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Oct 30, 2011

तौबा तौबा तौबा -पासपोर्ट १९६१

कुछ फ़िल्में भूली बिसरी कहलाती हैं तो कुछ भूली भटकी और बची-खुची
फिल्मों को गुम, भुला दी गई फ़िल्में बोला जाता है। बोलने के तरीके बस
जुदा हैं सबके, आशय उनका एक ही रहता है।

एक गुमनाम इस फिल्म पासपोर्ट से एक थोड़ा लोकप्रिय गीत सुनवाया
था आपको पहले। इसी फिल्म से गीता दत्त का गाया अगला गीत सुनते हैं
जो हेलन पर फिल्माया गया है। जनता एक मदिरालय में एकत्रित है और
इसमें एक नर्तकी नृत्य कौशल दिखलाते हुए गा रही है। हेलन को ऐसे दृश्यों
में आपने कई फिल्मों में देखा होगा। ऐसे गीतों के लिए पहले के समय में
गीता दत्त की आवाज़ को प्राथमिकता दी जाती थी वो स्थान बाद में
आशा भोंसले की आवाज़ ने ले लिया।

गीत लिखा है कमर जलालाबादी ने बाद इसकी धुन बनाई है संगीतकार जोड़ी
कल्याणजी-आनंदजी ने। कल्याणजी आनंदजी ने अपनी शुरूआती फिल्मों
में गीता दत्त से उन्होंने कुछ गीत अवश्य गवाए। गीत में आपको गुज़रे
ज़माने के मशहूर खलनायक के. एन. सिंह और चरित्र अभिनेता नजीर हुसैन
भी दिखलाई दे जायेंगे।





गीत के बोल:

तौबा तौबा तौबा
हॉय तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
ओ तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान

तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान

जाने चमन की रंगीन बहारें
किस को पुकारें, किसको पुकारें
जाने चमन की रंगीन बहारें
किस को पुकारें, किसको पुकारें
देखी है ऐसी बहारें कहाँ

तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान


दुनिया में लाखों बांके जवान हैं
मेरी अदा पे सब मेहरबान हैं
दुनिया में लाखों बांके जवान हैं
मेरी अदा पे सब मेहरबान हैं
तुमसे ही ज़ालिम को दिल क्यूँ दिया

तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान

हम ने तुम्हीं से आँख मिलायी
महफ़िल में क्यूँ ये तन्हाई
हम ने तुम्हीं से आँख मिलायी
महफ़िल में क्यूँ ये तन्हाई
हम हैं तुम्हारे तुम्हारी कसम

तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
तौबा तौबा तौबा
हो तौबा मेरी मान
ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
हो ले के मेरे दिल को
बनो ना बेईमान
................................
Tauba tauba ho-Passport 1961

Artists: helen, KN Singh, Nazir Hussain, 

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Dec 12, 2010

साज़-ए-दिल छेड़ दे-पासपोर्ट १९६१

सुन्दर , खूबसूरत और ब्यूटिफुल इन तीन शब्दों में इस
गीत को बयां किया जा सकता है। वजह-साफ़ है, धुन
बढ़िया है, बोल बढ़िया है और नायिका भी बढ़िया है, नायक
भी स्मार्ट है। और क्या चाहिए विडियो गीत में हमको।
कल्याणजी आनंदजी की सबसे पहली कुछ फिल्मों में
से एक है-पासपोर्ट। यूँ कहें तो कल्याणजी आनंदजी की जोड़ी
बनने के बाद लता और रफ़ी का गाया दूसरा युगल गीत।
इसके पहले वे कल्याणजी वीर जी शाह के संगीत निर्देशन
में ६ युगल गीत गा चुके थे। गीत लिखा है फारूख कैसर ने
और इसे फिल्माया गया है मधुबाला और प्रदीप कुमार पर।
मुखड़े को थोडा अलग तरीके से गवाया गया है। हर पंक्ति
दो दो बार गाई जा रही है फिर भी अटपटी नहीं लगती।




गीत के बोल:

साज-ए-दिल छेड़ दे
साज-ए-दिल छेड़ दे
क्या हसीं रात है
क्या हसीं रात है
कुछ नहीं चाहिए
कुछ नहीं चाहिए
तू अगर साथ है
तू अगर साथ है

साज-ए-दिल छेड़ दे

मुझे चाँद क्यूँ ताकता है
मुझे चाँद क्यूँ ताकता है
मेरा कौन ये लगता है
मुझे शक यही होता है
मुझे शक यही होता है
मेरे चाँद से ये जलता है
हमें इसकी क्या परवाह है
हमें इसकी क्या परवाह है

साज-ए-दिल छेड़ दे

तेरे दर पे सर झुक जाए
तेरे दर पे सर झुक जाए
यही ज़िन्दगी रुक जाए
कली दिल की ये खिल जाए
कली दिल की ये खिल जाए
ख़ुशी प्यार की मिल जाए
कभी फिर गमी ना आये
कभी फिर गमी ना आये

साज-ए-दिल छेड़ दे
...................................
Saaz-e-dil chhed de-Passport 1961

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