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Jun 23, 2020

भोर आई गया अँधियारा-बावर्ची १९७२

हिंदी सिनेमा ने बेहद प्रतिभाशाली कलाकार भी देखे हैं. हम
ऐसे कलाकारों से प्रेरणा ले सकते हैं. ऐसे अधिकाँश कलाकार
अपने सभी कामों को पूरी लगन और समर्पण से करते दिखे.
नायक नायिका कुछ भी उछल-कूद करते रहें ये अपनी छाप
छोड़ते चले.

आज बहुमुखी प्रतिभा के स्वामी हरिन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय की
पुण्यतिथि है. साहित्य, शिक्षा और सिनेमा में इनके अमूल्य
योगदान को हमेशा याद रखा जायेगा. पहली लोकसभा में ये
विजयवाड़ा संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे. साहित्य और शिक्षा में
योगदान के लिए इन्हें भारत सरकार द्वारा १९७३ में पद्मभूषण
सम्मान दिया गया.

१९६२ की फिल्म साहब बीबी और गुलाम इनकी पहली हिंदी
फिल्म थी. इसके बाद वे तेरे घर के सामने फिल्म में दिखाई
दिए जिसमें उन्होंने नायिका के पिता की भूमिका निभाई. ८८
की नसीरुद्दीन शाह अभिनीत फिल्म मालामाल उनकी आखिरी
हिंदी फिल्म रही.

फिल्म जूली के लिए उनका लिखा गीत-माय हार्ट इस बीटिंग
अपने समय में बेहद लोकप्रिय हुआ था. हरिन्द्रनाथ संगीत के
भी जानकार थे और कम्पोज़िंग में भी सक्षम थे.

आज सुनते हैं फिल्म बावर्ची का एक गीत जिसमें फिल्म की
लगभग पूरी स्टारकास्ट मौजूद है. कैफी आज़मी का गीत है
और मदन मोहन का संगीत.

बॉलीवुड में आज जिन लोगों का जन्मदिन है वे हैं-राज बब्बर,
गुज़रे ज़माने के अभिनेता रहमान, और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक
जब्बार पटेल. इसके अलावा क्रिकेट के क्षेत्र में वेट इंडीज़ के
प्रसिद्ध खिलाडी रामनरेश सरवन.



गीत के बोल:

भोर आई गया अँधियारा
भोर आई गया अँधियारा
सारे जग में हुआ उजियारा
नाचे झूमे ये मन मतवाला मतवाला
भोर आई गया अँधियारा
गया अँधियारा गया अँधियारा

भोर आई गया अँधियारा
भोर आई गया अँधियारा
सारे जग में हुआ उजियारा
नाचे झूमे ये मन मतवाला मतवाला
भोर आई गया अँधियारा
गया अँधियारा गया अँधियारा
…………………………………………….
Bhor aayi gaya andhiyara-Bawarchi 1972

Artists: Rajesh Khanna, Master Raju, Jaya Bhaduri, Asrani, Various

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Apr 19, 2020

पुकारो मुझे फिर पुकारो-बुनियाद १९७२

टेलिविज़न के सोप ऑपेरा बुनियाद के बहुत पहले सन १९७२
में एक फिल्म आई थी-बुनियाद. फिल्म का नाम बहुत कम
दर्शकों को याद है. साल भर में इतनी फ़िल्में आती हैं-क्या
देखें और क्या ना देखें ये समस्या पहले भी थी और अब भी
है. अब तो सास बहू के ड्रामे के अलावा वेब सीरीज़ का भी
सरदर्द है.

यही हाल रहा तो थोड़े दिन में डबलरोटी और पिज़ा के ऊपर
भी फ़िल्मी सितारे ठुमके लगाते दिखलाई देंगे. लॉक डाउन
में भी अपना चेहरा और शरीर जनता को दिखलाने का लोभ
संवरण नहीं हो पा रहा है कईयों से. चड्डी बनियान और
पजामा पजामी में आड़े टेड़े स्टेप्स दिखा दिखा के जनता को
लुभाने की कोशिश कर रहे हैं. इनमें से कुछ ही हैं जो आम
जनता की मदद के लिए आगे आये हैं और कुछ सार्थक कर
रहे हैं.

मीडिया की चों चों भौं भौं का सरदर्द, एक ही टॉपिक पर दिन
भर घिसा हुआ रिकॉर्ड बजाते न्यूज़ एंकर. इन सबसे फुर्सत
मिल तो सोशल मीडिया का सरदर्द. पहले सरदर्द लिमिट में
था तो सिर्फ एक सेरिडान और सरदर्द से आराम मिल जाता
था. अब तो पूरा दवाई का पत्ता खाने का समय आ गया है.

सुनते हैं आनंद बक्षी का लिखा हुआ गीत जिसकी धुन तैयार
की है लक्ष्मी प्यारे ने है और इसे गाया है किशोर कुमार संग
लता मंगेशकर ने.



गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ ओ
ओ ओ ओ ओ ओ
पुकारो मुझे फिर पुकारो
पुकारो मुझे फिर पुकारो
मेरे दिल के आईने में ज़ुल्फ़ें आज सँवारो
पुकारो मुझे फिर पुकारो
पुकारो मुझे फिर पुकारो
मेरी ज़ुल्फ़ों के साये में आज की रात गुज़ारो
पुकारो मुझे फिर पुकारो

गुलशन में ऐसी छाँव ऐसी धूप नहीं
गुलशन में ऐसी छाँव ऐसी धूप नहीं
कलियों में ऐसा रंग ऐसा रूप नहीं
जो भी मेरे यार सा फूल कोई ले के आओ बहारों
पुकारो मुझे फिर पुकारो

चाँदनी की इस अँधेरे में ज़रूरत नहीं
चाँदनी की इस अँधेरे में ज़रूरत नहीं
कुछ सोचें कुछ देखें हमको फ़ुरसत नहीं
जाओ कहीं जा के छुप जाओ आज की रात सितारों
पुकारो

अपने ख़्वाबों की जो दुनिया बसायेंगे हम
अपने ख़्वाबों की जो दुनिया बसायेंगे हम
आसमानों से भी आगे निकल जायेंगे हम
साथ हमारे तुम चलना ए रंगीन नज़ारो

पुकारो मुझे फिर पुकारो
पुकारो मुझे फिर पुकारो……………………………………………………..
Pukaro mujhe phir pukaro-Buniyad 1972

Artists:

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Feb 11, 2020

कितने क़िस्म की बेईमानी-बेईमान १९७२

फिल्म बेईमान के शीर्षक गीत का दूसरा संस्करण
पेश है. इसमें नायक एक एक कर के बेईमानी की
किस्में गिनवा रहा है. जो कुछ पहले संस्करण में
बाकी बच गया था वो इस संस्करण की पंक्तियों में
शामिल कर लिया है गीतकार ने.

वर्मा मलिक ने इस प्रकार के गीत काफी लिखे हैं
मगर प्रसिद्धि दूसरे गीतकारों को ज्यादा मिली है
जिन्होंने भ्रष्टाचार, सामाजिक समस्याओं और इतर
विषयों पर लिखा है.

मुकेश की आवाज़ है और संगीत शंकर जयकिशन का.



