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Aug 28, 2018

मधुर मधुर गा रे मनवा-भक्त सूरदास १९४२

मधुरं भाषणं ये शब्द आपने ज़रूर सुने या पढ़े होंगे. मीठा
अर्थात मधुर सबको प्रिय है. अब वो स्वाद में हो या वाणी
में मधुरता से जीवन के कई कार्य बड़े आराम से निपट
जाया करते हैं.

डी एन मधोक का लिखा हुआ गीत सुनते हैं जिसका संगीत
तैयार किया है ज्ञान दत्त ने और इसे गाया है खुर्शीद ने. फिल्म
का नाम आप ऊपर पढ़ ही चुके हैं एक बार अतः दोबारा इसे
आप विवरण में और टैग में देख सकते हैं.




गीत के बोल:

मधुर मधुर गा रे मनवा
मधुर मधुर गा
मधुर मधुर गा रे मनवा
मधुर मधुर गा
नई धड़कन की
रीत मिलन की
नई धड़कन की
रीत मिलन की
सुर में मन के तार दे दे
मन का सन्देसा

मधुर मधुर गा आ आ आ
मधुर मधुर गा

मधुर मधुर गा रे मनवा
मधुर मधुर गा

सपना सुहाना मेरा
मधुर तराना तेरा
सपना सुहाना मेरा
मधुर तराना तेरा
रहूं ना होश में मन
होश से बेहोश बना
रहूं ना होश में मन
होश से बेहोश बना
ऐसा रंग जमा
ऐसा रंग जमा

मधुर मधुर गा आ आ आ
मधुर मधुर गा
मधुर मधुर गा रे मनवा
मधुर मधुर गा
मधुर मधुर गा रे मनवा
मधुर मधुर गा
………………………………………………………………
Madhur madhur gaa re manwa-Bhakt Surdas 1942

Artists:

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Aug 24, 2018

रैन गई अब हुआ सवेरा-भक्त सूरदास १९४२

के एल सहगल का गाया एक गीत सुनते हैं फिल्म
भक्त सूरदास से. हिंदी फिल्म संगीत और गैर फ़िल्मी
संगीत की चर्चा सहगल के बिना अधूरी ही रहेगी. ये
ऐसी आवाज़ है जो जड़ से जुडी आवाज़ है.

गीत दीनानाथ मधोक का है और संगीत ज्ञान दत्त का.
फिल्म भक्त सूरदास के गीत काफी लोकप्रिय गीत कहे
जाते हैं. हर नयी पीढ़ी में आपको सहगल की आवाज़
के मुरीद मिल जायेंगे.



गीत के बोल:

रैन गई अब हुआ सवेरा
रैन गई अब हुआ सवेरा
याद तेरी ने घेरा है
रैन गई अब हुआ सवेरा
याद तेरी ने घेरा है
रैन गई अब हुआ सवेरा

तुमसे नैन लगा के साजन
तुमसे नैन लगा के साजन
दुनिया से मुँह फेरा है

रैन गई अब हुआ सवेरा

तुम तो दिल की धड़कन बन के
दिल मे आ के बैठ गये
तुम तो दिल की धड़कन बन के
दिल मे आ के बैठ गये
इस घर को जो खो बैठा है
इस घर को जो खो बैठा है
उसका कौन बसेरा है

रैन गई अब हुआ सवेरा

मन के पँछी सोच समझ ले
वो जादू की नगरी है
मन के पँछी सोच समझ ले
वो जादू की नगरी है
सम्भल सम्भल कर घर आना
नज़रों ने जाल बखेरा है

रैन गई अब हुआ सवेरा
याद तेरी ने घेरा है
रैन गई अब हुआ सवेरा
…………………………………………………
Rain gayi ab hua savera-Bhakt Surdas 1942

Artist: KL Saigal

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Aug 22, 2018

तूफ़ान मेल-जवाब १९४२

सालों से हम ये गीत सुनते आ रहे हैं. आपकी पता नहीं
मैं तो सुन ही रहा हूँ और मेरे जैसे कई पुरानी चीज़ों के
शौक़ीन इसे सुन रहे होंगे. किस ज़माने का ये गीत है और
देखिये आज भी प्रासंगिक है, कम से कम इसका मुखडा
तो हैं ही.

