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Nov 10, 2015

बार बार तोहे क्या समझाए-आरती १९६२

सदाबहार शब्द जब मैंने पहली बार सुन था तब कुछ
ऐसा लगा जैसे किसी ताज़ी सब्जी की बात हो रही हो,
या हरियाली की. बहार शब्द को हरियाली से जोड़ के
देखा करते थे. शब्द सीखने का अधिकांश लोगों का
तरीका एक सा होता है. कुछ शब्द किसी घटना या
प्रसंग विशेष की याद दिलाते हैं.

आपको आज एक सदाबहार युगल गीत सुनवाते हैं जो
फिल्म आरती से लिया गया है. इसे लता और रफ़ी ने
गाया है. प्रदीप कुमार औए मीना कुमारी अभिनीत इस
फिल्म के गाने ज़बरदस्त हिट हैं. मजरूह सुल्तानपुरी
के लिखे गीत हैं और संगीत रोशन का. गीत की धुन
काफी आकर्षक है और इसे आसानी से गुनगुनाया भी
जा सकता है.




गीत के बोल:

बार बार तोहे क्या समझाये
बार बार तोहे क्या समझाये पायल की झनकार
तेरे बिन साजन लागे ना जिया हमार
चुप चुप के करता हैं इशारें चंदा सौ सौ बार
आ तोहे सजनी ले चलूँ नदियाँ के पार

चलते चलते रुक गये क्यों सजन मेरे
मिलते मिलते झुक गये क्यों नैन तेरे
झुके झुके नैना करते हैं तुमसे ये इकरार
तेरे बिन साजन लागे ना जिया हमार

दरिया ऊपर चांदनी आई संभल संभल
इन लहरों पर मन मेरा गया मचल मचल
एक बात कहता हूँ तुमसे ना करना इन्कार
आ तोहे सजनी ले चलूँ नदियाँ के पार

ना बीते ये रात हम मिलते ही रहे
बस तारों की छाँव में चलते ही रहे
नाम तेरा ले ले कर गाये धड़कन का हर तार
तेरे बिन साजन लागे ना जिया हमार
………………………………………………………………….
Baar baar tohe kya samjhaye-Aarti 1962

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Jul 15, 2011

जाऊं मैं कहाँ ये ज़मीन -मिस इंडिया १९५७

आपको श्वेत श्याम युग से एक तेज धुन वाला युगल गीत
सुनवाते हैं. आकर्षक ध्वनि संयोजन से गीत शुरू होता है.
स्टेज पर नशेड़ी सा एक युवक लड़खड़ाते हुए गाना चालू करता
है. इतना नहीं लडखडाता है कि माइक ले के स्टेज के नीचे
टपक जाए. ये है फिल्म का नायक जिसने पार्टी में शायद
ज्यादा पी ली है. पी कितनी भी ली हो गाना सुर ताल में
गायेगा. ये हैं फिल्म के नायक प्रदीप कुमार. एक बात बस
समझ नहीं आई कि मन्ना डे वाले अंतरे एक से क्यूँ हैं इस
गीत में. कहीं ये पुराने ज़माने का 'कॉपी कट पेस्ट' एरर तो
नहीं ?

ये एक गीयर बदलने वाला गीत है. तेज संगीत के और हा हा
के बाद कुछ धीमा धीमा सा गीत सुनाई देता है. तेज वाले भाग
में नायिका शीला वाज़ हैं तो धीमे वाले भाग में नर्गिस.

अभिनेत्री नर्गिस के कैरियर की वे फ़िल्में अधिकांश दर्शकों
को याद हैं जिनमें इन्होने राज कपूर के साथ काम किया है.
सिवाए मदर इंडिया (१९५७) और रात और दिन(१९६४) के
इक्का दुक्का फ़िल्में और हैं जो प्रसिद्ध हुई हैं. सन १९५७ में
एक फिल्म आई थी-मिस इंडिया. इसमें उन्होंने एक आधुनिक
समय की नारी की भूमिका अदा की है. समय से आगे की
भूमिकाएं या फ़िल्में अक्सर नहीं चला करती हैं. इस फिल्म
का संगीत भी थोडा सा ही बजा वो भी सचिन देव बर्मन के
भक्तों के घर. गीत लता मंगेशकर और मन्ना डे का गाया हुआ
है. बोल लिखे हैं राजेंद्र कृष्ण ने.

एक बड़े शामियाने से अगर पहनने के कपडे निकाले जाएँ तो कुछ
कुछ वैसे ही बनेंगे जैसे की इस गीत में बालाएं पहने हुए हैं.