गीत के बोल:

कितने किस्म की बेईमानी कितने किस्म के बेईमान
एक एक गिनवाता हूँ ज़रा सुनना दे कर ध्यान
राईट देट्स राईट
न इज्ज़त की चिंता न फिकर कोई अपमान की
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
न इज्ज़त की चिंता न फिकर कोई अपमान की
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो

बात के झूठे नज़र के खोटे दिल के बड़े कठोर
बड़ा हैरान हुआ जब देखे बैठे चारों ओर
मुझे देख इस महफ़िल में इसलिए मचायें शोर
के बड़े बड़े चोरों में आ गया कहाँ से छोटा चोर
जो कहना है वो कह दूं परवाह नहीं इस अपमान की
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो

इस दुनिया में देखे हैं कुछ ऐसे भी इंसान
खुद को देवता समझें और दूजे को बेईमान
आज फोड़ दूं सबके भांडे टूट जाए अभिमान
अपने अपने दिल से पूछो कौन है ईमान
सूरज सी दिशा दी है पर सूरत है शैतान की
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो

बड़ी बेईमानी करते कुछ बड़े घरों के जाये
बड़े नाम की चादर से चेहरे को रहे छुपाये
औरों पे वो दोष लगा कर अपने पाप छुपाये
उसको मान मिले जग में जो बेईमान बन जाये
उस बाप को खबर नहीं है अरे ऐसी नेक संतान की
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो

अरे न इज्ज़त की चिंता न फिकर कोई अपमान की
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
……………………………………………
Kitne kism ki beimaani-Beimaan 1972

Artist: Manoj Kumar, Rakhi

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Jan 10, 2020

सुन चम्पा सुन तारा-अपना देश १९७२

अपना देश सन १९७२ की फिल्म है. अपने देश के
आज के हालात देख के इस फिल्म की याद आती है.

समय समय पर बॉलीवुड में उद्देश्यपूर्ण, सार्थक और
सन्देश देने वाली फिल्मों का निर्माण हुआ है. इनका
कुछ प्रतिशत जनता पर असर तो होता ही है. इसे
यूँ कहें, फिल्म के किस हिस्से से किस व्यक्ति पर
कैसा असर होगा ये अलग अलग अनुभव में आते
हैं.

गीत में चुनाव के बाद के जश्न का माहौल है. इसे
लिखा है आनंद बक्षी ने और इसकी धुन तैयार की
है आनंद बक्षी ने. लता मंगेशकर और किशोर कुमार
ने इसे गाया है. ये बेहद लोकप्रिय युगल गीत है.




गीत के बोल:

सुन चम्पा सुन तारा कोई जीता कोई हारा
अरे बड़ा मज़ा आये हाय सुनो मेरी बात
झूमें नाचें गायें चलो आज सारी रात
सुन चम्पा सुन तारा कोई जीता कोई हारा
अरे बड़ा मज़ा आये हाय सुनो मेरी बात
झूमें नाचें गायें चलो आज सारी रात
सुन री चम्पा सुन तारा
वो मारा

सच के गले में पड़ी माला
झूठों का तो मुँह हुआ काला हो ओ
सच के गले में पड़ी माला
झूठों का तो मुँह हुआ काला
कैसे हुआ ऐसे हुआ
कैसे हुआ ऐसे हुआ हैरान है जग सारा

सुन चम्पा सुन तारा कोई जीता कोई हारा
अरे बड़ा मज़ा आये हाय सुनो मेरी बात
झूमें नाचें गायें चलो आज सारी रात
सुन चम्पा सुन तारा
वो मारा

बन्दा हूँ मैं तो सीधा सादा
करता हूँ तुमसे मैं ये वादा हो हो
बन्दा हूँ मैं तो सीधा सादा
करता हूँ तुमसे मैं ये वादा
आज से होगा वो दुख मेरा
आज से होगा वो दुख मेरा दुख है जो तुम्हारा

सुन चम्पा सुन तारा कोई जीता कोई हारा
अरे बड़ा मज़ा आये हाय सुनो मेरी बात
झूमें नाचें गायें चलो आज सारी रात
सुन री चम्पा सुन तारा
वो मारा

छम छम जो बाजे मेरी पायल
दिल दुश्मनों के हुये घायल हो ओ
छम छम जो बाजे मेरी पायल
दिल दुश्मनों के हुये घायल
इस जीवन पे सबका हक़ है
इस जीवन पे सबका हक़ है अपना है ये नारा

सुन चम्पा सुन तारा कोई जीता कोई हारा
अरे बड़ा मज़ा आये हाय सुनो मेरी बात
झूमें नाचें गायें चलो आज सारी रात
सुन चम्पा सुन तारा
सुन चम्पा सुन तारा कोई जीता कोई हारा
अरे बड़ा मज़ा आये हाय सुनो मेरी बात
झूमें नाचें गायें चलो आज सारी रात
सुन चम्पा सुन तारा
वो मारा
…………………………………………………
Sun champa sun tara-Apna Desh 1972

Artists: Mumtaz, Rajesh Khanna

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Nov 3, 2019

पतला पतला रेशमी कुरता-बेईमान १९७२

मनोज कुमार की फिल्मों मों आपको लड़कियों के प्रकार
और उनके ऊपर इतर जानकारी वाले गीत ज़रूर मिलेंगे.
एक गीत है फिल्म पहचान में जिसे वर्मा मलिक ने लिखा
है और एक ये गीत है फिल्म बेईमान में संयोग से इसे
भी वर्मा मलिक ने लिखा है. दोनों गीतों के संगीतकार भी
वही हैं-शंकर जयकिशन.

बेईमान के दो गीतों में कपड़ों की काफी सारी वेराइटी की
जानकारी हो जाती है. एक आप सुन चुके हैं दूसरा पेश
है जो रेशम को समर्पित है. इसमें पजामा, मामा और
पनामा सिगरेट का हंगामा है.

इसे गाया है आशा भोंसले संग महेंद्र कपूर ने. इस गीत
में हास्य की थोड़ी मात्रा है बोरियत के साथ. हो सकता है
ये गीत उस समय की जनता को लवली, स्वीट और जो
भी आप सोच सकते हैं लगता रहा होगा.



गीत के बोल:

पतला पतला रेशमी कुरता चूड़ीदार पजामा
पतला पतला रेशमी कुरता चूड़ीदार पजामा
एक ज़ुल्फ़ के छः टुकड़े ये देख के मचे हंगामा
लुट गए मामा लुट गए मामा
लंबे कलमी बाल आवारा पैंट का बना पजामा
लंबे कलमी बाल आवारा पैंट का बना पजामा
पान तम्बाखू वाला खा कर सिगरेट पिए पनामा
लुट गए मामा लुट गए मामा

पीली बिंदी पीले बुँदे नाक में पीली नथनी
पीली बिंदी पीले बुँदे नाक में पीली नथनी
टोकरी जैसा जूडा और जूडे से चोटी निकली
जूडे से चोटी निकली
टोकरी भी अब फैशन बन गयी मर गए गंगा रामा
एक ज़ुल्फ़ के छः टुकड़े ये देख के मचे हंगामा
लुट गए मामा लुट गए मामा

खुली सड़क पर सीटी मारे जाते देख हसीना
खुली सड़क पर सीटी मारे जाते देख हसीना
बेशर्मों का लीडर बन के चले तान के सीना
चले तान के सीना
ये भी हमारा फैन बना है देखो हीर का मामा
पान तम्बाखू वाला खा कर सिगरेट पिए पनामा
लुट गए मामामामा लुट गए मामा

आओ कमिटी वालों लगाओ इनपे टैक्स और चुंगी
आओ कमिटी वालों लगाओ इनपे टैक्स और चुंगी
साड़ी पेटीकोट के ऊपर कब्ज़ा कर गयी लुंगी
अरे कब्ज़ा कर गयी लुंगी
तौबा तौबा आज की छोरी बन गयी एक ड्रामा
एक ज़ुल्फ़ के छः टुकड़े ये देख के मचे हंगामा
लुट गए मामा लुट गए मामा

बापू करे कमाई बेटा करता सत्यानास
बापू करे कमाई बेटा करता सत्यानास
चार साल में पास है करता बच्चा एक क्लास
देखो करता एक क्लास
कॉलेज की कॉपी में देखो लिखे मोहब्बतनामा
पान तम्बाखू वाला खा कर सिगरेट पिए पनामा
लुट गए मामा लुट गए मामा