तूफ़ान मेल जैसी कोई चीज़ भारतीय रेलवे या उससे पहले
की रेल कंपनियों के पास नहीं थी. तूफ़ान एक्सप्रेस नाम
की ट्रेन अलबत्ता ज़रूर है जो हावड़ा से नई दिल्ली चला
करती थी और अब श्रीगंगानगर तक जाती है. इसे अब
उद्यान आभा एक्सप्रेस नाम से जाना जाता है. पंजाब मेल
काफी पुरानी ट्रेन है. बॉलीवुड की मेहरबानी है इस नाम
से एक फिल्म भी आई तूफ़ान मेल(१९३२) और बाद में
रिटर्न ऑफ तूफ़ान मेल(१९४२).

अब उदाहरण के लिए एक गाना आपने सुना होगा जिसमें
‘गुलाई गुलाई गो’ जैसे शब्द आये हैं. गुलाई गुलाई गो से
कोई अर्थ निकलना कठिन है. ऐसे सैकड़ों शब्द हैं सैकड़ों
गीतों में जिनका अर्थ लिखने वाले और सुनने वालों दोनों
को मालूम नहीं है. गुलाई गुलाई गो गीत ऑस्कर के लिए
सदा तैयार आमिर खान पर फिल्माया गया है और तब जिस
ज़माने में वे कैसी भी फ़िल्में कर लिया करते थे. अब कल
को हो सकता है किसी फिल्म का नाम ही रख दिया जाए
गुलाई गुलाई गो.

सुनते हैं पंडित मधुर का लिखा हुआ ये मधुर गीत जिसे गाया
है कानन देवी ने कमल दासगुप्ता की धुन पर.



गीत के बोल:

तूफ़ान मेल
दुनिया ये दुनिया तूफ़ान मेल

इसके पहिये ज़ोर से चलते
और अपना रस्ता तय करते
सयाने इस से काम निकालें
बच्चे समझे खेल
तूफ़ान मेल
कोई कहाँ का टिकट काटता
एक है आता एक है जाता
सभी मुसाफ़िर बिछड़ जायेंगे
पल भर का है मेल
तूफ़ान मेल

जो जितनी पूँजी है रखता
उसी मुताबिक़ सफ़र वो करता
जीवन का है भेद बताती
ज्ञानी को ये रेल
तूफ़ान मेल
…………………………………………….
Duniya ye duniya toofan mail-Jawab 1942

Artist: Kanan Devi

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Aug 19, 2017

मधुकर श्याम हमारे चोर-भक्त सूरदास १९४२

फिल्म भक्त सूरदास से एक गीत सुनते हैं सहगल की आवाज़ में.
दीना नाथ मधोक गीतकार हैं और धुन बनाई है ज्ञान दत्त ने.

इस जगत का सबसे बड़ा चोर और सबसे बड़ा रसिया जिसे कहते
हैं और जिसे माखनचोर, नंदकिशोर इत्यादि कई नामों से पुकारा
जाता है, कृष्ण के फ़िल्मी भजन सबसे ज्यादा मिलेंगे आपको.




गीत के बोल:

मधुकर श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
मन हर लीनो माधुरी मूरत
मन हर लीनो माधुरी मूरत
निरख नैन की कोर
श्याम हमारे चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर

सिर पे जाके मुकट सुहाये
सिर पे जाके मुकट सुहाये
माथे तिलक नैन कजरारे
माथे तिलक नैन कजरारे
मुख सुंदर ज्यूँ भोर
श्याम हमारे चोर
चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर

सूरदास के चोर कन्हैया
मनमोहन मुरली के बजैया
सूरदास के चोर कन्हैया
मनमोहन मुरली के बजैया
मनमोहन मुरली के बजैया
नटखट नन्दकिशोर
चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
श्याम हमारे चोर
श्याम हमारे चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
........................................................................
Madhukar Shyam hamare-Bhakt Surdas 1942

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Jul 26, 2017

काँटा लागो रे सजनवा-बसंत १९४२

आज आपको श्वेत श्याम युग का ‘काँटा लगा’ सुनवाते हैं. आपने
रंगीन युग का फिल्म समाधी का काँटा लगा तो सुन लिया और
उसके बाद उसका रिमिक्स शेफाली ज़रीवाला का काँटा लगा भी
सुना.