गीत के बोल:

हे हे हे हे हे हे, हे हे हे हे हे हे
हो, हा हा हा
हे हे हे हे हे, हो हो
हा हा, हो हो, हा हा हा हा हा

जाऊं मैं कहाँ,
हाय, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के
जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के

जाऊं मैं कहाँ

हो हो हो हो हो हो हो हो
हो हो हा हा हा हा हा

ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा

जाऊं मैं कहाँ,
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे,
चल दिया कारवां छोड़ के

जाऊं मैं कहाँ

रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रात गुज़रती जाए
आस नज़र न आये
रो न सकूं अब
रोते रोते आंसू भी शरमाये

हो हो हो, जाऊं मैं कहाँ
ये ज़मीन ये जहां छोड़ के
राह में मुझे
चल दिया कारवां छोड़ के

जाऊं मैं कहाँ

हो हो हो हो हा हा हा हा
हो हो हा हा हो हो हो

ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
ये भीगी भीगी रातें
ये घुमड़ घुमड़ बरसातें
ऐसे में दिल से कर ले
दो चार नज़र की बातें
बाँहों में आ के सो जा,
सो जा, सो जा

..............................
Jaoon main kahan-Miss India 1957

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Jul 13, 2011

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ-घूंघट १९६०

सन १९४६ की घूंघट से एक गीत सुना आपने, अब सुनवाते हैं
सन १९६० की घूंघट फिल्म से. पिछला गीत रफ़ी का युगल गीत
था. इसमें वे अकेले ही गा रहे हैं. शकील बदायुनी के बोलों पर
संगीतकार रवि ने एक आकर्षक धुन बनायीं है. गीत में बीना राय
दिखाई देंगी आपको परेशां सी. थोड़ी देर के बाद प्रदीप कुमार भी
दिखलाई देने लगते हैं. वो भी कुछ परेशां से हैं . गीत पार्श्व में
बज रहा है. धीरे धीरे तीसरा चरित्र भी परदे पर आता है-वो हैं
नायिका आशा पारेख.





गीत के बोल:


हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ
हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ
पास रह कर भी हैं कितनी दूरियाँ, दूरियाँ

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ

कुछ अँधेरे में नज़र आता नहीं
कोई तारा राह दिखलाता नहीं
जाने उम्मीदों की मंज़िल है कहाँ
जाने उम्मीदों की मंज़िल है कहाँ, हाय

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ

शमा के अंजाम की किसको ख़बर
ख़त्म होगी या जलेगी रात भर
शमा के अंजाम की किसको ख़बर
ख़त्म होगी या जलेगी रात भर
जाने ये शोला बनेगी या धुआँ
जाने ये शोला बनेगी या धुआँ, हाय

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ
पास रह कर भी हैं कितनी दूरियाँ, दूरियाँ

हाय रे इन्सान की मजबूरियाँ
.............................................
Haye re insaan ki majbooriyan-Ghoonghat 1960

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Jul 2, 2011

अकेली हूँ मैं पिया आ-सम्बन्ध १९६९

आशा भोंसले के गाये चुनिन्दा अलग-हट-के गीतों
में से एक आपको आज सुनवाते हैं। ये उपशास्त्रीय सा
सुनाई देता गीत है फिल्म सम्बन्ध से। कवि प्रदीप
के बोलों पर धुन बनाई है ओ. पी. नैयर ने। विडियो
में ये गीत संक्षिप्त है अतः आपको ऑडियो और विडियो
दोनों के लिंक दिए जा रहे हैं। नैयर की बहुआयामी प्रतिभा
को दर्शाता है राग शिवरंजिनी पर आधारित यह गीत ।
नैयर को भारतीय शास्त्रीय संगीत में प्रयुक्त होने वाले वाद्य
बहुत पसंद थे और इस गीत में भी उन वाद्यों में से कुछ
का प्रचुर प्रयोग हुआ है।








गीत के बोल:

मैं ख़ुद चन्द्रमुखी हूँ चमक से डरती हूँ
अपने मुखड़े की अनोखी दमक से डरती हूँ
ये सोलहवाँ जो लगा साल इसने मार दिया
अब तो पायल की ज़रा सी छमक से डरती हूँ

अकेली हूँ मैं पिया आ
अकेली हूँ मैं पिया आ
रूप नागर की कुंवरी तरसे
रूप नागर की कुंवरी तरसे
राजा प्रीत निभा

अकेली हूँ मैं पिया आ

रूप की धुप में जली सैयां
रूप की धुप में जली सैयां
कर दे प्यार की शीतल छैयां
रूप की धुप में जली सैयां
कर दे प्यार की शीतल छैयां
अब और मत जला

अकेली हूँ मैं पिया आ

जब-जब देखूँ मैं दर्पण में
जब-जब देखूँ मैं दर्पण में
आग सी लगती नाज़ुक तन में
जब-जब देखूँ मैं दर्पण में
आग सी लगती नाज़ुक तन में
का करूँ तू ही बता

अकेली हूँ मैं पिया आ
.............................
Akeli hoon main piya aa-Sambandh 1969

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Jun 22, 2011

लोग कहते हैं कि हम-बहू बेगम १९६७

साहिर का है अंदाज़-ए-बयां और। ख़वातीनों हाज़रात, महबूब
से किनारा करने का खुशनुमा ख्याल और किस के दिमाग में
आ कर कागज़ पर उतर सकता है। किनारा करने की बात पर
रज़ामंदी मांगी जा रही है, समाज की बंदिशें या फिर कोई और
वजह ऐसा करने को प्रेरित कर रही हैं जानने के लिए आपको
बहू बेगम फिल्म एक बार ज़रूर देखना पड़ेगी।

साहिर के गीतों से फिल्म के निर्देशक का काम कभी कभी बहुत
आसान हो जाया करता था। आम दर्शक तो धुन से ही आनंद उठा
लिया करता लेकिन दिमाग खपाने वाले दर्शक गीत की गहराई
में उतर कर नायक की करतब-ए-एक्टिंग को गीत के शब्दों और
भावों से मिलाने की असफल कोशिश में लग जाते। साहिर के गीतों
पर कुछ ही संजीदा कलाकारों ने बढ़िया अभिनय किया है।