कमर है हलवे कद्दू जैसी आओ दुवायें मांगें
कमर है हलवे कद्दू जैसी आओ दुवायें मांगें
ऐसी लगती जैसे लगीं हो डबल रोटी को टांगें
अरे डबल रोटी को टांगें
ढूंढ के लाओ इसके लिए जो पहलवान हो गामा
एक ज़ुल्फ़ के छः टुकड़े ये देख के मचे हंगामा
लुट गए मामा लुट गए मामा

सन्यासी ने फेर उस्तरा पहन लिया है कच्छा
सन्यासी ने फेर उस्तरा पहन लिया है कच्छा
लगता कुर्सी पे बैठा है ये गेंडे का बच्चा
ये गेंडे का बच्चा
ये भी प्यार के पेंच लड़ाये वाह रे भक्त सुदामा
पान तम्बाखू वाला खा कर सिगरेट पिए पनामा
लुट गए मामा लुट गए मामा

मैं हूँ तेरा आशिक ये सारी दुनिया पहचाने
क्यूँ ठीक है जवाब तो दे
अरे मैं हूँ तेरा आशिक ये सारी दुनिया पहचाने
पर अंदर वाली बात जो है वो मैं जानूं तू जाने
सच हैं ना बोलती क्यूँ नहीं वो मैं जानूं तू जाने
अरे दुनिया वाले क्या जाने ये तेरा मेरा ड्रामा
एक ज़ुल्फ़ के छः टुकड़े ये देख के मचा हंगामा
लुट गए मामा लुट गए मामा
ओ लुट गए मामा लुट गए मामा
लुट गए मामा हाँ लुट गए मामा
हो लुट गए मामा लुट गए मामा
……………………………………………..
Patla patla rehmi kurta-Beimaan 1972

Artists: Manoj Kumar, Rakhi

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Aug 13, 2019

नींद चुराये चैन चुराये डाका डाले-अनुराग १९७२

आनंद बक्षी की कलम में जादुई असर ज़रूर था. इसके चलते
उन्होंने कई बढ़िया गीत रच डाले. कान्हा के बारे में अक्सर
चोरी शब्द ही चलन में है. बक्षी ने एक कदम आगे बढते हुए
ठगी, नकबजनी, लूट जैसे शब्दों को छोड़ के सीधे डाका पर
अपग्रेड कर दिया और ऐसा किया कि कुछ भी अटपटा नहीं
लगता. सहज गीत लगता है ये. धुन एस डी बर्मन की है.

फिल्म अनुराग का ये गीत आज हमने विशेष रूप से इसलिए
चुना है क्यूंकि अनुराग जी कई दिन से इस ब्लॉग पर प्रकट
नहीं हुए हैं. माखनचोर कृष्ण कन्हैया की तरह वो भी थोड़ी
सी आंखमिचोली खेल लेते हैं.

गीत में आपको युवा मौसमी चटर्जी, विनोद मेहरा और कुछ
बच्चों समेत अशोक कुमार दिखलाई देंगे. गीत में गुज़रे ज़माने
की अभिनेत्रियां नूतन और अनीता गुहा भी दिखलाई देंगे.



गीत के बोल:

नींद चुराये चैन चुराये डाका डाले तेरी बंसी
नींद चुराये चैन चुराये डाका डाले तेरी बंसी
अरे दिन दहाड़े
अरे दिन दहाड़े चोरी करे रात भर जगाये
डाका डाले तेरी बंसी
हो नींद चुराये चैन चुराये डाका डाले तेरी बंसी

मन में लगे ऐसे अगन जैसे चमके बिजुरिया बादल में
मन में लगे ऐसे अगन जैसे चमके बिजुरिया बादल में
चुपके कभी ले जाऊंगी तेरी बंसी छुपा के आँचल में
काहे शाम ढाले
काहे शाम ढाले कदम तले मुझको बुलाए
डाका डाले तेरी बंसी

नींद चुराये चैन चुराये डाका डाले तेरी बंसी

समझी थी मैं नटखट है तू बस माखन चुराया करता है
समझी थी मैं नटखट है तू बस माखन चुराया करता है
दीवानी मैं ना जानी तू काहे पनघट पे आया करता है
मोहे लाज आये
मोहे लाज आये हाय नहीं बात कही जाए
डाका डाले तेरी बंसी

नींद चुराये चैन चुराये डाका डाले तेरी बंसी

बंसी की धुन सुन के पिया जिया मेरा कहीं खो जाता है
बंसी की धुन सुन के पिया जिया मेरा कहीं खो जाता है
मैं क्या कहूँ क्या ना कहूँ मोहे ना जाने क्या हो जाता है
गीत प्रीत भरे
गीत प्रीत भरे गाये सुध बुध बिसराए
डाका डाले तेरी बंसी

नींद चुराये चैन चुराये डाका डाले तेरी बंसी
अरे दिन दहाड़े चोरी करे रात भर जगाये
डाका डाले तेरी बंसी
ओ डाका डाले........
.....................................................................................
Neend churaye chain churaye daaka dale-Anurag 1972

Artists: Moushumi Chatterji, Vinod Mehra

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हमें याद कभी तुम कर लेना-अनोखा दान १९७२

नजरिया जिंदगी में काफी अहम भूमिका निभाता है. पोजिटिव
हो तो अमूमन अच्छा महसूस होगा. नेगेटिव हो तो सब कुछ
खराब सा लगेगा.

एक गीत सुनवाते हैं आपको फिल्म अनोखा दान से जो १९७२
की फिल्म है. गीत में याद करने के मौके का जिक्र है-रोता हुआ
सावन. सावन का जिक्र अक्सर खुशी का इज़हार करने के लिए
होता है. भीषण तपाने वाली गर्मी के उपरान्त वर्षा ऋतु आती है
तो सभी उसके स्वागत में जुट जाते हैं. नहीं जुटते तो जुटना
चाहिये-बिन पानी सब सून.

लता मंगेशकर ने इस गीत को गाया है सलिल चौधरी की तर्ज़
पर. फिल्म के गीतों में सबसे ज्यादा-मदभरी ये हवाएं बजता है.
ये कम सुना गया गीत है मगर सुनने लायक है.




गीत के बोल:

हमें याद कभी तुम कर लेना जब रोता हुआ सावन आये
हो बहार और राह में कोई फूल हाय मुरझाये
हमें याद कभी तुम कर लेना जब रोता हुआ सावन आये
हो बहार और राह में कोई फूल हाय मुरझाये
हमें याद कभी तुम कर लेना

वीरान सफ़र में जीवन के कब तक यूँ अकेले चलते पिया
वीरान सफ़र में जीवन के कब तक यूँ अकेले चलते पिया
लेकर हम ये आख़िर तेरे बिना हाय आस का बुझता सा दिया

हमें याद कभी तुम कर लेना जब रोता हुआ सावन आये
हो बहार और राह में कोई फूल हाय मुरझाये
हमें याद कभी तुम कर लेना

देते हैं दुआ फिर भी तुमको ख़ुशियों की उमर लग जाए तुम्हें
देते हैं दुआ फिर भी तुमको ख़ुशियों की उमर लग जाए तुम्हें
जो भी तुमको ग़म हों सारे बदले में यहाँ मिल जाएँ हमें

हमें याद कभी तुम कर लेना जब रोता हुआ सावन आये
हो बहार और राह में कोई फूल हाय मुरझाये
हमें याद कभी तुम कर लेना
………………………………………………………………………
Hamen yaad kabhi tum kar lena-Anokha Daan 1972

Artists: Anil Dhawan, Zahira

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Aug 10, 2019

खुश रहो साथियों-जिंदगी जिंदगी १९७२

खुशगवार पल और खुशनुमा एहसास की तलाश में हम
क्या क्या नहीं कर जाते हैं. खुशियों के पल जो सहजता
से प्राप्त होते हैं उनकी बात ही निराली है. ये कुछ पल
से लेकर घंटों दिनों तक हो सकते हैं. इन्हें याद कर के
भी मनुष्य खुश हो लेता है.    