कांटे लगने का ये सिलसिला पुराना है. १९४२ की फिल्म बसंत में
जो गीत है उसे प्यारेलाल संतोषी ने लिखा है और इस गीत को गा
रहे हैं पारुल घोष और खान मस्ताना. संगीत है प्रख्यात बांसुरी
वादक पन्नालाल घोष का.



गीत के बोल:

काँटा लागो रे सजनवा मोसे राह चली न जाये
उई माँ राह चली न जाये
काँटा लागो हाँ हाँ
काँटा लागो रे सजनवा मोसे राह चली न जाये
राह चली न जाये मोसे राह चली न जाये

साजन काँटा मीत बने है मोरी गली में आये
साजन काँटा मीत बने है मोरी गली में आये
एक चुपके से चुभे बदन में
एक चुपके से चुभे बदन में दूजा हँसी उड़ाये
राह चली न जाये रामा राह चली न जाये
दैय्या राह चली न जाये

काँटा लागो हाँ हाँ
काँटा लागो रे सजनवा मोसे राह चली न जाये
काँटा लागो रे सजनवा मोसे राह चली न जाये

कलियाँ चुनने चली सजनिया काँटों से घबराये
कलियाँ चुनने चली सजनिया काँटों से घबराये

सुख वो कैसे पाये बावरी
सुख वो कैसे पाये बावरी दुःख से जो डर जाये
सुख वो कैसे पाये बावरी दुःख से जो डर जाये
हाँ आओ सजन हाथ पकड़ लो संग संग दोनों जायें
आओ सजन हाथ पकड़ लो संग संग दोनों जायें
गली गली में काँटे हैं जो कली कली बन जायें
गली गली में काँटे हैं जो कली कली बन जायें
फिर मत कहना कभी सजनिया राह चली न जाये
फिर मत कहना कभी सजनिया राह चली न जाये
मोसे राह चली न जाये
रामा मोसे राह चली न जाये

काँटा लागो रे सजनवा मोसे राह चली न जाये
काँटा लागो रे सजनवा मोसे राह चली न जाये
.....................................................................
Kaanta lago re sajanwa-Basant 1942

Artists: Mumtaz Shanti, Ulhas

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Aug 22, 2016

चार दिनों की जवानी-रोटी १९४२

रेवोल्युशनरी गीत हर युग में बने हैं और बनते रहेंगे. कुछ कम
ज्यादा हो सकते हैं मगर बनते ज़रूर हैं. सन १९४२ की फिल्म
रोटी का संगीत कुछ अलग है. अनिल बिश्वास के टोटल आउटपुट
को खंगालें तो उत्तम कोटि के एल्बमों में से एक है.

सफ़दर आह सीतापुरी के सटीक तीर वाला एक गीत आपने सुना
है पहले इस फिल्म से. दूसरा गीत सुनते हैं जिसमें नसीहत दी
गयी है. चंद्रमोहन, शेइख मुख्तार, अख्तरी बाई, अशरफ खान
और सितारा से जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म का निर्माण
नेशनल स्टूडियोज बॉम्बे द्वारा किया गया. फिल्म का निर्देशन
महबूब ने किया था.प्रस्तुत गीत फिल्म में देखने के लिए मौजूद
नहीं है. ये केवल रिकोर्ड पर उपलब्ध है. बेगम अख्तर ने इसे
गाया है.



गीत के बोल:

चार दिनों की जवानी
मतवाले पी ले पी ले
चार दिनों की जवानी
मतवाले पी ले पी ले
चार दिनों की जवानी

छलके जाए दिल के प्याले रे प्याले
छलके जाए दिल के प्याले रे प्याले
मतवाले पी ले पी ले

चार दिनों की जवानी
मतवाले पी ले पी ले
चार दिनों की जवानी

ये दुनिया है एक मयखाना
ये दुनिया है एक मयखाना
खाली भर भर भर पैमाना
ये दुनिया है एक मयखाना
खाली भर भर भर पैमाना
दम भर मौज उड़ा ले उड़ा ले
हाँ हाँ दम भर मौज उड़ा ले उड़ा ले
मतवाले पी ले पी ले

चार दिनों की जवानी
मतवाले पी ले पी ले
चार दिनों की जवानी

छलके जाए दिल के प्याले रे प्याले
छलके जाए दिल के प्याले रे प्याले
मतवाले पी ले पी ले

चार दिनों की जवानी
मतवाले पी ले पी ले
चार दिनों की जवानी
……………………………………………….
Char dinon ki jawani-Roti 1942

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Jun 21, 2016

बलाएँ लूं मैं इस दिल की-जवाब १९४२

सन १९४२ की एक फिल्म है जवाब जिसमें किसने सवाल किया
किसने जवाब दिया ये जाने के लिए आपको फिल्म देखना पड़ेगी.

