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May 13, 2016

आ तुझे पलकों में छुपा लूं-पाताल नगरी १९६३

पुराने गीत सुनते सुनते मुकेश का एक गीत सामने आया जो
एक अनजान सी फिल्म पाताल नगरी में है. फिल्म का नाम
ही पाताल में पहुँच चुका हो तो उसका विवरण मिलना कठिन
हो जाता है. लगे हाथ गीत सुन भी लीजिए आज.

पाताल नगरी फिल्म का निर्माण मदन चित्रा नमक संस्था ने
किया था जिसने कुछ और फ़िल्में जैसे तिकडमबाज़, हावड़ा
एक्प्रेस, गोल्डन आइज़, बगदाद का चोर जैसी फ़िल्में बनाईं.
सन १९६१ में बनी हावड़ा एक्प्रेस में जो कलाकार थे- रंजन,
चित्रा, बी एम् व्यास, राम कुमार, जीवन कला इत्यादि उनमें
से एक राम कुमार ने पाताल नगरी का निर्देशन किया.

पाताल नगरी की स्टारकास्ट गौरतलब है- आज़ाद, चित्रा, हेलन,
बी एम व्यास, केसरी, किंग कोंग, राम कुमार इत्यादि. राम
कुमार बतौर कलाकार भी मौजूद हैं फिल्म में. बी ग्रेड फिल्मों
और पहलवानों का पुराना सम्बन्ध रहा है. वैसे उपयुक्त तो
ये होता पहलवानी वाली फिल्मों को “पी” ग्रेड का दर्ज़ा दे दिया
जाता. इस फिल्म में आज़ाद नाम के पहलवान मौजूद हैं.

मदन चित्रा की ज़्यादातर फिल्मों में बी एन बाली नाम के
संगीतकार का संगीत पाया जाता. बी एन बाली के संगीत
वाली वे फ़िल्में जिनका निर्देशन नानूभाई वकील ने किया था
शायद दर्शकों और फिल्म प्रेमियों को याद हों, बाकी मुझे नहीं
लगता आम संगीत प्रेमियों ने उनकी धुनें कभी सुनी भी होंगी.

गीत साजन बिहारी ने लिखा है जिनका नाम भी फिल्म के
नाम की तरह आपने शायद ही कभी सुना हो. गीत अलबत्ता
कर्णप्रिय है और बोल भी इसके टोटल फ़िल्मी हैं. गीत आज़ाद
और चित्रा पर फिल्माया गया है.
 



गीत के बोल:


आ तुझे पलकों में छुपा लूं
देखें ना सारा ज़माना एक मैं देखूं
हो जी बस मैं देखूं
आ तुझे पलकों में छुपा लूं
देखें ना सारा ज़माना एक मैं देखूं
ओ जी बस मैं देखूं

फूलों सी बाहें चाँद सा चेहरा
हुस्न ये तेरा ख्वाब सुनहरा
फूलों सी बाहें चाँद सा चेहरा
हुस्न ये तेरा ख्वाब सुनहरा
सामने अपने तुझको बिठा के
दिल ये कहे दीवाना एक मैं देखूं
ओ जी बस मैं देखूं

आ तुझे पलकों में छुपा लूं
देखें ना सारा ज़माना एक मैं देखूं
ओ जी बस मैं देखूं

ऑंखें नशीली बहकी अदाएं
तेरे इशारे जादू जगाएं
ऑंखें नशीली बहकी अदाएं
तेरे इशारे जादू जगाएं
शोख नज़र आँचल में छुपा कर
बिजली तेरा गिराना एक मैं देखूं
ओ जी बस मैं देखूं

आ तुझे पलकों में छुपा लूं
देखें ना सारा ज़माना एक मैं देखूं
ओ जी बस मैं देखूं
.........................................................................................
Aa tujhe palkon mein chhupa loon-Patal Nagri 1963

Artists-Azaad, Chitra

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Apr 6, 2016

कहने को बहुत कुछ था-सी एच आत्मा गैर फ़िल्मी गीत

फिल्म संगीत के साथ साथ गैर फ़िल्मी गीतों और ग़ज़लों
का सिलसिला भी पुराना है. सी एच आत्मा की आवाज़ ने
शायद सहगल की कमी को पूरा करने की कोशिश करी और
कुछ समय तक उन्हें फ़िल्मी गैर फ़िल्मी गाने गाने को
मिलते रहे. उनके गीत पचास के दशक में काफी सुने गए.
आज औंते हैं साजन बिहारी का लिखा और सी के चौहान
का संगीतबद्ध एक गीत.



गीत के बोल:

कहने को बहुत कुछ था
मगर कह नहीं पाये
कहने को बहुत कुछ था
मगर कह नहीं पाये
फिर सोचा के ख़ामोश रहें
रह नहीं पाये
कहने को बहुत कुछ था
मगर कह नहीं पाये

समझा ना मेरा ग़म कोई
इस बात का ग़म है
फिर भी मेरे दिल तुझको
वफ़ाओं की क़सम है
आँखों में हो आँसू भी
मगर बह नहीं पाये
कहने को बहुत कुछ था
मगर कह नहीं पाये

फूलों से चमन
आसमाँ तारों से भरा है
उम्मीद का दामन मेरा
ख़ारों से भरा है
क़िसमत ने सितम ऐसे किये
सह नहीं पाये

कहने को बहुत कुछ था
मगर कह नहीं पाये
फिर सोचा के ख़ामोश रहें
रह नहीं पाये
कहने को बहुत कुछ था
मगर कह नहीं पाये
……………………………………………………………….
Kehne ko bahut kuchh-CH Atma non film song

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