फिल्म जिंदगी जिंदगी से एक युगल गीत सुनते हैं जिसे
किशोर और लता ने गाया है. आनंद बक्षी के बोल हैं आर
एस डी बर्मन का संगीत. 




गीत के बोल:

खुश रहो साथियों खुश रहो साथियों
तुम्हें छोड़ के हम चले
खुश रहो साथियों तुम्हें छोड़ के हम चले
तुम्हें छोड़ के हम चले हमें छोड़ के गम चले
खुश रहो साथियों तुम्हें छोड़ के हम चले
खुश रहो साथियों तुम्हें छोड़ के हम चले

मुझे तेरे दुःख ने सैयां कितना रुलाया है
मुझे तेरे प्रेम ने गोरी मौत से बचाया है
मुझे तेरे दुःख ने सैयां कितना रुलाया है
मुझे तेरे प्रेम ने गोरी मौत से बचाया है
बहते बहते मगर ये आज आंसू थम चले
खुश रहो साथियों तुम्हें छोड़ के हम चले
खुश रहो साथियों तुम्हें छोड़ के हम चले

तुम्हें हम नहीं भूलेंगे हमें तुम भुलाना ना
मिलेंगे कभी आशा के दीपक बुझाना ना
तुम्हें हम नहीं भूलेंगे हमें तुम भुलाना ना
मिलेंगे कभी आशा के दीपक बुझाना ना
हँसते हँसते तुम्हारी आँखें कर के नाम चले
खुश रहो साथियों तुम्हें छोड़ के हम चले
खुश रहो साथियों तुम्हें छोड़ के हम चले

गयी रे जुदाई आईं प्रेम की रतियाँ
गयी रे जुदाई गयी रे
गयी रे जुदाई आईं प्रेम की रतियाँ
किसी और के मुखड़े पे ठहरे न अँखियाँ
तेरे मुख पे सांवरिया मेरे नैना जम चले
खुश रहो साथियों तुम्हें छोड़ के हम चले
खुश रहो साथियों तुम्हें छोड़ के हम चले
तुम्हें छोड़ के हम चले हमें छोड़ के गम चले
खुश रहो साथियों तुम्हें छोड़ के हम चले
खुश रहो साथियों तुम्हें छोड़ के हम चले
तुम्हें छोड़ के हम चले
तुम्हें छोड़ के हम चले
.........................................................................
Khush raho sathiyon-Zindagi zindagi 1972

Artists: Sunil Dutt, Waheeda Rehman, Farida Jalal, Dev Mukherji

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Aug 7, 2019

जिंदगी ए जिंदगी-जिंदगी जिंदगी १९७२

जीवन की क्षणभंगुरता का आभास तब होता है जब कोई अपना
बिछड़ जाता है. ये ऐसे पल होते हैं जब व्यक्ति अपने जीवन की
सार्थकता को मापता है.

शरीर की मशीनरी चलाने के लिए तो अधिकाँश जीते हैं मगर वे
लोग जो दूसरों के लिए जीते हैं सही मायने में याद करने लायक
होते हैं. चाहे वो उनके जीवन काल में हो या उनके जाने के बाद,
उनके सृजनात्मक योगदान और सृष्टि के जीवों की सहायता सदा
याद रखी जाती है. परस्पर सम्बन्ध वाली इस सृष्ट में मानव ही
अक्सर अपना रोल और कर्तव्य भूल जाता है क्यूंकि उसके पास
सबसे अधिक बुद्धि है दूसरे जीवों की तुलना में. ज़रूरतमंद केवल
वही नहीं है जिसे पैसे की ज़रूरत है. क्या आपने कभी किसी के
लिए ऐसे कंधे बने हैं जिस पर सर टिका कर कोई अपना दुःख
हल्का कर सके.

प्रस्तुत है आनंद बक्षी का लिखा हुआ और सचिन देव बर्मन द्वारा
संगीतबद्ध और गाया हुआ गीत फिल्म जिंदगी जिंदगी से. बक्षी
के लिखे हुए जीवन दर्शन वाले गीतों में शायद इस गीत को समझ
पाना सबसे ज्यादा कठिन है.




गीत के बोल:

जिंदगी ए जिंदगी, जिंदगी तेरे हैं दो रूप
जिंदगी ए जिंदगी, जिंदगी तेरे हैं दो रूप
बीती हुई रातों की, बातों की तू छाया
छाया वो जो बनेगी धूप

कभी तेरी किरणें थी ठंडी ठंडी हाय रे
अब तू ही मेरे जी में आग लगाये
कभी तेरी किरणें थी ठंडी ठंडी हाय रे
अब तू ही मेरे जी में आग लगाये
चांदनी ए चांदनी, चांदनी तेरे हैं दो रूप
टूटे हुए सपनों की, अपनों की छाया
छाया वो जो बनेगी धूप

आते जाते पल क्या हैं समय के ये झूले हैं
बिछड़े साथी कभी याद आये कभी भूले हैं
आते जाते पल क्या हैं समय के ये झूले हैं
बिछड़े साथी कभी याद आये कभी भूले हैं
आदमी ए आदमी, आदमी तेरे हैं दो रूप
दुःख सुख के झूलों की, फूलों की तू छाया
छाया वो जो बनेगी धूप
छाया वो जो बनेगी धूप

कोई भूली हुई बात मुझे याद आई है
खुशी भी तू लायी थी ये आंसू भी तू लायी है
दिल्लगी ए दिल्लगी, दिल्लगी तेरे हैं दो रूप
कैसे कैसे वादों की, यादों की तू छाया
छाया वो जो बनेगी धूप
……………………………………………………………………
Zindagi ae zindagi-Titlesong 1972

Artist: Sunil Dutt

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Jun 16, 2019

कितने अटल थे तेरे इरादे १-एक बार मुस्कुरा दो १९७२

गानों में शब्दों के भाव और धुन के बीच सामंजस्य हमेशा हो ये
ज़रूरी नहीं है. हम अक्सर ऐसे गाने गुनगुनाते हैं जिनका अर्थ
अगर हम ध्यान से समझें तो शायद उन्हें गुनगुनाने में झिझक
सी महसूस हो. हिंदी सिनेमा के गीतों में फ्यूज़न और कंफ्यूज़न
के बीच सैंकडों प्रयोग हो चुके हैं और तकरीबन अधिकांश को
जनता स्वीकार कर चुकी है. संगीतमय आम के अचार बनाने की
विधि हो तो जनता उसे भी स्वीकार कर लेगी.

संगीतकार ओ पी नैयर ने अपने कैरियर में सबसे ज्यादा सेवाएं लीं
इन गीतकारों से – एस एच बिहारी और कमर जलालाबादी.. इनके
अलावा कभी कभार ही दूसरे गीतकारों का नाम नैयर के साथ जुड़ा.
शुरूआती दौर में साहिर और मजरूह ने भी उनके साथ काफी काम
किया.

एक गाना सुनवाते हैं आपको जो शत प्रतिशत फिल्म की सिचुएशन
के हिसाब से ही बनाया गया था मगर इसकी धुन आकर्षक है
इसलिए ये अपने ज़माने में खूब सुना गया और गुनगुनाया गया. आज
भी इसे हम कभी कभार सुन पाते हैं रेडियो पर.