फिल्म का एक गीत लोकप्रिय है गर आपने सुना हो कभी-ऐ चाँद
छुप ना जाना जिसे कानन देवी ने गाया है. आज हम आपको एक
दूसरा गीत सुनवा रहे हैं जिसे पी सी बरुआ ने गाया है. इसके
गीतकार का नाम अज्ञात है. संगीतकार हैं कमल दासगुप्ता जो उस
समय के ख्यात संगीतकार थे.




गीत के बोल:

बलाएँ लूं मैं उस दिल की
बलाएँ लूं मैं उस दिल की जो दुनिया के लिए रो दे
जहां वालों के रंज-ओ-गम को अपने खून से धो दे
जहां वालों के रंज-ओ-गम को अपने खून से धो दे

जला के आशियाँ अपना बसा के गैरों की महफ़िल
जला के आशियाँ अपना बसा के गैरों की महफ़िल
किसी के सोज़-ए-गम में अपने साचे दिल को भी खो दे
किसी के सोज़-ए-गम में अपने साचे दिल को भी खो दे

मेरी आँखों में उसकी आँख ही इज्ज़त के काबिल है
मेरी आँखों में उसकी आँख ही इज्ज़त के काबिल है
हाँ हाँ इज्ज़त के काबिल है
जो आंसू बन के बह जाए
जो आंसू बन के बह जाए उसी को खुद में ही खो दे
जो आंसू बन के बह जाए उसी को खुद में ही खो दे
……………………………………………………………
Balayen loon main-Jawab 1942

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Jul 17, 2015

तू कौन सी बदली में मेरे चाँद-खानदान १९४२

दीना नाथ मधोक स्टार गीतकार हुआ करते थे
काली-पीली(श्वेत श्याम) फिल्मों के युग में. उनका
लिखा एक गीत सुनते हैं आज नूरजहाँ का गाया
हुआ. गौरतलब है किसी गायिका के नाम के आगे
मैडम नहीं लगा. ये रुतबा केवल नूरजहाँ को हासिल
है. उनके चाहने वालों की कोई कमी नहीं है.

इस गीत में नायिका चाँद और ईद को याद कर रही
है. संगीत तैयार किया है गुज़रे हुए ज़माने के नामचीन
संगीतकार गुलाम हैदर ने.



गीत के बोल:

तू कौन सी बदली में मेरे चांद है आ जा
तारे हैं मेरे ज़ख्म-ए-जिगर, इनमें समा जा
तू कौन सी बदली में मेरे चांद है आ जा

दिल ढूंढ रहा है के मेरा चांद कहाँ है
छोटी सी झलक दे के मेरी ईद बना जा
तारे हैं मेरे ज़ख्म-ए-जिगर, इनमें समा जा

पहलू में लिये बैठी हूँ मैं दर्द भरा दिल
मर जाऊं या जीती रहूं ये तो बता जा
तारे हैं मेरे ज़ख्म-ए-जिगर, इनमें समा जा
……………………………………………………………
Too kaun si badli mein mere chand-Khandan 1942

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Mar 31, 2015

उठ जा बिजली प्यारी-मुकाबला १९४२

मेरी इवांस जो बाद में मेरी इवांस वाडिया हो गयीं, एक
जांबाज़ अदाकारा थीं. आस्ट्रेलिया में जन्मी मैरी के लिए
बम्बई(वर्तमान मुंबई) कर्मभूमि बना. उन्होंने फिल्मकार
होमी वाडिया से विवाह कर लिया. सन १९३५ की फिल्म
हंटरवाली से ज़बरदस्त कामयाबी के बाद उनकी कई स्टंट
फ़िल्में आयीं. वाडिया मूवीटोन के संस्थापक जमशेद जी
उर्फ जे बी एच वाडिया ने उनको फिल्मों में पहला अवसर
दिया होमी जमशेद जी के छोटे भाई थे.

