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Aug 27, 2019

मेरे दिल की दुनिया उजड गई-शांति १९४७

कहते हैं मन में शांति हो तो बाहर चहुँ ओर शांति नज़र आती है.
ये तो फिलोसफी की बात है. वास्तविकता भिन्न भी हो सकती है.
एक पहलू ये है कि मन की शांति के कारण आपको बाहरी उथल
पुथल से असर नहीं होता और होता भी है तो नगण्य मात्रा में.

सुनते हैं एस यू सनी निर्देशित फिल्म शांति से एक गीत जिसे उस
समय की एक जानी पहचानी गायिका पारुल घोष ने गाया है. यह
गीत लिखा है शकील बदायूनीं ने और संगीत बी एस ठाकुर का.



गीत के बोल:

मेरे दिल की दुनिया उजड गई
मेरे दिल की दुनिया उजड गई
मैं करूं तो किससे गिला करूं
ना वही मेरे ना जहाँ मेरा
कहाँ जाऊं हाय मैं क्या करूं
मेरे दिल की दुनिया उजड गई

है ज़माना मुझसे खफा खफा
है ज़माना मुझसे खफा खफा
कहीं ज़ुल्म है तो कहीं दगा
कहीं ज़ुल्म है तो कहीं दगा
नहीं राह जैसी कोई जगह
जहाँ छुप के रो ही लिया करूं
ना वही मेरे ना जहां मेरा
कहाँ जाऊं हाय मैं क्या करूं
मेरे दिल की दुनिया उजड गई

प्रभु मुझ गरीब की जान पर
ये जफान और मुसीबतें
प्रभु मुझ गरीब की जान पर
ये जफान और ये मुसीबतें
ये बाला ना लौट के आ सके
कहो मर ना जाऊं तो क्या करूं
ना वही मेरे ना जहाँ मेरा
कहाँ जाऊं हाय मैं क्या करूं
मेरे दिल की दुनिया उजड गई
……………………………………………………..
Mere dil ki duniya ujad gayi-Shanti 1947

Artists:

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Jul 26, 2017

काँटा लागो रे सजनवा-बसंत १९४२

आज आपको श्वेत श्याम युग का ‘काँटा लगा’ सुनवाते हैं. आपने
रंगीन युग का फिल्म समाधी का काँटा लगा तो सुन लिया और
उसके बाद उसका रिमिक्स शेफाली ज़रीवाला का काँटा लगा भी
सुना.

कांटे लगने का ये सिलसिला पुराना है. १९४२ की फिल्म बसंत में
जो गीत है उसे प्यारेलाल संतोषी ने लिखा है और इस गीत को गा
रहे हैं पारुल घोष और खान मस्ताना. संगीत है प्रख्यात बांसुरी
वादक पन्नालाल घोष का.



गीत के बोल:

काँटा लागो रे सजनवा मोसे राह चली न जाये
उई माँ राह चली न जाये
काँटा लागो हाँ हाँ
काँटा लागो रे सजनवा मोसे राह चली न जाये
राह चली न जाये मोसे राह चली न जाये

साजन काँटा मीत बने है मोरी गली में आये
साजन काँटा मीत बने है मोरी गली में आये
एक चुपके से चुभे बदन में
एक चुपके से चुभे बदन में दूजा हँसी उड़ाये
राह चली न जाये रामा राह चली न जाये
दैय्या राह चली न जाये

काँटा लागो हाँ हाँ
काँटा लागो रे सजनवा मोसे राह चली न जाये
काँटा लागो रे सजनवा मोसे राह चली न जाये

कलियाँ चुनने चली सजनिया काँटों से घबराये
कलियाँ चुनने चली सजनिया काँटों से घबराये

सुख वो कैसे पाये बावरी
सुख वो कैसे पाये बावरी दुःख से जो डर जाये
सुख वो कैसे पाये बावरी दुःख से जो डर जाये
हाँ आओ सजन हाथ पकड़ लो संग संग दोनों जायें
आओ सजन हाथ पकड़ लो संग संग दोनों जायें
गली गली में काँटे हैं जो कली कली बन जायें
गली गली में काँटे हैं जो कली कली बन जायें
फिर मत कहना कभी सजनिया राह चली न जाये
फिर मत कहना कभी सजनिया राह चली न जाये
मोसे राह चली न जाये
रामा मोसे राह चली न जाये

काँटा लागो रे सजनवा मोसे राह चली न जाये
काँटा लागो रे सजनवा मोसे राह चली न जाये
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Kaanta lago re sajanwa-Basant 1942

Artists: Mumtaz Shanti, Ulhas

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