कमबख्त दिल तो मानता नहीं है क्या किया जाये, इश्क की
खुमारी दिल पर झाड फानूस की धूल माफिक चिपकी रहती है,
कुछ करने या ना करने की जायज़ वजहें होना ज़रूरी है। अब
जुदा हो ही रहे हैं तो सारे अरमान पूरे करते चलें और ये जुमला
दोहराते चलें-किनारा कर लें।

प्रेम त्रिकोण पर आधारित इस फिल्म में कई यादगार गीत हैं।
ये गीत थोड़ा कम सुना जाता है और गीतों की तुलना में। गीत
मधुर है इसलिए हमने इसे पहले चुना है सुनने के लिए।




गीत के बोल:

लोग कहते हैं कि हम तुमसे किनारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं

तुमने जिस हाल-ए-परेशानी से निकला था हमें
आसरा दे के मोहब्बत का संभाला था हमें
सोचते हैं के वही
सोचते हैं के वही हाल दुबारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं

यूँ भी अब तुमसे मुलाक़ात अब नहीं होने की
मिल भी जाओ
मिल भी जाओ तो कोई बात नहीं होने की
आखिरी बार बस अब
आखिरी बार बस अब जिक्र तुम्हारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं

आखिरी बार ख्यालों में बुला लें तुमको
आखिरी बार कलेजे से लगा लें तुमको
और फिर अपने तड़पने
और फिर अपने तड़पने का नज़ारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें

लोग कहते हैं कि हम तुमसे किनारा कर लें
तुम जो कह दो तो सितम ये भी गवारा कर लें
लोग कहते हैं
.....................
Log kehte hain ki hum-Bahu Begum 1967

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Dec 12, 2010

साज़-ए-दिल छेड़ दे-पासपोर्ट १९६१

सुन्दर , खूबसूरत और ब्यूटिफुल इन तीन शब्दों में इस
गीत को बयां किया जा सकता है। वजह-साफ़ है, धुन
बढ़िया है, बोल बढ़िया है और नायिका भी बढ़िया है, नायक
भी स्मार्ट है। और क्या चाहिए विडियो गीत में हमको।
कल्याणजी आनंदजी की सबसे पहली कुछ फिल्मों में
से एक है-पासपोर्ट। यूँ कहें तो कल्याणजी आनंदजी की जोड़ी
बनने के बाद लता और रफ़ी का गाया दूसरा युगल गीत।
इसके पहले वे कल्याणजी वीर जी शाह के संगीत निर्देशन
में ६ युगल गीत गा चुके थे। गीत लिखा है फारूख कैसर ने
और इसे फिल्माया गया है मधुबाला और प्रदीप कुमार पर।
मुखड़े को थोडा अलग तरीके से गवाया गया है। हर पंक्ति
दो दो बार गाई जा रही है फिर भी अटपटी नहीं लगती।




गीत के बोल:

साज-ए-दिल छेड़ दे
साज-ए-दिल छेड़ दे
क्या हसीं रात है
क्या हसीं रात है
कुछ नहीं चाहिए
कुछ नहीं चाहिए
तू अगर साथ है
तू अगर साथ है

साज-ए-दिल छेड़ दे

मुझे चाँद क्यूँ ताकता है
मुझे चाँद क्यूँ ताकता है
मेरा कौन ये लगता है
मुझे शक यही होता है
मुझे शक यही होता है
मेरे चाँद से ये जलता है
हमें इसकी क्या परवाह है
हमें इसकी क्या परवाह है

साज-ए-दिल छेड़ दे

तेरे दर पे सर झुक जाए
तेरे दर पे सर झुक जाए
यही ज़िन्दगी रुक जाए
कली दिल की ये खिल जाए
कली दिल की ये खिल जाए
ख़ुशी प्यार की मिल जाए
कभी फिर गमी ना आये
कभी फिर गमी ना आये

साज-ए-दिल छेड़ दे
...................................
Saaz-e-dil chhed de-Passport 1961

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ऐसे तो ना देखो-भीगी रात १९६५

इसके मुखड़े के बोल पढ़ के तीन देवियाँ के गाने की
गलतफ़हमी हो जाती है। वो गीत रफ़ी का गाया एकल
गीत था जबकि प्रस्तुत गीत सुमन और रफ़ी का गाया
युगल गीत है। कालिदास के निर्देशन में बनी फिल्म
भीगी रात का संगीत अच्छा है। हमारी कोशिश है
की आपको पहले कम प्रचलित और कम सुने गए गीत
सुनवाए जाएँ ताकि आपको कुछ अतिरिक्त जानकारी मिलती
रहे। रईसी वाला गीत है। नायक नायिका कार में बैठ
के घूमने निकले है और गीत भी गाते हैं। गीत के
नीचे आपको एक कमेन्ट मिलेगा-grossly underrated for
obvious reasons- इस तरह की टिप्पणियों से अर्थ निकलना
बड़ी टेढ़ी खीर होता है। या तो लिखने वाला ये कहना
चाहता है कि रफ़ी और सुमन के गाये युगल गीत लता-रफ़ी
के गाये युगल गीतों की तुलना में कमतर आंके जाते हैं
या उसका इशारा दूसरे संगीतकारों और रोशन के
संगीत में तुलना से है। फिलहाल सम्भावना पहले कारण
की ज्यादा नज़र आ रही है। सुमन को प्रथम श्रेणी की
गायिका मानने से कई संगीत प्रेमी इनकार जो करते हैं
सीधी वजह उनकी आवाज़ लता की आवाज़ के सबसे निकट
होना। खैर ये तुलना वुलना का चक्कर छोड़ें और सुनें इस
मधुर गीत को।