आज आपको सन १९४२ की फिल्म मुकाबला से एक हास्य
गीत सुनवाते हैं जिसमें अलग-अलग सुर में प्रेमी अपनी प्रेमिका
को पुकार रहा है. गीत का अंत जनता द्वारा प्रेमी पर सामान
फेंकने और कुत्ते के भौंकने और प्रेमी को खदेड़ने से समाप्त
होता है. गीत के बोल ऐ करीम साहब के हैं. इसके गायक और
संगीतकार स्वयं खान मस्ताना हैं. गीत आगा पर फिल्माया
गया है. मैरी इवांस इस फिल्म में नायिका हैं.



गीत के बोल:

उठ जा उठ जा
उठ जा बिजली प्यारी उठ जा
उठ जा बिजली प्यारी उठ जा
अरे उठ जा बिजली
अरे उठ जा उठ जा उठ जा
बिजली, मेरी प्यारी बिजली
अरे, मेरे दिल की पुकार तेरे कानों तक नहीं पहुंची
अरे ये सिकंदर, मा-बदौलत लग गया
मा बदौलत
तेरा मुखडा है चमकता ऐसे
जैसे चाँद चमकता दिखता है
जैसे चाँद चमकता दिखता है
जैसे चाँद चमकता दिखता है

दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे
दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे
दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे

वरना मुझे, वरना मुझे
वरना मुझे थाने का पागलखाना बना दे
वरना मुझे थाने का पागलखाना बना दे
वरना मुझे थाने का पागलखाना बना दे

ओ देखने वालों मुझे , अरे बाप रे
ओ देखने वालों मुझे, मुझे
खिडकी से न देखो
हाय, ये बिजली कहीं
रे ये बिजली कहीं तुमको मुझ जैसा न बना दे
ये बिजली कहीं तुमको मुझ जैसा न बना दे
ये बिजली कहीं तुमको मुझ जैसा न बना दे

मेरी फ़रियाद, अरे बाप रे
मेरी फ़रियाद सुन लो
थक गया चिल्लाते चिल्लाते
अरे ज़रा इस हुस्न की दौलत से
कुछ मुझको भी दे जाते
हा हा हाय, लग गयी चोट
करेजवा पे हाय राम
.....................................................
Uth ja bijli pyari-Muqabla 1942

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Dec 30, 2014

रंगरेजा-रॉक स्टार २०११

आज आपको एक नयी फिल्म का गीत सुनवाते हैं। फिल्म का नाम
है -रॉक स्टार . ऐ आर रहमान आपको हमेशा आश्चर्यचकित करत
रहेंगे अपनी धुनों द्वारा.रंगरेज़ा गीत के द्वारा वे आपको फिर से सुरों के
तिलिस्म में सैर करवा रहे हैं. नवंबर ११, २०११ को रिलीज़ हुई इस
फिल्म के बारे में शुरू में ज्यादा चर्चा नहीं हुई.

समीक्षकों ने इस फिल्म की तुलना करना चाही ऋषि कपूर की फ़िल्म
हम किसी से कम नहीं से. दोनों फिल्मों की पृष्ठभूमि और कालखंड
अलग है. रणवीर कपूर कीअभिनय क्षमता का आकलन इस फिल्म के
बाद ज्यादा होने लगा.
वैसे उन्होंने टुकड़ों टुकड़ों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कई फिल्मों में
पहले कर दिया था.
इस फिल्म से उन्हें २-३ सीढ़ी और चढ़ने का मौका मिल गया है. गीत के
बोल इरशाद कामिल के हैं. रहमान की आवाज़ केसाथ मोहित चौहान और
जावेद अली की आवाजें हैं इस गीत मे.

स्पष्ट है गीत में, नायक धक्के खाने के बाद इबादतगार की शरण में
पहुँचता है, यहाँ से शुरू होता है उसकी जिंदगी का नया सफर. बुझे से
नायक में हौसला बढ़ता हुआ दिखाई देता है.