कुक्कू, हेलन की परंपरा में आगे की पीढ़ी में एक नाम है फरयाल.
इस गीत में आप फरयाल को नाचते हुए देख सकते हैं अभिनेता
देव मुखर्जी के साथ. गीत में एक बात बड़ी अच्छी है-साधन यानि
कि फर्नीचर, सामान इत्यादि से सुख नहीं मिलता ये तो मन का एक
ऐसा पड़ाव है जिस पर पहुँच पाना और टिक पाना हर एक के लिए
संभव नहीं. पालतू कुत्ता साधनों में नहीं आता. वो एक जीव है और
मनुष्य से ज्यादा प्रिडिक्टेबल जीव. जब दो टांग वाला कुत्ता चार टांग
वाले को सहलाता है तो उसे शांति और सुख अवश्य ही प्राप्त होता है.



गीत के बोल:

कितने अटल थे तेरे इरादे याद तो कर तू वफ़ा के वादे
तूने कहा था खा कर कसमें सदा निभाएंगे प्यार की रस्में
तू औरों की क्यूँ हो गई तू हमारी थी जान से प्यारी थी
तेरे लिए मैंने दुनिया संवारी थी
तू औरों की क्यूँ हो गई

क्या ये तेरे सुख के साधन मेरी याद को भुला सकेंगे
मेरी याद जब नींद उड़ा देगी क्या ये तुझको सुला सकेंगे
हो क्या ये तुझको सुला सकेंगे
साधन में सुख होता नहीं है सुख जीवन की एक कला है
मुझसे ही छल किया ना तूने अपने को तूने आप छला है
तू औरों की क्यूँ हो गई तू हमारी थी जान से प्यारी थी
तेरे लिए मैंने दुनिया संवारी थी
तू औरों की क्यूँ हो गई

तेरे लिए मैं लाया बहारें तेरे लिए मैं जान पे खेला
तो दिल तूने राह न देखी छोड़ के चल दी मुझे अकेला
हो छोड़ के चल दी मुझे अकेला
तेरी जुदाई मेरी चिता है गम की चिता में मैं जल रहा हूँ
मन मेरा दहके मरघट जैसा अंगारों पे मैं चल रहा हूँ
तू औरों की क्यूँ हो गई
.................................................................................
Kitne atal the tere iraade-Ek baar muskura do 1972

Artists: Dev Mukherji, Faryal, Tanuja

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Sep 25, 2018

जाने जां ढूँढता फिर रहा-जवानी दीवानी १९७२

आज सुनते हैं सन १९७२ में रिलीज़ हुआ एक ज़बरदस्त
गीत जो आगे ज़बरदस्त हिट भी बन गया और आज भी
रेडियो वाले-नए और पुराने दोनों तरह के-इसको चाव से
बजाते हैं.

१९७२ की फिल्म जवानी दीवानी कई मामलों में अलग सी
फिल्म है. अनकन्वेंशनल रिश्तेदारी तो इसका यूनीक फीचर
है ही, ७० के दशक की शुरुआत के हिसाब से गानों में भी
नयापन है.

इसी गीत को लीजिए इसमें नायि़क वाले हिस्से की कुछ
ध्वनियाँ ऐसी है मानो भूतिया फिल्म का कोई किरदार गा
रहा हो. ये प्रभाव स्केल-वेरिएशन की वजह से निर्मित हुआ
और इसकी ब्यूटी बन गया.

आनंद बक्षी की रचना है और आर डी बर्मन का संगीत.
परदे वाले कलाकारों को आप पहचानते ही हैं. इसे चित्रहार
पर ही कई बार देख लिया गया है.

एक बात इमानदारी से बतलाइए इस गीत की एक पंक्ति-
दिल में देखा नहीं देखा सारा जहां आपके ध्यान में है?



गीत के बोल:

जाने जां ढूँढता फिर रहा हूँ तुम्हें रात दिन
मैं यहाँ से वहाँ
जाने जां ढूँढता फिर रहा हूँ तुम्हें रात दिन
मैं यहाँ से वहाँ
मुझको आवाज़ दो छुप गये हो सनम
तुम कहाँ मैं यहाँ
तुम कहाँ मैं यहाँ
जाने जां ढूँढता फिर रहा हूँ तुम्हें रात दिन
मैं यहाँ से वहाँ

ओ मेरे हमसफ़र प्यार की राह पर
साथ चलें हम मगर क्या खबर
ओ मेरे हमसफ़र हा प्यार की राह पर हा
साथ चलें हा हम मगर हा क्या खबर हा
रास्ते में कहीं रह गये हमनशीं
तुम कहाँ मैं यहाँ
तुम कहाँ मैं यहाँ  

जाने जां ढूँढती फिर रही हूँ तुम्हें रात दिन
मैं यहाँ से वहाँ
मुझको आवाज़ दो छुप गये हो सनम
तुम कहाँ मैं यहाँ
तुम कहाँ मैं यहाँ

दिल मचलने लगा यूँ ही ढलने लगा
रंग भरा प्यार का ये समा
दिल मचलने लगा हे यूँ ही ढलने लगा हे
रंग भरा हे प्यार का हो ये समा
हाथ ऐसे में बस छोड़ कर चल दिये
तुम कहाँ मैं यहाँ
तुम कहाँ मैं यहाँ

जाने जां ढूँढता फिर रहा हूँ तुम्हें रात दिन
मैं यहाँ से वहाँ

पास हो तुम खड़े मेरे दिल में छुपे
और मुझे कुछ पता न चला
पास हो तुम खड़े हा मेरे दिल में छुपे हा
और मुझे हा कुछ पता हा न चला हा
दिल में देखा नहीं देखा सारा जहां
तुम कहाँ मैं यहाँ
तुम कहाँ मैं यहाँ

जाने जां ढूँढता फिर रहा हूँ तुम्हें रात दिन
मैं यहाँ से वहाँ
मुझको आवाज़ दो छुप गये हो सनम
तुम कहाँ मैं यहाँ
तुम कहाँ मैं यहाँ
……………………………………………………..
Jaane jaan dhoondhta phir raha-Jawani Diwani 1972

Artists: Randhir Kapoor, Jaya Bhaduri

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Sep 22, 2018

रास्ते का पत्थर क़िस्मत ने मुझे-शीर्षक गीत १९७२

शीर्षक गीत या टाईटल गाने फिल्म की शान तो बढ़ाते
ही हैं इसके अलावा जब लचर कहानी, एक्टिंग के चलते
दर्शक फिल्म को भुला देता है तब ये दर्शक को फिर से
फिल्म का नाम याद दिलाने का काम भी करते हैं.

रास्ते का पत्थर फिल्म नायिकाओं और सहायक कलाकरों
के अभिनय के लिए जानी जाती है.

प्रस्तुत गीत को लिखा है आनंद बक्षी ने और इसकी धुन
तैयार की है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने. मुकेश न इसे गाया
है.




गीत के बोल:

रास्ते का पत्थर क़िस्मत ने मुझे बना दिया
जो रास्ते से गुज़रा एक ठोकर लगा गया
रास्ते का पत्थर क़िस्मत ने मुझे बना दिया

कितने घाव लगे हैं ये मत पूछो मेरे दिल पे
कितनी ठोकर खाई ना पहुँचा मंज़िल पे
कोई आगे फेंक गया तो कोई पीछे हटा गया
रास्ते का पत्थर क़िस्मत ने मुझे बना दिया

पहले क्या कर पाया क्या इसके बाद करूँगा मैं
जा री जा ऐ दुनिया क्या तुझको याद करूँगा मैं
दो दिन तेरी महफ़िल में क्या आया क्या गया
रास्ते का पत्थर क़िस्मत ने मुझे बना दिया
…………………………………………………….
Raaste ka patthar kismet ne-Titlesong 1972

Artist: Amitabh Bachchan

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Sep 9, 2018

तुम मेरी ज़िंदगी में-बॉम्बे टू गोवा १९७२

पंचम और राजेंद्र कृष्ण की जोड़ी ने फिल्म पड़ोसन
में धामल मचाया था. ये सिलसिला सन १९७२ की
फिल्म बॉम्बे टू गोवा में भी चला. इस फिल्म से
एक मधुर युगल गीत सुनते हैं.