भीगी रात के पिछले गीत में नायिका रूठी हुई थी। इसमें थोड़ी
खुश नज़र आ रही है और कुछ खिसियाने अंदाज़ में नायक के
साथ गीत गाना शुरू करती हैं-जैसे कहना चाह रही हों-"शर्म से
यहीं गड़ जाएँ ना कहीं हम" !!




गीत के बोल:

ऐसे तो ना देखिये के बहक जाएँ कहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम

हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम

अंगडाई सी लेती है जो ख़ुशबू भरी जुल्फें
ख़ुशबू भरी जुल्फें
गिरती हैं तेरे सुर्ख लबों पर तेरी जुल्फें
लबों पर तेरी जुल्फें
जुल्फें ना तेरी चूम लें
जुल्फें ना तेरी चूम लें ऐ माहजबीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम

आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं

सुन सुन के तेरी बात नशा छाने लगा है
नशा छाने लगा है
खुद अपने भी प्यार तो कुछ आने लगा है
है ऐ ऐ, आने लगा है।

रखना है कहीं पाँव तो
रखना है कहीं पाँव तो रखते हैं कहीं हम
आखिर को एक इंसान है फ़रिश्ता तो नहीं हम

भीगा सा ये रुख-ए-नाज़ ये हल्का सा पसीना
ये हल्का सा पसीना
हाय
ये नाचती आँखों के भंवर दिल का सफीना
दिल का सफीना
सोचा है के अब डूब के
सोचा है के अब डूब के रह जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम

हाय, ऐसी ना कहो बात के मर जाएँ यहीं हम
आखिर को एक इंसान हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम

आ हा हा, आ आ आ आ आ, हं हं हं हं हं
हं हं हं हं हं हं हं
......................................................................
Aise to na dekhiye ke behak jayen-Bheegi Raat 1965

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मोहब्बत से देखा खफा हो गए हैं-भीगी रात १९६५

रोशन ने अपने कैरियर के उत्तरार्ध में गीत की ध्वनियों
में हल्का ईको प्रभाव का काफी प्रयोग किया। ये अक्सर
गायक की आवाज़ के लिए प्रयोग में लायी जाती। कुछ
गीतों में वाद्य यन्त्र के साथ भी इसका प्रयोग हुआ है मगर
सुनने वाले का ध्यान वाद्य यन्त्र के साथ हुए खिलवाड़ पर
कम जाता है इसलिए उसको अभी नज़रअंदाज़ कर के
चलते हैं।

रफ़ी के गाये रोमांटिक गीतों के सृजन कर्ताओं में केवल
ओ पी नय्यर और शंकर जयकिशन ही नहीं बल्कि रोशन
भी शामिल हैं। ये गीत लिखा है मजरूह ने और इसे रुपहले
परदे पर गा रहे हैं प्रदीप कुमार । साथ में जो अभिनेत्री हैं
वो मीना कुमारी हैं।



गीत के बोल:

मोहब्बत से देखा खफा हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं

अदाओं में थी सादगी अब से पहले
हो ओ ओ, अदाओं में थी सादगी अब से पहले
वल्लाह
कहाँ रंग थे ये सुनहरे रुपहले
हो ओ ओ नज़र मिलते ही
नज़र मिलते ही क्या से क्या हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं

किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना
हो ओ ओ, किसी मोड़ पे बन के सूरज निकलना
तौबा
कहीं धुप में चाँदनी बन के चलाना
हो ओ ओ जिधर देखो जलवा
जिधर देखो जलवानुमां हो गए हैं
हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं

यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा
हो ओ ओ, यहाँ तो लगा दिल पे एक ज़ख्म गहरा
हाय
वहां सिर्फ उनका ये अंदाज़ ठहरा
हो ओ ओ खता कर के भी
खता कर के भी बे-खता हो गए हैं

हसीं आज कल के खुदा हो गए हैं
........................................................
Mohabbat se dekha khafa ho gaye-Bheegi Raat 1965

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Dec 7, 2010

लागे ना मोरा जिया-घूंघट १९६०

संगीतकार रवि के बहुत से मधुर गीत आपको सुनवाए
ही नहीं है अभी तक। आइये सुनें एक लता मंगेशकर का
गाया गीत जो उनकी बेहतर रचनाओं में से एक है।
प्रदीप कुमार और आशा पारेख पर फिल्माए गए इस
गीत को आप देख के अंदाज़ा लगा सकते हैं कि किसका
जिया नहीं लागे हैं और क्यूँ नहीं लागे है ? आशा पारेख
घरेलु नारी के वेश में ज्यादा खूबसूरत लगती हैं। वैसे तो
ज़रूरी नहीं आप मेरे विचार से सहमत हों।



वैसे आज इच्छा हो रही थी कि आपको गुलज़ार का लिखा
गीत-"चड्डी पहन के फूल खिला है" सुनवा दें क्यूंकि सुबह
सुबह सर्दी में बहुत से यायावरीय प्राणी बाग़ और अन्य जगहों
पर लम्बी चड्डी और घुटन्ने पहने दिखाई दिए थे। अब नेट
कनेक्शन का भरोसा नहीं कब मरणासन्न हो जाए अतः इसी
पुरानी घिसी हुई पोस्ट को अपडेट करके लगा रहा हूँ।

लागे ना मोरा जिया, बरमूडा पहन आये, हाय ........

