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Sep 7, 2017

ये ज़ुल्फ़ कैसी है ज़ंजीर जैसी है-पिया का घर १९७४

ज़ंजीर की डिज़ाईन वाली जुल्फें हमने कई विलायती कलाकारों
और खिलाडियों की देखी है. बालों को बाँट कर उसकी ढेर सारी
चोटियाँ बना दी जाती हैं. आपको गर याद हो डेविस कप में
फ्रांस के एक खिलाडी की जुल्फें ऐसी ही थी. उस खिलाडी का
नाम है यानिक नोहा. यानिक नोहा ने सन १९८३ का फ्रेंच
ओपन खिताब जीता था. गौरतलब है टेनिस से रिटायर होने
के बाद यानिक एक गायक बन गए हैं और लोकप्रिय हैं.

अब गीतकार ने ये किसी विलायती की फोटो देख कर गीत
लिखा या फिर तुलना के लिए इस शब्द का प्रयोग किया वो
तो आपको गीत सुनकर ही समझ आएगा. इसे हम मैट्रीमोनियल
सोंग कह सकते हैं.




गीत के बोल:

ये ज़ुल्फ़ कैसी है ज़ंजीर जैसी है
ये ज़ुल्फ़ कैसी है ज़ंजीर जैसी है
वो कैसी होगी जिसकी तस्वीर ऐसी है
ये आँख कैसी है हाय तीर जैसी है
ये आँख कैसी है हाय तीर जैसी है
वो कैसा होगा जिसकी तस्वीर ऐसी है
ये ज़ुल्फ़ कैसी है ज़ंजीर जैसी है
वो कैसी होगी जिसकी तस्वीर ऐसी है
वो कैसा होगा जिसकी तस्वीर ऐसी है

तुम तो मुझे पसंद हो क्या मैं तुम्हें पसंद हूँ
क्या तुम रज़ामंद हो मैं तो रज़ामंद हूँ
बोलो चुप क्यों हो
मैं तुमसे क्या बोलूँ तक़दीर कैसी है
मैं तुमसे क्या बोलूँ तक़दीर कैसी है
वो कैसा होगा जिसकी तस्वीर ऐसी है

ये ज़ुल्फ़ कैसी है ज़ंजीर जैसी है
वो कैसी होगी जिसकी तस्वीर ऐसी है

घूँघट निकाल के पिया बैठूँगी मैं तो आज से
देखो न इस तरह मुझे मर जाऊँगी मैं लाज से
चलो उधर देखो
ये ख़्वाब कैसा है ताबीर कैसी है
ये ख़्वाब कैसा है ताबीर कैसी है
वो कैसी होगी जिसकी तस्वीर ऐसी है

ये आँख कैसी है हाय तीर जैसी है
वो कैसा होगा जिसकी तस्वीर ऐसी है
वो कैसी होगी जिसकी तस्वीर ऐसी है
……………………………………………..
Ye zulf kaisi hai-Piya ka ghar 1974

Artists: Anil Dhawan, Jaya Bhaduri

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May 16, 2015

ये जीवन है इस जीवन का-पिया का घर १९७२

फिलोसॉफी और प्रेम की मिलावट वाला एक गीत प्रस्तुत है
आपके लिए फिल्म पिया का घर से. दोनों तत्व ज़रूरी हैं
जीवन के लिए. प्रेम सबसे पहले तो अपने आप से करो, तब
दूसरों से करने लायक बनोगे. अपने आप की कद्र करो, तब
दूसरों की करोगे.

बदलाव समय की मांग है, उसे स्वीकारो. देखने का नजरिया
बदलो. इन्द्रधनुष के सभी रंगो का आनंद लो. शायद यही
कुछ कहता सा सुनाई देता है गीत. इम्तेहान के गीत “ये
जीवन है” और इस गीत को साथ साथ सुन लो, दवाई के
साथ विटामिन की खुराक पूरी हो जायेगी. चाऊमिन शब्द
जब मैंने पहली बार सुना था तो कसम से मुझे ऐसा लगा
था जैसे विटामिन का कोई भाई आ गया हो.  





गीत के बोल:

ये जीवन है, इस जीवन का
यही है, यही है, यही है रंगरूप
थोड़े ग़म हैं, थोड़ी खुशियाँ
यही है, यही है, यही है छाँव धूप

ये ना सोचो, इसमें अपनी, हार है के जीत है
उसे अपना लो जो भी, जीवन की रीत है
ये जिद छोड़ो, यूं ना तोड़ो, हर पल इक दर्पण है
ये जीवन है, इस जीवन का...

धन से ना दुनिया से, घर से ना द्वार से
साँसों की डोर बंधी है, प्रीतम के प्यार से
दुनिया छूटे, पर ना टूटे, ये कैसा बंधन है

ये जीवन है, इस जीवन का
यही है, यही है, यही है रंगरूप
थोड़े ग़म हैं, थोड़ी खुशियाँ
यही है, यही है, यही है छाँव धूप
……………………………………….
Ye jeevan hai-Piya ka ghar 1972

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