लता और किशोर के गाये इस गीत को आपने कई
बार सुन लिया होगा मगर इस बार इसके बोल ध्यान
से सुनें आपको कुछ अनूठापन लगेगा. शब्द वही होते
हैं मगर उनकी जमावट सब अंतर पैदा करती है.

मैदा वही होता है मगर जलेबियां सभी से नहीं बना
करतीं. हमने मीठी चीज़ का उदाहरण देना था और
किसी सरल सिंपल चीज़ के साथ अतः जलेबी का
नाम लिया. चाहते तो हम डो-नट को भी याद कर
सकते थे.



गीत के बोल:

तुम मेरी ज़िंदगी में कुछ इस तरह से आये
भूला सा ख़्वाब जैसे सच हो के मुस्कराये
हो ओ ओ ओ तुम मेरी ज़िंदगी में हो हो
कुछ इस तरह से आये
हो ओ ओ ओ भूला सा ख़्वाब हो हो
जैसे सच हो के मुस्कराये

भूली बिसरी कितनी यादें आज गले मिलने आई हैं
अंजानी बाहों से चुन कर कलियाँ दामन में लाई हैं
इतने सुहाने सफ़र की कभी मंज़िल ना आने पाये

हो ओ ओ ओ ओ तुम मेरी ज़िंदगी में हो हो
कुछ इस तरह से आये
भूला सा ख़्वाब जैसे हूँ हूँ सच हो के मुस्कराये

रुकती बढ़ती दिल की धड़कन कहती है कितने अफ़साने
दिल के सागर कितने गहरे दिल ही समझे दिल ही जाने
आये समझ में ये राज़ तब जब उम्र बीत जाये

हो ओ ओ ओ तुम मेरी ज़िंदगी में हो हो
कुछ इस तरह से आये
हो ओ ओ ओ ओ भूला सा ख़्वाब हो हो
जैसे सच हो के मुस्कराये
………………………………………………
Tum meri zindagi mein-Bombay to Goa 1972

Artists:

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Jul 31, 2018

देखो जी रात को जुलम-बेईमान १९७२

सन १९७२ के फिल्म बेईमान में मनोज  कुमार के
साथ स्नेहलता नाम की नायिका हैं. फिल्म में नाज़िमा
ने मनोज कुमार की बहन की भूमिका निभाई है.

एक गीत सुनते हैं जिसमें नायिका को कुछ शिकायत है
अलग तरह की. सुनने पर ही पता चलेगा आपको.
ये गीत प्रेम चोपड़ा और स्नेहलता पर फिल्माया गया
है. वर्मा मलिक गीतकार हैं, शंकर जयकिशन संगीतकार
और आशा भोंसले गायिका हैं,





गीत के बोल:

देखो जी रात को जुलम हो गया
ऊँगली दबा के चूड़ी खनका के
मुझको जगा के जाने खुद सो गया
खुद सो गया
देखो जी रात को जुलम हो गया
ऊँगली दबा के हाय चूड़ी खनका के
मुझको जगा के जाने खुद सो गया
खुद सो गया
देखो जी रात को जुलम हो गया

जुल्फों को छेड़ा आँचल उड़ाया
बाहों को छुआ मुझको सताया
दे के भरोसे दे के दिलासे
दर्द उठा के आग लगा के
आँखें मिला के ये सितम हो गया
हाय हाय ऊँगली दबा के चूड़ी खनका के
मुझको जगा के जाने खुद सो गया
खुद सो गया
देखो जी रात को जुलम हो गया

मेरी है गलती मेरी नादानी
समझी ना तेरी मैं बेईमानी
ऐसा ना देखा चोर अनोखा
प्यार का वादा वादे में धोखा
पूछे बिना ही मेरा दिल ले लिया
ऊँगली दबा के चूड़ी खनका के
मुझको जगा के जाने खुद सो गया
खुद सो गया
देखो जी रात को जुलम हो गया

मेरी अदाएं हैं मस्तानी
मुझको तो चाहे दुनिया दीवानी
देखा जो उसको हुई हैरानी
बुड्ढे पे देखो आ गयी जवानी
बुड्ढे को तौबा तौबा ये क्या हो गया
अरे अरे ऊँगली दबा के चूड़ी खनका के
मुझको जगा के जाने खुद सो गया
खुद सो गया
देखो जी रात को जुलम हो गया
……………………………………………….
Dekho ji raat ko julam-Beimaan 1972

Artists: Prem Chopda, Snehlata, Manoj Kumar

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Jul 3, 2018

हम दो मस्त मलंग-बेईमान १९७२

महेंद्र कपूर और किशोर कुमार के गाये युगल गीत
शायद सबसे पहले ओ पी नैयर के संगीत निर्देशन
में सुनयी दिए. उसके बाद कल्याणजी आनंदजी के
संगीत निर्देशन में और फिर लक्ष्मी प्यारे ने भी कुछ
बनाये.

शंकर जयकिशन के संगीत में ये कोम्बिनेशन कम
दिखलाई देता है. प्रस्तुत गीत है फिल्म बेईमान से
जिसे लिखा है वर्मा मलिक ने. गीत में ढेर सारे नायक
और नायिकाओं के नाम है. मार्केटिंग का अच्छा फंडा
है ये. गीत में गायक महेंद्र कपूर का नाम भी आया
है. कामिनी के रोल में हैं स्नेहलता.



गीत के बोल:

हम दो मस्त मलंग पिलायें भर भर ठन्डे जाम
दस पैसे में पी के जाना काबुल के बादाम
हम दो मस्त मलंग पिलायें भर भर ठन्डे जाम
दस पैसे में पी के जाना काबुल के बादाम
ओ भैया ले ले सोटा ओ लाला दे दे घोटा
ओ खाला पी ले लोटा ओ खाला जी
हो जा मोटा

शीशे की डोली में लेटी देखो ये बदन की पेटी
ठंडी और मीठी है ऐसी गंगा जमुना के जल जैसी
बहू सास को अगर पिलाये सास कभी ना गर्मी खाए
मिल के पिए देवर भाभी घर में हो ना कभी खराबी
एक प्याले से वजन बढ़ेगा पूरे छै सौ ग्राम
दस पैसे में पी के जाना काबुल के बादाम

हम दो मस्त मलंग पिलायें भर भर ठन्डे जाम
दस पैसे में पी के जाना काबुल के बादाम
ओ भैया ले ले सोटा ओ लाला दे दे घोटा
ओ लाला पी ले लोटा ओ खाला जी
हो जा मोटा

हेमा मालिनी और शर्मिला पी की काम करे फुर्तीला
सायरा बानो राखी रेखा सबने इसको पी कर देखा
रगड़े राज कपूर राजेंद्रर राजेश खन्ना और धर्मेन्द्र
जाने मोहम्मद रफ़ी महेंदर पिए देव आनंद जीतेंद्र
रुस्तम-ए-हिंद बना दारा सिंह पी पी इसके जाम
दस पैसे में पी के जाना काबुल के बादाम
हम दो मस्त मलंग पिलायें भर भर ठन्डे जाम
दस पैसे में पी के जाना काबुल के बादाम
ओ भैया ले ले सोटा ओ लाला दे दे घोटा
ओ लाला पी ले लोटा ओ पी ले लोटा
हो जा मोटा