गीत भी सुने लें और गुलज़ार साहब को भी याद कर लें। मैं
तो जब जब बरमूडा पहनता हूँ उनकी याद अवश्य याद
कर लिया करता हूँ। ये गीत शकील बदायूनी का लिखा हुआ
है। पढ़ते रहिये, आगे चल के आपको शकील के लिखे और
रवि के संगीत वाले चौदहवी का चाँद' के गीत भी सुनवायेंगे।



गीत के बोल:

लागे ना मोरा जिया
सजना नहीं आये हाय
लागे ना मोरा जिया
सजना नहीं आये हाय

लागे ना मोरा जिया

देख लिए पिया तेरे इरादे
झूठे निकले जा तेरे वादे
देख लिए पिया तेरे इरादे
झूठे निकले जा तेरे वादे
तड्पत-तड्पत याद में तेरी
नैन नीर भर आये
नैन नीर भर आये, हाय

लागे ना मोरा जिया

तू ने मेरी सुध बिसर्यी
बेदर्दी तोहे लाज ना आई
तू ने मेरी सुध बिसरायी
बेदर्दी तोहे लाज ना आई
भूल गए क्यूँ ओ हरजाई
जा के देस पराये
जा के देस पराये, हाय

लागे ना मोरा जिया
सजना नहीं आये हाय

लागे ना मोरा जिया
..............................
Laage na mora jiya-Ghoonghat 1960

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Nov 24, 2010

अरे छोड़ दे सजनिया पतंग मेरी-नागिन १९५४

नागिन सन १९५४ की फिल्म है और ज़बरदस्त हिट फिल्म है।
इसके गीत इतने बजे कि लोगों को याद हो गए। पिछले गीत
को सुनने के बाद ये ही सबसे पहले दिमाग में आता है। वजह
क्या है आप ढूंढिए। फिल्म में एक नौटंकी में नायक प्रदीप कुमार
और नायिका वैजयंतीमाला ये गीत गा रहे हैं। हेमंत कुमार और
लता मंगेशकर के गाये इस गीत को लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और
धुन बनाई है हेमंत कुमार ने।



गीत के बोल:

अरी छोड़ दे सजनिया
छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे

अरी छोड़ दे सजनिया
छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे

आशाओं का मांजा लागा
रंगी प्यार से डोरी
आशाओं का मांजा लागा
रंगी प्यार से डोरी
तेरे मुहल्ले उड़ते उड़ते
आई चोरी चोरी

बैरी दुनिया कहीं न तोड़ दे
पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे

अरमानों की डोर लूटने
खड़े है दुनियवाले
बाँके चरख़ीवाले
अरमानों की डोर लूटने
खड़े है दुनियवाले
बाँके चरख़ीवाले

ऊँचे नीलगगन में
छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
ऐसे छोड़ूँ न बलमवा
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे

देख चली ये संग हवा के
बलखाती इठलाती
सैयाँ बलखाती इठलाती
चीर के बैरी जग का सीना
गीत प्यार के गाती
देखो गीत प्यार के गाती

हैं किस में इतना ज़ोर
जो काटे डोर सामने आये न
फिर मेरी अटरिया पे
छोड़ दे पतंग सैयाँ छोड़ दे

ऐसे छोड़ूँ न सजनिया
नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
गोरी नैनवा के डोर पहले जोड़ दे

सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
गोरी नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे
गोरी नैनवा के डोर पहले जोड़ दे
सैयाँ छोड़ दे पतंग मेरी छोड़ दे

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Apr 30, 2010

तुमसे दूर चले-प्यार की राहें १९५९

समय समय पर हिंदी फिल्म संगीत के दरवाजे पर गुमनाम से लोगों ने
भी दस्तक दी है। ऐसा ही एक नाम है कनु घोष जिन्होंने १९५९ की फिल्म
प्यार की राहें का संगीत तैयार किया था। गीत लिखा है थोडा पहचाने से
नाम-प्रेम धवन ने। गायक ज़रूर नामचीन हैं इस गीत के-हेमंत कुमार और
लता मंगेशकर। प्रदीप कुमार और अनीता गुहा अभिनीत और लेखराज भाकरी
निर्देशित फिल्म कब आई कब गई शायद फिल्म के नायक नायिका को भी
याद नहीं रहा होगा।

मैंने आपसे ३ पोस्ट पहले वादा किया था इसलिए आपको काले-पीले(श्वेत-श्याम)
युग की ओर लेकर आया हूँ।



गीत के बोल:

तुम से दूर चले
हम मजबूर चले
प्यार भरे दिल मिल ना सके
नील गगन के तले
नील गगन के तले
तुम से दूर चले
हम मजबूर चले
प्यार भरे दिल मिल ना सके
नील गगन के तले
नील गगन के तले

