस गीत को
‘नोट-परफेक्ट क्लोन’ भी इतने परफेक्ट तरीके से नहीं गा पाया,
ओर्केस्ट्रा कलाकारों की तो बात ही छोडिये. गीत की धुन ऐसी है
कि आप इसके साथ किसी ख्याल में बहना शुरू कर देते हैं और
आपका संपर्क आपके आस-पास के दायरे से कट जाता है.

अक्सर उनकी पुण्यतिथि पर इस गीत को याद किया जाता है.
ऐसा लगता है कुदरत ने ये गीत उनसे विशेष तौर पर गवाया
ताकि उनके चाहने वाले इस गीत को सुनकर उन्हें हमेशा याद
रखें.




गीत के बोल:

तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे
संग संग तुम भी गुनगुनाओगे

वो बहारें, वो चांदनी रातें
हमने की थीं जो प्यार की बातें
उन नज़ारों की याद आयेगी
जब खयालों में मुझको लाओगे
तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे

मेरे हाथों में तेरा चेहरा था
जैसे कोई गुलाब होता है
और सहारा लिया था बाहों का
वो समां किस तरह भुलाओगे
तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे

मुझको देखे बिना क़रार न था
एक ऐसा भी दौर गुज़रा है
झूठ मानो तो पूछ लो दिल से
मैं कहूंगा तो रूठ जाओगे

तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे
संग संग तुम भी गुनगुनाओगे
................................................................
Tum mujhe yun bhula na paoge-Pagla kahin ka 1970

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Jun 4, 2011

मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा-पगला कहीं का १९७०

'वेदांत के सिद्धांत' और 'आबरा का डबरा' एक दूसरे के पर्याय हैं। वेदांत एक
मित्र मण्डली का सदस्य है। अकाउंटिंग के पेशे में नहीं होता तो शायद वो
एक सफल राजनीतिक वक्ता या सम्पादकीय लिखने वाला पत्रकार बन
सकता था। किन किन चीज़ों के parallel draw करता था वो, हमारे दिमाग
के कल्पना-कोष से बाहर होते थे।

इतनी सफाई और चतुराई के साथ ही वो विषय परिवर्तन करता कि कब
'मूंग की दाल' से दिल्ली के 'जंतर मंतर' के बारे में जानकारी शुरू हो जाती,
पता ही नहीं चलता। उसकी इसी खूबी के चलते उसको उसी के समकक्ष
एक मित्र ने 'आबरा का डबरा, की पदवी भी दे डाली। आज आपको अपने
मित्र की पसंद का एक गीत सुनाता हूँ।

गीत लिखा है हसरत जयपुरी ने जिन्होंने शंकर जयकिशन के लिए कई
रोमांटिक गीत लिखे। आवाज़ मन्ना डे की है। गीत में आपको कई हास्य
कलाकार दिखाई देंगे नायक शम्मी कपूर और नायिका आशा पारेख के
अलावा।




गीत के बोल:

क्यूँ मारा, क्यूँ मारा
क्यूँ मारा, क्यूँ मारा
क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ क्यूँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा

वो लड्डू पड़े खाती है, हाँ
वो पेड़ों पे चढ़ जाती है, हाँ
वो लड्डू पड़े खाती है
वो पेड़ों पे चढ़ जाती है
ये मच्छर बीन बजाते हैं
वो अपना राग सुनती है
वो छुम्मक छुम्मक नाचे जब मैं दिल का बजाऊँ
मैं दिल का बजाऊँ एक तारा

मेरी भैंस को डंडा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा

अरे घर का ये एक स्टेशन है, हाँ
ये झंडी प्यारी प्यारी है
अरे घर का ये एक स्टेशन है
ये झंडी प्यारी प्यारी है
हम सब तो रेल के डिब्बे हैं
वो अपनी इंजन गाडी है
वो गुस्सा जब भी करती है
तो बन जाती है
तो बन जाती है, अंगारा

मेरी भैंस को डंडा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा

बंधू रे बंधू रे
वो जान से बढ़ कर प्यारी है
बंधू रे, बंधू रे
क्या बोलूं मैं,
क्या बोलूं मैं एक कटारी है
बंधू रे, बंधू रे
वो जान से बढ़ कर प्यारी है, हाँ
क्या बोलूं मैं एक कटारी है, हाँ
वो जान से बढ़ कर प्यारी है
क्या बोलूं मैं एक कटारी है
कजरारी उसकी अँखियाँ हैं
इस बात से अपनी यारी है
मैंने तो अपनी कल्लो का है नाम रखा
है नाम रखा, जहान आरा

मेरी भैंस को डंडा
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा

मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
वो खेत में चारा चरती थी
तेरे बाप का वो क्या करती थी
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ, हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरी भैंस को डंडा क्यूँ मारा
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Meri bhains ko danda kyun maara-Pagla kahin ka 1970

Artists: Shammi Kapoor, Asit Sen, Birbal, Sundar

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