किधर गयी भाई खबर नहीं भाई
किधर गयी भाई खबर नहीं भाई
हे आँख मोटी पतली नाक लंबी गर्दन लाल फ्रॉक
कब से तुझको रहे पुकार खोल दे खिडकी दे दीदार
दे के जलवा मार इशारा खतम हो जाए झगडा सारा
समझ ले अब तू पकड़ी गयी है आ जा कामिनी
कहाँ छुपी रे
कहाँ गयी रे कामिनी
तेरी गली में आज हमें कोई और नहीं है काम
दस पैसे में पी के जाना काबुल के बादाम
हम दो मस्त मलंग पिलायें भर भर ठन्डे जाम
दस पैसे में पी के जाना काबुल के बादाम
ओ भैया ले ले सोटा ओ लाला दे दे घोटा
ओ लाला पी ले लोटा ओ खाला जी
हो जा मोटा
…………………………………………….
Hum do mast malang pilayen-Beimaan 1972

Artists: Pran, Manoj Kumar, Snehlata

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Jul 1, 2018

जय बोलो बेईमान की-बेईमान १९७२

ये बेईमान फिल्म का शीर्षक गीत है जो फिल्म में दो
संस्करण में उपलब्ध है. दोनों को मुकेश ने गाया है.
वर्मा मलिक गीतकार हैं, शंकर जयकिशन संगीतकार और
मुकेश ने इसे गाया है. अपने समय का चर्चित गीत है और
आज भी ये प्रासंगिक सा लगता है.

बेईमान शब्द की परिभाषा और व्याख्या की गयी गई गीत
में. इसे ट्यूटोरियल समझ लें.   



गीत के बोल:

न इज्ज़त की चिंता न फिकर कोई अपमान की
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
न इज्ज़त की चिंता न फिकर कोई अपमान की
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
जय बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो

बेईमान के बिना मात्रे होते अक्षर चार
ब बदकारी ई ईर्ष्या म से बने मक्कार
न सा नमक हराम समझो हो गए पूरे चार
चार गुनाह मिल जाएँ होता बेईमान तैयार
अरे उससे आँख मिलाये क्या हिम्मत है शैतान की
जय बोलो बेईमान की जय बोलो ओ बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो

भोला मुखडा उजले कपडे मन है काला काला
जिसकी दया से मंदिर चलते है आबाद शिवाला
नित मंदिर में पूजा करते दीपक जला जला कर
खुश करता भगवान को देखो घंटा बजा बजा कर
अंदर भगवान की जय हो और बाहर बेईमान की
जय बोलो बेईमान की जय बोलो ओ बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो

सेठ भी असली पेट भी असली नकली माल बनाये
ऊपर असली लेकिन अंदर नकली घी और चाय
पॉपलीं का नंबर बदल के टेरिलीन बनाये
या बेईमानी तेरा आसरा बोल के लूटता जाए
अरे अपने देश का कपडा और लगी है मुहर जापान की
जय बोलो बेईमान की जय बोलो ओ बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो

वृन्दावन के हम सन्यासी काम है चलते रहना
मौका है तकदीर बना लो हाथ न मलते रहना
हाथ की चूड़ी पाँव की पायल या हो गले का गहना
मार के मंतर दुगना कर दें माने अगर तू कहना
दो दिन पीछे खोलो लीला देखो भगवान की
जय बोलो भगवान की जय बोलो
जय बोलो भगवान की जय बोलो

पूरी सीट पर जटाजूट संग हैं महाराज पधारे
चिमटा चरस चिलम और चेले साथ साथ हैं सारे
टिकट ले कर भी गाडी में खड़े शरीफ बेचारे
और ये देखो भगवान के चमचे पड़े हैं पाँव पसारे
बिना टिकता यात्रा करते देखो तीर्थस्थान की
जय बोलो बेईमान की जय बोलो ओ बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
न इज्ज़त की चिंता न फिकर कोई अपमान की
जय बोलो बेईमान की जय बोलो ओ बोलो
जय बोलो बेईमान की जय बोलो
………………………………………………….
Jai bolo beimaan ki-Beimaan 1972

Artist: Manoj Kumar

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Jun 23, 2018

गया बचपन जो आई जवानी-आँखों आँखों में १९७२

हमने आपको एक गीत सुनवाया था फिर कब मिलोगी
का जिसे लता मंगेशकर ने गाया है. उसे सुन के जिस
गाने की गोल्डन, सिल्वर, प्लेटिनम यादें आती हैं वो
है सन १९७२ की फिल्म आँखों आँखों से लता का ही
गाया एक मस्त गीत.

वर्मा मालिक काफ़ी हाज़िर जवाब गीतकार और कवि
हैं. इस गीत में उनकी इस प्रतिभा का बढ़िया प्रदर्शन
है और उस पर नायिका की उछल कूद भी रोचक है.
कुछ गाने आपको ऐसे मिलेंगे जिसमें ऑडियो और
वीडियो के बीच डाल-डाल पात-पात का गेम चलता
दिखाई देता है. जवानी आते ही चुनरी पतंग हो गई
और ठिंगनी हीरोइन दो गज़ लंबी हो गयी एक साल
में. फ़िल्मी गीत है कुछ भी संभव है.

कहते हैं जब सितारे गर्दिश में होते हैं तो ऊँट पे बैठे
इंसान को भी कुत्ता काट लेता है. फिल्म संगम के
गीत बुड्ढा मिल गया की रिकॉर्डिंग के पीछे की कहानी
आपको कई जगह पढ़ने को मिल जायेगी. वो दौर था
१९६४ का और फिल्म थी राज कपूर की. इस गीत को,
मगर, शंकर जयकिशन ने लता से किस तरह गवाया
इसका विवरण कहीं नहीं मिलता.

राखी और राकेश रोशन के बीच प्रतिस्पर्धा चल रही
है इस गीत में- सबसे ज़्यादा गुलाबी कौन. गीत में
एक अर्ध-चम्पू सा युवक अपने बाप के साथ दिखाई
दे रहा है. ये एक्सरसाईज़ उसे फ्रसट्रेट करने के लिए
की जा रही है. उम्मीद है इस गाने के फिल्मांकन के
बाद फर्श काफ़ी साफ़ हो गया होगा और कपडे धुलाई
वाले ने साड़ी धोने से मन कर दिया होगा.

फिल्म का कहानी लेखन सचिन भौमिक और एहसान
रिज़वी का है.



गीत के बोल:

गया बचपन
गया बचपन जो आई जवानी
तो चुनरी पतंग हो गयी
गया बचपन जो आई जवानी
तो चुनरी पतंग हो गयी
ऐसी पलकों में
ऐसी पलकों में छाई जो मस्ती
तबियत मलंग हो गयी
ऐसी पलकों में छाई जो मस्ती
तबियत मलंग हो गयी
गया बचपन

हिरणी की चाल बस गई मेरी चाल में
हा हा हो हो हा हा हो हो
हिरणी की चाल बस गई मेरी चाल में
दो गज़लम्बी हो गयी एक साल में
दो गज़ लम्बी हो गयी एक साल में
दे दे बचपन
दे दे बचपन तू ले ले जवानी
जवानी से मैं तंग हो गयी
दे दे बचपन तू ले ले जवानी
जवानी से मैं तंग हो गयी

गया बचपन जो आई जवानी
तो चुनरी पतंग हो गयी
गया बचपन

देखा जो तुझको उठी ऐसी हलचल
ला ला ला ला ला ला ला ला
देखा जो तुझको उठी ऐसी हलचल
मुझसे लिपट गया बेसरम आँचल
मुझसे लिपट गया बेसरम आँचल
मेरे होठों की
मेरे होठों की सुर्खी मचल के
चुनरिया का रंग हो गयी
मेरे होठों की सुर्खी मचल के
चुनरिया का रंग हो गयी