ना तेरी खता ना मेरी खता
ये है किस्मत के खेल
तुम भी चाहो हम भी चाहें
हो ना सके पर मेल
मैं मजबूर हुयी
तुमसे दूर हुयी
रूठी हुयी तकदीर के आगे
किसका जोर चले
किसका जोर चले

सुख चैन गया अरमान लूटे
इस प्यार की राहों में
ओ प्रीत मेरी ओ गीत मेरे
ढल गए आहों में
तुम बिन राह ना सकूं
पर कुछ कह ना सकूं
लोक लाज के घूंघट में
रो रो कोई जले
रो रो कोई जले

तुम से दूर चले
हम मजबूर चले
प्यार भरे दिल मिल ना सके
नील गगन के तले
नील गगन के तले

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Apr 28, 2010

चला है कहाँ-संजोग १९६१

कुछ गीत स्वतः दिमाग में कौंध जाते हैं। ऐसा ही एक गीत है
जो मुझे सदा से आकर्षित करता रहा। कुछ विशेष वजह होगी इसकी,
मुझे चल, चला, चला है, इत्यादि शब्द वाले गाने ज्यादा ध्यान में
आते हैं। उसके अलावा जो गीत थोड़ी ऊंची पट्टी पर गाये गए होते
हैं वो दिमाग के किसी कोने में ज़रूर अपना स्थान बना लेते हैं।

ये प्रश्नवाचक गीत है फिल्म संजोग से जिसमे अभिनेत्री अनीता गुहा
नायक प्रदीप कुमार से संगीतमय प्रश्न पूछ रही हैं । गीत राजेंद्र कृष्ण
का लिखा हुआ है और धुन है मदन मोहन की। फिल्म के ३ गीतों पर
हम पहले चर्चा कर चुके हैं। आइये इस मधुर गीत का आनंद उठायें ।



गीत के बोल:



चला है कहाँ
चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,


चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,

चला है कहाँ

अँखियाँ मेरी सपने तेरे, हो हो
देख ज़रा ओ साथी मेरे, हो हो
दिल दीवाना तुझे पुकारे
करे इशारे ना जा

चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,

चला है कहाँ

आ, आ, हा हा, आ आ आ
हा हा, आ आ आ आ

सावन भी आनेवाला है, हो हो
रंग नया लानेवाला है हो ओ
रुत अलबेली मुझे अकेली
देख सहेली ना जा

चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,

चला है कहाँ

फूल बनी है कली अभी तो हो ओ
बनायें है दिल की गली अभी तो हो ओ
अभी अभी तो पायल मेरी बाजी
छम छम ..... ना जा

चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,

चला है कहाँ

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Jan 9, 2010

अब क्या मिसाल दूं मैं तुम्हारे शबाब की-आरती १९६२

पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि नायक नाउम्मीदी के भंवर से निकलने की
जद्दो जहद में लगा है और उसको इस चक्र से एक नायिका निकाल रही है।
इस गीत तक पहुँच कर नायक को दुनिया हरी भरी नज़र आने लगी है और
वो नायिका की तारीफ़ में एक बढ़िया रोमांटिक गीत गाता है। फिल्म आरती
का ये गीत एक चर्चित और कर्णप्रिय गीत है, जिसको बहुत आहिस्ता से गाया
गया है। उपमाओं का ये साहित्यिक 'उसल-मीसल' आपको ज़रूर पसंद आएगा।
कितना फर्क आया है श्वेत श्याम और रंगीन युग में प्रेम के इज़हार के मामले में।
आज के दौर में पहाड़ के ऊपर चढ़ के सबसे ऊंचे सुर में चीख के नायक बतलाता
है कि उसकी प्रेमिका कैसी और कितनी सुन्दर है।

चन्द्रमा की किरण को मजरूह साहब ने इंसान बनवा दिया है इस गीत में।



गीत के बोल:

अब क्या मिसाल दूं मैं तुम्हारे शबाब की
इंसान बन गयी है किरण माहताब की
अब क्या मिसाल दूं

चेहरे में घुल गया है हसीं चांदनी का नूर
आँखों में है चमन की जवां रात का सुरूर
गर्दन है इक झुकी हुयी डाली,
डाली गुलाब की

अब क्या मिसाल दूं मैं तुम्हारे शबाब की
अब क्या मिसाल दूं

गेसू खुले तो शाम के दिल से धुंआ उठे
छू ले कदम तो झुक के ना फिर आस्मां उठे
सौ बार झिलमिलाये शमा,
शमा आफ़ताब की

अब क्या मिसाल दूं

दीवार-ओ-दर का रंग ये आँचल ये पैरहन
घर का मेरे चिराग है बूटा सा ये बदन
तस्वीर हो तुम्ही मेरे जन्नत के
जन्नत के ख्वाब की

अब क्या मिसाल दूं मैं तुम्हारे शबाब की
इंसान बन गयी है किरण माहताब की
अब क्या मिसाल दूं
................................
Ab kya misaal doon main tumhare shabab ki-Aarti 1962

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आप ने याद दिलाया तो मुझे-आरती १९६२