गीत के बोल:

या निजामुद्दीन औलिया या निजामुद्दीन सलका
कदम बढ़ा ले, हदों को मिटा ले
आजा खालीपन में पी का घर तेरा
तेरे बिन खाली आ जा, खालीपन में
तेरे बिन खाली आ जा, खालीपन में
ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ
रंगरेजा, रंगरेजा, रंगरेजा, रंगरेजा, रंगरेजा
कुन फाया कुन कुन फाया कुन फाया कुन,
फाया कुन फाया कुन फाया कुन
कुन फाया कुन कुन फाया कुन फाया कुन,
फाया कुन फाया कुन फाया कुन

जब कहीं पे कुछ नहीं भी नहीं था
वही था वही था वही था वही था
जब कहीं पे कुछ नहीं भी नहीं था
वही था वही था वही था वही था
वो जो मुझ में समाया, वो जो तुझ में समाया
मौला वही वही माया
वो जो मुझ में समाया, वो जो तुझ में समाया
मौला वही वही माया
कुन फाय कुन कुन फाया कुन
सदक अल्लाहु अल अली उल अजीम

रंगरेजा रंग मेरा तन मेरा मन,
ले ले रंगाई चाहे तन चाहे मन
रंगरेजा रंग मेरा तन मेरा मन,
ले ले रंगाई चाहे तन चाहे मन

सजरा सवेरा मेरे तन बरसे
कजरा अँधेरा तेरी जान की लौ
सजरा सवेरा मेरे तन बरसे
कजरा अँधेरा तेरी जान की लौ

कतरा मिला जो तेरे दर बरसे
ओ मौला , मौला आ आ आ
कुन फाया कुन, कुन फाया कुन,
फाया कुन फाया कुन
कुन फाया कुन कुन फाया कुन
फाया कुन फाया कुन
फाया कुन फाया कुन
जब कहीं पे कुछ नहीं भी नहीं था
वही था वही था वही था वही था
जब कहीं पे कुछ नहीं भी नहीं था
वही था वही था वही था वही था
कुन फाया कुन कुन फाया कुन
सदक अल्लाहु अल अली उल अजीम
सदक रसूल हु अजी उल करीम
सलल्लाह हु अलैह ही वसल्लम
सलल्लाह हु अलैह ही वसल्लम
हो, मुझपे करम सरकार तेरा, अरज तुझे कर दे मुझे
मुझसे ही रिहा, अब मुझको भी हो दीदार मेरा
कर दे मुझे मुझसे ही रिहा, मुझसे ही रिहा
मन के मेरे ये भरम, कच्चे मेरे यह करम
ले के चले हैं कहाँ मैं तो जानू ही ना
तू है मुझ में समाया कहाँ ले के मुझे आया
मैं हूँ तुझ में समाया तेरे पीछे चला आया
तेरा ही मैं एक साया, तुने मुझको बनाया
मैं तो जग को ना भाया
तुने गले से जगाया, हक तू ही है खुदाया
सच्च तू ही है खुदाया, आ आ आ
कुन फाया कुन कुन फाया कुन,
फाया कुन फाया कुन फाया कुन फाया कुन
जब कहीं पे कुछ नहीं भी नहीं था
वही था वही था वही था वही था
कुन फाया कुन कुन फाया कुन
..........................................................................
Kun faya kun-Rockstar 2011

Artists: Nargis Fakhri, Ranbir Kapoor

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Jul 20, 2011

नैनहीन को राह दिखा प्रभु-भक्त सूरदास १९४२

भक्त सूरदास से एक गीत पेश है के. एल. सहगल की आवाज़ में .
दीना नाथ मधोक गीतकार हैं और संगीत बनाया है ज्ञान दत्त ने.
भक्त सूरदास पर बनी फिल्म है अतः इसमें भजन और प्रेरणादाई
गीत ही मिलेंगे आपको. बॉलीवुड ने भक्तों, संतों और महा पुरुषों
पर समय समय पर फ़िल्में बनायीं हैं.

वर्त्तमान समय में इस क्षेत्र में कम या नहीं के बराबर काम हो रहा है.
छोटे परदे के अवतरण के बाद सीरियल निर्माण होने से विकल्प ज्यादा
उपलब्ध हो गए हैं. अब फिल्मों के बजाये पौराणिक, धार्मिक और
ऐतिहासिक कथाएं धारावाहिक रूप में ही देखने को उपलब्ध हैं.