गया बचपन जो आई जवानी
तो चुनरी पतंग हो गयी
गया बचपन

दिल वाले बैठे मेरी राहें घेर के
आ हा ओ हो आ हा ओ हो
दिलवाले बैठे मेरी रहे घेरते
रुक जायें वहीँ जहाँ देखूं मुँह फेर के
रुक जायें वहीँ जहाँ देखूं मुँह फेर के
किसी बाबू से अंग्रेजी बाबू से
किसी बाबू से मिल गई जो अंखियां
तो अँखियों की जंग हो गयी
किसी बाबू से मिल गई जो अंखियां
तो अँखियो की जंग हो गायी

गया बचपन जो आई जवानी
तो चुनरी पतंग हो गयी
ऐसी पलकों में छाई जो मस्ती
तबियत मलंग हो गयी
गया बचपन
…………………………………………….
Gaya bachpan jo aayi-Aankhon aankhon mein 1972

Artist: Rakhi, Rakesh Roshan

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Jun 22, 2018

आँखों आँखों में बात होने दो-शीर्षक गीत १९७२

शंकर जयकिशन के संगीत खज़ाने से एक और फ़ेमस
शीर्षक गीत पेश है आज आपके लिए.

फिल्म आँखों आँखों में का निर्देशन रघुनाथ झालानी
ने किया था. राकेश रोशन और राखी हीरो हीरोईन हैं.
फिल्म की स्टारकास्ट में और जो जाने पहचाने लोग
हैं वो इस प्रकार से हैं-तरुण बोस, अचला सचदेव,
टुनटुन, जयश्री टी, मीना टी, प्राण और दारा सिंह.

किसी ज़माने में मुझे ये गाना सुन के आर डी बर्मन
का गाना होने का भ्रम हुआ था.

गीत हसरत जयपुरी ने लिखा है किशोर और आशा की
आवाजें हैं.




गीत के बोल:

आँखों आँखों में बात होने दो
मुझको अपनी बाँहों में सोने दो
शादी हो जाने दो
शादी हो जायेगी
पहले मीठे सपनों में खोने दो
ना ना ना
आँखों आँखों में बात होने दो
मुझको अपनी बाँहों में सोने दो

मन का पंछी डोले
अच्छा
प्रीत की बोली बोले
बात बढ़ेगी आगे लेकिन हौल हौले
कब तक इंतज़ारी
उम्र पड़ी है सारी
दिल को ज़रा दिल में समोने दो

आँखों आँखों में बात होने दो
मुझको अपनी बाँहों में सोने दो

पहले भी बरखा थी
तो क्या हुआ
पर ऐसे न भली थी
अच्छा जी
फूल बनी है अब तू पहले बंद कली थी
दिल में आग लगी है
दिल की आग बुझेगी
मोती ज़रा नथ में पिरोने दो

आँखों आँखों में बात होने दो
मुझको अपनी बाँहों में सोने दो
शादी हो जाने दो
शादी हो जायेगी
पहले मीठे सपनों में खोने दो
आँखों आँखों में बात होने दो
मुझको अपनी बाँहों में सोने दो
……………………………………………
Aankhon aankhon mein baat hone do-Titlesong 1972

Artists: Rakesh Roshan, Rakhi

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May 22, 2018

कितने सपने कितने अरमाँ-मेरे जीवन साथी १९७२

राजेश खन्ना पर फिल्माया गया और किशोर कुमार का
गाया हुआ एक और गीत सुनते हैं फिल्म मेरे जीवन साथी
से. सन १९७२ की इस फिल्म में राजेश खन्ना और तनूजा
की जोड़ी है. इस जोड़ी को फिल्म हाथी मेरे साथी में भी
हमने देखा है. हाथी मेरे साथी सन १९७१ की फिल्म है
और काफी चर्चित रही.

गीत मजरूह सुल्तानपुरी की है जिसकी धुन आर डी बर्मन
ने बनाई है.




गीत के बोल:

कितने सपने कितने अरमाँ लाया हूँ मैं
देखो ना देखो ना
ऐ ऐ ऐ मेरा दिल भी इक महफ़िल है तुम भी कभी
आओ ना बैठो ना

तुमसे मिल के यूँ तो महक रहा हूँ
फिर भी मैं अकेला बहक रहा हूँ
फिर भी मैं अकेला बहक रहा हूँ
मेरी अँधेरी हैं तन्हाइयाँ
कोई दिया तुम जला दो ना

हे हे कितने सपने कितने अरमाँ लाया हूँ मैं
देखो ना देखो ना

हर तरफ़ जहाँ भी पलक थमीं है
प्यार की जहाँ में बहुत कमीं है
प्यार की जहाँ में बहुत कमीं है
बेरंग हैं ये मेरे रात दिन
तुम रंग कोई मिला दो ना
हे हे कितने सपने कितने अरमाँ लाया हूँ मैं
देखो ना देखो ना

कोई मुझ में देखे तो क्या नहीं है
हाँ वो ग़म में भीगी सदा नहीं है
हाँ वो ग़म में भीगी सदा नहीं है
मेरे तरानों में बढ़ जाए जो
तुम कोई धड़कन जगा दो ना

कितने सपने कितने अरमाँ लाया हूँ मैं
देखो ना देखो ना
……………………………………………………
Kitne sapne kitne armaan-Mere jeevan sathi 1972

Artist: Rajesh Khanna

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Apr 18, 2018

दो कदम तुम भी चलो-एक हसीना दो दीवाने १९७२

सन १९७२ की फिल्म एक हसीना दो दीवाने से मुकेश का
गाया एक बढ़िया गीत आपको सुनवाया था कुछ पोस्ट पहले.
अब सुनते हैं उसका युगल संस्करण. मुकेश और लता के
गाये इस गीत को लिखा है काफ़िल अज़र ने. धुन एक बार
फिर से कल्याणजी आनंदजी की है.

गीत जीतेंद्र और बबीता पर फिल्माया गया है.




गीत के बोल:

दो कदम तुम भी चलो दो कदम हम भी चलें
दो कदम तुम भी चलो दो कदम हम भी चलें
दो कदम तुम भी चलो दो कदम हम भी चलें
मंजिलें प्यार की
मंजिलें प्यार की आएँगी चलते चलते
दो कदम तुम भी चलो दो कदम हम भी चलें

कल तक तो अनजान थी हमारी रहे प्यार की
हमसे रहे प्यार की
लेकिन अपनी हो गए अब तो बाहें प्यार की
अब तो बाहें प्यार की
अब हमें ये जहाँ
अब हमें तो ये जहां देखेगा जलते जलते
दो कदम तुम भी चलो दो कदम हम भी चलें
दो कदम तुम भी चलो दो कदम हम भी चलें


मेरी जो भी सोच थी उसका ही तुम रूप हो
उसका ही तुम रूप हो
मैं हूँ नदिया तुम घटा मैं छाया तुम धूप हो
मैं छाया तुम धूप हो
प्यार अब ये हो जवान
प्यार अब ये हो जवान आँखों में पलते पलते
दो कदम तुम भी चलो दो कदम हम भी चलें
दो कदम तुम भी चलो दो कदम हम भी चलें

ऐसी ही एक शाम थी देखा था जब आपको
देखा था जब आपको
तुम इस ढलती शाम को रोको तो कुछ बात हो
रोको तो कुछ बात हो
जाने से जायेंगे
जान से जायेंगे शाम के ढलते ढलते
दो कदम तुम भी चलो दो कदम हम भी चलें
मंजिलें प्यार की
मंजिलें प्यार की आएँगी चलते चलते
दो कदम तुम भी चलो दो कदम हम भी चलें
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Do kadam tum bhi chalo-Ek haseena do deewane 1972

Artists: Babita, Jeetendra

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