फिल्म आरती के गीतों में से दूसरा गीत पेश है । ये एक युगल गीत है
जिसे लता और रफ़ी ने गाया है । गंभीर किस्म के इस गीत के बोल
लिखे हैं मजरूह सुल्तानपुरी ने। नाउम्मीदी का ये आलम है कि नायक
ये भी भूल चूका है की उसको क्या तकलीफें हैं। लगातार एक जैसी
निराशाजनक स्तिथियों के बाद ऐसा ही दौर आता है की आदमी तकलीफों
से ऊपर उठ जाता है और उसको संसार नकारात्मक या निराशावादी कहना
शुरू कर देता है। उसी सोयी हुई उम्मीदें और अरमान जाग जाते हैं जब कोई
आशा की किरण उसके जीवन में प्रवेश करती है। गीत फिल्माया गया है
प्रदीप कुमार और मीना कुमारी पर और इस गीत की धुन बनाई है रोशन ने।



गाने के बोल:

रफ़ी:
आपने याद दिलाया तो मुझे याद आया
आपने याद दिलाया तो मुझे याद आया
के मेरे दिल पे पड़ा था कोई ग़म का साया

आपने याद दिलाया

मैं भी क्या चीज़ हूँ खाया था कभी तीर कोई
दर्द अब जा के उठा, चोट लगे देर हुई
तुमको हमदर्द जो पाया तो मुझे याद आया
के मेरे दिल पे पड़ा था कोई ग़म का साया

आपने याद दिलाया

मैं ज़मीं पर हूँ न समझा न परखना चाहा
आसमाँ पर ये कदम झूम के रखना चाहा
आज जो सर को झुकाया तो मुझे याद आया
के मेरे दिल पे पड़ा था कोई ग़म का साया

आपने याद दिलाया

लता:
मैं ने भी सोच लिया साथ निभाने के लिये
दूर तक आऊंगी मैं तुमको मनाने के लिये
दिल ने एहसास दिलाया तो मुझे याद आया
के मेरे दिल पे पड़ा था कोई ग़म का साया
आपने याद दिलाया तो मुझे याद आया

रफ़ी:
आपने याद दिलाया तो मुझे याद आया
.................................
Aapne yaad dilaya to mujhe yaad aaya-Aarti 1962

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Nov 18, 2009

बांसुरिया फ़िर से बजाओ कान्हा - ताज १९५६

बांसुरिया और कान्हा की याद से एक मधुर गीत याद आ गया
श्वेत श्याम के युग का। ये है फ़िल्म ताज का लता मंगेशकर और
हेमंत कुमार का गाया युगल गीत। इसमे प्रदीप कुमार और
वैजयंतीमाला की जोड़ी है। इस गीत की धुन और अभिनेत्री का नृत्य
दोनों धीमे हैं और श्रवण /दर्शन इन्द्रियों को आराम पहुँचाने वाले हैं।
इसकी एक लाइन मुझे अच्छे से याद है-सुन री ओ नटखट गवालन
की छोरी ......... इस गीत को मैंने कम से कम २००-३०० बार तो सुन
ही लिया होगा अभी तक। गीत लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और
इसकी धुन बनाई है हेमंत कुमार ने ।



गाने के बोल:

बांसुरिया फ़िर से बजाओ कान्हा
बांसुरिया फ़िर से बजाओ

बंसी न बाजे तो जिया मोरा डोले
जिया मोरा डोले पिया बोली ये बोले

बंसी न बाजे तो जिया मोरा डोले
जिया मोरा डोले पिया बोली ये बोले

फ़िर से वोही धुन सुनाओ
कान्हा बांसुरिया

बांसुरिया फ़िर से बजाओ कान्हा
बांसुरिया फ़िर से बजाओ

बांसुरिया फ़िर से बजाओ कान्हा
बांसुरिया फ़िर से बजाओ

सुन री ओ नटखट गवालन की छोरी
मैं न बजाऊँगा ये बांस की पोरी

ऐसे न मुझको रुलाओ
कान्हा बांसुरिया

बांसुरिया फ़िर से बजाओ कान्हा
बांसुरिया फ़िर से बजाओ

बांसुरिया फ़िर से बजाओ कान्हा
बांसुरिया फ़िर से बजाओ

कान्हा तेरी मुरली में राधा की जान है
राधा तू ही तो मेरी बंसी की तान है

कान्हा तेरी मुरली में राधा की जान है
राधा तू ही तो मेरी बंसी की तान है

होंठों से मुरली लगाओ

कान्हा बांसुरिया

बांसुरिया फ़िर से बजाओ कान्हा
बांसुरिया फ़िर से बजाओ

बांसुरिया फ़िर से बजाओ कान्हा
बांसुरिया फ़िर से बजाओ

जा जा न हमको सताओ राधा
जा जा न हमको सताओ

बांसुरिया फ़िर से बजाओ कान्हा
बांसुरिया फ़िर से बजाओ

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Nov 15, 2009

ज़मीन से हमें आसमान पर-अदालत १९५८

अदालत नाम से दो फिल्में मुझे ध्यान हैं। एक अमिताभ वाली
और एक ये है श्वेत श्याम के ज़माने से। आशा भोंसले और रफी के
गाये इस युगल गीत को आपने 'छाया गीत' जैसे कार्यक्रमों में बहुत सुना
होगा। आशा भोंसले की आवाज़ और नर्गिस का अभिनय थोड़ा रेयर
किस्म का अनुभव है। इसमे प्रदीप कुमार नायक हैं । संगीत मदन मोहन
का है । ओ पी नय्यर के से संगीत का आभास देता ये गीत सदाबहार गीत
माना जाता है। फ़िल्म सन १९५८ में आई थी। मर्यादित छेड़ छाड़ किसे कहा
जाता है उसका एक शानदार नमूना है ये गीत। इसमे प्रश्न-उत्तर के माध्यम
से भावनाएं व्यक्त की गई हैं।