गीत के बोल:

नैनहीन को राह दिखा प्रभु
नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को

तुमरी नगरिया की कठिन डगरिया
तुमरी नगरिया की कठिन डगरिया
चलत चलत गिर जाऊं मैं प्रभु

नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को राह दिखा प्रभु

चहुँ ओर मेरे घोर अँधेरा
भूल न जाऊं द्वार तेरा
चहुँ ओर मेरे घोर अँधेरा
भूल न जाऊं द्वार तेरा
एक बार प्रभु हाथ पकड़ लो
एक बार प्रभु हाथ पकड़ लो
एक बार प्रभु हाथ पकड़ लो
मन का दीप जलाऊँ मैं प्रभु

नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को
.................................
Nainheen ko raah dikha prabhuBhakt Surdas 1942

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Mar 9, 2010

गरीबों पर दया करके-रोटी १९४२

पुराने फ़िल्मी गीतों के प्रेमी ज़रूर इस गीत से वाकिफ होंगे। मगर अगली
पीड़ी के श्रोताओं के लिए ये किंचित अनसुना हो सकता है । मदर इंडिया
जैसी फिल्म बनाने वाले महबूब खान की सन १९४२ की फिल्म रोटी से ये
गीत है। ये बेहद दुर्लभ गीतों की श्रेणी में आता है । दुर्लभ इसलिए कि ना
सुनने को मिलता है ना देखने को । भरी अव्वाज़ों वाले ज़माने में गायक
अशरफ खान कि आवाज़ अलग से पहचानी जा सकती है। कुछ कुछ फ़िल्मी
गायकों और क़व्वाली गायकों के नदाज़ का मिश्रण प्रस्तुत करते अशरफ का
उच्चारण साफ़ है और इधर वे सफ़दर आह सीतापुरी का लिखा एक उपदेशात्मक
गीत गा रहे हैं। सुनिए आपको भी आनंद आएगा। फिल्म में संगीत अनिल बिश्वास
का है ।




गीत के बोल:


गरीबों पर दया करके बड़ा एहसान करते हो
गरीबों पर दया करके बड़ा एहसान करते हो

इन्हें बुजदिल बना देने का तुम सामान करते को
इन्हें बुजदिल बना देने का तुम सामान करते को

गरीबों पर दया करके बड़ा एहसान करते हो

इन्हीं को लूटते हो और इन्हें खैरात देते हो
इन्हीं को लूटते हो और इन्हें खैरात देते हो
बड़े तुम धर्म वाले हो ये अच्छा दान करते हो
बड़े तुम धर्म वाले हो ये अच्छा दान करते हो

गरीबों पर दया करके बड़ा एहसान करते हो

दरो उस वक़्त से जब रंग बदलेगा ज़माने का
दरो उस वक़्त से जब रंग बदलेगा ज़माने का
ये लेंगे तुमसे बदला जिनका अब अपमान करते हो
ये लेंगे तुमसे बदला जिनका अब अपमान करते हो

गरीबों पर दया करके बड़ा एहसान करते हो
इन्हें बुजदिल बना देने का तुम सामान करते को

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Jan 8, 2010

पंछी बावरा-भक्त सूरदास १९४२

१९४२ का एक बेहद चर्चित हुआ गीत। राग केदार पर आधारित गीत
को कितनी सहजता से गाया है खुर्शीद ने। दीनानाथ मधोक के बोलों
को सुरों में पिरोया है ज्ञान दत्त ने। एक उपदेशात्मक गीत है ये। 'थोडा
कहा बहुत समझना' श्रेणी के गीत उस समय वो बहुत बने। वो युग
कड़ी रिहर्सल का युग था इसलिए हमें गायकी उच्च गुणवत्ता वाली मिल
जाती है।



गीत के बोल:

पंछी बावरा
पंछी बावरा
चाँद से प्रीत लगाये
चाँद से प्रीत लगाये

पंछी बावरा
चाँद से प्रीत लगाये
चाँद से प्रीत लगाये

छाया देख नदी में मूरख, फूला नहीं समाये
छाया देख नदी में मूरख, फूला नहीं समाये
वो हरजाई तारों के संग
वो हरजाई तारों के संग, अपनी रास रचाए
चाँद से प्रीत लगाये

पंछी बावरा

कौन बताये तुझे चकोर
कौन बताये तुझे चकोर, गोरे मन के काले
कौन बताये तुझे चकोर, गोरे मन के काले
ज्यूँ ज्यूँ प्रीत बढायेगा तू, त्यूं त्यूं वो घट जाए
चाँद से प्रीत लगाये

पंछी बावरा
चाँद से प्रीत लगाये
चाँद से प्रीत लगाये
पंछी बावरा

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