गीत के बोल:

आ आ आ

ज़मीन से हमें आसमान पर
बिठा के गिरा तो न दोगे

अगर हम ये पूछें के दिल में
बसा के भुला तो न दोगे

ज़मीन से हमें आसमान पर
बिठा के गिरा तो न दोगे

अगर हम ये पूछें के दिल में
बसा के भुला तो न दोगे

ए रात इस वक्त आँचल में तेरे
जितने भी हैं ये सितारे
ए रात इस वक्त आँचल में तेरे
जितने भी हैं ये सितारे

जो दे दे तू मुझ को तो, फिर मैं लूटा दूँ
किसी की नज़र पे ये सारे

आ आ आ
कहो के ये रंगीन सपने
सजा के मिटा तो न दोगे

अगर हम ये पूछें.................

तुम्हारे सहारे निकल तो पड़े हैं
है मंजिल कहाँ दिल न जाने
तुम्हारे सहारे निकल तो पड़े हैं
है मंजिल कहाँ दिल न जाने

जो तुम साथ दोगे तो आएगी एक दिन
मंजिल गले से लगाने

आ आ आ
इतना तो दिल को यकीन है
हमें तुम दगा तो न दोगे

अगर हम ये पूछें................

ज़मीन से हमें आसमान पर
बिठा के गिरा तो न दोगे

अगर हम ये पूछें के दिल में
बसा के भुला तो न दोगे

आहा, हा हा हा, हा हा हा
ला ला, ला ला ला, ला ला ला
हम्म हम्म हम्म हम्म हम्म हम्म
हा हा, हा हा हा, हा हा हा

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Sep 9, 2009

सावन की आई है बहार -अनजान १९५६

हेमंत कुमार के लिए राजेंद्र कृष्ण ने बहुत से गीत लिखे।
इनकी जोड़ी सौम्य और कर्णप्रिय गीतों के लिए जानी जाती
रही। हेमंत कुमार ने बहुत से गुमनाम फिल्मों में संगीत दिया
और फिल्म अनजान भी उन्ही में से एक फिल्म है। प्रदीप
कुमार और वैजयंतीमाला की जोड़ी की फिल्म नागिन में
सफल होता देख कर शायद निर्देशक एम् सादिक या फिल्म के
निर्माता ने सोचा होगा कि १९५४ की फिल्म नागिन की तरह ही
इस फिल्म को भी सफलता मिलेगी, सो संगीत निर्देशक भी
हेमंत कुमार को बना दिया गया। ऐसा हुआ नहीं और फिल्म
प्रसिद्धि से अनजान रह गयी। फिल्म नागिन का निर्देशन
नदलाल जसवंतलाल ने किया था। फिल्म अनजान का संगीत
जरूर सुनने लायक है। ये गीत सुनिए लता मंगेशकर का गाया हुआ।
गुइयाँ शब्द वाला एक गीत राजेंद्र कृष्ण की कलम से। आगे मिलेंगे
कुछ और गीत गुइयाँ वाले।



गीत के बोल:


हो हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो हो
हो हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हो हो
सावन की आई है बहार
झूले पे मेरा प्यार सखी
झूलना झुलाए जा, ओ ओ ओ ओ
सावन की आई है बहार
सावन की आई है बहार
झूले पे मेरा प्यार सखी
झूलना झुलाए जा, हो ओ ओ ओ
हो सावन की आई है बहार
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ

झूलना में झूलूँ गियाँ सब कुछ भूल के
झूलना में झूलूँ गियाँ सब कुछ भूल के
कभी गोरी देख ज़रा पिया संग झूल के
कभी गोरी देख ज़रा पिया संग झूल के
पिया संग झूल के, ओ ओ ओ
नैनों में आएगा खुमार
झूलूँगी सौ सौ बार सखी
झूलना झुलाए जा, ओ ओ ओ ओ
सावन की आई है बहार
झूले पे मेरा प्यार सखी
झूलना झुलाए जा, ओ ओ ओ ओ
हो सावन की आई है बहार
आ आ आ आ आ, आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ, आ आ आ आ आ

गोरी गोरी बैयों का झूलना बनाऊं मैं
गोरी गोरी बैयों का झूलना बनाऊं मैं
नज़रों की डोर डालूँ सैयां को झुलाऊँ मैं
नज़रों की डोर डालूँ सैयां को झुलाऊँ मैं
सैयां को झुलाऊं मैं, ओ ओ ओ ओ
मिलजुल के गायेंगे मल्हार
झूमेगा मेरा प्यार सखी
झुलना झुलाए जा, ओ ओ ओ ओ
सावन की आई है बहार
झूले पे मेरा प्यार सखी
झूलना झुलाये जा, ओ ओ ओ ओ
सावन की आई है बहार
झूले पे मेरा प्यार सखी
झुलना झुलाए जा, ओ ओ ओ ओ
सावन की आई है बहार

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